सनातन पंचांग — 27 अक्टूबर 2026
आज का मनोवैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक विचार
आलस्य पर विजय • मन की शांति • समृद्धि
आज की प्रेरणा: Prof. Jonathan W. Schooler — अमेरिका की University of California, Santa Barbara में मनोवैज्ञानिक एवं संज्ञानात्मक विज्ञान के शोधकर्ता, जो मन, ध्यान और मानवीय व्यवहार पर अध्ययन करते हैं।
English Thought (शोध से प्रेरित मौलिक विचार, शब्दशः उद्धरण नहीं):
“Do not let tomorrow steal the peace of today; begin with one small action, stay true to your purpose, and let steady effort build a meaningful life.”
हिंदी अनुवाद:
“कल के भरोसे आज की शांति न खोएँ; एक छोटे से कदम से शुरुआत करें, अपने उद्देश्य के प्रति दृढ़ रहें और निरंतर प्रयास से सार्थक जीवन बनाएँ।”
भावार्थ: काम को बार-बार टालने से मन पर बोझ बढ़ सकता है और जरूरी कार्य कठिन लगने लगते हैं। इसके विपरीत, छोटे कदम से शुरुआत करने पर काम आगे बढ़ाना आसान हो सकता है। वास्तविक समृद्धि केवल धन में नहीं, बल्कि समय का सदुपयोग करने, मन को संतुलित रखने और अपने कर्तव्यों को पूरा करने में भी है।
मनोवैज्ञानिक व्याख्या: 2026 में Behavioral Sciences में प्रकाशित Anusha Garg और Jonathan W. Schooler के अध्ययन में पाया गया कि किसी बड़े काम को छोटे हिस्सों में बाँटने से काम शुरू करने में मदद मिल सकती है। अध्ययन में छोटे हिस्सों में काम बाँटने के साथ प्रोत्साहन देने से प्रयास जारी रखने की इच्छा भी बढ़ी। यह एक विशिष्ट प्रयोग का परिणाम है, हर व्यक्ति या परिस्थिति के लिए निश्चित गारंटी नहीं।
भारतीय आध्यात्मिक संदर्भ: श्रीमद्भगवद्गीता का कर्मयोग हमें अपने कर्तव्य से विमुख न होने और कर्म पर ध्यान देने की प्रेरणा देता है। सनातन परंपरा में अनुशासन, आत्मसंयम और नियमित साधना का विशेष महत्त्व है। जैसे प्रतिदिन थोड़ी देर जप, ध्यान या स्वाध्याय करने से अभ्यास बनता है, वैसे ही बड़े कार्य को छोटे चरणों में पूरा करने से प्रगति का मार्ग बनता है।
आज का जीवनोपयोगी उदाहरण: यदि कोई जरूरी लेख लिखना है, घर का काम करना है या किसी महत्वपूर्ण निर्णय की तैयारी करनी है, तो पूरे काम के बारे में सोचकर परेशान न हों। पहले केवल दस मिनट दें, पहला छोटा चरण पूरा करें और फिर अगला कदम तय करें।
आज के लिए उत्तम सलाह: आज जिस काम को आप लगातार टाल रहे हैं, उसका सबसे छोटा और आसान चरण चुनें। फोन और दूसरी बाधाओं को कुछ समय के लिए दूर रखें और काम शुरू करें। पूर्णता की प्रतीक्षा में शुरुआत न रोकें—नियमित छोटा प्रयास भी प्रगति है।
आज का चिंतन: क्या मैं किसी कठिन काम को टालकर अपनी मानसिक शांति खो रहा हूँ, जबकि उसकी शुरुआत आज ही कर सकता हूँ?
आज का प्रेरक विचार: “शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन निरंतरता बड़े परिवर्तन का मार्ग खोलती है।”
आज का संकल्प: “मैं टालने के बजाय शुरुआत करूँगा, चिंता के बजाय कर्म चुनूँगा और धैर्य के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ूँगा।”
आज का सनातन संदेश: समय का सम्मान, कर्म में अनुशासन और मन में संतुलन—यही सार्थक जीवन की दिशा है।
बॉलीवुड एस्ट्रोवास्तू 9835071205
9431848786✓
साम्ब सदाशिव हरे हरे

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🚩 ~ सनातन पंचांग ~ 🚩
🌤️ दिनांक – 27 अक्टूबर 2026
🌤️ दिन – मंगलवार
🌤️ विक्रम संवत – 2083 (गुजरात अनुसार 2082)
🌤️ शक संवत – 1948
🌤️ अयन – दक्षिणायन
🌤️ ऋतु – हेमंत ऋतु
🌤️ मास – कार्तिक (गुजरात महाराष्ट्र अनुसार आश्विन)
🌤️ पक्ष – कृष्ण
🌤️ तिथि – प्रतिपदा सुबह 07:01 तक तत्पश्चात द्वितीया
🌤️ नक्षत्र – भरणी शाम 03:39 तक तत्पश्चात कृत्तिका
🌤️ योग – सिद्धि सुबह 10:53 तक तत्पश्चात व्यतीपात
🌤️राहुकाल – शाम 03:14 से शाम 04:40 तक
🌤️ सूर्योदय – 06:40
🌤️ सूर्यास्त – 06:04
👉 दिशाशूल – उत्तर दिशा में
🚩व्रत पर्व विवरण – व्यतीपात योग (सुबह 10:53 से 28 अक्टूबर सुबह 07:18 तक), द्वितीया क्षय तिथि
विशेष – प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)
🚩~सनातन पंचांग ~🚩
🌷 व्यतिपात योग 🌷
➡️ 27 अक्टूबर 2026 मंगलवार को सुबह 10:53 से 28 अक्टूबर सुबह 07:18 तक व्यतिपात योग है।
🙏🏻 व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।
🙏🏻 वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।
🌞 ~ सनातन पंचांग ~ 🌞
👉🏻 दीपक जलाकर पाए करोड़ों गुना पुण्य
🌷 कार्तिक में दीपदान 🌷
➡ 26 अक्टूबर, सोमवार से कार्तिक व्रत-स्नान प्रारंभ हो चुका है ।
💥 विशेष ~ गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार अभी अश्विन मास है ।
🙏🏻 महापुण्यदायक तथा मोक्षदायक कार्तिक के मुख्य नियमों में सबसे प्रमुख नियम है दीपदान। दीपदान का अर्थ होता है आस्था के साथ दीपक प्रज्वलित करना। कार्तिक में प्रत्येक दिन दीपदान जरूर करना चाहिए।
🙏🏻 पुराणों में वर्णन मिलता है।
🌷 “हरिजागरणं प्रातःस्नानं तुलसिसेवनम् । उद्यापनं दीपदानं व्रतान्येतानि कार्तिके।।“ (पद्मपुराण, उत्तरखण्ड, अध्याय 115)
🌷 “स्नानं च दीपदानं च तुलसीवनपालनम् । भूमिशय्या ब्रह्मचर्य्यं तथा द्विदलवर्जनम् ।।
विष्णुसंकीर्तनं सत्यं पुराणश्रवणं तथा । कार्तिके मासि कुर्वंति जीवन्मुक्तास्त एव हि ।।” (स्कन्दपुराण, वैष्णवखण्ड, कार्तिकमासमाहात्म्यम, अध्याय 03)
🙏🏻 पद्मपुराण उत्तरखंड, अध्याय 121 में कार्तिक में दीपदान की तुलना अश्वमेघ यज्ञ से की है :
🌷 घृतेन दीपको यस्य तिलतैलेन वा पुनः। ज्वलते यस्य सेनानीरश्वमेधेन तस्य किम्।
➡ कार्तिक में घी अथवा तिल के तेल से जिसका दीपक जलता रहता है, उसे अश्वमेघ यज्ञ से क्या लेना है।
🙏🏻 अग्निपुराण के 200 वे अध्याय के अनुसार
🌷 दीपदानात्परं नास्ति न भूतं न भविष्यति
➡ दीपदान से बढ़कर न कोई व्रत है, न था और न होगा ही
🙏🏻 स्कंदपुराण, वैष्णवखण्ड के अनुसार
🌷 सूर्यग्रहे कुरुक्षेत्रे नर्मदायां शशिग्रहे ।। तुलादानस्य यत्पुण्यं तदत्र दीपदानतः ।।
➡ कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण के समय और नर्मदा में चन्द्रग्रहण के समय अपने वजन के बराबर स्वर्ण के तुलादान करने का जो पुण्य है वह केवल दीपदान से मिल जाता है।
🔥 कार्तिक में दीपदान का एक मुख्य उद्देश्य पितरों का मार्ग प्रशस्त करना भी है।
🌷 “तुला संस्थे सहस्त्राशौ प्रदोषे भूतदर्शयोः
उल्का हस्ता नराः कुर्युः पितृणाम् मार्ग दर्शनम्।।”
➡ पितरों के निमित्त दीपदान जरूर करें।
🙏🏻 पद्मपुराण, उत्तरखंड, अध्याय 123 में महादेव कार्तिक में दीपदान का माहात्म्य सुनाते हुए अपने पुत्र कार्तिकेय से कहते हैं ।
🌷 शृणु दीपस्य माहात्म्यं कार्तिके शिखिवाहन। पितरश्चैव वांच्छंति सदा पितृगणैर्वृताः।।
भविष्यति कुलेऽस्माकं पितृभक्तः सुपुत्रकः। कार्तिके दीपदानेन यस्तोषयति केशवम्।।
➡ “मनुष्य के पितर अन्य पितृगणों के साथ सदा इस बात की अभिलाषा करते हैं कि क्या हमारे कुल में भी कोई ऐसा उत्तम पितृभक्त पुत्र उत्पन्न होगा, जो कार्तिक में दीपदान करके श्रीकेशव को संतुष्ट कर सके। ”
🔥 दीपदान कहाँ करें 🔥
🙏🏻 देवालय (मंदिर) में, गौशाला में, वृक्ष के नीचे, तुलसी के समक्ष, नदी के तट पर, सड़क पर, चौराहे पर, ब्राह्मण के घर में, अपने घर में ।
🙏🏻 अग्निपुराण के 200 वे अध्याय के अनुसार
🌷 देवद्विजातिकगृहे दीपदोऽब्दं स सर्वभाक्
➡ जो मनुष्य देवमन्दिर अथवा ब्राह्मण के गृह में दीपदान करता है, वह सबकुछ प्राप्त कर लेता है। पद्मपुराण के अनुसार मंदिरों में और नदी के किनारे दीपदान करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं। दुर्गम स्थान अथवा भूमि पर दीपदान करने से व्यक्ति नरक जाने से बच जाता है।
🔥 जो देवालय में, नदी के किनारे, सड़क पर दीप देता है, उसे सर्वतोमुखी लक्ष्मी प्राप्त होती है। कार्तिक में प्रतिदिन दो दीपक जरूर जलाएं। एक श्रीहरि नारायण के समक्ष तथा दूसरा शिवलिंग के समक्ष ।
👉🏻 शेष कल…….
🚩 ~ सनातन पंचांग ~ 🚩
लंकाधीश रावण की एक मांग !!
बाल्मीकि रामायण और तुलसीकृत रामायण में इस कथा का वर्णन नहीं है, पर तमिल भाषा में लिखी महर्षि कम्बन की इरामावतारम् में यह कथा है।
रावण केवल शिवभक्त, विद्वान एवं वीर ही नहीं, अति-मानववादी भी था। उसे भविष्य का पता था। वह जानता था कि श्रीराम से जीत पाना उसके लिए असंभव है।
जब श्री राम ने खर-दूषण का सहज ही बध कर दिया, तब तुलसी कृत मानस में भी रावण के मन भाव लिखे हैं।
खर दूसन मो सम बलवंता।
तिनहि को मरहि बिनु भगवंता॥

रावण के पास जामवंत जी को आचार्यत्व का निमंत्रण देने के लिए लंका भेजा गया।
जामवन्त जी दीर्घाकार थे, वे आकार में कुम्भकर्ण से तनिक ही छोटे थे।
लंका में प्रहरी भी हाथ जोड़कर मार्ग दिखा रहे थे। इस प्रकार जामवन्त को किसी से कुछ पूछना नहीं पड़ा।
स्वयं रावण को उन्हें राजद्वार पर अभिवादन का उपक्रम करते देख जामवन्त ने मुस्कराते हुए कहा कि मैं अभिनंदन का पात्र नहीं हूँ। मैं वनवासी राम का दूत बनकर आया हूँ।
उन्होंने तुम्हें सादर प्रणाम कहा है।
रावण ने सविनय कहा: आप हमारे पितामह के भाई हैं। इस नाते आप हमारे पूज्य हैं। कृपया आसन ग्रहण करें। यदि आप मेरा निवेदन स्वीकार कर लेंगे, तभी संभवतः मैं भी आपका संदेश सावधानी से सुन सकूंगा!
जामवन्त ने कोई आपत्ति नहीं की। उन्होंने आसन ग्रहण किया। रावण ने भी अपना स्थान ग्रहण किया।
तदुपरान्त जामवन्त ने पुनः सुनाया कि, “वनवासी राम ने सागर-सेतु निर्माण उपरांत अब यथाशीघ्र महेश्व-लिंग-विग्रह की स्थापना करना चाहते हैं।
इस अनुष्ठान को सम्पन्न कराने के लिए उन्होंने ब्राह्मण, वेदज्ञ और शैव रावण को आचार्य पद पर वरण करने की इच्छा प्रकट की है। मैं उनकी ओर से आपको आमंत्रित करने आया हूँ।“
प्रणाम। प्रतिक्रिया, अभिव्यक्ति उपरान्त रावण ने मुस्कान भरे स्वर में पूछ ही लिया, ”क्या राम द्वारा महेश्व-लिंग-विग्रह स्थापना लंका-विजय की कामना से किया जा रहा है ?”
“बिल्कुल ठीक। श्रीराम की महेश्वर के चरणों में पूर्ण भक्ति है।”
जीवन में प्रथम बार किसी ने रावण को ब्राह्मण माना है और आचार्य बनने योग्य जाना है। क्या रावण इतना अधिक मूर्ख कहलाना चाहेगा कि वह भारतवर्ष के प्रथम प्रशंसित महर्षि पुलस्त्य के सगे भाई महर्षि वशिष्ठ के यजमान का आमंत्रण और अपने आराध्य की स्थापना हेतु आचार्य पद अस्वीकार कर दे ?
रावण ने अपने आपको संभाल कर कहा, “आप पधारें। यजमान उचित अधिकारी है।उसे अपने दूत को संरक्षण देना आता है। राम से कहिएगा कि मैंने उसका आचार्यत्व स्वीकार किया।”
जामवन्त को विदा करने के तत्काल उपरान्त लंकेश ने सेवकों को आवश्यक सामग्री संग्रह करने हेतु आदेश दिया और स्वयं अशोक वाटिका पहुँचे, जो आवश्यक उपकरण यजमान उपलब्ध न कर सके जुटाना आचार्य का परम कर्त्तव्य होता है।
रावण जानता है कि वनवासी राम के पास क्या है और क्या होना चाहिए।
अशोक उद्यान पहुँचते ही रावण ने सीता से कहा कि राम लंका विजय की कामना से समुद्रतट पर महेश्वर लिंग विग्रह की स्थापना करने जा रहे हैं और रावण को आचार्य वरण किया है।
“यजमान का अनुष्ठान पूर्ण हो यह दायित्व आचार्य का भी होता है। तुम्हें विदित है कि अर्द्धांगिनी के बिना गृहस्थ के सभी अनुष्ठान अपूर्ण रहते हैं।
विमान आ रहा है, उस पर बैठ जाना। ध्यान रहे कि तुम वहाँ भी रावण के अधीन ही रहोगी।
अनुष्ठान समापन उपरान्त यहाँ आने के लिए विमान पर पुनः बैठ जाना।”
स्वामी का आचार्य अर्थात स्वयं का आचार्य। यह जान, जानकी जी ने दोनों हाथ जोड़कर मस्तक झुका दिया।
स्वस्थ कण्ठ से “सौभाग्यवती भव:” कहते रावण ने दोनों हाथ उठाकर भरपूर आशीर्वाद दिया।
सीता और अन्य आवश्यक उपकरण सहित रावण आकाश मार्ग से समुद्र तट पर उतरे।
“आदेश मिलने पर आना” कहकर सीता को उन्होंने विमान में ही छोड़ा और स्वयं राम के सम्मुख पहुँचे।
जामवन्त से संदेश पाकर भाई, मित्र और सेना सहित श्रीराम स्वागत सत्कार हेतु पहले से ही तत्पर थे। सम्मुख होते ही वनवासी राम आचार्य दशग्रीव को हाथ जोड़कर प्रणाम किया।
“दीर्घायु भव। लंका विजयी भव।“ दशग्रीव के आशीर्वचन के शब्द ने सबको चौंका दिया। सुग्रीव ही नहीं विभीषण की भी उन्होंने उपेक्षा कर दी। जैसे वे वहाँ हों ही नहीं।
भूमि शोधन के उपरान्त रावणाचार्य ने कहा,
“यजमान। अर्द्धांगिनी कहाँ है ? उन्हें यथास्थान आसन दें।”
श्रीराम ने मस्तक झुकाते हुए हाथ जोड़कर अत्यन्त विनम्र स्वर से प्रार्थना की, “कि यदि यजमान असमर्थ हो तो योग्याचार्य सर्वोत्कृष्ट विकल्प के अभाव में अन्य समकक्ष विकल्प से भी तो अनुष्ठान सम्पादन कर सकते हैं।“
“अवश्य-अवश्य, किन्तु अन्य विकल्प के अभाव में ऐसा संभव है, प्रमुख विकल्प के अभाव में नहीं।
यदि तुम अविवाहित, विधुर अथवा परित्यक्त होते तो संभव था। इन सबके अतिरिक्त तुम संन्यासी भी नहीं हो और पत्नीहीन वानप्रस्थ का भी तुमने व्रत नहीं लिया है।
इन परिस्थितियों में पत्नीरहित अनुष्ठान तुम कैसे कर सकते हो ?”
”कोई उपाय आचार्य ?”
“आचार्य आवश्यक साधन, उपकरण अनुष्ठान उपरान्त वापस ले जाते हैं। स्वीकार हो तो किसी को भेज दो, सागर सन्निकट पुष्पक विमान में यजमान पत्नी विराजमान हैं।“
श्रीराम ने हाथ जोड़कर मस्तक झुकाते हुए मौन भाव से इस सर्वश्रेष्ठ युक्ति को स्वीकार किया।
श्री रामादेश के परिपालन में, विभीषण मंत्रियों सहित पुष्पक विमान तक गए और सीता सहित लौटे।
अर्द्ध यजमान के पार्श्व में बैठो अर्द्ध यजमान।” आचार्य के इस आदेश का वैदेही ने पालन किया।
गणपति पूजन, कलश स्थापना और नवग्रह पूजन उपरान्त आचार्य ने पूछा, “लिंग विग्रह ?”
यजमान ने निवेदन किया कि उसे लेने गत रात्रि के प्रथम प्रहर से पवनपुत्र कैलाश गए हुए हैं। अभी तक लौटे नहीं हैं। आते ही होंगे।
आचार्य ने आदेश दे दिया, “विलम्ब नहीं किया जा सकता। उत्तम मुहूर्त उपस्थित है।इसलिए अविलम्ब यजमान-पत्नी बालू का लिंग-विग्रह स्वयं बना ले।”
जनक नंदिनी ने स्वयं के कर-कमलों से समुद्र तट की आर्द्र रेणुकाओं से आचार्य के निर्देशानुसार यथेष्ट लिंग-विग्रह निर्मित किया।
यजमान द्वारा रेणुकाओं का आधार पीठ बनाया गया। श्री सीताराम ने वही महेश्वर लिंग-विग्रह स्थापित किया।
आचार्य ने परिपूर्ण विधि-विधान के साथ अनुष्ठान सम्पन्न कराया।
अब आती है बारी आचार्य की दक्षिणा की।
श्रीराम ने पूछा, “आपकी दक्षिणा ?”
पुनः एक बार सभी को चौंकाया आचार्य के शब्दों ने।
घबराओ नहीं यजमान। स्वर्णपुरी के स्वामी की दक्षिणा सम्पत्ति नहीं हो सकती। आचार्य जानते हैं कि उनका यजमान वर्तमान में वनवासी है।”
“लेकिन फिर भी राम अपने आचार्य की जो भी माँग हो उसे पूर्ण करने की प्रतिज्ञा करता है।”
“आचार्य जब मृत्यु शैय्या ग्रहण करे तब यजमान सम्मुख उपस्थित रहे।”आचार्य ने अपनी दक्षिणा मांगी।
“ऐसा ही होगा आचार्य।”
यजमान ने वचन दिया और समय आने पर निभाया भी।
रघुकुल रीति सदा चली आई।
प्राण जाई पर वचन न जाई॥
यह दृश्य वार्ता देख सुनकर उपस्थित समस्त जन समुदाय के नयनाभिराम प्रेमाश्रुजल से भर गए! सभी ने एक साथ एक स्वर से सच्ची श्रद्धा के साथ इस अद्भुत आचार्य को प्रणाम किया।
रावण जैसे भविष्यदृष्टा ने जो दक्षिणा माँगी, उससे बड़ी दक्षिणा क्या हो सकती थी ?
जो रावण यज्ञ-कार्य पूरा करने हेतु राम की बंदी पत्नी को शत्रु के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है, वह राम से लौट जाने की दक्षिणा कैसे मांग सकता है ?
(श्रीरामेश्वरम् देवस्थान में लिखा हुआ है कि इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना श्रीराम ने रावण द्वारा करवाई थी)
॥ ऊँ नमः शिवाय ॥
॥ ॐ श्री गुरुभ्यो नमः॥
जय जय श्री राधे
🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🌷🙏
🌹 जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई 🌹
आपका जन्मदिन: 27 अक्टूबर
अंक ज्योतिष का सबसे आखरी मूलांक है नौ। आप बेहद साहसी हैं। आपके स्वभाव में एक विशेष प्रकार की तीव्रता पाई जाती है। आप सही मायनों में उत्साह और साहस के प्रतीक हैं। मंगल ग्रहों में सेनापति माना जाता है। अत: आप में स्वाभाविक रूप से नेतृत्त्व की क्षमता पाई जाती है। लेकिन आपको बुद्धिमान नहीं माना जा सकता। आपके जन्मदिन की संख्या आपस में जुड़ कर नौ होती है। यह मूलांक भूमि पुत्र मंगल के अधिकार में रहता है। मंगल के मूलांक वाले चालाक और चंचल भी होते हैं। आपको लड़ाई-झगड़ों में भी विशेष आनन्द आता है। आपको विचित्र साहसिक व्यक्ति कहा जा सकता है।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 9, 18, 27
शुभ अंक : 1, 2, 5, 9, 27, 72
शुभ वर्ष : 2027, 2036, 2045
ईष्टदेव : हनुमान जी, मां दुर्गा।
शुभ रंग : लाल, केसरिया, पीला
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
करियर: अधिकार क्षेत्र में वृद्धि संभव है। नौकरी में आ रही बाधा दूर होगी। महत्वपूर्ण कार्य योजनाओं में सफलता मिलेगी। राजनैतिक व्यक्ति सफलता का स्वाद चख सकते हैं।
सेहत: स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा।
परियार: मित्रों स्वजनों का सहयोग मिलने से प्रसन्नता रहेगी। आप अपनी शक्ति का सदुपयोग कर प्रगति की और अग्रसर होंगे। पारिवारिक विवाद सुलझेंगे।
🌹आज का राशिफल ⚜🌹
दिनांक : 27 अक्टूबर 2026
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन भी आपको शुभ फल देने वाला है। आज आप अपने व्यवहार कुशलता से किसी का भी दिल जीत सकते हैं। सरकारी अथवा अचल संपत्ति के दस्तावेज करने के लिए आज का दिन शुभ है। व्यवसाय में निवेश भविष्य के लिए लाभदायक रहेगा। मित्र-परिजनों के साथ मनोरंजन के अवसर मिलेंगे महिला वर्ग घरेलु झगड़े का कारण बनेगी निवारण भी स्वयं ही करेंगी। आज आपके हाथ से किये गए शुभकर्म अति लाभदायक सिद्ध होंगे। मध्यान के समय मन चंचल रहेगा आवश्यक निर्णय इस अवधि में ना लें।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन विषम परिस्थितियों वाला रहेगा। आज मन में भावुकता एवं क्रोध की अधिकता रहने से छोटी बात गंभीर विवाद का रूप ले सकती है। मध्यान पश्चात संतान और जीवनसाथी के स्वास्थ्य ख़राब हो सकता है। वाणी एवं व्यवहार संयमित रखें अन्यथा सम्मान में कमी आ सकती है। सरकारी कार्यो को संभवतः टाले निर्णय आपके विपरीत रहेंगे। धन लाभ की संभावनाएं आज कम ही है परन्तु जब भी होगा आकस्मिक ही होगा। विपरीत लिंगीय आकर्षण अधिक रहने से कार्यो से ध्यान भटकेगा।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज के दिन का पूर्वार्ध पहले की भांति ही आनंददायक रहेगा। मानसिक रूप से प्रसन्न रहेंगे। कार्यो में थोड़े प्रयत्न से लाभ होगा। प्रियजनों से उपहार-भेंट मिलेगी। नौकरी पेशा जातको को दिन के उत्तरार्ध में काम का बोझ बढेगा। दोपहर के बाद का समय परिश्रम साध्य रहेगा। लापरवाही करने पर बनते कार्यो में विघ्न आएंगे। लाभ के अनुबंध मिलने की संभावना है परन्तु किसी के टांग अड़ाने से दुविधा में पड़ेंगे। परिवार में आज समय से काम ना करने पर स्त्री-संतान से मतभेद हो सकता है।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन भी आपके पक्ष में रहेगा। परन्तु सेहत में थोड़ा उतार चढ़ाव बना रहेगा। पुराने लटके कार्यो में गति आएगी। नई योजनाएं अधिक फलीभूत होंगी। सामाजिक कारणों से भी आज अधिक व्यस्त रह सकते है। सरकारी कार्य आज करना ठीक रहेगा निश्चित सफलता मिलेगी। संध्या के समय धन की आमद होने से आर्थिक स्थिति सुधरेगी। विरोधी आज शांत रहेंगे। महिलायें आज घरेलू कार्य मे ज्यादा व्यस्त रहेंगी। रिश्तेदारों के आने से चहल पहल बढ़ेगी।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन आध्यात्म एवं धार्मिक आस्था में वृद्धि करने वाला रहेगा। पुण्योदय होने से भाग्योन्नति के अवसर मिलेंगे। फिर भी आज आपके निर्णय सही दिशा ले रहे है या नहीं इसकी जांच अवश्य करलें। धार्मिक यात्रा देव दर्शन के योग है। घर में वैवाहिक कार्यो की रूप रेखा बनेगी। कार्य व्यवसाय पर भी दिन लाभ कराने वाला रहेगा। पुराने परिचितों से भेंट होगी।
महिलाये आज कार्यो में विलंब करेंगी जिससे थोड़ी अव्यवस्था फैलेंगी। संतानो का स्वभाव चंचल रहेगा शान्ति के लिएछोटी मोटी बातो की अनदेखी करें।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आपका आज का दिन प्रतिकूल परिस्थिति वाला रहेगा। आज घर सदस्य की चिकित्सा पर अधिक खर्च होने से आर्थिक हालात असामान्य बनेंगे उधार भी लेना पड़ सकता है यथा संभव आज उधार ना लें। कार्य क्षेत्र पर आज दुसरो के ऊपर निर्भर रहना पड़ सकता है। अधिक भाग दौड़ रहने के कारण थकान एवं स्वाभाव में रूखापन आने से प्रेम संबंध बिगड़ने की संभावना है। यात्रा में वाहन से चोट लग सकती है। जोखिम वाले कार्यो से दूर रहें आज परिवार की महिलाओं की बात ना मानने से बाद में पछतावा होगा।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन आपके लिए उन्नति दायक रहेगा। कार्य क्षेत्र पर आज अधिकारियो का प्रोत्साहन मिलने से उन्नति के मार्ग खुलेंगे। व्यवसाय में लाभ पाने के लिए थोड़ा परिश्रम करना पड़ सकता है लेकिन इसका फल आश्चर्य में डालने वाला रहेगा। अनैतिक कार्यो में पड़ने से मान हानि के योग बनेंगे इससे दूर रहें। परिजनों से मधुर भावनात्मक सम्बन्ध रहेंगे घरेलू समस्याओ को महिलाये अपने बल पर सुलझा लेंगी। संध्या के समय शुभ समाचार मिलेंगे। उत्तम भोजन वाहन मनोरंजन पर्यटन से आनंद मिलेगा।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन आपके लिये बीते कल की तुलना में थोड़ी राहत प्रदान करेगा। आज धन का खर्च आय की तुलना में अधिक रहेगा फिर भी मानसिक रूप से दिन भर प्रसन्न रहेंगे। घर में किसी अविवाहित के रिश्ते की बात आगे बढ़ेगी। कीमती वस्तुओ की खरीददारी पर खर्च होगा। कार्य क्षेत्र से आज सिमित धन लाभ होगा। अधिकांश कार्य आज सहयोगियों की सहायता लेकर ही करने पढ़ेंगे। शेयर एवं अन्य जोखिम वाले कार्य मे निवेश अवश्य लाभ देगा। महिलाये आज किसी का सहयोग करके आत्मसंतुष्टि अनुभव करेंगी।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन घर एवं बाहर के वातावरण में बदलाव लाने वाला रहेगा। सेहत थोड़ी नरम रहने से आलस्य रहेगा फिर भी आज आप घरेलु समस्याओं के समाधान के प्रति अधिक सतर्क रहेंगे। आज वाणी एवं व्यवहार में भी कल की अपेक्षा नरमी रहेगी। सरकारी कार्यो में पहले उलझन पड़ेगी लेकिन किसी अनुभवी के सहयोग से समाधान मिल जाएगा।कार्य क्षेत्र पर आज कुछ महत्त्वपूर्ण बदलाव कर सकते है इस पर खर्च भी होगा। संध्या के समय मनोरंजन के अवसर तलाशेंगे स्त्री सुख आवश्यकता पूर्ति करने पर ही मिलेगा।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज की दिनचर्या असंयमित रहेगी। आज के दिन का पूर्वार्ध परिवार में कलह रहने के कारण अशान्त रहेगा इसका कारण आप ही रहेंगे। सेहत भी असामान्य रहने से कार्य क्षेत्र पर बेहतर अनुभव नहीं करेंगे। धन लाभ के लिए आज चाटुकारिता का सहारा लेना पड़ सकता है। धार्मिक स्थानों पर दान पुण्य के अवसर मिलेंगे। स्त्री मित्रो से संबंदो में कड़वाहट आ सकती है बहसबाजी से बचें। व्यवहार में नरमी रखें भ्रामक बातो पर विश्वास ना करें लोग आपको उकसाने का काम करेंगे।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन आपके लिए मिश्रित फलदायक रहेगा। दिन के पूर्वार्ध में कार्य क्षेत्र पर बेहतर वातावरण मिलने से धन लाभ होगा। इसके बाद का समय गलत निर्णय लेने से हानिकर रहेगा प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। खर्च पर नियंत्रण नहीं रहने से आर्थिक समस्या बन सकती है। परिजनों का सहयोग बराबर मिलते रहने से मानसिक रूप से शान्ति रहेगी। महिलाओं की सेहत आज नरम रहने से घरेलू कार्य बिखरे रहेंगे ठंडे पदार्थों का सेव ना करें। मित्रो का भी साथ मिलेगा।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन बीते दिनों की अपेक्षा सुख-शांति से बितायेंगे। आज आपके स्वाभाव में नरमी रहने से परिजनों के साथ चल रहे मतभेद सामान्य होंगे। कला एवं संगीत में आज विशेष रूचि रहेगी। कार्य क्षेत्र पर आज किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति का सहयोग मिलने से रुके कार्य पूर्ण होंगे। संतानों के ऊपर खर्च बढेगा महिलाये अस्त-व्यस्त गृहस्थी को संभालने में अधिक व्यस्त रहेंगी। नजदीकी रिश्तेदारों से शुभ समाचार मिलेगा। धन लाभ परिश्रम के बाद दोपहर बाद ही होगा।

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