🙏🏻 हर हर महादेव🙏🏻
🕉 ~ वैदिक पंचांग ~ 🕉
🌤 दिनांक – 31 अक्टूबर 2025
🌤 दिन – शुक्रवार
🌤 विक्रम संवत – 2082
🌤 शक संवत – 1947
🌤 अयन – दक्षिणायन
🌤 ऋतु – हेमंत ऋतु
🌤 मास – कार्तिक
🌤 पक्ष – शुक्ल
🌤 तिथि – नवमी सुबह 10:03 तक तत्पश्चात दशमी
🌤 नक्षत्र – धनिष्ठा शाम 06:51 तक तत्पश्चात शतभिषा
🌤 योग – वृद्धि 01 नवम्बर प्रातः 04:32 तक तत्पश्चात ध्रुव
🌤 राहुकाल – सुबह 10:57 से दोपहर 12:22 तक
🌤 सूर्योदय – 06:42
🌤 सूर्यास्त – 06:02
👉 दिशाशूल – पश्चिम दिशा में
🚩 व्रत पर्व विवरण- अक्षय-आँवला नवमी, ब्रह्मलीन भगवत्पाद साॅई श्री लीलाशाहजी महाराज का महानिर्वाण दिवस, पंचक (आरंभ – सुबह 06:48)
💥 विशेष – नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
🌷 त्रिस्पृशा का महायोग 🌷
🙏🏻 त्रिस्पृशा का महायोग : हजार एकादशियों का फल देनेवाला व्रत
➡ 01 नवम्बर 2025 शनिवार को सुबह 09:11 से 02 नवम्बर 2025 रविवार को सुबह 07:31 तक एकादशी है।
💥 विशेष – 02 नवम्बर, रविवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे।
➡ 02 नवम्बर 2025 रविवार को त्रिस्पृशा देवउठी-प्रबोधिनी एकादशी है ।
🙏🏻 एक ‘त्रिस्पृशा एकादशी’ के उपवास से एक हजार एकादशी व्रतों का फल प्राप्त होता है । इस एकादशी को रात में जागरण करनेवाला भगवान विष्णु के स्वरूप में लीन हो जाता है ।
🙏🏻 ‘पद्म पुराण’ में आता है कि देवर्षि नारदजी ने भगवान शिवजी से कहा : ‘‘सर्वेश्वर ! आप त्रिस्पृशा नामक व्रत का वर्णन कीजिये, जिसे सुनकर लोग कर्मबंधन से मुक्त हो जाते हैं ।”
🙏🏻 महादेवजी : ‘‘विद्वान् ! देवाधिदेव भगवान ने मोक्षप्राप्ति के लिए इस व्रत की सृष्टि की है, इसीलिए इसे ‘वैष्णवी तिथि कहते हैं । भगवान माधव ने गंगाजी के पापमुक्ति के बारे में पूछने पर बताया था : ‘‘जब एक ही दिन एकादशी, द्वादशी तथा रात्रि के अंतिम प्रहर में त्रयोदशी भी हो तो उसे ‘त्रिस्पृशा’ समझना चाहिए । यह तिथि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देनेवाली तथा सौ करोड तीर्थों से भी अधिक महत्त्वपूर्ण है । इस दिन भगवान के साथ सदगुरु की पूजा करनी चाहिए ।”
🙏🏻 यह व्रत सम्पूर्ण पाप-राशियों का शमन करनेवाला, महान दुःखों का विनाशक और सम्पूर्ण कामनाओं का दाता है । इस त्रिस्पृशा के उपवास से ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं । हजार अश्वमेघ और सौ वाजपेय यज्ञों का फल मिलता है । यह व्रत करनेवाला पुरुष पितृ कुल, मातृ कुल तथा पत्नी कुल के सहित विष्णुलोक में प्रतिष्ठित होता है । इस दिन द्वादशाक्षर मंत्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जप करना चाहिए । जिसने इसका व्रत कर लिया उसने सम्पूर्ण व्रतों का अनुष्ठान कर लिया ।
🙏🏻
🕉 ~ वैदिक पंचांग ~ 🕉
🌷 अकाल मृत्यु से रक्षा हेतु विशेष आरती 🌷
➡ 02 नवम्बर 2025 रविवार को देवउठी एकादशी कपूर आरती ।
🙏🏻 देवउठी एकादशी देव-जगी एकादशी के दिन को संध्या के समय कपूर आरती करने से आजीवन अकाल-मृत्यु से रक्षा होती है; एक्सीडेंट, आदि उत्पातों से रक्षा होती है l
🙏🏻
🕉 ~ वैदिक पंचांग ~ 🕉
🌷 भीष्म पंचक व्रत 🌷
➡ 01 नवम्बर 2025 शनिवार से 05 नवम्बर 2025 बुधवार तक भीष्म पंचक व्रत है ।
🙏🏻 कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूनम तक का व्रत ‘भीष्म-पंचक व्रत’ कहलाता है l जो इस व्रत का पालन करता है, उसके द्वारा सब प्रकार के शुभ कृत्यों का पालन हो जाता है l यह महापुण्य-मय व्रत महापातकों का नाश करने वाला है l
🙏🏻 कार्तिक एकादशी के दिन बाणों की शय्या पर पड़े हुए भीष्मजी ने जल कि याचना कि थी l तब अर्जुन ने संकल्प कर भूमि पर बाण मारा तो गंगाजी कि धार निकली और भीष्मजी के मुंह में आयी l उनकी प्यास मिटी और तन-मन-प्राण संतुष्ट हुए l इसलिए इस दिन को भगवान् श्री कृष्ण ने पर्व के रूप में घोषित करते हुए कहा कि ‘आज से लेकर पूर्णिमा तक जो अर्घ्यदान से भीष्मजी को तृप्त करेगा और इस भीष्मपंचक व्रत का पालन करेगा, उस पर मेरी सहज प्रसन्नता होगी l’
🌷 कौन यह व्रत करें 🌷
👉🏻 निःसंतान व्यक्ति पत्नीसहित इस प्रकार का व्रत करें तो उसे संतान कि प्राप्ति होती है l
👉🏻 जो अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं, वैकुण्ठ चाहते हैं या इस लोक में सुख चाहते हैं उन्हें यह व्रत करने कि सलाह दी गयी है l
👉🏻 जो नीचे लिखे मंत्र से भीष्मजी के लिए अर्घ्यदान करता है, वह मोक्ष का भागी होता है l
🌷 वैयाघ्रपदगोत्राय सांकृतप्रवराय च l
अपुत्राय ददाम्येतदुद्कं भीष्म्वर्मणे ll
वसूनामवताराय शन्तनोरात्मजाय च l
अर्घ्यं ददामि भीष्माय आजन्मब्रह्मचारिणे ll
🙏🏻 ‘जिनका व्याघ्रपद गोत्र और सांकृत प्रवर है, उन पुत्ररहित वसुओं के अवतार, शांतनु के पुत्र आजन्म ब्रह्मचारी भीष्म को मैं अर्घ्य देता हूँ l ( स्कन्द पुराण, वैष्णव खंड, कार्तिक महात्मय )
🌷 व्रत करने कि विधि 🌷
इस व्रत का प्रथम दिन देवउठी एकादशी है l इस दिन भगवान् नारायण जागते हैं l इस कारण इस दिन निम्न मंत्र का उच्चारण करके भगवान् को जगाना चाहिए :
🌷 उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द उत्तिष्ठ गरुडध्वज l
उत्तिष्ठ कमलाकान्त त्रैलोक्यमन्गलं कुरु ll
🙏🏻 ‘हे गोविन्द ! उठिए, उठए, हे गरुडध्वज ! उठिए, हे कमलाकांत ! निद्रा का त्याग कर तीनों लोकों का मंगल कीजिये l’
➡ इन पांच दिनों में अन्न का त्याग करें l कंदमूल, फल, दूध अथवा हविष्य (विहित सात्विक आहार जो यज्ञ के दिनों में किया जाता है ) लें l
➡ इन दिनों में पंचगव्य (गाय का दूध, दही, घी, गोझरण व् गोबर-रस का मिश्रण )का सेवन लाभदायी है l पानी में थोडा-सा गोझरण डालकर स्नान करें तो वह रोग-दोषनाशक तथा पापनाशक माना जाता है l
➡ इन दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए l
➡ भीष्मजी को अर्घ्य-तर्पण –
इन पांच दिनों निम्नः मंत्र से भीष्म जी के लिए तर्पण करना चाहिए :
🌷 सत्यव्रताय शुचये गांगेयाय महात्मने l
भीष्मायैतद ददाम्यर्घ्यमाजन्मब्रह्मचारिणे ll
🙏🏻 ‘आजन्म ब्रह्मचर्य का पालन करनेवाले परम पवित्र, सत्य-व्रतपरायण गंगानंदन महात्मा भीष्म को मैं यह अर्घ्य देता हूँ l’
🙏🏻
पंचक
प्रारंभ: 31 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) सुबह 6:48 बजे
समाप्ति (उस काल की): 4 नवंबर 2025 (मंगलवार) दोपहर 12:34 बजे
अपने भीतर झाँकना
🌻जब मनुष्य अपने भीतर झाँकना सीख जाता है, तब उसे संसार में कुछ भी असंभव नहीं लगता। स्वयं को पहचानना ही आत्मज्ञान का पहला चरण है। जब हम अपनी शक्तियों को समझते हैं, तब जीवन के हर संघर्ष को जीतना संभव हो जाता है। हम चाहे मेंढक को सोने की कुर्सी पर भी क्यों ना बैठा दें, फिर भी वो..छलांग लगाकर दोबारा कीचड़ में ही जाएगा, जीवन में कुछ लोग भी ऐसे ही होते हैं!🌻
🚩🚩जय श्री शानिश्चराय🚩🚩
मृतक का सिर दक्षिण दिशा की ओर ही क्यों रखना चाहिए एवं कपाल क्रिया का सच
〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
मृत देह को दक्षिणोत्तर क्यों रखते हैं ?👉
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
जीव की प्रेतवत् अवस्था, पंचप्राणों एवं उपप्राणों के स्थूल देह संबंधी कार्य की समाप्ति दर्शाती है । जिस समय जीव निष्प्राण हो जाता है, उस समय जीव के शरीर में तरंगों का वहन लगभग थम सा जाता है व उसका रूपांतर ‘कलेवर’ में होता है । ‘कलेवर’ अर्थात स्थूल देह की किसी भी तरंग को संक्रमित करने की असमर्थता दर्शाने वाला अंश । ‘कलेवर’ अवस्था में देह से निष्कासन योग्य सूक्ष्मवायुओं का वहन बढ जाता है । मृत देह को दक्षिणोत्तर रखने से कलेवर की ओर दक्षिणोत्तर में भ्रमण करने वाली यम तरंगें आकर्षित होती हैं और मृत देह के चारों ओर इन तरंगों का कोष तैयार हो जाता है । इससे मृत देह की निष्कासन योग्य सूक्ष्म वायुओं का अल्प कालावधि में विघटन होता है । निष्कासन योग्य सूक्ष्म वायुओं का कुछ भाग मृत देह की नासिका व गुदा (मलद्वार) से वातावरण में उत्सर्जित होता है । इस प्रक्रिया के कारण, निष्कासन योग्य रज-तमात्मक दूषित वायुओं से मृत देह मुक्त हो जाता है, जिससे वातावरण में संचार करने वाली अनिष्ट शक्तियों के लिए देह को वश में करना बहुत कठिन हो जाता है । इसीलिए मृतदेह को दक्षिणोत्तर रखा जाता है ।
व्यक्ति की मृत्यु होने के उपरांत उस की देह घर में रखते समय उसके पैर दक्षिण दिशा की ओर क्यों करते हैं ?
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
👉 दक्षिण यम दिशा है । व्यक्ति का प्राणोत्क्रमण होते समय उसके प्राण यम दिशा की ओर खींचे जाते हैं । देह से प्राण बाहर निकलने के उपरांत अन्य निष्कासन-योग्य वायु का देह से उत्सर्जन प्रारंभ होता है । इस उत्सर्जन की तरंगों की गति तथा उनका आकर्षण/खींचाव भी अधिक मात्रा में दक्षिण दिशा की ओर होता है ।
👉 व्यक्ति की कटि के निचले भाग से (कमर के नीचे का भाग) अधिक मात्रा में वासनात्मक तरंगों का उत्सर्जन होता रहता है, वह अधिक उचित पद्धति से हो, इसके लिए यम तरंगो के वास्तव्य वाली दक्षिण दिशा की ओर ही उस व्यक्ति के पैर रखने का शास्त्र है । ऐसा करने से यम तरंगों की सहायता प्राप्त होकर व्यक्ति की देह से उसके पैर की दिशा से अधोगति से अधिकाधिक निष्कासन-योग्य तरंगे खिंचकर इस वायु का योग्य प्रकार से अधिकतम मात्रा में उत्सर्जन होता है जिससे चिता पर रखने से पूर्व देह अधिकतम मात्रा में रिक्त हो जाती है । यह दिशा अधिकाधिक स्तर पर देह से बाह्य दिशा में विसर्जित होने वाली निष्कासन-योग्य वायु के प्रक्षेपण के लिए पूरक होती है ।
👉 यम (दक्षिण) दिशा में यम देवता का अस्तित्व होता है । इसलिए उन के सान्निध्य में देह से प्रक्षेपित होने वाली निष्कासन योग्य वायु के उत्सर्जन के उपरांत विलिनीकरणात्मक प्रक्रिया अधिकाधिक प्रमाण में दोष विरहित करने का प्रयास किया जाता है, अन्यथा निष्कासन-योग्य वायु के उत्सर्जन के लिए संबंधित दिशा पूरक न रखने पर, ये तरंगें घर में अधिक समय तक घनीभूत होने की संभावना होती है; इसलिए यमदिशा की ओर इस निष्कासन-योग्य तरंगों का वहन होने के लिए मृत व्यक्ति के पैर घर में दक्षिण दिशा की ओर रखने की पद्धति है ।’
मृत देह घर में रखते समय मृतक के पैर दक्षिण दिशा में रखने का शास्त्र ज्ञात न होने के कारण वर्तमान में कुछ स्थानों पर घर में मृतदेह रखते समय मृतक के पैर उत्तर की ओर रखने का अयोग्य कृत्य किया जाता है ।
मृतदेह को श्मशान में ले जाने के उपरांत मृतदेह चिता पर रखते समय मृतक के पैर उत्तर दिशा में रखना आवश्यक होता है ।
अंतिम संस्कार के समय कपाल क्रिया का सच
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
हम सभी ने शमशान में अंत्येष्टि के समय देखा है कि मृतक व्यक्ति की चिता जलने के कुछ समय उपरांत सिर पर लकड़ी का डंडा मारा जाता है।
शव को मुखाग्नि देने के करीब आधे घंटे बाद जब शव की चमड़ी और मांस का ज्यादातर भाग जल चुका होता है, तब एक बांस में लोटा बांधकर शव के सिर वाले हिस्से में और घी डाला जाता है।
जिससे की सिर का कोई हिस्सा जलने से न बच जाए। इसे कपाल क्रिया कहते हैं। गरुड़ पुराण की मान्यता अनुसार अगर सिर या दिमाग का कोई हिस्सा जलने से रह जाए तो इंसान को अगले जन्म में पिछले जन्म की बातें याद रह जाती हैं।
इसीलिए अच्छी तरह से जलाया जाता है। अगर पिछले जन्म में इंसान की मृत्यु किसी दुखद कारण की वजह से हुई है तो नए जन्म में उसको याद रखने से मनुष्य फिर दुःखी हो जाएगा और लगातार उसके दिमाग में पूर्व जन्म की बातें और अपने करीबियों का दुःख घूमता रहेगा।
इस बात में मतभेद यह है कि कपाल क्रिया करने से इस जन्म की यादाश्त भूल कर आत्मा अगले जन्म को स्वीकार कर लेती है। दूसरा मतभेद यह है कि कपाल क्रिया करने से सहस्रार चक्र खुल जाता है, और आत्मा ज्ञान मार्ग से मोक्ष को प्राप्त होति है।
पहला मत को पूर्णतया सत्य नही कहा जा सकता है, यादाशत आत्मा के साथ रहती ही है, चाहे भले ही अगले जन्म में वह उसे भूल जाए, परंतु पिछले सभी जन्मों की याद आत्मा या अवचेत्तन मन में हमेशा रहती है। इसलिए कपाल क्रिया का इससे कोई संबंध नहीं।
जहाँ तक दुसरे मत का सवाल है, बहुत हद तक वह सत्य है। सहस्रार चक्र से आत्मा के गमन से ज्ञान मार्ग से आत्मा को मोक्ष मिल सकता है। लेकिन तभी जब आत्मा सहस्रार चक्र से निकले। यहाँ तो आत्मा पहले ही शरीर छोड़ चुकी है, सिर्फ शव पड़ा है आपके सामने। फिर क्यों किया जाए कपाल क्रिया?
बौद्ध धर्म में ख़ास तौर से तिब्बत के कुछ लामा मंत्रो से मृत्यु शय्या पर पड़े कुछ लोगो की आत्मा सहस्रार चक्र से निकालने का दावा करते है। यह एक बहुत बड़ा व्यवसाय भी बन गया है जिसके लिए लाखों रूपए भी लिए जाते है। सनातन धर्म में भी समाधि द्वारा मृत्यु से पूर्व आसन लगा कर आत्मा को सहस्रार चक्र से निकाला जाता है, लेकिन यह एक योगी ही कर सकता है, आम आदमी नहीं।
फिर कपाल क्रिया क्यों? और क्या यह जरूरी है?
जी, यह जरूरी है। यह कर्म कांड का हिस्सा तो नहीं है, लेकिन इसे बाद में कर्म कांड का हिस्सा बना दिया गया। इसका कारण थे दुष्ट तांत्रिक। बहुत से दुष्ट तांत्रिक शमशान से कपाल इखट्टे कर लेते है। इन्ही कपाल द्वारा मृत इंसान की आत्मा को प्रेत बना कर अपने काम निकाले जाते है। इसलिए ही अघोरियों ने इस दुष:क्रिया को रोकने के लिए यह प्रथा चलायी की सभी की कपाल क्रिया कर दी जाय। जब कपाल ही नहीं रहेगा तो उससे कोई दुष:क्रिया नहीं होगी। यह कारण किसी को बताया नहीं जाता, अन्यथा कोई इसे मानेगा कोई नहीं। परंतु मानने या न मानने से तांत्रिकों को तो कोई फर्क नहीं पड़ता न। समय समय पर ऐसे मामले आते ही है जहाँ कोई अच्छी आत्मा को भी प्रेत बना कर गलत कार्य करवाये जाते है। इसलिए यह क्रिया जरूरी है।
〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
🌺🌸 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌸🌺
🌹 जिनका आज जन्मदिन है, उन्हें अनंत मंगलकामनाएँ, शुभ आशीष और प्रेमपूर्ण बधाइयाँ 🌹
आपका यह विशेष दिन सुख, समृद्धि और सफलता से परिपूर्ण हो।
ईश्वर से यही प्रार्थना है कि आपके जीवन में हर नया प्रभात नई ऊँचाइयाँ लेकर आए और हर संध्या संतोष व शांति का संदेश दे।
आपका जन्मदिन : 31 अक्टूबर
🔢 मूलांक : 4
दिनांक 31 को जन्मे व्यक्ति गंभीर चिंतनशील, दृढ़ निश्चयी और आत्मबल से संपन्न होते हैं।
इनका व्यक्तित्व चुंबकीय होता है — जो किसी भी सभा या समूह में अपनी उपस्थिति से आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
ये बाहर से कठोर, अनुशासित और दृढ़ इच्छाशक्ति वाले दिखते हैं,
परंतु भीतर से अत्यंत कोमल हृदय और करुणामय स्वभाव के होते हैं।
आपका जीवन संघर्षों से भरा होता है, परंतु आपकी आत्मशक्ति और कर्मनिष्ठा आपको हर बार सफलता के शिखर तक पहुँचाती है।
आप उन व्यक्तियों में से हैं जो अपने परिश्रम, लगन और आत्मविश्वास से असंभव को भी संभव बना देते हैं।
आपका व्यक्तित्व नेतृत्व, न्यायप्रियता और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
🌟 आपके लिए विशेष शुभ संकेत 🌟
✨ शुभ दिनांक: 4, 8, 13, 22, 26, 31
✨ शुभ अंक: 4, 8, 18, 22, 45, 57
✨ शुभ वर्ष: 2031, 2040, 2060
✨ ईष्टदेव: श्री गणेश जी, श्री हनुमान जी
✨ शुभ रंग: नीला, काला, भूरा
🪔 वार्षिक भविष्यफल एवं आगामी वर्ष की झलक 🪔
यह वर्ष आपके लिए नयी ऊर्जा, नयी सोच और नये अवसर लेकर आएगा।
आपके कार्यक्षेत्र में उन्नति के द्वार खुलेंगे — प्रतिष्ठा और सम्मान में वृद्धि होगी।
परिवारिक जीवन में समरसता बढ़ेगी और घर में शुभ समाचारों का आगमन होगा।
नए व्यापार या किसी नयी योजना को प्रारंभ करने का यह उचित समय रहेगा,
किन्तु सफलता के लिए गुप्तता और संयम आवश्यक रहेगा।
मित्र वर्ग एवं समाज में आपकी छवि और भी प्रखर होगी।
किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति का सहयोग आपके भाग्य को और प्रबल बना सकता है।
विवाह या प्रेम संबंधों में सुखद मोड़ आने के संकेत हैं।
जो लोग नौकरीपेशा हैं, उन्हें नई जिम्मेदारियाँ और उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे।
शत्रु पक्ष की हार और आपकी विजय सुनिश्चित है।
आर्थिक दृष्टि से यह वर्ष स्थिरता और प्रगति दोनों का संकेत दे रहा है।
♈ मेष (Aries)
स्वभाव: उत्साही, कर्मशील
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: हरा
आज का दिन आपके जीवन में नई उमंगें और उत्साह लेकर आएगा। वैवाहिक जीवन में सौहार्द रहेगा और जीवनसाथी के साथ मधुरता बढ़ेगी। आर्थिक दृष्टि से दिन लाभप्रद रहेगा — आप अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में सार्थक कदम बढ़ाएँगे। किसी और के मामले में दखल देने से बचें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें, कोई मामूली समस्या बड़ी न हो। यदि आपने कोई ऋण लिया है तो उसे चुकाने की योजना सफल होगी। वाहन चलाते समय सावधानी अनिवार्य है।
♉ वृषभ (Taurus)
स्वभाव: धैर्यवान, स्थिरचित्त
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: नीला
आज का दिन कुछ उलझनों से भरा रह सकता है, परंतु आपके संयम से सब सुलझ जाएगा। किसी पुराने मित्र से मिलन हर्षदायक रहेगा। विरोधियों की चालों से सतर्क रहें। जो जातक सरकारी सेवा या प्रतियोगिता की तैयारी में हैं, उन्हें शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। किसी संपत्ति या जमीन से जुड़ा विवाद सामने आ सकता है, इसलिए किसी भी निर्णय में जल्दबाजी न करें। अपने मित्रों और परिचितों की नीयत को पहचानना आवश्यक है।
♊ मिथुन (Gemini)
स्वभाव: जिज्ञासु, बहुमुखी
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: लाल
आज का दिन आनंद और सक्रियता से भरा रहेगा। स्वास्थ्य में हल्की परेशानी रह सकती है, किंतु आप शीघ्र स्वस्थ होंगे। परिवार और संतान से जुड़ी उलझनें सुलझेंगी। माता-पिता की सेवा से आत्मिक शांति मिलेगी। पुराने मित्र से भेंट मन को प्रसन्न करेगी। कार्यक्षेत्र में कुछ तनाव रह सकता है, परंतु आपकी लगन और बुद्धिमानी से परिस्थिति नियंत्रित रहेगी।
♋ कर्क (Cancer)
स्वभाव: भावुक, संवेदनशील
राशि स्वामी: चंद्र
शुभ रंग: सफेद
आज किसी जोखिम भरे कार्य में हाथ न डालें। अनुभवी व्यक्ति से सलाह लेकर ही किसी समझौते या डील को अंतिम रूप दें। कोई मनोकामना पूर्ण हो सकती है। धार्मिक कार्यों में भागीदारी आपके मन को संतोष देगी। माँ का स्वास्थ्य थोड़ी चिंता बढ़ा सकता है, ध्यान रखें। पड़ोस में किसी विवाद से दूरी बनाए रखें, अन्यथा कानूनी झंझट संभव है।
♌ सिंह (Leo)
स्वभाव: आत्मविश्वासी, नेतृत्वशील
राशि स्वामी: सूर्य
शुभ रंग: पीला
आज मान-सम्मान में वृद्धि का योग है। वाणी में मधुरता बनाए रखें — यही आपको सबका प्रिय बनाएगी। भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा। पारिवारिक किसी शुभ कार्य की योजना बनेगी। किसी सदस्य के विवाह में आई बाधा दूर हो सकती है। अपनी जिम्मेदारी स्वयं निभाएँ, दूसरों पर निर्भरता से हानि संभव है।
♍ कन्या (Virgo)
स्वभाव: मेहनती, सूक्ष्म विचारक
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: गोल्डन
आज का दिन सतर्कता का है। जल्दबाज़ी या लापरवाही से गलती हो सकती है। किसी अनजान व्यक्ति से वित्तीय लेनदेन न करें। शेयर मार्केट या सट्टे से दूर रहें। वाहन की खराबी से खर्च बढ़ सकता है। रुका हुआ धन प्राप्त करने के प्रयास सफल रहेंगे। धैर्य रखें, स्थितियाँ धीरे-धीरे आपके पक्ष में आएंगी।
♎ तुला (Libra)
स्वभाव: संतुलित, आकर्षक व्यक्तित्व
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: हरा
आज का दिन आपके लिए प्रगति और सफलता का संकेत दे रहा है। कार्यक्षेत्र में सहयोगियों का साथ मिलेगा, टीमवर्क से कार्य शीघ्र पूरे होंगे। किसी मनोरंजन या सांस्कृतिक आयोजन में भाग लेने का अवसर मिलेगा। बिना माँगे सलाह देने से बचें। व्यापार में किसी के साथ साझेदारी करने से पहले पूरी जांच करें। यात्रा लाभकारी रहेगी, किंतु सामान की सुरक्षा रखें।
♏ वृश्चिक (Scorpio)
स्वभाव: रहस्यमय, दृढ़ इच्छाशक्ति वाले
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: नीला
व्यवसायियों के लिए दिन शुभ रहेगा। राजनीति से जुड़े लोगों को पद या सम्मान प्राप्त हो सकता है। पारिवारिक वातावरण सुखद रहेगा। किसी मांगलिक कार्य का आयोजन संभव है। प्रेम जीवन में मधुरता आएगी और मनोकामना पूर्ण होगी। आत्मविश्वास बढ़ेगा, शत्रु आपके सामने टिक नहीं पाएंगे।
♐ धनु (Sagittarius)
स्वभाव: दयालु, आशावादी
राशि स्वामी: गुरु
शुभ रंग: लाल
भाग्य आज आपका साथ देगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे। किसी पुरानी योजना से लाभ होगा। पुराना मित्र मिलने आ सकता है। व्यवसाय में विवाद से बचें। पारिवारिक परामर्श से निर्णय लें। नौकरी में सहकर्मियों से सहयोग मिलेगा। माता-पिता के आशीर्वाद से आत्मबल में वृद्धि होगी।
♑ मकर (Capricorn)
स्वभाव: अनुशासित, परिश्रमी
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: लाल
आज आपको अपनी जिम्मेदारियों पर विशेष ध्यान देना होगा। कार्यभार अधिक रहेगा, लेकिन आप दृढ़ता से सब पूरा करेंगे। खर्चों पर संयम आवश्यक है। जीवनसाथी से उपहार या स्नेह का भाव प्राप्त होगा। संतान के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं। किसी पुराने वित्तीय विवाद का समाधान होगा।
♒ कुंभ (Aquarius)
स्वभाव: मानवतावादी, दूरदर्शी
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: पीला
आज का दिन मिश्रित फल प्रदान करेगा। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न करें। मित्रों से उपहार या सरप्राइज मिल सकता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई में राहत महसूस होगी। कोई पुराना रहस्य उजागर हो सकता है, परंतु घबराएँ नहीं — सच्चाई आपके पक्ष में रहेगी। सरकारी क्षेत्र में कार्यरत लोगों को सफलता के संकेत हैं। किसी यात्रा से शुभ समाचार मिलेगा।
♓ मीन (Pisces)
स्वभाव: संवेदनशील, कल्पनाशील
राशि स्वामी: बृहस्पति
शुभ रंग: हरा
आज का दिन विशेष उपलब्धि का रहेगा। परिवार में नए सदस्य के आने से हर्ष का माहौल बनेगा। वित्तीय दृष्टि से दिन शुभ रहेगा। बचत योजनाओं में निवेश करना लाभकारी रहेगा। नौकरी में परिवर्तन की सोच रहे हैं तो यह समय अनुकूल है। पारिवारिक एकता बनी रहेगी और आपके प्रयासों से सबके चेहरे पर मुस्कान लौटेगी।

Leave a Reply