🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🌞 ~ वैदिक पंचांग ~ 🌞
🌤 दिनांक – 29 नवम्बर 2025
🌤 दिन – शनिवार
🌤 विक्रम संवत 2082
🌤 शक संवत -1947
🌤 अयन – दक्षिणायन
🌤 ऋतु – हेमंत ॠतु
🌤 मास – मार्गशीर्ष
🌤 पक्ष – शुक्ल
🌤 तिथि – नवमी रात्रि 11:15 तक तत्पश्चात दशमी
🌤 नक्षत्र – पूर्वभाद्रपद 30 नवम्बर रात्रि 02:22 तक तत्पश्चात उत्तरभाद्रपद
🌤 योग – हर्षण सुबह 09:27 तक तत्पश्चात वज्र
🌤 राहुकाल – सुबह 09:43 से सुबह 11:05 तक
🌤 सूर्योदय – 06:59
🌤 सूर्यास्त – 05:54
👉 दिशाशूल – पूर्व दिशा मे
🚩 व्रत पर्व विवरण- पंचक
💥 विशेष – नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
🌷 श्रीमद् भगवद् गीता जयंती 🌷
➡ 01 दिसम्बर 2025 सोमवार को श्रीमद् भगवद् गीता जयंती है।
🙏🏻 धर्म ग्रंथों के अनुसार मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसलिए प्रतिवर्ष इस तिथि को गीता जयंती का पर्व मनाया जाता है। गीता एकमात्र ऐसा ग्रंथ है, जिसकी जयंती मनाई जाती है।
🙏🏻 गीता दुनिया के उन चंद ग्रंथों में शुमार है, जो आज भी सबसे ज्यादा पढ़े जा रहे हैं और जीवन के हर पहलू को गीता से जोड़कर व्याख्या की जा रही है। इसके 18 अध्यायों के करीब 700 श्लोकों में हर उस समस्या का समाधान है जो कभी ना कभी हर इंसान के सामने आती है। आज हम आपको इस लेख में गीता के 9 चुनिंदा प्रबंधन सूत्रों से रूबरू करवा रहे हैं, जो इस प्रकार हैं-
🌷 1 : श्लोक
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतु र्भूर्मा ते संगोस्त्वकर्मणि ।।
🙏🏻 अर्थ- भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि हे अर्जुन। कर्म करने में तेरा अधिकार है। उसके फलों के विषय में मत सोच। इसलिए तू कर्मों के फल का हेतु मत हो और कर्म न करने के विषय में भी तू आग्रह न कर।
➡ मैनेजमेंट सूत्र- भगवान श्रीकृष्ण इस श्लोक के माध्यम से अर्जुन से कहना चाहते हैं कि मनुष्य को बिना फल की इच्छा से अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा व ईमानदारी से करना चाहिए। यदि कर्म करते समय फल की इच्छा मन में होगी तो आप पूर्ण निष्ठा से साथ वह कर्म नहीं कर पाओगे। निष्काम कर्म ही सर्वश्रेष्ठ परिणाम देता है। इसलिए बिना किसी फल की इच्छा से मन लगाकर अपना काम करते रहो। फल देना, न देना व कितना देना ये सभी बातें परमात्मा पर छोड़ दो क्योंकि परमात्मा ही सभी का पालनकर्ता है।
🌷 2 : श्लोक
योगस्थ: कुरु कर्माणि संग त्यक्तवा धनंजय।
सिद्धय-सिद्धयो: समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।।
🙏🏻 अर्थ- हे धनंजय (अर्जुन)। कर्म न करने का आग्रह त्यागकर, यश-अपयश के विषय में समबुद्धि होकर योग युक्त होकर, कर्म कर, (क्योंकि) समत्व को ही योग कहते हैं।
➡ मैनेजमेंट सूत्र- धर्म का अर्थ होता है कर्तव्य। धर्म के नाम पर हम अक्सर सिर्फ कर्मकांड, पूजा-पाठ, तीर्थ-मंदिरों तक सीमित रह जाते हैं। हमारे ग्रंथों ने कर्तव्य को ही धर्म कहा है। भगवान कहते हैं कि अपने कर्तव्य को पूरा करने में कभी यश- अपयश और हानि-लाभ का विचार नहीं करना चाहिए। बुद्धि को सिर्फ अपने कर्तव्य यानी धर्म पर टिकाकर काम करना चाहिए। इससे परिणाम बेहतर मिलेंगे और मन में शांति का वास होगा। मन में शांति होगी तो परमात्मा से आपका योग आसानी से होगा। आज का युवा अपने कर्तव्यों में फायदे और नुकसान का नापतौल पहले करता है, फिर उस कर्तव्य को पूरा करने के बारे में सोचता है। उस काम से तात्कालिक नुकसान देखने पर कई बार उसे टाल देते हैं और बाद में उससे ज्यादा हानि उठाते हैं।
🌷 3 : श्लोक
नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना।
न चाभावयत: शांतिरशांतस्य कुत: सुखम्।
🙏🏻 अर्थ- योग रहित पुरुष में निश्चय करने की बुद्धि नहीं होती और उसके मन में भावना भी नहीं होती। ऐसे भावना रहित पुरुष को शांति नहीं मिलती और जिसे शांति नहीं, उसे सुख कहां से मिलेगा।
➡ मैनेजमेंट सूत्र – हर मनुष्य की इच्छा होती है कि उसे सुख प्राप्त हो, इसके लिए वह भटकता रहता है, लेकिन सुख का मूल तो उसके अपने मन में स्थित होता है। जिस मनुष्य का मन इंद्रियों यानी धन, वासना, आलस्य आदि में लिप्त है, उसके मन में भावना (आत्मज्ञान) नहीं होती। और जिस मनुष्य के मन में भावना नहीं होती, उसे किसी भी प्रकार से शांति नहीं मिलती और जिसके मन में शांति न हो, उसे सुख कहां से प्राप्त होगा। अत: सुख प्राप्त करने के लिए मन पर नियंत्रण होना बहुत आवश्यक है।
🔥गृहस्थ आश्रम
मनुस्मृति में गृहस्थ के दस धर्मों का उल्लेख मिलता है, अर्थात् धृति, क्षमा, दम, अस्तेय, शौच, इन्द्रिय-निग्रह, ज्ञान, विद्या, सत्य तथा क्रोध न करना । यथाशक्ति दान देना तथा आये हुए अतिथि का सत्कार करना भी उसके कर्तव्य है।
इसी आश्रम में मनुष्य तीन ऋणों से मुक्ति प्राप्त करता था जिनका विधान धर्मग्रन्थों में हुआ है ।
ये ऋण हैं:-
(१) देव ऋण- प्रत्येक मनुष्य सूर्य,पृथ्वी,अग्नि, जल, वायु आकाश आदि देवताओं से सारा जीवन कुछ ना कुछ लेता ही रहता है जो की देव ऋण (देवताओं का कर्जा) ही है, इन देवताओं के ऋण को चुकाने के लिए तथा इनसे मुक्त होने के लिए मनुष्य यथाशक्ति ” देव यज्ञ का अनुष्ठान” करें ।
(२) ऋषि ऋण- विधिपूर्वक वेदों का अध्ययन करने और अतिथि यज्ञ करने से ऋषि ऋण से मुक्ति मिल जाती है ।
(३) पितृ ऋण- धर्मानुसार सन्तानोत्पन्न करके और पितृ यज्ञ करके व्यक्ति पितृ-ऋण से मुक्ति पाता है ।
उपर्युक्त तीनों ऋणों से उऋण होना मनुष्य का परम कर्तव्य माना गया है।
मनुस्मृति में स्पष्टतः कहा गया है कि जो व्यक्ति तीनों ऋणों से मुक्ति प्राप्त किये बिना मोक्ष की इच्छा रखता है वह नरक का अधिकारी होता है।
पंच महायज्ञ:- गृहस्थाश्रम में रहते हुए मनुष्य को पाँच महायज्ञों का भी अनुष्ठान करना पड़ता है। ये यज्ञ लौकिक तथा पारलौकिक सुख एवं शान्ति के लिये आवश्यक माने गये है ।
इस प्रकार तीन ऋण तथा पाँच महायज्ञ गृहस्थ आश्रम में व्यक्ति को लौकिक तथा पारलौकिक सुख प्रदान करने वाले हैं। इन के माध्यम से व्यक्ति खुद की उन्नति तो करता ही है साथ ही समाज के प्रति अपने दायित्वों का भी धर्म पूर्वक निर्वाह करता है।
इंसान ही इंसान की दवा है.. कोई दुःख दर्दों पर काम करता है.. तो कोई सुकून बन जाता है!
🚩🌺इंसान ही इंसान की दवा है।धर्म, सेवा और मानवीय सम्बन्धों की महत्ता
🚩🌺मनुष्य जीवन एक यात्रा है, जो सुख-दुःख, आशा-निराशा और अनगिनत अनुभवों से भरी है। इस यात्रा में सबसे बड़ी औषधि, सबसे बड़ा सहारा और सबसे बड़ा बल यदि कुछ है, तो वह स्वयं मनुष्य ही है। यह केवल एक काव्यात्मक अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि हमारे सनातन धर्म के मूल दर्शन का सार है।जैसा कि आपने कहा, “इंसान ही इंसान की दवा है, कोई दुःख-दर्दों पर काम करता है, तो कोई सुकून बन जाता है।”
🚩🌺सेवा और करुणा: मानवीय धर्म का मूल
🚩🌺सनातन धर्म की नींव ही सेवा, करुणा और परस्पर सहयोग पर टिकी है। ‘परोपकार’ (दूसरों का भला) को सर्वोच्च धर्म माना गया है।
🚩🕉“अष्टादश पुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम्। परोपकारः पुण्याय, पापाय परपीडनम्॥”
🚩🕉व्यास जी के 18 पुराणों में दो ही वचन मुख्य हैं: परोपकार पुण्य के लिए होता है और दूसरों को पीड़ा देना पाप के लिए।
🚩🕉यह श्लोक स्पष्ट करता है कि मनुष्य का मुख्य उद्देश्य दूसरे मनुष्य के लिए ‘दवा’ बनना, अर्थात उसके जीवन को सहज और सुखमय बनाना है।
🚩🕉दुःख-दर्दों पर काम करना।कर्मयोग और सक्रिय सहायता
🚩🌺जब कोई व्यक्ति किसी के दुःख-दर्दों पर काम करता है, तो वह वास्तव में कर्मयोग का अभ्यास कर रहा होता है।
🚩🕉श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं: “तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर। असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः॥”
🚩🌺इसलिए तू आसक्ति रहित होकर सदा कर्तव्य कर्म कर, क्योंकि अनासक्त (निस्वार्थ) होकर कर्म करने वाला मनुष्य परमात्मा को प्राप्त करता है।
🚩🌺किसी की सेवा करते समय हम उस व्यक्ति की पीड़ा को कम करने का प्रयास करते हैं, चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक। यह प्रयास, यह सक्रिय सहयोग ही दुःख की सबसे बड़ी दवा है। एक भूखे को भोजन, एक प्यासे को पानी, या एक निराश व्यक्ति को सही मार्गदर्शन—ये सभी कर्मयोग के ही रूप हैं, जो मनुष्य को दूसरे मनुष्य के लिए एक सहायक और उपचारी शक्ति बनाते हैं।
🚩🌺सुकून बन जाना। मैत्री और आध्यात्मिक उपस्थिति
🚩🌺मनुष्य का दूसरा पहलू है किसी के लिए ‘सुकून’ बन जाना। सुकून केवल भौतिक सहायता से नहीं आता, बल्कि मानसिक और भावनात्मक समर्थन से आता है। जब हम किसी से प्रेम, सहानुभूति और अटूट विश्वास का सम्बन्ध स्थापित करते हैं, तो हम उस व्यक्ति के लिए एक सुरक्षित आश्रय बन जाते हैं।
🚩🌺योग दर्शन में, महर्षि पतंजलि ने चित्त (मन) को शांत करने के लिए ‘चतुर्भेद भावना’ (चार प्रकार की भावनाएँ) बताई हैं, जिनमें मैत्री (खुश लोगों के प्रति दोस्ती) और करुणा (दुखी लोगों के प्रति दया) प्रमुख हैं।
🚩🕉“मैत्रीकरुणामुदितोपेक्षाणां सुखदुःखपुण्यापुण्यविषयाणां भावनातश्चित्तप्रसादनम्॥”
🚩🌺जब कोई व्यक्ति निष्पक्ष भाव से करुणा दिखाता है और दूसरे के दुःख में उसका साथ देता है, तो उसकी उपस्थिति मात्र ही दुःख झेल रहे व्यक्ति के मन को शांति देती है। यह शांति, यह विश्वास ही सबसे बड़ा ‘सुकून’ है, जो किसी भी दवा से अधिक प्रभावी है।
🚩🕉वसुधैव कुटुम्बकम्: सम्पूर्ण मानवता की जिम्मेदारी
🚩🕉हमारा धर्म हमें ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (सम्पूर्ण पृथ्वी एक परिवार है) का पाठ सिखाता है, जिसका उल्लेख महा उपनिषद् में है।
🚩🌺यह अवधारणा हमें समझाती है कि हम सब एक दूसरे से गहरे तौर पर जुड़े हुए हैं। मेरा दुःख आपका दुःख है, और आपका सुख मेरा सुख है। जब हम इस भावना से एक दूसरे से जुड़ते हैं, तो किसी भी संकट, आपदा या अकेलेपन में, एक मनुष्य दूसरे के लिए सहारा, शक्ति और उपचार बन जाता है। इस ‘कुटुम्ब’ की भावना के कारण ही सदियों से हमारे समाज में बिना किसी स्वार्थ के, दूसरों की सहायता की परम्परा रही है।
🚩🌺अतः, यह कथन कि ‘इंसान ही इंसान की दवा है’ सनातन धर्म के सिद्धांतों का पूर्ण समर्थन करता है। यह हमें सिखाता है कि जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत मुक्ति नहीं, बल्कि समष्टिगत कल्याण है। जब हम दूसरों के दुःख-दर्दों में उनके सहयोगी बनते हैं और उन्हें भावनात्मक सुकून प्रदान करते हैं, तो हम न केवल उनकी सेवा करते हैं, बल्कि स्वयं के आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। यह मानवीय सम्बन्धों की अटूट शक्ति ही है, जो हर कठिनाई में हमें थामे रखती है और जीवन को सार्थक बनाती है।
आज का राशिफल
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन आपके लिए बढ़िया रहने वाला है। आपका आत्मविश्वास मजबूत होने से आपके काम आसानी से पूरे होंगे। खर्चो पर आपको नियंत्रण रखना होगा। आप अपनी संतान की संगति पर विशेष ध्यान दें और यदि किसी सहयोगी से कोई वाद विवाद चल रहा है, तो आप उसे भी दूर करने की कोशिश करेंगे। आपका कोई पुराना लेनदेन चुकटा होगा, जो जातक सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे हैं, उन्हें कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती हैं।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन आपके लिए चुनौती पूर्ण रहने वाला है, लेकिन आप अपने संयम से उन चुनौतियों को भी डटकर सामना करेंगे। घूमने फिरने के दौरान कोई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। माता-पिता के आशीर्वाद से आपका कोई रुका हुआ काम पूरा होगा। आपको शारीरिक समस्याओं को नजरअंदाज करने से बचना होगा। आपके बॉस आपके कामों से काफी खुश होंगे, वह आपके प्रमोशन की बात आगे कर सकते हैं।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन आपके लिए किसी नए काम की शुरुआत करने के लिए अच्छा रहेगा। आपके चारों ओर का वातावरण खुशनुमा रहेगा, लेकिन आप किसी की कही सुनी बातों पर भरोसा बिल्कुल ना करें। किसी सदस्य के विवाह में यदि कोई बाधा आ रही थी, तो वह भी दूर होती दिख रही है। वाहन की खराबी के कारण आपका मन थोड़ा परेशान रहेगा। आपको अपने बढ़ते खर्चों को थोड़ा लिमिट करके चलने की आवश्यकता है।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज के दिन आपको किसी विपरीत परिस्थिति में धैर्य बनाए रखने के लिए रहेगा। कार्य क्षेत्र में कामों में कुछ समस्याएं आएंगी, इसलिए आप मिल बैठ कर दूर करने की कोशिश करेंगे। आपके पिताजी की सलाह आपके लिए कारगर सिद्ध होगी। भाई व बहनों से प्रॉपर्टी को लेकर कोई वाद विवाद खड़ा हो सकता है। किसी कानूनी मामले में अपनी आंख व कान खुले रखें। जीवन साथी को आप कहीं बाहर लेकर जा सकते हैं।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन आपके लिए कोई बड़ी उपलब्धि लेकर आने वाला है। आपकी नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी। परिवार में किसी शुभ व मांगलिक कार्यक्रम का आयोजन हो सकता है। आपको किसी लंबी दूरी की यात्रा पर जाने के योग बनते दिख रहे हैं। सरकारी योजनाओं का आपको पूरा लाभ मिलेगा। प्रेम संबंधों में निकटता आएगी। माता जी की किसी बात को लेकर कोई कहासुनी हो सकती है। आप किसी से कोई जरूरी जानकारी शेयर ना करें।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन आपके लिए धन-धान्य में वृद्धि लेकर आने वाला है। आप अपनी जिम्मेदारियां बखुबी निभाएंगे। परिवार में किसी नए मेहमान का आगमन हो सकता है। स्वास्थ्य में हल्की थकान महसूस होगी। आप अपने बिजनेस की योजनाओं पर अपने किसी पार्टनर से बातचीत कर सकते हैं। बैंकिंग क्षेत्रों में कार्यरत लोग किसी अच्छे स्कीम में इन्वेस्टमेंट करेंगे, जो आने वाले समय में बेहतर लाभ देगी। किसी मकान के खरीदारी के लिए आपको कोई लोन लेना पड़ सकता है।
तुला⚖ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन आपके लिए धैर्य व संयम से काम लेने के लिए रहेगा। परिवार में किसी नए मेहमान का आगमन हो सकता है। आपको कार्यक्षेत्र में टीम वर्क के जरिए काम करने का मौका मिलेगा। आप कोई निर्णय बहुत ही सोच विचार कर लें, क्योंकि जल्दबाजी के कारण कोई गलती हो सकती है। यदि आपने किसी काम को लेकर जोखिम उठाया, तो यह आपकी मुश्किलों को बढ़ा सकती है। माता-पिता के आशीर्वाद से आपका कोई रुका हुआ काम पूरा होगा।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन आपके लिए मान सम्मान में वृद्धि लेकर आने वाला है। अपनी धन संबंधी योजनाओं पर पूरा ध्यान देंगे। आपको किसी नई नौकरी का बुलावा आ सकता है। माता जी को सेहत में गिरावट आने से भागदौड़ थोड़ा अधिक रहेगी। आप अपने कामों को लेकर लापरवाही बिल्कुल ना करें। आपका बॉस से आपके रिश्ते बेहतर रहेंगे, लेकिन कुछ अजनबी आपको परेशान करने की कोशिश कर सकते हैं। आपको किसी पुरानी गलती से सबक लेना होगा।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
अच्छा रहने वाला है। किसी लंबी दूरी की यात्रा पर जाने के योग बनते दिख रहे हैं। आप अपने पारिवारिक मामलों को मिल बैठकर निपटाने की कोशिश करें। किसी अतिथि का आगमन होने से माहौल खुशनुमा रहेगा। परिवार के सदस्यों के साथ आप समय बिताएंगे। आपका कोई पुराना लेनदेन चुकटा होगा। माता-पिता के आशीर्वाद से आपका कोई रुका हुआ काम पूरा होगा।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन आपके लिए पार्टनरशिप में कोई काम करने के लिए रहेगा। अपनी जरूरत के हिसाब से खर्च करें, तो आपके लिए बेहतर रहने वाला है। पारिवारिक संबंध मजबूत होंगे और आपको अपने किसी पुराने मित्र से लंबे समय बाद मिलने का मौका मिलेगा। कोई काम यदि पेंडिंग था, तो आप उसे दूर करने की कोशिश करेंगे और बिजनेस में भी पुराने इन्वेस्टमेंट से अच्छा लाभ मिलने से आपकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन आपके लिए सामान्य रहने वाला है। आज आपकी सेहत में गिरावट आने से आपका मन प्रसन्न रहेगा। आर्थिक स्थिति को लेकर भी आपको थोड़ी टेंशन हो सकती है। आप अपने कामों में कुछ परिवर्तन करेंगे, जो आपके लिए अच्छे रहेंगे। किसी अजनबी पर भरोसा करना आपको नुकसान देगा। प्रेम जीवन जी रहे लोगों में चल रही अनबन भी ससुराल पक्ष के किसी व्यक्ति की मदद से दूर होती दिख रही है।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन आपके लिए सब बढ़िया रहने वाला है। आप अपने कामों में पूरी मेहनत से जुटेंगे। यदि कोई काम लंबे समय से रुका हुआ था, तो आज उसे भी पूरा करके ही दम लेंगे। आपको यदि कोई सेहत संबंधी समस्या चल रही थी, तो उसमें भी सुधार आएगा। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी। परिवार के सदस्यों में प्रेम व सहयोग की भावना बनी रहेगी और प्रतिस्पर्धा का भाव आपके मन में बना रहेगा। कुछ नया करने की इच्छा जागृत होगी।

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