Vaidik Panchang 28112025 Rashifal Samadhan

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 28 नवम्बर 2025*
🌤️ *दिन – शुक्रवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – हेमंत ऋतु*
🌤️ *मास – मार्गशीर्ष*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – अष्टमी रात्रि 12:15 तक तत्पश्चात नवमी*
🌤️ *नक्षत्र – शतभिषा 29 नवम्बर रात्रि 02:49 तक तत्पश्चात पूर्वभाद्रपद*
🌤️ *योग – व्याघात सुबह 11:05 तक तत्पश्चात हर्षण*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 11:04 से दोपहर 12:27 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:58*
🌤️ *सूर्यास्त – 05:54*
👉 *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – पंचक*
💥 *विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है (ब्रह्मवैवर्त पुराण ब्रह्म खण्ड: 27,29,34)*
          🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️

🌷 *दीर्घायु और आरोग्य वृद्धि के लिए* 🌷
🙏🏻 *विष्णु धर्मोत्तर ग्रंथ में बताया है कि जिनके परिवार में ज्यादा बीमारी …..जल्दी-जल्दी किसी की मृत्यु हो जाती है वे लोग मार्गशीर्ष मास में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन (दशमी तिथि के स्वामी यमराज है मृत्यु के देवता | ) भगवान धर्मराज यमराज का मानसिक पूजन करें, और हो सके तो घी की आहुति दें |*
🙏🏻 *एक दिन पहले से हवन की छोटी सी व्यवस्था कर लेना घी से आहुति डाले इससे दीर्घायु, आरोग्य और ऐश्वर्य तीनों की वृद्धि होती है विष्णु धर्मोत्तर ग्रंथ में बताया है | आहुति डालते समय ये मंत्र बोले–*
💥 *विशेष – [ ध्यान रखे जिसके घर में तकलीफे है वो जरुर आहुति डाले और डालते समय स्वाहा बोले और जो आहुति न डाले तो वो नम: बोले | ]*
🌷 *ॐ यमाय नम:*
🌷 *ॐ धर्मराजाय नम:*
🌷 *ॐ मृत्यवे नम:*
🌷 *ॐ अन्तकाय नम:*
🌷 *ॐ कालाय नम:*
🙏🏻 *ये पाँच मंत्र बोले ज्यादा देर तक आहुति डाले तो भी अच्छा है |*
🙏🏻 *अकाल मृत्यु घर में न हो, जल्दी-जल्दी किसी की मृत्यु न हो उसके लिए घर में अमावस्या के दिन गीता का सातवां अध्याय पढना चाहिये | पाठ पूरा हो जाय तो सूर्य भगवान को अर्घ्य देना चाहिये कि हमारे घर में सबकी लंबी आयु हो और जो पहले गुजर गये है हे भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और आज के गीता पाठ का पुण्य ये उनको पहुँचे | ॐ नमो भगवते वासुदेवाय करके वो जल चढ़ा दे |*
🙏🏻 *और हो सके तो ….भगवान ने पैसा दिया हो थोडा बहुत तो उस अमावस्या को गरीब बच्चों – बच्चीयों को चार–पाँच बच्चों को खाना देकर आये सब्जी-रोटी थोडा कुछ मीठा हलवा बना ले थोडा-सा गरीब बच्चों को दे आये | सेवा भी हो जायेगी और जो गुजर गये है वो हम पर राजी हो जायेंगे |*
💥 *विशेष – 30 नवम्बर 2025 रविवार को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है।*
🙏🏻
               🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

श्रीहरि पूजन मे विशिष्ट सामग्रीयो के महत्त्व का वर्णन
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
ब्रह्मा ने कहा 👉  हे भगवान, महिमामय तुलसी की महिमा का सटीक वर्णन करें, जिनकी उपस्थिति मात्र से आपको बहुत खुशी मिलती है।

श्री भगवान ने कहा 👉 आभूषण, स्वर्ण-पुष्प और मोती (जब चढ़ाए जाते हैं) तो तुलसी का पत्ता चढ़ाने से मिलने वाले पुण्य का सोलहवां हिस्सा भी नहीं मिलता।  जो तुलसी के अंकुरों से मेरी पूजा करता है, वह गर्भ में प्रवेश नहीं करता (नया जन्म लेता है)। उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.

तुलसी उगाकर उसके पत्तों से मेरी पूजा करनी चाहिए। वह स्वर्ग के साथ-साथ श्वेत द्वीप में मेरे निवास में भी आनन्द मनाएगा । यदि कोई व्यक्ति कम से कम एक बार तुलसी के शुद्ध, सुगंधित और अखंडित पत्तों से मेरी पूजा करता है, तो यम उस व्यक्ति के पाप को मिटा देते हैं, जिसे वह लिखा हुआ देखता है।

यदि लोग मेरी पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एकत्र नहीं करते हैं, तो उनकी जवानी, जीवन, धन और संतान पर धिक्कार है! उनसे इहलोक और परलोक की ख़ुशी देखी नहीं जाती.

मार्गशीर्ष माह में तुलसी के पत्तों से पूजित मेरी मूर्ति के दर्शन करने से मनुष्य को ब्राह्मण -हत्या के पाप से मुक्ति मिल जाती है। यदि कोई सदैव तुलसी सहित मुझ प्रभु राम की पूजा करता है , तो उसके बड़े-बड़े पाप नष्ट हो जाते हैं। छोटे-मोटे पापों का तो कहना ही क्या!

यदि किसी फूल को तोड़ने के बाद काफी समय बीत गया हो तो उसे फेंक देना चाहिए। यदि पानी लंबे समय से (कुएं आदि से) निकाला गया हो तो उसे त्याग देना चाहिए। तुलसी के पत्ते को बिल्कुल भी त्यागने की आवश्यकता नहीं है (चाहे वह बासी ही क्यों न हो)। गंगा जल को बिल्कुल भी त्यागने की आवश्यकता नहीं है। जब तक पवित्र तुलसी, मेरी पसंदीदा पत्ती, उपलब्ध नहीं है, हे पुत्र, तब तक मालती और अन्य फूल गरजते हैं (अर्थात उनकी प्रभावशीलता का दावा करते हैं)।

जो मनुष्य कम से कम एक बार बिल्व पत्र से मेरा पूजन करेगा, वह कष्ट से मुक्त हो जाएगा। वह मेरे पास आयेगा और मोक्ष प्राप्त करेगा। तुलसी का पत्ता बिल्व पत्र, शमी पत्ता, जाति पत्ता, कमल और (यहाँ तक कि) कौस्तुभ रत्न से भी अधिक मुझे प्रिय है ।

बिना टूटे पत्तों वाला तुलसी के फूलों मंजरी का समूह मेरे हृदय को दूध के सागर से निकली इस पद्मा (देवी लक्ष्मी ) के समान प्रिय है। जिस प्रकार द्वादशी (बारहवाँ दिन), चाहे वह कृष्ण पक्ष का हो या शुक्ल पक्ष का, मेरा पसंदीदा है, उसी प्रकार तुलसी का पत्ता, चाहे वह काला हो या नहीं, मेरा पसंदीदा है। यदि कोई मनुष्य तुलसी का पत्ता लेकर भक्तिपूर्वक मेरी पूजा करता है, तो उससे देवता , असुर और मनुष्य सहित सभी लोग पूजा करते हैं।

जब तक काली  तुलसी का गहरा अंकुर उपलब्ध नहीं होता, तब तक कौस्तुभ जैसे असंख्य रत्न और रत्न गर्जना करते हैं (अर्थात् अपनी प्रभावकारिता का बखान करते हैं)।

जो व्यक्ति भक्तिपूर्वक कृष्णतुलसी से कृष्ण की पूजा करता है , वह उस उज्ज्वल लोक को प्राप्त करता है जहां विष्णु श्री के साथ मौजूद हैं।

जो लोग मेरी पूजा करने के लिए भिक्षुकों और अन्य भक्तों को तुलसी के पत्ते देते हैं, वे अपरिवर्तनीय क्षेत्र ( मोक्ष ) को जाते हैं।

जो व्यक्ति गहरे और सफेद रंग की तुलसी से मेरी पूजा करता है, वह शरीर त्यागने के बाद शाश्वत वैष्णव लक्ष्य को प्राप्त करता है।

ब्रह्मा ने कहा👉 हे केशव , मुझे धूप चढ़ाने की महिमा  तथा दीप चढ़ाने से होने वाले लाभ के बारे में सच-सच बताओ।

श्री भगवान ने कहा👉 हे पुत्र, सुन, मैं तुझे धूप का लाभ और दीपक का फल बताऊंगा। यह मेरे लिए अत्यंत आनंददायक है.

मार्गशीर्ष माह में मुझे , कपूर और सुगंधित दिव्य चंदन से धूप देने से, भक्त अपने परिवार की सौ पीढ़ियों का उद्धार करेगा। जो वैष्णव काले घृत की लकड़ी से उत्पन्न धूप से मेरे मंदिर को धूनी देता है, वह नरकस (नरक) के समुद्र से मुक्त हो जाता है।

यदि कोई व्यक्ति मुझे  घी और मिश्री के साथ सुगंधित गोंद की धूप देता है , तो मैं उसे वह सब कुछ देता हूं जो वह चाहता है। गोंद-राल की धूनी देने से सभी विपत्तियाँ दूर हो जाती हैं। काले घृत की लकड़ी विभिन्न प्रकार की अभिलाषाएँ प्रदान करती है। धूप शरीर और निवास को पवित्र करती है। साल वृक्ष  के रसयुक्त द्रव्य की धूप से यक्ष और राक्षस नष्ट हो जाते हैं ।

धूप में दस इकाइयाँ या सामग्रियाँ होती हैं। वे हैं: जाति फूल, इलायची, गोंद-राल, हरितकी  कूट (एक प्रकार का चंदन, साला वृक्ष का स्राव, गुड़, सैला  और अचदा के साथ नखा।

यदि कोई मुझे मार्गशीर्ष महीने में, जो मुझे अत्यंत प्रिय है, दसों सामग्रियों से युक्त धूप अर्पित करता है, तो मैं उसे अत्यंत दुर्लभ वस्तुएँ, शक्ति, पोषण, पुत्र, पत्नी और भक्ति भी प्रदान करता हूँ।

गुड़ शुभता और दूसरों पर विजय पाने में सहायक होता है। जो मार्गशीर्ष मास में मेरे समक्ष इसे अर्पित करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर मुझे प्राप्त होता है।

जिसके अंग मुझे चढ़ाए हुए धूप के अवशेष से पोंछे जाते हैं, उसे स्वर्ग, पृथ्वी या वायुमंडल से किसी प्रकार का भय नहीं रहता। यदि मार्गशीर्ष माह में मेरे सामने निरंतर बड़ी श्रद्धा से धूप अर्पित की जाए तो मनुष्य को कोई विपत्ति नहीं आती। उसके पास सभी प्रकार का धन होगा।

धूप सुन्दरता प्रदान करती है। धूप अत्यधिक पवित्र करने वाली होती है। वृक्ष का स्राव दिव्य होता है। यह अत्यंत शुद्ध एवं पवित्र करने वाला है।

अब मैं दीप की उत्कृष्ट प्रभावकारिता का वर्णन करूंगा।  यदि इन्हें अर्पित किया जाए तो मनुष्य निस्संदेह वैकुण्ठ को जाता है ।

जो बहुत सी बातियों का दीपक घी से भरकर विधिपूर्वक प्रज्वलित करता है, वह एक करोड़ कल्प तक स्वर्ग में निवास करता है। जो मार्गशीर्ष महीने में मेरे सामने प्रकाश करेगा वह सात जन्मों तक ब्राह्मण के रूप में जन्म लेगा और अंत में उच्चतम लोक को प्राप्त करेगा।

हे श्रेष्ठ ब्राह्मण, जो श्रद्धापूर्वक मेरे सामने कपूर जलाएगा, वह मुझ अनंत में प्रवेश करेगा। यदि नीराजन किया जाता है, तो हे पुत्र, सब कुछ पूर्ण रूप से पूरा हो जाता है, भले ही मेरे लिए की गई पूजा मंत्रों और (निर्धारित) अनुष्ठानों से रहित हो। जो मार्गशीर्ष माह में कपूर का दीपक जलाता है, उसे अश्व-यज्ञ का फल प्राप्त होता है।

जो मेरे सामने या ब्राह्मणों के सामने और चौराहे पर दीपक जलाता है, वह अत्यधिक बुद्धिमान, पूर्ण ज्ञान से परिपूर्ण और तीव्र दृष्टि वाला होता है।

जो मनुष्य मार्गशीर्ष माह में मेरे सामने घी या तेल का दीपक जलाता है, उसका पुण्य सुनो। वह अपने सभी पापों से छुटकारा पा लेता है। वह हजारों सूर्यों के समान देदीप्यमान हो जाता है। एक चमकदार हवाई विमान में वह मेरी दुनिया में जाएगा जहां उसका सम्मान किया जाएगा।

अत: चतुर भक्त को हर प्रकार से दीपदान करना चाहिए। जो कोई इसे चढ़ाने के बाद बाहर रख देता है, वह निश्चय ही नरक में गिरेगा।

हे श्रेष्ठ ब्राह्मण, जो पापी लालच या घृणा के कारण दीपक को हटा देता है, वह दीपक को हटा देने के कारण अंधा और गूंगा हो जाता है।

Har Har Mahadev

*क्यों हर और हरि, दोनों को प्रिय है हरद्वार और हरिद्वार।*
हरद्वार जिसे हरिद्वार के नाम से भी जाना जाता है। इसकी महिमा अनन्त है, जिसे शास्त्रों अथवा पुराणों में बहुत गाया और बताया गया है लेकिन ये महिमा क्यों है? इसके कारण क्या हैं?

१. हरद्वार को सर्वप्रथम हर का द्वार कहा जाता है क्योंकि हरद्वार अर्थात हर (देवो के देव महादेवजी) के कैलाश से जुड़ी पर्वत श्रृंखलाओं के पर्वत हरद्वार से शुरू होते हैं, जो हर (देवाधिदेव महादेव) के द्वार कैलाश तक जाते हैं और हरद्वार महादेवजी का अत्यंत प्रिय स्थान भी है। इसी कारण से भी इसे हर का द्वार कहा जाता है द्वार हर तक जाने का।

२. हरिद्वार वह स्थान है जो संसार मे दूसरे स्थान पर बसा था अर्थात पृथ्वी पर सर्वप्रथम काशी मुक्तिक्षेत्र अर्थात आनंदवन की रचना हुई थी जिसे भगवान सदाशिव ने अपने शिवलोक में त्रिशूल से रचकर धरती पर स्थापित किया जो मुक्ति देने वाली काशी के नाम से त्रिलोक में विख्यात है। उसके बाद ब्रह्मा जी ने अपने पुत्र दक्ष प्रजापति को राज करने के लिए धरती पर जो स्थान प्रदान किया वो हरिद्वार ही था। यहीं पर राजा दक्ष ने अपनी नगरी बसाई थी और यहीं पर वो राज करते थे। यही दक्षपुरी के नाम से पुराणों में वर्णित स्थान है। ये संसार में बसा दूसरा नगर था। पहला काशी दूसरा हरिद्वार इसलिए भी इसकी महिमा है।

३. हरिद्वार में कुम्भ से छलका अमृत गिरा था जिसे स्वर्भानु नामक दैत्य लेकर भाग रहा था जो बाद में विष्णु भगवान के द्वारा सर-विच्छेद के कारण राहु केतु के रूप में जाना गया और नवग्रहों में स्थापित हुआ। अमृत छलककर गिरने के कारण भी हरिद्वार की महिमा बढ़ी और ये कुंभनगरी बना जहां हर 12 वर्ष बाद कुम्भ होने लगा।

४. पुराणों और शोध में मिले तथ्यों से स्पष्ट हुआ है कि धरती पर सर्वप्रथम भगवान विष्णु के चरण जिस स्थान पर पड़े वो हरिद्वार ही था। बाद में हरिद्वार के मायापुरी क्षेत्र में ही भगवान विष्णु और माता महालक्ष्मी का विवाह संपन्न हुआ था।

इन्हीं दोनों कारणों से ये स्थान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय हुआ और इसे भगवान हरि ने अपने नाम से सम्बोधित करके हरिद्वार बनाया तबसे इसके दो नाम पड़े हर का द्वार हरद्वार और हरि का भी द्वार हरिद्वार। संसार का पहला क्षेत्र जो हर और हरि दोनों को अतिप्रिय है और दोनों के नाम से जाना जाता है।

५. राजा दक्ष ने परमेश्वरी माता आदिशक्ति की तपस्या करके उनसे पुत्री रूप में अपने घर जन्म लेने का वर मांगा था तो माँ उसके घर पैदा हुई। राजा दक्ष की पुत्री सती के रूप मे आदिशक्ति स्वरूपा भगवती माता सती का जन्म इसी हरिद्वार में हुआ था।

यहीं उनका बालपन और युवावस्था गुजरी। यहीं पर उन्होंने तप करके महादेवजी को पति रूप में प्राप्त किया तब भगवान महादेवजी ब्रह्मा, विष्णुजी, इंद्र, सूर्य,चन्द्र आदि देवों व लक्ष्मी, सरस्वती, इंद्राणी, गायत्री आदि देवियों और ऋषि मुनियों तथा अपने गणों सहित बारात लेकर यहां पर आए थे और माता सती से विवाह किया था। इस कारण से भी हरिद्वार की महानता बढ़ती है।

६. राजा दक्ष ने विश्व विख्यात जो यज्ञ किया था वो भी हरिद्वार के कनखल क्षेत्र में ही किया था जहां राजा दक्ष का महल था।

७. गंगोत्री जहां से गंगाजी का उद्गम है उसका रास्ता भी हरिद्वार से होकर ही जाता है। गंगाजी हरिद्वार से होकर ही अन्य स्थानों पर जाती हैं, इसीलिये इसकी महिमा माँ गंगा की कृपा से और भी बढ़ गयी है।

८. चारधाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ तक जाने से पूर्व हरिद्वार में पूजन करना अनिवार्य है जो देव आज्ञा है शास्त्रों अथवा पुराणों में क्योंकि चारधाम तक जाने का मार्ग भी हरिद्वार से होकर ही जाता है।

९. महादेवजी की पुत्री माता मनसा जो वासुकि नागों के राजा की बहन थी उनका निवास स्थान भी हरिद्वार में ही है जो माँ मनसा देवी के नाम से विख्यात है जहां हजारोन भक्तगण प्रतिदिन माँ के दर्शन करने दूर दूर से आते है। मन की कामना पूरी करने के कारण माँ को मनसा देवी कहा जाता है।

१०. रामायणकाल में अहिरावण और महिरावण श्रीराम को जब पाताल में देवी के सामने बलि देने के लिए ले गए थे तो महादेवजी के अवतार हनुमानजी ने देवी से श्रीराम की बलि टालने का आग्रह किया था तब देवी ने हनुमानजी से कहा था, मैं इस पातालपुरी को त्यागकर शिवपुरी अर्थात हरिद्वार की पर्वत श्रृंखला पर जा रही हूं। तुम इन दोनों असुरों की बलि मुझे दो जिससे मुझे प्रसन्नता होगी और पाताल में धर्म स्थापना होगी तब जो देवी पाताल से उठकर हरिद्वार के पर्वतों पर विराजी वो माँ चंडीदेवी के नाम से विश्व विख्यात है।

रामायणकाल में रावण को जीतने के बाद और अयोध्या आने के बाद श्रीराम ने सीताजी, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमानजी महाराज सहित यहां आकर माता के दर्शन किये थे और माँ चंडीदेवी का आशीर्वाद लिया था।

११. माता सती ने जब दक्ष यज्ञ में अपनी देह को यज्ञकुंड में जला दिया था तब महादेव जब उनकी देह लेकर बहुत समय तक पृथ्वी भ्रमण करते रहे और उन्होंने संसार को भुला दिया तब विष्णुजी ने अपने चक्र से सती माता के शरीर को ५२ भागों में विच्छेद किया था, जिनमें से माता सती का हृदय हरिद्वार में गिरा था और मायादेवी के नाम से विख्यात हुआ। ये मायादेवी हरिद्वार के निवासियों की कुल देवी बनी और हरिद्वार की महिमा और बढ़ गई।

१२. ऋषि, मुनियों, अवतारों तथा देवी देवताओं की अतिप्रिय स्थली होने के कारण ही इसे देवभूमि हरिद्वार भी कहते हैं।

१३. जिस पहाड़ की चोटी पर बैठकर महादेव ने दक्ष यज्ञ विध्वंस हेतु वीरभद्र, देवी महाकाली, भैरव, क्षेत्रपाल, नंदी, नवदुर्गा आदि सेना का नेत्तृत्व किया था वो पहाड़ की चोटी भी हरिद्वार में ही है जो नीलपर्वत के नाम से जानी जाती है।

१४. हरिद्वार संसार का एक मात्र स्थान है जो महादेव, आदिशक्ति, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी इन चारों को अतिप्रिय है, इसीलिए यहां पर पूरे वर्ष हर, हरि और माँ के भक्तों का आवागमन लगा रहता है। श्रद्धालु दूर दूर से इस दिव्य स्थान पर दर्शन हेतु आते हैं।

१५. भीम ने अपने गोडे तक जल भरकर जिस स्थान पर तप किया था वो भीमगोडा कहलाया, जो हरिद्वार में ही है। हरिद्वार की महिमा अनन्त है जो सतयुग से महाभारत काल तक की अनेक कथाओं और चमत्कार से भरी हुई है।

’ *विषय – वासुदेव: सर्वम्* ।’
    देखो केवल भूल  है । केवल परमात्मा हैं । भूल होने से संसार है । संसार भी परमात्मा ही है । भागवत में आया है – संसार भगवान् का आदि अवतार है । तो अनेक रूपों में भगवान् हैं । जान लें, जान । केवल भूल है । भूल को भूल जानना है । परमात्मा ही स्वयं आदि अवतार हैं । वासुदेव: सर्वम् । सर्वम् भी संसार के कारण है । नहीं तो वासुदेव ही है ।
हरि हेरयां सब जगह मिले हरिजन कहीं एक होय । हजारों में कोई एक सिद्धि के लिए यत्न करता है । उनमें भी कोई ही तत्त्व से जानता है । *जानकार का मिलना दुर्लभ है । जानकार मिल जाए तो बहुत फायदा है । तब तो सुगम हो जाता है ।*
’ *जेहिं के जेहिं पर सत्य सनेहू’ ।*
*’सो तेहि मिलत न कछु संदेहु’* ।।
कोई मनुष्य हो । देश का हो, विदेश का हो । हिंदू हो, मुसलमान हो, इसाई हो, कोई हो । गांव के गांव हैं, सुनने को भी सत्संग की बातें नहीं मिलती । कौन सुनावे ?  जानकार कम हैं । अपने यहां सेठ जी के कारण भाई जी हो गए और कई हो गए । हमारे सामने गीता प्रेस हुआ इसका उद्देश्य ही है किसी तरह से कल्याण हो जाए, उद्धार हो जाए । लोग रुपयों के लिए काम करते हैं । यहां (गीता प्रेस में) रुपयों के लिए नहीं है । कलियुग के सामने गीताप्रेस ने काफी काम किया है । एक नई लहर पैदा हो गई । लाखों लोग लग गए।  भगवान् की विशेष कृपा हो गई । जिस पर राम जी की कृपा होती है, वह इस मार्ग में आता है । भगवान् की कृपा दिखती है प्रत्यक्ष । भगवान् की कृपा है । तीन चीज दुर्लभ हैं । मनुष्य शरीर, मोक्ष की इच्छा और साधन हो जाए । तो साधन मिलता नहीं है । छिपी हुई बात है, छिपी हुई । संत महात्माओं ने प्रकट किया है । अरे ! भाई इधर आओ, इधर । बिना हेतु के कृपा करके मनुष्य शरीर दे दिया, मोक्ष का द्वार मनुष्य शरीर । लोग कहते हैं कलियुग का समय है । अरे ! कलियुग का समय तो बढ़िया होता है । रुपयों के लिए दूर-दूर जाता है । ऐसे भगवान् के लिए पुरुषार्थ करे । इस मानव शरीर में बुद्धि में प्रकाश दिया है । विवेक दिया है । विवेक से जानकार हो जाता है । मन में उत्साह रखने से कठिन काम भी सुगम हो जाता है । उत्साह नहीं होने पर सुगम काम भी कठिन हो जाता है । कैसी कैसी बातें आई हैं । कैसा मौका ? उत्साह । अपने नि:शंक हो जाओ । आश्चर्य आवे ऐसी चीज – हिंदुओं में मिलती है । अन्य जगह नहीं मिलती । यह उत्साह की बात है । माताओं ने पुत्रों को लगा दिया (भगवान् में) । मदालसा मां ने सब पुत्रों को लगा दिया । मदालसा के बेटों को राज्य की कीमत नहीं रही । ऐसी पूजनीय माता भी हैं । अपने देश में कैसे-कैसे शूरवीर हुए हैं ? माताएं हुई हैं ।  यह साधन से नहीं होती । भगवान् की कृपा से होता है । अपने तो मिलता है स्वत: ही । सेठ जी ने बहुत विलक्षण काम किया है । सेठ जी ने अपनी जाति में जागृति कर दी । यह मामूली बात नहीं है । सच्चाई के साथ में । बहुत विलक्षण बात । हजारों में कोई एक ही सच्चे हृदय से लगता है । अपने तो उत्साह से  लग जाओ भाई ।

नारायण ! नारायण !! नारायण !!! नारायण !!!

🙏🚩🙏
🌷 *तुलसी को पानी अर्पण से पुण्य* 🌷
🌿 *अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाना चाहिए उसकी हवा से भी बहुत लाभ होते हैं और तुलसी को एक ग्लास पानी अर्पण करने से सवा मासा सुवर्ण दान का फल मिलता है।*
🙏🏻
             🕉️ *~ हिन्दू पंचांग ~* 🕉️


🙏🌹🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🌷🙏🌹

जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष🌹

दिनांक 28 को जन्मे व्यक्ति राजसी प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। 2 और 8 आपस में मिलकर 10 होते हैं। इस तरह आपका मूलांक 1 होगा। आपको अपने ऊपर किसी का शासन पसंद नहीं है। आप साहसी और जिज्ञासु हैं। आपका मूलांक सूर्य ग्रह के द्वारा संचालित होता है। आप अत्यंत महत्वाकांक्षी हैं।

आप आशावादी होने के कारण हर स्थिति का सामना करने में सक्षम होते हैं। आप सौन्दर्यप्रेमी हैं। आपमें सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला आपका आत्मविश्वास है। इसकी वजह से आप सहज ही महफिलों में छा जाते हैं। आपकी मानसिक शक्ति प्रबल है। आपको समझ पाना बेहद मुश्किल है।


आपके लिए खास

शुभ दिनांक : 1, 10, 20, 28

शुभ अंक : 1, 10, 20, 28, 37, 46, 55, 64, 73, 82


शुभ वर्ष : 2026, 2044, 2053, 2062

ईष्टदेव : सूर्य उपासना तथा मां गायत्री

शुभ रंग : लाल, केसरिया, क्रीम,


आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
करिया: नौकरीपेशा के लिए समय उत्तम हैं। पदोन्नति के योग हैं। यह वर्ष आपके लिए अत्यंत सुखद रहेगा। अधूरे कार्यों में सफलता मिलेगी। बेरोजगारों के लिए भी खुशखबर है इस वर्ष आपकी मनोकामना पूरी होगी।

परिवार: पारिवारिक मामलों में महत्वपूर्ण कार्य होंगे। अविवाहितों के लिए सुखद स्थिति बन रही है। विवाह के योग बनेंगे।


सेहत: स्वास्थ्य की दृष्टि से यह वर्ष उत्तम रहेगा।


🌹 आज का राशिफल 🌹
*दिनांक : 28 नवम्बर 2025*

मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आपके लिए आज का दिन भी लाभदायक रहेगा। दिन के आरंभ में अवश्य थोड़ी सुस्ती रहेगी इसके बाद का समय व्यस्त रहेगा। कार्य क्षेत्र के साथ ही आज अन्य काम भी आने से थोड़ी असुविधा होगी परन्तु तालमेल बैठा ही लेंगे। नौकरी वाले लोगो को अधिकारी वर्ग के गंभीर रहने से थोड़ी परेशानी तो होगी लेकिन इसका परिणाम बाद में लाभदायक रहेगा सही समय पर कार्य पूर्ण होंगे। व्यवसायी वर्ग आज लेदेकर काम चलाने की नीति अपनाएंगे खर्च करने पर ही लाभ की स्थिति बन सकेगी। महिलाये भी आज भविष्य के लिए संचय कर सकेंगी।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन आपके लिए सौभाग्य में वृद्धि करने वाला रहेगा। परिवार में सुख शांति रहेगी कार्य व्यवसाय में भी कई दिन से चल रही योजना के सफल होने पर उत्साह का वातावरण बनेगा। धन लाभ आज आकस्मिक और आशाजनक ही होगा। भविष्य की योजनाओ के साथ पारिवारिक आवश्यकता की पूर्ति पर भी खर्च होगा। आज मीठा बोलने वालों से दूरी बना कर रहें अन्यथा जेब ढीली करनी पड़ेगी। महिलाये घरेलू कार्यो से ऊबन अनुभव करेंगी फिर भी जिम्मेदारी समय पर पूर्ण कर लेंगी। मित्र रिश्तेदारों के ऊपर खर्च करना पड़ेगा इनसे लाभ भी होगा।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन आपके लिए शांतिदायक रहेगा। ईश्वरीय आराधना भजन-पूजन में निष्ठा रहने से मानसिक रूप से विचलित नही होंगे। कार्य व्यवसाय भी पहले की अपेक्षा बेहतर चलेगा परन्तु धन की आमद होने में कुछ ना कुछ विघ्न अवश्य आएंगे। सहकर्मी भी मनमानी करेंगे जिससे कार्य विलम्ब से पूर्ण होंगे बीच मे कहासुनी होने की भी संभावना है। कार्य क्षेत्र की अपेक्षा आज घर का वातावरण व्यस्त होने पर भी शांति की अनुभूति कराएगा। धार्मिक यात्रा के प्रसंग उपस्थित होंगे। संध्या का समय थकान रहने से आराम में बिताना पसंद करेंगे। स्त्री संतान का सुख सामान्य रहेगा।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन आपके लिए आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टि से अशुभ रहेगा। सेहत में दिन भर उतार चढ़ाव लगा रहेगा। कार्य व्यवसाय एवं आर्थिक कारणों से मानसिक अशांति रहेगी। महिलाये भी आज पेट, कमर एवं अन्य शारीरिक अंगों में अकड़न-दर्द रहने से परेशान होंगी। कार्य व्यवसाय पर धन लाभ तो होगा लेकिन व्यर्थ के खर्च बढ़ने से तुरंत खर्च भी हो जाएगा। यात्रा की योजना आज टालना बेहतर रहेगा। खर्च के साथ दुर्घटना के भी योग है घर मे भी उपकरणों पर सावधानी से कार्य करें। पूजा पाठ में भी कम ही मन लगेगा। तंत्र-मंत्र के रहस्यों का प्रति रुचि बढ़ेगी।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज के दिन आपको अपने अधिकांश कार्यो में विजय मिलेगी। सोच विचार कर ही किसी कार्य को करेंगे। आज धन लाभ प्रयास करने पर अवश्य होगा। सरकारी कार्यो में जोड़ तोड़ करके सफलता पा लेंगे। कार्य क्षेत्र पर आज आपका दबदबा रहेगा विरोधी आपके आगे आने की हिम्मत नही करेंगे। सहकर्मियों से बीच मे मतभेद होंगे निराकरण भी तुरंत हो जाएगा। घरेलू सुख भी आज उत्तम रहेगा। सुख सुविधा जुटाने पर खर्च करेंगे। लेकिन बाहर के खान-पान में संयम रखें बदहजमी गैस आदि की परेशानी हो सकती है। घर के बुजुर्ग से शुभ समाचार मिलेंगे।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज के दिन आपको परिश्रम का उचित फल मिल सकेगा। कार्य व्यवसाय में थोड़ी मेहनत के बाद उत्साहजनक लाभ मिलेगा सहकर्मी आज आपसे ईर्ष्या करेंगे लेकिन आपकी दिनचार्य एवं व्यक्तित्त्व पर इसका कोई असर नही पड़ेगा। कुछ दिनों से चल रही धन संबंधित उलझने शांत होंगी। मन इच्छित कार्यो पर खर्च कर सकेंगे फिजूल खर्ची भी रहेगी लेकिन पारिवारिक खुशी के आगे व्यर्थ नही लगेंगे। सार्वजनिक कार्यो में आज कम रुचि लेंगे महिलाये भी आज अपने आओ में ही ज्यादा मस्त रहेंगी। पारिवारिक वातावरण छोटी मोटी बातो को छोड़ शांत ही रहेगा। सेहत सामान्य रहेगी।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज के दिन आप अपने दिमाग पर कुछ ज्यादा ही जोर डालेंगे अनिर्णायक स्थिति रहने के कारण अधिकांश कार्य अधूरे रह जाएँगे या निरस्त भी करने पड़ सकते है। नौकरी वाले लोगो को अतिआत्मविश्वास के कारण कार्य मे हानि होंगी। व्यवसायी वर्ग भी आज लापरवाही करेंगे जिसके फलस्वरूप कार्य क्षेत्र पर अव्यवस्था फैलेगी जिसे सुधारना आज मुश्किल ही रहेगा। धन लाभ आज परिश्रम करने पर भी अल्प मात्रा में ही होगा। पारिवारिक स्थिति भी समय से मांग पूरी ना कर पाने पर खराब होगी। महिलाये अहसान जता कर कार्य करेंगी। संतान सुख भी कम ही रहेगा।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन सावधानी से व्यतीत करें। आज आप बड़बोलेपन के कारण कलह को स्वयं ही आमंत्रण देंगे। प्रातः काल मे ही परिजन अथवा किसी आस-पड़ोसी से कलह के प्रसंग बनेंगे जिसके कारण मध्यान तक मन मे आवेश बना रहेगा। महिलाओ से आज संयमित व्यवहार रखें अन्यथा पूरी दिनचार्य खराब हो सकती है।  कार्य क्षेत्र पर भी किसी ना किसी से छोटी-छोटी बातों पर उलझने के कारण काम-काज प्रभावित होगा सामाजिक सम्मान में भी आज कमी आएगी। आर्थिक कारणों से भी उलझे रहेंगे धन की आमद खर्च निकलने लायक भी नही रहेगी। शान्त रहने का प्रयास करें।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज के दिन दौड़ धूप तो रहेगी लेकिन इसका सकरात्मक परिणाम भी मिलेगा। व्यवसाय में आज निश्चिन्त होकर कार्य करें जोखिम लेने से ना डरें मध्यान तक की मेहनत का फल संध्या के आस-पास मिलने लगेगा। धन का निवेश भी आज दुगना होकर ही वापस आएगा। अधिकारी वर्ग की नरमदिली कार्यो को आसान बनाएगी। सरकार सम्भाधित कार्य आज पूर्ण हों सकते है प्रयास करते रहें। महिलाये अधिक बोलने की आदत के कारण हास्य की पात्र बनेगी लेकिन गृहस्थ को संभालने में सहायक भी रहेंगी। पैतृक सम्बन्धित कार्यो अथवा पिता से लाभ होगा।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन आपके लिए संतोषजनक रहेगा। आप आवश्यकता रहने पर भी आर्थिक मामलों को ज्यादा महत्त्व नही देंगे। सहज रूप से जितना मिल जाएगा उसी में संतोष कर लेंगे। मध्यान तक आलस्य अधिक रहने के कारण कार्यो में सुस्ती दिखाएंगे इसके बाद का समय बेहतर रहेगा कही से आकस्मिक लाभ के समाचार मिलने से उत्साहित होंगे साथ ही निश्चिन्त होने पर लापरवाही भी बढ़ेगी। नौकरी वाले जातक अधिकारियों से किसी कारण नाराज रहेंगे। महिलाये मानसिक रूप से शांत रहेंगी परन्तु व्यवहारिकता में रूखापन
दिखाएंगी। परिवार में नासमझी के कारण तनाव हो सकता है।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन पिछले दिनों की अपेक्षा राहत भरा रहेगा। शारीरिक रूप से भी आज पहले से बेहतर अनुभव करेंगे। बुजुर्गो की सेहत में सुधार आयेगा। व्यावसायिक क्षेत्र पर आज आरम्भ में असमंजस की स्थिति रहेगी परन्तु धीरे -धीरे गाड़ी पटरी पर आने लगेगी। दिन के अंतिम भाग में बिक्री में तेजी आने से धन की आमद होगी। प्रतिस्पर्धियों से बहस के प्रसंग भी बनेंगे इससे बचने का प्रयास करें। पैतृक संबंधों से भी भविष्य में लाभ की उम्मीद बनेगी। दाम्पत्य सुख में थोड़ी नीरसता रहने पर भी बाहर की अपेक्षा शांति का अनुभव होगा। संताने सहयोगी रहेंगी।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन आपको घर एवं बाहर कुछ ना कुछ हानि कराएगा। आज प्रत्येक कार्य को देख भाल कर ही करें। अतिआवश्यक कार्य यथा संभव आज टाल ही दें अन्यथा समय के साथ धन की भी बर्बादी होगी। सरकारी कार्य नियमो की उलझन में लटके रहेंगे। नौकरी वाले लोग आज कागजी कार्यो में सावधानी रखें। व्यापारी वर्ग आज व्यापार में उतार चढ़ाव के दौर से गुजरेंगे एक पल में लाभ की आशा बनेगी अगले ही पल आशा निराशा में बदल जाएगी। घर गृहस्थी में भी आज किसी ना किसी के बीमार पड़ने से अतिरिक्त परेशानी रहेगी। महिलाये पुरुषों की अपेक्षा शांत रहेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton