Vaidik Panchang 28072025 Importance of Flowers

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 28 जुलाई 2025*
🌤️ *दिन – सोमवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात -महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – वर्षा ऋतु*
🌤️ *मास – श्रावण*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – चतुर्थी रात्रि 11:24  तक तत्पश्चात पंचमी*
🌤️ *नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी शाम 05:35 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी*
🌤️ *योग – परिघ 29 जुलाई रात्रि 02:54 तक तत्पश्चात शिव*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 07:49 से सुबह 09:28 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:12*
🌤️ *सूर्यास्त – 07:18*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – विनायक चतुर्थी*
💥 *विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
💥 *चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)*
💥 *चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।*
       🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️

🌷 *काल सर्प योग* 🌷

➡ *29 जुलाई 2025 मंगलवार को नाग पंचमी है ।*

🙏🏻 *नाग पंचमी के दिन , जिन को काल सर्प योग है , वे शांति के लिए ये उपाय करे | पंचमी के दिन पीपल के नीचे, एक दोने में कच्चा दूध रख दीजिये , घी का दीप जलाए , कच्चा आटा , घी और गुड मिला कर एक छोटा लड्डू बना के रख दे और ये मन्त्र बोला कर प्रार्थना करें :-*
🐍 *ॐ अनंताय नमः*
🐍 *ॐ वासुकाय नमः*
🐍 *ॐ शंख पालाय नमः*
🐍 *ॐ तक्षकाय नमः*
🐍 *ॐ कर्कोटकाय नमः*
🐍 *ॐ धनंजयाय नमः*
🐍 *ॐ ऐरावताय नमः*
🐍 *ॐ मणि भद्राय नमः*
🐍 *ॐ धृतराष्ट्राय नमः*
🐍 *ॐ कालियाये नमः*
➡️  *काल सर्प योग है तो उस का प्रभाव निकल जाएगा .. तकलीफ दूर होगी ..काल सर्प योग की शांति होगी …*
🙏🏻
            🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

🌷 *नागपंचमी* 🌷
➡ *गंताक से आगे….*
🙏🏻 *श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 29 जुलाई, मंगलवार को है। इस दिन नागों की पूजा करने का विधान है। हिंदू धर्म में नागों को भी देवता माना गया है। महाभारत आदि ग्रंथों में नागों की उत्पत्ति के बारे में बताया गया है। इनमें शेषनाग, वासुकि, तक्षक आदि प्रमुख हैं। नागपंचमी के अवसर पर हम आपको ग्रंथों में वर्णित प्रमुख नागों के बारे में बता रहे हैं-*
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🐍 *कर्कोटक नाग*
*कर्कोटक शिव के एक गण हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सर्पों की मां कद्रू ने जब नागों को सर्प यज्ञ में भस्म होने का श्राप दिया तब भयभीत होकर कंबल नाग ब्रह्माजी के लोक में, शंखचूड़ मणिपुर राज्य में, कालिया नाग यमुना में, धृतराष्ट्र नाग प्रयाग में, एलापत्र ब्रह्मलोक में और अन्य कुरुक्षेत्र में तप करने चले गए।*

🙏🏻 *ब्रह्माजी के कहने पर कर्कोटक नाग ने महाकाल वन में महामाया के सामने स्थित शिव  लिंग की स्तुति की। शिव ने प्रसन्न होकर कहा- जो नाग धर्म का आचरण करते हैं, उनका विनाश नहीं होगा। इसके बाद कर्कोटक नाग उसी शिवलिंग में प्रवेश कर गया। तब से उस लिंग को कर्कोटेश्वर कहते हैं। मान्यता है कि जो लोग पंचमी, चतुर्दशी और रविवार के दिन कर्कोटेश्वर शिवलिंग की पूजा करते हैं उन्हें सर्प पीड़ा नहीं होती।*

🐍 *कालिया नाग*
*श्रीमद्भागवत के अनुसार, कालिया नाग यमुना नदी में अपनी पत्नियों के साथ निवास करता था। उसके जहर से यमुना नदी का पानी भी जहरीला हो गया था। श्रीकृष्ण ने जब यह देखा तो वे लीलावश यमुना नदी में कूद गए। यहां कालिया नाग व भगवान श्रीकृष्ण के बीच भयंकर युद्ध हुआ। अंत में श्रीकृष्ण ने कालिया नाग को पराजित कर दिया। तब कालिया नाग की पत्नियों ने श्रीकृष्ण से कालिया नाग को छोडऩे के लिए प्रार्थना की। तब श्रीकृष्ण ने उनसे कहा कि तुम सब यमुना नदी को छोड़कर कहीं और निवास करो। श्रीकृष्ण के कहने पर कालिया नाग परिवार सहित यमुना नदी छोड़कर कहीं और चला गया।*
*इनके अलावा कंबल, शंखपाल, पद्म व महापद्म आदि नाग भी धर्म ग्रंथों में पूज्यनीय बताए गए हैं।*


          🕉️ ~ *वैदिक पंचांग* ~ 🕉️

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धार्मिक कर्मकांडों में पुष्पों का महत्त्व ।

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भारतीय संस्कृति में पुष्प का उच्च स्थान है। देवी-देवताओं और भगवान् पर आरती, व्रत, उपवास या पर्वो पर पुष्प चढ़ाए जाते हैं। धार्मिक अनुष्ठान, संस्कार, सामाजिक व पारिवारिक कार्यों को बिना पुष्प अधूरा समझा जाता है। पुष्पों की सुगंध से देवता प्रसन्न होते हैं। सुंदरता के प्रतीक पुष्प हमारे जीवन में उल्लास,
उमंग, प्रसन्नता के प्रतीक हैं। पुष्प के संबंध में कहा गया है।

पुण्य संवर्धनाच्चापि पापौधपरिहारतः । पुष्कलार्थप्रदानार्थं पुष्पमित्यभियीयते ॥
-कुलाणवतंत्र

अर्थात् पुण्य को बढ़ाने, पापों को भगाने और श्रेष्ठ फल को प्रदान करने के कारण यह पुष्प कहा जाता है।

दैवस्य मस्तकं कुर्यात्कुसुमोपहितं सदा ।

अर्थात् देवता का मस्तक सदैव पुष्प से सुशोभित रहना चाहिए।

पुष्पैर्देवां प्रसीदन्ति पुष्पैः देवाश्च संस्थिताः न रत्नैर्न सुवर्णेन न वित्तेन च भूरिणा
तथा प्रसादमायाति यथा पुष्पैर्जनार्दन।

-विष्णुनारदीय व धर्मोत्तर पुराण

अर्थात् देवता लोग रत्न, सुवर्ण, भूरि द्रव्य, व्रत तपस्या एवं अन्य किसी भी साधनों से उतना प्रसन्न नहीं होते, जितना कि पुष्प चढ़ाने से होते हैं।

कालिकापुराण में ऐसा उल्लेख मिलता है कि किसी भी देवता पर कभी भी बासी, जमीन पर गिरे हुए, कटे, फटे, गंदे, कीड़े लगे, दूसरों से मांगे या कहीं से चुराए हुए पुष्प नहीं चढ़ाने चाहिए। माला के संबंध में ललितासहस्रनाम में कहा गया है

मां शोभां लातीति माला।

अर्थात जो शोभा देती है, वह माला है। भगवान् को जो पुष्पों की मालाएं चढ़ाई जाती हैं, उनमें कमल अथवा पुंडरीक की माला को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है।

शास्त्रो में कुछ फुलो के चढ़ाने से मिलने वाले फल का तारतम्य बतलाया है, जैसे दस सुवर्ण-माप के बराबर सुवर्ण-दान का फल एक आक के फूल को चढ़ाने से मिल जाता है । हजार आक के फूलों की अपेक्षा एक कनेर का फूल, हजार कनेर के फूलो के चढ़ाने की अपेक्षा एक बिल्वपत्र से फल मिल जाता है और हजार बिल्वपत्रों की अपेक्षा एक गूमाफूल (द्रोण-पुष्प) होता है । इस तरह हजार गूमा से बढ़कर एक चिचिड़ा, हजार चिचिड़ो (अपामार्गो) से बढ़कर एक कुश का फूल, हजार कुश-पुष्पों से बढ़कर एक शमी का पत्ता, हजार शमी के पत्तों से बढ़कर एक नीलकमल, हजार नीलकमलों से बढ़कर एक धतूरा, हजार धतूरों से बढ़कर एक शमी का फूल होता है । अन्त में बतलाया है कि समस्त फूलों की जातियों में सबसे बढ़कर नीलकमल होता है। भगवान व्यास ने कनेर की कोटि में चमेली, मौलसिरी, पाटला, मदार, श्वेतकमल, शमी के फूल और बड़ी भटकटैया को रखा है। इसी तरह धतूरे की कोटि में नागचम्पा और पुंनाग को माना है।

अपने आराध्य देव की प्रसन्नता के लिए कौन-सा पुष्प चढ़ाना चाहिए और कौन-सा नहीं? इस संबंध में यहां संक्षिप्त जानकारी दी जा रही है।

श्री गणेशजी👉 आचार भूषण नामक ग्रंथानुसार गणेशजी को तुलसीदल को छोड़कर सभी प्रकार के पुष्प प्रिय हैं
इन्हे सफेद या हरी दूर्वा अवश्य चढ़ानी चाहिये । दूर्वा की फुनगी में तीन या पॉंच पत्ती होनी चाहिये।

शंकरजी👉 शास्त्रों ने भगवान शंकर की पूजा में मौलसिरी (बक-बकुल) के फूल को ही अधिक महत्त्व दिया है । भविष्यपुराण ने भगवान शंकर पर चढ़ाने योग्य और भी फूलों के नाम गिनायै है- करवीर (कनेर), मौलसिरी, धतूरा, पाढर, बड़ी कटेरी, कुरैया, कास, मन्दार, अपराजिता, शमीका फूल, कुब्जक, शंखपुष्पी, चिचिड़ा, कमल, चमेली, नागचम्पा, चम्पा, खस, तगर, नागकेसर, किंकिरात (करंटक अर्थात् पीले फूलवाली कटसरैया), गूमा, शीशम, गूलर, जयन्ती, बेला, पलाश, बेलपत्ता, कुसुम्भ-पुष्प, कुङ्कुम अर्थात् केसर, नीलकमल और लाल कमल । जल एवं स्थल में उत्पन्न जितने सुगन्धित फूल है, सभी भगवान शंकर को प्रिय है।

🔹शंकरजी को निषिद्ध पत्र-पुष्प।
कदम्ब, सारहीन फूल या कठूमर, केवड़ा, शिरीष, तिन्तिणी, बकुल (मौलसिरी), कोष्ठ, कैथ, गाजर, बहेड़ा, कपास, गंभारी, पत्रकंटक, सेमल, अनार, धव, केतकी, वसंत ऋतु में खिलनेवाला कंद-विशेष, कुंद, जूही, मदन्ती, शिरीष सर्ज और दोपहरिया के फूल भगवान शंकर पर नहीं चढ़ाने चाहिये । वीरमित्रोदय में इनका संकलन किया गया है।

सूर्य नारायण👉 भविष्यपुराण मे बतलाया गया है कि सूर्य भगवान को यदि एक आक का फूल अर्पण कर दिया जाय तो सोने की दस अशर्फिया चढ़ाने का फल मिल जाता है । फूलों का तारतम्य इस प्रकार बतलाया गया है – हजार अड़हुल के फूलों से बढ़कर एक कनेर का फूल होता है, हजार कनेर के फूलों से बढ़कर एक बिल्वपत्र, हजार बिल्वपत्रों से बढ़कर एक ‘पद्म; (सफेद रंग से भिन्न रंगवाला), हजारों रंगीन पद्म-पुष्पों से बढ़कर एक मौलसिरी, हजारों मौलसिरियों से बढ़कर एक कुश का फूल, हजार कुश के फूलों से बढ़्कर एक शमी का फूल, हजार शमी के फूलों से बढ़कर एक नीलकमल, हजारों नील एवं रक्त कमलों से बढ़कर ‘केसर और लाल कनेर’ का फूल होता है । यदि इनके फूल न मिले तो

बदले में पत्ते चढ़ाये और पत्ते भी न मिलें तो इनके फल चढ़ाये ।फूल की अपेक्षा माला में दुगुना फल प्राप्त होता है । रात में कदम्ब के फूल और मुकुर को अर्पण करे और दिन में शेष समस्त फूल । बेला दिन में और रात मे भी चढ़ाना चाहिये । सूर्य भगवानपर चढ़ाने योग्य कुछ फूल ये है – बेला, मालती, काश,माधवी, पाटला, कनेर, जपा, यावन्ति,कुब्जक, कर्णिकार, पीली कटसरैया (कुरण्टक), चम्पा, रोलक, कुन्द, काली कटसरैया वाण), बर्बरमल्लिका, अशोक, तिलक, लोध, अरूषा, कमल, मौलसिरी, अगस्त्य और पलाशके फूल तथा दूर्वा ।

🔹विहित पत्र ।

बेल का पत्र, शमी का पत्ता, भॅंगरैया की पत्ती, तमालपत्र, तुलसी और काली तुलसी के पत्ते तथा कमल के पत्ते सूर्य भगवान की पूजा में गृहीत है ।

सूर्य के लिये निषिद्ध फूल
************************************गुंजा (कृष्णला), धतूरा, कांची, अपराजिता (गिरिकर्णिका), भटकटैया, तगर और अमड़ा- इन्हे सूर्य पर न चढ़ाये ।

भगवती गौरी👉 शंकर भगवान् को चढ़ने वाले पुष्प मां भगवती को भी प्रिय हैं। इसके अलावा जितने लाल फूल है वे सभी भगवती को अभीष्ट है तथा सुगन्धित समस्त श्वेत फूल भी भगवती को विशेष प्रिय है । बेला, चमेली, केसर, श्वेत और लाल फूल, श्वेत कमल, पलश, तगर, अशोक, चंपा, मौलसिरी, मदार, कुंद, लोध, कनेर, आक, शीशम और अपराजित (शंखपुष्पी) आदि के फूलों से देवी की भी पूजा की जाती है । कुछ ग्रंथों में आक और मदार के पुष्प चढ़ाना मना किया गया है, अतः अन्य पुष्पों के अभाव में ही इनका उपयोग करें।

दुर्गा से भिन्न देवियों पर इन दोनों को न चढ़ाये । किंतु दुर्गाजी पर चढ़ाया जा सकता है । क्योंकि दुर्गा की पूजा में इन दोनों का विधान है । शमी, अशोक, कर्णिकार (कनियार या अमलतास), गूमा, दोपहरिया, अगस्त्य, मदन,सिन्दुवार, शल्लकी, माधव आदि लताऍ, कुश की मंजरियॉं, बिल्वपत्र, केवड़ा, कदम्ब, भटकटैया, कमल- ये फूल भगवती को प्रिय है ।

श्रीकृष्ण👉 अपने प्रिय पुष्पों का उल्लेख महाभारत में युधिष्ठिर से करते हुए वे कहते हैं-हे राजन्! मुझे कुमुद, करवरी, चणक, मालती, नंदिक, पलाश और वनमाला के पुष्प बहुत प्रिय हैं।

आक और मदार की तरह दूर्वा, तिलक, मालती, तुलसी, भंगरैया और तमाल विहित-प्रतिषिद्ध है अर्थात ये शास्त्रों से विहित भी है और निषिद्ध भी है । विहित-प्रतिशिद्ध के सम्बन्ध के तत्त्वसागर संहिताक कथन है कि जब शास्त्रों से विहित फूल न मिल पायें तो विहित-प्रतिषिद्ध फूलों से पूजा कर लेनी चाहिये ।

लक्ष्मीजी👉 इनका सबसे अधिक प्रिय पुष्प कमल है। उन्हें पीला फूल चढ़ाकर भी प्रसन्न किया जा सकता है। इन्हें लाल गुलाब का फूल भी काफी प्रिय है।

विष्णुजी👉भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय । एक और रत्न, मणि तथा स्वर्णनिर्मित बहुत-से फूल चढ़ाये जायॅं और दूसरी और तुलसीदल चढाया जाय तो भगवान् तुलसीदल को ही पसंद करेंगे । सच पूछा जाय तो ये तुलसीदल की सोलहवी कला की भी समता नहीं कर सकते । भगवान को कौस्तुभ भी उतना प्रिय नहीं है, जितना कि तुलसीपत्र मंजरी । काली तुलसी तो प्रिय है ही किंतु गौरी तुलसी तो और भी अधिक प्रिय है । भगवान ने श्रीमुख से कहा है कि यदि तुलसीदल न हो तो कनेर, बेला, चम्पा, कमल और मणि आदि से निर्मित फूल भी मुझे नहीं सुहाते । तुलसी से पूजित शिवलिङ्ग या विष्णु की प्रतिमा के दर्शनमात्र से ब्रह्महत्या भी दूर हो जाती है । एक और मालती आदि की ताजी मालाए हो और दूसरी ओर बासी तुलसी हो तो भगवान बासी तुलसी को ही अपनायेंगे । शास्त्र ने भगवान पर चढ़ाने योग्य पत्रों का भी परस्पर तारतम्य बतलाकर तुलसी की सर्वातिशायिता बतलायी है, जैसे कि चिचिड़े की पत्ती से भॅंगरैया की पत्ती अच्छी मानी गयी है तथा उससे अच्छी खैर की और उससे अच्छी शमी की । शमी से दूर्वा, उससे अच्छा कुश, उससे अच्छी दौना की, उससे अच्छी बेल की पत्ती को और उससे भी अच्छा तुलसीदल होता है । नरसिंहपुराण में फूलों का तारतम्य बतलाया गया है । कहा गया है कि दस स्वर्ण-सुमनों का दान करने से जो फल प्राप्त होता है, व एक गूमा के फूल चढ़ाने से प्राप्त हो जाता है । इसके बाद उन फूलों के नाम गिनाये गये हैं, जिनमे पहले की अपेक्षा अगला उत्तरोत्तर हजार गुना अधिक फलप्रद होता जाता है, जैसे-गूमा के फूल से हजार गुना बढ़कर एक खैर, हजारों खैर के फूलों से बढ़कर एक शमी का फूल, हजारों कनेर के फूलों से बढ़कर एक सफेद कनेर, हजारों सफेद कनेर से बढ़कर कुश का फूल, हजारो कुश के फूलों से बढ़कर वनवेला, हजारों वनवेला के फूलों से एक चम्पा, हजारों चम्पाओं से बढ़कर एक अशोक, हजारों अशोक के पुष्पों से बढ़कर एक माधवी, हजारों वासन्तियों से बढ़कर एक गोजटा, हजारों गोजटांओं के फूलों से बढ़कर एक मालती, हजारों मालती फूलों से बढ़कर एक लाल त्रिसंधि (फगुनिया),

हजारों लाल त्रिसंधि फूलों से बढ़कर एक सफेद त्रिसंधि, हजारों सफेद त्रिसंधि फूलों से बढ़कर एक कुन्द का फूल, हजारों कुन्द-पुष्पों से बढ़कर एक कमल-फूल, हजारों कमल-पुष्पों से बढ़कर एक बेला और हजारों बेला-फूलों से बढ़कर एक चमेली का फूल होता है । निम्नलिखित फूल भगवान को लक्ष्मी की तरह प्रिय है । इस बात को उन्होने स्वयं श्रीमुख से कहा है-👉 मालती, मौलसिरी, अशोक, कालीनेवारी (शेफालिका), बसंतीनेवारी (नवमल्लिका), आम्रात (आमड़ा), तगर, आस्फोत, बेल, मधुमल्लिका, जूही (यूथिका), अष्टपद, स्कन्द,कदम्ब, मधुपिङ्गल, पाटला, चम्पा, ह्रद्य, लवंग, अतिमुक्तक (माधवी), केवड़ा, कुरब, बेल, सायंकालमें फूलनेवाला श्वेत कमल (कह्लार) और अडूसा । कमल का फूल तो भगवान को बहुत ही प्रिय है । विष्णुरहस्य में बतलाया गया है कि कमल का एक फूल चढ़ा देने से करोड़ो वर्ष के पापों का भगवान नाश कर देते है । कमल के अनेक भेद है । उन भेदो के फल भी भिन्न-भिन्न है । बतलाया गया है कि सौ लाल कमल चढ़ाने का फल एक श्वेत कमल के चढ़ाने से मिल जाता है तथा लाखों श्वेत कमलो का फल एक नीलकमल से और करोड़ो नीलकमलों का फल एक पद्म से प्राप्त हो जाता है । यदि कोई भी किसी प्रकार एक भी पद्म चढ़ा दे, तो उसके लिये विष्णुपुरी की प्राप्ति सुनिश्चित है। बलि के द्वारा पूछे जाने पर भक्तराज प्रल्हाद ने विष्णु के प्रिय कुछ फूलों के नाम बतलाये है- सुवर्णजाती (जाती), शतपुष्पा (शताह्वा), चमेली (सुमनाः), कुंद, कठचंपा (चारुपट), बाण, चम्पा, अशोक, कनेर, जूही, पारिभद्र, पाटला, मौलसिरी, अपराजिता (गिरिशालिनी), तिलक, अड़हुल, पीले रंगके समस्त फूल (पीतक) और तगर । पुराणों ने कुछ नाम और गिनाये है, जो नाम पहले आ गये है, उनको छोड़कर शेष नाम इस प्रकार है- अगस्त्य आम की मंजरी, मालती, बेला, जूही, (माधवी) अतिमुक्तक, यावन्ति, कुब्जई, करण्टक (पीली कटसरैया), धव (धातक), वाण (काली कटसरैया), बर्बरमल्लिका (बेला का भेद) और अडूसा । विष्णुधर्मोत्तर में बतलाया गया है कि भगवान विष्णु की श्वेत पीले फूल की प्रियता प्रसिद्ध है, फिर भी लाल फूलों में दोपहरिया (बन्धूक), केसर, कुङ्कुम और अड़हुल के फूल उन्हें प्रिय है, अतः इन्हे अर्पित करना चाहिये । लाल कनेर और बर्रे भी भगवान को प्रिय है । बर्रे का फूल पीला-लाल होता है । इसी तरह कुछ सफेद फूलों को वृक्षायुर्वेद लाल उगा देता है । लाल रंग होने मात्र से वे अप्रिय नही हो जाते, उन्हे भगवान को अर्पण करना चाहिये । इसी प्रकार कुछ सफेद फूलों के बीच भिन्न-भिन्न वर्ण होते है । जैसे पारिजात के बीच में लाल वर्ण । बीच में भिन्न वर्ण होने से भी उन्हे सफेद फूल माना जाना चाहिये और वे भगवान के अर्पण योग्य है । विष्णुधर्मोत्तर के द्वारा प्रस्तुत नये नाम ये है- तीसी, भूचम्पक, पुरन्ध्रि, गोकर्ण और नागकर्ण । अन्त में विष्णुधर्मोत्तर ने पुष्पों के चयन के लिये एक उपाय बतलाया है । कहा है कि जो फूल शास्त्र से निषिद्ध न हो और गन्ध तथा रंग-रूप से संयुक्त हो उन्हे विष्णु भगवान को अर्पण करना चाहिये ।

श्रीविष्णु के लिये निषिद्ध फूल
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विष्णु भगवान पर नीचे लिखे फूलों को चढ़ाना मना है – आक, धतूरा, कांची, अपराजिता (गिरिकर्णिका), भटकटैया, कुरैया, सेमल, शिरीष, चिचिड़ा (कोशातकी), कैथ, लाङ्गुली, सहिजन, कचनार, बरगद, गूलर, पाकर, पीपर और अमड़ा (कपीतन) । घर पर रोपे गये कनेर और दोपहरियो के फूल का भी निषेध है ।

पुष्पों के संबंध में उल्लेखनीय है कि कमल और कुमुद के पुष्प 11 से 15 दिन तक बासी नहीं होते। अगत्स्य के पुष्प कभी बासी नहीं माने जाते। चंपा की कली को छोड़कर किसी भी दूसरे पुष्प की कली कभी भी देवता पर नहीं चढ़ानी चाहिए। मध्याह्न स्नान के बाद पुष्प तोड़ने की सख्त मनाही शास्त्रों में की गई है। किसी भी पूजन में केतकी के पुष्प नहीं चढ़ाते हैं।
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
दिनांक 28 को जन्मे व्यक्ति राजसी प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। 2 और 8 आपस में मिलकर 10 होते हैं। इस तरह आपका मूलांक 1 होगा। आपको अपने ऊपर किसी का शासन पसंद नहीं है। आप साहसी और जिज्ञासु हैं। आपका मूलांक सूर्य ग्रह के द्वारा संचालित होता है। आप अत्यंत महत्वाकांक्षी हैं।


आप आशावादी होने के कारण हर स्थिति का सामना करने में सक्षम होते हैं। आप सौन्दर्यप्रेमी हैं। आपमें सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला आपका आत्मविश्वास है। इसकी वजह से आप सहज ही महफिलों में छा जाते हैं। आपकी मानसिक शक्ति प्रबल है। आपको समझ पाना बेहद मुश्किल है।



शुभ दिनांक : 1, 10, 20, 28

शुभ अंक : 1, 10, 20, 28, 37, 46, 55, 64, 73, 82


शुभ वर्ष : 2026, 2044, 2053, 2062

ईष्टदेव : सूर्य उपासना तथा मां गायत्री

शुभ रंग : लाल, केसरिया, क्रीम,

जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :
नौकरीपेशा के लिए समय उत्तम हैं। पदोन्नति के योग हैं। यह वर्ष आपके लिए अत्यंत सुखद रहेगा। अधूरे कार्यों में सफलता मिलेगी। पारिवारिक मामलों में महत्वपूर्ण कार्य होंगे। अविवाहितों के लिए सुखद स्थिति बन रही है। विवाह के योग बनेंगे। बेरोजगारों के लिए भी खुशखबर है इस वर्ष आपकी मनोकामना पूरी होगी। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह वर्ष उत्तम रहेगा।

मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज आपकी महात्त्वकांक्षाओ की पूर्ती में अड़चने आने से हताश हो सकते है। फिर भी भले-बुरे का विवेक रहने से मानसिक रूप से परेशान नहीं होंगे। कार्य क्षेत्र पर अधिकारी एवं सहकर्मी सहयोग करेंगे निश्चित समय से पहले कार्य पूर्ण कर घरेलु कार्यो में व्यस्त रहेंगे। धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रियता दिखाएँगे। आज आप किसी भी प्रकार के अनैतिक कार्यो से खुद को दूर रखने का हर संभव प्रयास करेंगे जिससे सम्मान के पात्र बनेंगे।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज दिन का पूर्वार्ध नयी उलझने लाएगा। हठी प्रवृति रहने से व्यापार में हानि एवं प्रियजनों से दूरी बढ़ सकती है। महत्त्वपूर्ण कार्य को अनुभवियों के परामर्श के बाद ही करें अन्यथा थोड़े समय के लिए टाल दें। नौकरों के व्यवहार से भी परेशानी हो सकती है। दोपहर के बाद स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आने लगेगी। आपके लिए निर्णय सफल होने से प्रातः जो आपसे विपरीत व्यवहार कर रहे थे वो भी स्वार्थ सिद्धि करने लगेंगे। आकस्मिक धन लाभ होने से राहत मिलेगी।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज आपको प्रतिकूल फल मिलने से मन में नकारत्मकता रहेगी। कार्य को करने से पहले ही हार मान लेने से सफलता की उम्मीद भी अल्प रहेगी। आज किसी व्यक्ति का ना चाहते हुए भी सहयोग अथवा कोई अप्रिय कार्य करना पडेगा। परिवार में आपसी मतभेद रहने से तालमेल नहीं बैठा पाएंगे। एकदम से ख़ुशी अगले ही पल दुःख वाली स्थिति दिन भर रहेगी। धन के कारण मनोदशा में विकृत आ सकती है। सेहत पर ध्यान दें।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आपका आज का दिन मिश्रित फलदायक रहेगा। कार्यो की असफलता अथवा किसी महत्त्वपूर्ण अनुबंध के निरस्त होने से स्वभाव में चिड़चिड़ा पन आ सकता है। वाणी का रूखापन कार्य क्षेत्र एवं घर का वातावरण बिगाड़ेगा। विवेक से कार्य करें दोपहर के बाद किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति से सहयोग मिलने की संभावना है। धन नाश होने के प्रबल योग है इसका भी ध्यान रखें गलत जगह निवेश हो सकता है। स्वास्थ्य में भी उतार चढ़ाव बना रहेगा।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज दिन का प्रारंभिक भाग सुख-शांति से बितायेंगे। मन खुश रहने से आसपास का वातावरण भी हास्यमय बनाएंगे। मित्र प्रियजनों के साथ भविष्य की योजनाओं पर खुल कर विचार करेंगे। परन्तु दोपहर के समय स्थिति एक दम उलट हो जायेगी। किसी मनोकामना के अपूर्ण रहने से ठेस पहुंचेगी इससे उबरने में भी थोड़ा समय लगेगा। आज स्वभाव में ज्यादा खुलापन भी ना रखें मन का भेद अन्य को देने से हानि भी हो सकती है। परिजनों से लाभ होने की संभावना है।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज के दिन आपको प्रत्येक कार्य में सावधानी रखने की सलाह है। जल्दबाजी में लिए गए निर्णय के कारण धन के साथ सम्मान की भी हानि हो सकती है। कार्य क्षेत्र पर अप्रिय घटनाओं के कारण दुविधा की स्थिति बनेगी। किसी पारिवारिक सदस्य के गलत आचरण से मन दुखी रहेगा मन में गलत विचार की भरमार रहने से सेहत पर बुरा असर पड़ेगा। सर अथवा अन्य शारीरिक अंग निष्क्रिय होते अनुभव होंगे। धैर्य से समय बिताएं।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज भी परिस्थितियां आपके अनुकूल रहने से लाभ के कई अवसर मिलेंगे परन्तु अज्ञान की स्थिति अथवा गलत सलाह के कारण लाभ होना संदिग्ध ही रहेगा। बहुप्रतीक्षित अतिमहत्त्वपूर्ण कार्य पूरा होगा। धन लाभ रुक-रुक कर होता रहेगा। घर में सुख के साधनों की वृद्धि होगी इसपर अधिक खर्च भी रहेगा। नए सम्बन्ध बनने से अतिरिक्त आय के मार्ग भी खुलेंगे। पारिवारिक दायित्वों की पूर्ति से आज पीछे नहीं हटेंगे।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज दिन का पूर्वार्ध आशा से अधिक शुभ रहेगा। आज के दिन आकस्मिक घटनाएं अधिक घटित होंगी चाहे वो आर्थिक या पारिवारिक हों। नौकरी पेशा और व्यवसायी को भी मेहनत का फल मिलेगा सम्मान में वृद्धि के साथ आय के मार्ग खुलेंगे। बेरोजगारों को थोड़ा प्रयास करने पर रोजगार उपलब्ध हो सकता है। खर्च भी अचानक होने से थोड़ी असहजता रहेगी परन्तु स्थिति पूर्ण रूप से आपके नियंत्रण में ही रहेगी। भाग्योन्नति के योग बनेगे।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज के दिन धन की कमी रहने पर भी खुश रहने का सफल प्रयास करेंगे। परिजनों से भावनात्मक सम्बन्ध रहने से मन को शान्ति मिलेगी। परन्तु आज प्रेम प्रसंगों से दूरी बनाना ही बेहतर रहेगा अन्यथा धन और पारिवारिक मान हानि हो सकती है। किसी मांगलिक आयोजन में जाने के कारण अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा फिर भी आनंददायक वातावरण मिलने से खर्च व्यर्थ नहीं लगेगा। स्त्री पक्ष से विशेष निकटता रहेगी।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज भी दिन विपरीत फल देने वाला रहेगा। स्वयं अथवा किसी पारिवारिक सदस्य के स्वास्थ्य को लेकर चिंता रहेगी दवाओं पर खर्च बढ़ेगा। कार्य क्षेत्र पर भी परिश्रम के अनुसार लाभ मिलेगा नए कार्य के आरम्भ के विचार को टालना पड सकता है। सरकारी कार्यो में भी धन खर्च होने से आर्थिक कारणों से चिंता रहेगी परन्तु मध्यान के आस-पास थोड़े धन की आमद होने से दैनिक कार्य चलते रहेंगे। परिवार में तालमेल बना रहेगा।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज भी दिन का अधिकांश समय शांति से व्यतीत होगा। थोड़ी आर्थिक परेशानियां रह सकती है परंतु मानसिक रूप से दृढ़ रहेंगे। जिस भी कार्य को करने की ठानेंगे उसे हानि-लाभ की परवाह किये बिना पूर्ण करके छोड़ेंगे धनलाभ आज अलप ही रहेगा फिर भी संतोष कर लेंगे। कार्य क्षेत्र पर अन्य व्यक्ति की दखलंदाजी से थोड़ी परेशानी एवं बहस हो सकती है। सामूहिक आयोजन में सम्मिलित होने का अवसर भी मिलेगा। बाहर की अपेक्षा घर में समय बिताना अधिक पसंद करेंगे।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज आप उदासीनता युक्त जीवन जीयेंगे। पेट सम्बंधित शिकायत रहने एवं अन्य शारीरिक कष्ट के कारण शरीर शिथिल रहेगा। मन के अनुसार कार्य नहीं होंगे। कार्यो में विलम्ब के कारण परेशानियां होंगी। सरकारी कार्यो में भी अल्प सफलता मिलेगी। आस पास का वातावरण भी विरोधाभासी रहने से मन में वैराग्य उत्पन्न होगा। आध्यत्म के प्रति अधिक रुचि दिखाएँगे। परिजनों से किसी पुरानी बात को लेकर शिकायत रहेगी। धन प्राप्ति के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।

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“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton