🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 24 अगस्त 2025*
🌤️ *दिन – रविवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शरद ऋतु*
🌤️ *मास – भाद्रपद*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – प्रतिपदा सुबह 11:48 तक तत्पश्चात द्वितीया*
🌤️ *नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी 25 अगस्त रात्रि 02:05 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी*
🌤️ *योग – शिव दोपहर 12:30 तक तत्पश्चात सिद्ध*
🌤️ *राहुकाल – शाम 05:26 से शाम 07:02 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:21*
🌤️ *सूर्यास्त – 07:00*
👉 *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – चंद्र-दर्शन ( शाम 06:52 से रात्रि 07:33 तक)*
💥 *विशेष – प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
*💥 रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
💥 *रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)*
💥 *रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)*
💥 *स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।*
🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
➡ *27 अगस्त 2025 बुधवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है ।*
🙏🏻 *भविष्य पुराण के अनुसार ‘भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का नाम ‘शिवा’ है | इस दिन किये गये स्नान, दान, उपवास, जप आदि सत्कर्म सौ गुना हो जाते हैं |*
👩🏼 *इस दिन जो स्री अपने सास-ससुर को गुड़ के तथा नमकीन पुए खिलाती है वह सौभाग्यवती होती है | पति की कामना करनेवाली कन्या को विशेषरूप से यह व्रत करना चाहिए |’*
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🕉️ ~ *वैदिक पंचाग* ~ 🕉️
🌷 *गणेश-कलंक चतुर्थी* 🌷 🙏🏻 *( ‘ॐ गं गणपतये नम:’ मंत्र का जप करने और गुड़मिश्रित जल से गणेशजी को स्नान कराने एवं दूर्वा व सिंदूर की आहुति देने से विघ्न-निवारण होता है तथा मेधाशक्ति बढ़ती है | )*
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🕉️ ~ *हिन्दू पंचांग* ~ 🕉️
🌷 *गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन कलंक निवारण के उपाय*
➡ *इस वर्ष – 26 अगस्त 2025 मंगलवार को चंद्र दर्शन निषेध चन्द्रास्त : रात्रि 09:06 एवं 27 अगस्त, बुधवार को चंद्र दर्शन निषेध चन्द्रास्त : रात्रि 09:38*
🙏🏻 *भारतीय शास्त्रों में गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन निषेध माना गया है इस दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति को एक साल में मिथ्या कलंक लगता है। भगवान श्री कृष्ण को भी चंद्र दर्शन का मिथ्या कलंक लगने के प्रमाण हमारे शास्त्रों में विस्तार से वर्णित है।*
🌷 *भाद्रशुक्लचतुथ्र्यायो ज्ञानतोऽज्ञानतोऽपिवा।*
*अभिशापीभवेच्चन्द्रदर्शनाद्भृशदु:खभाग्॥*
🙏🏻 *अर्थातः जो जानबूझ कर अथवा अनजाने में ही भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा का दर्शन करेगा, वह अभिशप्त होगा। उसे9 बहुत दुःख उठाना पडेगा।*
🙏🏻 *गणेश पुराण के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्रमा देख लेने पर कलंक अवश्य लगता है। ऐसा गणेश जी का वचन है।*
🙏🏻 *भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन न करें यदि भूल से चंद्र दर्शन हो जाये तो उसके निवारण के निमित्त श्रीमद्भागवत के १०वें स्कंध, ५६-५७वें अध्याय में उल्लेखित स्यमंतक मणि की चोरी कि कथा का श्रवण करना लाभकारक है। जिससेे चंद्रमा के दर्शन से होने वाले मिथ्या कलंक का ज्यादा खतरा नहीं होगा।*
🌷 *चंद्र-दर्शन दोष निवारण हेतु मंत्र* 🌷
🙏🏻 *यदि अनिच्छा से चंद्र-दर्शन हो जाये तो व्यक्ति को निम्न मंत्र से पवित्र किया हुआ जल ग्रहण करना चाहिये। मंत्र का २१, ५४ या १०८ बार जप करें । ऐसा करने से वह तत्काल शुद्ध हो निष्कलंक बना रहता है। मंत्र निम्न है।*
🌷 *सिंहः प्रसेनमवधीत् , सिंहो जाम्बवता हतः।*
*सुकुमारक मा रोदीस्तव, ह्येष स्यमन्तकः ॥*
🙏🏻 *अर्थात: सुंदर सलोने कुमार! इस मणि के लिये सिंह ने प्रसेन को मारा है और जाम्बवान ने उस सिंह का संहार किया है, अतः तुम रोओ मत। अब इस स्यमंतक मणि पर तुम्हारा ही अधिकार है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, अध्यायः ७८)*
🙏🏻 *चौथ के चन्द्रदर्शन से कलंक लगता है | इस मंत्र-प्रयोग अथवा स्यमन्तक मणि कथा के वचन या श्रवण से उसका प्रभाव कम हो जाता है |*
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🕉️ ~ *वैदिक पंचांग* ~ 🕉️
*भगवान गणेशजी की कृपा*
गणेश जी विघ्न विनाशक व शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। अगर कोई सच्चे मन से गणोश जी की वंदना करता है, तो गौरी नंदन तुरंत प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
वैसे भी गणेश जी जिस स्थान पर निवास करते हैं, उनकी दोनों पत्नियां ऋद्धि तथा सिद्धि भी उनके साथ रहती हैं उनके दोनों पुत्र शुभ व लाभ का आगमन भी गणेश जी के साथ ही होता है। कभी-कभी तो भक्त भगवान को असमंजस में डाल देते हैं। पूजा-पाठ व भक्ति का जो वरदान मांगते हैं, वह निराला होता है।
काफ़ी समय पहले की बात है एक गांव में एक अंधी बुढ़िया रहती थी। वह गणेश जी की परम भक्त थी। आंखों से भले ही दिखाई नहीं देता था, परंतु वह सुबह शाम गणेश जी की बंदगी में मग्न रहती। नित्य गणेश जी की प्रतिमा के आगे बैठकर उनकी स्तुति करती। भजन गाती व समाधि में लीन रहती। गणेश जी बुढ़िया की भक्ति से बड़े प्रसन्न हुए। उन्होंने सोचा यह बुढ़िया नित्य हमारा स्मरण करती है, परंतु बदले में कभी कुछ नहीं मांगती।
भक्ति का फल तो उसे मिलना ही चाहिए। ऐसा सोचकर गणेश जी एक दिन बुढ़िया के सम्मुख प्रकट हुए तथा बोले- ‘माई, तुम हमारी सच्ची भक्त हो। जिस श्रद्धा व विश्वास से हमारा स्मरण करती हो, हम उससे प्रसन्न हैं। अत: तुम जो वरदान चाहो, हमसे मांग सकती हो।’
बुढ़िया बोली- ‘प्रभो! मैं तो आपकी भक्ति प्रेम भाव से करती हूं। मांगने का तो मैंने कभी सोचा ही नहीं। अत: मुझे कुछ नहीं चाहिए।’ गणेश जी पुन: बोले- ‘हम वरदान देने केलिए आए हैं।’ बुढ़िया बोली- ‘हे सर्वेश्वर, मुझे मांगना तो नहीं आता। अगर आप कहें, तो मैं कल मांग लूंगी। तब तक मैं अपने बेटे व बहू से भी सलाह मश्विरा कर लूंगी। गणेश जी कल आने का वादा करके वापस लौट गए।’
बुढ़िया का एक पुत्र व बहू थे। बुढ़िया ने सारी बात उन्हें बताकर सलाह मांगी। बेटा बोला- ‘मां, तुम गणेश जी से ढेर सारा पैसा मांग लो। हमारी ग़रीबी दूर हो जाएगी। सब सुख चैन से रहेंगे।’ बुढ़िया की बहू बोली- ‘नहीं आप एक सुंदर पोते का वरदान मांगें। वंश को आगे बढ़ाने वाला भी, तो चाहिए।’ बुढ़िया बेटे और बहू की बातें सुनकर असमंजस में पड़ गई।
उसने सोचा- यह दोनों तो अपने-अपने मतलब की बातें कर रहे हैं। बुढ़िया ने पड़ोसियों से सलाह लेने का मन बनाया। पड़ोसन भी नेक दिल थी। उसने बुढ़िया को समझाया कि तुम्हारी सारी ज़िंदगी दुखों में कटी है।
अब जो थोड़ा जीवन बचा है, वह तो सुख से व्यतीत हो जाए। धन अथवा पोते का तुम क्या करोंगी! अगर तुम्हारी आंखें ही नहीं हैं, तो यह संसारिक वस्तुएं तुम्हारे लिए व्यर्थ हैं। अत: तुम अपने लिए दोनों आंखें मांग लो।’
बुढ़िया घर लौट आई। बुढ़िया और भी सोच में पड़ गई। उसने सोचा- कुछ ऐसा मांग लूं, जिससे मेरा, बहू व बेटे- सबका भला हो। लेकिन ऐसा क्या हो सकता है? इसी उधेड़तुन में सारा दिन व्यतीत हो गया। बुढ़िया कभी कुछ मांगने का मन बनाती, तो कभी कुछ। परंतु
कुछ भी निर्धारित न कर सकी। दूसरे दिन गणेश जी पुन: प्रकट हुए तथा बोले- ‘आप जो भी मांगेंगे, वह हमारी कृपा से हो जाएगा। यह हमारा वचन है।’ गणेश जी के पावन वचन सुनकर बुढ़िया बोली- ‘हे गणराज, यदि आप मुझसे प्रसन्न हैं, तो कृप्या मुझे मन इच्छित वरदान दीजिए। मैं अपने पोते को सोने के गिलास में दूध पीते देखना चाहती हूं।’
बुढ़िया की बातें सुनकर गणेश जी उसकी सादगी व सरलता पर मुस्कुरा दिए। बोले- ‘तुमने तो मुझे ठग ही लिया है। मैंने तुम्हें एक वरदान मांगने के लिए बोला था, परंतु तुमने तो एक वरदान में ही सबकुछ मांग लिया।
तुमने अपने लिए लंबी उम्र तथा दोनों आंखे मांग ली हैं। बेटे के लिए धन व बहू के लिए पोता भी मांग लिया। पोता होगा, ढेर सारा पैसा होगा, तभी तो वह सोने के गिलास में दूध पीएगा। पोते को देखने के लिए तुम जिंदा रहोगी, तभी तो देख पाओगी। अब देखने के लिए दो आंखें भी देनी ही पड़ेंगी।’ फिर भी वह बोले- ‘जो तुमने मांगा, वे सब सत्य होगा।’ यूं कहकर गणेश जी अंर्तध्यान हो गए।
कुछ समय पाकर गणेश जी की कृपा से बुढ़िया के घर पोता हुआ। बेटे का कारोबार चल निकला तथा बुढ़िया की आंखों की रौशनी वापस लौट आई। बुढ़िया अपने परिवार सहित सुख पूर्वक जीवन व्यतीत करने लगी।
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श्रीकृष्ण का गोपियों से दधि का दान मांगना..
भगवान श्रीकृष्ण का व्रज में आनन्द-अवतार है। उनकी व्रज की लीलाएं भक्तों को आनन्द और प्रेम बांटने के लिए हुईं हैं। इसी कारण नन्दरायजी के यहां नौ लाख गायें होने पर भी वे गोपियों से कहते हैं..
ग्वालिनी मीठी तेरी छाछ।
कहा दूध में मेलि जमायो सांचि कहुं किन बाछि।।
द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण ने ग्वालबालों के साथ बरसाना और चिकसौली के मध्य ‘सांकरी खोर’ नामक संकरी गली में तथा गोवर्धन स्थित ‘दानघाटी’ में गोपियों से दही-माखन का दान लिया था। इसी स्थान पर श्रीकृष्ण ने व्रजगोपियों को अपना गौरस (दूध, दही, माखन, छाछ) मथुरा जाकर बेचने से रोका था। भगवान श्रीकृष्ण की इस लीला का उद्देश्य था.. व्रजवासियों का दूध-दही-माखन व्रजवासी ही खाएं और बलिष्ठ बनें। व्रज का गौरस कंस और उसके अत्याचारियों को ना मिले।
बरसाने की गोपियों से गौरस का दान लेने के लिए श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ उनका मार्ग रोकते थे। आइये इस लीला की मिठास का अनुभव कीजिये। .
बरसाने की ओर से श्रीराधा रानी अपनी सखियों के साथ आपस में बतियाती-इठलाती सिर पर दधि-माखन की चिकनी-चुपड़ी मटुकियों को रखकर दानघाटी की ओर चली आ रहीं हैं।
काले-कजरारे नुकीले नयनों में कटीला कजरा डाले, माथे पर लाल-लाल बड़ी-सी बिन्दी, गोरे-गोरे सुडौल शरीर पर घुमेरदार रंगरगीला लहंगा और उस पर लहराती-फहराती टेसू के फूलों के रंग में रंगी चुनरी, घूंघट में से झांकती तिरछी चितवन।
ऐसा लग रहा था मानो रंग-बिरंगी घटाएं आकाश से उतरकर व्रज की हरियाली धरती पर उमड़ती-घुमड़ती चली आ रहीं हैं।
सोने और चांदी के आभूषणों से लरकती-मटकती ये गोपियां जब कान्हा और उसकी टोली के भय से जल्दी-जल्दी कदम बढ़ातीं तो इनके कंगनों, कमर की कौंधनियों और पैरों में पहनी झांझर-बिछुओं की रुनझुन कदम्बवृक्ष पर बैठे कन्हैया के कानों में एक अपूर्व माधुर्यरस उडेल देती और वे अपने सखाओं को पुकार उठते..
आओ आओ रे सखा,
घेरौ घेरौ रे सखा।
दही लैके ग्वालिन जाय रही,
सब गोपी चलीं न जाय कहीं।
दूध दही के माट भरे हैं,
माखन अपने सीस धरे हैं।
मैंने जानी रे सखा,
पहचानी रे सखा।
सौंधी-सी सुगन्ध है आय रहीं,
सब गोपी चलीं न जाय कहीं।।
कान्हा अपने सखाओं को शीघ्रता से गोपियों को घेर लेने के लिए पुकारते.. ’अरे ओ सुबल ! अरे सुदामा ! ओ मधुमंगल ! धाऔ धाऔ (दौड़ो दौड़ो), कहीं ये ग्वालिन निकसि न जायं ( दूर न चली जाएं)। इनकी राह में अपनी-अपनी लकुटियां कूं टेक देओ (अपनी-अपनी लकड़ी से इनका रास्ता रोक दो)।
श्रीकृष्ण के इतना कहते ही सभी सखाओं की टोली यहां-वहां से लदर-पदर आ निकली। उस समय की नयनाभिराम झांकी का वर्णन बड़ा ही रसमय और मन को गुदगुदाने वाला है..
एक तरफ तो सकुचाता-लजाता, गोरस की मटकियों को सिर पर रखे कुछ ठगा-सा, कुछ भयभीत पर कान्हा की रूपराशि पर मोहित व्रजवनिताओं का झुण्ड और दूसरी ओर चंदन और गेरु से मुख पर तरह-तरह की पत्रावलियां बनाए, कानों में रंग-बिरंगे पुष्पों के गुच्छे लटकाए, गले में गुंजा की माला पहने, हरे-गुलाबी अगरखा (छोटा कुर्ता) पर कमर में रंग-बिरंगे सितारों से झिलमिलाते फेंटा कसे, मोरपंखों से सजी लकुटिया (बेंत) लिये ग्वालबालों सहित श्रीकृष्ण का टोल (दल)।
श्रीकृष्ण ने ग्वालबालों के साथ गोपवधुओं को चारों ओर से घेर लिया और उनके आगे पैर रखकर खड़े हो गए।
तभी एक ग्वालिन चित्रासखी ने हिम्मत करते हुए कान्हा से कहा.. ’क्यों जी! क्या बात है हमारी गैल (रास्ता) क्यों रोकौ हौ?
दूध दही नाय तेरे बाप की और यह गली नाय तेरे बाप की, छाछ हमारी वो पीवै जो टहल करै सब दिना की।’
जबाव में कान्हा ने कहा.. ’या दानघाटी पर हमारौ दान होय है। चतुराई त्यागौ और दान दै जाओ।’
ब्रजेन्द्रनन्दन का इतना कहना था कि तपाक से एक चतुर ग्वालिन चन्द्रावली ने उत्तर दिया.. ’अजी दान काहे बात कौ? यहां के राजा तो श्रीवृषभानुजी हैं। हटौ हमारी रस्ता छोड़ौ, नहीं तो मथुरा में जाय कै कंस से कहि दीनी जाएगी। सबरी खबर परि जाएगी लाला कूं। दान देओ जाय दान (दान दो इसको दान)।’
तभी दूसरी गोपी बोली..
’हे मनमोहन! मैं बरसाने की ग्वालिन हूँ, मुझसे बेकार में झगड़ा मत कर। तूने केवल पांच टके का कम्बल ओढ़ रखा है, उस पर इतना घमण्ड! तुम नन्दबाबा की गाय चराते हो और मुझसे दान मांगते हो ! देखो लाला ! हाथापाई करोगे तो तुम जानो। हीरों से जड़ी ये मेरी ईडुरी (सिर पर मटकी रखने के लिए गोल पहिया जैसा) है जिसमें करोड़ों के हीरे लगे हैं, यदि इसमें से एक भी निकल कर कहीं गिर गया तो देख लेना। तुम्हारी सब गायों की कीमत भी इतनी नहीं होगी।’
कन्हैया ने कहा.. ’तू बाबरी क्या जाने, मैं तो त्रिलोकी का राजा हूँ। जड़, जीव, जल-थल सबमें मैं समाया हुआ हूँ। ब्रह्मा, शंकर, सनकादि ऋषि भी मेरा पार नहीं पाते। तू गंवार ग्वालिन मुझे क्या समझाती है। मैं अपने भक्तों की रक्षा और दुष्टों का संहार करता हूँ। कंस के तो केश पकड़ कर मैं पृथ्वी का भार उतार दूंगा। ब्रह्मारूप में सृजन, शिवरूप में संहार और विष्णुरूप में जगत की रक्षा… मैं नन्दकुमार ही करता हूँ।’
गोपी कंस के नाम पर कन्हैया को धमकाती है..
इस पर एक सखा बोला.. ’कन्हैया! बात बनाना तो इस गोपी को बहुत आता है। कन्हैया! तू सुन रहा है ये गोपी क्या कह रही है?’
कन्हैया ने अपने साथी की बात सुनकर गोपी से कहा.. ’अच्छा तो तू धोंस दे रही है और वो भी उस कंस की।’ कंस की धोंस भला कन्हैया को कैसे सहन होती।
कन्हैया ने कहा–‘मैं गौओं की शपथ खाकर कहता हूँ, उस कंस को मैं उसके बंधु-बांधवों सहित मार डालूंगा।’ बस होने लगी दोनों में परस्पर मधुर ऐंचातानी (खींचतान)..
और छैल-छबीले कन्हैया ने एक हाथ से ग्वालिन का कंगन और दूसरे से आंचल पकड़ लिया और बोले कि बहुत दिनों तक तुम सब ग्वालिन दान देने से बच गयीं पर आज मैं पूरा हिसाब करुंगा..
गोपी ने कन्हैया को ताना मारते हुए कहा.. ’नंदबाबा भी गोरे हैं और जसुमति मैया भी गोरी हैं, तुम इन्हीं लक्षणों (करतूतों) के कारण सांवरे हो।’
कान्हा से पीछा छूटता न दिखने पर एक चतुर गोपी बोली.. ’मेरे कन्हैया ! हम तुम पर बलिहारी जाती हैं। कल हम बहुत सारा गौरस लेकर आयेंगी तब तुम्हें चखायेंगी। हमारे जीवनधन! आज हमें जाने दो।’ पर कन्हैया जब पकड़ता है तब क्या कोई सरलता से छूट सकता है?
कन्हैया ने गोपी से कहा..
हमें तुम पर विश्वास नहीं है। तुम्हारे गौरस को चखने के लिए मेरा मन बहुत ललचा रहा है। हाथ में आये अमृत को छोड़कर कल की आशा करना व्यर्थ है। पूर्ण चन्द्र को पाकर चकोर धैर्यवान बना रहे, यह तो असम्भव है!
हुआ भी वही.. नयनों से नयनों का मिलन हुआ। यह सांकरी खोर श्रीप्रिया-प्रियतम के प्रेमरस की लूट की अनोखी दान स्थली बन गयी, जहां श्यामसुन्दर अपनी प्यारीजू और उनकी सखियों को दान के लिए रोका करते थे।
गोपियां आपस में कहने लगीं.. ’यह नन्द का लाला तो बड़ा ढीट और निडर है। गांव में तो निर्बल बना रहता है और वन में आकर निरंकुश बन जाता है। हम आज ही चलकर यशोदाजी से इसकी करतूत कहती हैं।’ पर मन-ही-मन अपने प्यारे कन्हैया के प्रेम में मग्न होकर उनके आगे समर्पण करती हुई कहती हैं..
तुम त्रिभुवन के नाथ जोई करो सो जिय भावे।
तिहारे गुन अरु कर्म कछु हम कहत न आवे।।
मटकी आगे धरी परी स्याम के पाय।
मन भावे सो लीजिए बचे सो बेचन जाय।।
नन्दनन्दन ने ग्वालबालों के साथ सबके दहीपात्र भूमि पर पटक दिए। फिर श्रीकृष्ण और सखाओं ने कदम्ब व पलाश के पत्तों के दोने बनाकर टूटे पात्रों से दही लेकर खाया।
तब से वहां के वृक्षों के पत्ते दोने के आकार के होने लग गए और यह जगह ‘द्रोण’ के नाम से प्रसिद्ध हो गयी। आज भी यहां दही दान करके स्वयं भी पत्ते में रखकर दही खाना बहुत पुण्यमय माना जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण की दानलीला भक्तों को परमसुख देने वाली है। हिंदी साहित्य के तमाम कृष्णभक्त कवियों ने इस लीला को और भी सजीव बना दिया है। इस लीला को पढ़ने में जितना आनंद प्राप्त होता है, उससे कहीं अधिक देखने और सुनने से मिलता है। सांकरी खोर नामक स्थान पर इस लीला का आयोजन किया जाता है।बरसाना के लोग राधाजी का, चिकसौली के लोग चित्रासखी का और नंदगांव के लोग श्रीकृष्ण और ग्वालों का प्रतिनिधित्व करते हुए सांकरी खोर पर पहुंचते हैं। लीला का आयोजन किया जाता है। चित्रासखी के गांव से आई मटकी पर नंदगांव के ग्वाल टूट पड़ते हैं। छीनाझपटी में मटकी टूट जाती है।
श्रद्धालुओं में मटकी प्रसाद की होड़ लग जाती है।
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
दिनांक 24 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 6 होगा। आपमें गजब का आत्मविश्वास है। इसी आत्मविश्वास के कारण आप किसी भी परिस्थिति में डगमगाते नहीं है। आपको सुगंध का शौक होगा। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति आकर्षक, विनोदी, कलाप्रेमी होते हैं। आप अपनी महत्वाकांक्षा के प्रति गंभीर होते हैं। अगर आप स्त्री हैं तो पुरुषों के प्रति आपकी दिलचस्पी होगी। लेकिन आप दिल के बुरे नहीं है। 6 मूलांक शुक्र ग्रह द्वारा संचालित होता है। अत: शुक्र से प्रभावित बुराई भी आपमें पाई जा सकती है। जैसे स्त्री जाति के प्रति आपमें सहज झुकाव होगा।
शुभ दिनांक : 6, 15, 24
शुभ अंक : 6, 15, 24, 33, 42, 51, 69, 78
शुभ वर्ष : 2026
ईष्टदेव : मां सरस्वती, महालक्ष्मी
शुभ रंग : क्रीम, सफेद, लाल, बैंगनी
जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :
नौकरीपेशा व्यक्ति अपने परिश्रम के बल पर उन्नति के हकदार होंगे। बैक परीक्षाओं में भी सफलता अर्जित करेंगे। दाम्पत्य जीवन में मिली जुली स्थिति रहेगी। आर्थिक मामलों में सभंलकर चलना होगा। लेखन संबंधी मामलों के लिए उत्तम होती है। जो विद्यार्थी सीए की परीक्षा देंगे उनके लिए शुभ रहेगा। व्यापार-व्यवसाय में भी सफलता रहेगी। विवाह के योग भी बनेंगे। स्त्री पक्ष का सहयोग मिलने से प्रसन्नता रहेगी।
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आपका आज का दिन प्रायः सामान्य ही रहेगा। परन्तु आज फिजूल खर्ची पर नियंत्रण आयवश्यक है अन्यथा आर्थिक संकट में फंस सकते है। आज के दिन आप भावनाओ में बहकर अनुचित कदम उठा सकते हैं। लोगों के बहकावे में ना आये अन्यथा मान हानि कोर्ट-कचहरी की नौबत आ सकती है। प्रेम प्रसंगों से आज दूर रहना ही बेहतर रहेगा। विलासी प्रवृति का लाभ शत्रु उठा सकते है सावधान रहें। परिवार के सदस्यों की मांगें एवं मनोरंजन के पीछे आज अधिक खर्च होगा। कार्य क्षेत्र पर भी आज परिश्रम अधिक रहेगा। पूर्वार्ध के बाद थोड़ा धन लाभ होने से कार्य चलते रहेंगे। यात्रा के भी योग बन रहे है। वाहन चलाने में सावधानी बरतें। घर में स्त्री वर्ग से अनबन हो सकती है।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन अशुभ फलदायक रहेगा।
दिनभर विविध कष्ट रहने से मानसिक एवं आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। कार्यो में बार-बार प्रयत्न करने पर भी विलम्ब, असफलता मिलने से गुस्सा बढेगा क्रोध की अधिकता एवं वाकपटुता आज बनते कामो को बिगाड़ेगी। अनैतिक कृत्यों में पड़कर बदनामी मिल सकती है। परिवार में फिजूल खर्ची बढ़ने से धन सम्बंधित उलझने बढ़ेंगी व्यवहार शून्यता के कारण प्रियजनों से मन-मुटाव होगा अशांति भी रहेगी। कार्य व्यवसाय मध्यम चलेगा। दिन के समय अत्यादिक आलस्य रहेगा। सेहत अकस्मात ख़राब हो सकती है सावधान रहें। सरकार विरोधी वर्जित कार्यो में समय एवं धन बर्बाद हो सकता है।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आपका आज का दिन मिलाजुला रहेगा। दिन के पूर्वार्ध में सेहत सम्बंधित समस्या रहने से कार्यो में आलस करेंगे घरेलू कार्यो की व्यस्तता के कारण कार्य क्षेत्र पर ध्यान नहीं दे पाएंगे। मध्यान के बाद थोड़ा सुधार आने लगेगा। कार्य व्यवसाय थोड़े इन्तजार के बाद गति आ जायेगी लेकिन आर्थिक मंदी रहने से धन सम्बंधित आयोजनो में।विलंब होगा आर्थिक एवं पारिवारिक कारणों से मन भारी रहेगा किसी अन्य की खीज कही और उतारेंगे यंत्रों की सार-संभाल एवं परिजनों पर खर्च करना पड़ेगा। भागीदारी के कार्यो में लाभ हो सकता है। खान-पान एवं असंयमित दिनचर्या के कारण उदर शूल अथवा कब्ज सम्बंधित परेशानिया बनेगी।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
कार्य क्षेत्र का वातावरण सामान्य रहने से रोजगार सही दिशा में चलेगा। दिन नविन व्यापारिक अनुबंधों को क्रिया में लाने के लिए शुभ रहेगा। नौकरी पेशा जातक भी आज कार्य क्षेत्र में बदलाव कर सकते है। किसी खोई वस्तु के मिलने से मन प्रसन्न रहेगा। पारिवारिक संबंधो से आज लाभ के साथ मान बढ़ने की अधिक सम्भावना रहेगी। सेहत का भी ध्यान रखें सर्दी के कारण परेशानी हो सकती है। माँ अथवा किसी स्त्री के सहयोग से दोपहर के बाद आकस्मिक धन लाभ हो सकता है। गृहस्थ जीवन में प्रेम बना रहेगा। ससुराल पक्ष से लाभ की संभावना है। अविवाहितो को विवाह के प्रस्ताव आएंगे।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज आप व्यर्थ के विवादों में ना पड़कर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें। हवाई बातों पर यकीन ना करें अपने बुद्धि बल से योजनाएं बनाये सफलता अवश्य मिलेगी प्रलोभनो से बचें। सामाजिक वर्चस्व में वृद्वि होगी परन्तु कल्पना से बाहर निकल यथार्थ की बाते सोचें। आज परिश्रम के बाद लाभदायक सौदे मिलने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी परन्तु खर्चो पर नियंत्रण नहीं रहेगा। आप व्यापार विस्तार के कारण लंबी यात्रा कर सकते है जोकि आगे के लिये लाभदायक रहेगी। सामाजिक क्षेत्र पर वरिष्ठ लोगो से जान-पहचान बढ़ेगी। मनोरंजन के अवसरों को खाली नहीं जाने देंगे। मित्र परिचितों के साथ आनंद के क्षण बितायेंगे। सेहत सामान्य रहेगी।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज के दिन आपको प्रतिकूल फल मिलने से मानसिक कष्ट होगा। दिन आपके लिए अधिक परिश्रम वाला रहेगा। परिश्रम के बाद भी बनते काम व्यवहार की कमी के कारण बिगाड़ लेंगे। कार्यो की असफलता हताशा बढ़ायेगी। वाणी एवं व्यवहार में कटुता आने से घर एवं बाहर व्यर्थ के वाद-विवाद हो सकते है। वाणी में मधुरता ना ला सकें तो मौन ही रहे मान हानि की प्रबल संभावना है। नए कार्यो को आज आरम्भ न करें। यात्रा में चोटादि का भय है सावधान रहें। परिवार के सदस्यों से मन मुटाव के प्रसंग बनेंगे आवश्यकताओ को नजर अंदाज करने से माहौल बिगड़ सकता है। किसी विदेशी व्यक्ति से लाभ हो सकता है। आर्थिक उलझनों के कारण चिंताग्रस्त रहेंगे।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन उन्नति कारक रहेगा। आज पारिवारिक प्रतिष्ठा भाग्योन्नति में सहायक बनेगी। सेहत भी साथ देने से लाभ के अवसर हाथ से निकलने नहीं देंगे। घर के बुजुर्गो की कृपा दृष्टि आप पर रहने से आसानी से अपनी बातों को मनवा लेंगे लेकिन घर के वातावरण की अनदेखी के कारण आपकी आलोचना भी हो सकती है। आज आप किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे कार्य क्षेत्र पर आशा के अनुरूप व्यवसाय नहीं हो पाने से थोड़े हताश भी रहेंगे परंतु प्रयास जारी रखे धन लाभ अवश्य होगा। दूर रहने वाले जानकारों से शुभ समाचार मिलेंगे। बेरोजगारों को रोजगार मिल सकता है।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आपका आज का दिन सफलता दायक रहेगा परिस्थितियां आपके अनुकूल बनी रहेंगी। दिन के पहले भाग में किसी बहुप्रतीक्षित कार्य के बनने से प्रसन्नता बढ़ेगी। कार्य क्षेत्र पर धन लाभ के साथ-साथ मान-सम्मान भी बढ़ेगा। नौकरी पेशा जातक विशेष कार्य के लिए नियुक्त किये जा सकते है। उधारी को लेकर चिंतित भी रहेंगे परन्तु मध्यान के बाद धन का आगमन होने से समस्याएं सुलझने लगेंगी। परिवार में किसी सदस्य के बीमार होने से थोड़ी भागदौड़ करनी पड़ सकती है। दाम्पत्य जीवन में प्रेम बना रहेगा। व्यावसायिक यात्रा से लाभ होगा। सामाजिक क्षेत्र में आज चाह कर भी योगदान नहीं कर पाएंगे। अधिक व्यस्तता के कारण थकान अनुभव होगी।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज सेहत में सुधार आने से काफी राहत अनुभव करेंगे। रुके हुए कार्यो में गति आएगी फिर भी सरकारी कार्य आज ना करे तो बेहतर रहेगा। किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए आप पूरी तरह से तैयार रहेंगे। परिजनों का सहयोग मिलने से आत्मविश्वाश में बढ़ोतरी होगी। धन सम्बंधित लेन-देन थोड़े विघ्न के बाद पूर्ण होंगे। भागीदारी के कार्य में नुक्सान हो सकता है। मध्यान बाद परिस्थितियां पूर्ण रूप से आपके पक्ष में रहेंगी। समाज के वरिष्ठ व्यक्ति की सहायता से भाग्योदय के अवसर मिलेंगे। घर में धार्मिक पूजा पाठ होने से मांगलिक वातावरण बनेगा। धन लाभ के लिए थोड़ा परिश्रम करना पड़ेगा। जायदाद सम्बंधित कार्यो में आंशिक सफलता मिलेगी। कामुकता भी अधिक रहेगी। अनैतिक कार्यो से दूर रहें।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज आपको अपने स्वास्थ्य की संभाल करने की अत्यंत आवश्यकता है। मौसमी बीमारियों के कारण शरीर एवं दिमाग कम सक्रीय रहेंगे। आज के दिन परिश्रम से बचें। कार्य क्षेत्र पर गलत निर्णय के कारण हानि हो सकती है। लेकिन संध्या के आस पास थोडी मेहनत से संतोषजनक लाभ कमा लेंगे। परन्तु खर्च भी बराबर बने रहने से बचत मुश्किल से होगी। परिजनों से सम्बन्ध असामान्य रहेंगे। प्रियजनों के स्वभाव में स्वार्थ छलकेगा। आज आप मानसिक शान्ति पाने के लिये आध्यात्म का सहारा ले सकते है। काम के बोझ से दूर रहकर धर्म के रहस्यों को जानने का प्रयास करेंगे। स्त्री से अनबन रहेगी परन्तु सहयोग भी मिलेगा। दान-पुण्य के अवसर हाथ से ना जाने दें।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज के दिन भी आपके लिए लाभदायक स्थिति बनेगी दिन व्यस्तता से भरा एवं खर्चीला रहेगा। आज आपके अंदर आत्मविश्वाश बढ़-चढ़ कर रहेगा शारीरिक रूप से भी चुस्त रहेंगे। शेयर प्रोपर्टी में निवेश निकट भविष्य में लाभ कराएगा निर्माण के क्षेत्र से जुड़े जातको को नए अनुबंध मिलेंगे। दैनिक उपभोग की वस्तुओ के व्यापार से अधिक लाभ होगा। वैसे तो सभी आवश्यक कार्य मध्यान से पहले पूर्ण करेंगे परंतु धन लाभ के लिए संध्या तक इन्तजार करना पड़ेगा। सामाजिक एवं धार्मिक आयोजन में महत्त्वपूर्ण योगदान देंगे। परिवार में थोड़ी खींचतान युक्त शांति बनी रहेगी। अन्य महिलाओं से निकटता परेशानी कर सकती है। परिवार में सुख के साधनो पर अधिक खर्च करने पर भी शांति का अभाव रहेगा। सर्दी-जुखाम की समस्या हो सकती है।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन भी आपके पक्ष में रहेगा। दिन के आरम्भ थोड़ी परेशानियों के बाद कार्य में गति आने लगेगी। मध्यान के बाद का समय कई सुनहरे अवसर लाएगा। थोड़ा बहुत उतार चढ़ाव भी देखना पड़ सकता है परंतु आज धन एवं परिवार को लेकर संतोषजनक स्थिति बनेगी कंजूसी से खर्च पर नियंत्रण कर लेंगे। परिजनों अथवा रिश्तेदारो विशेष कर स्त्री पक्ष के सहयोग से लाभ अथवा कोई महत्तवपूर्ण काम बनेगा। जोखिम से ना घबराएं आज किये निवेश आगे लाभदायक रहेंगे। सुख के साधनों पर खर्च करेंगे। लघु व्यावसायिक यात्रा करनी पड़ेगी मध्यान बाद अत्यधिक थकान रहेगी।

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