Vaidik Panchang 22112025 Rashifal Samadhan

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️  *दिनांक – 22 नवम्बर 2025*
🌤️ *दिन – शनिवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – हेमंत ॠतु*
🌤️ *मास – मार्गशीर्ष*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – द्वितीया शाम 05:11 तक तत्पश्चात तृतीया*
🌤️ *नक्षत्र – ज्येष्ठा शाम 04:47 तक तत्पश्चात मूल*
🌤️ *योग – सुकर्मा सुबह 11:30 तक तत्पश्चात धृति*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 09:39 से सुबह 11:02 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:54*
🌤️ *सूर्यास्त –  05:54*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण- चंद्र-दर्शन (शाम 05:41 से रात्रि 07:01 तक)*
💥 *विशेष – द्वितीया को बृहती (छोटा  बैगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
             🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞

🌷 *शक्ति संवर्धक आहार* 🌷
🍪 *बाजरे के आटे में तिल मिलाकर बनायी गयी रोटी पुराने गुड़ व घी के साथ खाना, यह शक्ति-संवर्धन का उत्तम स्रोत है। 100 ग्राम बाजरे से 45 मि.ग्रा कैल्शियम, 5 मि.ग्रा. लौह व 361 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। तिल व गुड़ में भी कैल्शियम व लौह प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं।*
🙏🏻
            🌞 *~  वैदिक पंचांग ~* 🌞

🌷 *सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए* 🌷
🐄 *तुलसी की अथवा गाय की ९ बार प्रदक्षिणा करने से व्यक्ति की सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है ..ऐसे ही ओंकार जप से सकारात्मक ऊर्जा के साथ भगवत प्रीति भी बढ़ती है तुलसी और गौ का आभा मंडल ३ मीटर की दूरी तक फैला होता है वैज्ञानिक लेमों मूर्ति ने कहा है कि गौ, तुलसी, पीपल, सफ़ेद आंकड़ा, गोबर ये घनात्मक ऊर्जा देते हैं*
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           🌞 *~  वैदिक पंचांग  ~* 🌞

🌷 *नारी सौभाग्य मंत्र* 🌷
🏡 *किसी के घर में ज्यादा उपद्रव होता हो, ज्यादा अशांति होती हो और बहने बेचारी तंग आ गयी हों, तो एक नारी सौभाग्य कर्ण मंत्र आता है। बीज मंत्र हैं उसमें, ८ अक्षर हैं उसमें। ८ अक्षर में से ४ बार तो ॐ ही आता है।  ४ अक्षर दूसरे हैं तो कितना सरल हो गया ।*
🌷  *ॐ ॐ ह्रीं ॐ क्रिम ह्रीं ॐ स्वाहा ।*
👌🏻 *और इसकी १० माला जपनी होती है सूर्य उगने से पहले । और सुहागन स्त्री को । पुरुष को नही जपना है ।*
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            🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞

समस्त साधनों का सार।।

साधक को ये चार बातें दृढ़तापूर्वक मान लेनी चाहिये-
१. परमात्मा यहाँ हैं।
२. परमात्मा अभी हैं।
३. परमात्मा अपने में हैं।
४. परमात्मा अपने हैं।

इस दृष्टि से-
परमात्मा सब जगह (सर्वव्यापी) होने से यहाँ भी हैं। सब समय (तीनों कालों में) होने से अभी भी हैं।

सबमें होने से अपने में भी हैं और सबके होने से अपने भी हैं।
परमात्मा यहाँ होने से उनको प्राप्त करने के लिये दूसरी जगह जाने की आवश्यकता नहीं है। अभी होने से उनकी प्राप्ति के लिये भविष्य की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है।
अपने में होने से उन्हें बाहर ढूँढ़ने की आवश्यकता नहीं है। और अपने होने से उनके सिवाय किसी को भी अपना मानने की आवश्यकता नहीं है।

अपने होने से वे स्वाभाविक ही अत्यन्त प्रिय लगेंगे।
प्रत्येक साधक के लिये उपर्युक्त चारों बातें अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और तत्काल लाभदायक हैं। साधक को ये चारों बातें दृढ़ता से मान लेनी चाहिये। समस्त साधनों का यह सार साधन है। इसमें किसी योग्यता, अभ्यास, गुण आदि की भी जरूरत नहीं है। ये बातें स्वतः सिद्ध और वास्तविक हैं, इसलिये इसको मानने के लिये सभी योग्य हैं, सभी पात्र हैं, सभी समर्थ हैं। शर्त यही है कि वे एकमात्र परमात्मा को ही चाहते हों।

संचित कर्म —- क्रियमाण  कर्म तो हर समय होते रहते हैं, उनमें कुछ तो भोग लिए जाते हैं और शेष इकट्ठा होते रहते हैं।
इस प्रकार चित्त -रूपी गोदाम में एकत्रित हुए कर्मों को संचित कर्म कहते हैं । कर्म का भंडार अक्षय है। उसको भोगते -भोगते जीव अनादि काल से 84 लाख योनियों में शरीर धारण करता चला आ रहा है , फिर भी कर्म का भंडार अक्षय ही बना रहता है।

जीव को यह कर्म सुख व दुख रूप में मिश्रित अवस्था में भोगने को दिये जाते हैं, अगर जीव चाहे तो सत्कर्म करते हुए भगवान की भक्ति करते हुए अपने सभी संचित कर्मों से मुक्त हो सकता है।

श्री कृष्ण जी अर्जुन से कहते हैं, अर्थात हे अर्जुन! जैसे प्रज्वलित अग्नि  ईंधन को भस्म  कर देती है वैसे ही ज्ञान रूपी अग्नि संपूर्ण कर्मों को भस्म कर देती है।

उस ज्ञान को भक्ति योग के द्वारा शुद्ध अंतःकरण हुआ पुरुष आत्मा में अनुभव करता है। ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं होती।
इसे भगवान की निष्काम भक्ति के मार्ग पर चलते हुए भी प्राप्त किया जा सकता है।
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।। श्री लक्ष्मी स्तोत्रम् ।।

मातर्नमामि कमले पद्माऽऽयतसुलोचने।
श्रीविष्णुहृत्कमलस्थे विश्वमातर्नमोऽस्तु ते।।१।।

हे कमलवासिनी माता लक्ष्मी! हे पद्मलोचने ! हे भगवान विष्णु के हृदय-कमल में स्थिता! हे विश्वमाता! तुमको  मेरा प्रणाम !

क्षीरसागरसत्पुत्रि पद्मगर्भाभसुन्दरि।
लक्ष्मि प्रसीद सततं विश्वमातर्नमोऽस्तु ते।।२।।

हे क्षीरसागर की पवित्र पुत्री ! हे कमल की गर्भ से उत्पन्न सुन्दरी माॅं लक्ष्मी! आप प्रसन्न‌ हों‌। हे विश्वमाता ! तुम्हें मेरा नमस्कार।

महेन्द्रसदने त्वं श्रीः रुक्मिणी कृष्णभामिनी।
चन्द्रे ज्योत्स्ना प्रभा सूर्ये विश्वमातर्नमोऽस्तु ते।।३।।

हे माॅं ! तुम देवराज इन्द्र के महल की शोभा हो, तुम कृष्णप्रिया रुक्मिणी हो, तुम‌ चन्द्रमा की ज्योत्स्ना और सूर्य की प्रभा हो, हे विश्वमाता ! तुम्हें प्रणाम।

स्मितानने जगद्धात्रि शरण्ये सुखवर्धिनि।
जातवेदसि दहने विश्वमातर्नमोऽस्तु ते।।४।।

स्मितहास्यवदने माता !  हे संसार की धात्री ! हे शरण देने वाली, सुखों की वर्धिनी, अग्नि में निवास करने वाली, जगज्जननी ! तुमको मेरा प्रणाम।

ब्रह्माणि त्वं सर्जनाऽसि विष्णौ त्वं पोषिका सदा।
शिवे संहारिका शक्तिर्विश्वमातर्नमोऽस्तु ते।।५।।

हे माते ! सृष्टिकर्ता‌ ब्रह्मा में तुम सृजन शक्ति हो, भगवान विष्णु में तुम‌ पालन शक्ति हो, भगवान‌ शिव में तुम संहार शक्ति हो, हे विश्वजननी ! तुमको मेरा प्रणाम ।

त्वया शूरो गुणी विज्ञो धन्यो मान्यः कुलीनकः।
कलाशीलकलापाढ्यो विश्वमातर्नमोऽस्तु ते।।६।।

हे विश्वमाता ! तुम्हारे कारण ही व्यक्ति वीर, गुणी, विद्वान, धन्य, मान्य और कुलीन होता है तथा‌ कला, शील और ज्ञान से समृद्ध होता है। तुम्हें‌ मेरा प्रणाम।

त्वया गजस्तुरङ्गश्च स्त्रैणस्तृणं सरः सदः।
देवो गृहं कणः श्रेष्ठा विश्वमातर्नमोऽस्तु ते।।७।।

हे मात: ! तुम्हारे कारण ही हाथी, घोड़ा, स्त्रियाँ, घास, जलाशय, भवन, देवता, घर और कण भी श्रेष्ठ बनते हैं। हे विश्वमाता! तुमको नमस्कार है।

त्वया पक्षी पशुः शय्या रत्नं पृथ्वी नरो वधूः।
श्रेष्ठाः शुद्धा महालक्ष्मि विश्वमातर्नमोऽस्तु ते।।८।।

हे माॅं महालक्ष्मी! तुम्हारे कारण ही पक्षी, पशु, शय्या (बिस्तर), रत्न, पृथ्वी, मनुष्य और स्त्रियाँ श्रेष्ठ और पवित्र होते हैं। हे विश्वमाता! तुमको मेरा‌ नमस्कार है।

लक्ष्मि श्री कमले पद्मे रमे पद्मोद्भवे सति।
अब्धिजे विष्णुपत्नि त्वं प्रसीद सततं प्रिये।।९।।

हे माॅं लक्ष्मी! श्री, कमला, पद्मा, रमा, पद्मजा, सती, समुद्रोद्भवा विष्णु-पत्नी ! तुम मुझ पर सदा प्रसन्न‌ रहो, प्रिय देवी माॅं।

।। इति श्रीलक्ष्मीनारायण संहितायां साध्वी लोपामुद्रा कृतं श्री लक्ष्मी स्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।
।।आचार्य डॉ0 विजय शंकर मिश्र:।।

🌹*संतों द्वारा अमृत कथा*🌹

“गुरु गूंगे गुरू बावरे गुरू के रहिये दास “

एक बार की बात है नारद जी विष्णु जी से मिलने गए !
विष्णु जी ने उनका बहुत सम्मान किया ! जब नारद जी वापिस गए तो विष्णु जी ने कहा हे लक्ष्मी जिस स्थान पर नारद जी बैठे थे ! उस स्थान को गाय के गोबर से लीप दो !

जब विष्णु जी यह बात कह रहे थे तब नारद जी बाहर ही खड़े थे ! उन्होंने सब सुन लिया और वापिस आ गए और विष्णु जी से पुछा हे विष्णु जी जब मै आया तो आपने मेरा खूब सम्मान किया पर जब मै जा रहा था तो आपने लक्ष्मी जी से यह क्यों कहा कि जिस स्थान पर नारद बैठा था उस स्थान को गोबर से लीप दो !

विष्णु जी ने कहा हे नारद मैंने आपका सम्मान इसलिए किया क्योंकि आप देव ऋषि है और मैंने देवी लक्ष्मी से ऐसा इसलिए कहा क्योंकि आपका कोई गुरु नहीं है ! आप निगुरे है ! जिस स्थान पर कोई निगुरा बैठ जाता है वो स्थान गन्दा हो जाता है !

यह सुनकर नारद जी ने कहा हे भगवान आपकी बात सत्य है पर मै गुरु किसे बनाऊ ! विष्णु जी बोले हे नारद धरती पर चले जाओ जो व्यक्ति सबसे पहले मिले उसे अपना गुरु मानलो !

नारद जी ने प्रणाम किया और चले गए ! जब नारद जी धरती पर आये तो उन्हें सबसे पहले एक मछली पकड़ने वाला एक मछुवारा मिला ! नारद जी वापिस विष्णु जी के पास चले गए और कहा महाराज वो मछुवारा तो कुछ भी नहीं जानता मै उसे गुरु कैसे मान सकता हूँ !

यह सुनकर विष्णु जी ने कहा नारद जी अपना प्रण पूरा करो ! नारद जी वापिस आये और उस मछुवारे से कहा मेरे गुरु बन जाओ ! पहले तो मछुवारा नहीं माना बाद में बहुत मनाने से मान गया !

मछुवारे को राजी करने के बाद नारद जी वापीस विष्णु जी के पास गए और कहा हे विष्णु जी मेरे गुरूजी को तो कुछ भी नहीं आता वे मुझे क्या सिखायेगे ! यह सुनकर विष्णु जी को क्रोध आ गया और उन्होंने कहा हे नारद गुरु निंदा करते हो जाओ मै आपको श्राप देता हूँ कि आपको ८४ लाख योनियों में घूमना पड़ेगा !

यह सुनकर नारद जी ने दोनों हाथ जोड़कर कहा हे विष्णु जी इस श्राप से बचने का उपाय भी बता दीजिये ! विष्णु जी ने कहा इसका उपाय जाकर अपने गुरुदेव से पूछो ! नारद जी ने सारी बात जाकर गुरुदेव को बताई ! गुरूजी ने कहा ऐसा करना विष्णु जी से कहना ८४ लाख योनियों की तस्वीरे धरती पर बना दे फिर उस पर लेट कर गोल घूम लेना और विष्णु जी से कहना ८४ लाख योनियों में घूम आया मुझे माफ़ करदो आगे से गुरु निंदा नहीं करूँगा !

नारद जी ने विष्णु जी के पास जाकर ऐसा ही किया उनसे कहा ८४ लाख योनिया धरती पर बना दो और फिर उन पर लेट कर घूम लिए और कहा विष्णु जी मुझे माफ़ कर दीजिये आगे से कभी गुरु निंदा नहीं करूँगा ! यह सुनकर विष्णु जी ने कहा जिस गुरु की निंदा कर रहे थे उसी ने मेरे श्राप से बचा लिया !

गुरु की महिमा अपरम्पार है ! मैंने लोगो को कहते हुए सुना है कि गुरु पूरा होना चाहिए इसलिए वो ऐसे लोगो को गुरु बनाते है जिनका नाम बडा होता है । दर्शनों से भक्तो पर कृपा आने लगती है पर ऐसा कुछ नहीं होता !

कोई भी साधक कभी पूरा नहीं हो सकता क्योंकि पूरे तो केवल ईश्वर है और दूसरा ईश्वर कोई बन नहीं सकता ! इसलिए माना जाता है कि…

गुरु गूंगे गुरु बाबरे गुरु के रहिये दास
गुरु जो भेजे नरक नु स्वर्ग कि रखिये आस !

गुरु चाहे गूंगा हो चाहे गुरु बाबरा हो (पागल हो) गुरु के हमेशा दास रहना चाहिए ! गुरु यदि नरक को भेजे तब भी शिष्य को यह इच्छा रखनी चाहिए कि मुझे स्वर्ग प्राप्त होगा ! यदि शिष्य को गुरु पर पूर्ण विश्वास हो तो उसका बुरा स्वयं गुरु भी नहीं कर सकते !
गुरु तो केवल गुरु है फिर चाहे वे लोक गुरु हो या पंथक गुरु !
🌹🌹
🙏🏻🌷🍀🌹🌻🌺🍁💐🌸🙏🏻

आपका जन्मदिन: 22 नवंबर

🌹 जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष 🌹

दिनांक 22 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 4 होगा। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति जिद्दी, कुशाग्र बुद्धि वाले, साहसी होते हैं। ऐसे व्यक्ति को जीवन में अनेक परिवर्तनों का सामना करना पड़ता है। जैसे तेज स्पीड से आती गाड़ी को अचानक ब्रेक लग जाए ऐसा उनका भाग्य होगा। लेकिन यह भी निश्चित है कि इस अंक वाले अधिकांश लोग कुलदीपक होते हैं। आपका जीवन संघर्षशील होता है। इनमें अभिमान भी होता है। ये लोग दिल के कोमल होते हैं किन्तु बाहर से कठोर दिखाई पड़ते हैं। इनकी नेतृत्व क्षमता के लोग कायल होते हैं।

आपके लिए खास

शुभ दिनांक : 4, 8, 13, 22, 26, 1

शुभ अंक : 4, 8,18, 22, 45, 57


शुभ वर्ष : 2031, 2040, 2060

ईष्टदेव : श्री गणेश, श्री हनुमान,

शुभ रंग : नीला, काला, भूरा


आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
करियर: यह वर्ष पिछले वर्ष के दुष्प्रभावों को दूर करने में सक्षम है। आपको सजग रहकर कार्य करना होगा। नौकरीपेशा प्रयास करें तो उन्नति के चांस भी है।


परिवार: पारिवारिक मामलों में सहयोग के द्वारा सफलता मिलेगी। मान-सम्मान में वृद्धि होगी, वहीं मित्र वर्ग का सहयोग मिलेगा। विवाह के मामलों में आश्चर्यजनक परिणाम आ सकते हैं।

बिजनेस: नवीन व्यापार की योजना प्रभावी होने तक गुप्त ही रखें। शत्रु पक्ष पर प्रभावपूर्ण सफलता मिलेगी।


मेष (Aries)
स्वभाव: उत्साही
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: नीला
आज आपके ऊपर काम का दबाव अधिक रहने से आप परेशान रहेंगे। व्यवसाय में आपको लाभ मिलेगा। आप अपनी सेहत को लेकर सजग रहें। नौकरी में भी आपको अपनी वाणी पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है। आप किसी अजनबी की बातों पर भरोसा न करें। परिवार के सदस्यों में आपसी प्रेम बना रहेगा। माताजी की सेहत में गिरावट आ सकती है, जिससे आपको भागदौड़ भी अधिक रहेगी। आपकी कोई मन की इच्छा पूरी होने से खुशी होगी।

वृषभ (Taurus)
स्वभाव:  धैर्यवान
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: हरा
आज आपका वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा। धन व प्रतिष्ठा बढ़ने से खुशी होगी। पारिवारिक मामले को भी आप मिल बैठकर निपटाएंगे। संतान की नौकरी को लेकर कोई समस्या थी, तो उसके भी दूर होने की संभावना है। आपको अपने किसी सहयोगी से कोई जरूरी जानकारी सुनने को मिल सकती है। राजनीति में आपको किसी बड़े पद के न मिलने से थोड़ी निराशा होगी।

मिथुन (Gemini)
स्वभाव:  जिज्ञासु
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: लाल
आज का दिन आपके लिए प्रभाव व प्रताप में वृद्धि लेकर आने वाला है। आप यदि किसी काम को भाग्य के भरोसे छोड़ेंगे, तो उसमें आपको सफलता अवश्य मिलेगी। आप किसी नए घर मकान आदि की खरीदारी कर सकते हैं। जो आपके लिए अच्छी रहेगी। आपकी इनकम बढ़ने से खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। आपको अपने व्यवसाय में पार्टनरशिप थोड़ा सोच समझकर करनी होगी, क्योंकि इसमें आपको धोखा मिल सकता है।

कर्क (Cancer)
स्वभाव:  भावुक
राशि स्वामी: चंद्र
शुभ रंग: ग्रे
आज का दिन व्यापार कर रहे लोगों के लिए बढ़िया रहने वाला है। आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना होगा। संतान के विवाह में यदि कोई समस्या आ रही थी, तो वह भी दूर हो सकती हैं। आपको सामाजिक कामों से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी मिल सकती है। आपके विरोधी आपके खिलाफ कोई षड्यंत्र रच सकते हैं। आपका कोई पुराना लेनदेन चुकटा होगा। आज आपको कहीं व्यवसाय के काम को लेकर बाहर जाना पड़ सकता है।

सिंह राशि (Leo)
स्वभाव:  आत्मविश्वासी
राशि स्वामी: सूर्य
शुभ रंग:आसमानी
आज का दिन आपके सुख-सुविधाओं में वृद्धि लेकर आने वाला है। आपको धन लाभ मिलने से खुशी होगी और परिवार में किसी सदस्य के विवाह में आ रही बाधा भी दूर होगी। आपको किसी से कोई जरूरी जानकारी शेयर करने से बचना होगा। आपको कुछ नए संपर्कों से लाभ मिलेगा। आपकी महत्वपूर्ण लोगों से मुलाकात होगी और आप अपने कुछ फिजूल के खर्चों को कम भी करने की पूरी कोशिश करेंगे। आप उन्नति के राह पर आगे बढ़ेंगे।

कन्या (Virgo)
स्वभाव:  मेहनती
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: गुलाबी
आज का दिन आपके लिए लाभदायक रहने वाला है। आपको किसी धार्मिक आयोजन में सम्मिलित होने का मौका मिलेगा। परिवार में आपसी प्रेम बढ़ेगा। ससुराल पक्ष के किसी व्यक्ति से आपको धन लाभ मिलने से खुशी होगी, लेकिन आप परिवार में किसी सदस्य से किए हुए वादे को समय रहते पूरा करने की कोशिश करें। कुछ संपर्कों से आपको लाभ मिलेगा। जीवनसाथी के लिए आप कोई उपहार लेकर आ सकते हैं। आप अपनी वाणी व व्यवहार पर संयम बनाए रखें।

तुला (Libra)
स्वभाव:  संतुलित
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: सफेद
आज का दिन आपके लिए किसी नई नौकरी की प्राप्ति के लिए रहेगा, लेकिन आप किसी विपरीत परिस्थिति में धैर्य बनाए रखें और बेवजह छोटी-छोटी बातों को लेकर क्रोध न करें, नहीं तो इससे परिवार के सदस्य आपसे नाराज हो सकते हैं और कार्य क्षेत्र में भी कोई जिम्मेदारी भरा काम आपकी मुश्किलों को बढ़ाएगा। आपको अपनी स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं पर पूरा ध्यान देना होगा। आपके कुछ नया करने के प्रयास बेहतर रहेंगे।

वृश्चिक (Scorpio)
स्वभाव:  रहस्यमय
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: लाल
आज का दिन आपके लिए बढ़ते खर्चों को कंट्रोल करके चलने के लिए रहेगा। सरकारी योजनाओं का आपको पूरा लाभ मिलेगा और आप आप दिल से लोगों का भला सोचेंगे, लेकिन लोग इसे आपका स्वार्थ समझ सकते हैं। संतान के प्रति आप अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह निभाएंगे। कार्यक्षेत्र में भी मन मुताबिक काम मिलने से आपको खुशी होगी। आपके किसी बात को लेकर माताजी आपसे नाराज हो सकती हैं।

धनु (Sagittarius)
स्वभाव:  दयालु
राशि स्वामी: गुरु
शुभ रंग: पीला
आज का दिन आपके लिए मध्यम रूप से फलदायी रहने वाला है, लेकिन फिर भी आप अपने आसपास रह रहे शत्रुओं को पहचान कर ही आगे बढ़े। आपके घर किसी नए मेहमान का आगमन हो सकता है। आर्थिक दृष्टिकोण से लिए गए फैसलों के लिए पछतावा होगा। ससुराल पक्ष के किसी व्यक्ति से आपको लंबे समय बाद मिलने का मौका मिलेगा। यदि आप कोई निवेश करना चाहते हैं, तो वह लंबे समय के लिए करेंगे, तो भी आपको बेहतर लाभ मिल सकेंगे।

मकर (Capricorn)
स्वभाव:  अनुशासित
राशि स्वामी:  शनि
शुभ रंग: गुलाबी
आज का दिन आपके लिए मान-सम्मान में वृद्धि लेकर आने वाला है। रोजगार की तलाश में लगे लोगों को कोई खुशखबरी सुनने को मिलेगी। आप अपनी प्रॉपर्टी की यदि किसी डील को लेकर परेशान थे, तो वह भी फाइनल हो सकती है। भगवान के भक्ति में आपका खूब मन लगेगा। माता-पिता के आशीर्वाद से आपका कोई रुका हुआ काम पूरा होगा। संतान पढ़ाई के लिए कहीं बाहर जा सकते हैं। भाग्य का आपको पूरा साथ मिलेगा।

कुंभ ( Aquarius)
स्वभाव:  मानवतावादी
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: लाल
आज आपको लाभ मिलने से खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा और आपके काम भी बढ़ेंगे, जिनसे कार्य क्षेत्र में आपको प्रमोशन  मिल सकता है, लेकिन आपको अपने पद का गलत इस्तेमाल नहीं करना है, इसलिए आप गलत तरीके से धन कमाने से बचें। आपको अपने विरोधियों को पहचान कर चलना होगा और अपनी आय और व्यय भी में संतुलन बनाकर चलें, जिससे आपके फिजूल के खर्चे कंट्रोल हो सके।

मीन (Pisces)
स्वभाव: संवेदनशील
राशि स्वामी: बृहस्पति
शुभ रंग: गोल्डन
आज का दिन आपके लिए आर्थिक दृष्टिकोण से अच्छा रहने वाला है। बिजनेस के काम में आपको अच्छी सफलता मिलेगी,  लेकिन आपको किसी लड़ाई झगड़े से दूर रहना होगा और आप अपने आस पड़ोस में रह रहे  लोगों से मित्रता बनाए रखें। किसी से किसी बात को लेकर बहस बाजी न करें। आपके किसी रुके हुए काम के पूरा होने से आपके मन में खुशियां बढ़ेंगी। आप कुछ नया करने की सोचेंगे। दोस्तों के साथ कुछ समय मौज मस्ती करने में व्यतीत करेंगे।

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Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton