Vaidik Panchang 22082025 Devotee and Devotion

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️  *दिनांक – 22 अगस्त 2025*
🌤️ *दिन –  शुक्रवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – वर्षा ॠतु*
🌤️ *मास – भाद्रपद ( गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार श्रावण)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – चतुर्दशी सुबह 11:55 तक तत्पश्चात अमावस्या*
🌤️ *नक्षत्र – अश्लेशा रात्रि 12:16 तक तत्पश्चात मघा*
🌤️ *योग – वरीयान दोपहर 02:35 तक तत्पश्चात परिघ*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 11:06 से दोपहर 12:41 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:20*
🌤️ *सूर्यास्त –  07:02*
👉 *दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – दर्श अमावस्या,पीठोरी अमावस्या*
💥 *विशेष – चतुर्दशी व अमावस्या एवं व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
             🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *शरद ऋतु में कैसे करें स्वास्थ्य की रक्षा* 🌷
➡ *23 अगस्त 2025 शनिवार से शरद ऋतु प्रारंभ*
🌷 *शरद ऋतु में ध्यान देने योग्य महत्त्वपूर्ण बातें :*
👉🏻 *१] रोगाणां शारदी माता | रोगों की माता है यह शरद ऋतु | वर्षा ऋतु में संचित पित्त इस ऋतु में प्रकुपित होता है | इसलिए शरद पूर्णिमा की चाँदनी में उस पित्त का शमन किया जाता हैं |*
*इस मौसम में खीर खानी चाहिए | खीर को भोजनों में ‘रसराज’ कहा गया है | सीता माता जब अशोक वाटिका में नजरकैद थीं तो रावण का भेजा हुआ भोजन तो क्या खायेंगी, तब इंद्र देवता खीर भेजते थे और सीताजी वह खाती थी |*
👉🏻 *२] इस ऋतु में दूध, घी, चावल, लौकी, पेठा, अंगूर, किशमिश, काली द्राक्ष तथा मौसम के अनुसार फल आदि स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं |* *गुलकंद खाने से भी पित्तशामक शक्ति पैदा होती है | रात को (सोने से कम-से-कम घंटाभर पहले ) मीठा दूध घूँट – घूँट मुँह में बार-बार घुमाते हुए पियें | दिन में ७ – ८ गिलास पानी शरीर में जाय, यह स्वास्थ्य के लिए अच्छा है |*
👉🏻 *३] खट्टे, खारे, तीखे पदार्थ व भारी खुराक का त्याग करना बुद्धिमत्ता है | तली हुई चीजें, अचारवाली खुराक, रात को देरी से खाना अथवा बासी खुराक खाना और देरी से सोना स्वास्थ्य के लिए खतरा है क्योंकि शरद ऋतु रोगों की माता है | कोई भी छोटा-मोटा रोग होगा तो इस ऋतु में भडकेगा इसलिए उसको बिठा दो |*
👉🏻 *४] शरद ऋतु में कड़वा रस बहुत उपयोगी है | कभी करेला  चबा लिया, कभी नीम के १०-१२ पत्ते चबा लिये | यह कड़वा रस खाने में तो अच्छा नहीं लगता लेकिन भूख लगाता है और भोजन को पचा देता है |*
👉🏻 *५] पाचन ठीक करने का एक मंत्र भी है :*
🌷 *अगस्त्यं कुम्भकर्ण च शनिं च वडवानलम् |*
*आहारपरिपाकार्थ स्मरेद् भीमं च पंचमम्  ||*
➡ *यह मंत्र पढ़के पेट पर हाथ घुमाने से भी पाचनतंत्र ठीक रहता हैं |*
👉🏻 *६] बार-बार मुँह चलाना (खाना) ठीक नहीं, दिन में दो बार भोजन करें | और वह सात्त्विक व सुपाच्य हो | भोजन शांत व प्रसन्न होकर करें | भगवन्नाम से आप्लावित ( तर, नम ) निगाह डालकर भोजन को प्रसाद बना के खायें |*
👉🏻 *७] ५० साल के बाद स्वास्थ्य जरा नपा-तुला रहता है, रोगप्रतिकारक शक्तिदबी रहती है | इस समय नमक, शक्कर और घी-तेल पाचन की स्थिति पर ध्यान देते हुए नपा-तुला खायें, थोडा भी ज्यादा खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है |*
👉🏻 *८] कइयों की आँखें जलती होंगी, लाल हो जाती होंगी | कइयों को सिरदर्द होता होगा | तो एक –एक घूँट पानी मुँह में लेकर अंदर गरारा (कुल्ला) करता रहे और चाँदी का बर्तन मिले अथवा जो भी मिल जाय, उसमें पानी भर के आँख डुबा के पटपटाता जाय | मुँह में दुबारा पानी भर के फिर दूसरी आँख डुबा के ऐसा करें  | फिर इसे कुछ बार दोहराये | इससे आँख व  सिर की गर्मी निकलेगी | सिरदर्द और आँखों की जलन में आराम होगा व नेत्रज्योति में वृद्धि होगी |*
👉🏻 *९] अगर स्वस्थ रहना है और सात्त्विक सुख लेना है तो सुर्योदय के पहले उठना न भूलें | आरोग्य और प्रसन्नता की कुंजी है सुबह-सुबह वायु-सेवन करना | सूरज की किरणें नही निकली हों और चन्द्रमा की किरणें शांत हो गयी हों उस समय वातावरण में सात्तिवकता का प्रभाव होता है | वैज्ञानिक भाषा में कहें तो इस समय ओजोन वायु खूब मात्रा में होती है और वातावरण में ऋणायनों का प्रमाण अधिक होता है | वह स्वास्थ्यप्रद होती है | सुबह के समय की जो हवा है वह मरीज को भी थोड़ी सांत्वना देती है |*
🙏🏻


              🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞

🦚💖 छठी के दूध के बारे में तो सुना है ?
            पर छठिहार क्यूँ होता है ?💛🦚
              🙏💖 जय श्री कृष्ण 💖🙏
🌹🦚🦚🌹

🚩सभी सनातन प्रेमियों को *कृष्ण छठी* की हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएं 💖🦚🌹‼️

🦚 बात कन्हैया की जन्म पश्चात की है…! बडा ही मनोरम समय था, हर तरफ संगीत और बधाई के गीत बज रहे थे, सारा नन्द ग्राम फूलों से सजा हुआ था, हो भी क्यों न, आज कान्हा का छठा दिन जो था, परन्तु ये क्या , कन्हैया तो जोर जोर से रोये जा रहे थे । हर कोई लल्ला को चुप करने का प्रयास कर रहा था, मगर सब विफल. देव गण भी  प्रभू की ये लीला देख अचंभित थे, देवों ने ब्रह्मा जी से निराकरण के लिए कहा तो ब्रह्मा जी ने, शक्ति स्वरूपणी महामाया को भेज दिया। कान्हा को चुप करने के लिए, ये सुनके महामाया आनंदित हो गई इस कार्य को पाकर, और भांति भांति के रूप बदल कर लल्ला को चुप कराने की प्रयास करने लगी। कभी फूल बनती तो कभी पक्षी, कभी इधर जाती तो कभी उधर जाती , लल्ला चुप। सबको शांति मिली, लेकिन लल्ला अपने सर को कभी इधर तो कभी उधर क्यों कर रहा है , फिर खुद ही मुस्कुरा रहे है , दरअसल माया की माया सिर्फ प्रभू देख रहे थे और कोई नहीं, और फिर लल्ला रोने लगे , तो माया ने कहा की हे ब्रह्मा जी प्रभू को भूख लगी है, और मैया को दूध नहीं आ रहा, यही है प्रभु की रोने का कारन । फिर ब्रह्मा जी के आशीर्वाद से यसोदा को छाती में दर्द महसूस हुआ, देखा तो दूध टपक रहा है। मैया ने झट से कान्हा को गोद में उठाई और छाती से लगा ली। दूध मुँह में जाते ही लल्ला चुप हो गए। देव मानव सब हर्षित हो गए। परन्तु माया तो गुमसुम हो गई। ब्रह्मा जी से ये छुपा ना रहा, पूछा की क्या बात है? महामाया ने कहा की मुझे इसमें बड़ा आनंद आ रहा था। ब्रह्मा जी ने मुस्कुराते हुए कहा ये बात है,, आज से तुम छठी के रूप में हर बच्चे के छठे दिन पूजी जाओगी, साज सजावट और गीत संगीत से तुम्हारा स्वागत होगा, और बिना किसी को दिखाई दिए हर बच्चे के साथ तुम आनंद कर पाओगी, माया ने कहा की आपका बहुत बहुत धन्यवाद। प्रभु , चुकी आपके आशीर्वाद से यशोदा को दूध आया, इसीलिए छठी के दिन माँ के दूध पिने से बच्चे को वो दूध अमृत के सामान उपकारी होगा  और हर तरह के कष्ट को दूर करे ऐसा वर दें , तथास्तु कहके ब्रह्मा जी अलक्षित हो गए, और तब से छठी पूजन (छठिहार) का प्रचलन है, और छठी के दूध का एक अलग महत्व है।
आओ सखी आओ रे गीत छठी के गाओ रे, नन्द के लाला की छठी धूम धाम से मनाओ रे ।

         🙏💖🌹जय श्री कृष्ण🌹💖🙏

*🌹🕉️भक्त की डांट पर ठाकुर जी रीझे 🌹*
करमानंद अपने गायन से प्रभु की सेवा किया करते थे। इनका गायन इतना भावपूर्ण होता था कि पत्थर-हृदय भी पिघल जाता था।
ज्यादा दिनों तक इनको गृहस्थ जीवन रास नहीं आया और ये सब कुछ छोड़कर निकल पड़े।
इनके पास केवल दो चीज़ें ही थी… एक छड़ी और दूसरा ठाकुरबटुआ जिसे ये गले में लटका कर चलते थे।
ये जहाँ विश्राम करने के लिये रुकते थे वहाँ छड़ी को गाड़ देते थे और उस पर ठाकुर बटुआ लटका देते थे। इससे ठाकुर जी को झूला झूलने का आंनद मिलता था।
एक दिन ये सुबह-सुबह ठाकुर जी की पूजा करके श्री ठाकुर जी को गले में लटका कर चल दिए।
उस समय ये भगवन्नाम में इतने डूबे हुए थे कि छड़ी को लेना भूल गए।
अब जब दूसरी जगह ये विश्राम करने के लिये रुके तो इन्हें छड़ी की याद आयी!
अब समस्या थी कि ठाकुर जी को कैसे और कहाँ पधरावें? श्री ठाकुर जी में प्रेम की अधिकता के कारण इन्हें उनपर प्रणय-रोष हो आया।
ये गुस्सा करते हुए बोले; कि ठाकुर हम तो जीव हैं, हम कितना याद रखें? हम छड़ी भूल गए थे तो आपको याद दिलाना चाहिए था न!
अब दूसरी छड़ी कहाँ से लाएंगे आप को पध्राने के लिए? पिछली जगह भी बहुत दूर है और ये भी पक्का नहीं है कि वहाँ छड़ी मिल भी जाएगी या नही।
ये ठाकुर जी से खूब लड़े और बोले; बस छड़ी लाकर दो!!
श्री ठाकुर जी इनकी डाट-फटकार पर खूब रीझे।
प्रभु की योगमाया ने छड़ी लाकर दे दी! अब ये फिर रोने लगे कि इन्होंने प्रभु को क्यों डाँटा?
जब इन्होंने क्षमा मांगी तो प्रभु ने कहा कि यह मेरी ही लीला थी, मुझे डाँट सुननी थी।
भगवान ने कहा कि जब यहाँ हम और तुम दो ही हैं तो अगर कुछ कहने-सुनने, लड़ने-झगड़ने की इच्छा होगी तो कहाँ जायेंगे, किस्से लड़ेंगे?
प्रभु की यह बात सुनकर श्री करमानंद जी तो प्रेम सागर में डूब गए!
कुछ करो या न करो पर प्रभु से प्रेम ज़रूर करो। प्रभु से प्रेम करोगे तो भगवान का अनंत प्रेम पाओगे।
प्रेम में रहोगे तो हर क्रिया साधना बन जायेगी,जैसे छड़ी पर लटकाए जाना,प्रभु को झूला झुलाने की सेवा बन गई।
प्रेम से की गई हर सेवा श्री ठाकुर जी को रिझा देती है।प्रेम नहीं है तो कुछ नहीं,सब व्यर्थ हो जायेगा।
प्रभु से प्रेम करो तो कुछ भी कहोगे,श्री हरि खुद दौड़े चले आयेंगे जैसे छड़ी के लिये डाँट पड़ने पर खुद भक्त के सामने छड़ी लेकर आ गए..!!
    *🙏🏼🙏🏾🙏🏻जय श्री कृष्ण*🙏🙏🏽🙏🏿

श्रीकृष्ण की 16 कलाएं
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भगवान विष्णु के 24 अवतारों के बारे में हम सभी सनातन प्रेमी भलीभांति परिचित है। पुराण श्रुतियों आदि के माध्यम से हमे यह भी जानकारी मिली है कि सभी अवतारों में भगवान श्री कृष्ण श्रेष्ठ अवतार थे क्योंकि वे संपूर्ण कला अवतार थे जबकि बाकि जन्मों में जब भगवान विष्णु ने अवतार रूप लिया तो कुछ कलाओं के साथ ही लिया जिससे वे संपूर्ण अवतार नहीं कहलाये। ऐसे में इन कलाओं के बारे में जानना जरूरी हो जाता है आखिर कौनसी कलाएं थी भगवान श्री कृष्ण में जो उन्हें पूर्णावतार बनाती हैं। आइये जानते हैं।

क्या होती हैं कलाएं
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कला वैसे सामान्य शाब्दिक अर्थ के रूप में देखा जाये तो कला एक विशेष प्रकार का गुण मानी जाती है। यानि सामान्य से हटकर सोचना, सामान्य से हटकर समझना, सामान्य से हटकर खास अंदाज में ही कार्यों को अंजाम देना कुल मिलाकर लीक से हटकर कुछ करने का ढंग व गुण जो किसी को आम से खास बनाते हों कला की श्रेणी में रखे जा सकते हैं। भगवान विष्णु ने जितने भी अवतार लिये सभी में कुछ न कुछ खासियत होती थी वे खासियत उनकी कला ही थी।

कितनी होती हैं कलाएं
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भगवान श्री कृष्ण को चूंकि संपूर्ण कला अवतार माना जाता है इसलिये कलाओं की संख्या भी सोलह ही मानी जाती है।

16 कलाएं अर्थ सहित
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श्री संपदा👉 श्री संपदा इसका तात्पर्य है कि जिसके पास भी श्री कला या संपदा होगी वह धनी होगा। धनी होने का अर्थ सिर्फ पैसा व पूंजी जोड़ने से नहीं है बल्कि मन, वचन व कर्म से धनी होना चाहिये। ऐसा व्यक्ति जिसके पास यदि कोई आस लेकर आता है तो वह उसे निराश नहीं लौटने देता। श्री संपदा युक्त व्यक्ति के पास मां लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है। कह सकते हैं इस कला से संपन्न व्यक्ति समृद्धशाली जीवनयापन करता है।

भू संपदा👉 इसका अभिप्राय है कि इस कला से युक्त व्यक्ति बड़े भू-भाग का स्वामी हो, या किसी बड़े भू-भाग पर आधिपत्य अर्थात राज करने की क्षमता रखता हो। इस गुण वाले व्यक्ति को भू कला से संपन्न माना जा सकता है।

कीर्ति संपदा👉 कीर्ति यानि की ख्याति, प्रसिद्धि अर्थात जो देश दुनिया में प्रसिद्ध हो लोगों के बीच काफी लोकप्रिय, विश्वसनीय माने जाता हो व जन कल्याण कार्यों में पहल करने में हमेशा आगे रहता हो ऐसा व्यक्ति कीर्ति कला या संपदा युक्त माना जाता है।

वाणी सम्मोहन👉 कुछ लोगों की आवाज़ में एक अलग तरह का सम्मोहन होता है। लोग ना चाहकर भी उनके बोलने के अंदाज की तारीफ करते हैं। ऐसे लोग वाणी कला युक्त होते हैं इन पर मां सरस्वती की विशेष कृपा होती है। इन्हें सुनकर क्रोधी भी एकदम शांत हो जाता है। इन्हें सुनकर मन में भक्ति व प्रेम की भावना जाग जाती है।

लीला👉 इस कला से युक्त व्यक्ति चमत्कारी होता है उसके दर्शनों में एक अलग आनंद मिलता है। श्री हरि की कृपा से कुछ खास शक्ति इन्हें मिलती हैं जो कभी कभी अनहोनी को होनी और होनी को अनहोनी करने के साक्षात दर्शन करवाते हैं। ऐसे व्यक्ति जीवन को भगवान का दिया प्रसाद समझकर ही उसे ग्रहण करते हैं।

कांति👉 कांति वह कला है जिससे चेहरे पर एक अलग नूर पैदा होता है, जिससे देखने मात्र से आप सुध-बुध खोकर उसके हो जाते हैं। यानि उनके रूप सौंदर्य से आप प्रभावित होते हैं। चाहकर भी आपका मन उनकी आभा से हटने का नाम नहीं लेता और आप उन्हें निहारे जाते हैं। ऐसे व्यक्ति को कांति कला से युक्त माना जा सकता है।

विद्या👉 विद्या भी एक कला है जिसके पास विद्या होती है उसमें अनेक गुण अपने आप आ जाते हैं विद्या से संपन्न व्यक्ति वेदों का ज्ञाता, संगीत व कला का मर्मज्ञ, युद्ध कला में पारंगत, राजनीति व कूटनीति में माहिर होता है।

विमला👉 विमल यानि छल-कपट, भेदभाव से रहित निष्पक्ष जिसके मन में किसी भी प्रकार मैल ना हो कोई दोष न हो, जो आचार विचार और व्यवहार से निर्मल हो ऐसे व्यक्तित्व का धनी ही विमला कला युक्त हो सकता है।

उत्कर्षिणि शक्ति👉 उत्कर्षिणि का अर्थ है प्रेरित करने क्षमता जो लोगों को अकर्मण्यता से कर्मण्यता का संदेश दे सकें। जो लोगों को मंजिल पाने के लिये प्रोत्साहित कर सके। किसी विशेष लक्ष्य को भेदने के लिये उचित मार्गदर्शन कर उसे वह लक्ष्य हासिल करने के लिये प्रेरित कर सके जिस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने युद्धभूमि में हथियार डाल चुके अर्जुन को गीतोपदेश से प्रेरित किया। ऐसी क्षमता रखने वाला व्यक्ति उत्कर्षिणि शक्ति या कला से संपन्न व्यक्ति माना जा सकता है।

नीर-क्षीर विवेक👉  ऐसा ज्ञान रखने वाला व्यक्ति जो अपने ज्ञान से न्यायोचित फैसले लेता हो इस कला से संपन्न माना जा सकता है। ऐसा व्यक्ति विवेकशील तो होता ही है साथ ही वह अपने विवेक से लोगों को सही मार्ग सुझाने में भी सक्षम होता है।

कर्मण्यता👉 जिस प्रकार उत्कर्षिणी कला युक्त व्यक्ति दूसरों को अकर्मण्यता से कर्मण्यता के मार्ग पर चलने का उपदेश देता है व लोगों को लक्ष्य प्राप्ति के लिये कर्म करने के लिये प्रेरित करता है वहीं इस गुण वाला व्यक्ति सिर्फ उपदेश देने में ही नहीं बल्कि स्वयं भी कर्मठ होता है। इस तरह के व्यक्ति खाली दूसरों को कर्म करने का उपदेश नहीं देते बल्कि स्वयं भी कर्म के सिद्धांत पर ही चलते हैं।

योगशक्ति👉 योग भी एक कला है। योग का साधारण शब्दों में अर्थ है जोड़ना यहां पर इसका आध्यात्मिक अर्थ आत्मा को परमात्मा से जोड़ने के लिये भी है। ऐसे व्यक्ति बेहद आकर्षक होते हैं और अपनी इस कला से ही वे दूसरों के मन पर राज करते हैं।

विनय👉 इसका अभिप्राय है विनयशीलता यानि जिसे अहं का भाव छूता भी न हो। जिसके पास चाहे कितना ही ज्ञान हो, चाहे वह कितना भी धनवान हो, बलवान हो मगर अहंकार उसके पास न फटके। शालीनता से व्यवहार करने वाला व्यक्ति इस कला में पारंगत हो सकता है।

सत्य धारणा👉 कहते हैं सच बहुत कड़वा होता है इसलिये सत्य को धारण करना सबके बस में नहीं होता विरले ही होते हैं जो सत्य का मार्ग अपनाते हैं और किसी भी प्रकार की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का दामन नहीं छोड़ते। इस कला से संपन्न व्यक्तियों को सत्यवादी कहा जाता है। लोक कल्याण व सांस्कृतिक उत्थान के लिये ये कटु से कटु सत्य भी सबके सामने रखते हैं।

आधिपत्य👉 आधिपत्य वैसे यह शब्द सुनने में तो ताकत का अहसास कराने वाला मालूम होता है, लेकिन यह भी एक गुण है। असल में यहां आधिपत्य का तात्पर्य जोर जबरदस्ती से किसी पर अपना अधिकार जमाने से नहीं है बल्कि एक ऐसा गुण है जिसमें व्यक्ति का व्यक्तित्व ही ऐसा प्रभावशाली होता है कि लोग स्वयं उसका आधिपत्य स्वीकार कर लेते हैं। क्योंकि उन्हें उसके आधिपत्य में सरंक्षण का अहसास व सुरक्षा का विश्वास होता है।

अनुग्रह क्षमता👉 जिसमें अनुग्रह की क्षमता होती है वह हमेशा दूसरों के कल्याण में लगा रहता है, परोपकार के कार्यों को करता रहता है। उनके पास जो भी सहायता के लिये पंहुचता वह अपने सामर्थ्यानुसार उक्त व्यक्ति की सहायता भी करते हैं।

कुल मिलाकर जिसमें भी ये सभी कलाएं अथवा इस तरह के गुण होते हैं वह ईश्वर के समान ही होता है। क्योंकि किसी इंसान के वश में तो इन सभी गुणों का एक साथ मिलना दूभर ही नहीं असंभव सा लगता है, क्योंकि साक्षात ईश्वर भी अपने दशावतार रूप लेकर अवतरित होते रहे हैं लेकिन ये समस्त गुण केवल द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के अवतार रूप में ही मिलते हैं। जिसके कारण यह उन्हें पूर्णावतार और इन सोलह कलाओं का स्वामी कहा जाता है।
साभार~ पं देव शर्मा💐
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आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष

दिनांक 22 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 4 होगा। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति जिद्दी, कुशाग्र बुद्धि वाले, साहसी होते हैं। ऐसे व्यक्ति को जीवन में अनेक परिवर्तनों का सामना करना पड़ता है। जैसे तेज स्पीड से आती गाड़ी को अचानक ब्रेक लग जाए ऐसा उनका भाग्य होगा। लेकिन यह भी निश्चित है कि इस अंक वाले अधिकांश लोग कुलदीपक होते हैं। आपका जीवन संघर्षशील होता है। इनमें अभिमान भी होता है। ये लोग दिल के कोमल होते हैं किन्तु बाहर से कठोर दिखाई पड़ते हैं। इनकी नेतृत्व क्षमता के लोग कायल होते हैं।

शुभ दिनांक : 4, 8, 13, 22, 26, 1

शुभ अंक : 4, 8,18, 22, 45, 57

शुभ वर्ष : 2031, 2040, 2060


ईष्टदेव : श्री गणेश, श्री हनुमान,

शुभ रंग : नीला, काला, भूरा

जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :


यह वर्ष पिछले वर्ष के दुष्प्रभावों को दूर करने में सक्षम है। आपको सजग रहकर कार्य करना होगा। परिवारिक मामलों में सहयोग के द्वारा सफलता मिलेगी। मान-सम्मान में वृद्धि होगी, वहीं मित्र वर्ग का सहयोग मिलेगा। नवीन व्यापार की योजना प्रभावी होने तक गुप्त ही रखें। शत्रु पक्ष पर प्रभावपूर्ण सफलता मिलेगी। नौकरीपेशा प्रयास करें तो उन्नति के चांस भी है। विवाह के मामलों में आश्चर्यजनक परिणाम आ सकते हैं।


मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज के दिन आपका उद्दंड व्यवहार हस्ते हुए इंसान को रुला देगा। स्वभाव में कठोरता एवं रूखापन आपसी संबंधों को तो खराब करेगा ही साथ में धन संबंधित उलझने भी बढ़ाएगा। जो व्यक्ति आपकी सहायता के लिये पहले तैयार था वह अचानक पीठ दिखायेगा। कार्य क्षेत्र पर भी धन का अभाव महत्त्वपूर्ण कार्यों को अधूरा रखेगा। उधारी वालों से अतिरिक्त परेशानी होगी। आज आपका मन सरल एवं सात्विक कार्यों को छोड़ अनर्गल प्रवृतियों की तरफ जल्दी आकर्षित हो जाएगा। नौकरी वाले लोग छोटी सी बात पर सहकर्मी अथवा अन्य व्यक्ति से भिड़ेंगे। व्यवहार में नरमी लायें अन्यथा मान हानि के प्रबल योग बन रहे है। स्वास्थ्य में कुछ ना कुछ विकार लगा रहेगा।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज परिस्थितिया संध्या तक लाभदायक रहेंगी इसके बाद ही झंझट बढ़ाने वाली बनेगी अनुभव करेंगे। दिन का आरंभ शांत रहेगा हानि का भय रहने से किसी कार्य मे देरी हो सकती है । घर मे भी कुछ ना कुछ समस्या बनी रहेगी। कार्य व्यवसाय में आज जोखिम लेने से ही आर्थिक लाभ हो सकता है इसका ध्यान रखें। सहकर्मी सामने से हितैषी बनेंगे लेकिन पीछे से गड़बड़ कर सकते है। धन की आमाद सामान्य से अधिक ही रहेगी। संध्या बाद परिवार रिश्तेदारी में अकस्मात दुखद घटना घटित होने की सम्भवना है। सेहत  में नरमी रहेगी।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन उठा पटक वाला रहेगा आज आप जिस कार्य से लाभ की उम्मीद लगाए रहेंगे उसे छोड़ कोई अन्य काम लाभ दिलाएगा। जल्दबाजी में कोई निर्णय ना लें वरना हाथ लगे लाभ से वंचित रह जाएंगे। व्यवसायी वर्ग कुछ समय के लिये निराशा में आकर घाटे में सौदे करने का विचार बनाएंगे लेकिन थोड़ा धैर्य रखें संध्या के समय स्थिति बदलने पर ज्यादा लाभ मिल सकता है। महिलाओं के विचार पल पल में बदलेंगे जिससे कार्य सफलता संदिग्ध रहेगी। नौकरी वाले लोगो को परिश्रम का फल किसी ना किसी रूप में अवश्य मिलेगा। सेहत कुछ समय के लिये गड़बड़ होगी।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज के दिन व्यर्थ के कार्यों में समय नष्ट होगा जिससे अपने मूल उद्देश्य से भटक जाएंगे। आज घर के बुजुर्ग अथवा वरिष्ठ नागरिको को सलाह की अनदेखी ना करें वरना बाद में पछताना पड़ेगा। कार्य क्षेत्र पर व्यवसाय में उतार चढ़ाव आएगा लेकिन फिर भी भाग्य का साथ मिलने से अन्य प्रतिद्वंदियों की तुलना में ज्यादा लाभ के अवसर मिलेंगे लेकिन ध्यान रहे प्रलोभन के चक्कर मे ये हाथ से निकल भी सकते है। सहकर्मी स्वार्थ सिद्धि के लिये मीठा व्यवहार करेंगे पूर्ति होने के बाद व्यवहार बदल जायेगा देख कर ही किसी की मदद करें। परिवार के सदस्य आपकी टालमटोल वाली नीति से नाराज होंगे। सर दर्द अथवा मासपेशियो में अकड़न रहेगी।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन आप अपने असंतोषी आचरण से खराब करेंगे। परिस्थितियां अधिकांश समय आपके निर्णय के विपरीत रहेंगी। अपने काम निकालने की कला से आवश्यकता अनुसार लाभ बना लेंगे लेकिन आज किसी भी प्रकार का सुख आपको संतोष नही दे सकेगा। कार्य व्यवसाय की उलझनों के कारण मानसिक रूप से चिड़चिड़े रहेंगे किसी की गलती का गुस्सा अन्य के ऊपर उतारने पर सम्मान में कमी आएगी। आज आपकी प्रवृति बैठकर कार्य करने की रहेगी लेकिन धन लाभ चाहते हैं तो अधिक परिश्रम करना ही पड़ेगा तभी कल से इसका लाभ उठा सकेंगे। पुरानी बात याद आने पर मानसिक रूप से अशान्त और ग्लानि अनुभव करेंगे।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज के दिन अधिकांश समय लापरवाही करेंगे। प्रातः काल यात्रा की योजना बनेगी लेकिन अकस्मात अन्य कार्य आने से निरस्त हो सकती है। आज आप अपनी कामनाओ को त्याग परिजनों की आवश्यकता पूर्ति पर अधिक ध्यान दें अन्यथा क्लेश हो सकता है। मेहनत इच्छाओं की तुलना में कम करेंगे ध्यान रहे आज की मेहनत कल किसी ना किसी प्रकार से वृद्धि कारक बनेगी। कार्य क्षेत्र पर ज्यादातर कार्य बिना बौद्विक श्रम किये सम्पन्न होंगे। जल्दबाजी में किसी से धन संबंधित वादे ना करें उधार आज भूल कर भी ना दें अन्यथा निश्चित ही डूबेगा। सेहत में ताजगी बनी रहेगी। लोभ से बचें समय स्वतः ही लाभदायक बना है।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज के दिन आपको परिश्रम का फल ना मिलने से गुस्सा आएगा। दिन का प्रथम हिस्सा तो शांति से व्यतीत करेंगे लेकिन इसके बाद कि दिनचार्य व्यर्थ की भागदौड़ वाली रहेगी। अनचाहे कार्यो में समय खराब होगा। आज मन मे अहम की भावना रहने के कारण किसी का मार्गदर्शन भी नही लेंगे। कार्य व्यवसाय से जब भी धन लाभ की संभावना बनेगी तभी कुछ ना कुछ व्यवधान आएगा। उधार के व्यावहार आज सीमित रखें अन्यथा धन संबंधित उलझनों में पढ़ेंगे। परिवार में भी किसी से आर्थिक कारणों को लेकर खींच तान संभव है महिलाए आवश्यकता पड़ने पर ही बोलें। रक्त पित्त दोष सेहत को प्रभावित करेगा।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज के दिन आपमे धार्मिक भावनाओं का उदय होगा। दैनिक कार्यो से समय निकाल पूजा पाठ धार्मिक यात्रा के लिये उपस्थित रहेंगे। परोपकार की भावना भी रहेगी लेकिन जहां स्वार्थ दिखेगा वही दिखावे के लिये दान पुण्य करेंगे। कार्य क्षेत्र पर आज ज्यादा व्यवसाय नही रहेगा लेदेकर लाभ कमाने की नीति अपनाएंगे इससे लाभ तो तुरंत हो जाएगा लेकिन बाद में अफसोस भी होगा। सहकर्मियों अथवा किसी बाहरी व्यक्ति से नोक झोंक होगी व्यर्थ के विवादों से बचें अन्यथा अपने हित साधने भारी पड़ेंगे। घर मे आंशिक शांति रहेगी कुछ काम बताने पर परिजन उग्र होंगे। सेहत में आज स्थिरता रहेगी।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज के दिन भी आपको स्वास्थ्य एवं अन्य घरेलू समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। दिन के आरंभिक और अंतिम भाग को छोड़ शेष में मानसिक उलझने लगी रहेंगी। नौकरी अथवा व्यवसाय में भी सफलता हाथ आते आते निकल जायेगी। आज जिस कार्य को करने से दूर भागेंगे परिस्थितिवश उसी को करना पडेगा। धन प्राप्ति के लिये किसी की खुशामद भी करनी पड़ेगी उसके बाद भी परिणाम आशाजनक नही मिलेंगे। संध्या बाद से उलझनों में कमी आने लगेगी महत्त्वपूर्ण कार्य कल तक कि लिये टालने के प्रयास करें। परिवार में एक दूसरे का सहयोग करने से ही तालमेल बन सकता है। कठोर वाणी एवं यात्रा से भी बचें।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज के दिन शुभ प्रसंग बनने से उत्साहित रहेंगे लेकिन आज अपने काम से काम रखें कही सुनी बातो पर ध्यान दिया तो किसी ना किसी से गरमा गरमी अवश्य होगी। आज पुरुषार्थ में कमी रहने पर भी धन लाभ के अवसर सुलभ होंगे लेकिन आपके प्रयास अनैतिक रूप से धन कमाने के अधिक रहेंगे मार्ग चाहे कोई भी हो लाभ अवश्य देकर जायेगा भले बाद में समस्या ही लाये। नौकरी वाले लोग अधिकारी वर्ग से सतर्क रहें छोटी भूल भी माफी के लायक नही रहेगी। मध्यान के बाद भाग दौड़ करनी पड़ेगी लेकिन परिणाम विपरीत ही रहेंगे। संध्या का समय आनंद मनोरंजन में बिताना पसंद करेंगे। घर में थोड़ी बहुत कहा सुनी होगी।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन मिला-जुला फल देगा कभी प्रसन्न तो कभी उत्साहहीनता बनेगी। व्यवसायी वर्ग आज प्रातः काल से ही धन की उगाही को लेकर चिंतित रहेंगे जोर जबरदस्ती से बचें अन्यथा नई समस्या बन सकती है। कार्य व्यवसाय में आज मंदी का सामना करना पड़ेगा पूर्व नियोजित कार्योंसे ही अल्प धन लाभ होगा। कार्य विस्तार की योजना फिलहाल स्थगित करें निवेश करने से भी बचें आगे हानि के योग बन रहे है। परिवार में किसी के उद्दंड व्यवहार के कारण शांत वातावरण अचानक खराब होगा परिजनों में धर्य की कमी रहेगी विवेकी व्यवहार अपनाए। सेहत संध्या बाद खराब हो सकती है।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन संभावनाओं पर केंद्रित रहेगा जो लोग आपसे नजदीकी बनाये हुए है वो आपकी बेतुकी बातो से दूरी बना सकते है। आज दिनचर्या को सामान्य रखने के लिये विवेकी व्यवहार की अधिक आवश्यकता है विशेष कर विपरीत लिंगीय से बात करते समय अधिक सावधान रहें लोग आपकी गलतियां पकड़ेंगे जिनका प्रयोग समय आने पर कर आपकी परेशानि में डालेंगे। धन लाभ की संभावना दिन भर लगी रहेगी परन्तु प्राप्ति के समय अचानक कुछ ना कुछ बाधा आएगी। खर्च की तुलना में धन की आमद कम ही रहेगी। परिजनों से सलाह लेकर ही कोई बड़ा काम करें। शारीरिक कमजोरी अनुभव होगी।

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“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton