🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक – 21 अगस्त 2025*
🌤️ *दिन – गुरूवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – वर्षा ॠतु*
🌤️ *मास – भाद्रपद ( गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार श्रावण)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – त्रयोदशी दोपहर 12:44 तक तत्पश्चात चतुर्दशी*
🌤️ *नक्षत्र – पुष्य रात्रि 12:08 तक तत्पश्चात अश्लेशा*
🌤️ *योग – व्यतीपात शाम 04:14 तक तत्पश्चात वरीयान*
🌤️ *राहुकाल – दोपहर 02:17 से शाम 03:53 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:20*
🌤️ *सूर्यास्त – 07:02*
👉 *दिशाशूल – दक्षिण दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – मासिक शिवरात्रि,अघोरा चतुर्दशी,गुरुपुष्यामृत योग (सूर्योदय से रात्रि 12:08 तक)*
💥 *विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए* 🌷
➡ *22 अगस्त 2025 शुक्रवार को दर्श अमावस्या, पीठोरी अमावस्या एवं 23 अगस्त 2025 शनिवार को भाद्रपद अमावस्या, कुशोत्पाटिनी अमावस्या है।*
🏡 *घर में हर अमावस अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (१ लीटर पानी में ५० ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें । इससे नेगेटिव एनेर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं ।*
🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *अमावस्या* 🌷
🙏🏻 *अमावस्या के दिन जो वृक्ष, लता आदि को काटता है अथवा उनका एक पत्ता भी तोड़ता है, उसे ब्रह्महत्या का पाप लगता है (विष्णु पुराण)*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए* 🌷
🔥 *हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।*
🍛 *सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गूगल, ७. गुड़, ८. देशी कर्पूर, गौ चंदन या कण्डा।*
🔥 *विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की १-१ आहुति दें।*
🔥 *आहुति मंत्र* 🔥
🌷 *१. ॐ कुल देवताभ्यो नमः*
🌷 *२. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः*
🌷 *३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः*
🌷 *४. ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः*
🌷 *५. ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
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*🌸 कथा 🌸 मीरा का विष पीना – प्रेम की अंतिम परीक्षा*
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राजस्थान के मेवाड़ की धरती पर एक ऐसी स्त्री ने जन्म लिया, जिसके हृदय में बचपन से ही श्रीकृष्ण के प्रति अटूट प्रेम और भक्ति का प्रवाह बहता था। उसका नाम था — *मीरा*।
बचपन का प्रण**
कहते हैं, जब मीरा महज चार वर्ष की थीं, एक दिन उन्होंने अपनी माँ को एक विवाह समारोह में दूल्हे के रूप में श्रीकृष्ण की मूर्ति थामे देखा। मासूम मीरा ने भोलेपन से पूछा —
*”माँ! मेरा दूल्हा कौन होगा?”*
माँ ने मुस्कुराकर श्रीकृष्ण की मूर्ति दिखाते हुए कहा —
*”यही तुम्हारे पति हैं।”*
उस दिन से मीरा के हृदय में यह बात पत्थर की लकीर बन गई। उन्होंने अपने मन, प्राण और जीवन को श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया।
राजमहल में भक्ति की धारा**
समय बीता, मीरा का विवाह मेवाड़ के राजकुमार भोजराज से हुआ। वे राजमहल में आ गईं, लेकिन उनके जीवन का केंद्र अब भी केवल कृष्ण थे। वे महलों के आभूषण, रेशमी वस्त्र और विलासिता छोड़कर, राधा-कृष्ण के भजन गाने और मुरली की धुन में खो जाने में ही आनंद पातीं।
महल की परंपराएँ और राजनीति मीरा की मुक्त भक्ति को समझ न सकीं। महल की रानियाँ और कुछ दरबारी उनके कृष्ण प्रेम को उपहास और अपमान की दृष्टि से देखने लगे।
ईर्ष्या और षड्यंत्र**
मीरा की कीर्तन सभाओं में नगर के लोग, संत और भक्त बड़ी संख्या में आने लगे। यह लोकप्रियता दरबार के कई लोगों को चुभने लगी। सबसे अधिक यह ईर्ष्या राणा साँगा के बाद शासन संभालने वाले राणा विक्रमादित्य को हुई, जो भोजराज के निधन के बाद सिंहासन पर बैठे थे।
विक्रमादित्य मीरा के कृष्ण प्रेम को राजपरिवार की प्रतिष्ठा के विपरीत मानते थे। उन्होंने मीरा को दरबार और महल से दूर करने की ठानी।
विष का प्याला**
एक दिन राणा विक्रमादित्य ने मीरा की भक्ति को परखने के नाम पर उनका अंत करने की योजना बनाई। उन्होंने एक दूत को बुलाकर आदेश दिया —
*”मीरा को यह प्याला अर्पित करना। कहो कि यह उनके प्रिय कृष्ण का प्रसाद है।”*
प्याले में प्रचंड विष भरा गया। आदेश था कि इसे मीरा के हाथ में इस प्रकार दिया जाए कि वे बिना किसी संदेह के पी लें।
अंतिम परीक्षा का क्षण**
दूत ने राजाज्ञा का पालन किया। वह मीरा के कक्ष में पहुँचा और बोला —
*”महारानी! यह आपके श्रीकृष्ण का विशेष प्रसाद है।”*
मीरा ने अपने नयन मूर्ति की ओर उठाए। मुस्कुराते हुए बोलीं —
*”मेरे कान्हा का दिया हुआ कुछ भी अमृत है।”*
उन्होंने दोनों हाथों से प्याला लिया। धीरे से कृष्ण की मूर्ति के चरणों में उसे स्पर्श कराया और बंद आँखों से प्रार्थना की —
*”प्रभु! यदि मेरा प्रेम सच्चा है, तो यह विष भी अमृत बन जाए।”*
चमत्कार**
मीरा ने एक ही घूँट में पूरा प्याला पी लिया। दरबार के लोग और दूत स्तब्ध रह गए। उन्हें लगा कि कुछ ही क्षणों में मीरा भूमि पर गिरकर प्राण त्याग देंगी।
लेकिन हुआ इसके विपरीत। मीरा के चेहरे पर एक अद्भुत आभा फैल गई, उनकी आँखों में भक्ति का प्रकाश और गहराया। उन्होंने भजन गाना शुरू कर दिया —
*”पायो जी मैंने राम रतन धन पायो…”*
वह विष, श्रीकृष्ण की कृपा से, अमृत में बदल गया। मीरा के शरीर को कोई हानि नहीं हुई।
संदेश**
मीरा की इस घटना ने मेवाड़ और आस-पास के राज्यों में भक्ति की नई लहर पैदा कर दी। यह सिद्ध हो गया कि सच्चा प्रेम और अटूट विश्वास ईश्वर को बाध्य कर देता है कि वह अपने भक्त की रक्षा करे।
राणा विक्रमादित्य भी इस चमत्कार से प्रभावित हुए, परंतु उनका अहंकार पूरी तरह समाप्त न हुआ। फिर भी, मीरा का नाम अमर हो गया — एक ऐसी प्रेमिका, जिसने विष पीकर अपने प्रेम की अंतिम परीक्षा उत्तीर्ण की।
*”जिसे संसार ज़हर कहे, उसे भी मीरा ने प्रेम से अमृत बना लिया… क्योंकि उनका विश्वास श्रीकृष्ण पर था।”* 💛🙏
“क्या आज के समय में कोई इतना अटूट प्रेम और विश्वास रख सकता है जितना मीरा ने रखा?”
_🌷🌷जय_जय_
_श्रीԶเधे_Զเधे🌷🌷_
_जय_श्रीकृष्ण_जी💐👏💖_
जय श्रीराधेकृष्ण जी🌷🙏💕
सत्य और झूठ
झूठ ने सत्य से कहा, “चलो साथ में नहाते हैं, कुएँ का पानी बहुत बढ़िया है।
सत्य को अभी भी संदेह था, उसने पानी की जाँच की और पाया कि यह वाकई बढ़िया है। इसलिए वे नग्न हो गए और नहाने लगे।
लेकिन अचानक, झूठ पानी से बाहर निकल आया और सत्य के कपड़े पहनकर भाग गया।
सत्य क्रोधित होकर अपने कपड़े वापस लेने के लिए कुएँ से बाहर निकला।
लेकिन दुनिया ने नग्न सत्य को देखकर क्रोध और घृणा से दूर देखा।
बेचारा सत्य कुएँ में वापस आ गया और अपनी शर्म को छिपाते हुए हमेशा के लिए गायब हो गया।
तब से, झूठ सत्य के वेश में दुनिया भर में घूमता है, और समाज बहुत खुश है….. क्योंकि दुनिया को नग्न सत्य को जानने की कोई इच्छा नहीं है।
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
दिनांक 21 को जन्मे व्यक्ति निष्कपट, दयालु एवं उच्च तार्किक क्षमता वाले होते हैं। अनुशासनप्रिय होने के कारण कभी-कभी आप तानाशाह भी बन जाते हैं। आप दार्शनिक स्वभाव के होने के बावजूद एक विशेष प्रकार की स्फूर्ति रखते हैं। आप सदैव परिपूर्णता या कहें कि परफेक्शन की तलाश में रहते हैं यही वजह है कि अक्सर अव्यवस्थाओं के कारण तनाव में रहते हैं। अंक ज्योतिष के अनुसार आपका मूलांक तीन आता है। यह बृहस्पति का प्रतिनिधि अंक है। आपकी शिक्षा के क्षेत्र में पकड़ मजबूत होगी। आप एक सामाजिक प्राणी हैं।
शुभ दिनांक : 3, 12, 21, 30
शुभ अंक : 1, 3, 6, 7, 9
शुभ वर्ष : 2028, 2030, 2031, 2034, 2043, 2049, 2052
ईष्टदेव : देवी सरस्वती, देवगुरु बृहस्पति, भगवान विष्णु
शुभ रंग : पीला, सुनहरा और गुलाबी
जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :
दांपत्य जीवन में सुखद स्थिति रहेगी। घर या परिवार में शुभ कार्य होंगे। यह वर्ष आपके लिए अत्यंत सुखद है। किसी विशेष परीक्षा में सफलता मिल सकती है। नौकरीपेशा के लिए प्रतिभा के बल पर उत्तम सफलता का है। नवीन व्यापार की योजना भी बन सकती है। मित्र वर्ग का सहयोग सुखद रहेगा। शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे। महत्वपूर्ण कार्य से यात्रा के योग भी है।
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन आपके लिये विभिन्न उलझनों से भरा रहेगा। पूर्व में किसी से किये वादे को पूरा ना कर पाने पर अपमानित होने की संभावना है। आज आप जो भी विचारेंगे या निर्णय लेंगे परिणाम उसके विपरीत ही रहने वाला है। विशेष कर आज धन संबंधित मामलों में स्पष्टता रखें। टालमटोल करने पर कलह क्लेश होगा। कार्य व्यवसाय की गति मंद रहेगी इसके ठीक करना आज बहुत मुश्किल होगा। आध्यात्मिक कार्यो में लगाव रहेगा लेकिन उलझनों के कारण समय नहीं दे सकेंगे। जमीन संबंधित अथवा अन्य अचल संपत्ति के कार्यो से जुड़े लोगों को प्रयास करने पर अनुकूल परिणाम मिल सकते है लेकिन धन की लेन देन आज ना करें। घर में किसी गलतफहमी के कारण मतभेद होंगे।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन मिश्रीत फलदायी रहेगा आज आपके स्वभाव में क्रोध और दया का मिश्रित समावेश रहेगा। धन संबंधित मामलों को लेकर बेचैन रहेंगे मेहनत करने में आज कसर नही छोड़ेंगे फिर भी धन लाभ में विलंब होने पर क्रोध आएगा। आज किसी के द्वारा वादा खिलाफी का आरोप भी लगाया जा सकता है परोपकार की भावना प्रबल रहेगी लेकिन सीमित साधनों के कारण ठीक से कर नही पाएंगे फिर भी सामर्थ्य अनुसार किसी याचक को कुछ न कुछ अवश्य देंगे। भाई बंधु अथवा घर के अन्य सदस्य का जिद्दी व्यवहार कुछ समय के लिये परेशान करेगा। सरकार संबंधित कार्य भाग दौड़ के बाद आश्चर्य जनक परिणाम देंगे। रक्त अथवा पित्त संबंधित शिकायत हो सकती है।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज के दिन आप शारीरिक रूप से तंदरुस्त रहेंगे लेकिन आलस्य के कारण उखड़े मन से कार्य करेंगे। आध्यात्म एवं भाग्य पक्ष प्रबल रहेगा परन्तु फिर भी धर्म-कर्म की तुलना में सुखोपभोग को अधिक महत्त्व देंगे। मध्यान तक कि दिनचर्या में उदासीनता रहेगी इसके बाद मन मे पैतृक कार्यो अथवा संसाधनों से लाभ पाने की युक्ति लगी रहेगी। नौकरी अथवा व्यवसायी वर्ग दोनो ही बुद्धि बल से आवश्यकता अनुसार धन की आमद कर लेंगे लेकिन तुरंत खर्च भी हो जाएगा छोटे भाई बहन से पैतृक मामलों या चुगली के कारण कहा सुनी हो सकती है। माता पक्ष से जो आशा लगाए है उसके पूरे होने में संदेह रहेगा।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज के दिन आपका व्यक्तित्त्व निखारा रहेगा लेकिन फिर भी अपनी बातों को या पक्ष को अन्य के सामने रखने में परेशानी आएगी या तो आप किसी से बात ही नही करेंगे या सीधे ही अपना अधिकार जताएंगे। पराक्रम से बिगड़े कार्य और संबंधों को जोड़ने का प्रयास करेंगे इसमे काफी हद तक सफल भी रहेंगे लेकिन मन की चंचलता एक बात पर टिकने नही देगी। कार्य व्यवसाय से धन की आमद अवश्य होगी पारिवारिक सदस्यों से बना कर चले विशेष कर पैतृक कार्यो में किसी प्रकार की जोरजबरदस्ती ना करें लाभ की जगह हानि हो सकती है। भाग दौड़ का फल संध्या के समय असकमात मिलेगा। कोर्ट कचहरी अथवा शत्रु पक्ष के कारण धन खर्च होने की संभावना है।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आपके लिये आज का दिन प्रतिकूल रहेगा। आज आप अपने मन की बात किसी को समझाने में असफल रहेंगे उल्टे आपकी बात का अन्य अर्थ निकालने पर किसी से तकरार अथवा प्रेम सम्बंध में।खटास आसकती है। दिन के आरंभ से मध्यान बाद तक का समय कलह वाला बना है सोच समझ कर ही किसी से व्यवहार करें धन को लेकर भी उलझने लगी रहेंगी जोड़ तोड़ कर भी धन लाभ होने की जगह आज खर्च ही अधिक होगा। व्यवसायी वर्ग भी लेदेकर सौदे करेंगे जिससे धन लाभ तो होगा लेकिन हानि की भरपाई नही कर सकेंगे। घर मे महिला वर्ग आर्थिक उलझन सुलझाने में मदद कर सकती है लेकिन चार बाते सुनाने के बाद ही। सेहत ठीक रहेगी पर मानसिक तनाव के कारण अंदर ही अंदर कुढ़न लगी रहेगी।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन राज समाज से सम्मान दिलाएगा आपका नरम स्वभाव अन्य लोगो को आकर्षित करेगा लेकिन किसी की उद्दंडता को बख्शेंगे भी नही। कार्य क्षेत्र पर आज प्रतिस्पर्धी पराजित होंगे पुराने सौदों से धन लाभ होगा भविष्य के लिये नई योजना बनेगी परन्तु इस पर कार्य आज आरम्भ ना करें धन फंसने की संभावना है। आज किसी अन्य व्यवसायी को मिलने वाला अनुबंध आपकी झोली में आसकता है इसके लिए थोड़े अधिक व्यवहारिक होने की आवश्यकता है। माता पिता से स्नेह संबंध रहेंगे लेकिन पति पत्नी के बीच अहम अथवा जिद को लेकर खींचतान होगी संताने भी पिता का पक्ष लेंगी। मन व्यसनों की और शीघ्र आकर्षित होगा इससे बचें। सेहत लगभग सामान्य ही रहेगी।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज के दिन आप अन्य लोगो को अपनी तुलना में कम आकेंगे घर और कार्य क्षेत्र पर संगी साथियो को दबा कर रखना आपसी मतभेद का कारण बनेगा। लेकिन आज किसी पुराने मुकदमे अथवा झगड़े के सुलझने पर राहत भी मिलेगी। कार्य व्यवसाय केवल बुद्धि बल और व्यवहारिकता से ही लाभ होगा वह भी आशानुकूल नही। सहकर्मी आपसे किसी न किसी बात पर नाराज ही रहेंगे। मध्यान के बाद विवेक होने के बाद भी मनमर्जी से कार्य करेंगे। लेखन अथवा अध्यापन से जुड़े लोग कई दिन की मेहनत का फल कम मिलने से उदास होंगे। आकस्मिक यात्रा के प्रसंग बनेंगे खर्च भी होगा लेकिन इसके बाद भी मन संतुष्ट ही रहेगा।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का पिछले कुछ दिनों की तुलना में बेहतर रूप से व्यतीत करेंगे। आज आप जिस भी कार्य को करना आरंभ करेंगे परिस्थितियां स्वतः ही उसके अनुकूल बन जाएंगी लेकिन स्वभाव में आलस्य रहने के कारण कुछ ना कुछ अभाव भी रहेगा। नौकरी व्यवसाय में भाग्य का साथ मिलेगा अन्य प्रतिस्पर्धियों की तुलना में आपका काम अच्छा रहेगा आपकी कार्य प्रणाली भी लोगो को पसंद आएगी इस कारण मन मे अहम भाव उत्पन्न होगा। भाई बंधुओ का सुख भी अन्य दिनों की अपेक्षा ठीक रहेगा लेकिन मन मे स्वार्थ सिद्धि की भावना भी रहेगी। सरकारी कार्यो को आज टालने का प्रयास करें भागदौड़ एवं खर्च के बाद भी परिणाम निराश करेंगे। दांन्त अथवा हड्डियों में दर्द या मूत्राशय संबंधित शिकायत रह सकती है।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन विषम परिस्थिति वाला रहेगा। दिन के आरंभ से ही सेहत में गिरावट दर्ज होगी लेकिन फिर भी अनदेखी करेंगे जिसका प्रतिकूल परिणाम मध्यान बाद से देखने को मिलेगा। आज पराक्रम की कमी नही रहेगी अति आत्मविश्वास की भावना से भरे रहेंगे कुछ मामलों में इससे हानि ही होगी। कार्य क्षेत्र अथवा अन्य जगह शत्रु पक्ष से तकरार होने की सम्भवना मन मे भय उत्पन्न करेगी लेकिन किसी के बीच बचाव करने पर मामला गंभीर होने से पहले ही शांत हो जाएगा। आज अन्य लोगो के सहयोग की आवश्यकता अधिक पड़ेगी इसलिए व्यर्थ की बयान बाजी से बचें। धन लाभ के लिये प्रयास में कमी नही करेंगे फिर भी आशानुकूल नही हो पायेगा। घर अन्य सदस्यों के कारण दबाव अथवा घुटन अनुभव होगी।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज के दिन परिस्थितियां लगभग प्रत्येक कार्य मे विजय दिलाने वाली बन रही है लेकिन आपकी मानसिक स्थित पल पल में बदलने के कारण विजय स्थायी नही रहेगी। दिन का आरंभिक भाग घरेलू और व्यावसायिक उलझनों की उधेड़ बुन में खराब होगा मध्यान के समय कही से शुभ समाचार मिलेगा अटके कार्यो में किसी अनुभवी का सहयोग भी मिलेगा लेकिन धन लाभ के लिये जब भी प्रयास करेंगे वह आगे के लिये लटकने से मन निराश होगा फिर भी खर्च लायक आय सहज मिल जाएगी। संकलन करने के विचार आज ना बनाये अन्यथा व्यर्थ मानसिक और शारीरिक कसरत करने पर भी हासिल कुछ नही होगा। स्त्री वर्ग चंचल और जिद्दी रहेंगी।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज के दिन आपको पूर्व में कई गई किसी गलती अथवा शत्रु पक्ष के कारण मन मे भय बना रहेगा। कार्य क्षेत्र पर भी खुल कर काम नही कर पाएंगे संकोची प्रवृति हर काम में बाधक बनेगी अपनी ही आदतों पर क्रोध भी आएगा। अपना काम निकालने के लिये अनैतिक साधनों का सहारा भी ले सकते है धन की आमद कुछ व्यवधान के बाद सीमित मात्रा में ही होगी आज आप इसको लेकर ज्यादा भाग दौड़ के पक्ष में भी नही रहेंगे। नौकरी पेशा लोग अधिक कार्य भार के कारण परेशान होंगे। व्यवसायी वर्ग किसी महत्तवपूर्ण कार्य को लेकर संतोष में रहेंगे। घर के सदस्य आवश्यकता के समय सहयोग करेंगे। सेहत में थोड़ी बहुत नरमी बनी रहेगी।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज के दिन आपका ध्यान खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस पाने पर केंद्रित रहेगा इसके कारण बेतुकी हरकते करने से भी नही चूकेंगे। घर के सदस्य आपके रहस्यमयी स्वभाव से परेशान रहेंगे पल में स्नेह अगले ही पर गुस्सा करने पर परिजनो से मतभेद होंगे। माता पक्ष को छोड़कर अन्य किसी से कम ही बनेगी। नौकरी पेशा एवं व्यवसायी वर्ग अनुभव होने के बाद भी अनाड़ियों जैसे व्यवहार करेंगे। आज आप जिसे अपना शत्रु मानेंगे वही किसी न किसी रूप में धन लाभ कराएगा। थोड़ी भागदौड़ करने पर धन लाभ भी होगा लेकिन बचत नही हो सकेगी। पैतृक संपत्ति को लेकर किसी से ना उलझे मान भंग हो सकता है। व्यर्थ के खर्च में कमी लाये आगे धन संबंधित समस्या होगी।

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