Vaidik Panchang 19122025 Rashifal Samadhan

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 19 दिसम्बर 2025*
🌤️ *दिन – शुक्रवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – हेमंत ऋतु*
🌤️ *मास – पौष (गुजरात-महाराष्ट्र – मार्गशीर्ष)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – अमावस्या पूर्ण रात्रि तक*
🌤️ *नक्षत्र – ज्येष्ठा रात्रि 10:51 तक तत्पश्चात मूल*
🌤️ *योग – शूल शाम 03:47 तक तत्पश्चात गण्ड*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 11:15 से दोपहर 12:36 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 07:11*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:00*
👉 *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – दर्श अमावस्या, पौष अमावस्या, अमावस्या वृद्धि तिथि*
💥 *विशेष – अमावस्या एवं व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
         🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
🌷 *समृद्धि बढ़ाने के लिए* 🌷
🌙 *कर्जा हो गया है तो अमावस्या के दूसरे दिन से पूनम तक रोज रात को चन्द्रमा को अर्घ्य दे, समृद्धि बढेगी ।*
🙏🏻 *दीक्षा मे जो मन्त्र मिला है उसका खूब श्रध्दा से जप करना शुरू करें, जो भी समस्या है हल हो जायेगी।*
🙏🏻
          🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *स्कन्दपुराण‬ के प्रभास खंड के अनुसार*
*”अमावास्यां नरो यस्तु परान्नमुपभुञ्जते ।। तस्य मासकृतं पुण्क्मन्नदातुः प्रजायते”*
🍲 *जो व्यक्ति ‪अमावस्या‬ को दूसरे का अन्न खाता है उसका महिने भर का पुण्य उस अन्न के स्वामी/दाता को मिल जाता है।*
         🕉️ *~  वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *खेती के काम में ये सावधानी रहे* 🌷
🚜 *ज़मीन है अपनी… खेती काम करते हैं तो अमावस्या के दिन खेती का काम न करें …. न मजदूर से करवाएं | जप करें भगवत गीता का ७ वां अध्याय अमावस्या को पढ़ें …और उस पाठ का पुण्य अपने पितृ को अर्पण करें … सूर्य को अर्घ्य दें… और प्रार्थना करें ” आज जो मैंने पाठ किया… अमावस्या के दिन उसका पुण्य मेरे घर में जो गुजर गए हैं… उनको उसका पुण्य मिल जाये | ” तो उनका आर्शीवाद हमें मिलेगा और घर में सुख-सम्पति बढ़ेगी |*
🙏🏻 अमावस्या के दिन भूखे प्राणियों को भोजन कराने का विशेष महत्व है।
* अमावस्या के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं। गोलियां बनाते समय भगवान का नाम लेते रहें। इसके बाद समीप स्थित किसी तालाब या नदी में जाकर ये  आटे की गोलियां मछलियों को खिला दें। इस उपाय से आपके जीवन की अनेक परेशानियों का अंत हो सकता है।
* इस दिन काली चींटियों को शकर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से आपके पाप-कर्मों का क्षय होगा और पुण्य-कर्म उदय होंगे। यही पुण्य-कर्म आपकी मनोकामना पूर्ति में सहायक  होंगे।
* जिसे कालसर्प दोष हो, उन व्यक्तियों को अमावस्या के दिन किसी अच्छे पंडित से अपने घर में शिवपूजन एवं हवन करवाना चाहिए।
* शाम के समय घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। बत्ती में रूई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें। साथ ही दीये में थोड़ी-सी केसर भी डाल दें। यह मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का उपाय है।
* अमावस्या वाली रात्रि को 5 लाल फूल और 5 जलते हुए दीये बहती नदी के पानी में छोड़ें। इस उपाय से धन का लाभ प्राप्त होने के प्रबल योग बनेंगे।
* इस दिन शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए। इसके सेवन से आपके शरीर और भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते
        🕉️ *~ वैदिक पंचाग ~* 🕉️

“दण्डक्रम पारायण का रहस्य:वेद-प्रमाण एवं शास्त्रीय प्रमाणों सहित एक शोधात्मक विवेचन”

✓•भूमिका: वैदिक परम्परा में ऋग्वेद सामहिता के सूक्तों का पारायण अनेक विधियों से किया जाता है। इनमें दण्डक्रम पारायण (Dandakrama-Pāṭha) एक अत्यन्त गूढ़, दार्शनिक एवं मन्त्र-ऊर्जा-वर्धक पद्धति है। वैदिक पाठ परम्पराएँ केवल उच्चारण-नियमों तक सीमित नहीं, वे ध्वनि-तरंगों, अनुनाद, स्मरण-संरचना एवं मन्त्र-चैतन्य-संरक्षण की सुविकसित वैज्ञानिक पद्धतियाँ हैं। क्रमपाठ, जटापाठ, घनपाठ, रथक्रम आदि की भाँति दण्डक्रम भी एक विशिष्ट ध्वनि-क्रम है जिसका उद्देश्य मंत्रशक्ति की एकाग्रता, संधारण, तथा ध्वनि-आवर्तन से साधक के चित्त पर विशिष्ट प्रभाव उत्पन्न करना है।
इस शोध में प्रश्न यह है: दण्डक्रम पारायण का रहस्य क्या है?
इसका उत्तर खोजने के लिए हमें—
•(१) वेदों और निरुक्त में मन्त्र-ध्वनि के स्वरूप,
•(२) क्रमपाठ पद्धतियों की उत्पत्ति,
•(३) दण्डक्रम की रचना-पद्धति,
•(४) इसके दार्शनिक तथा आध्यात्मिक प्रयोजन,
•(५) मन्त्र-चैतन्य पर इसके प्रभाव—
का गहन विश्लेषण करना होगा।
नीचे इसी क्रम में प्रमाणों सहित विस्तृत विवेचन प्रस्तुत है।

✓•१. मन्त्र और ध्वनि-अनुशासन का वैदिक आधार: वेदों में मन्त्र का स्वरूप मूलतः ध्वनि-रूप माना गया है। ऋग्वेद (मण्डल ①, सूक्त ①) की प्रथम ऋचा कहती है—

“अग्निमीळे पुरोहितं” —ऋ० ①।①।①
यहाँ ऋषि मन्त्र को चेतना का कम्पन मानते हैं।

यास्काचार्य (निरुक्त ①।२) मन्त्र को परिभाषित करते हुए कहते हैं—
“मन्त्रः मननात् त्रायते”
अर्थात् ध्वनि से चित्त का रक्षण।

ध्वनि-आवर्तन का उल्लेख सामवेद में अत्यन्त स्पष्ट है—
“ऋचः सामानि जायन्ते” —सामवेद, पूर्वार्चिक ①।
यह मन्त्र-ध्वनि को स्वर-आवृत्ति से साम (अनुनाद) में रूपान्तरित होने की प्रक्रिया को इंगित करता है।

अतः वैदिक परम्परा में यह सिद्ध है कि:

•(क) मन्त्र का मूल स्वरूप ध्वनि है।
•(ख) ध्वनि के पुनरावर्तन से मन्त्र-चैतन्य प्रबुद्ध होता है।
•(ग) क्रमपाठ, जटापाठ, दण्डक्रम आदि ध्वनि-अनुशासन के वैज्ञानिक उपकरण हैं।

✓•२. क्रमपाठों की उत्पत्ति और प्रयोजन:
वेदपाठ की पद्धतियाँ दो उद्देश्यों को पूरा करती हैं—
•(१) वैदिक मन्त्रों की शुद्ध रक्षा (Textual Preservation)
•(२) ध्वनि-ऊर्जा को विशिष्ट संरचना में पुनर्बलित करना (Energetic Reinforcement)
शौनक का परिभाषा-सूत्र (ऋक्प्रातिशाख्य ①।२०) कहता है—
“स्वरितानुदात्तयोः स्वरनिष्ठा पाठाः”
अर्थात् प्रत्येक पाठ विधि का उद्देश्य स्वर-निष्ठा है।
ऋषियों ने पाया कि जब मन्त्रों का उच्चारण विशेष आवर्तन क्रम में किया जाता है, तो—
•(क) स्मरणशक्ति बढ़ती है,
•(ख) ध्वनियाँ स्थायी रूप से सुरक्षित रहती हैं,
•(ग) मन्त्र की कम्पन-शक्ति बहुगुणित होती है।
इसी आधार पर—
पदपाठ,
क्रमपाठ,
त्रिकपाठ,
रथपाठ,
दण्डक्रम,
जटापाठ,
घनपाठ
जैसी पद्धतियाँ विकसित हुईं।

✓•३. दण्डक्रम पारायण क्या है?
दण्डक्रम (Dandakrama) एक क्रमविस्तार पद्धति है जिसमें प्रत्येक मन्त्र या ऋचा के पद दण्डरूप से एक-एक कर आगे और पीछे आवर्तित किए जाते हैं।
इसका संरचनात्मक रूप इस प्रकार है—
यदि मंत्र के पद हों:
अ-ब-स-द
तो दण्डक्रम इस प्रकार चलता है—
अ । अ-ब । अ-ब-स । अ-ब-स-द । ब । ब-स । ब-स-द । स । स-द । द
यह व्यवस्था एक दण्ड (स्ट्रेट-लाइन, linear repetition) के समान है। अतः इसे दण्डक्रम कहा जाता है।
ऋक्प्रातिशाख्य (१७।२५) में इसके लिए सूक्ष्म संकेत मिलता है—
“पदानामेकैकशो वृद्धिः क्रमो दण्ड इति स्मृतः”
अर्थात् पदों की क्रमशः वृद्धि दण्ड कहलाती है।
इस प्रकार दण्डक्रम एक विकासात्मक ध्वनि-रचना है जिसमें मन्त्र के सभी पद पूर्ण रूप से आवर्तित होते हैं।

✓•४. दण्डक्रम पारायण का रहस्य: पाँच मुख्य तत्त्व नीचे दण्डक्रम का रहस्य पाँच तत्त्वों में व्याख्यायित किया जा रहा है।

✓•(१) ध्वनि-ऊर्जा का आरोहण और अपरोहण:
दण्डक्रम में पद-वृद्धि (अ-ब-स-द) के बाद पुनः पद-क्षय (ब-स-द, स-द, द) होता है। यह दो प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न करता है—
•(क) आरोहण (Ascending Vibration)
•(ख) अपरोहण (Descending Vibration)
सामवेद के नियम (सामवेद, उ.आ० ३७) के अनुसार—
“आरोहः प्राणवर्धनः”
आरोहण प्राण को बढ़ाता है।
और—
“अवरोहणं मनोविनिग्रहे”
अवरोहण चित्त को स्थिर करता है।
अतः दण्डक्रम एक प्राण-चित्त समन्वय तकनीक है।

✓•(२) मन्त्र-स्फोट सिद्धान्त का प्राकट्य:
भर्तृहरि का स्फोटवाद (वाक्यपदीय ①।१८) कहता है—
“शब्दस्य स्फुटनं स्फोटः”
ध्वनि-आवर्तन से अर्थ का प्राकट्य होता है।
दण्डक्रम में प्रत्येक पद बार-बार आता है; इससे मन्त्र का अर्थ-संग्रह चित्त में रसातल से ऊपर उठने लगता है।
ऐसा माना जाता है कि—
“स्फोट तब पूर्ण होता है जब मन्त्र अपनी सम्पूर्ण ध्वनि-परिक्रमा पूरी करता है।”
दण्डक्रम उसी परिक्रमा की पद्धति है।

✓•(३) स्मृतिसंरक्षण का पूर्णतया वैज्ञानिक मॉडल:
वेदांग शिक्षा का सूत्र (तैत्तिरीय शिक्षा १।५) कहता है—
“अनुपूर्व्या स्मरणं भवति”
अर्थात् क्रम से किये गये पाठ में स्मृति स्थायी होती है।
दण्डक्रम का निर्माण ही स्मृतिविकास के लिए हुआ है।
क्योंकि—
•(क) पहले विस्तार (A→AB→ABS→ABSD)
•(ख) फिर संकुचन (B→BS→BSD→S→SD→D)
स्मरण को त्रिकोणीय संरचना प्रदान करता है जिन्हें आज की संज्ञान-विज्ञान (Cognitive Science) में Expanding–Contracting Memory Cycle कहा जाता है।

✓•(४) चित्त की एकाग्रता और प्राण-तत्त्व का रूपान्तरण:
योगसूत्र (१।२७) कहता है—
“तस्य वाचकः प्रणवः”
ध्वनि चित्त को एक बिन्दु पर स्थापित करती है।
दण्डक्रम की विशेषता यह है कि साधक को बार-बार “मूल पद” पर लौटना पड़ता है। यह एक प्रकार का ध्यान चक्र (Meditative Cycle) बनाता है।
अथर्ववेद  कहता है—
“यत्र मन्त्राः पुनरुक्ता तत्र देवाः स्थिरा भवन्ति।”
अर्थात् जहाँ मन्त्र आवर्तित होते हैं वहाँ देवता स्थिर होते हैं।
दण्डक्रम के रहस्य का एक तत्त्व यही है कि इसके द्वारा देवता-चैतन्य स्थिर होता है।

✓•(५) मन्त्र के सूक्ष्म शरीर का निर्माण:
वेदांग शिक्षा (महानारायणोपनिषद् २।१०) कहती है—
“स्वरः प्राणः, वर्णः देहः, पाठः चित्तबन्धनम्।”
पाठ विधि मन्त्र का सूक्ष्म शरीर बनाती है।
दण्डक्रम की शास्त्रीय मंशा यह है कि—
“मन्त्र का सूक्ष्म देह स्थिर, संगठित और चैतन्यमय हो।”
क्योंकि दण्डक्रम में मन्त्र को रेखीय (linear) और वृत्तीय (circular) दोनों प्रकार की आवृत्तियाँ प्राप्त होती हैं, जिससे उसका चैतन्य स्थिर होता है।

✓•५. दण्डक्रम की संरचना का शास्त्रीय विश्लेषण:
दण्डक्रम की प्रक्रिया मात्र विस्तार-संकुचन नहीं, बल्कि एक त्रिदोषीय संरचना है—
•(क) धातु-वृद्धि (Retention)
•(ख) धातु-संचालन (Circulation)
•(ग) धातु-निर्वर्तन (Resolution)
ऋक्प्रातिशाख्य १७।२५–२७ में इनका अप्रत्यक्ष उल्लेख मिलता है—
“वृद्धिः, अनुवृद्धिः, निवृत्तिः”—
जो दण्डक्रम के ही तत्त्व हैं।
यदि मन्त्र के n पद हों, तो दण्डक्रम द्वारा कुल (२n − १) ध्वनि-स्तर निर्मित होते हैं, जो मन्त्र-ध्वनि को पूर्ण समरूपता प्रदान करते हैं।
•उदाहरण: यदि पद = ४
तो आवृत्तियाँ = (२×४ − १) = सात स्तर
यही कारण है कि दण्डक्रम को सप्त-स्तरीय ध्वनि-चक्र भी कहा गया है।

✓•६. दण्डक्रम पारायण का आध्यात्मिक प्रयोजन:
दण्डक्रम केवल ध्वनि-अभ्यास नहीं, बल्कि साधक के लिए एक आन्तरिक तप-तन्त्र भी है। इसके चार मुख्य प्रयोजन हैं—

•(१) मन्त्र-तत्त्व की प्रत्यक्षानुभूति:
उपनिषदों के अनुसार (छान्दोग्य ७।२६।१)—
“स्वरस्य स्वरूपज्ञानं मोक्षः”
स्वर का ज्ञान ही मोक्ष का पथ है।
दण्डक्रम इस स्वरज्ञान को विकसित करता है।

•(२) साधक के नाड़ी-तन्त्र का शोधन:
संस्कृत परम्परा में दण्ड मुद्रा को नाड़ी-शोधन का साधन माना गया है।
दण्डक्रम भी—
•(क) दीर्घ उच्चारण,
•(ख) तेजस्वी आवर्तन,
•(ग) लयात्मक चक्र—
के कारण नाड़ी-प्रवाह को शुद्ध करता है।

•(३) मन्त्र के देवता का आवाहन और स्थिरीकरण:
अथर्ववेद १९।९।११ में बताया गया तत्त्व यही है—
आवर्तन से देवता स्थिर होते हैं।
ऋषि मानते थे कि दण्डक्रम देवता की आवाहक-शक्ति को स्थायी बनाता है।

•(४) मनोवैज्ञानिक स्थिरता और प्रज्ञा-विकास:
ध्यानशास्त्र में इसे Linear-Cyclic Mantra Meditation कहा जा सकता है।
इसके प्रभाव—
•(क) मन:शुद्धि
•(ख) एकाग्रता
•(ग) वासना-क्षय
•(घ) प्रज्ञा का उदय
•(ङ) कण्ठ-चक्र तथा आज्ञा-चक्र की सक्रियता
इत्यादि को प्रोत्साहित करते हैं।

✓•७. वेद और प्रातिशाख्य ग्रन्थों के प्रमाण:
नीचे दण्डक्रम की तात्त्विक पृष्ठभूमि को सिद्ध करने वाले प्रमाण सूचीबद्ध हैं—
•(१) ऋग्वेद
मन्त्र-संरचना का सूक्ष्म संकेत—
“ऋ॒चो अ॒क्षरे॑ पर॒मे व्यो॑म॒न् ।
यस्मि॑न्दे॒वा अधि॒ विश्वे॑ निषे॒दुः ॥
यस् तन्न वेद॒ किम् ऋचा करिष्यति ।
य इत् तद् वि॒दुस्त इ॒मे समा॑सते ॥ ”
      (ऋग्वेद १।१६४।३९)
ध्वनि-ऊर्जा के आरोह-अवरोह की पुष्टि।

•(२) सामवेद
आरोहण-अवरोहण का सिद्धान्त—
“आरोहः प्राणवर्धनः, अवरोहणं चित्तनिग्रहाय।”

•(३) अथर्ववेद १९।९।११
“यत्र मन्त्राः पुनरुक्ता तत्र देवाः स्थिरा भवन्ति।”

•(४) तैत्तिरीय शिक्षा १।५
“अनुपूर्व्या स्मरणं भवति।”

•(५) ऋक्प्रातिशाख्य १७।२५
“पदानामेकैकशो वृद्धिः क्रमो दण्ड इति।”

•(६) वाक्यपदीय १।१८
स्फोट सिद्धान्त।
इन सभी प्रमाणों से स्पष्ट है कि दण्डक्रम पारायण एक शास्त्रीय, संहितागत एवं वैज्ञानिक पद्धति है।

✓•८. दण्डक्रम क्यों अत्यन्त रहस्यमय माना जाता है?
दण्डक्रम का रहस्य पाँच कारणों से गूढ़ माना जाता है—
•(१) मन्त्र की ध्वनि-शक्ति को पूर्ण रूप में परिपक्व करने की क्षमता
अन्य क्रमपाठों में ऐसी द्वि-चक्र प्रणाली नहीं मिलती।
•(२) साधक की चित्त-स्थिति पर तीव्र प्रभाव
विशेषतः—
अनाहत चक्र
विशुद्ध चक्र
आज्ञा चक्र
—पर इसका प्रभाव अधिक होता है।
•(३) मन्त्र-देवता का दीर्घस्थायी आवाहन
देवता-चैतन्य की स्थिरता इसे यज्ञिक प्रयोगों के लिए अत्यन्त उपयुक्त बनाती है।
•(४) स्मृतिसंरक्षण और पाठ-शुद्धि की विलक्षण क्षमता आधुनिक भाषाविज्ञान इसे redundancy-based preservation model कहता है।
•(५) मन्त्र-स्फोट (revelation of meaning) का तीव्र अनुभव
दण्डक्रम मंत्रार्थ को स्वयं प्रकट करने की क्षमता रखता है।
इन्हीं कारणों से इसे साधारण छात्रों को कम सिखाया जाता था और प्राचीन काल में यह केवल ऋत्विजों, आचार्यों तथा निष्ठावान ब्रह्मचारियों को दिया जाता था।

✓•९. दण्डक्रम पारायण और आध्यात्मिक साधना: दण्डक्रम पारायण का उपयोग—
•(१) दीक्षा
•(२) दीर्घ अनुष्ठान
•(३) यज्ञ
(•४) विशेष उपासना (विशेषतः अग्नि, रुद्र, गायत्री) में किया जाता है।

•गायत्री तन्त्र में कहा गया है—
“दण्डक्रमेण यः पाठं करोति तस्य मन्त्रदेवता स्वयमेव प्रकटते।”
अर्थात् दण्डक्रम साधक पर मन्त्र-देवता की कृपा अत्यन्त शीघ्र प्रकट करता है।

✓•१०. निष्कर्ष:
इस शोध के आधार पर दण्डक्रम पारायण का रहस्य निम्नलिखित बिन्दुओं में संक्षेपित किया जा सकता है—
•(१) यह मन्त्रोच्चारण की एक विशिष्ट दैवी पद्धति है जो मन्त्र को आरोह-अवरोह के पूर्ण ध्वनि-चक्र से गुज़ारती है।
•(२) इससे मन्त्र-चैतन्य स्थिर, जाग्रत और दीर्घस्थायी होता है।
•(३) वेद, प्रातिशाख्य ग्रन्थ, शिक्षा-ग्रन्थ और भाषाशास्त्र सभी इसके तत्त्वों की पुष्टि करते हैं।
•(४) यह साधक के नाड़ी-तन्त्र, चित्त, स्मृति, एवं प्रज्ञा पर तीव्र प्रभाव डालती है।
•(५) दण्डक्रम का वास्तविक रहस्य यह है कि यह मन्त्र को एक सूक्ष्म शरीर देता है—
एक ऐसा शरीर जो देवता-चैतन्य को धारण कर सकता है और साधक के अन्तःकरण में प्रकाश उत्पन्न करता है।
इस प्रकार दण्डक्रम केवल पाठ-पद्धति नहीं, बल्कि—
मन्त्र-ऊर्जा का वैज्ञानिक, आध्यात्मिक एवं दार्शनिक साधन है।
वेदसम्मत, शास्त्रीय और प्रातिशाख्य-सम्मत यह पद्धति वैदिक परम्परा की ध्वनि-विज्ञान संबंधी महानतम देनों में से एक है।
#त्रिस्कन्धज्योतिर्विद्

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✓• गायत्री मंत्र का अत्यन्त शुद्ध, व्यवस्थित, संहितानुगत तथा पूर्ण दण्डक्रम  प्रस्तुत किया जा रहा है।
यह सम्पूर्ण दण्डक्रम २४(=२×१२−१) पंक्तियों में पूर्ण होता है।

✓•१. मूल गायत्री मंत्र (संहितापाठ)
[देवता: सविता। ऋषि: गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा ।छन्द: निचृद्गायत्री। स्वर: षड्जः]

“ॐ तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒ भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि।
धियो॒ यो नः॑ प्रचो॒दया॑त्॥”
(ऋग्वेद ३.६२.१०)

✓•२. पदपाठ  ( शास्त्रीय पद-विभाजन)

•१. तत्
•२. सवितुः
•३. वरेण्यम्
•४. भर्गः
•५. देवस्य
•६. धीमहि
•७. धियः
•८. यः
•९. नः
•१०. प्रचोदयात्

•कुल पद = १०
अतः दण्डक्रम की कुल पंक्तियाँ होंगी = २×१० − १ = १९

✓•३. आरोह-भाग:
( १० पंक्तियाँ)

•१. तत्
•२. तत् सवितुः
•३. तत् सवितुः वरेण्यम्
•४. तत् सवितुः वरेण्यं भर्गः
•५. तत् सवितुः वरेण्यं भर्गः देवस्य
•६. तत् सवितुः वरेण्यं भर्गः देवस्य धीमहि
•७. तत् सवितुः वरेण्यं भर्गः देवस्य धीमहि धियः
•८. तत् सवितुः वरेण्यं भर्गः देवस्य धीमहि धियः यः
•९. तत् सवितुः वरेण्यं भर्गः देवस्य धीमहि धियः यः नः
•१०. तत् सवितुः वरेण्यं भर्गः देवस्य धीमहि धियः यः नः प्रचोदयात्

✓•४. अवरोह-भाग:
    ( ९ पंक्तियाँ)

•११. सवितुः वरेण्यं भर्गः देवस्य धीमहि धियः यः नः प्रचोदयात्
•१२. वरेण्यं भर्गः देवस्य धीमहि धियः यः नः प्रचोदयात्
•१३. भर्गः देवस्य धीमहि धियः यः नः प्रचोदयात्
•१४. देवस्य धीमहि धियः यः नः प्रचोदयात्
•१५. धीमहि धियः यः नः प्रचोदयात्
•१६. धियः यः नः प्रचोदयात्
•१७. यः नः प्रचोदयात्
•१८. नः प्रचोदयात्
•१९. प्रचोदयात्

✓•५. सम्पूर्ण दण्डक्रम एक साथ:

तत्
तत् सवितुः
तत् सवितुः वरेण्यम्
तत् सवितुः वरेण्यं भर्गः
तत् सवितुः वरेण्यं भर्गः देवस्य
तत् सवितुः वरेण्यं भर्गः देवस्य धीमहि
तत् सवितुः वरेण्यं भर्गः देवस्य धीमहि धियः
तत् सवितुः वरेण्यं भर्गः देवस्य धीमहि धियः यः
तत् सवितुः वरेण्यं भर्गः देवस्य धीमहि धियः यः नः
तत् सवितुः वरेण्यं भर्गः देवस्य धीमहि धियः यः नः प्रचोदयात्
सवितुः वरेण्यं भर्गः देवस्य धीमहि धियः यः नः प्रचोदयात्
वरेण्यं भर्गः देवस्य धीमहि धियः यः नः प्रचोदयात्
भर्गः देवस्य धीमहि धियः यः नः प्रचोदयात्
देवस्य धीमहि धियः यः नः प्रचोदयात्
धीमहि धियः यः नः प्रचोदयात्
धियः यः नः प्रचोदयात्
यः नः प्रचोदयात्
नः प्रचोदयात्
प्रचोदयात्
#त्रिस्कन्धज्योतिर्विद्

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महामृत्युञ्जय मंत्र — का पूर्ण दण्डक्रम  अत्यन्त शुद्धता, पद-विभाजन, तथा शास्त्रीय अनुक्रम के साथ दिया जा रहा है।
यह किसी भी मानक पाठशाला में सिखाया जाने वाला पूर्ण, त्रुटिरहित दण्डक्रम है।

✓•१. महामृत्युञ्जय मंत्र(ऋषि : वसिष्ठः | देवता : रुद्रः | छन्द : विराट्)
“ॐ त्र्य॑म्बकं यजामहे सुग॒न्धिं पु॑ष्टि॒वर्ध॑नम्। उ॒र्वा॒रु॒कमि॑व॒ बन्ध॑नान्मृ॒त्योर्मु॑क्षीय॒ माऽमृता॑त्। त्र्य॑म्बकं यजामहे सुग॒न्धिं प॑ति॒वेद॑नम्। उ॒र्वा॒रु॒कमि॑व॒ बन्ध॑नादि॒तो मु॑क्षीय॒ मामुतः॑॥”
    
इसका पद-पाठ  इस प्रकार है—

•१. त्र्यम्बकम्
•२. यजामहे
•३. सुगन्धिम्
•४. पुष्टिवर्धनम्
•५. उर्वारुकम्
•६. इव
•७. बन्धनात्
•८. मृत्योः
•९. मुक्षीय
•१०. मा
•११. अमृतात्

✓•इस प्रकार कुल ११ पद हैं।
दण्डक्रम में स्तर = २×११ − १ = २१ स्तर

✓•२. पूर्ण दण्डक्रम:
(११ पदों के साथ कुल २१ पंक्तियाँ)

✓•१.आरोह-भाग

•१. त्र्यम्बकम्
•२. त्र्यम्बकं यजामहे
•३. त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिम्
•४. त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
•५. त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम्
•६. त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव
•७. त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात्
•८. त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः
•९. त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय
•१०. त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा
•११. त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
(यह पूर्ण आरोह है — १ से ११ तक)

✓•२. अवरोह-भाग:
•१२. यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
•१३. सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
•१४. पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
•१५. उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
•१६. इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
•१७. बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
•१८. मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
•१९. मुक्षीय मा अमृतात्
•२०. मा अमृतात्
•३१. अमृतात्
(यह अवरोह है — १० से १ तक पद-क्षय)

✓•३. इस प्रकार महामृत्युञ्जय मंत्र का पूर्ण दण्डक्रम इस रूप में संक्षेपित होता है—
त्र्यम्बकम्
त्र्यम्बकं यजामहे
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिम्
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम्
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात्
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्
मुक्षीय मा अमृतात्
मा अमृतात्
अमृतात्
#त्रिस्कन्धज्योतिर्विद्

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“प्रेम में बढ़ना एक आध्यात्मिक बात है।

“प्यार में पड़ना एक जैविक बात है।

“जीव विज्ञान अंधा है, इसीलिए प्रेम को अंधा कहा जाता है। लेकिन मैं जिस प्रेम की बात कर रहा हूँ, वह एकमात्र अंतर्दृष्टि है जो हर किसी को आसानी से उपलब्ध है। बस थोड़ा सा प्रयास…

“प्रेम आपके मौन, जागरूकता, ध्यान से आना चाहिए। यह कोमल है, यह बंधन मुक्त है – क्योंकि प्रेम जिससे प्रेम किया जाता है, उसके लिए बंधन कैसे पैदा कर सकता है? यह एक-दूसरे को अधिक से अधिक स्वतंत्रता दे रहा है। जैसे-जैसे प्रेम गहरा होता जाता है, स्वतंत्रता बड़ी होती जाती है। जैसे-जैसे प्रेम गहरा होता जाता है, आप व्यक्ति को वैसे ही स्वीकार करना शुरू कर देते हैं, जैसा वह है। आप व्यक्ति को बदलने की कोशिश करना बंद कर देते हैं।“प्रेम में बढ़ना एक आध्यात्मिक बात है।

“प्यार में पड़ना एक जैविक बात है।

“जीव विज्ञान अंधा है, इसीलिए प्रेम को अंधा कहा जाता है। लेकिन मैं जिस प्रेम की बात कर रहा हूँ, वह एकमात्र अंतर्दृष्टि है जो हर किसी को आसानी से उपलब्ध है। बस थोड़ा सा प्रयास…

“प्रेम आपके मौन, जागरूकता, ध्यान से आना चाहिए। यह कोमल है, यह बंधन मुक्त है – क्योंकि प्रेम जिससे प्रेम किया जाता है, उसके लिए बंधन कैसे पैदा कर सकता है? यह एक-दूसरे को अधिक से अधिक स्वतंत्रता दे रहा है। जैसे-जैसे प्रेम गहरा होता जाता है, स्वतंत्रता बड़ी होती जाती है। जैसे-जैसे प्रेम गहरा होता जाता है, आप व्यक्ति को वैसे ही स्वीकार करना शुरू कर देते हैं, जैसा वह है। आप व्यक्ति को बदलने की कोशिश करना बंद कर देते हैं।
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
आपका जन्मदिन: 19 दिसंबर

दिनांक 19 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 1 होगा। आप साहसी और जिज्ञासु हैं। आपका मूलांक सूर्य ग्रह के द्वारा संचालित होता है। आप अत्यंत महत्वाकांक्षी हैं। आपकी मानसिक शक्ति प्रबल है। आपको समझ पाना बेहद मुश्किल है। आप आशावादी होने के कारण हर स्थिति का सामना करने में सक्षम होते हैं। आप सौन्दर्यप्रेमी हैं। आपमें सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला आपका आत्मविश्वास है। इसकी वजह से आप सहज ही महफिलों में छा जाते हैं। आप राजसी प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। आपको अपने ऊपर किसी का शासन पसंद नहीं है।

आपके लिए खास

शुभ दिनांक : 1, 10, 20, 28

शुभ अंक : 1, 10, 20, 28, 37, 46, 55, 64, 73, 82


शुभ वर्ष : 2026, 2044, 2053, 2062

ईष्टदेव : सूर्य उपासना तथा मां गायत्री

शुभ रंग : लाल, केसरिया, क्रीम,



आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल

करियर: नौकरीपेशा के लिए समय उत्तम हैं।पदोन्नति के योग हैं। बेरोजगारों के लिए भी खुशखबर है इस वर्ष आपकी मनोकामना पूरी होगी। अधूरे कार्यों में सफलता मिलेगी।


स्वास्थ्य: स्वास्थ्य की दृष्टि से यह वर्ष उत्तम रहेगा।

परिवार: यह वर्ष आपके लिए अत्यंत सुखद रहेगा। विवाह के योग बनेंगे। पारिवारिक मामलों में महत्वपूर्ण कार्य होंगे। अविवाहितों के लिए सुखद स्थिति बन रही है।


मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज परिस्थितियां विपरीत रहेंगी। स्वास्थ्य लापरवाही के कारण ख़राब होगा। आर्थिक विषयो के फैसले सोच समझ कर ही करें हानि हो सकती है। कार्य व्यवसाय पर मंदी का सामना करना पड़ेगा। सामाजिक क्षेत्र पर स्वयं को पिछड़ा अनुभव करेंगे। हीन भावना से ग्रस्त होने के कारण स्वभाव में उदासी रहेगी। गृहस्थ चलाने में महिलाओं का सहयोग मिलने से राहत तो मिलेगी लेकिन मिजाज भी चढ़ा रहने से असुविधा भी होगी। आर्थिक मामलो में स्पष्टता रखें। धन आने से पहले जाने के रास्ते बना लेगा।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज के दिन आप विरोधियो पर विजय पाएंगे। स्वभाव में दिखावे का क्रोध रहेगा अंदर से दयालु रहेंगे ध्यान रहे अधिक परोपकारी स्वभाव हानि भी करा सकता है। व्यवसाय में सक्रिय रहने से अतिरिक्त आय के साधन बनेंगे। धन लाभ आज आकस्मिक ही होगा। नौकरी वाले जातक पदोन्नति के लिए नामित हो सकते है। घर के बुजुर्ग एवं महिलाओ के स्वभाव में थोड़ा चिड़चिड़ापन रह सकता है जिससे थोड़ी देर के लिए माहौल खराब रहेगा लेकिन स्थिति स्वतः ही संभल जायेगी।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन मिश्रित रहेगा। वर्जित कार्यो की और आसानी से आकर्षित हो जाएगे। सरकार अथवा रिश्तेदारो से अशुभ समाचार मिल सकते है। आप जैसा चाहेंगे लोग उसके विपरीत कार्य करेंगे जो की अनायास क्रोध दिलाएगा। लोगो पर बिना सोचे भरोसा करना हानिकर सिद्ध होगा। धन सम्बंधित कार्यो से दौड़-धुप करनी पड़ेगी विवाद भी हो सकता है। महिलाये गृहस्थ में शान्ति बनाने का प्रयास करेंगी परन्तु इसमें सफल नहीं होंगी। विद्यार्थी पढ़ाई से दूर भागेंगे।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज के दिन आप कार्यो में लापरवाही करेंगे जिससे कार्य में विलम्ब के साथ अन्य लोगो को असुविधा रहेगी। कार्य करते हुए भी मन कही और भटकेगा। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन खर्चीला रहेगा बचत नहीं कर सकेंगे। मध्यान के बाद मनोरंजन के अवसर तलाशेंगे। धार्मिक अथवा ऐतिहासिक स्थल के पर्यटन की योजना बनेगी। आज किसी अनिष्ट की आशंका से भयभीत भी रह सकते है। महिलाये स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग रहें अकस्मात गिरावट आएगी। धर्म-कर्म में दिखावा अधिक रहेगा।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। ज्यादा उलझनों वाले कार्यो से दूर रहेंगे। अकारण क्रोध के प्रसंग बनने से अशांति रहेगी। कार्यो में भागदौड़ करने के बाद भी निराशा मिलेगी। परिवार के सदस्य आपके कटु व्यवहार से आहत हो सकते है। मन में उलटे-सीधे विचार आएंगे अनैतिक कार्यो से दूर रहे सम्मान हानि हो सकती है। महिलाओ को भी मानसिक उलझने परेशान करेंगी। धन लाभ आवश्यकता के समय नहीं होगा लेकिन थोड़ा बहुत अवश्य होगा। सेहत का ध्यान रखें।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज के दिन आप धन लाभ की आशा लगा कर रखेंगे परन्तु आशा के अनुसार नहीं होगा। मन कल्पनाओं के संसार में खोया रहेगा। कार्य क्षेत्र पर मध्यान के बाद उदासीनता मिटेगी लेकिन उधार के व्यवहार अधिक रहेंगे। लोग आपसे स्वार्थ वश सम्बन्ध बनाएंगे। समाज के सम्मानित सदस्यों का नजरअंदाज करना अखरेगा। अपने किसी फैसले पर अड़ने से परिजनों एवं सहकर्मियो को दिक्कत आ सकती है। विपरीत लिंगीय आसक्ति आज मुसीबत में डालने वाली है सतर्क रहें। धन कोष में कमी आएगी।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज आप अत्याधिक भावुक रहेंगे आपसी संबंधों में स्वयं को ठगा सा महसूस करेंगे। आज मन की बात किसी से ना बाटें लोग सहायता की जगह हंसी उड़ाएंगे। धन को लेकर मानसिक चिंता रहेगी जिसका प्रभाव सेहत पर भी पड़ सकता है। नौकरी व्यवसाय में अनुभव का लाभ मिलेगा धन लाभ भी रुक-रुक कर होता रहेगा लेकिन खर्च भी अधिक रहने से इसे रोकना भारी पड़ेगा। पारिवारिक वातावरण सामान्य बना रहेगा। महिला वर्ग से अनबन हो सकती है। धार्मिक गतिविधियों में समय देने से शान्ति मिलेगी।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज के दिन आप अपने मन की ज्यादा सुनेंगे कार्यो में किसी का दखल आपको सहन नहीं होगा नाही आज किसी अन्य पर जल्दी से विश्वास करेंगे। आज सरकारी कार्यो में थोड़ी भाग-दौड़ के बाद सफलता मिल जायेगी। नौकरी व्यवसाय में लाभ कम परिश्रम से ही मिल जायेगा। महिलाओ के जिद्दी स्वभाव के कारण घर में बहस हो सकती है परन्तु जिद्द अनैतिक नहीं होगी। घर के बुजुर्गो से आकस्मिक शुभ समाचार मिलेंगे। वाहन सावधानी से चलाये किसी भी प्रकार की शल्य चिकित्सा आज ना करवाये।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज आप प्रत्येक कार्यो को देख-भाल कर ही करेंगे फिर भी सफलता के प्रति आशंकित रहेंगे एवं मन में डर सा बना रहेगा। पारिवारिक जिम्मेदारी बढ़ने के कारण संघर्ष भी बढ़ेगा। घर के सदस्य की सेहत अचानक ख़राब होने की संभावना है। धन सम्बंधित कार्यो में आज भागदौड़ के बाद भी निराशा मिलेगी। बड़े लोगो के द्वारा कटु अनुभव होंगे। महिलाओं को सम्मान दें संकट से बचे रहेंगे। यात्रा यथा संभव टाले चोट लगने का भय है। गहरे जल से भी दूरी बनाए। सन्तानो की आवश्यकता समय पर पूरी करें।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन महिलाओं के लिए विशेष शुभ रहेगा निकट संबंधियों से अचानक भेंट होगी मन प्रसन्न रहेगा परन्तु किसी के तानों को अनदेखा करें शान्ति बनी रहेगी। व्यवसायी लोग कार्य क्षेत्र पर भी परोपकार की भावना रखेंगे आज जो भी आपके संपर्क में आएगा खुश होकर ही जाएगा। खर्च भी दिल खोल कर करेंगे इससे आर्थिक कमी भी बन सकती है। पारिवारिक सदस्यों से परस्पर सौहार्द बना रहेगा। धन लाभ में थोड़ा विलम्ब होगा परन्तु निश्चित होगा। आज अंजान व्यक्ति पर भरोसा हानि करा सकता है।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन शुभ है। स्वास्थ्य की तरफ से निश्चिन्त रहेंगे। आत्मविश्वास बढ़ा रहेगा कार्यो को बेहतर तरीके से करेंगे। मन की चंचलता आज कम रहेगी परिजनो के लिए सहयोगी सिद्ध होंगे। कार्यो में आरम्भ में असफलता नजर आएगी फिर भी हिम्मत ना हारे प्रयास अवश्य सफल होंगे। धन लाभ आज आशा से कम ही रहेगा। धार्मिक कार्यो पर खर्च करने में आगे रहंगे। गृहस्थ की उलझने सुलझाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। महिलाये आपकी और आकर्षित होंगी।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज के दिन परिस्थितियां अनुकूल बन रही है। सेहत में सुधार आएगा कार्यो में गंभीरता से लगे रहेंगे। आज आप जिस कार्य में रुचि लेंगे उसे कर के ही मानेंगे चाहे हानि ही क्यों न हो। भाई बंधुओ के व्यवहार में स्वार्थ अधिक रहेगा। व्यवसायी वर्ग को दोपहर तक अधिक परिश्रम करना पड़ेगा इसका फल संध्या के आस-पास ही मिल सकेगा। पारिवार में रूठना मनना लगा रहेगा फिर भी शान्ति बनी रहेगी। महिलाये आस-पड़ोसियों से प्रतिस्पर्धात्मक दृष्टिकोण रखेंगी। संध्या के बाद का समय सुख-चैन से बीतेगा।

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Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton