Vaidik Panchang 18112025 Rashifal Samadhan

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️  *दिनांक – 18 नवम्बर 2025*
🌤️ *दिन – मंगलवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – हेमंत ॠतु*
🌤️ *मास – मार्गशीर्ष (गुजरात-महाराष्ट्र कार्तिक)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – त्रयोदशी सुबह 07:12 तक तत्पश्चात चतुर्दशी*
🌤️ *नक्षत्र – स्वाती पूर्ण रात्रि तक*
🌤️ *योग – आयुष्मान सुबह 08:09 तक तत्पश्चात सौभाग्य*
🌤️ *राहुकाल – शाम 03:10 से शाम 04:33 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:52*
🌤️ *सूर्यास्त –  05:55*
👉 *दिशाशूल – उत्तर दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण- मासिक शिवरात्रि*
💥 *विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
             🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए* 🌷
➡ *19 नवम्बर, बुधवार को दर्श अमावस्या एवं 20 नवम्बर, गुरुवार को मार्गशीर्ष अमावस्या है ।*
🏡  *घर में हर अमावस अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (१ लीटर पानी में ५० ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें ।  इससे नेगेटिव एनेर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं ।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *अमावस्या* 🌷
🙏🏻 *अमावस्या के दिन जो वृक्ष, लता आदि को काटता है अथवा उनका एक पत्ता भी तोड़ता है, उसे ब्रह्महत्या का पाप लगता है  (विष्णु पुराण)*
          🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए* 🌷
🔥  *हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।*
🍛 *सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गुगल, ७. गुड़, ८. देशी कपूर, गौ चंदन या कण्डा।*
🔥 *विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की १-१ आहुति दें।*
🔥 *आहुति मंत्र* 🔥
🌷 *१. ॐ कुल देवताभ्यो नमः*
🌷 *२. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः*
🌷 *३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः*
🌷 *४. ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः*
🌷 *५. ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः*
       🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞

*II माया महा ठगिनी II*

भगवान् श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा को बहुत सारी सम्पत्ति दी लेकिन सुदामा तो अब और अधिक भक्ति करने लगे। वे अब हर समय परमात्मा के ध्यान में ही निमग्न रहते।

आनन्दसिंधु प्रभु सखा रूप में,
मिल जाये तो क्या कहना ?
उसके आगे फिर शेष नहीं,
रह जाता है कुछ भी लहना।।

एक दिन सुदामा ने मन में सोचा, हर तरफ माया की बातें हो रही हैं पर माया मुझे क्यों नहीं दिखायी देती है। यह माया पता नहीं कैसी होगी ? उन्होंने भगवान् श्रीकृष्ण से कहा, ‘‘मुझे अपनी माया दिखाइए।”

भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा, “तुम मुझे भूल जाओ तो तुम्हें माया दिखाई देगी।
ईश्वर ज्ञान और माया अज्ञान का प्रतीक है। जो परमात्मा के ध्यान में तल्लीन रहता है, उसे माया कैसे दिखाई देगी ?”

*माया महा ठगिनी हम जानी*

भगवान् श्रीकृष्ण ने सुदामा को अपने मायाजाल में मोहित करने की ठानी।

श्रीकृष्ण और सुदामा गोमती नदी में स्नान करने गए। संध्योपासना का समय हो रहा था इसलिए जल्दी-जल्दी स्नान करने में सुदामा श्रीकृष्ण को भूल गए।

भगवान् श्रीकृष्ण ने अपनी माया दिखाई। जैसे ही सुदामा ने नदी में डुबकी लगाई कि गोमती नदी में बाढ़ आ गई और सुदामा बाढ़ के प्रवाह में खिंचते हुए चले गए। पानी में डूबते-तैरते हुए वे एक घाट के पास पहुंचे और घाट पर चढ़ गए। उसी समय एक हाथी ने आकर उनके गले में हार पहना दिया।

उस गांव के राजा की मृत्यु हो गयी थी और वहां ऐसा रिवाज था कि हाथी जिसके गले में हार पहना देता, उसे राजा बना दिया जाता था। सुदामा को राजा बना दिया गया और राजकुमारी से उनका विवाह हो गया। भगवान् की माया से मोहित हुए सुदामा सब कुछ भूल गए। पुरानी किसी चीज की उन्हें स्मृति नहीं रही। उनकी कई संतानें हुईं। जब उनकी पत्नी रानी की मृत्यु हो गयी इससे दु:खी होकर सुदामा रोने लगे।

नगर के संभ्रान्त लोगों ने कहा, “आप रोइये मत, रानी जहां गईं हैं, वहां आपको भी पहुंचा देंगे।” उस नगर में ऐसा रिवाज था कि स्त्री की मृत्यु होने पर पुरुष को भी उसके साथ चिता में चढ़ा दिया जाता था।

लोग सुदामा को श्मशान ले गए। यह सब देखकर सुदामा घबरा गए और भय और घबराहट में प्रभु का स्मरण करने लगे।

*दुख में सुमिरन सब करें,*
*सुख में करें न कोय।*
*जो सुख में सुमिरन करै*
*तो दु:ख काहे को होय ।।* (कबीर)

भगवान् का स्मरण करने ही उनके नेत्रों पर चढ़ा माया (अज्ञान) का परदा हट गया और उनको याद आया कि मैं तो सुदामा ब्राह्मण हूँ। मुझे संध्या करनी चाहिए। संध्योपासना के लिए जैसे ही उन्होंने नदी में डुबकी लगायी वे गोमती नदी में उसी स्थान पर पहुंच गए।

श्रीकृष्ण स्नान करके पीताम्बर धारण भी नहीं कर पाये थे कि सुदामा रोते-रोते उनके पास आ पहुंचे।

श्रीकृष्ण ने पूछा, “मित्र रोते क्यों हो ?”

सुदामा कहने लगे, “ये मेरी पत्नी, मेरा राज्य, सब कहां चला गया ? यह सब क्या है ?”

भगवान् श्रीकृष्ण ने सुदामा को समझाते हुए कहा, “मित्र ! यह सब मेरी माया है। मेरे बिना जो कुछ भी दिखाई देता है, वह मेरी माया है। माया का आवरण चारों ओर फैला हुआ है। माया स्वयं नाचती है और मनुष्य को अपने वश में करके नचाती है।”

इसीलिए संतों ने माया को “नर्तकी’’ कहा है। इस नर्तकी माया के जाल से बचना है तो ‘नर्तकी’ का उल्टा कर दो।

जो शब्द बनेगा वह है ‘कीर्तन’ अर्थात् जो भगवान् का कीर्तन व नाम-स्मरण करता है, उसे माया रुलाती नहीं है।

*जय जय श्री राधे*

       🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞

━❀꧁ हरे कृष्ण ꧂❀━

     *बड़ें भाग मानुष तनु पावा।*


     *बड़ें भाग मानुष तनु पावा।*
     *सुर दुर्लभ सब ग्रंथन्हि गावा॥*
     *साधन धाम मोच्छ कर द्वारा।*
     *पाइ न जेहिं परलोक सँवारा॥*


भावार्थ : बड़े भाग्य से यह मनुष्य शरीर मिला है। सब ग्रंथों ने यही कहा है कि यह शरीर देवताओं को भी दुर्लभ है (कठिनता से मिलता है)। यह साधन का धाम और मोक्ष का दरवाजा है। इसे पाकर भी जिसने परलोक न बना लिया॥

मनुष्य जन्म अत्यन्त ही दुर्लभ है, मनुष्य जीवन का केवल एक ही उद्देश्य और एक ही लक्ष्य होता है और वह हैं भगवान् की अनन्य-भक्ति प्राप्त करना। अनन्य-भक्ति को प्राप्त करके मनुष्य सुख और दुखों से मुक्त होकर कभी न समाप्त होने वाले आनन्द को प्राप्त हो जाता है। इस संसार में सभी सांसारिक संबंध स्वार्थ से प्रेरित होते हैं। हमारे पास किसी प्रकार की शक्ति है, धन-सम्पदा है, शारीरिक बल है, किसी प्रकार का पद है, बुद्धि की योग्यता है तो उसी को सभी चाहते है न कि हमको चाहते है।

हम भी संसार से किसी न किसी प्रकार की विद्या, धन, योग्यता, कला आदि ही चाहते हैं, संसार को नहीं चाहते हैं, इससे तो यही सिद्ध होता है कि संसार में हमारा कोई नहीं है। सभी किसी न किसी स्वार्थ सिद्धि के लिये ही हम से जुड़े हुयें है। सभी एक दूसरे से अपना ही मतलब सिद्ध करना चाहते हैं। जीवात्मा रूपी हम, संसार रूपी माया से अपना मतलब सिद्ध करना चाहते हैं और माया रूपी संसार हम से अपना मतलब सिद्ध करना चाहता है।

हम माया को ठगने में लगे रहते है और माया हमारे को ठगने में लगी रहती है। इस प्रकार दोनों ठग एक दूसरे को ठगते रहते हैं। भ्रम के कारण हम समझते हैं कि हम माया को भोग रहें है जबकि माया जन्म-जन्मान्तर से हमारा भोग कर रही है। वास्तव में संसार को हमारे से जो अपेक्षा है, वही संसार हमारे से चाहता है। हमें अपनी शक्ति को पहचान कर संसार से किसी प्रकार की अपेक्षा न रखते हुये अपनी सामर्थ्य के अनुसार ही संसार की इच्छा को पूरा करना चाहिये।

इस प्रकार से कार्य करने से ही जीवात्मा रूपी हम कर्म बंधन से मुक्त हो सकतें हैं। सामर्थ्य से अधिक सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति करने से हम पुन: कर्म बंधन में बंध जाते हैं। हमें कर्म बंधन से मुक्त होने के लिये ही कर्म करना होता है, कर्म बंधन से मुक्त होना ही मोक्ष है, मनुष्य कर्म बंधन से मुक्त होने पर ही जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर परम-लक्ष्य स्वरूप परमात्मा को प्राप्त हो जाता है।

कभी-कभी लोग सोचते हैं कि बार-बार जन्म लेने में अनुचित क्या है ? जैसे ही हम वर्तमान कलियुग में (संघर्ष के युग में) आगे बढेंगे, वैसे जीवन समस्याओं तथा दु:खों से घिर जायेंगे। हमारे अनुभव कहता है विश्‍वभर में औसतन बहुत कम समय हम खुश रहते है तथा अधिक समय हम दुखी ही रहते है और जीवन का शेष समय हम उदासीन ही रहते है।

सज्जनों! जब हम कोई रास्ते पर चल रहे होते है अथवा कोई व्यावहारिक कार्य कर रहे होते है तब हमारे मन में सुखदायक अथवा दुखदायक विचार नहीं होते, हम केवल कार्य करते है। इस दशा में हमें सुख या दुख का अनुभव नहीं होता, इसका प्राथमिक कारण है कि अधिकतर व्यक्तियों का आध्यात्मिक स्तर अल्प होता है। इसलिये अनेकों बार हमारे निर्णय एवं आचरण से अन्यों को कष्ट होता है, साथ ही वातावरण में रज-तम फैलाते है।

फलस्वरूप नकारात्मक कर्म और लेन-देन का हिसाब बढता है। इसीलिये अधिकतर हम मनुष्यों के लिए वर्तमान जन्म की अपेक्षा आगे के जन्म दुखदायी होते हैं यद्यपि विश्‍व ने आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति की है तथापि सुख (जो हमारे जीवन का मुख्य ध्येय है) के संदर्भ में, हम पिछली पीढियों की अपेक्षा निर्धन हैं, हम सब सुख चाहते हैं, परन्तु प्रत्येक का अनुभव है कि जीवन में दुख आते ही हैं।

ऐसे में अगले जन्म में और भविष्य के जीवन में सर्वोच्च तथा चिरंतन सुख प्राप्त होना निश्‍चित नहीं है, केवल आध्यात्मिक उन्नति और ईश्‍वर से एकरूपता ही हमें निरंतर और स्थायी सुख दे सकते हैं, इसलिये आध्यात्मिक सुख की अपेक्षा करों और वैसे ही कर्म करों, भगवान् श्रीहरि हम सभी की रक्षा करें।      
                            
      ꧁ *”जय जय श्रीहरि”* ꧂
*हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे*
*हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे*

       *━❀𝐻𝑎𝑟𝑒 𝐾𝑟𝑖𝑠ℎ𝑛𝑎❀━*
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🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🌻🍀🌺🙏🏻

जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
आपका जन्मदिन: 18 नवंबर

अंक ज्योतिष का सबसे आखरी मूलांक है नौ। आपके जन्मदिन की संख्या भी नौ है। आप सही मायनों में उत्साह और साहस के प्रतीक हैं। मंगल ग्रहों में सेनापति माना जाता है। अत: आप में स्वाभाविक रूप से नेतृत्त्व की क्षमता पाई जाती है। लेकिन आपको बुद्धिमान नहीं माना जा सकता। मंगल के मूलांक वाले चालाक और चंचल भी होते हैं। आपको लड़ाई-झगड़ों में भी विशेष आनंद आता है। आपको विचित्र साहसिक व्यक्ति कहा जा सकता है। यह मूलांक भूमि पुत्र मंगल के अधिकार में रहता है। आप बेहद साहसी हैं। आपके स्वभाव में एक विशेष प्रकार की तीव्रता पाई जाती है।

आपके लिए खास

शुभ दिनांक : 9, 18, 27

शुभ अंक : 1, 2, 5, 9, 27, 72


शुभ वर्ष : 2028, 2036, 2045

ईष्टदेव : हनुमान जी, मां दुर्गा।

शुभ रंग : लाल, केसरिया, पीला

आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
करियर: राजनैतिक व्यक्ति सफलता का स्वाद चख सकते हैं। अधिकार क्षेत्र में वृद्धि संभव है। आप अपनी शक्ति का सदुपयोग कर प्रगति की और अग्रसर होंगे। नौकरी में आ रही बाधा दूर होगी।


सेहत: स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा।

परिवार: पारिवारिक विवाद सुलझेंगे। मित्रों स्वजनों का सहयोग मिलने से प्रसन्नता रहेगी। महत्वपूर्ण कार्य योजनाओं में सफलता मिलेगी।


मेष (Aries)
स्वभाव: उत्साही
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: हरा
आज आपकी माताजी किसी बात को लेकर नाराज रहेंगी, क्योंकि आपका जो मन में आएगा, वह करेंगे, जिससे उन्हें कोई ठेस पहुंच सकती हैं। आपको किसी दूसरे की मामले में बेवजह बोलने से बचना होगा। आपको अपने जरूरी कागजातों पर  पूरा ध्यान देना होगा, क्योंकि उनकी खराबी के कारण आपका धन खर्च बढ़ सकता है। आपके मन में काम को लेकर भी नए-नए आइडिया आएंगे, जो आपके लिए बेहतर रहेंगे। बैंकिंग क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के लिए दिन अच्छा रहेगा।

वृषभ (Taurus)
स्वभाव:  धैर्यवान
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: लाल
आज का दिन आपके लिए मौज-मस्ती से भरा रहेगा। आज आपकी संतान आपकी उम्मीदों पर खरी उतरेगी, लेकिन आपने किसी परीक्षा को दिया था, तो उसके परिणाम आ सकते हैं। रोजगार की तलाश में लगे लोगों के लिए दिन बेहतर रहेंगे। जो आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर पाएंगे और प्रॉपर्टी डीलर का काम आप कर सकते हैं, जिसमें आपको अच्छा लाभ मिलेगा। आप उन्नति की राह पर आगे बढ़ेंगे और पार्टनरशिप भी थोड़ा सोच समझकर करें।

मिथुन (Gemini)
स्वभाव:  जिज्ञासु
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: सफेद
आज आपकी निर्णय लेने की क्षमता बेहतर रहेगी। प्रेम और सहयोग की भावना आपके मन में बनी रहेगी और आप अपने भाई-बहनों के साथ किसी पार्टी आदि को करने की योजना बना सकते हैं। कोई कानूनी मामला यदि आपको टेंशन दे रहा था, तो वह भी दूर होगा और आप किसी अजनबी पर आंख बंद करके भरोसा ना करें। आपकी वाणी की सौम्यता आपको मान सम्मान दिलवाएगी, लेकिन आपकी क्रोध करने की आदत के कारण परिवार के सदस्य नाराज रहेंगे।

कर्क (Cancer)
स्वभाव:  भावुक
राशि स्वामी: चंद्र
शुभ रंग: ग्रे
आज का दिन आपके लिए ठीक-ठाक रहने वाला है। संतान आपकी उम्मीदों पर खरी उतरेगी और बिजनेस भी पहले से बेहतर चलेगा, जो आपको खुशी देगा, लेकिन आपके पिताजी की सेहत में गिरावट आने की संभावना है और किसी दूर रह रहे परिजन से आपको कोई निराशाजनक सूचना सुनने को मिलेगी, यदि ऐसा हो, तो आप फिर भी धैर्य और संयम बनाए रखें। यदि आपने किसी जरूरतमंद की मदद की, तो वह आपकी मदद के लिए आगे अवश्य आएंगे।

सिंह राशि (Leo)
स्वभाव:  आत्मविश्वासी
राशि स्वामी: सूर्य
शुभ रंग: गुलाबी
आज का दिन विद्यार्थियों के लिए बौद्धिक और मानसिक बोझ से छुटकारा दिलाने वाला रहेगा। आपको प्रॉपर्टी में अच्छे लाभ मिलने से आपका मन काफी खुश रहेगा और किसी शारीरिक समस्या को लेकर आप परेशान रहेंगे  और आपकी कुछ नए लोगों से जान पहचान बढ़ेगी, जिससे राजनीति में हाथ आजमाने का मौका मिलेगा। आपको किसी बड़े नेता से मिलने का मौका भी मिल सकता है।

कन्या (Virgo)
स्वभाव:  मेहनती
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: नीला
आज का दिन आपके लिए मौज-मस्ती से भरा रहने वाला है। आपको अपनी किसी गलती को लेकर भागदौड़ बनी रहेगी। आप अपने कामों को कल पर टालने की कोशिश करेंगे, जो आपकी समस्या का कारण बनेंगे। जीवनसाथी की ओर से कोई सरप्राइज गिफ्ट मिलने से आपका मन खुश रहेगा और आप अपने भाई व बहनों की भावनाओं का सम्मान करें और यदि आपको किसी की कोई बात बुरी लगे, तो आप उसको लेकर उससे बातचीत अवश्य करें।

तुला (Libra)
स्वभाव:  संतुलित
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: पीला
आज आपको आय और व्यय में भी संतुलन बनाकर चलना होगा। आपको अपने किसी सहयोगी से कोई जरूरी जानकारी शेयर करने से बचना होगा और अपने कामों को लेकर आपको थोड़ा स्ट्रिक्टनेस दिखानी होगी, तभी वह समय से पूरे हो सकेंगे। आप काम को लेकर कोई गलती कर सकते हैं, जिससे आपके साथी आपसे नाराज रहेंगे और आप घर के रिनोवेशन का काम भी शुरू करने की प्लानिंग कर सकते हैं।

वृश्चिक (Scorpio)
स्वभाव:  रहस्यमय
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: केसरी
आज का दिन आपके लिए प्रसन्नता दिलाने वाला रहेगा। आपके धन-धान्य में वृद्धि होने से खुशी होगी और आपको परिवार में किसी सदस्य के विवाह में आ रही बाधा को भी मिल बैठकर दूर करना होगा। आप खापान को लेकर लापरवाही बिल्कुल ना बरतें और कोई पुरानी समस्या आपकी उभर सकती है। आज आप अपने रहन-सहन के स्तर में भी सुधार लाएंगे। शेयर मार्केट अथवा लॉटरी आदि में निवेश करने वाले लोगों के लिए दिन अच्छा रहेगा। भाग्य का पूरा साथ मिलेगा।

धनु (Sagittarius)
स्वभाव:  दयालु
राशि स्वामी: गुरु
शुभ रंग: हरा
आजकल दिन आपके लिए धन-धान्य में वृद्धि लेकर आने वाला है। आपको अपने पिताजी की भावनाओं का सम्मान करना होगा। यदि आपको काम को लेकर कोई सुझाव दे, तो आप उस पर अमल अवश्य करें और गलत खानपान से बचें, नहीं तो आपकी पेट संबंधित समस्या बढ़ेंगी। जो आपकी मुश्किलों को बढ़ाएंगी। परिवार में किसी नए मेहमान का आगमन होने से माहौल खुशनुमा रहेगा और सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे लोगों को भी कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है।

मकर (Capricorn)
स्वभाव:  अनुशासित
राशि स्वामी:  शनि
शुभ रंग: नीला
आज का दिन आपके लिए परोपकार के कार्यो में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने के लिए रहेगा। आपको अपने आसपास में किसी लड़ाई-झगड़े में पड़ने से बचना होगा। किसी सामाजिक आयोजन में सम्मिलित होने से आपकी छवि और निखरेगी और आपके जन समर्थन में भी इजाफा होगा। आप अपनी संतान के मनमौजी स्वभाव के लेकर थोड़ा परेशान रहेंगे और आपको अनजान लोगों से दूरी बनाकर रखनी होगी क्योंकि वह आपको बहलाने-फुसलाने की कोशिश करेंगे।

कुंभ ( Aquarius)
स्वभाव:  मानवतावादी
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: सफेद
आज आपको किसी नई नौकरी की प्राप्ति होने से आपका मन काफी खुश रहेगा। आपको अपने भाई-बहनों का पूरा सपोर्ट मिलेगा और आपको कोई साइड इनकम भी मिलने की संभावना है, जो आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूती देगी। आप किसी से मांगकर वाहन ना चलाएं, क्योंकि अकस्मात खराबी के कारण आपका खर्च बढ़ेगा और आपकी टेंशन भी बढ़ सकती है। आप किसी काम को लेकर अकस्मात यात्रा पर जा सकते हैं।

मीन (Pisces)
स्वभाव: संवेदनशील
राशि स्वामी: बृहस्पति
शुभ रंग: गुलाबी
आज का दिन आपके लिए बढ़िया रहने वाला है। आप किसी अजनबी पर भरोसा न करें। आज जीवनसाथी और आपके बीच कोई कहासुनी बढ़ेगी इसलिए थोड़ा संयम बनाए रखें। नौकरी में यदि आपको कई काम मिले, तो उसमें लापरवाही बिल्कुल ना करें। माताजी की सेहत मे गिरावट आने से भागदौड़ अधिक रहेगी। आपकी अपने किसी सहयोगी से किसी बात को लेकर खटपट होने की संभावना है।

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Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton