🙏🏻 हर हर महादेव🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 18 अगस्त 2025*
🌤️ *दिन – सोमवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – वर्षा ऋतु*
🌤️ *मास – भाद्रपद ( गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार श्रावण)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – दशमी शाम 05:22 तक तत्पश्चात एकादशी*
🌤️ *नक्षत्र – मृगशिरा 19 अगस्त रात्रि 02:06 तक तत्पश्चात आर्द्रा*
🌤️ *योग – हर्षण रात्रि 11:00 तक तत्पश्चात वज्र*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 07:54 से सुबह 09:30 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:19*
🌤️ *सूर्यास्त – 07:05*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण -*
💥 *विशेष – चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)*
💥 *चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।*
🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
🌷 *एकादशी व्रत के लाभ* 🌷
➡️ *18 अगस्त 2025 सोमवार को शाम 05:22 से 19 अगस्त 2025 मंगलवार को शाम 03:32 तक एकादशी है।*
💥 *विशेष – 19 अगस्त, मंगलवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे।*
🙏🏻 *जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
🙏🏻 *जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
🙏🏻 *एकादशी करने वालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवार वालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं । इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
🙏🏻 *धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।*
🙏🏻 *कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।*
🙏🏻 *परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है । पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ । भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।*
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *एकादशी के दिन करने योग्य* 🌷
🙏🏻 *एकादशी को दिया जला के विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें 👉🏻 … विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l*
🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *एकादशी के दिन ये सावधानी रहे* 🌷
🙏🏻 *महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो चावल खाता है… तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है…
🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचाग ~* 🕉️
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐पांच घण्टियाँ💐💐*
किसी जमाने में एक होटल हुआ करता था, जिसका नाम “द गुरु स्टार”था।
होटल मालिक नवीन के तमाम प्रयासों के बावजूद वह होटल बहुत अच्छा नहीं चल रहा था।
होटल मालिक ने होटल को आरामदायक, कर्मचारियों को विनम्र बनाने के अलावा किराया भी कम करके देख लिया, पर वह ग्राहकों को आकर्षित करने में नाकाम रहा।
इससे निराश होकर वह एक साधु के पास सलाह लेने पहुंचा।
उसकी व्यथा सुनने के बाद साधु ने उससे कहा, “इसमें चिंता की क्या बात है? बस तुम अपने होटल का नाम बदल दो।”
होटल मालिक ने कहा ,”यह असंभव है। कई पीढ़ियों से इसका नाम “द गुरु स्टार” है और यह देश भर में प्रसिद्ध है।”
साधु ने उससे फिर कहा , “पर अब तुम इसका नाम बदल कर “द फाइव वैल” (पाँच घण्टियाँ) रख दो और होटल के दरवाज़े पर छह घंटियाँ लटका दो।”
होटल मालिक ने कहा, “छह घंटियाँ?
यह तो और भी बड़ी बेवकूफी होगी। आखिर इससे क्या लाभ होगा?”
साधु ने मुस्कराते हुए कहा ,”यह प्रयास करके भी देख लो।”
होटल मालिक ने वैसा ही किया।
इसके बाद जो भी राहगीर और पर्यटक वहां से गुजरता, होटल मालिक की गलती बताने चला आता।
अंदर आते ही वे होटल की व्यवस्था और विनम्र सेवा से प्रभावित हो जाते।
धीरे – धीरे वह होटल चल निकला। होटल मालिक इतने दिनों से जो चाह रहा था, वह उसे मिल गया नवनीत।
“दूसरे की गलती बताने में भी कुछ व्यक्तियों का अहं संतुष्ट होता है, परन्तु वह यह नहीं समझ पाता कि वह उसे छोटा नहीं , बड़ा बना रहा है।”
इसलिए विनम्रता से उसका स्वागत करें।
*कहानी से सीख !*
जो आप को आप की गलतियाँ बताये , उसका विनम्रता से स्वागत करिए।इससे उसका समय बर्बाद हो रहा है और भला आप का हो रहा है।
*सदैव प्रसन्न रहीये जो प्राप्त है वो पर्याप्त है*
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌳🌳🌳🌳🌳🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐भाभी और रक्षाबंधन💐💐*
रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक था। एक बहन ने अपनी भाभी को फोन किया और स्नेहभरे स्वर में पूछा, “भाभी, मैंने जो भैया के लिए राखी भेजी थी, वो मिल गई क्या?”
भाभी ने सहज भाव से उत्तर दिया, ” नहीं दीदी, अभी तक तो नहीं मिली…”
बहन ने चिंता भरे स्वर में कहा, “कल तक देख लीजिए भाभी, अगर नहीं मिली तो मैं खुद आ जाऊंगी राखी लेकर। मेरे रहते मेरे भाई की कलाई रक्षाबंधन के दिन सूनी नहीं रहनी चाहिए!”नवनीत
अगले दिन सुबह ही भाभी ने फिर फोन किया, “दीदी, आपकी राखी अब तक नहीं मिली, अब क्या करें बताइए?”
यह सुनते ही बहन ने बिना देर किए अपने पति से गाड़ी निकालने को कहा और मिठाई व राखी लेकर मायके की ओर चल पड़ी। करीब दो सौ किलोमीटर की दूरी और पाँच घंटे का सफर तय कर वह अपने मायके पहुँची।
जैसे ही पहुँची, सबसे पहले भाई को राखी बाँधी, फिर पापा मम्मी और परिवार के बाकी सदस्यों से मिली। घर में हँसी-ठिठोली, बातें, और स्वादिष्ट व्यंजनों की महफिल सज गई। घर फिर एक बार पुराने दिनों की तरह जीवंत हो उठा।
अगले दिन जब विदा का समय आया, तो भाभी ने बहन की गाड़ी में ढेर सारा सामान रख दिया—कपड़े, फल, मिठाइयाँ और भी बहुत कुछ। जब बहन माँ के पैर छूने लगी, तो माँ ने हल्की सी शिकायत करते हुए कहा, “अब तो ज़रा सा भी मेरा ख्याल नहीं करती तू… जल्दी-जल्दी आ जाया कर, तेरे बिना घर सूना लगता है। तेरे भाई नवनीत की नज़रें भी तुझे ढूँढ़ती रहती हैं…”
बहन मुस्कुराते हुए बोली, “माँ, आपकी भावनाएं मैं समझती हूँ… लेकिन उधर भी तो मेरी एक माँ हैं, और इधर आपके पास भाभी हैं, जो आपको कभी अकेला नहीं पड़ने देतीं। मैं वादा करती हूँ, फुर्सत मिलते ही फिर भाग कर आ जाऊंगी।”
माँ की आँखें नम हो गईं। धीरे से बोली, “बेटी, सच कहूँ तो तेरी भाभी तेरा बहुत ख्याल रखती है। देख, इस बार तेरी राखी दो दिन पहले ही आ गई थी, लेकिन उसने किसी को बताने नहीं दिया। बस एक ही ज़िद थी—’ इस बार दीदी को मायके ज़रूर बुलाना है। चार साल हो गए, वो नहीं आईं’…”
यह सुनते ही बहन की आँखें भर आईं। वह दौड़कर भाभी को गले लगाकर फूट-फूट कर रोने लगी, “भाभी, मेरी माँ का इतना भी ख्याल मत रखा करो कि वो मुझे भूल ही जाएं…”
भाभी की आँखें भी भर आईं। दोनों स्त्रियाँ एक अनकहा रिश्ता बाँध चुकी थीं—रक्षाबंधन के एक और नए धागे में।
बहन जब लौट रही थी, गाड़ी में बैठी बस खामोशी से उस सुनहरी, मीठी, आत्मीय यात्रा के हर पल को संजोए जा रही थी। उसके मन में एक ही प्रार्थना थी— “हे ईश्वर, हर बहन को ऐसी स्नेहमयी, अपनापन बाँटने वाली भाभी मिले…”
*एक भावनात्मक कविता –*
*”रक्षाबंधन की एक और डोर”* 🌸
*भाभी के मन में था कुछ ठाना,*
*ननद को इस बार है खुद बुलाना।*
*राखी आई थी, पर न बताई,*
*स्नेह से उसने योजना बनाई।*
*बहन चली मायके की ओर,*
*मन में उमंग, आंखों में भोर।*
*भाई की कलाई पर राखी बांधी,*
*प्यार की डोर फिर से साधी।*
*माँ की गोद, भाभी की मुस्कान,*
*हर कोना बोला — ये है अपना जहान।*
*जब चल दी बहन, तो दिल भर आया,*
*भाभी का प्रेम आंखों से छलक आया।*
*हर बहन के नसीब में हो ऐसी भाभी,*
*जो रिश्तों को बुनें स्नेह की साड़ी*
रिश्ते खून से नहीं, भावना से निभाए जाते हैं। भाभी अगर सच्चे दिल से बहन बन जाए, तो मायका कभी दूर नहीं होता। रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन का नहीं, पूरे परिवार के प्रेम की डोर है, जो सभी रिश्तों को जोड़े रखती है।
*ब्रज की छाछ की महिमा*
*========================*
एक बार जब भगवान श्री कृष्ण लीला कर रहे तो ब्रह्मा शिव इंद्र इत्यादि सब देवता ठाकुर जी के निकट आये क्या देखा कि ठाकुर जी अपने पीछे कुछ छुपा रहे है !
तब देवता बोले –
प्रभु आप क्या छुपा रहे हो ?
भगवान चुपचाप खड़े रहे हाथ में एक पात्र रखा है और उसको पीछे छुपा रखा है !देवताओ ने फिर पूछा -प्रभु आप क्या छुपा रहे हो तो भगवान धीरे से बोले -देखो आप किसी को बताना नहीं ये जो पात्र है
ना इसमें बड़ी मुश्किल से आज मैं कहीं से छाछ लेकर आया हूँ !
देवता बोले -फिर प्रभु छुपा क्यों रहे हो क्या ये बहुत कीमती है ?
भगवान बोले -अब इसकी कीमत मैं क्या बताऊँ ?
तो देवता बोले -प्रभु आप जो अनंत कोटि ब्रम्हाण्ड नायक है आप इस छाछ को छुपा रहे है तो ये तो अनमोल होगी तो प्यारे एक घूंट हमे भी मिल जाये आप कृपा कर दो ताकि एक घूंट हम भी पी सके !
भगवान बोले -नहीं-२ देवताओ ये छाछ तुम्हारे सौभागय में नहीं है
तुम स्वर्ग का अमृत पी सकते हो पर ब्रजवासियो की छाछ तो मैं ही पियूँगा तुम जाओ यहाँ से स्वर्ग का अमृत पीओ पर ये छाछ मैं आपको नहीं दे सकता हूँ !
देवता बोले -प्रभु ऐसी कौन सी अनमोल बात है इस छाछ में जो हम नहीं पी सकते है आप कह रहे हो कि हम अमृत पिये तो क्या ये छाछ अमृत से भी बढ़कर है ?
अरे छाछ तो छाछ है इसमें क्या बड़ी बात है !
इतना सुना तो ठाकुर जी आँखों में आँसू भरकर बोले -देवताओ तुम्हे नहीं पता इस छाछ को पाने के लिये मुझे गोपिन के सामने नृत्य करना पड़ा है जब मैं नाचा हूँ तब मुझे ये छाछ मिला है :
!! ताहि अहीर की छोहरियाँ छछिया भर छाछ पर नाच नचावे !!
तो कुछ तो बात होगी ही ना गोपियों के प्रेमवश बनाये इस छाछ में में जो इसे पाने के लिये ठाकुर जी को नाचना पड़ा वस्तुतः
भक्त के निःस्वार्थ ह्रदय की गहराईयों से निसृत भजन ही भगवान का भोजन है
परमात्मा इसे ही प्रेमवश भोग लगाया करते है !!
हरि के सब आधीन पै, हरी प्रेम आधीन !!
याही ते हरि आपु ही, याहि बड़प्पन दीन !!
जय जय श्री राधे कृष्णा🙏
*सदैव प्रसन्न रहिए है जो प्राप्त है पर्याप्त है*
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌳🌳🌳🌳🌳🙏🏻🙏🏻🙏🏻
*भगवान् श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ी 24 अनसुनी बातें*
*============================*
1. भगवान् श्री कृष्ण के खड्ग का नाम ‘नंदक’, गदा का नाम ‘कौमौदकी’ और शंख का नाम ‘पांचजन्य’ था जो गुलाबी रंग का था।
2. भगवान् श्री कॄष्ण के परमधामगमन के समय ना तो उनका एक भी केश श्वेत था और ना ही उनके शरीर पर कोई झुर्री थीं।
3.भगवान् श्री कॄष्ण के धनुष का नाम शारंग व मुख्य आयुध चक्र का नाम ‘ सुदर्शन’ था। वह लौकिक, दिव्यास्त्र व देवास्त्र तीनों रूपों में कार्य कर सकता था उसकी बराबरी के विध्वंसक केवल दो अस्त्र और थे पाशुपतास्त्र ( शिव , कॄष्ण और अर्जुन के पास थे) और प्रस्वपास्त्र ( शिव , वसुगण , भीष्म और कृष्ण के पास थे) ।
4. भगवान् श्री कॄष्ण की परदादी ‘मारिषा’ व सौतेली मां रोहिणी( बलराम की मां) ‘नाग’ जनजाति की थीं.
5. भगवान श्री कॄष्ण से जेल में बदली गई यशोदापुत्री का नाम एकानंशा था, जो आज विंध्यवासिनी देवी के नाम से पूजी जातीं हैं।
6. भगवान् श्री कॄष्ण की प्रेमिका ‘राधा’ का वर्णन महाभारत, हरिवंशपुराण, विष्णुपुराण व भागवतपुराण में नहीं है। उनका उल्लेख बॄम्हवैवर्त पुराण, गीत गोविंद व प्रचलित जनश्रुतियों में रहा है।
7. जैन परंपरा के मुताबिक, भगवान श्री कॄष्ण के चचेरे भाई तीर्थंकर नेमिनाथ थे जो हिंदू परंपरा में ‘घोर अंगिरस’ के नाम से प्रसिद्ध हैं.
8. भगवान् श्री कॄष्ण अंतिम वर्षों को छोड़कर कभी भी द्वारिका में 6 महीने से अधिक नहीं रहे।
9. भगवान श्री कृष्ण ने अपनी औपचारिक शिक्षा उज्जैन के संदीपनी आश्रम में मात्र कुछ महीनों में पूरी कर ली थी।
10. ऐसा माना जाता है कि घोर अंगिरस अर्थात नेमिनाथ के यहाँ रहकर भी उन्होंने साधना की थी.
11. प्रचलित अनुश्रुतियों के अनुसार, भगवान श्री कॄष्ण ने मार्शल आर्ट का विकास ब्रज क्षेत्र के वनों में किया था और डांडिया रास उसी का नॄत्य रूप है।
12. कलारीपट्टु’ का प्रथम आचार्य कॄष्ण को माना जाता है। इसी कारण ‘नारायणी सेना’ भारत की सबसे भयंकर प्रहारक सेना बन गई थी।
13. भगवान श्रीकृष्ण के रथ का नाम ‘जैत्र’ था और उनके सारथी का नाम दारुक/ बाहुक था। उनके घोड़ों (अश्वों) के नाम थे शैव्य, सुग्रीव, मेघपुष्प और बलाहक।
14. भगवान श्री कृष्ण की त्वचा का रंग मेघश्यामल था और उनके शरीर से एक मादक गंध स्रावित होती थी.
15. भगवान श्री कॄष्ण की मांसपेशियां मृदु परंतु युद्ध के समय विस्तॄत हो जातीं थीं, इसलिए सामन्यतः लड़कियों के समान दिखने वाला उनका लावण्यमय शरीर युद्ध के समय अत्यंत कठोर दिखाई देने लगता था ठीक ऐसे ही लक्ष्ण कर्ण, द्रौपदी व कॄष्ण के शरीर में देखने को मिलते थे।
16. जनसामान्य में यह भ्रांति स्थापित है कि अर्जुन सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे, परंतु वास्तव में कॄष्ण इस विधा में भी सर्वश्रेष्ठ थे और ऐसा सिद्ध हुआ मद्र राजकुमारी लक्ष्मणा के स्वयंवर में जिसकी प्रतियोगिता द्रौपदी स्वयंवर के ही समान परंतु और कठिन थी।
17. यहां कर्ण व अर्जुन दोंनों असफल हो गये और तब श्री कॄष्ण ने लक्ष्यवेध कर लक्ष्मणा की इच्छा पूरी की, जो पहले से ही उन्हें अपना पति मान चुकीं थीं।
18. भगवान् श्री युद्ध कृष्ण ने कई अभियान और युद्धों का संचालन किया था, परंतु इनमे तीन सर्वाधिक भयंकर थे। 1- महाभारत, 2- जरासंध और कालयवन के विरुद्ध 3- नरकासुर के विरुद्ध
19. भगवान् श्री कृष्ण ने केवल 16 वर्ष की आयु में विश्वप्रसिद्ध चाणूर और मुष्टिक जैसे मल्लों का वध किया. मथुरा में दुष्ट रजक के सिर को हथेली के प्रहार से काट दिया.
20. भगवान् श्री कॄष्ण ने असम में बाणासुर से युद्ध के समय भगवान शिव से युद्ध के समय माहेश्वर ज्वर के विरुद्ध वैष्णव ज्वर का प्रयोग कर विश्व का प्रथम ‘जीवाणु युद्ध’ किया था।
21. भगवान् श्री कॄष्ण के जीवन का सबसे भयानक द्वंद युद्ध सुभुद्रा की प्रतिज्ञा के कारण अर्जुन के साथ हुआ था, जिसमें दोनों ने अपने अपने सबसे विनाशक शस्त्र क्रमशः सुदर्शन चक्र और पाशुपतास्त्र निकाल लिए थे। बाद में देवताओं के हस्तक्षेप से दोंनों शांत हुए।
22. भगवान् श्री कृष्ण ने 2 नगरों की स्थापना की थी द्वारिका (पूर्व मे कुशावती) और पांडव पुत्रों के द्वारा इंद्रप्रस्थ ( पूर्व में खांडवप्रस्थ)।
23. भगवान् श्री कृष्ण ने कलारिपट्टू की नींव रखी जो बाद में बोधिधर्मन से होते हुए आधुनिक मार्शल आर्ट में विकसित हुई।
24. भगवान् श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवतगीता के रूप में आध्यात्मिकता की वैज्ञानिक व्याख्या दी, जो मानवता के लिए आशा का सबसे बडा संदेश थी, है और सदैव रहेगी।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
गरुड़ पुराण के अनुसार धनवान बनने का राज
*गुरुड़ पुराण के अनुसार आपकी सोच, आपकी आदतें और आपके कर्म ही आपको दरिद्र या धनवान बनाते हैं। गुरुड़ पुराण में नैतिक मूल्यों को लेकर कई बातें बताई गई है परंतु यहां पर यह जानना जरूरी है कि हमारी कौनसी आदतें हमें दरिद्र बनाती है और कौनसी आदतें हमें धनवान बना सकती है।*
* घर में गंदनी रखना या गंदे कपड़े पहनना एक ही बात है। इससे माता लक्ष्मी नाराज हो जाती है।
* घर में साफ सफाई का नहीं होना गंदे आदमी की निशानी है।
* इसी तरह अहंकार से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। लोग साथ छोड़ देते हैं और आदमी खुद को अकेला पाता है।
* दौलत, बंगला, महंगी गाड़ी, भूमि आदि सभी कोई काम नहीं आने वाली है।
* सूर्योदय के बाद देर तक सोते रहना गलत है। क्योंकि इससे माता लक्ष्मी ही नाराज नहीं होती है बल्कि शनिदेव भी नाराज हो जाते हैं।
* यदि कोई व्यक्ति मेहनत करने से बचना है, कामचोर है। सौंपे गए कामों को ठीक से पूर्ण नहीं करता है तो माता लक्ष्मी रूष्ठ हो जाती है।
* इसके साथ ही दूसरों के कार्यों में कमियां निकालना भी जीवन को खराब कर देता है।
* किसी गरीब, असहाय, मजबूत, अबला, विधवा आदि का शोषण करके उसका हक छीनने वाला जल्द ही कंगाल होकर बर्बाद हो जाता है। ऐसे लालची व्यक्ति का कोई साथी नहीं होता है। लक्ष्मी मां ऐसे लोगों को घर ज्यादा दिन नहीं रहती हैं।
*🚩1. गंदे वस्त्र पहनना:-* घर में गंदनी रखना या गंदे कपड़े पहनना एक ही बात है। इससे माता लक्ष्मी नाराज हो जाती है। घर में साफ सफाई का नहीं होना गंदे आदमी की निशानी है। यदि आप अमीर, धनवान या सौभाग्यशाली बनना चाहते हैं तो जरूरी है कि आप साफ-सुथरे, सुंदर और सुगंधित कपड़े पहनें। गरुण पुराण के अनुसार उन लोगों का सौभाग्य नष्ट हो जाता है जो गंदे वस्त्र पहनते हैं।
*🚩2. अहंकार करना:-* अहंकार तो महाशक्तिशाली रावण का भी नहीं रहा तो भी आप क्यों करते हैं। अहंकार से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। लोग साथ छोड़ देते हैं और आदमी खुद को अकेला पाता है। दौलत, बंगला, महंगी गाड़ी, भूमि आदि सभी कोई काम नहीं आने वाली है।
*🚩3. सूर्योदय के बाद देर तक सोते रहना:-* आजकल लोग देर से सोते हैं और देर से उठते हैं। यह गंदी आदत उनका जीवन बर्बाद कर सकता है क्योंकि इससे माता लक्ष्मी ही नाराज नहीं होती है बल्कि शनिदेव भी नाराज हो जाते हैं।
*🚩4. परिश्रम से जी चुराना:-* यदि कोई व्यक्ति मेहनत करने से बचता है, कामचोर है। सौंपे गए कामों को ठीक से पूर्ण नहीं करता है तो माता लक्ष्मी रूष्ठ हो जाती है। इसके साथ ही दूसरों के कार्यों में कमियां निकालना भी जीवन को खराब कर देता है।
*🚩5. शोषण करना:-* किसी गरीब, असहाय, मजबूत, अबला, विधवा आदि का शोषण करके उसका हक छीनने वाला जल्द ही कंगाल होकर बर्बाद हो जाता है। ऐसे लालची व्यक्ति का कोई साथी नहीं होता है। लक्ष्मी मां ऐसे लोगों को घर ज्यादा दिन नहीं रहती हैं।
*🚩6. गाय का महत्व:-* हिन्दू धर्म में गाय को सबसे पवित्र प्राणी माना गया है। गरुड़ पुराण अनुसार मरने के बाद वैतरणी नदी को पार कराने वाली गाय ही होती है। गरुड़ पुराण के मुताबिक गाय के दूध को देखने मात्र से ही कई पूजा-पाठ, यज्ञ-अनुष्ठान करने के सामान पुण्य प्राप्त होता है। गुरुड़ पुराण अनुसार गौशाला देखने से भी शुभ फल की प्राप्ति होती है।
🙏🌷🍀🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🙏 जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
अंक ज्योतिष का सबसे आखरी मूलांक है नौ। आपके जन्मदिन की संख्या भी नौ है। आप सही मायनों में उत्साह और साहस के प्रतीक हैं। मंगल ग्रहों में सेनापति माना जाता है। अत: आप में स्वाभाविक रूप से नेतृत्त्व की क्षमता पाई जाती है। लेकिन आपको बुद्धिमान नहीं माना जा सकता। मंगल के मूलांक वाले चालाक और चंचल भी होते हैं। आपको लड़ाई-झगड़ों में भी विशेष आनंद आता है। आपको विचित्र साहसिक व्यक्ति कहा जा सकता है। यह मूलांक भूमि पुत्र मंगल के अधिकार में रहता है। आप बेहद साहसी हैं। आपके स्वभाव में एक विशेष प्रकार की तीव्रता पाई जाती है।
शुभ दिनांक : 9, 18, 27
शुभ अंक : 1, 2, 5, 9, 27, 72
शुभ वर्ष : 2029, 2036, 2045
ईष्टदेव : हनुमान जी, मां दुर्गा।
शुभ रंग : लाल, केसरिया, पीला
जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :
राजनैतिक व्यक्ति सफलता का स्वाद चख सकते हैं। मित्रों स्वजनों का सहयोग मिलने से प्रसन्नता रहेगी। आप अपनी शक्ति का सदुपयोग कर प्रगति की और अग्रसर होंगे। पारिवारिक विवाद सुलझेंगे। महत्वपूर्ण कार्य योजनाओं में सफलता मिलेगी। नौकरी में आ रही बाधा दूर होगी। स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। अधिकार क्षेत्र में वृद्धि संभव है।
🙏🏻हर हर महादेव🙏🏻
🌹आज का राशिफल🌹
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज आपका मानसिक संतुलन स्थिर नहीं रहेगा। असमंजस की स्थिति के कारण पल पल में निर्णय बदलेंगे। इससे कार्य विलंब के साथ अन्य लोगों को परेशानी होगी। फिर भी स्वार्थी पूर्ति के कारण आज आपसे कोई शिकायत नहीं करेगा। मन आज अनैतिक कार्यों में जल्दी आकर्षित होगा। स्वभाव में भी उदण्डता रहेगी। बिना कलह किये किसी कार्य को नहीं करेंगे। कार्य क्षेत्र पर भी मन मर्जी व्यवहार के कारण जिस लाभ के अधिकारी हैं उसमें कमी आएगी। धन की आमद आज पूर्व नियोजित रहेगी। थोड़ी बहुत अतिरिक्त आय भी बना लेंगे लेकिन खर्च के आगे आज कमाई कम ही लगेगी। मौसमी बीमारियों एवं संयम की कमी के कारण सेहत बिगड़ सकती है।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज के दिन आप सौंदर्य के प्रति विशेष आकर्षित रहेंगे। मौज शौक साज सज्जा के सामान पर दिल खोल कर खर्च करेंगे। कार्य व्यवसाय में किसी बहुप्रतीक्षित काम के बनने से धन की आमद होगी लेकिन थोड़ा बहुत विलंब होने से हतोत्साहित ना हो। आज शत्रु पक्ष भी आपके कार्यशैली से प्रभावित होंगे बीच मे व्यवधान भी डालने का प्रयास करेंगे लेकिन असफल ही रहेंगे। संतान का सहयोग कार्य क्षेत्र पर मिलेगा लेकिन विचारो में अंतर रहने के कारण तालमेल बैठाने में परेशानी आयेगीं। पैतृक कारणों से पिता से अनबन हो सकती है नरमी से काम ले वरना भविष्य के लिये हानिकर रहेगा। दर्द अकड़न की शिकायत आज भी रहेगी।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज दोपहर बाद का समय आपके लिये अत्यन्त शुभफलदायी रहेगा लेकिन आज आपका स्वभाव सनकी रहेगा किसए भी कार्य को करने से पहले सोचने समझने में समय व्यर्थ करेंगे।आज आलस्य को त्याग निष्ठा से कार्य में लग जाए भाग्योन्नति के प्रबल योग होने से थोड़े से परिश्रम के बाद घर-बाहर मान-बड़ाई मिलेगी। भाई-बहनों के लिए भी आज आप सहायक बनेंगे। नए कार्य में निवेश के लिए शुभ अवसर है निसंकोच होकर कर सकते है। परिजनों के साथ धार्मिक यात्रा का अवसर मिलेगा। सेहत सामान्य रहेगी तली वस्तुओं का परहेज करें।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन आप आपके लिए लाभदायक रहेगा। आज स्वास्थ्य छोटी-मोटी परेशानियों को छोड़ उत्तम ही रहेगा। आज आपके सोचे हुए कार्य व्यवहारिकता के बल पर अपने आप होते चले जायेंगे जिससे मन प्रसन्न रहेगा। आज परिश्रम के कार्यो की अपेक्षा बौद्धिक कार्यो में सहज सफलता मिलेगी। विद्यार्थियों को प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी। संध्या पश्चात परिजनों के साथ किसी महत्त्वपूर्ण विषय पर बात करेंगे यहाँ अपने विचार अंत मे रखें अन्यथा किसी की कटु वाणी सुनने को मिलेगी। दूर के कार्यो से धन लाभ होगा लेकिन खर्चीला स्वभाव बचत नही करने देगा।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन शुभ फलदायी रहेगा। सार्वजनिक एवं व्यावसायिक क्षेत्र पर व्यवहारिकता से नए संबंध बनाएंगे। कार्य व्यवसाय में थोड़ा उतार चढ़ाव लगा रहेगा अकस्मात वृद्ध होगी कुछ ही देर में उदासीनता छा जाएगी। धन लाभ को लेकर आज किसी भी तरह की कसर नही छोड़ेंगे फिर भी आशाजनक नही हो सकेगा। व्यवहारिकता के बल पर ही लाभ कमाया जा सकता है छोटे मोटे नुकसान होने पर बहस से बचे। आज पैतृक कार्यो से लाभ भी होगा एवं इनके ऊपर खर्च करना पड़ेगा। भाग्य का साथ मिलने से कुछ रुके कार्यो में गति आएगी। परिवार अथवा रिश्तेदारी में किसी समारोह के कारण खर्च में वृद्धि होगी। सेहत सामान्य रहेगी खर्च के कारण मानसिक बेचैनी रह सकती है।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज दिन के आरम्भ में अन्य दिनों की तुलना में अधिक पूजा पाठ करेंगे। लघु धार्मिक यात्रा के भी योग है। कार्य व्यवसाय में आज भाग दौड़ अधिक करनी पड़ेगी परन्तु इसका परिणाम आशा से कम ही रहेगा लेकिन आज मेहनत का फल कम ही सही मिलेगा जरूर। सरकारी कार्य बनते बनते अंत समय मे किसी कमी से अधूरे रह जाएंगे कोर्ट कचहरी के कारण खर्च बढ़ेगा। नौकरी पेशाओ को अधिकारी वर्ग से तालमेल बनाने में परेशानी आएगी कहा सुनी भी हो सकती है। दोपहर के बाद किसी भी कार्य मे सफलता के नजदीक पहुच कर भी निराश होना पड़ेगा लेकिन सब्र बनाये रखें आने वाला समय आपके पक्ष ने ही रहेगा। परिवार मे वातावरण छोटी सी गलतफहमी के कारण उग्र होगा कुछ ही देर में शांत भी हो जाएगा।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज आपके अंदर साहस की कमी रहेगी लोगो के सामने अपनी शेखी दिखाएंगे लेकिन अंदर से हालात कायर जैसे रहेंगे। दिन का पहला भाग शुभ समाचार मिलने से आनंद में बीतेगा लेकिन दोपहर के बाद कार्य व्यवसाय के साथ रिश्तेदारी के कारण अतिरिक्त भाग दौड़ करनी पड़ेगी। कार्य क्षेत्र पर आज मनमानी का परिणाम विपरीत मिलेगा लाभ की जगह धन फंसा लेंगे। सहकर्मी के साथ भी व्यवहार असामान्य रहेगा लोग मुह पर उल्टा जवाब देंगे धैर्य की कमी के कारण तकरार बढ़ भी सकती है। अड़ियल रवैये के कारण स्वयं ही नए शत्रु बढ़ाएंगे। संध्या के समय परिजन नाराज होने पर भी सहयोग करेंगे आपकी मानसिकता भी बदलने से शांति मिलेगी। आकस्मिक यात्रा के योग बन रहे है लाभदायी ही रहेगी लेकिन सेहत का ध्यान रखना होगा।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन मध्यान तक आपके लिये अनुकूल रहेगा। व्यापार में कम परिश्रम से सफलता मिलने से कार्य के प्रति उत्साह बढ़ेगा लेकिन आर्थिक दृष्टिकोण से आज भी दिन कुछ न कुछ कमी अवश्य रखेगा। नौकरी पेशा जातको को भी परिश्रम का फल आर्थिक या पदोन्नति के रूप में मिल सकता है इसके लिए किसी की खुशामद भी करनी पड़ेगी। जोखिम वाले कार्यो में निवेश से अकस्मात लाभ हो सकता है। संध्या का समय परिजन अथवा किसी जानकार के साथ मतभेद होने पर अशान्त बनेगा। नसों में दुर्बलता अथवा पेट संबंधित समस्या से परेशानी हो सकती है
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आपके आज के दिन का पूर्वार्ध अत्यन्त व्यस्त रहने वाला है लेकिन व्यस्तता बे फिजूल के कार्यो को लेकर रहेगी। इस समय कार्य क्षेत्र पर कम समय दे पाएंगे। आज किसी पुराने मामले को लेकर सरकारी दस्तावेजो को पूर्ण करने में अधिकांश समय व्यतीत होगा परंतु इसमें विघ्नों के बाद आंशिक सफलता मिलेगी। कार्य क्षेत्र पर लाभ के अवसर निकल सकते है लेकिन यहाँ धैर्य से काम लेना जरूरी है अन्यथा आपके हिस्से का लाभ किसए प्रतिद्वंदी को मिल सकता है। संध्या के समय अत्यधिक थकान परंतु फिर भी शांति अनुभव करेंगे। सेहत नरम होने पर भी लापरवाही करेंगे।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन मध्यम फलदायी रहेगा। व्यापार अथवा नौकरी करने वाले जातक आज परिश्रम के बाद ही कार्य में सफलता पा सकेंगे। उच्चाधिकारी से किसी बात पर मतभेद रह सकता है आज इनसे बचकर रहने का प्रयास करें। कार्य क्षेत्र पर सहकर्मियों का पूर्ण सहयोग मिलने से थोड़ी राहत अनुभव होगी। परिवार में पत्नी अथवा पुत्र के कारण कलह के योग बनेंगे। खर्च अधिक रहेगा। आज आर्थिक मामलों में ढील ना दें अन्यथा आगे परेशानी हो सकती है। गैस कब्ज के कारण परेशानी होने की संभावना है।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन संघर्षमय रहेगा। दिन के प्रथम भाग में ही थोड़ी शांति अनुभव करेंगे लेकिन इसके बाद किसी कारण से भय बना रहेगा कार्य व्यवसाय को लेकर मन मे चल रही दुविधा का हल ना निकलने पर स्थित गंभीर होने की सम्भवना है। व्यवसायी वर्ग कार्य क्षेत्र पर अग्नि अथवा अन्य प्रकार की हानि को लेकर पहले ही सतर्क रहें बाद में पछताने के अलावा कुछ नही कर सकेंगे। निवेश भूल कर भी ना करें डूबने की संभावना है। सभी प्रकार के आर्थिक लेनदेन दोपहर से पहले ही कर लें। आज पिता के अलावा अन्य किसी की मदद नही मिलेगी निराशा में संबंध खराब ना हो इसका भी ध्यान रखें। घरेलू माहौल में उदासीनता अधिक रहेगी। स्त्री वर्ग के स्वभाव में चिड़चिड़ापन रहेगा। सेहत मध्यान बाद अकस्मात खराब हो सकती है।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
पिछले कुछ दिनों से चल रही आर्थिक स्थिति आज भी यथावत रहेगी प्रयास करने पर कही से खर्च लायक साधन जुटा लेंगे लेकिन मन मे भविष्य को लेकर दुविधा लगी रहेगी। कार्य व्यवसाय में आज निरंतर मिल रही असफलता से क्षुब्ध होकर कोई गलत कदम या निर्णय ले सकते है धीरज से काम ले अन्यथा आगे होने वाले लाभ से भी दूर हो सकते है। भूमि भवना संबंधित कार्यो से जुड़े लोग निवेश से बचे धन फंसने की सम्भवना है। धर्म-कर्म में निष्ठा रहेगी लेकिन व्यवहार पूर्ति के लिए ही समय देंगे। दोपहर बाद का समय थोड़ा राहत भरा रहेगा किसी पुराने परिचित से भेंट आनंदित करेगी। परिवार कुटुम्ब का सुख अपेक्षाकृत कम ही रहेगा। सेहत में कुछ समय के लिये नरमी रहेगी।

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