🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 17 जुलाई 2025*
🌤️ *दिन – गुरूवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – वर्षा ऋतु*
🌤️ *मास – श्रावण (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार आषाढ)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – सप्तमी शाम 07:08 तक तत्पश्चात अष्टमी*
🌤️ *नक्षत्र – रेवती 18 जुलाई रात्रि 03:39 तक तत्पश्चात अश्विनी*
🌤️ *योग – अतिगण्ड सुबह 09:29 तक तत्पश्चात सुकर्मा*
🌤️ *राहुकाल – दोपहर 02:24 से शाम 04:04 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:07*
🌤️ *सूर्यास्त – 07:21*
👉 *दिशाशूल – दक्षिण दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – पंचक*
💥 *विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
💥 *चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)*
💥 *चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।*
🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
🌷 *मोटापा से बचने हेतु* 🌷
👉🏻 *शरीर का वजन ज्यादा लगे किसी को तो उसको नींबू का शरबत दोपहर के भोजन के एक घंटे के बाद पीना चाहिये | नींबू, शहद थोडा-सा वो पीये तो उससे वजन कम हो सकता है |*
🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️गुरुवार के दिन स्नानादि से निवृत्त होकर पीले रंग के वस्त्र धारण कर केले के पेड़ के पास जाकर, अपनी मनोकामना कहें. ध्यान रखें इस दौरान आपको कोई रोक-टोक ना करें. ऐसा करने से जल्द ही आपकी मनोकामना पूर्ण होगी.
🌷 *अष्ट लक्ष्मी प्राप्ति मन्त्र* 🌷
🙏🏻 *सदगुरू की कृपा से अष्टलक्ष्मी (अदि लक्ष्मी,धान्य लक्ष्मी, धन लक्ष्मी,धैर्य लक्ष्मी,गज्ज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी ,विद्या लक्ष्मी,विजय लक्ष्मी) प्राप्त हो जाती है ….रोज यह मंत्र बोलकर अष्टलक्ष्मी का आह्वान कर सकें तो गुरूकृपा से यह सहज में प्राप्त हो जाती है -*
🌷 *सिद्धि बुद्धि प्रदे देवि भुक्ति मुक्ति प्रदायिनि |*
*मंत्रपूर्ते सदा देवि महालक्ष्मी नमोस्तुते ||*
*नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते |*
*शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते ||*
*ॐ श्रीमहालक्ष्म्यै नम:*
*ॐ श्रीमहालक्ष्म्यै नम:*
🙏🏻 *गुरूकृपा से सब प्रकार की लक्ष्मी सुख शांति आदि की प्राप्ति होती है । जहां गुरूकृपा, वहां ये स्वयं आ जाती है ।*
*तुम्हरी कृपा में सुख घनेरे । उनकी कृपा में सुख ही सुख है ।*
🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~*
🕉️जुलाई पंचक 2025 तिथि
पंचक आरंभ: जुलाई 13, 2025, रविवार को शाम 06:53 बजे
पंचक अंत: जुलाई 18, 2025, शुक्रवार को तड़के सुबह 03:39 बजे
शिव-पूजन ज्ञान :- श्रावण मास विशेष
सावन का पवित्र महीना भगवान भोलेनाथ की पूजा-आराधना के लिए उत्तम समय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव पृथ्वी पर ही रहते हैं। शिव भक्तों के लिए सावन का पहला सोमवार बेहद खास होता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने और शिवजी की विधिवत पूजा करने से साधक की सभी इच्छाओं की पूर्ति होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
पूजा-विधि:
सुबह जल्दी उठ जाएं और स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ वस्त्र धारण करें।
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
सभी देवी- देवताओं का गंगा जल से अभिषेक करें।
शिवलिंग में गंगा जल और दूध चढ़ाएं।
भगवान शिव को पुष्प अर्पित करें।
भगवान शिव को बेल पत्र अर्पित करें।
भगवान शिव की आरती करे
भगवान शिव की आरती करें और भोग भी लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।”
“पूजन सामग्री की लिस्ट- पुष्प, पंच फल पंच मेवा, रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें,तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री आदि।”
“मंत्र-
शिव मंत्र: ॐ नमः शिवाय ॥
I
महामृत्युंजय मंत्र : ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
शिव गायत्री मंत्र : ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥”
आरती-
ॐ जय शिव ओंकारा
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव…
एकानन चतुरानन पंचानन राजे,
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव…
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे,
त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव…
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी,
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव…
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव…
कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता,
जगकर्ता जगभर्ता जग संहारकर्ता॥ ॐ जय शिव…
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका,
प्रणवाक्षर में शोभित यह त्रिवेद का टीका॥ ॐ जय शिव…
शिव ओंकारा शिव ओंकारा हर ऊंकारा,
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव…
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव.
दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र
विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय
कर्णामृताय शशिशेखर धारणाय
कर्पूरकांति धवलाय जटाधराय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय…
गौरी प्रियाय रजनीशकलाधराय
कालान्तकाय भुजगाधिप कंकणाय
गंगाधराय गजराज विमर्दनाय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय…
भक्तिप्रियाय भवरोग भयापहाय
उग्राय दुर्गभवसागर तारणाय
ज्योतिर्मयाय गुणनाम सुनृत्यकाय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय…
चर्माम्बराय शवभस्म विलेपनाय
भालेक्षणाय मणिकुंडल मण्डिताय
मंजीर पादयुगलाय जटाधराय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय…
पंचाननाय फनिराज विभूषणाय
हेमांशुकाय भुवनत्रय मण्डिताय
आनंदभूमिवरदाय तमोमयाय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय…
भानुप्रियाय भवसागर तारणाय
कालान्तकाय कमलासन पूजिताय
नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय…
रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय
नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय
पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरर्चिताय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय…
मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय
गीतप्रियाय वृषभेश्वर वाहनाय
मातंग चर्मवसनाय महेश्वराय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय…
“भगवान शिव के 108 नाम
ॐ महाकाल नमः
ॐ रुद्रनाथ नमः
ॐ भीमशंकर नमः
ॐ नटराज नमः
ॐ प्रलेयन्कार नमः
ॐ चंद्रमोली नमः
ॐ डमरूधारी नमः
ॐ चंद्रधारी नमः
ॐ भोलेनाथ नमः
ॐ कैलाश पति नमः”
: “ॐ भूतनाथ नमः
ॐ नंदराज नमः
ॐ नन्दी की सवारी नमः
ॐ ज्योतिलिंग नमः
ॐ मलिकार्जुन नमः
ॐ भीमेश्वर नमः
ॐ विषधारी नमः
ॐ बम भोले नमः
ॐ विश्वनाथ नमः
ॐ अनादिदेव नमः”
“ॐ उमापति नमः
ॐ गोरापति नमः
ॐ गणपिता नमः
ॐ ओंकार स्वामी नमः
ॐ ओंकारेश्वर नमः
ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः
ॐ भोले बाबा नमः
ॐ शिवजी नमः
ॐ शम्भु नमः
ॐ नीलकंठ नमः”
“ॐ महाकालेश्वर नमः
ॐ त्रिपुरारी नमः
ॐ त्रिलोकनाथ नमः
ॐ त्रिनेत्रधारी नमः
ॐ बर्फानी बाबा नमः
ॐ लंकेश्वर नमः
ॐ अमरनाथ नमः
ॐ केदारनाथ नमः
ॐ मंगलेश्वर नमः
ॐ अर्धनारीश्वर नमः”
“ॐ नागार्जुन नमः
ॐ जटाधारी नमः
ॐ नीलेश्वर नमः
ॐ जगतपिता नमः
ॐ मृत्युन्जन नमः
ॐ नागधारी नमः
ॐ रामेश्वर नमः
ॐ गलसर्पमाला नमः
ॐ दीनानाथ नमः
ॐ सोमनाथ नमः” “ॐ जोगी नमः
ॐ भंडारी बाबा नमः
ॐ बमलेहरी नमः
ॐ गोरीशंकर नमः
ॐ शिवाकांत नमः
ॐ महेश्वराए नमः
ॐ महेश नमः
ॐ संकटहारी नमः
ॐ महेश्वर नमः
ॐ रुंडमालाधारी नमः”
“ॐ जगपालनकर्ता नमः
ॐ पशुपति नमः
ॐ संगमेश्वर नमः
ॐ दक्षेश्वर नमः
ॐ घ्रेनश्वर नमः
ॐ मणिमहेश नमः
ॐ अनादी नमः
ॐ अमर नमः
ॐ आशुतोष महाराज नमः
ॐ विलवकेश्वर नमः”
“ॐ अचलेश्वर नमः
ॐ ओलोकानाथ नमः
ॐ आदिनाथ नमः
ॐ देवदेवेश्वर नमः
ॐ प्राणनाथ नमः
ॐ शिवम् नमः
ॐ महादानी नमः
ॐ शिवदानी नमः
ॐ अभयंकर नमः
ॐ पातालेश्वर नमः
“ॐ धूधेश्वर नमः
ॐ सर्पधारी नमः
ॐ त्रिलोकिनरेश नमः
ॐ हठ योगी नमः
ॐ विश्लेश्वर नमः
ॐ नागाधिराज नमः
ॐ सर्वेश्वर नमः
ॐ उमाकांत नमः
ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः
ॐ त्रिकालदर्शी नमः”
: “ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः
ॐ महादेव नमः
ॐ गढ़शंकर नमः
ॐ मुक्तेश्वर नमः
ॐ नटेषर नमः
ॐ गिरजापति नमः
ॐ भद्रेश्वर नमः
ॐ त्रिपुनाशक नमः
ॐ निर्जेश्वर नमः
ॐ किरातेश्वर नमः”
“ॐ जागेश्वर नमः
ॐ अबधूतपति नमः
ॐ भीलपति नमः
ॐ जितनाथ नमः
ॐ वृषेश्वर नमः
ॐ भूतेश्वर नमः
ॐ बैजूनाथ नमः
ॐ नागेश्वर नमः” सावन मास मे नित्य पठन करे
सावन के सभी सोमवारों की तिथि
पहला सावन सोमवार- 14 जुलाई, सोमवार
दूसरा सावन सोमवार- 21 जुलाई
तीसरा सावन सोमवार- 28 जुलाई”
“चौथा सावन सोमवार- 4 अगस्त
शिव जी के भक्तों के लिए सावन सोमवार के व्रतों की बहुत ज्यादा महत्वता है. इस सभी लोग माता पार्वती और भगवान शिव के लिए व्रत रखते हैं. इस दिन लोग पूजा के साथ साथ शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं, दूध, बेलपत्र और गंगाजल भी अर्पित करते हैं.
सावन शुभ योग
सावन की शुरुआत में इस बार कई सारे ग्रहों की चा बदलने जा रही है सूर्य, मंगल व शुक्र राशि परिवर्तन करेंगे. साथ ही, बुध और शनि वक्री चाल चलेंगे. इनके अलावा, कई शुभ योग शिव योग, प्रीति योग और आयुष्मान योग भी बनने जा जा रहे हैं.
सावन पूजन विधि
सावन के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्नान करके शिवजी के मंदिर जरूर जाएं. अगर आप घर के मंदिर में छोटे से शिवलिंग रखते हैं तो आप वहां भी पूजन कर सकते हैं. साथ ही शिवलिंग का जल और कच्चे दूध से अभिषेक अवश्य करना चाहिए. इनके अलावा आप चाहें तो दही, घी, शहद और गन्ने के रस से भी भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं. भगवान शिव का विशेष अभिषेक आप चाहे तो प्रतिदिन कर सकते हैं और नहीं तो सोमवार के दिन अवश्य करें. इससे भगवान शिव की विशेष कृपा आपको प्राप्त होगी और भगवान शिव के मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए जैसे नमः शिवाय, ऊं नमः शिवाय.”
: “चार सोमवारी व्रत होंगे
इस सावन में चार सोमवारी व्रत होगा। पहला सोमवारी व्रत 14 जुलाई को है। दूसरा 21, तीसरा 28 जुलाई और चौथा सोमवारी व्रत 4 अगस्त को है।”
सावन माह 2025 के व्रत-त्योहार
11 जुलाई- सावन माह प्रारंभ
12 जुलाई- जया पार्वती व्रत
14 जुलाई- सावन का पहला सोमवार व्रत, संकष्टी चतुर्थी
16 जुलाई- कर्क संक्रांति
17 जुलाई- कालाष्टमी
21 जुलाई- सावन का दूसरा सोमवार, कामिका एकादशी
22 जुलाई- भौम प्रदोष व्रत
23 जुलाई- सावन शिवरात्रि
24 जुलाई- हरियाली अमावस्या
27 जुलाई- हरियाली तीज
28 जुलाई- सावन का तीसरा सोमवार
29 जुलाई- नाग पंचमी
31 जुलाई- तुलसीदाज जयंती
04 अगस्त- सावन का चौथा सोमवार
05 अगस्त- श्रावण पुत्रदा एकादशी
06 अगस्त- प्रदोष व्रत
08 अगस्त- वरलक्ष्मी व्रत
09 अगस्त- रक्षाबंधन।
सोमवार व्रत क्यों/कैसे करें
भगवान शिव श्रावण के सोमवार के बारे में कहते हैं-
“मत्स्वरूपो यतो वारस्ततः सोम इति स्मृतः। प्रदाता सर्वराज्यस्य श्रेष्ठश्चैव ततो हि सः। समस्तराज्यफलदो वृतकर्तुर्यतो हि सः।।”
अर्थात सोमवार मेरा ही स्वरूप है, अतः इसे सोम कहा गया है। इसीलिये यह समस्त राज्य का प्रदाता तथा श्रेष्ठ है। व्रत करने वाले को यह सम्पूर्ण राज्य का फल देने वाला है। भगवान शिव यह भी आदेश देते हैं कि श्रावण में
“सोमे मत्पूजा नक्तभोजनं”
अर्थात सोमवार को मेरी पूजा और नक्तभोजन करना चाहिए। पूर्वकाल में सर्वप्रथम श्रीकृष्ण ने ही इस मंगलकारी सोमवार व्रत को किया था।
“कृष्णे नाचरितं पूर्वं सोमवारव्रतं शुभम्”
स्कंदपुराण के अनुसार सूत जी कहते हैं-
स्कंदपुराण के अनुसार सूत जी कहते हैं-
शिवपूजा सदा लोके हेतुः स्वर्गापवर्गयोः ।।
सोमवारे विशेषेण प्रदोषादिगुणान्विते ।।
केवलेनापि ये कुर्युः सोमवारे शिवार्चनम् ।।
न तेषां विद्यते किंचिदिहामुत्र च दुर्लभम् ।।
उपोषितः शुचिर्भूत्वा सोमवारे जितेंद्रियः ।। वैदिकैर्लौकिकैर्वापि विधिवत्पूजयेच्छिवम् ।।
ब्रह्मचारी गृहस्थो वा कन्या वापि सभर्त्तृका।।
विभर्तृका वा संपूज्य लभते वरमीप्सितम्।।
प्रदोष आदि गुणों से युक्त सोमवार के दिन शिव पूजा का विशेष महात्म्य है। जो केवल सोमवार को भी भगवान शंकर की पूजा करते हैं, उनके लिए इहलोक और परलोक में कोई भी वस्तु दुर्लभ नहीं। सोमवार को उपवास करके पवित्र हो इंद्रियों को वश में रखते हुए वैदिक अथवा लौकिक मंत्रों से विधिपूर्वक भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। ब्रह्मचारी, गृहस्थ, कन्या, सुहागिन स्त्री अथवा विधवा कोई भी क्यों न हो, भगवान शिव की पूजा करके मनोवांछित वर पाता है।
शिवपुराण, कोटि रुद्रसंहिता के अनुसार-
निशि यत्नेन कर्तव्यं भोजनं सोमवासरे ।
उभयोः पक्षयोर्विष्णो सर्वस्मिञ्छिव तत्परैः ।।
दोनों पक्षों में प्रत्येक सोमवार को प्रयत्नपूर्वक केवल रात में ही भोजन करना चाहिए। शिव के व्रत में तत्पर रहने वाले लोगों के लिए यह अनिवार्य नियम है।
अष्टमी सोमवारे च कृष्णपक्षे चतुर्दशी।।
शिवतुष्टिकरं चैतन्नात्र कार्या विचारणा।।
सोमवार की अष्टमी तथा कृष्णपक्ष चतुर्दशी इन दो तिथियों को व्रत रखा जाए तो वह भगवान शिव को संतुष्ट करने वाला होता है, इसमें अन्यथा विचार करने की आवश्यकता नहीं है।
“सोमवारे प्रधानः स्यात्सायंकालः प्रकीर्तितः”
स्कन्दपुराण के अनुसार मुख्य रूप से सोमवार को सांयकाल में पूजा की जानी चाहिए। सोमवार को चंद्र उदय के समय की गई महादेव की पूजा बहुत ही शुभ और कल्याणकारी है।
।। ॐ नमः शिवाय ।।
सावन मास में भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से की जाती है, और बेलपत्र को शिवजी पर अर्पित करना अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। लेकिन बेलपत्र चढ़ाने की भी कुछ धार्मिक और शास्त्रीय नियम पुराणों और धर्म शास्त्रों में बताए गए हैं। अगर बेलपत्र शुद्ध न हो, तो पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता। शास्त्रों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि भगवान शिव को अर्पित करने के लिए बेलपत्र विशेष गुणों से युक्त होना चाहिए। यदि बेलपत्र अशुद्ध, मुरझाया हो तो वह पूजन में निष्फल हो सकता है। ऐसे में आपका व्रत भी फल नहीं देगा और आपकी पूजा व्यर्थ चली जाएगी। तो आइए जानते हैं सावन में शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए कैसे होने चाहिए बेलपत्र। सावन में शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये चीजें, लगेगा भारी दोष”
तीन पत्तियों वाला बेलपत्र होना चाहिए
भगवान शिव को चढ़ाने के लिए बेलपत्र हमेशा त्रिदल होना चाहिए, अर्थात उसकी एक डंडी में तीन पत्तियां जुड़ी हों। यह त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक होता है, साथ ही शिव के त्रिनेत्र और त्रिशूल को भी दर्शाता है। एक या दो पत्ती वाले बेलपत्र को पूजन में मान्य नहीं माना गया है। त्रिदल बेलपत्र शिवभक्ति की पूर्णता का संकेत होता है और इसे अर्पण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।”
“बेलपत्र ताजा, हरा और स्वच्छ होना चाहिए
शिव को अर्पित किया जाने वाला बेलपत्र पूरी तरह से ताजा, हरा और साफ-सुथरा होना चाहिए। पीला, सूखा, मुरझाया हुआ या कीड़े-मकोड़ों से क्षतिग्रस्त बेलपत्र अर्पित नहीं करना चाहिए। बेलपत्र जितना हरा और ताजा होगा, उतना ही वह शिव को प्रिय होता है। गिरे हुए या गंदे पत्तों का उपयोग करने से पूजा का प्रभाव कम हो जाता है।”
बेलपत्र का मध्य भाग फटा हुआ न हो
बेलपत्र का बीच का भाग यदि फटा हुआ हो, तो उसे शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में ऐसा बेलपत्र अपवित्र माना गया है। मध्य से कटा या फटा बेलपत्र शिव की पूजा में निषिद्ध है क्योंकि यह अशुद्धता का प्रतीक माना जाता है। केवल संपूर्ण, अखंड और सुंदर त्रिदली बेलपत्र ही अर्पण के योग्य होता”
“बेलपत्र अर्पण करते समय उसकी दिशा सही हो
बेलपत्र चढ़ाते समय उसकी चिकनी सतह ऊपर की ओर रहनी चाहिए और डंडी की ओर आपकी तरफ होनी चाहिए। यह परंपरागत नियम है, जो धार्मिक दृष्टिकोण से पूजन की पूर्णता को दर्शाता है। उल्टे या गलत दिशा में अर्पण किया गया बेलपत्र पूजा के फल को कम करता है।”
“पहले चढ़ाया गया बेलपत्र पुनः चढ़ाया जा सकता है
भगवान शिव की एक विशेषता यह है कि वे पुनः अर्पण किए गए बेलपत्र को भी स्वीकार करते हैं। यदि कोई बेलपत्र पहले चढ़ाया गया हो और वह अभी भी साफ, त्रिदली और अखंड अवस्था में है, तो उसे धोकर पुनः चढ़ाया जा सकता है। यह शिव की उदारता का प्रतीक है और यह दर्शाता है कि वे भक्ति और भावना को अधिक महत्व देते हैं।”
द्वादश ज्योतिर्लिंग मंत्र का जाप प्रातः और संध्या काल में करने से सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। यह मंत्र भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का स्मरण कराता है।
द्वादश ज्योतिर्लिंग मंत्र इस प्रकार है:
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं ममलेश्वरम् ॥1॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥2॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये ॥3॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥4॥
यह मंत्र 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम और स्थान का वर्णन करता है, जिन्हें क्रमशः इस प्रकार हैं:
सोमनाथ: गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित है।
मल्लिकार्जुन: श्रीशैल पर स्थित है।
महाकाल: उज्जयिन (मध्य प्रदेश) में स्थित है।
ओंकारेश्वर: ममलेश्वर के रूप में भी जाना जाता है, ओंकारेश्वर में स्थित है।
वैद्यनाथ: परली में स्थित है।
भीमशंकर: डाकिनी नामक स्थान में स्थित है।
रामेश्वर: सेतुबंध पर स्थित है।
नागेश्वर: दारुकावन में स्थित है।
विश्वनाथ: वाराणसी (काशी) में स्थित है।
त्र्यंबकेश्वर: गौतमी (गोदावरी) के तट पर स्थित है।
केदारनाथ: हिमालय में स्थित है।
घृष्णेश्वर: शिवालय में स्थित है।
जो मनुष्य प्रतिदिन, प्रातःकाल और संध्या समय,इन बारह ज्योतिर्लिंगों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों के पाप इन लिंगों के स्मरण-मात्र से मिट जाते हैं,
महामृत्युंजय मंत्र का पूरा रूप इस प्रकार है: “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।”
यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और इसे “मृत संजीवनी मंत्र” भी कहा जाता है।
मंत्र का अर्थ:
हम त्र्यम्बक (तीन नेत्रों वाले) भगवान की पूजा करते हैं।
जो सुगंधित हैं और पोषण करने वाले हैं।
जैसे फल अपनी डाली से अलग हो जाता है, वैसे ही हमें भी मृत्यु और पुनर्जन्म के बंधन से मुक्ति मिले।
“श्री नवनाग स्तोत्र (काल सर्प दोष प्रभावित हेतु )
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलं
शन्खपालं ध्रूतराष्ट्रं च तक्षकं कालियं तथा
एतानि नव नामानि नागानाम च महात्मनं
सायमकाले पठेन्नीत्यं प्रातक्काले विशेषतः
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत
ll इति श्री नवनागस्त्रोत्रं सम्पूर्णं ll
नाग गायत्री मंत्र
ॐ नव कुलाय विध्महे विषदन्ताय धी माहि तन्नो सर्प प्रचोदयात ll”
🙏🏻🌷🌻☘🌸🌹🌼🌺💐🌷🙏🏻
जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनायें बधाई ओर शुभ आशीष
दिनांक 17 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 8 होगा। आप अपने जीवन में जो कुछ भी करते हैं उसका एक मतलब होता है। आपके मन की थाह पाना मुश्किल है। आपको सफलता अत्यंत संघर्ष के बाद हासिल होती है। कई बार आपके कार्यों का श्रेय दूसरे ले जाते हैं। यह ग्रह सूर्यपुत्र शनि से संचालित होता है। इस दिन जन्मे व्यक्ति धीर गंभीर, परोपकारी, कर्मठ होते हैं। आपकी वाणी कठोर तथा स्वर उग्र है। आप भौतिकतावादी है। आप अदभुत शक्तियों के मालिक हैं।
शुभ दिनांक : 8, 17, 26
शुभ अंक : 8, 17, 26, 35, 44
शुभ वर्ष : 2042
ईष्टदेव : हनुमानजी, शनि देवता
शुभ रंग : काला, गहरा नीला, जामुनी
जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :
शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे, स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अनुकूल ही रहेगा। सभी कार्यों में सफलता मिलेगी। जो अभी तक बाधित रहे है वे भी सफल होंगे। व्यापार-व्यवसाय की स्थिति उत्तम रहेगी। राजनैतिक व्यक्ति भी समय का सदुपयोग कर लाभान्वित होंगे। नौकरीपेशा व्यक्ति प्रगति पाएंगे। बेरोजगार प्रयास करें, तो रोजगार पाने में सफल होंगे।
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आपका दिन ठीक-ठाक रहेगा। आप किसी गलत फहमी से बचें। छुपी हुई कुछ बातें आपके सामने आ सकती हैं। आपको थोड़ी थकान महसूस होगी। घर पर समय का सदुपयोग करने की आवश्यकता रहेगी। दिन की अपेक्षा शाम का समय आपके लिये और भी बेहतर व बीजी रह सकता है। आप किसी सामाजिक आयोजन , कार्यक्रम आदि में जा सकते हैं। धार्मिक विचार अग्रसर होंगे। कारोबार में बढ़ोतरी होगी। स्वास्थ्य सुधार होगा।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी ,वु , वे, वो)
आज आपको शिक्षा के क्षेत्र में आपको उन्नति मिल सकती है। किसी दूसरे का उत्साह देखकर आप उत्साहित हो सकते हैं। माता-पिता के साथ संबंध मजबूत होंगे। कोई बड़ा ऑफर मिलने से धन लाभ होने की उम्मीद है। आपका दाम्पत्य जीवन खुशियों से भरा रहेगा। शिक्षा के क्षेत्र में आपको कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। छात्रों का ध्यान पढ़ाई में लगेगा।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आपका दिन अच्छा रहेगा। आपके मन में नए-नए विचार आ सकते हैं। माता-पिता अपने बच्चों को नए ड्रेस आदि खरीदवा सकते हैं। अगर आप संगीत के क्षेत्र से जुड़े हैं, तो आपको तरक्की के कई नये रास्ते नजर आ सकते हैं। परिवार में आपके गुणों की प्रशंसा होगी, जिससे आपका मन खुश रहेगा। आप अपनी कोई बात दोस्तों से शेयर कर सकते हैं। आपको आगे बढ़ने के लिए नई योजनाएं बनानी पड़ सकती हैं। स्वास्थ्य लाभ होगा।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आपका दिन उत्तम रहेगा। किसी मित्र की मदद से आपके काम बनेंगे। अपने कॉन्फिडेंस के दम पर आप लगभग हर काम में सफल होंगे। कला या किसी रचनात्मक काम में आपका रूझान बढ़ेगा। आप अपनी सभी समस्याओं का हल आराम से ढूंढ निकालेंगे। साथ ही आपके कार्य जरूर सफल होंगे। आप कुछ समय मनोरंजन में भी बितायेंगे। आपका दाम्पत्य संबंध मधुरता से भरपूर रहेगा। कोई करीबी आपकी खुशियों को दोगुना कर देगा। भाग्य आपको कुछ अच्छे मौके देगा। धैर्य पूर्वक की गई बातचीत आपके पक्ष में होगी।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आपका दिन बेहतरीन रहेगा। आपको अचानक धन लाभ होगा। ऑफ़िस में किसी बड़े अधिकारी का सहयोग मिलेगा। व्यापारियों को आय के नए स्रोत मिलेंगे। कोई काम मन-मुताबिक पूरा होने से आप प्रसन्न रहेंगे। साथ ही आप सेहतमंद भी रहेंगे। आप जीवनसाथी के सहयोग से किसी नये काम की शुरुआत के बारे में सोच सकते हैं। आपके सोचे हुए सारे काम जल्द ही पूरे होंगे। लव पार्टनर आपका सम्मान करेंगे। जीवनसाथी से संबंधों में मधुरता का रस घुलेगा। आपके मन में सकारात्मकता रहेगी। इससे आपको फायदा होगा।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आपके लिए आज का दिन मिला जुला रहेगा । ऑफिस में अपने काम की प्रशंसा के लिये आपको थोड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। व्यापारी वर्ग को धन लाभ के मौके मिल सकते हैं। आपको अपने स्वास्थ्य का खास तौर पर ध्यान रखना होगा। आपका कोई काम कुछ समय के लिए अटक सकता है। जिम्मेदारियों के बोझ से आपका मूड खराब न होने दें। आर्थिक स्थिति मजबूत होंगी।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आपका दिन काफी अच्छा रहेगा। आपका आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा। पारिवारिक काम को पूरा करने में सफल हो सकते हैं। दोस्तों का किसी जरूरी काम में सपोर्ट मिल सकता है। आप आसपास के लोगों से सहानुभूति बनाये रखेंगे। सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के लिए दिन खास रहने वाला है। कुछ लोग आपके लिए खास साबित हो सकते हैं। आपकी सभी समस्याएं दूर होगी। कार्यों में परिवार का सहयोग प्राप्त होता रहेगा।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आपका दिन मनोनुकूल रहेगा। किसी जरूरी काम में परिवार का पूरा-पूरा सहयोग मिलेगा। आपको कोई अच्छी खबर मिलेगी। आप रोजगार के मामले में किसी से सलाह ले सकते हैं, जो कि आपके लिये फायदेमंद रहेगी। बिजनेसमैन को भी काम में बेहतर अपॉर्चुनिटिज़ मिलेगी। आप कुछ ऐसे लोगों के साथ जुड़ेंगे, जो आपकी हर तरह से मदद के लिये तैयार रहेंगे। किसी व्यक्ति से बड़े प्रोजेक्ट के बारे में बात हो सकती है। नए विचार आपके मन में आयेंगे।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आपका दिन मिला-जुला रहेगा। कामकाज निपटाने के लिए आपको कुछ नए तरीके मिल सकते हैं। दोस्तों के साथ संबंधों में सुधार आ सकता है। आपका भौतिक सुख-सुविधाओं की तरफ रूझान बढ़ सकता है। आपके मन में कोई बात दबी हुई हो सकती है। तली-भुनी चीजों को खाने से आपको बचना चाहिए। भविष्य को लेकर आपको कोई आशंका हो सकती है। आप किसी तरह की राजनीति में घर या कार्यालय पर उलझने से बचें। ऑफिस में काम की अधिकता से थकान हो सकती है।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आप परिवार के साथ किसी काम में व्यस्त रह सकते हैं। ऑफिस में आपको कोई बड़ा काम निपटाने की जिम्मेदारी मिल सकती है। आपको अपने गुस्से पर कंट्रोल करना चाहिए। कोई बना बनाया काम बिगड़ भी सकता है। किसी कामकाज में आपको ज्यादा टाइम लग सकता है। आपको अपनी मन की बात कहने में सावधानी रखने की जरूरत है। साथ ही कामकाज की व्यस्तता में आपको खाना-पीना बिल्कुल नहीं भूलना चाहिए। इससे आपकी सेहत पर असर पड़ सकता है। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आपका दिन पहले की अपेक्षा अच्छा रहेगा। किसी जरूरी कामकाज को निपटाने में सफल हो सकते हैं। दिन किसी खास कामों के लिए बेहतर है। आप अपने आसपास के लोगों के साथ उदार रह सकते हैं। केमिस्ट्री स्टूडेंट्स के लिए दिन मिला-जुला रहने वाला है। मेहनत के बल पर आपको सफलता मिलेगी। इस राशि के जो लोग अविवाहित हैं उनको विवाह का प्रस्ताव भी मिलेगा।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आपका दिन शानदार रहेगा। आपकी कला के क्षेत्र में रूचि बढ़ेगी। परिवार में खुशियों का माहौल बना रहेगा। पैसे मिलने की संभावना बढ़ेगी। किसी जरूरी काम में थोड़ी मेहनत करने से ही सफलता मिल जायेगी। प्रेमीजनों के लिए दिन अनुकूल रहने वाला है। रिश्तों में नयापन आएगा। वेब डिजाईनर्स के लिए दिन उत्तम रहने वाला है। बच्चे पढ़ाई के मामले में अपने दोस्तों से कोई अच्छी प्रेरणा लेंगे। किसी प्रयोजन की हल्की चिंता रहेगी। पारिवारिक रिश्ते मजबूत होंगे।

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