Vaidik Panchang 14122025 Rashifal Samadhan

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️  *दिनांक – 14 दिसम्बर 2025*
🌤️ *दिन – रविवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – हेमंत ॠतु*
🌤️ *मास – पौष (गुजरात-महाराष्ट्र)मार्गशीर्ष*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – दशमी शाम 06:49 तक तत्पश्चात एकादशी*
🌤️ *नक्षत्र – हस्त सुबह 08:18 तक तत्पश्चात चित्रा*
🌤️ *योग – सौभाग्य सुबह 11:45 तक तत्पश्चात शोभन*
🌤️ *राहुकाल – शाम 04:38 से शाम 05:59 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 07:09*
🌤️ *सूर्यास्त –  05:57*
👉 *दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे*
चंदन लगाने का तरीका
1. स्नान करें — हमेशा नहाकर ही चंदन लगाएँ।
2. शुद्धता — हाथ साफ रखें और चंदन हाथ पर हल्का रगड़कर गुनें।
3. पहले देवता, फिर स्वयं — पहले अपनी इष्टदेवता को अनामिका (रिंग फिंगर) से तिलक करें; उसके बाद वही उंगली से खुद पर तिलक/टीका लगाएँ (माथा, कंठ, नाभि)।
4. प्रमाणित रखें — यदि पूजा के नियम विशेष हों (मंत्र/ठाकुर का निर्देश), तो उसी अनुसार लगाएँ।
5. तिलक के बाद — तिलक लगाकर सोना वर्जित है; भारी शारीरिक श्रम से पहले व जरूरत हो तो पुनः स्नान कर लें।
4) सावधानियाँ
बिना स्नान के तिलक न लगाएँ।
त्वचा संवेदनशीलता: कहीं लालिमा/खुजली हो तो चंदन लगाकर देखने से पहले पैच टेस्ट करें।
विवाहित महिलाएँ: पारंपरिक रीति के अनुसार कुछ समुदायों में सफेद चंदन से परहेज होता है — वे लाल चंदन या पारंपरिक बिंदी/सिंदूर का उपयोग कर सकती हैं। (स्थानीय परंपरा देखें)।
त्वचा पर घिसने/रगड़ने से बचें—चंदन बहुत सूखा होता है; जरूरत हो तो गुलाबजल/ठंडा पानी हल्का स्पर्श कर लें।
खाली आँखों/मुंह/घाव पर न लगाएँ।
5) आध्यात्मिक व स्वास्थ्य संबंधी लाभ (सार)
मानसिक शांति और ध्यान में सहायता।
नकारात्मक ऊर्जा/नजर दोष से पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार सुरक्षा।
त्वचा सम्बन्धी छोटे-मोटे फायदे
पूजा-पाठ में पवित्रता और ग्रह-प्रभावों को संतुलित करने का प्रतीकात्मक लाभ।
6) स्टोरेज और गुणवत्ता
शुद्धता देखें: केमिकल-फ्री और प्राकृतिक चंदन चुनें; नकली रंग/केमिकल मिलावट पर ध्यान दें।
संग्रह: ठंडी, सूखी और हवादार जगह में रखें; प्लास्टिक में लंबे समय तक न रखें।
बनावट: कच्चा पेस्ट, टिकिया या सूखा चूरा—जिस रूप में आरामदायक हो उसी का प्रयोग करें।
7) छोटे-छोटे उपयोगी सुझाव
यात्रा पर छोटे पॉट में चंदन रख कर ले जाएँ — पूजा-समय पर उपयोगी है।
यदि चेहरे पर लगाने के लिए चाहें, तो गुलाबजल मिलाकर हल्का पेस्ट बनाकर उपयोग करें — सुखद ठंडक मिलती है।
पूजा के बाद अगर आप बाहर जा रहे हैं तो तिलक हल्का रखें या नग्न रखें ताकि सूखा दिखने पर हटाया जा सके।
8)
चंदन दिन/देवता मुख्य लाभ
सफेद सोमवार/विष्णु/शिव शीतलता, ध्यान, तनाव-निवारण
लाल मंगलवार/देवी/हनुमान/लक्ष्मी ऊर्जा, साहस, त्वचा की जलन में राहत
पीला (गोपी) श्रीकृष्ण/भक्ति भक्ति, प्रेम, सात्त्विकता
             🌞~*वैदिक पंचांग*
🌷 *एकादशी व्रत के लाभ* 🌷
➡️ *14 दिसम्बर 2025 रविवार को शाम 06:49 से 15 दिसम्बर, सोमवार को रात्रि 09:19 तक एकादशी है।*
💥 *विशेष – 15 दिसम्बर, सोमवार को एकादशी का व्रत उपवास रखें ।*
🙏🏻 *एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।*
🙏🏻 *जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
🙏🏻 *जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
🙏🏻 *एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
🙏🏻 *धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।*
🙏🏻 *कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।*
🙏🏻 *परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है ।पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ ।भगवान शिवजी  ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।*
          🌞 *~ वैदिक  पंचांग ~* 🌞

*सफला एकादशी : सुख और मोक्ष प्रदान करनेवाला व्रत !!*

युधिष्ठिर ने पूछा : “स्वामिन् ! पौष मास के कृष्णपक्ष में जो एकादशी होती है, उसका क्या नाम है ? उसकी क्या विधि है तथा उसमें किस देवता की पूजा की जाती है ? यह बताइये।”
भगवान श्रीकृष्ण ने कहा राजेन्द्र ! बड़ी-बड़ी दक्षिणावाले यज्ञों से भी मुझे उतना संतोष नहीं होता, जितना एकादशी व्रत के अनुष्ठान से होता है। पौष मास के कृष्णपक्ष में ‘सफला’ नाम की एकादशी होती है। उस दिन विधिपूर्वक भगवान नारायण की पूजा करनी चाहिए। जैसे नागों में शेषनाग, पक्षियों में गरुड़ तथा देवताओं में श्रीविष्णु श्रेष्ठ हैं, उसी प्रकार सम्पूर्ण व्रतों में एकादशी तिथि श्रेष्ठ है।
राजन् ! ‘सफला एकादशी’ को नाम-मंत्रों का उच्चारण करके नारियल के फल, सुपारी, बिजौरा तथा जमीरा नींबू, अनार, सुन्दर आँवला, लौंग, बेर तथा विशेषतः आम के फलों और धूप-दीप से श्रीहरि का पूजन करे। ‘सफला एकादशी’ को विशेष रूप से दीप दान करने का विधान है। रात को वैष्णव पुरुषों के साथ जागरण करना चाहिए। जागरण करनेवाले को जिस फल की प्राप्ति होती है, वह हजारों वर्ष तपस्या करने से भी नहीं मिलता।
नृपश्रेष्ठ ! अब ‘सफला एकादशी’ की शुभकारिणी कथा सुनो । चम्पावती नाम से विख्यात एक पुरी है, जो कभी राजा माहिष्मत की राजधानी थी। राजर्षि माहिष्मत के पाँच पुत्र थे। उनमें जो ज्येष्ठ था, वह सदा पापकर्म में ही लगा रहता था। परस्त्रीगामी और वेश्यासक्त था। उसने पिता के धन को पापकर्म में ही खर्च किया। वह सदा दुराचारपरायण तथा वैष्णवों और देवताओं की निन्दा किया करता था। अपने पुत्र को ऐसा पापाचारी देखकर राजा माहिष्मत ने राजकुमारों में उसका नाम लुम्भक रख दिया।
वह पापी सदा परस्त्री और वेश्यागमन तथा दूसरे बुरे कामों में अपने पिता का धन नष्ट किया करता था। सदैव ही देवता, बाह्मण, वैष्णवों की निंदा किया करता था। जब राजा को अपने बड़े पुत्र के ऐसे कुकर्मों का पता चला तो उन्होंने उसे अपने राज्य से निकाल दिया। तब वह विचारने लगा कि कहाँ जाऊँ ? क्या करूँ ?
अंत में उसने चोरी करने का निश्चय किया। दिन में वह वन में रहता और रात्रि को अपने पिता की नगरी में चोरी करता तथा प्रजा को तंग करने और उन्हें मारने का कुकर्म करता। कुछ समय पश्चात सारी नगरी भयभीत हो गई। वह वन में रहकर पशु आदि को मारकर खाने लगा। नागरिक और राज्य के कर्मचारी उसे पकड़ लेते किंतु राजा के भय से छोड़ देते।
वन के एक अतिप्राचीन विशाल पीपल का वृक्ष था। लोग उसकी भगवान के समान पूजा करते थे। उसी वृक्ष के नीचे वह महापापी लुम्पक रहा करता था। इस वन को लोग देवताओं की क्रीड़ास्थली मानते थे। कुछ समय पश्चात पौष कृष्ण पक्ष की दशमी के दिन वह वस्त्रहीन होने के कारण शीत के चलते सारी रात्रि सो नहीं सका। उसके हाथ-पैर अकड़ गए।
सूर्योदय होते-होते वह मूर्छित हो गया। दूसरे दिन एकादशी को मध्याह्न के समय सूर्य की गर्मी पाकर उसकी मूर्छा दूर हुई। गिरता-पड़ता वह भोजन की तलाश में निकला। पशुओं को मारने में वह समर्थ नहीं था अत: पेड़ों के नीचे गिर हुए फल उठाकर वापस उसी पीपल वृक्ष के नीचे आ गया। उस समय तक भगवान सूर्य अस्त हो चुके थे। वृक्ष के नीचे फल रखकर कहने लगा- हे भगवन! अब आपके ही अर्पण है ये फल। आप ही तृप्त हो जाइए। उस रात्रि को दु:ख के कारण रात्रि को भी नींद नहीं आई।
उसके इस उपवास और जागरण से भगवान अत्यंत प्रसन्न हो गए और उसके सारे पाप नष्ट हो गए। दूसरे दिन प्रात: एक ‍अतिसुंदर घोड़ा अनेक सुंदर वस्तुअओं से सजा हुआ उसके सामने आकर खड़ा हो गया।
उसी समय आकाशवाणी हुई कि हे राजपुत्र! श्रीनारायण की कृपा से तेरे पाप नष्ट हो गए। अब तू अपने पिता के पास जाकर राज्य प्राप्त कर। ऐसी वाणी सुनकर वह अत्यंत प्रसन्न हुआ और दिव्य वस्त्र धारण करके ‘भगवान आपकी जय हो’ कहकर अपने पिता के पास गया। उसके पिता ने प्रसन्न होकर उसे समस्त राज्य का भार सौंप दिया और वन का रास्ता लिया।
अब लुम्पक शास्त्रानुसार राज्य करने लगा। उसके स्त्री, पुत्र आदि सारा कुटुम्ब भगवान नारायण का परम भक्त हो गया। वृद्ध होने पर वह भी अपने पुत्र को राज्य का भार सौंपकर वन में तपस्या करने चला गया और अंत समय में वैकुंठ को प्राप्त हुआ।
अत: जो मनुष्य इस परम पवित्र सफला एकादशी का व्रत करता है उसे अंत में मुक्ति मिलती है।
          🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
श्री बिहारी जी मंदिर में घंटी क्यों नहीं बजाई जाती
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विश्व में केवल बांके बिहारी जी का एक ऐसा मंदिर है जहां *घंटी नहीं है, ना ही बजाई जाती है।* श्री बिहारी जी छोटे से बालक के रूप में दर्शन दे रहे हैं।

मंदिर में ठाकुर जी किस रूप में विराजमान है?

वैसे तो हमारे ठाकुर जी बिरज के महाराजा है पर 7 साल के बालक के रूप में स्वामी श्री हरिदास जी लाड लड़ाया करते थे। श्री बांके बिहारी जी के सामने ताली नहीं बजाई जाती क्यूंकि श्री बांके बिहारी जी की बांके बिहारी लाल स्वरुप में सेवा की जाती है। ताली एवं घण्टी से ठाकुर कई बार चौंक जाते थे इसलिए यह परंपरा बंद कर दी गई।

एक कारण और है ताली बजने का अर्थ है भोग पूरा लग गया है, अब आचमन कर लो पर भक्त बिहारी जी को पेड़े का भोग हर समय लगाते मिलेंगे मंदिर में तो हमारे ठाकुर बिहारी जी खूब खाते हैं।

बिहारी जी नटखट हैं और छोटे से बालक भी हैं इसलिए भक्त के जीवन में बिहारी जी चमत्कार करते रहते हैं। बिहारी जी अपने भक्त को ऐसे देखते हैं जैसे घर पर कोई मेहमान आये तो बच्चा टकटकी लगा कर देखता है, अचानक से नज़र हटाकर दूसरी ओर देखने लगते हैं। ऐसा अनुभव प्रत्येक उस भक्त का होगा जो मंदिर में कहीं भी खड़ा हो ठाकुर उस पर नज़रे लगाये मिलेंगे लेकिन भक्त देखेगा लाड लड़ायेगा तो तुरंत दूसरी ओर देखने लगेंगे।
बड़ा अटपटा ठाकुर है हमारा बांके बिहारी लाल पर प्राणों से प्यारा है..
             🌷जय श्री राधे राधे🌷
                    🌞 *~ वैदिक पंचाग ~* 🌞

*सकाम और निष्काम साधना*
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1. परिभाषाएं :
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सकाम साधना 👉 इस प्रकार की साधना सांसारिक लाभ प्राप्ति की अपेक्षा से की जाती है । उदाहरण के लिए : प्रार्थना करना, प्रसाद अर्पण करना, उपवास अथवा कोई अन्य विधि करना – धनप्राप्ति के लिए नौकरी हेतु खोई वस्तु प्राप्त करने के लिए गर्भाधारण हेतु, बीमारी दूर करना
प्रियजनों की सुरक्षा इत्यादि के उद्देश्य से

निष्काम साधना👉  यह साधना आध्यात्मिक उन्नति के एकमेव उद्देश्य से की जाती है। अतः इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, साधक जीवन की प्रत्येक घटना का अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रयोग करते हैं। यदि उनके जीवन में कठिन परिस्थितियां भी आएं तो अहं निर्मूलन करके वह उस परिस्थिति का उपयोग आध्यात्मिक उन्नति के लिए करते हैं और परिस्थिति के परिणाम को ईश्वरेच्छा मानकर स्वीकार करते हैं।

2. सकाम और निष्काम साधना का तुलनात्मक अभ्यास
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जब हम साधना करते हैं तो कुछ मात्रा में आध्यात्मिक उर्जा उत्पन्न होती है। जब यह आध्यात्मिक ऊर्जा सांसारिक लाभ प्राप्ति के लिए उपयोग की जाती है, जैसे कि सकाम साधना, तो इच्छाओं की पूर्ति होती है, परंतु आध्यात्मिक उन्नति नहीं होती। यह एक टूटे हुए पात्र को भरने जैसा है जहां पात्र कभी भरता नही हैं। जब हम निष्काम साधना करते हैं तो साधना द्वारा प्राप्त आध्यात्मिक ऊर्जा आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रयोग होती है। जब साधक निष्काम साधना करता है तो इससे न केवल उसकी आध्यात्मिक प्रगति होती है अपितु उसकी सांसारिक और भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति भी होती है। सकाम साधना से सांसारिक सुख की प्राप्ति होती है जबकि निष्काम साधना से आनंद की अनुभूति होती है।

परिणाम:👉 ईश्वर का मारक रूप साधक को कष्ट देने वाली शक्तियों का नाश करता है।

सकाम साधना से हम ईश्वर के तारक रूप को जागृत करते हैं । हमारी प्रार्थना अथवा इच्छा का अंतिम परिणाम हमारी साधना और प्रारब्ध की तीव्रता पर निर्भर करता है । निष्काम साधना से हम गुरु तत्व को जागृत करते हैं जो हमारी साधना का पोषण करता है । इसके साथ साथ हम ईश्वर के तारक रूप को भी जागृत करते हैं । यदि निष्काम साधक की साधना में कोई बाधा आती है अथवा कोई उसे कष्ट पहुंचाता है तो ईश्वर का मारक रूप जागृत होकर कष्ट देने वाले का बकाया चुकाता है।

सकाम साधना स्थायित्व प्रदान नहीं करती। उदाहरण के लिए यदि धन के लिए सकाम साधना करने वाले व्यक्ति को अत्याधिक धनप्राप्ति हो जाती है तो उसकी इच्छाएं यहीं समाप्त नही हो जातीं । अब वह अच्छे स्वास्थय, अच्छे जीवनसाथी, अच्छी संतान की कामना करने लगता है । इस प्रकार वह अपनी अनेक कामनाओं की पूर्ति के चक्रव्यूह में फंस जाता है । इन कामनाओं का कभी अंत नहीं होता क्योंकि कोई न कोई इच्छा सदा अपूर्ण रहती है । अतः इस प्रकार से व्यक्ति कभी भी पूर्ण संतुष्टि का अनुभव नहीं कर सकता । परंतु निष्काम साधना द्वारा एक बार आध्यात्मिक उन्नति का उद्देश्य पूर्ण हो जाने पर व्यक्ति को स्व की आत्मानुभूति हो जाती है और उसे ईश्वर प्राप्ति हो जाती है । आध्यात्मिक उन्नति के इस स्तर पर उसे स्थायी और निरंतर आनंद की अनुभूति होती है । सकाम साधना सृष्टि अथवा सृष्टि का अनुभव करने के विषय में है जबकि निष्काम साधना सृष्टिकर्ता के विषय में है । सकाम साधना माया के पदार्थो की प्राप्ति के विषय में है जबकि निष्काम साधना पूर्ण सत्य अर्थात् ईश्वर प्राप्ति और ईश्वरानुभूति के विषय में है।
          *।। जय सियाराम जी।।*
            *।। ॐ नमः शिवाय।।*
🙏🍀🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🙏🌹

जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष 🌹
आपका जन्मदिन: 14 दिसंबर

आप बेहद भाग्यशाली हैं कि आपका जन्म 14 को हुआ है। ऐसे व्यक्ति अधिकांशत: मितभाषी होते हैं। कवि, कलाकार, तथा अनेक विद्याओं के जानकार होते हैं। आपमें गजब की आकर्षण शक्ति होती है। आपमें लोगों को सहज अपना बना लेने का विशेष गुण होता है। 14 का अंक आपस में मिलकर 5 होता है। 5 का अंक बुध ग्रह का प्रतिनिधि करता है। अनजान व्यक्ति की मदद के लिए भी आप सदैव तैयार रहते हैं। आपमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन करना मुश्किल है। अर्थात अगर आप अच्छे स्वभाव के व्यक्ति हैं तो आपको कोई भी बुरी संगत बिगाड़ नहीं सकती। अगर आप खराब आचरण के हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सुधार नहीं सकती। लेकिन सामान्यत: 14 तारीख को पैदा हुए व्यक्ति सौम्य स्वभाव के ही होते हैं।

आपके लिए खास

शुभ दिनांक : 1, 5, 7, 14, 23

शुभ अंक : 1, 2, 3, 5, 9, 32, 41, 50


शुभ वर्ष : 2030, 2032, 2034, 2050, 2059, 2052

ईष्टदेव : देवी महालक्ष्मी, गणेशजी, मां अम्बे।


शुभ रंग : हरा, गुलाबी जामुनी, क्रीम

आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल


परिवार : दाम्पत्य जीवन में मधुर वातावरण रहेगा। अविवाहित भी विवाह में बंधने को तैयार रहें। परिवारिक प्रसन्नता रहेगी। संतान पक्ष से खुशखबर आ सकती है।

करियर: यह वर्ष आपके लिए सफलताओं भरा रहेगा। नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए यह वर्ष निश्चय ही सफलताओं भरा रहेगा।


कारोबार: व्यापार-व्यवसाय में प्रगति से प्रसन्नता रहेगी। अभी तक आ रही परेशानियां भी इस वर्ष दूर होती नजर आएंगी।


मेष (Aries)
स्वभाव: उत्साही
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: लाल
आज का दिन आपके लिए उन्नति की राह पर आगे बढ़ने के लिए रहेगा। आप किसी दूसरे के मामले में बेवजह ना बोलें। आपकी कोई पुरानी गलती से पर्दा उठ सकता है, जिससे जीवनसाथी आपसे नाराज हो सकती हैं।  आपकी इन्कम के सोर्स बढ़ेंगे, जो आपको खुशी देंगे। रचनात्मक कार्यों में आपकी काफी रुचि रहेगी। आपको अपनी संतान की संगति पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। यदि आप किसी नए काम की शुरुआत करना चाहते हैं, तो वह आपके लिए अच्छी रहेगी।

वृषभ (Taurus)
स्वभाव:  धैर्यवान
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: हरा
आज का दिन आपके लिए तनावग्रस्त रहने वाला है। पार्टनरशिप में कोई काम करने से आपको लाभ होगा। आप पूरी मेहनत व ईमानदारी से काम करेंगे। जीवनसाथी के साथ समय बिताकर दोनों एक दूसरे की कमियों को दूर करने की कोशिश करेंगे और आपको अपने आसपास रह रहे लोगों को पहचान कर चलना होगा। आप प्रॉपर्टी को लेकर यदि कोई डील फाइनल करने जा रहे थे, तो उसमें आपके साथ धोखा हो सकता है।

मिथुन (Gemini)
स्वभाव:  जिज्ञासु
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: पीला
आज का दिन आपके लिए सेहत पर ध्यान देने के लिए रहेगा। कोई पेट संबंधित समस्या आपको परेशान  करेगी, जो आपको टेंशनों को बढ़ाएगी। कुछ नए लोगों से आपकी जान पहचान बढ़ेगी और आपका कोई पारिवारिक मामला समस्या बन सकता है। आपको अपनी संतान की नौकरी को लेकर यदि कोई टेंशन थी, तो वह भी दूर होगी। जीवनसाथी को आप कहीं घूमाने फिराने लेकर जाने की योजना बना सकते हैं। आपकी किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है।

कर्क (Cancer)
स्वभाव:  भावुक
राशि स्वामी: चंद्र
शुभ रंग: सफेद
आज आपको शीघ्रता व भावुकता में कोई निर्णय लेने से बचना होगा। भाई व बहनों की जरूरतों पर आप अच्छा खासा खर्चा करेंगे, लेकिन आपकी इन्कम सीमित रहेगी, इसलिए आपको थोड़ा हाथ खींचकर चलने की आवश्यकता है। आपके पिताजी आपको कामों को लेकर कोई सलाह दे सकते हैं। यदि आप नौकरी बदलने की सोच रहे थे, तो आप किसी दूसरी जगह अप्लाई कर सकते हैं। भगवान की भक्ति में आपका खूब मन लगेगा।

सिंह राशि (Leo)
स्वभाव:  आत्मविश्वासी
राशि स्वामी: सूर्य
शुभ रंग: ग्रे
आज का दिन आपके लिए आत्मविश्वास से भरपूर रहने वाला है। उच्च अधिकारियों की कृपा आप पर बनी रहेगी। जो जातक राजनीति में कार्यरत हैं, उनके जन समर्थन में इजाफा होगा और आप दिल से लोगों का भला सोचेंगे, लेकिन लोगों इसे आपका स्वार्थ समझ सकते हैं। आप किसी की कहीसुनी बातों पर भरोसा ना करें। संतान की ओर से आपको कोई खुशखबरी सुनने को मिलेगी और आपके अंदर आज एक्स्ट्रा एनर्जी रहने से आप कामों को आसानी से कर सकेंगे।

कन्या (Virgo)
स्वभाव:  मेहनती
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: लाल
आज का दिन आपके लिए सामान्य रहने वाला है, लेकिन आप बजट बनाकर चलें, तो ही आपके लिए बेहतर रहेगा। एक साथ कई काम हाथ लगने से आपकी व्याग्रता बढ़ेगी। रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटक रहे लोगों को कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती हैं।  आपको एक लक्ष्य को पकड़कर चलने की आवश्यकता है, तभी आपके सभी काम आसानी से पूरे होंगे और आप परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति भी आसानी से कर सकेंगे।

तुला (Libra)
स्वभाव:  संतुलित
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: पीला
आज का दिन आपके लिए करियर के मामले में बढ़िया रहने वाला है। साझेदारी में कोई काम करना आपके लिए अच्छा रहेगा। आपने यदि किसी से कुछ कर्ज लिया था, तो उसे भी आप उतारने की पूरी कोशिश करेंगे। आपको अपने कामों में यदि कुछ रुकावटें आ रही थी, तो उन्हें भी दूर करने की पूरी कोशिश करें। आप अपने घर किसी नए कुछ नई चीजों को लेकर आ सकते हैं। परिवार में किसी धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन होने से माहौल खुशनुमा रहेगा।

वृश्चिक (Scorpio)
स्वभाव:  रहस्यमय
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: ग्रे
आज का दिन आपके लिए किसी जोखिम भरे काम में हाथ डालने से बचने के लिए रहेगा। आपको भावनाओं में बहकर कोई बात नहीं बोलनी है और पिताजी की सेहत को लेकर आप थोड़ा सचेत रहें, क्योंकि आपके गुप्त शत्रु आपको परेशान करने की कोशिश कर सकते हैं। अध्ययन और अध्यात्म के कार्यों में आपका काफी रुचि रहेगी। आपके बॉस से आपकी किसी बात को लेकर कहासुनी होने की संभावना है। कोई सहयोगी आपको परेशान करने की कोशिश करेगा।

धनु (Sagittarius)
स्वभाव:  दयालु
राशि स्वामी: गुरु
शुभ रंग: गोल्डन
आज का दिन आपके लिए भाग्य के दृष्टिकोण से अच्छा रहने वाला है। आप अपने कामों में कोई बदलाव कर सकते हैं। आप मित्रों के साथ कुछ समय मनोरंजन के कार्यक्रम में व्यतीत करेंगे। संतान की सेहत में गिरावट आने से आपको भागदौड़ बनी रहेगी। जीवनसाथी को भी किसी नई नौकरी की प्राप्ति हो सकती हैं, लेकिन आप अपने भविष्य को लेकर कोई इंवेस्टमेंट करने की आवश्य सोचें। जो जातक विदेशों से व्यापार करने की सोच रहे हैं, उनके लिए आज का दिन अच्छा रहेगा।

मकर (Capricorn)
स्वभाव:  अनुशासित
राशि स्वामी:  शनि
शुभ रंग: बैंगनी
आज का दिन आपके लिए चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। बिजनेस कर रहे लोगों की अपने पार्टनर से कहासुनी हो सकती है। आपकी इन्कम में वृद्धि होगी, जो आपको खुशी देगी। आपकी कोई मन की इच्छा पूरी हो सकती है। ससुराल पक्ष के किसी व्यक्ति से आपको धन लाभ मिलता दिख रहा है, लेकिन आपका मन किसी बात को लेकर परेशान रहेगा। अविवाहित जातकों की उनके साथी से मुलाकात होगी, जिससे उनका रिश्ता और बेहतर होगा।

कुंभ ( Aquarius)
स्वभाव:  मानवतावादी
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: लाल
आज का दिन आपके लिए ईमानदारी से काम  करने के लिए रहेगा। निजी मामलों पर आपको थोड़ा ध्यान देना होगा। आपका कोई मित्र लंबे समय बाद आपसे मेल-मिलाप करने आ सकता है। आज आपके घर किसी अतिथि का आगमन होने से माहौल खुशनुमा रहेगा, लेकिन आपका कोई रक्त संबंधी समस्या आपको परेशानी दे सकती हैं। आपको अपने कामों को लेकर योजना बनाकर चलना होगा।

मीन (Pisces)
स्वभाव: संवेदनशील
राशि स्वामी: बृहस्पति
शुभ रंग: गुलाबी
आज का दिन आपके लिए बढ़िया रहने वाला है। प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी। यदि आपके मन में किसी काम को लेकर भ्रम बना हुआ है, तो आप उस काम में बिल्कुल आगे ना बढ़ें। आपके कुछ पारिवारिक मामले आपकी टेंशनों को बढ़ाएंगे। माता-पिता की सेवा के लिए आप कुछ समय निकालेंगे। आपका कोई सरकारी काम यदि लंबे समय से पेंडिंग था, तो वह भी पूरा हो सकता है। कार्यक्षेत्र में काम को लेकर आपके ऊपर थोड़ा दबाव रहेगा, लेकिन फिर भी आप उसे आसानी से पूरा कर सकेंगे।

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Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton