Vaidik Panchang 14092025 Rashifal Samadhan

🙏🏻 हर हर महादेव🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 14 सितम्बर 2025*
🌤️ *दिन – रविवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शरद ऋतु*
🌤️ *मास – आश्विन (गुजरात-महाराष्ट्र भाद्रपद)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – अष्टमी 15 सितम्बर रात्रि 03:06 तक तत्पश्चात नवमी*
🌤️ *नक्षत्र – रोहिणी सुबह 08:41 तक तत्पश्चात मृगशिरा*
🌤️ *योग – बज्र सुबह 07:35 तक तत्पश्चात सिद्धि*
🌤️ *राहुकाल – शाम 05:10 से शाम 06:43 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:26*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:41*
👉 *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – अष्टमी का श्राद्ध, महालक्ष्मी व्रत समाप्त, राष्ट्रीय हिन्दी दिवस*
💥 *विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है (ब्रह्मवैवर्त पुराण ब्रह्म खण्ड: 27,29,34)*


        🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️

🌷 *व्यतिपात योग* 🌷
➡️ *15 सितम्बर 2025 सोमवार को प्रातः 04:55 से मध्यरात्रि 02:34 (यानि 16 सितम्बर 02:34 AM) तक व्यतिपात योग है।*
🙏🏻 *व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।*


         🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️

🌷 *अश्विन माह* 🌷
🙏🏻 *अश्विन हिन्दू धर्म का सप्तम महिना है। अश्विन नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा होने के कारण इसका नाम अश्विन पड़ा (अश्विनीनक्षत्रयुक्ता पौर्णमासी यत्र मासे सः)। आश्विन मास का संबंध अश्विनौ से है जो सूर्य के दो पुत्र हैं और देवताओं के चिकित्सक हैं। इस मास का एक नाम क्वार भी है। (उत्तर भारत हिन्दू पंचांग के अनुसार) से अश्विन  का आरम्भ हो चुका है। (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार अभी भाद्रपद मास चल रहा है) ।*
🙏🏻 *महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 106 के अनुसार “तथैवाश्वयुजं मासमेकभक्तेन यः क्षिपेत्। प्रज्ञावान्वाहनाढ्यश्च बहुपुत्रश्च जायते।।” जो अश्विन मास को एक समय भोजन करके बिताता है, वह पवित्र, नाना प्रकार के वाहनों से सम्पन्न तथा अनेक पुत्रों से युक्त होता है ।*
🌷 *आश्विने भौमावास्याम जायते खलु पार्वती। विविध विपदाम धनक्षयं पापाचारम वर्धते।।*
🙏🏻 *महाभारत अनुशासन पर्व के अनुसार जो अश्विन मास में ब्राह्माणों को घृत दान करता है, उस पर दैव वैद्य अश्विनीकुमार प्रसन्न होकर उसे रूप प्रदान करते हैं ।*
🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार अश्विन में धान्य दान करने से अन्न तथा धन की वृद्धि होती है।*
🙏🏻 *अग्निपुराण के अनुसार अश्विन  के महिने में गोरस- गाय का घी, दूध और दही तथा अन्न देनेवाला सब रोगों से छुटकारा पा जाता है |*
🌷 *आश्विने कृष्णपक्षे तु षष्ठ्यां भौमेऽथ रोहिणी । व्यतीपातस्तदा षष्ठी कपिलानन्तपुण्यदा ।।*
🙏🏻 *अश्विन महिने के कृष्णपक्ष की षष्ठी के दिन मंगलवार, रोहिणी नक्षत्र और व्यतिपात हो तो वह अनंत पुण्य देने वाला कपिला षष्टी योग कहा जाता है। यह योग बहुत दुर्लभ है।*
🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार सती ने अश्विन मास में नंदा (प्रतिपदा, षष्ठी और एकादशी) तिथियों में भक्तिपूर्वक गुड़, भात और नमक चढाकर भगवान शिवका पूजन किया और उन्हें नमस्कार करके उसी नियम के साथ उस मास को व्यतीत किया |*
🙏🏻 *अश्विन कृष्णपक्ष को पितृपक्ष महालय के नाम से जाना जाता है जिसमें पितृ ऋण से मुक्त होने तथा पितरों को तृप्त करने के उद्देश्य से श्राद्ध किया जाता है।*
          🕉️ *~ वैदिक  पंचांग ~* 🕉️

🌷 *श्राद्धकर्म* 🌷
🙏🏻 *अगर श्राद्धकर्म करने के लिए आपके पास बिल्कुल भी धन नहीं है तो आपको उधार मांगकर धन लेना चाहिए और श्राद्ध करना चाहिए। अगर आपको कोई उधार नहीं दे रहा तो पितरों के उद्देश्य से पृथ्वी पर भक्ति विनम्र भाव से सात आठ तिलों से जलाञ्जलि ही दे दें। अगर यह भी संभव नहीं तो कहीं से चारा लाकर गौ को खिला दें। और अगर इतना भी संभव नहीं तो अपनी बगल दिखाते हुए सूर्य तथा दिक्पालों से कहें :*
🌷 *”न मेऽस्ति वित्तं न धनं  चान्यच्छ्राद्धोपयोग्यं स्वपितॄन्‌नतोऽस्मि ।*
*तृप्यन्तु भत्त्या पितरो मयैतौ कृतौ भुजौ वर्त्मनि मारुतस्य ।।”*
➡ *’मेरे पास श्राद्धकर्म के योग्य न धन-संपति है और न कोई अन्य सामग्री। अत: मै अपने पितरों को प्रणाम करता हूँ। वे मेरी भक्ति से ही तृप्तिलाभ करे। मैंने अपनी दोनों भुजाएं आकाश में उठा रखी हैं ।*
💥 *ऐसा विवरण विष्णुपुराण तृतीयांश, अध्यायः 14 तथा वराहपुराण अध्याय 13 में मिलता है।*

          🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

“नवदुर्गा और गणेश का संबंध: वैदिक, पौराणिक, तांत्रिक, और ज्योतिषीय परिप्रेक्ष्य में एक शोधात्मक विश्लेषण।’

✓•नवदुर्गा और गणेश भारतीय दर्शन, वैदिक साहित्य, तंत्र, और ज्योतिष में शक्ति और बुद्धि के प्रतीक के रूप में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। नवदुर्गा, जो देवी दुर्गा के नौ रूप हैं, विश्व की सृजनात्मक, पालक, और संहारक शक्ति का प्रतीक हैं, जबकि गणेश बुद्धि, सिद्धि, और विघ्न-नाशक के प्रतीक हैं। दोनों एक ही आदिशक्ति (पार्वती) से उत्पन्न हैं, क्योंकि गणेश पार्वती के पुत्र हैं और नवदुर्गा पार्वती के विभिन्न स्वरूप हैं। यह शोधप्रबंध नवदुर्गा और गणेश के संबंध को वैदिक मंत्रों, पौराणिक कथाओं, तांत्रिक सिद्धांतों, और ज्योतिषीय कुण्डली के बारह भावों के संदर्भ में विश्लेषित करता है, “भाव”, “शिव-शक्ति”, “देवी दुर्गा”, “लक्ष्मी-सरस्वती”, और “गणेश-कार्तिकेय” के संदर्भ में उल्लिखित है।

✓•1. वैदिक और पौराणिक परिप्रेक्ष्य में नवदुर्गा और गणेश:
नवदुर्गा और गणेश वैदिक और पौराणिक परंपराओं में शक्ति और बुद्धि के संयुक्त स्वरूप के प्रतीक हैं। वै ;)दिक साहित्य में नवदुर्गा को “वाक्” (ऋग्वेद 10.125) के रूप में देखा जाता है, जो सृष्टि की सृजनात्मक शक्ति हैं, जबकि गणेश को “गणपति” (ऋग्वेद 2.23.1) के रूप में वर्णित किया गया है, जो गणों (प्राणियों या देवताओं) के अधिपति और विघ्न-नाशक हैं।

✓•वैदिक संदर्भ:
अथर्ववेद (काण्ड 9, सूक्त 9, मंत्र 12) में बारह भावों और सात चक्रों का उल्लेख है:

“पञ्चपादं पितरं द्वादशाकृतिं दिव आहुः परे अर्धे पुरीषिणम्। 
अथेमे अन्य उ परे विचक्षणे सप्तचक्रे षडर आहुरर्पितम्।”

✓•इस मंत्र में “द्वादशाकृतिम्” (बारह राशियाँ/भाव) नवदुर्गा के स्वरूप को दर्शाता है, जो विश्व की साकार और गतिशील शक्ति हैं। “सप्तचक्रे” (सात चक्र) नवदुर्गा के नौ रूपों और गणेश के मूलाधार चक्र से संबंधित हैं। गणेश का “विघ्नहर्ता” स्वरूप कुण्डलिनी के उदय में बाधाओं को दूर करता है, जो नवदुर्गा की शक्ति को सक्रिय करता है। “पितरम्” (पालनकर्ता) शिव का प्रतीक है, जो नवदुर्गा और गणेश का आधार है।

✓•पौराणिक स्वरूप:
पौराणिक कथाओं में नवदुर्गा और गणेश का संबंध माता-पुत्र के रूप में चित्रित है। दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण) में नवदुर्गा को महिषासुरमर्दिनी के नौ रूपों के रूप में वर्णित किया गया है, जो शक्ति के त्रिगुणात्मक (सत, रज, तम) स्वरूप को दर्शाते हैं। गणेश पुराण और शिव पुराण में गणेश को पार्वती द्वारा अपने उबटन से निर्मित माना गया है, जो शक्ति के सृजनात्मक तत्व का प्रतीक है।

– नवदुर्गा: नौ रूप (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री) विश्व के सृजन, पालन, और संहार को दर्शाते हैं। प्रत्येक रूप एक विशिष्ट चक्र और भाव से संबंधित है।

– गणेश: प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता, और सिद्धिविनायक के रूप में गणेश सभी कार्यों की शुरुआत में पूजे जाते हैं। उनका विशाल सिर बुद्धि, और मूषक वाहन सूक्ष्म चेतना का प्रतीक है।

✓•माता-पुत्र का संबंध:
गणेश पार्वती के पुत्र हैं, और नवदुर्गा पार्वती के नौ रूप हैं। यह संबंध शक्ति (नवदुर्गा) और बुद्धि (गणेश) के संतुलन को दर्शाता है। गणेश का प्रथम पूज्य होना नवदुर्गा की शक्ति को सक्रिय करने के लिए बुद्धि की आवश्यकता को दर्शाता है। नवरात्रि में गणेश की पूजा नवदुर्गा के साथ की जाती है, जो उनके अविभाज्य संबंध को दर्शाती है।

✓•2. तांत्रिक दर्शन में नवदुर्गा और गणेश
तंत्र शास्त्र में नवदुर्गा कुण्डलिनी शक्ति के नौ रूप हैं, जो मूलाधार से सहस्रार चक्र तक की यात्रा को दर्शाती हैं। गणेश मूलाधार चक्र के अधिपति हैं, जो कुण्डलिनी के उदय में बाधाओं को दूर करते हैं।

✓• कुण्डलिनी और चक्र:

– गणेश: मूलाधार चक्र में निवास करते हैं, जहां कुण्डलिनी शक्ति सुप्त रहती है। गणेश का “विघ्नहर्ता” स्वरूप कुण्डलिनी के उदय में आने वाली बाधाओं को दूर करता है। तंत्र में गणेश को “सिद्धिविनायक” के रूप में पूजा जाता है, जो सिद्धि और मोक्ष (भाव 12) से संबंधित है।

– नवदुर्गा: प्रत्येक दुर्गा एक चक्र और भाव से संबंधित है:
 
✓•1. शैलपुत्री: मूलाधार चक्र, भाव 1 (आत्मा, स्थिरता)।

✓• 2. ब्रह्मचारिणी: स्वाधिष्ठान चक्र, भाव 2 (धन, विद्या)।

✓•  3. चंद्रघंटा: मणिपुर चक्र, भाव 3 (बल, पराक्रम)।

  ✓•4. कुष्मांडा: अनाहत चक्र, भाव 4 (माता, सुख)।

✓• 5. स्कंदमाता: विशुद्ध चक्र, भाव 5 (पुत्र, बुद्धि)।

✓• 6. कात्यायनी: आज्ञा चक्र, भाव 6 (शत्रु, युद्ध)।

✓• 7. कालरात्रि: सहस्रार चक्र, भाव 8 (मृत्यु, संहार)।

✓• 8. महागौरी: भाव 9 (धर्म, शुद्धता)।

  ✓•9. सिद्धिदात्री: भाव 12 (मोक्ष, सिद्धि)।

✓•तांत्रिक प्रतीकात्मकता:

– गणेश: गणेश का पाश (बंधन), अंकुश (नियंत्रण), मोदक (सुख), और परशु (विघ्न नाश) बुद्धि और सिद्धि के आयामों को दर्शाते हैं। उनका विशाल उदर समस्त विश्व को समाहित करने की क्षमता का प्रतीक है।

– नवदुर्गा: प्रत्येक दुर्गा का शस्त्र और वाहन (सिंह, मयूर, गरुड़) शक्ति, साहस, और सृजनात्मकता को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, कालरात्रि का संहारक स्वरूप (भाव 8) और सिद्धिदात्री का सिद्धि-प्रद स्वरूप (भाव 12) गणेश के विघ्नहर्ता और सिद्धिविनायक स्वरूप के साथ संनादति है।

✓•3. ज्योतिषीय परिप्रेक्ष्य में नवदुर्गा और गणेश:
ज्योतिषीय कुण्डली के बारह भाव, जैसा कि आपके पिछले शोध में वर्णित है, नवदुर्गा और गणेश के स्वरूप को मानव जीवन और विश्व के विभिन्न आयामों में प्रकट करते हैं। गणेश बुद्धि और सिद्धि से संबंधित भावों (2, 5, 12) में प्रमुख हैं, जबकि नवदुर्गा सभी भावों में शक्ति के रूप में प्रकट होती हैं।

✓• गणेश और भाव
गणेश का संबंध कुण्डली के निम्नलिखित भावों से है:

✓•1. भाव 1 (लग्न, आत्मा): गणेश का एकदंत और प्रभव स्वरूप, जो आत्मा और प्रारंभ की शक्ति का प्रतीक है। यह भाव विष्णु सहस्रनाम में “प्रभव” और “उद्भव” के रूप में उल्लिखित है।

✓•2. भाव 2 (धन, विद्या): गणेश का सुमुख और सुघोष स्वरूप, जो विद्या और बुद्धि प्रदान करता है। यह भाव “सुमुख” और “सुघोष” के रूप में उल्लिखित है।

✓•3. भाव 5 (बुद्धि, पुत्र): गणेश का सुमेधा और मेधावी स्वरूप, जो बुद्धि और सृजनात्मकता का प्रतीक है। यह भाव “सुमेधा”, “मेधावी”, और “ज्योति” के रूप में प्रकट होता है।

✓•4. भाव 12 (मोक्ष, सिद्धि): गणेश का सिद्धिविनायक स्वरूप, जो आध्यात्मिक सिद्धि और मुक्ति प्रदान करता है। यह भाव “शान्ति” और “हंस” के रूप में उल्लिखित है।

✓•नवदुर्गा और भाव:
नवदुर्गा का संबंध कुण्डली के सभी भावों से है, क्योंकि वे शक्ति के सर्वव्यापी स्वरूप हैं:

✓•1. भाव 1 (शैलपुत्री): आत्मा और स्थिरता, मूलाधार चक्र का प्रतीक।

✓•2. भाव 2 (ब्रह्मचारिणी): धन और विद्या, स्वाधिष्ठान चक्र का प्रतीक।

✓•3. भाव 3 (चंद्रघंटा): बल और पराक्रम, मणिपुर चक्र का प्रतीक।

✓•4. भाव 4 (कुष्मांडा): माता और सुख, अनाहत चक्र का प्रतीक।

✓•5. भाव 5 (स्कंदमाता): बुद्धि और पुत्र, विशुद्ध चक्र का प्रतीक।

✓•6. भाव 6 (कात्यायनी): शत्रु और युद्ध, आज्ञा चक्र का प्रतीक।

✓•7. भाव 7 (त्रिपुरसुंदरी): काम और स्त्री, सौंदर्य और सृजन का प्रतीक।

✓•8. भाव 8 (कालरात्रि): मृत्यु और संहार, सहस्रार चक्र का प्रतीक।

✓•9. भाव 9 (महागौरी): धर्म और शुद्धता, आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक।

✓•10. भाव 10 (भुवनेश्वरी): कर्म और नेतृत्व, विश्व रचना का प्रतीक।

✓•11. भाव 11 (कमला): लाभ और सिद्धि, समृद्धि का प्रतीक।

✓•12. भाव 12 (सिद्धिदात्री): मोक्ष और सिद्धि, मुक्ति का प्रतीक।

✓•त्रिकोण और केन्द्र में नवदुर्गा और गणेश:

– त्रिकोण (1, 5, 9): यह त्रिकोण,  शिव का त्रिनेत्र और विष्णु का त्रिपाद है। गणेश भाव 5 (बुद्धि) और भाव 12 (सिद्धि) में प्रमुख हैं, जबकि नवदुर्गा भाव 1 (शैलपुत्री), भाव 5 (स्कंदमाता), और भाव 9 (महागौरी) में प्रकट होती हैं। यह त्रिकोण शक्ति (नवदुर्गा) और बुद्धि (गणेश) का संतुलन दर्शाता है।

– केन्द्र (1, 4, 7, 10): गणेश भाव 1 (आत्मा) और भाव 2 (विद्या) में प्रभाव डालते हैं, जबकि नवदुर्गा भाव 4 (कुष्मांडा, सुख) और भाव 7 (त्रिपुरसुंदरी, काम) में प्रमुख हैं। यह संतुलन शक्ति और बुद्धि का प्रतीक है।

✓•अशुभ भावों में संबंध:

– भाव 6 और 8: नवदुर्गा का कात्यायनी (भाव 6) और कालरात्रि (भाव 8) स्वरूप शत्रु और मृत्यु का नाश करता है। गणेश इन भावों में बुद्धि और सिद्धि प्रदान करते हैं, जो शत्रु और भय को दूर करने में सहायता करता है।

– भाव 3 और 11: नवदुर्गा का चंद्रघंटा (भाव 3) और कमला (भाव 11) स्वरूप साहस और समृद्धि प्रदान करता है, जबकि गणेश भाव 11 (लाभ) में बुद्धि के माध्यम से सिद्धि सुनिश्चित करते हैं।

✓•4. मानव देह और विश्व में नवदुर्गा और गणेश:
भावों को मानव देह के अवयवों से जोड़ा गया है। नवदुर्गा और गणेश का स्वरूप इन अवयवों में निम्नलिखित रूप से प्रकट होता है:
– गणेश:
  – कपाल, मस्तिष्क (भाव 1): गणेश का सुमेधा स्वरूप, जो बुद्धि और चेतना का प्रतीक है।

  – आँख, नाक, जिह्वा (भाव 2): गणेश का सुघोष स्वरूप, जो विद्या और वाणी का प्रतीक है।

  – यकृत, अग्न्याशय (भाव 5): गणेश का मेधावी स्वरूप, जो सृजनात्मकता और बुद्धि का प्रतीक है।

  – पैर (भाव 12): गणेश का सिद्धिविनायक स्वरूप, जो मोक्ष और सिद्धि का प्रतीक है।

– नवदुर्गा:
  – कपाल, मस्तिष्क (भाव 1): शैलपुत्री, आत्मा और स्थिरता का प्रतीक।

  – आँख, नाक, जिह्वा (भाव 2): ब्रह्मचारिणी, विद्या और तप का प्रतीक।

  – हृदय, वक्ष (भाव 4): कुष्मांडा, मातृ सुख और प्रेम का प्रतीक।

  – यकृत, अग्न्याशय (भाव 5): स्कंदमाता, बुद्धि और सृजनात्मकता का प्रतीक।

  – कटि, वृक्क (भाव 6): कात्यायनी, शत्रु-नाश और युद्ध का प्रतीक।

  – उपस्थ (भाव 7): त्रिपुरसुंदरी, सृजन और सौंदर्य का प्रतीक।

  – गुदा (भाव 8): कालरात्रि, संहार और दोष नाश का प्रतीक।

  – जांघें (भाव 9): महागौरी, धर्म और शुद्धता का प्रतीक।

  – पैर (भाव 12): सिद्धिदात्री, मोक्ष और सिद्धि का प्रतीक।

✓•गर्भस्थ भ्रूण का चक्रीय स्वरूप, जहां सिर (भाव 1) और पैर (भाव 12) सन्निकट होते हैं, नवदुर्गा (शक्ति) और गणेश (बुद्धि) के संतुलन को दर्शाता है।

✓•5. वैष्णव दर्शन में नवदुर्गा और गणेश:
वैष्णव दर्शन में नवदुर्गा और गणेश को विष्णु की शक्तियों के सहायक के रूप में देखा जाता है।  “विष्णु चक्र” माना गया है, जिसमें नवदुर्गा और गणेश निम्नलिखित रूप में प्रकट होते हैं:

– नवदुर्गा: विष्णु की सृजनात्मक, पालक, और संहारक शक्ति, जो सभी भावों में प्रकट होती हैं। विष्णु सहस्रनाम में “धर्म”, “साक्षी”, “शान्ति”, और “कमला” जैसे नाम नवदुर्गा के स्वरूप को दर्शाते हैं।

– गणेश: विष्णु की बौद्धिक शक्ति, जो भाव 2 (विद्या), भाव 5 (बुद्धि), और भाव 12 (मोक्ष) में प्रकट होती है। विष्णु सहस्रनाम में “सुमेधा”, “ज्योति”, और “हंस” गणेश के स्वरूप को दर्शाते हैं।

✓•6. नवरात्रि में नवदुर्गा और गणेश:
नवरात्रि में नवदुर्गा की पूजा गणेश के साथ प्रारंभ होती है, जो उनके अविभाज्य संबंध को दर्शाता है:

– गणेश पूजा: नवरात्रि के प्रथम दिन गणेश की पूजा होती है, जो विघ्न-नाश और सिद्धि का प्रतीक है। यह भाव 1 (आत्मा) और भाव 12 (सिद्धि) से संबंधित है।

– नवदुर्गा पूजा: नौ दिनों में नवदुर्गा की पूजा विभिन्न भावों और चक्रों को सक्रिय करती है:

  – प्रथम दिन (शैलपुत्री): भाव 1, मूलाधार चक्र, आत्म-जागरण।

  – द्वितीय दिन (ब्रह्मचारिणी): भाव 2, स्वाधिष्ठान चक्र, विद्या और तप।

  – नवम दिन (सिद्धिदात्री): भाव 12, सहस्रार चक्र, मोक्ष और सिद्धि।

✓•7. नवदुर्गा और गणेश का संतुलन
नवदुर्गा और गणेश का संबंध शक्ति और बुद्धि के संतुलन का प्रतीक है:

– नवदुर्गा बिना गणेश: शक्ति बिना बुद्धि के अंधकार और हिंसा को जन्म दे सकती है, जो भाव 6 (शत्रु) और भाव 8 (मृत्यु) में परिलक्षित होता है।

– गणेश बिना नवदुर्गा: बुद्धि बिना शक्ति के निष्क्रिय हो सकती है, जो भाव 5 (बुद्धि) में अहंकार और भाव 12 (मोक्ष) में निष्क्रियता को जन्म दे सकता है।

– संतुलन: नवदुर्गा (शक्ति) और गणेश (बुद्धि) का संतुलन जीवन में सिद्धि, धर्म, और मोक्ष की प्राप्ति सुनिश्चित करता है। यह संतुलन त्रिकोण (1, 5, 9) और केन्द्र (1, 4, 7, 10) भावों में प्रकट होता है।

✓•8. निष्कर्ष:
नवदुर्गा और गणेश का संबंध शक्ति और बुद्धि, गति और स्थिरता, तथा सृजन और सिद्धि के संतुलन का प्रतीक है। वैदिक मंत्रों, पौराणिक कथाओं, तांत्रिक सिद्धांतों, और ज्योतिषीय कुण्डली के संदर्भ में नवदुर्गा सभी भावों में शक्ति के रूप में और गणेश बुद्धि (भाव 2, 5, 12) के रूप में प्रकट होते हैं। कुण्डली के बारह भाव और सात चक्र इन दोनों के पूरक स्वरूप को दर्शाते हैं। वैष्णव दर्शन में नवदुर्गा और गणेश विष्णु की शक्तियों के सहायक हैं, जो कुण्डली के प्रत्येक भाव में विश्व के चक्रीय स्वरूप को प्रकट करते हैं। यह संबंध मानव जीवन के प्रत्येक पहलू—बुद्धि, शक्ति, कर्म, और मोक्ष—को एक सूत्र में पिरोता है, और ऋषियों की गहन दृष्टि और वैष्णव चिन्तन की महत्ता को उजागर करता है।

✓•संदर्भ:
1. अथर्ववेद, काण्ड 9, सूक्त 9, मंत्र 11-12।
2. दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण)।
3. गणेश पुराण, शिव पुराण।
4. विष्णु सहस्रनाम।
5. तंत्र शास्त्र और सांख्य दर्शन।
6. भारतीय ज्योतिष शास्त्र (पाराशर, वराहमिहिर)।
#त्रिस्कन्धज्योतिर्विद्

          🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत 14 सितंबर रविवार को – संतान प्राप्ति, उनकी लंबी आयु और सुखी निरोग जीवन की कामना के लिए किया जाता है यह व्रत : महंत रोहित शास्त्री, ज्योतिषाचार्य।

जम्मू-कश्मीर : जीवित्पुत्रिका व्रत प्रत्येक वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है। इस व्रत के विषय में श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री, ज्योतिषाचार्य ने बताया कि यह व्रत संतान प्राप्ति, उनकी लंबी आयु तथा सुखी और निरोग जीवन की कामना के लिए किया जाता है। जीवित्पुत्रिका व्रत वे सौभाग्यवती स्त्रियाँ रखती हैं जिनको संतान प्राप्त है। साथ ही जिनके संतान नहीं होते, वे भी संतान की कामना तथा संतान की लंबी आयु के लिए पूरे विधि-विधान से निर्जल रहकर यह व्रत करती हैं। इस वर्ष जीवित्पुत्रिका व्रत 14 सितंबर, रविवार को मनाया जाएगा। व्रत का पारण 15 सितंबर, सोमवार को प्रातः सूर्य पूजन के साथ किया जाएगा।

यह व्रत जितिया, जिउतिया या जीमूतवाहन के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश जी, भगवान श्रीकृष्ण जी एवं सूर्य नारायण जी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस व्रत की कथा महाभारत काल से जुड़ी हुई है। धर्मग्रंथों के अनुसार, महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण जी ने अपने पुण्य कर्मों से उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु को जीवनदान दिया था, इसलिए यह व्रत संतान की रक्षा और उनके मंगल की कामना के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से भगवान श्रीकृष्ण जी संतान की रक्षा करते हैं। साथ ही, पौराणिक कथा के अनुसार आश्विन मास की कृष्ण अष्टमी तिथि पर गंधर्वराज जीमूतवाहन की कृपा से गरुड़ ने नागों को न खाने का वचन दिया था। इस वर्ष रविवार ,14 सितंबर को अष्टमी तिथि का श्राद्ध भी होगा।

          🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
आपका जन्मदिन: 14 सितंबर

आप बेहद भाग्यशाली हैं कि आपका जन्म 14 को हुआ है। ऐसे व्यक्ति अधिकांशत: मितभाषी होते हैं। कवि, कलाकार, तथा अनेक विद्याओं के जानकार होते हैं। आपमें गजब की आकर्षण शक्ति होती है। आपमें लोगों को सहज अपना बना लेने का विशेष गुण होता है।

14 का अंक आपस में मिलकर 5 होता है। 5 का अंक बुध ग्रह का प्रतिनिधि करता है। अनजान व्यक्ति की मदद के लिए भी आप सदैव तैयार रहते हैं। आपमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन करना मुश्किल है। अर्थात अगर आप अच्छे स्वभाव के व्यक्ति हैं तो आपको कोई भी बुरी संगत बिगाड़ नहीं सकती। अगर आप खराब आचरण के हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सुधार नहीं सकती। लेकिन सामान्यत: 14 तारीख को पैदा हुए व्यक्ति सौम्य स्वभाव के ही होते हैं।


आपके लिए खास

शुभ दिनांक : 1, 5, 7, 14, 23

शुभ अंक : 1, 2, 3, 5, 9, 32, 41, 50


शुभ वर्ष : 2030, 2032, 2034, 2050, 2059, 2052

ईष्टदेव : देवी महालक्ष्मी, गणेशजी, मां अम्बे।


शुभ रंग : हरा, गुलाबी जामुनी, क्रीम

आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल

परिवार : दाम्पत्य जीवन में मधुर वातावरण रहेगा। अविवाहित भी विवाह में बंधने को तैयार रहें। परिवारिक प्रसन्नता रहेगी। संतान पक्ष से खुशखबर आ सकती है।


करियर: यह वर्ष आपके लिए सफलताओं भरा रहेगा। नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए यह वर्ष निश्चय ही सफलताओं भरा रहेगा।

कारोबार: व्यापार-व्यवसाय में प्रगति से प्रसन्नता रहेगी। अभी तक आ रही परेशानियां भी इस वर्ष दूर होती नजर आएंगी।

मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन आपके लिए साधारण रहेगा। आज आपके अंदर आत्म संतोष की भावना रहने से अतिआवश्यक कार्यो को छोड़ अन्य किसी भी कार्य को करने के लिए ज्यादा भागदौड़ करना पसंद नही करेंगे। नौकरी वाले लोग कार्य क्षेत्र पर टालमटोल वाले रवैये के कारण अपमानित हो सकते है। महिलाये भी आज सीमित साधनों से निर्वाह कर लेंगी। आर्थिक लाभ कम लेकीन आवश्यकता के समय होगा। पूजा पाठ में मन की एकग्रता नही रख सकेंगे। आज आप अपने कार्यो की अपेक्षा अन्य लोगो के लिये ज्यादा सहयोगी सिद्ध होंगे। स्वास्थ्य छोटी-मोटी परेशानियों को छोड़ सामान्य बना रहेगा। बुजुर्गो का सानिध्य मिलेगा।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
बीते कल की अपेक्षा आज परिस्थितियों में सुधार अनुभव करेंगे। आज आप जिस भी कार्य को आरम्भ करेंगे उसके शुरुआत में कोई ना कोई बाधा आएगी परन्तु धैर्य धारण कर लगे रहे सफलता निश्चित मिलेगी। आज आपके लटके सरकारी कार्य पूर्ण होने की भी संभावना है अधिकारी वर्ग से बहस ना करें। व्यवसाय में आज कुछ बदलाव लाने का प्रयास भी करेंगे परन्तु इसमे पूर्ण सफलता नही मिल सकेगी। धन लाभ आवश्यकता अनुसार हो जाएगा लेकिन दिखावे की मनोवृत्ति भी रहने से फिजूल के खर्च भी रहेंगे। महिलाये आज पारिवारिक जिम्मेदारी को किसी अन्य को सौपकर स्वयं निश्चिन्त रहना पसंद करेंगी फिर भी आवश्यकता पड़ने पर सहयोग करेंगी।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन आपके प्रतिकूल रहेगा। आज आपको स्वास्थ्य के प्रति अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। खाने पीने में भी सावधानी रखें पेट संबंधित व्याधि अन्य रोगों के जन्म का कारण बनेगी। जोखिम वाले कार्यो से बचकर रहना आज हितकर रहेगा। व्यवसायिक क्षेत्र पर भी आज कार्यो को स्वतः ही होने दें धन संबंधित मामलों में जोर-जबरदस्ती हानि ही कराएगी। धन लाभ के लिये परिश्रम अधिक करना पड़ेगा फिर भी आशानुकूल नही होगा महिलाओ को भी आज वाणी पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है बेतुकी बाते व्यर्थ के विवाद को जन्म देंगी। मित्र-स्नेहीजन से अशुभ समाचार मिल सकता है। मन किसी अरिष्ट की आशंका से व्याकुल रहेगा। धैर्य से आज का दिन बिताये।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन आपके लिये लाभदायक है लेकिन आज स्वभाव की चंचलता पल पल पर आपके कार्यो में विघ्न डालेगी। अकड़ू स्वभाव के कारण अपनी बात के आगे किसी की नही चलने देंगे। कार्य व्यवसाय में थोड़े से परिश्रम के बाद वृद्धि के साथ धन लाभ भी होगा। सहयोगियों का ईर्ष्यालु व्यवहार कुछ समय के लिये परेशानी खड़ी करेगा लेकिन आज आपमें भी अहंकार की भावना रहने से किसी की बातो की परवाह नही करेंगे। महिलाये आज काम की अपेक्षा बखान ज्यादा करेंगी। मित्र रिश्तेदारी में जाना पड़ेगा। उपहार अथवा अन्य लेनदेन पर खर्च होगा। विरोधी प्रबल रहेंगे लेकिन आपका अहित नही कर सकेंगे। परिवार के बुजुर्गो एवं बच्चों की सेहत का ध्यान रखें। यात्रा के योग बनते-बनते निरस्त हो सकते है।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन भी आपके अनुकूल बना रहेगा। आज आपका मिलनसार व्यवहार एवं मृदु वाणी सभी क्षेत्र पर जय कराएगी। प्रतिद्वन्दी भी आज आपकी कार्य कुशलता से प्रभावित होंगे। नौकरी वाले लोग अधिकारियों का सानिध्य मिलने से आत्मविश्वास से भरे रहेंगे। कार्य क्षेत्र पर महिला मित्रो का महत्त्वपूर्ण सहयोग मिलेगा संबंधों में भी समीपता आएगी। धन लाभ के लिये आज ज्यादा परेशान नही होना पड़ेगा पुराने कार्यो से बैठे बिठाये हो जाएगा लेकिन नए अनुबंध मिलने में संध्या तक इंतजार करना पड़ेगा। पारिवारिक वातावरण आज आनंदित रहेगा सभी सदस्यों में आपसी तालमेल बना रहेगा। पैतृक मामलो को लेकर अपना मत प्रकट ना करें।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन आपके लिए भाग्योदय कारक रहेगा लेकिन उन्नति पाने के लिए आज अपना हठी स्वभाव त्यागना पड़ेगा साथ ही सभी से मित्रवत व्यवहार करना पड़ेगा। आय एक से अधिक साधनों से होगी पर विघ्न डालने वाले भी अधिक रहेंगे अनुभवियों की राय भी आज गलत हो सकती है इसलिये अपने ही विवेक से कार्य करें। व्यवसाय एवं नौकरी में संभावित के साथ अतिरिक्त आय बनाने के अवसर मिलेंगे। महिलाये आज गृहस्थ में खरीददारी के ऊपर ध्यान देंगी सुख के साधनों में वृद्धि होगी इनपर खर्च भी अधिक रहेगा परन्तु अनावश्यक नही लगेगा। संताने मनोकामना पूर्ति होने से प्रसंन्न रहेंगी। बुजुर्ग आपको आडम्बर युक्त दिनचार्य से अवश्य असहमति दिखाएंगे। आरोग्य बना रहेगा।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन आपके लिये राहत भरा रहेगा। बीमार लोगो की सेहत में सुधार आएगा। आज आप व्यावसायिक कार्यो को ज्यादा महत्त्व ना देकर सार्वजनिक अथवा धार्मिक कार्यो में लिप्त रहेंगे। समाज मे मान-सम्मान बढेगा परन्तु घर मे आपका अनादर होगा। आर्थिक मामले लचीले व्यवहार के कारण लंबित रहेंगे फिर भी निर्वाह योग्य आय बना ही लेंगे। व्यावसायिक अथवा अन्य पर्यटक यात्रा के प्रसंग बनेंगे इन्हें भी टालने का भरपूर प्रयास करेंगे आर्थिक दृष्टिकोण से यह निर्णय हित में ही रहेगा। परिवार के बुजुर्ग आपकी किसी बुरी आदत से परेशान रहेंगे महिलाये आज आध्यात्म में ज्यादा रुचि लेंगी घर अस्त-व्यस्त कार्यो को सुधारने में गुस्सा आएगा। सेहत आलस्य को छोड़ सामान्य ही रहेगी।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन आपको शुभफलो की प्राप्ति कराएगा। महिलाये आज कार्य क्षेत्र पर ज्यादा प्रभावशाली रहेंगी। आज आप जिस कार्य को करने की ठान लेंगे उसे अकेले ही पूर्ण करने का सामर्थ्य रखेंगे। व्यवसायी वर्ग को अकस्मात लाभ के अनुबंध मिलेंगे धन लाभ भी बीच बीच मे होते रहने से जोखिम वाले कार्य करने में हिचकेंगे नही। आज आपका कंजूस स्वभाव परिजनों के लिये परेशानी करेगा समय पर मांग पूरी ना होने पर घर मे रूठना मनाना लगा रहेगा। महिलाये मनोरंजन को छोड़ भविष्य के लिये संचय करेंगी। नौकरी पेशा जातको को आज कोई महत्त्वपूर्ण कार्य सौंपा जाएगा आरम्भ में यह परेशानी वाला परन्तु अंत मे सम्मान के साथ ही अतिरिक्त आय भी प्रदान करेगा।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन आपके लिये कोई नई दुविधा लायेगा। दिन का आरंभ आलस्य में खराब होगा इसके बाद कार्यो में व्यस्त हो जाएंगे। धन लाभ की कामना आज भी आशानुकूल पूर्ण नही होगी। गुजारे योग्य आय से ही काम चलाना पड़ेगा। कार्य व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा कम रहेगी फिर भी इसका कोई विशेष लाभ आपको नही मिल सकेगा। आज आपका मन अनर्गल प्रवृतियों में ज्यादा भटकेगा। मौज-शौक के अवसर खाली नही जाने देंगे इनपर खर्च भी आंख बंद करके करेंगे। महिलाये परिवार में किसी सदस्य की उद्दंडता से परेशान रहेंगी लेकिन अपने कार्य व्यवस्थित रखेंगी। घुटनो में दर्द अथवा अन्य शारीरिक परेशानी रहेगी आय की अपेक्षा व्यय अधिक होगा।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज के दिन आप मानसिक रूप से बेचैन रहेंगे। पूर्व में की गई गलतियों का भय बना रहेगा घर एवं बाहर किसी ना किसी से झगड़ा होने की संभावना है वाणी ओर व्यवहार का संतुलित प्रयोग करें अन्यथा मुश्किल होगी। धन संबंधित कार्यो को लेकर आज धैर्य दिखाये महिलाओ का मिजाज भी आज बिगड़ा रहेगा लेकिन किसी के भड़काने पर ही विवाद करेंगी अन्यथा नही। कार्य क्षेत्र पर अव्यवस्था को सुधारने की असफल कोशिश करेंगे लापरवाही के कारण लाभ के अवसर हाथ से निकल सकते है। धन लाभ मध्यान के बाद ही अचानक से होगा। आज कोई भी नई योजना ना बनाए धैर्य से समय व्यतीत करे शीघ्र ही स्थिति आपके पक्ष में होने वाली है।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन आपके लिये विपरीत फलदायक रहेगा कल तक जो आपकी सहायता अथवा समर्थन कर रहे थे आज वे ही आवश्यकता के समय पल्ला झाड़ते नजर आएंगे। कार्य क्षेत्र पर लाभ की आशा की जगह किसी गलती के कारण हानि होने की संभावना है। आज आप आर्थिक संबंधित कार्यो को लेकर किसी अन्य के भरोसे ना बैठे निराशा ही मिलेगी। किसी से कोई वादा ना करें पूरा नही कर पाएंगे। महिलाये भी आज प्रत्येक कार्य देखभाल कर ही करें बिगड़ने की संभावना अधिक है। नौकरी वाले लोगो को कार्य मुक्त अथवा किसी नापसंद कार्य से लगाया जाने से नई उलझन बढ़ेगी। धन की आमद न्यून आकस्मिक खर्च अधिक रहने से बजट बिगड़ेगा। मानसिक विकार आएंगे।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज के दिन आपका आत्मविश्वास बड़ा रहेगा। किसी भी कार्य को करने से पहले उसकी बारीकी से जांच करेंगे जिससे आगे भ्रमित होने की संभावना नही रहेगी। इसके विपरीत महिलाये अधिकांश कार्यो में जल्दबाजी दिखाएंगी जिस के कारण काम तो बिगड़ेगा ही साथ ही बड़ो की डांट भी सुन्नी पड़ेगी। व्यावसायिक स्थिति आपके परिश्रम के ऊपर निर्भर रहेगी नौकरी पेशाओ को भागदौड़ के बाद ही सफलता मिलेगी वही व्यवसायी वर्ग भी प्रतिस्पर्धा अधिक रहने से कुछ कमी अनुभव करेंगे। आज आप पुरानी खट्टी मीठी यादो के ताजा होने से काल्पनिक दुनिया मे भी खोये रहेंगे। परिवार के वातावरण में थोड़ी बहुत नोंकझोंक के बाद भी शांति रहेगी

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“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton