🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक – 13 दिसम्बर 2025*
🌤️ *दिन – शनिवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – हेमंत ॠतु*
🌤️ *मास – पौष (गुजरात-महाराष्ट्र)मार्गशीर्ष*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – नवमी शाम 04:37 तक तत्पश्चात दशमी*
🌤️ *नक्षत्र – हस्त पूर्ण रात्रि तक*
🌤️ *योग – आयुष्मान सुबह 11:17 तक तत्पश्चात सौभाग्य*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 09:50 से सुबह 11:11 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 07:08*
🌤️ *सूर्यास्त – 05:57*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण-
💥 *विशेष – नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
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चंदन — प्रकार, कब लगाएँ और फायदे
कौन-सा चंदन किस दिन/पूजा के लिए उपयुक्त है और लगाने के क्या नियम-नुक़सान हैं।
1)
सफेद चंदन — शीतलता, मानसिक शान्ति। उपयुक्त: सोमवार, विष्णु/शिव की साधारण पूजा।
लाल चंदन — ऊर्जा, साहस, त्वचा संबंधी जलन में लाभ। उपयुक्त: मंगलवार, देवी-पूजा, हनुमान/लक्ष्मी से जुड़ी पूजा।
पीला (गोपी) चंदन — भक्ति, प्रेम, श्रीकृष्ण से जुड़ी भक्ति की पूजा। उपयुक्त: गुरुवार/कृष्ण-भक्ति के अवसर।
सामान्य नियम: स्नान के बाद ही तिलक लगाएँ; तिलक लगाकर मत सोएँ; विवाहित महिलाएं सफेद चंदन से बचें—लाल चंदन या बिंदी उपयुक्त होती है।
2) चंदन के प्रकार —
सफेद चंदन (White Sandalwood)
कब लगाएँ: सोमवार (भगवान शिव), गुरुवार (भगवान विष्णु) या सामान्य पूजा/ध्यान के समय।
मुख्य फायदे: मन को शीतलता, तनाव-निवारण, ध्यान में सहायता; सिरदर्द कम करने में सहायक माना जाता है।
उपयोग: माथे (तिलक), कंठ, नाभि पर हल्का टीका।
लाल चंदन (Red / Rakta Chandan)
कब लगाएँ: मंगलवार (हनुमान), देवी-पूजा (दुर्गा/लक्ष्मी) और उन अवसरों पर जहाँ शक्ति/ऊर्जा माँगी जाती है।
मुख्य फायदे: साहस व पराक्रम बढ़ाने का भाव, धन-समृद्धि के लिए शुभ; सनबर्न/त्वचा जलन में राहत देने वाले पारंपरिक उपयोग।
उपयोग: तिलक के साथ-साथ कभी-कभी सिंदूर/बिंदी के रूप में भी उपयोग।
पीला चंदन / गोपी चंदन (Yellow / Gopi Chandan)
कब लगाएँ: श्रीकृष्ण की आराधना और भक्ति के समय।
मुख्य फायदे: भक्ति भाव, प्रेम, सौंदर्य और सात्त्विकता को बढ़ाता है।
उपयोग: माथे पर मध्यम आकार का तिलक; रंग-घटित टिकिया भी बनाते हैं।
🌷 *राशि विशेष* 🌷
👉🏻 *मेष और वृश्चिक राशि जिनकी है, उनके जीवन में अगर विघ्न, कष्ट और समस्याये आती है | तो उनको चाहिए मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल है | मंगल गायत्री का जप किया करें |*
🌷 *मंगल गायत्री मंत्र ॐ अंगारकाय विद्महे | शक्तिहस्ताय धीमहि | तन्नो भौम प्रचोदयात |…. ॐ मंगलाय नम: ||*
➡ *ये मंगल गायत्री बोले और हर मंगलवार को मसूर की दाल के दाने थोड़े पक्षियों को डाल दे | और जब स्नान करें तो लाल चंदन का पाउडर मिल जाये तो एक चुटकी पाउडर बाल्टी में डाल दिया थोडा हिलाकर उससे स्नान कर दे | बहुत फायदा होगा |*
👉🏻 *वृषभ और तुला राशि जिनकी है वो शुक्रवार को खीर बना लें | उसमे दूध न दिखे चावल पक जाये (दूध और चावल ) शुक्रवार के दिन वो थोड़ी ठंडी करके गौ माता ( देशी गाय ) को खिलाये | पक्षियों कों थोड़े शुक्रवार को चावल के दाने डाल दे | और थोडा इलायची पाउडर, थोडासा केसर पानी में डाल दिया स्नान कर लिया बहुत लाभ होगा |*
👉🏻 *मिथुन और कन्या राशि उसके स्वामी बुध हैं | कन्या राशि के स्वामी राहू भी माने गये हैं | इस राशिवालों को चाहिए की बुधवार को हरे मूंग थोडे से पक्षियों को डाल दे नहीं तो गाय को दे सकते है | और ॐ गं गणपतये नमः जप करें, विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें, गुरुमंत्र का जप जादा करें |*
👉🏻 *कर्क राशि जिनकी है उसके स्वामी चंद्रदेव माने गये है | कर्क राशिवालों को चाहिए की यथाशक्ति थोड़े चावल पक्षियों को डाले और सोमवार को शिवलिंग पर दूध, जल चढ़ाकर मंत्र बोले –*
🌷 *ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्व्वारुकमिव बन्धानान्मृत्यो मृक्षीय मामृतात् ।*
➡ *ये भी याद न रहे तो – ॐ हरि ॐ ॐ करते हुए दूध , जल चढ़ा दिया | चंद्रमा को अर्घ्य दे दिया शुक्ल पक्ष में , दूज से पूनम तक अगर न कर पायें तो हर पूनम को दें चद्रंमा को अर्घ्य और मन में बोले की भगवान ने गीता में अपने कहाँ है – नक्षत्र का अधिपति मैं ही हूँ मेरा अर्घ्य स्वीकार करों और मेरे जीवन में दुःख, दरिद्रता दूर करों, तो बहुत फायदा होगा |*
*👉सिंह राशि जिनकी है इसके स्वामी सूर्य हैं | नित्य सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए | अगर सिंह राशिवालों को अगर तकलीफ आती है तो गेहूँ के दाने थोड़े रोज नहीं तो हर रविवार को पक्षियों को डालने चाहिए | और गेहूँ के आटे की रोटी और गुड़ गाय को खिला दे, गाय न मिले तो किसी गरीब को दे दे और गुरुमंत्र का जप खूब करें | रविवार को विशेष ऐसे लोग जिनकी सिंह राशि है जप जादा करें |*
👉🏻 *धनु और मीन जिनकी राशि है | इसके स्वामी भगवान ब्रहस्पतिजी है | लेकिन मीन के स्वामी केतु भी बताये जाते है | तो धनु और मीन राशिवालों को चाहिए की गुरु के प्रति भक्ति खूब बढ़ाये क्योंकि इसके स्वामी ब्रहस्पतिजी है | धनु और मीन राशि जिनकी है वो रोज थोड़ी देर गुरुदेव की तस्वीर सामने रखकर मंत्र बोले – ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |…… ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |*
➡ *गुरुवार को आम के पेड़ को चावल, जल, चने के दाने मिलाकर चढ़ा सकते है और बैठकर थोड़ी देर गुरुमंत्र का जप कर लें | धनु और मीन राशिवाले गुरु उपासना करनी ही चाहिए और मीन राशि वालों को गणपति का जप – ॐ गं गणपतये नमः करना चाहिए | आप जब सत्संग में बैठते है गुरुदेव के तो पूरा ध्यान गुरुदेव के वचनों में होता है वो आदमी गणपतिजी की उपासना कर रहा है | उसकी हर क्षण गणेश पूजा हो रही है | क्योंकि गणेश विवेक के देवता है भगवान गणेश |*
👉🏻 *मकर और कुंभ राशि जिनकी है | इसके स्वामी शनिदेवता है | तो इन राशिवालों को चाहिए की हनुमान चालीसा का पाठ पूरी ना पढ़ सके तो –*
➡ *मनोजवं मारुततुल्य वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं | वातात्मजं वानरयूथ मुख्यं श्री राम दूतं शरणं प्रपद्ये ||*
💥 *पूरा याद न रहा तो – श्रीरामदूतं शरणम प्रपद्ये | श्रीरामदूतं शरणम प्रपद्ये |*
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🌹 जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष 🌹
दिनांक 13 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 4 होगा। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति जिद्दी, कुशाग्र बुद्धि वाले, साहसी होते हैं। आपका जीवन संघर्षशील होता है। इनमें अभिमान भी होता है। ऐसे व्यक्ति को जीवन में अनेक परिवर्तनों का सामना करना पड़ता है। जैसे तेज स्पीड से आती गाड़ी को अचानक ब्रेक लग जाए ऐसा उनका भाग्य होगा। लेकिन यह भी निश्चित है कि इस अंक वाले अधिकांश लोग कुलदीपक होते हैं। ये लोग दिल के कोमल होते हैं किन्तु बाहर से कठोर दिखाई पड़ते हैं। इनकी नेतृत्त्व क्षमता के लोग कायल होते हैं।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 4, 8, 13, 22, 26, 31,
शुभ अंक : 4, 8,18, 22, 45, 57,
शुभ वर्ष : 2031, 2040, 2060
ईष्टदेव : श्री गणेश, श्री हनुमान
शुभ रंग : नीला, काला, भूरा
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
करियर: नवीन व्यापार की योजना प्रभावी होने तक गुप्त ही रखें। यह वर्ष पिछले वर्ष के दुष्प्रभावों को दूर करने में सक्षम है। आपको सजग रहकर कार्य करना होगा। नौकरीपेशा प्रयास करें तो उन्नति के चांस भी है।
शत्रु पक्ष पर प्रभावपूर्ण सफलता मिलेगी।
परिवार: मान-सम्मान में वृद्धि होगी, वहीं मित्र वर्ग का सहयोग मिलेगा। विवाह के मामलों में आश्चर्यजनक परिणाम आ सकते हैं। परिवारिक मामलों में सहयोग के द्वारा सफलता मिलेगी।
मेष (Aries)
स्वभाव: उत्साही
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: हरा
आज का दिन आपके लिए उलझनों भरा रहने वाला है। आपका किसी नए घर को खरीदने का सपना पूरा होगा, लेकिन जीवनसाथी आपसे किसी बात को लेकर नाराज रहेंगे, इसलिए आपको अपने आसपास रह रहे लोगों से भी दूरी बनाकर रखनी होगी और आप छोटे बच्चों के लिए भी कोई उपहार लेकर आएंगे। सरकारी मामलों में आपको लापरवाही नहीं करनी है। आपकी किसी बात से परिवार में कोई सदस्य नाराज हो सकता है।
वृषभ (Taurus)
स्वभाव: धैर्यवान
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: लाल
आज का दिन आपके लिए मध्यम रूप से फलदायक रहने वाला है। आप अपनी पढ़ाई लिखाई को लेकर काफी स्ट्रीक रहेंगे और किसी प्रतियोगिता में भी भाग ले सकते हैं। आज आपकी अपने अधिकारियों से किसी बात को लेकर कहासुनी हो सकती है, जो आपकी टेंशन को बढ़ा सकती हैं। आपने यदि किसी को धन उधार दिया था, तो वह भी आपको वापस मिल सकता है, लेकिन आपको वाहनों का प्रयोग थोड़ा सावधान रहकर करना होगा, नहीं तो कोई दुर्घटना हो सकती है।
मिथुन (Gemini)
स्वभाव: जिज्ञासु
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: नीला
आज का दिन आपके लिए बढ़िया रहने वाला है, इसलिए आप पार्टनरशिप में भी किसी काम की शुरुआत कर सकते हैं। आपके अंदर आज एक्स्ट्रा एनर्जी रहने से आप प्रत्येक कामों को करने के लिए तत्पर रहेंगे, लेकिन आप अपनी ऊर्जा को सही कामों में लगाए, तो आपके लिए बेहतर रहेगा। आपका किसी बात को लेकर मन परेशान रहेगा। माताजी को आप कहीं घूमाने फिराने लेकर जा सकते हैं। आपको अपने धन और समय दोनों पर ध्यान देना होगा।
कर्क (Cancer)
स्वभाव: भावुक
राशि स्वामी: चंद्र
शुभ रंग: ग्रे
आज का दिन आपके लिए मिश्रित रूप से फलदायक रहने वाला है। आपको कार्य क्षेत्र में अपने रुतबे को बनाए रखने की आवश्यकता है और आपको अपने डेली रूटीन को बेहतर करना होगा। आप सरकारी इन्वेस्टमेंट करने की योजना बना सकते हैं, लेकिन मौसम का प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर पढ़ने से आपकी समस्याएं बढ़ेगी। परिवार में किसी नये मेहमान का आगमन हो सकता है, जिससे मन काफी खुश रहेगा।
सिंह राशि (Leo)
स्वभाव: आत्मविश्वासी
राशि स्वामी: सूर्य
शुभ रंग: आसमानी
आज का दिन आपके लिए जिम्मेदारी से काम करने के लिए रहेगा। आपका अटका हुआ धन मिल सकता है। वैवाहिक जीवन खुशनुमा रहेगा। आपको अपने रुपए पैसों को लेकर किसी पर भरोसा नहीं करना है। परिवार में किसी सदस्य की सेहत मे गिरावट आने से भाग दौड़ बनी रहेगी। पारिवारिक बिजनेस में आपको कुछ समस्याएं आएंगी, जो आपकी टेंशनों को बढ़ाएंगी। संतान भी परीक्षा में मनमानी कर सकती है।
कन्या (Virgo)
स्वभाव: मेहनती
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: बैंगनी
आज का दिन आपके लिए अनुकूल रहने वाला है। करियर में आपको अच्छा उछाल देखने को मिलेगा। रोजगार को लेकर परेशान चल रहे लोगों को भी कोई बेहतर ऑप्शन हाथ लग सकता है। आप अपने रहन सहन के स्तर में बदलाव लाएंगे। प्रेम व सहयोग की भावना आपके मन में बनी रहेगी और आपको किसी की कोई बात बुरी लगने से आपका मन परेशान रहेगा। सरकारी मामलों में आपको एक नई पहचान मिलेगी। ननिहाल पक्ष से कोई व्यक्ति आपसे मेल मिलाप करने आ सकता है।
तुला (Libra)
स्वभाव: संतुलित
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: गोल्डन
आज का दिन आपके लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। आप अपने किसी सहयोगी से कोई जरूरी जानकारी शेयर करने से बचे और आपकी जो योजनाएं रुकी हुई थी, वह फिर से शुरू हो सकती हैं। आपने यदि किसी को धन उधार दिया था, तो आपके उस धन के मिलने की संभावना बन रही है। आप अपनी मेहनत का फल पाकर काफी खुश होंगे। परिवार में आपसी मनमुटाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और कहीं घूमने फिरने जाने की प्लानिंग भी कर सकते हैं।
वृश्चिक (Scorpio)
स्वभाव: रहस्यमय
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: नीला
आज आपको बेवजह किसी बात को लेकर क्रोध करने से बचना होगा और आपको कार्यक्षेत्र में किसी छोटी बात को भी बढ़ाने से बचना होगा। आपका कोई पुराना मित्र आपसे कोई धन संबंधित मदद मांग सकता है, जिसे आप पूरा अवश्य करेंगे। आप अपने लेनदेन से संबंधित मामलों में पूरी स्पष्टता बनाए रखें। आप परिवार के सदस्यों के साथ किसी धार्मिक आयोजन में सम्मिलित हो सकते हैं।
धनु (Sagittarius)
स्वभाव: दयालु
राशि स्वामी: गुरु
शुभ रंग: हरा
आज का दिन आपके लिए धार्मिक कार्य से जुड़कर नाम कमाने के लिए रहेगा। आपकी कुछ अनोखी कोशिशे रंग लाएगी। व्यापार में भी आप किसी के साथ डील फाइनल करने की सोचेंगे, जो आपके लिए अच्छी रहेगी। आप अपने घर की साफ सफाई व रखरखाव पर पूरा ध्यान देंगे। आपको अपने आसपास रह रहे विरोधियों को पहचान कर चलना होगा। माता-पिता के आशीर्वाद से आपको कोई रुका हुआ काम पूरा हो सकता है।
मकर (Capricorn)
स्वभाव: अनुशासित
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग:ग्रे
आज का दिन आपके लिए बाकी दिनों की तुलना में अच्छा रहने वाला है। माता पिता के आशीर्वाद से आपका रुका हुआ काम पूरा होगा। घूमने फिरने के दौरान आपको कोई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी, जो जातक सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे हैं, उन्हें कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। विद्यार्थियों को पढ़ाई लिखाई में एकाग्र होकर जुटना होगा। आपको किसी अजनबी पर भरोसा करने से बचना होगा और अपने कामों को लेकर योजना बनाकर चले, तो आपके लिए बेहतर रहेगा।
कुंभ ( Aquarius)
स्वभाव: मानवतावादी
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: बैंगनी
आज का दिन आपके लिए बढ़िया रहने वाला है। परिवार में किसी सदस्य को नई नौकरी के मिलने से कहीं बाहर जाना पड़ सकता है। आपको एक के बाद एक खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। जीवन साथी आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। आप प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट करने की प्लानिंग कर सकते हैं। आप अपने माताजी से किए हुए वादे को लेकर थोड़ा परेशान रहेंगे और आपका कोई मित्र आपसे मेल मिलाप करने आ सकता है।
मीन (Pisces)
स्वभाव: संवेदनशील
राशि स्वामी: बृहस्पति
शुभ रंग: सफेद
आज आपको थोड़ा सावधानी बरतने की आवश्यकता है। आप किसी प्रॉपर्टी की खरीदारी करते समय उसके चल व अचल पहलुओं पूरा ध्यान दें, नहीं तो आप कोई गलत डिसीजन ले सकते हैं। बिजनेस में भी आपको मेहनत जारी रखनी होगी, तभी कोई अच्छा मुकाम हासिल होगा और अपने पेंडिंग पड़े कामों को भी समय से पूरा करने की कोशिश करेंगे। प्रेम जीवन जी रहे लोगों को अपने साथी के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। मौसम का विपरीत प्रभाव आपके स्वास्थ्य का पड़ सकता है।
. *हनुमानजी का अद्भुत पराक्रम*
राम रावण युद्ध के समय जब रावण ने देखा कि हमारी पराजय निश्चित है तो उसने अपने 60 हजार अमर राक्षसों को बुलाकर रणभूमि में भेजने का आदेश दिया ! ये ऐसे थे जिनको काल भी नहीं खा सका था!
विभीषण के गुप्तचरों से समाचार मिलने पर श्रीराम को चिंता हुई कि हम लोग इनसे कब तक लड़ेंगे ? सीता का उद्धार और विभीषण का राज तिलक कैसे होगा? क्योंकि युद्ध कि समाप्ति असंभव है !
श्रीराम कि इस स्थिति से वानरवाहिनी के साथ कपिराज सुग्रीव भी विचलित हो गए कि अब क्या होगा ? हम अनंत काल तक युद्ध तो कर सकते हैं पर विजयश्री का वरण नहीं ! पूर्वोक्त दोनों कार्य असंभव हैं !
अंजनानंदन हनुमान जी आकर वानर वाहिनी के साथ श्रीराम को चिंतित देखकर बोले –प्रभु क्या बात है ?
श्रीराम के संकेत से विभीषण जी ने सारी बात बतलाई ! अब विजय असंभव है !
पवन पुत्र ने कहा –असम्भव को संभव और संभव को असम्भव कर देने का नाम ही तो हनुमान है !
प्रभु आप केवल मुझे आज्ञा दीजिए मैं अकेले ही जाकर रावण की अमर सेना को नष्ट कर दूँगा ! कैसे हनुमान ? वे तो अमर हैं !
प्रभु ! इसकी चिंता आप न करें सेवक पर विश्वास करें ! उधर रावण ने चलते समय राक्षसों से कहा था कि वहां हनुमान नाम का एक वानर है उससे जरा सावधान रहना !
एकाकी हनुमानजी को रणभूमि में देखकर राक्षसों ने पूछा तुम कौन हो क्या हम लोगों को देखकर भय नहीं लगता जो अकेले रणभूमि में चले आये !
हनुमान जी –क्यों आते समय राक्षस राज रावण ने तुम लोगों को कुछ संकेत नहीं दिया था क्या, जो मेरे समक्ष निर्भय खड़े हो ! निशाचरों को समझते देर न लगी कि ये ही महाबली हनुमान हैं ! तो भी क्या ? हम अमर हैं हमारा ये क्या बिगाड़ लेंगे !
भयंकर युद्ध आरम्भ हुआ हनुमानजी की मार से राक्षस रणभूमि में ढेर होने लगे चौथाई सेना बची थी कि पीछे से आवाज आई हनुमान हम लोग अमर हैं हमें जीतना असंभव है ! अतः अपने स्वामी के साथ लंका से लौट जावो इसी में तुम सबका कल्याण है !
हनुमानजी ने कहा लौटूंगा अवश्य पर तुम्हारे कहने से नहीं ! अपितु अपनी इच्छा से ! हाँ तुम सब मिलकर आक्रमण करो फिर मेरा बल देखो और रावण को जाकर बताना !
राक्षसों ने जैसे ही एक साथ मिलकर हनुमानजी पर आक्रमण करना चाहां वैसे ही हनुमानजी ने उन सबको अपनी पूंछ में लपेटकर ऊपर आकाश में फेंक दिया !
वे सब पृथ्वी कि गुरुत्वाकर्षण शक्ति जहाँ तक है वहां से भी ऊपर चले गए ! चले ही जा रहे हैं
चले मग जात सूखि गए गात
गोस्वामी तुलसीदास !
उनका शरीर सूख गया अमर होने के कारण मर सकते नहीं !
अतः रावण को गाली देते हुए और कष्ट के कारण अपनी अमरता को कोसते हुए अभी भी जी रहे हैं !
इधर हनुमान जी ने आकर प्रभु के चरणों में शीश झुकाया !
श्रीराम बोले –क्या हुआ हनुमान ! प्रभो ! उन्हें ऊपर भेजकर आ रहा हूँ !
श्रीराम –पर वे अमर थे हनुमान!
हनुमानजी – हाँ स्वामी इसलिए उन्हें जीवित ही ऊपर भेज आया हूँ अब वे कभी भी नीचे नहीं आ सकते ? रावण को अब आप शीघ्रातिशीघ्र ऊपर भेजने की कृपा करें जिससे माता जानकी का आपसे मिलन और महाराज विभीषण का राजसिंहासन हो सके !
हनुमानजी को प्रभु ने उठाकर गले लगा लिया ! वे धन्य हो गए अविरल भक्ति का वर पाकर ! श्रीराम उनके ऋणी बन गए और बोले –
हनुमानजी—आपने जो उपकार किया है वह मेरे अंग अंग में ही जीर्ण शीर्ण हो जाय मैं उसका बदला न चुका सकूँ ,क्योकि उपकार का बदला विपत्तिकाल में ही चुकाया जाता है !
पुत्र ! तुम पर कभी कोई विपत्ति न आये !निहाल हो गए हनुमानजी !
श्रीराम का कथन है कि हनुमानजी की वीरता के समान साक्षात काल देवराज इन्द्र महाराज कुबेर तथा भगवान विष्णु की भी वीरता नहीं सुनी गयी।
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“सोने के सिक्के” चलाने वाला भारत को “सोने की चिड़िया” बनाने वाले हिन्दू राजा की गाथाएं।
आओ हिन्दुओ तुम्हे सुनाता हूँ, सुनाता हूँ कि कैसे ईसाइयों व मुस्लिमो के सेकुलर हिन्दुओ के साथ मिलकर रचे गए शिक्षा व्यवस्था के षड्यंत्र के कारण महान हिन्दू राजाओं का असली इतिहास हम हिंदुपुत्रों से छुपाकर रखा गया, सरकारी पाठ्यक्रमों में महान हिन्दू राजा वीर विक्रमादित्य परमार की गाथाओं को नहीँ पढ़ाया गया, नतीजन हम अपना असली इतिहास से अनभिज्ञ अपना हिन्दुत्वि पौरुषिक आंकलन नहीँ कर सके, और सेकुलरिज्म की एक बहुत बड़ी मतांन्ध युवा पीढ़ी पैदा कर बैठे, जो हमारे ग्रन्थों व असली इतिहास के विरुद्ध तर्क वितर्क करने पर आमादा हो गई, आओ अपना पौरुषिक इतिहास जिंदा करें, आओ हिन्दुओ अपने बच्चो को महान हिन्दू राजा का असली इतिहास बताएं।
आपने बचपन से कई बार एक बात जरूर सुनी होगी की भारत पहले सोने की चिड़िया था और भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। पर क्या आप ये जानते है कि भारत को सोने की चिड़िया आखिर किसने बनाया था। नहीं ना तो हम बताते है कि वो राजा थे विक्रनादित्य।
बड़े ही शर्म की बात है कि महाराज विक्रमदित्य के बारे में देश को लगभग शून्य बराबर ज्ञान है, जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था, और स्वर्णिम काल लाया था।
उज्जैन के राजा गंधर्वसैन की तीन संताने थी सबसे बड़ी पुत्री मैनावती फिर पुत्र भृतहरि व सबसे छोटा पुत्र विक्रमादित्य। राजा गंधर्वसैन के बाद उज्जैन का राजा भृतहरि बना जिसकी रानी का नाम पिंगला था। राजा भृतहरि अपनी रानी पिंगला को बहुत प्यार करते थे लेकिन रानी पिंगला अस्तबल की एक शहीस से प्यार करती थी और शहीश एक नर्तकी वेश्या से प्यार करता था। एक दिन विक्रमादित्य ने शहीश और भाभी पिंगला को गलत अवस्था में देख लिया तो उसने भाभी को काफी लताड़ लगाई। पिंगला रानी ने सोचा कि विक्रमादित्य राजा भर्तृहरि को सच्चाई ना बता दे उसने विक्रमादित्य पर ही अपने से चिपटने का आरौप लगा दिया और विक्रमादित्य के लिए मृत्यु दंड मांगा। अपनी पत्नी के प्यार में पागल राजा भृतहरि ने विक्रमादित्य को मृत्युदण्ड दिया और जल्लादों को विक्रमादित्य को जंगल में ले जाकर कत्ल करके उसकी आंखें निकालकर लाने का हुक्म दिया। पर जल्लादों ने विक्रमादित्य से ये वचन लेकर छोड़ दिया कि वो उज्जैन में कभी ना आए और एक हिरन को मारकर उसकी आंखें राजा भृतहरि को पेश कर दी। राजा भृतहरि बहुत ही न्यायप्रिय राजा थे। एक साधु ने राजा भृतहरि की न्यायप्रियता से खुश होकर एक अमरफल राजा भृतहरि को दिया था। राजा ने वह फल अपनी रानी पिंगला को दे दिया और पिंगला रानी ने वह अमरफल अपने प्रेमी शहीश को और शहीश ने वह फल अपनी प्रेमिका नर्तकी वेश्या को दे दिया। नर्तकी वेश्या ने सोचा मैं अमर होकर क्या करूंगी और उसने वह फल राजा भृतहरि को पेश किया। तब राजा ने नर्तकी से पूछा कि वह फल उसे कहां से मिला तो उसने शहीश का नाम लिया शहीश को बुलवाकर पूछा तो उसने सच्चाई बता दी कि रानी पिंगला उससे प्यार करती है उसने यह फल उसे दिया था।
तब राजा भृतहरि ने पिंगला से अमरफल के बारे में पूछा तो रानी बोली कि वह फल उसने खा लिया है, तब राजा भृतहरि ने वह फल रानी को दिखाया और कहा बदकार नार तूने शहीश के प्यार के चक्कर में मेरे विक्रमादित्य जैसे बेकसूर भाई को मरवा दिया और रानी की गर्दन तलवार से काट दी। फिर राजा भृतहरि ने जल्लादों को बुलवाकर रोते हुए पूछा कि उन्होंने उसके भाई विक्रमादित्य का कत्ल किस जगह किया था वहां उसे ले चले। तब जल्लादों ने राजा भृतहरि को रोते देखकर बता दिया कि उन्होंने विक्रमादित्य का कत्ल नही किया था बल्कि उसे ये हिदायत देकर छोड़ दिया था कि कभी भी उज्जैन में ना आये और एक हिरन को मारकर उसकी आंखें पेश की थी। राजा भृतहरि ने अपनी सेना को हुक्म दिया कि वो विक्रमादित्य को ढूंढकर लाए उसकी सेना के जवानों ने विक्रमादित्य को एक साधु के यहां ढूंढ निकाला और विक्रमादित्य को पिंगला रानी की सारी दास्तान सुना दी और बताया कि राजा भृतहरि उसकी याद में दिन रात रोता रहता है।
विक्रमादित्य को राजा भृतहरि के सामने पेश किया गया तो दोनों भाई फुट फुट कर गले मिलकर रोए राजा भृतहरि ने सन्यासः ले लिया और राजपाट विक्रमादित्य को सौंप दिया।
और राजा भृतहरि के बाद ही मैनावती के पुत्र गोपीचंद ने सन्यासः लिया था। राजा भृतहरि और उसके भानजे गोपीचंद के गुरु गुरु गोरखनाथ थे।
बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसैन के साथ कर दी, जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द, आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए। विक्रमादित्य का इतिहास भारत के स्वर्णिम इतिहास का प्रतीक है आइए जानते हैं विक्रमादित्य के बारे में…
ऐसे देश बना सोने की चिड़िया:विक्रमादित्य के समय में हमारे देश की आर्थिक दशा काफी अच्छी थी। वो ऐसा समय था जिसने भारत को सोने की चिड़िया बनाया और सबसे आगे लाकर खड़ा कर दिया था। महाराज विक्रमदित्य ने केवल धर्म ही नही बचाया उन्होंने देश को आर्थिक तौर पर सोने की चिड़िया बनाई, उनके राज को ही भारत का स्वर्णिम राज कहा जाता है।
विदेश जाता था कपड़ा:
विक्रमदित्य के काल में भारत का कपडा, विदेशी व्यपारी सोने के वजन से खरीदते थे भारत में इतना सोना आ गया था की, विक्रमदित्य काल में सोने की सिक्के चलते थे। इसी कारण वो कपड़े का व्यापार और सोने के सिक्कों के टलन ने भारत को सोने की चिड़िया का नाम दिया गया था।
न्याय के लिए प्रसिद्ध था ये काल:
आपने शुरु से ही किताबों में राजा विक्रमादित्य के न्याय की कहानियां जरूर सुनी होंगी। ऐसा माना जाता है कि उनके न्याय से प्रसन्न होकर कई बार तो देवता भी उनसे न्याय करवाने आते थे, विक्रमदित्य के काल में हर नियम धर्मशास्त्र के हिसाब से बने होते थे, न्याय, राज सब धर्मशास्त्र के नियमो पर चलता था विक्रमदित्य का काल राम राज के बाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है, जहाँ प्रजा धनि और धर्म पर चलने वाली थी। इसी कारण राजा विक्रमादित्य को न्याय का प्रतीक माना जाता है।
खो गए थे रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ:
क्या आप जानते है कि कुछ काम उनके समय में ऐसे हुए जो कि ना होते तो आज रामायण और महाभारत जैसे महान ग्रंथ आपके पास ना होते। रामायण, और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी खोज करवा कर स्थापित किया विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचाया।
राजा के नौरत्नों में एक थे कालिदास:
विक्रमदित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम् लिखा, जिसमे भारत का इतिहास है अन्यथा भारत का इतिहास क्या मित्रो हम भगवान् कृष्ण और राम को ही खो चुके थे हमारे ग्रन्थ ही भारत में खोने के कगार पर आ गए थे। विक्रमादित्य के इतिहास को सदा के लिए याद किया जाता रहेगा।
जनता भूलती जा रही है:
इस समय तो ऐसा देखने को मिल जाएगा कि जनता विक्रमादित्य को भूलती जा रही है। जिसने भारत को सोने की चिड़िया बनाने के लिए इतना संघर्ष किया आज उसी राजा का नाम हमारी पीढी नहीं जानती है। किताबों से उनका नाम मिटता जा रहा है। जो कि आने वाली पीढ़ी के लिए चिंता का विषय है।
विक्रमादित्य के जन्म को लेकर अलग अलग इतिहासकारों की अलग अलग मान्यताएं हैं। फिर भी ऐसा माना जाता है कि उनका जन्म 102 ई पू के आस पास हुआ था।
महेसरा सूरी नामक एक जैनी साधू के अनुसार उज्जैन के एक बहुत बड़े शासक गर्दाभिल्ला ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करके एक सन्यासिनी का अपहरण कर लिया था, जिसका नाम सरस्वती था। संयासिनी के भाई ने मदद की गुहार लगाने एक शक शासक के दरबार में गया।
शक शासक ने उसकी मदद की और युद्ध में गर्दाभिल्ला से उस सन्यासिनी को रिहा कराया। कुछ समय के बाद गर्दाभिल्ला को एक जंगल में छोड़ दिया गया, जहाँ पर वह जंगली जानवरों का शिकार हो गया।
राजा विक्रमादित्य इसी गर्दाभिल्ला के पुत्र थे। अपने पिता के साथ हुए दुर्व्यवहार को देखते हुए राजा विक्रमादित्य ने बदला लेने की ठानी।
इधर शक शासकों को अपनी शक्ति का अंदाजा हो गया। वो उत्तरी पश्चिमी भारत में अपना राज्य फैलाने लगे और हिन्दुओं पर अत्याचार करने लगे। शक शासकों की क्रूरता बढती गयी।
सन 78 के आस पास राजा विक्रमादित्य ने शक शासक को पराजित किया और करुर नाम के एक स्थान पर उस शासक की हत्या कर दी। करूर वर्तमान के मुल्तान और लोनी के आस पास पड़ता है। कई ज्योतिषी और आम लोगों ने इस घटना पर महाराजा को शकारि की ऊपधि दी और विक्रमी संवत की शुरुआत हुई। विक्रम संवत 2073 का इतिहास के बारे में पढ़ें।
भविष्यत् पुराण की मान्यताओं के आधार पर भगवान शिव ने विक्रमादित्य को पृथ्वी पर भेजा था। शिव की पत्नी पार्वती ने बेताल को उनकी रक्षा के लिए और उनके सलाहकार के रूप में भेजा।
बैताल की कहानियों को सुनकर राजा ने अश्वमेघ यज्ञ करवाया, उस यज्ञ के बाद उस घोड़े को विचरने के लिए छोड़ दिया गया, जहाँ जहाँ वह घोड़ा गया राजा का राज्य वहाँ तक फ़ैल गया। पश्चिम में सिन्धु नदी, उत्तर में बद्रीनाथ, पूर्व में कपिल और दक्षिण मे रामेश्वरम तक इस राजा का राज्य फ़ैल गया।
राजा ने उस समय के चार अग्निवंशी राजाओं की राजकुमारियों से विवाह कर अपने राज्य को और मजबूत कर लिया। राजा विक्रमादित्य द्वारा स्थापित राज्य में कुल 18 राज्य थे। विक्रमादित्य की इस सफलता पर सभी सूर्यवंशी खुश थे और चंद्रवंशी राज्यों में कोई ख़ुशी नहीं थी। इसके बाद राजा ने स्वर्ग का रुख किया।
ऐसा माना जाता है कि राजा विक्रमादित्य कलियुग के आरम्भ में कैलाश की ओर से पृथ्वी पर आये थे। उन्होंने महान साधुओं का एक दल बनाया जो पुराण और उप पुराण का पाठ किया करते थे। इन साधुओं में गोरखनाथ, भर्तृहरि, लोमहर्सन, सौनाका आदि प्रमुख थे। इस तरह न्याय प्रिय राजा विक्रमादित्य ने अपने पराक्रम से लोगों की रक्षा भी की और साथ ही सदा धर्म स्थापना के कार्य में लगे रहे।
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कौआ चींटी ओर कुत्ते का महत्व
प्राचीन समय के ऋषियों मुनियों ने अपने शोध में बताया था की प्रत्येक जानवर के विचित्र व्यवहार एवं हरकतों का कुछ न कुछ प्रभाव अवश्य होता है. जानवरों के संबंध में अनेको बाते हमारे पुराणों एवं ग्रंथो में भी विस्तार से बतलाई गई है।
हमारे सनातन धर्म में माता के रूप में पूजनीय गाय के संबंध में तो बहुत सी बाते आप लोग जानते है होंगे परन्तु आज हम जानवरों के संबंध में पुराणों से ली गई कुछ ऐसी बातो के बारे में बतायेंगे जो आपने पहले कभी भी किसी से नहीं सुनी होगी. जानवरों से जुड़े रहस्यों के संबंध में पुराणों में बहुत ही विचित्र बाते बतलाई गई जो किसी को आश्चर्य में डाल देंगी।
कौए का रहस्य :-
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कौए के संबंध में पुराणों बहुत ही विचित्र बाते बतलाई गई है मान्यता है की कौआ अतिथि आगमन का सूचक एवं पितरो का आश्रम स्थल माना जाता है।
हमारे धर्म ग्रन्थ की एक कथा के अनुसार इस पक्षी ने देवताओ और राक्षसों के द्वारा समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत का रस चख लिया था. यही कारण है की कौआ की कभी भी स्वाभाविक मृत्यु नहीं होती. यह पक्षी कभी किसी बिमारी अथवा अपने वृद्धा अवस्था के कारण मृत्यु को प्राप्त नहीं होता. इसकी मृत्यु आकस्मिक रूप से होती है।
यह बहुत ही रोचक है की जिस दिन कौए की मृत्यु होती है उस दिन उसका साथी भोजन ग्रहण नहीं करता. ये आपने कभी ख्याल किया हो तो यह बात गौर देने वाली है की कौआ कभी भी अकेले में भोजन ग्रहण नहीं करता यह पक्षी किसी साथी के साथ मिलकर ही भोजन करता है।
कौआ की लम्बाई करीब 20 इंच होता है, तथा यह गहरे काले रंग का पक्षी है. जिनमे नर और मादा दोनों एक समान ही दिखाई देते है. यह बगैर थके मिलो उड़ सकता है. कौए के बारे में पुराण में बतलाया गया है की किसी भविष्य में होने वाली घटनाओं का आभास पूर्व ही हो जाता है।
पितरो का आश्रय स्थल :- श्राद्ध पक्ष में कौए का महत्व बहुत ही अधिक माना गया है . इस पक्ष में यदि कोई भी व्यक्ति कौआ को भोजन कराता है तो यह भोजन कौआ के माध्यम से उसके पीतर ग्रहण करते है. शास्त्रों में यह बात स्पष्ट बतलाई गई है की कोई भी क्षमतावान आत्मा कौए के शरीर में विचरण कर सकती है।
भादौ महीने के 16 दिन कौआ हर घर की छत का मेहमान बनता है. ये 16 दिन श्राद्ध पक्ष के दिन माने जाते हैं. कौए एवं पीपल को पितृ प्रतीक माना जाता है. इन दिनों कौए को खाना खिलाकर एवं पीपल को पानी पिलाकर पितरों को तृप्त किया जाता है।
कौवे से जुड़े शकुन और अपशकुन :-
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1 . यदि आप शनिदेव को प्रसन्न करना चाहते हो कौआ को भोजन करना चाहिए
2 . यदि आपके मुंडेर पर कोई कौआ बोले तो मेहमान अवश्य आते है।
3 . यदि कौआ घर की उत्तर दिशा से बोले तो समझे जल्द ही आप पर लक्ष्मी की कृपा होने वाली है।
4 . पश्चिम दिशा से बोले तो घर में मेहमान आते है।
5 . पूर्व में बोले तो शुभ समाचार आता है।
6 . दक्षिण दिशा से बोले तो बुरा समाचार आता है।
7 . कौवे को भोजन कराने से अनिष्ट व शत्रु का नाश होता है।
चीटियों का रहस्य :-
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चीटियों को हम एक बहुत तुच्छ एवं छोटा जानवर समझते है, परन्तु चीटियां बहुत ही मेहनती और एकता से रहने वाला जीव है. सामूहिक प्राणी होने के कारण चींटी सभी कार्यों को बांटकर करती है.
विश्वभर में लगभग 14000 से अधिक प्रजाति की चीटियां है।
चींटी के बारे में वैज्ञानिकों ने कई रहस्य उजागर किए हैं. चींटियां आपस में बातचीत करती हैं, वे नगर बनाती हैं और भंडारण की समुचित व्यवस्था करना जानती हैं. हमारे इंजीनियरों से कहीं ज्यादा बेहतर होती हैं चींटियां. चींटियों का नेटवर्क दुनिया के अन्य नेटवर्क्स से कहीं बेहतर होता है. ये मिलकर एक पहाड़ को काटने की क्षमता रखती है।
चींटियां शहर को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं. चींटियां खुद के वजन से 100 गुना ज्यादा वजन उठा सकती हैं. मानव को चींटियों से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।
चीटियों दो प्रकार की होती है लाल चीटियां एवं काली चीटियां. शास्त्रों के अनुसार लाल चीटियां को शुभ तथा काली चीटियों को अशुभ माना गाय है. दोनों ही तरह की चींटियों को आटा डालने की परंपरा प्राचीनकाल से ही विद्यमान है. चींटियों को शकर मिला आटा डालते रहने से व्यक्ति हर तरह के बंधन से मुक्त हो जाता है।
हजारों चींटियों को प्रतिदिन भोजन देने से वे चींटियां उक्त व्यक्ति को पहचानकर उसके प्रति अच्छे भाव रखने लगती हैं और उसको वे दुआ देने लगती हैं. चींटियों की दुआ का असर आपको हर संकट से बचा सकता है।
* यदि आप कर्ज से परेशान है तो चीटियों को शक़्कर और आता डाले. ऐसा करने पर कर्ज की समाप्ति जल्द हो जाती है।
* जो प्रत्येक दिन चीटियों को आता देता है वह वैकुंठ धाम को प्रस्थान करता है।
* यदि आप लाल चीटियों को मुंह में अंडे दबाए देखते हो यह भी शुभ माना जाता है तथा परिवार में सुख समृद्धि बढ़ती है।
कुत्ते का रहस्य :-
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हमारे पुराणों में यह बतलाया गया है की कुत्ता यमराज दूत है . कुत्ते को भैरव देवता का सेवक भी कहा जाता है. भैरव देवता को प्रसन्न करने के लिए कुत्ते को भोजन करना चाहिए. यदि भैरव देवता अपने भक्त से प्रसन्न रहते है तो किसी भी प्रकार की समस्या एवं रोग उसे छू नहीं सकता।
मान्यता है की यदि आप कुत्ते को प्रसन्न रखते है तो वह आपके सामने किसी भी तरह की आत्माओं को फटकने नहीं देता. आत्माएं कुत्ते से दूर भागती है।
कुत्ते की क्षमता के बारे में पुराण में बतलाया गया है की दरअसल कुत्ता एक ऐसा प्राणी है जिसे भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्व आभास होता है तथा वह सूक्ष्म जगत को यानि की आत्माओं को देख सकता है।
हिन्दू धर्म में कुत्ते को एक रहस्मयी प्राणी माना गया है, परन्तु इसे भोजन कराने से हर प्रकार के संकट से बचा जा सकता है।
कुत्ते से जुड़े शकुन एवं अपशकुन :-
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1 . कुत्ते की रोने की आवाज को अपशकुन माना जाता है. जब भी कुत्ता कराहता है तो समझ लीजिए की नकरात्मक शक्तियां आस पास है।
2 . शस्त्रों में कुत्ते के संबंध में यह बात कहि गई की यदि किसी परिवार में रोगी हो तो कुत्ता पालने से वह रोगी की बिमारी को अपने उपार ले लेता है।
3 . यदि किसी शुभ कार्य के दौरान कुत्ता आपका मार्ग रोके तो इसे विषमता या अनिश्चय प्रकट होती है।
4 . यदि संतान की प्राप्ति न हो रही हो तो काले कुत्ते को पालना चाहिए।
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