🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 12 अक्टूबर 2025*
🌤️ *दिन – रविवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शरद ऋतु*
🌤️ *मास – कार्तिक (गुजरात-महाराष्ट्र आश्विन*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – षष्ठी दोपहर 02:16 तक तत्पश्चात सप्तमी*
🌤️ *नक्षत्र – मृगशिरा दोपहर 01:36 तक तत्पश्चात आर्द्रा*
🌤️ *योग – वरीयान सुबह 10:55 तक तत्पश्चात परिघ*
🌤️ *राहुकाल – शाम 04:49 से शाम 06:17 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:34*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:15*
👉 *दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – रविवारी सप्तमी (दोपहर 02:16 से 13 अक्टूबर सूर्योदय तक)*
💥 *विशेष – षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
🌷 *पटाखों से जलने पर* 🌷
🎆 *पटाखों से जलने पर जले हुए स्थान पर कच्चे आलू के पतले पतले चिप्स काट कर रख दें या आलू का रस लगा दें । और कुछ ना लगाये । इससे १-२ घंटे में आराम हो जायेगा ।*
🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *राहु मंत्र* 🌷
🙏🏻 *राहुदेवता का मंत्र है ..*
🌷 *ॐ राहवे नम: | ॐ राहवे नम: |*
🙏🏻 *अर्धकाय महावीर्यं, चंद्रादित्य विमर्दनं |*
*सिंहिका गर्भसंभूतं ,तं राहूं प्रणमाम्यहं ||*
🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *शास्त्रों के अनुसार* 🌷
🔵 *दीपावली के दिनों में न करें ये 7 काम*
🙏🏻 *दीपावली के दिनों में देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के उपाय किए जाते है, पूजा की जाती है, लेकिन इन उपायों के साथ ही कुछ सावधानियां भी रखनी जरूरी हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि दीपावली के दिनों में हमें कौन-कौन काम नहीं करना चाहिए। यदि वर्जित किए गए काम दीपावली पर किए जाते हैं तो कई उपाय करने के बाद भी लक्ष्मी कृपा प्राप्त नहीं हो पाती है।*
🔵 *यहां जानिए दीपोत्सव में कौन-कौन से काम न करें…*
❌ *सुबह देर तक नहीं सोना चाहिए*
*वैसे तो हर रोज सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए, लेकिन काफी लोग ऐसे हैं जो सुबह देर से ही उठते हैं। शास्त्रों के अनुसार दीपावली के दिनों में ब्रह्म मुहूर्त में ही उठ जाना चाहिए। जो लोग इन दिनों में सूर्योदय के बाद तक सोते रहते हैं, उन्हें महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं हो पाती है।*
❌ *माता-पिता और बुजुर्गों का अपमान न करें*
*दीपावली पर इस बात का विशेष ध्यान रखें कि किसी भी परिस्थिति में कोई अधार्मिक काम न हो। माता-पिता एवं बुजुर्गों का सम्मान करें। जो लोग माता-पिता का अनादर करते हैं, उनके यहां देवी-देवताओं की कृपा नहीं होती है और दरिद्रता बनी रहती है। किसी को धोखा ना दें। झूठ न बोलें। सभी से प्रेम पूर्वक व्यवहार करें।*
❌ *घर में गंदगी न रखें*
*दीपावली पर घर में गंदगी नहीं होना चाहिए। घर का कोना-कोना एकदम साफ एवं स्वच्छ होना चाहिए। किसी भी प्रकार की बदबू घर में या घर के आसपास नहीं होनी चाहिए। सफाई के साथ ही घर को महकाने के लिए सुगंधित पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है।*
❌ *क्रोध न करें*
*दीपावली पर क्रोध नहीं करना चाहिए और जोर से चिल्लाना भी अशुभ रहता है। जो लोग इन दिनों क्रोध करते हैं या जोर से चिल्लाते हैं, उन्हें लक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं हो पाती है। घर में शांत, सुखद एवं पवित्र वातावरण बनाए रखना चाहिए। लक्ष्मी ऐसे घरों में निवास करती हैं जहां शांति रहती है।*
❌ *शाम के समय न सोएं*
*कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर दिन में या शाम के समय सोना नहीं चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बीमार है, वृद्ध है या कोई स्त्री गर्भवती है तो वह दिन में या शाम को सो सकती हैं, लेकिन स्वस्थ व्यक्ति को दिन में या शाम को सोना नहीं चाहिए। शास्त्रों के अनुसार जो लोग ऐसे समय में सोते हैं, वे निर्धन बने रहते हैं।*
❌ *वाद-विवाद न करें*
*इन दिनों में इस बात का भी ध्यान रखें कि घर में किसी भी प्रकार का कलह या झगड़ा नहीं होना चाहिए। घर-परिवार के सभी सदस्य प्रेम से रहें और खुशी का माहौल बनाकर रखें। जिन घरों में झगड़ा या कलह होता है, वहां देवी की कृपा नहीं होती है। घर के साथ ही बाहर भी इस बात का ध्यान रखें कि किसी से वाद-विवाद या झगड़ा ना करें।*
❌ *नशा न करें*
*शास्त्रों के अनुसार इन दिनों में किसी भी प्रकार का नशा करना वर्जित किया गया है। जो लोग दीपावली के दिन नशा करते हैं, वे हमेशा दरिद्र रहते हैं। नशे की हालत में घर की शांति भंग हो सकती है और सभी सदस्यों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। इससे बचना चाहिए। अन्यथा वाद-विवाद हो सकते हैं और लक्ष्मी पूजा भी ठीक से नहीं हो पाती है।*
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

*हनुमान चालीसा में छिपे मैनेजमेंट के सूत्र…*
कई लोगों की दिनचर्या हनुमान चालीसा पढ़ने से शुरू होती है।
पर क्या आप जानते हैं कि श्री हनुमान चालीसा में 40 चौपाइयाँ हैं,
ये उस क्रम में लिखी गई हैं जो एक आम आदमी की जिंदगी का क्रम होता है।
माना जाता है तुलसीदास ने चालीसा की रचना मानस से पूर्व किया था।
हनुमान को गुरु बनाकर उन्होंने राम को पाने की शुरुआत की।
अगर आप सिर्फ हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं तो यह आपको भीतरी शक्ति तो दे रही है लेकिन अगर आप इसके अर्थ में छिपे जिंदगी के सूत्र समझ लें तो आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिला सकते हैं।
हनुमान चालीसा सनातन परंपरा में लिखी गई पहली चालीसा है शेष सभी चालीसाऐं इसके बाद ही लिखी गई।
हनुमान चालीसा की शुरुआत से अंत तक सफलता के कई सूत्र हैं।
आइए जानते हैं हनुमान चालीसा से आप अपने जीवन में क्या-क्या बदलाव ला सकते हैं….
शुरुआत गुरु से…
हनुमान चालीसा की शुरुआत गुरु से हुई है…
श्रीगुरु चरन सरोज रज,
निज मनु मुकुरु सुधारि।
अर्थ – अपने गुरु के चरणों की धूल से अपने मन के दर्पण को साफ करता हूँ।
गुरु का महत्व चालीसा की पहले दोहे की पहली लाइन में लिखा गया है।
जीवन में गुरु नहीं है तो आपको कोई आगे नहीं बढ़ा सकता।
गुरु ही आपको सही रास्ता दिखा सकते हैं।
इसलिए तुलसीदास ने लिखा है कि गुरु के चरणों की धूल से मन के दर्पण को साफ करता हूँ।
आज के दौर में गुरु हमारा मेंटोर भी हो सकता है, बॉस भी।
माता-पिता को पहला गुरु ही कहा गया है।
समझने वाली बात ये है कि गुरु यानी अपने से बड़ों का सम्मान करना जरूरी है।
अगर तरक्की की राह पर आगे बढ़ना है तो विनम्रता के साथ बड़ों का सम्मान करें।
ड्रेसअप का रखें ख्याल…
चालीसा की चौपाई है
कंचन बरन बिराज सुबेसा,
कानन कुंडल कुंचित केसा।
अर्थ – आपके शरीर का रंग सोने की तरह चमकीला है, सुवेष यानी अच्छे वस्त्र पहने हैं, कानों में कुंडल हैं और बाल संवरे हुए हैं।
आज के दौर में आपकी तरक्की इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप रहते और दिखते कैसे हैं।
फर्स्ट इंप्रेशन अच्छा होना चाहिए।
अगर आप बहुत गुणवान भी हैं लेकिन अच्छे से नहीं रहते हैं तो ये बात आपके करियर को प्रभावित कर सकती है।
इसलिए, रहन-सहन और ड्रेसअप हमेशा अच्छा रखें।
आगे पढ़ें – हनुमान चालीसा में छिपे मैनेजमेंट के सूत्र…
सिर्फ डिग्री काम नहीं आती
बिद्यावान गुनी अति चातुर,
राम काज करिबे को आतुर।
अर्थ – आप विद्यावान हैं, गुणों की खान हैं, चतुर भी हैं।
राम के काम करने के लिए सदैव आतुर रहते हैं।
आज के दौर में एक अच्छी डिग्री होना बहुत जरूरी है।
लेकिन चालीसा कहती है सिर्फ डिग्री होने से आप सफल नहीं होंगे।
विद्या हासिल करने के साथ आपको अपने गुणों को भी बढ़ाना पड़ेगा, बुद्धि में चतुराई भी लानी होगी।
हनुमान में तीनों गुण हैं, वे सूर्य के शिष्य हैं, गुणी भी हैं और चतुर भी।
अच्छा लिसनर बनें
प्रभु चरित सुनिबे को रसिया,
राम लखन सीता मन बसिया।
अर्थ -आप राम चरित यानी राम की कथा सुनने में रसिक है, राम, लक्ष्मण और सीता तीनों ही आपके मन में वास करते हैं।
जो आपकी प्रायोरिटी है, जो आपका काम है, उसे लेकर सिर्फ बोलने में नहीं, सुनने में भी आपको रस आना चाहिए।
अच्छा श्रोता होना बहुत जरूरी है।
अगर आपके पास सुनने की कला नहीं है तो आप कभी अच्छे लीडर नहीं बन सकते।
कहाँ, कैसे व्यवहार करना है ये ज्ञान जरूरी है
सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रुप धरि लंक जरावा।
अर्थ – आपने अशोक वाटिका में सीता को अपने छोटे रुप में दर्शन दिए।
और लंका जलाते समय आपने बड़ा स्वरुप धारण किया।
कब, कहाँ, किस परिस्थिति में खुद का व्यवहार कैसा रखना है, ये कला हनुमानजी से सीखी जा सकती है।
सीता से जब अशोक वाटिका में मिले तो उनके सामने छोटे वानर के आकार में मिले, वहीं जब लंका जलाई तो पर्वताकार रुप धर लिया।
अक्सर लोग ये ही तय नहीं कर पाते हैं कि उन्हें कब किसके सामने कैसा दिखना है।
अच्छे सलाहकार बनें
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, लंकेश्वर भए सब जग जाना।
अर्थ – विभीषण ने आपकी सलाह मानी, वे लंका के राजा बने ये सारी दुनिया जानती है।
हनुमान सीता की खोज में लंका गए तो वहां विभीषण से मिले।
विभीषण को राम भक्त के रुप में देख कर उन्हें राम से मिलने की सलाह दे दी।
विभीषण ने भी उस सलाह को माना और रावण के मरने के बाद वे राम द्वारा लंका के राजा बनाए गए।
किसको, क्हाँ, क्या सलाह देनी चाहिए, इसकी समझ बहुत आवश्यक है।
सही समय पर सही इंसान को दी गई सलाह सिर्फ उसका ही फायदा नहीं करती, आपको भी कहीं ना कहीं फायदा पहुँचाती है।
आत्मविश्वास की कमी ना हो
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही, जलधि लांघि गए अचरज नाहीं।
अर्थ – राम नाम की अंगुठी अपने मुख में रखकर आपने समुद्र को लाँघ लिया, इसमें कोई अचरज नहीं है।
अगर आपमें खुद पर और अपने परमात्मा पर पूरा भरोसा है तो आप कोई भी मुश्किल से मुश्किल टॉस्क को आसानी से पूरा कर सकते हैं।
आज के युवाओं में एक कमी ये भी है कि उनका भरोसा बहुत टूट जाता है। आत्मविश्वास की कमी भी बहुत है। प्रतिस्पर्धा के दौर में आत्मविश्वास की कमी होना खतरनाक है।
अपने-आप पर पूरा भरोसा रखे।
जय श्री राम
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
कार्तिक माहात्म्य
राजा पृथु बोले:–
‘हे नारद जी! आपने कार्तिक मास में स्नान का फल कहा, अब अन्य मासों में विधि पूर्वक स्नान करने की विधि, नियम और उद्यापन की विधि भी बतलाइये।’
देवर्षि नारद ने कहा:–
‘हे राजन्! आप भगवान विष्णु के अंश से उत्पन्न हुए हैं, अत: यह बात आपको ज्ञात ही है फिर भी आपको यथाचित विधान बतलाता हूँ।
आश्विन माह में शुक्लपक्ष की एकादशी से कार्तिक के व्रत करने चाहिए। ब्रह्ममुहूर्त में उठकर जल का पात्र लेकर गाँव से बाहर पूर्व अथवा उत्तर दिशा में जाना चाहिए।
दिन में या सांयकाल में कान में जनेऊ चढ़ाकर पृथ्वी पर घास बिछाकर सिर को वस्त्र से ढककर मुँह को भली-भाँति बन्द करके थूक व सांस को रोककर मल व मूत्र का त्याग करना चाहिए।
तत्पश्चात मिट्टी व जल से भली-भाँति अपने गुप्ताँगों को धोना चाहिए। उसके बाद जो मनुष्य मुख शुद्धि नहीं करता, उसे किसी भी मन्त्र का फल प्राप्त नहीं होता है। अत: दाँत और जीभ को पूर्ण रूप से शुद्ध करना चाहिए और निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए दातुन तोड़नी चाहिए।
‘हे वनस्पतये! आप मुझे आयु, कीर्ति, तेज, प्रज्ञा, पशु, सम्पत्ति, महाज्ञान, बुद्धि और विद्या प्रदान करो।’
इस प्रकार उच्चारण करके वृक्ष से बारह अंगुल की दांतुन ले, दूध वाले वृक्षों से दांतुन नहीं लेनी चाहिए। इसी प्रकार कपास, काँटेदार वृक्ष तथा जले हुए वृक्ष से भी दांतुन लेना मना है।
जिससे उत्तम गन्ध आती हो और जिसकी टहनी कोमल हो, ऐसे ही वृक्ष से दन्तधावन ग्रहण करना चाहिए। प्रतिपदा, अमावस्या, नवमी, छठी, रविवार को, चन्द्र तथा सूर्यग्रहण में दांतुन नहीं करनी चाहिए।
तत्पश्चात भली-भाँति स्नान करके फूलमाला, चन्दन और पान आदि पूजा की सामग्री लेकर प्रसन्नचित्त व भक्ति पूर्वक शिवालय में जाकर सभी देवी-देवताओं की अर्ध्य, आचमनीय आदि वस्तुओं से पृथक-पृथक पूजा करके प्रार्थना एवं प्रणाम करना चाहिए फिर भक्तों के स्वर में स्वर मिलाकर श्रीहरि का कीर्तन करना चाहिए।
मन्दिर में जो गायक भगवान श्रीहरि का कीर्तन करने आये हों उनका माला, चन्दन, ताम्बूल आदि से पूजन करना चाहिए क्योंकि देवालयों में भगवान विष्णु को अपनी तपस्या, योग और दान द्वारा प्रसन्न करते थे परन्तु कलयुग में भगवद गुणगान को ही भगवान श्रीहरि को प्रसन्न करने का एकमात्र साधन माना गया है।’
नारद जी राजा पृथु से बोले–‘हे राजन! एक बार मैंने भगवान से पूछा कि हे प्रभु! आप सबसे अधिक कहाँ निवास करते हैं ? इसका उत्तर देते हुए भगवान ने कहा।’
भगवान् ने कहा:–
‘हे नारद! मैं वैकुण्ठ या योगियों के हृदय में ही निवास नहीं करता अपितु जहाँ मेरे भक्त मेरा कीर्तन करते हैं, मैं वहाँ अवश्य निवास करता हूँ।
जो मनुष्य चन्दन, माला आदि से मेरे भक्तों का पूजन करते हैं उनसे मेरी ऐसी प्रीति होती है जैसी कि मेरे पूजन से भी नहीं हो सकती।’
नारदजी ने फिर कहा:–
‘शिरीष, धतूरा, गिरजा, चमेली, केसर, कन्दार और कटहल के फूलों व चावलों से भगवान विष्णु की पूजा नहीं करनी चाहिए। अढ़हल, कन्द, गिरीष, जूही, मालती और केवड़ा के पुष्पों से भगवान शंकर की पूजा नहीं करनी चाहिए।
जिन देवताओं की पूजा में जो फूल निर्दिष्ट हैं उन्हीं से उनका पूजन करना चाहिए। पूजन समाप्ति के बाद भगवान से क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए।
यथा–‘हे सुरेश्वर, हे देव! न मैं मन्त्र जानता हूँ, न क्रिया, मैं भक्ति से भी हीन हूँ, मैंने जो कुछ भी आपकी पूजा की है उसे पूरा करें।’
ऐसी प्रार्थना करने के पश्चात साष्टांग प्रणाम कर के भगवद कीर्तन करना चाहिए। श्रीहरि की कथा सुननी चाहिए और प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।
जो मनुष्य उपरोक्त विधि के अनुसार कार्तिक व्रत का अनुष्ठान करते हैं वह जगत के सभी सुखों को भोगते हुए अन्त में मुक्ति को प्राप्त करते हैं।’जो भी कार्तिक महात्म्य को नियम पूर्वक नित्य पढ़ते है वो इसे लाइक करें और जय श्रीराधे कृष्णा जरूर लिखें🙏
🚩जय श्रीराधे कृष्णा🚩
🌷🌻🌷🌻🌷🌻🌷
: ।।श्रीहरिः।।
टेर कदम्ब
नंदगांव के पास जंगल में ‘कदम्ब टेर’ नामक स्थान है जोकि कदम्ब के वृक्षों से घिरा है। इस स्थान को ‘टेर कदम्ब’ या कदम्ब टेर’ इसलिए कहते हैं क्योंकि इस स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण गायें चराते थे और सायंकाल कदम्ब के वृक्ष पर बैठकर दूर चरने गई गायों को बुलाने के लिए टेर (आवाज) लगाने के लिए वंशी बजाते थे।
जहां-जहां भगवान के चरण टिकते हैं, उस-उस भूमि में भगवान का प्रभाव प्रवेश कर जाता है; इसलिए उस भूमि की रज को अत्यन्त पवित्र और कल्याणकारी माना जाता है।
श्रीचैतन्य महाप्रभु के शिष्य श्रीरूप गोस्वामी की यह भजनस्थली रही है, यहीं पर उनकी भजन-कुटी है।
जब भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम की लालसा सभी भोगों और वासनाओं को समाप्त कर प्रबल हो जाती है, तभी साधक का व्रज में प्रवेश होता है। यह व्रज भौतिक व्रज नहीं वरन् इसका निर्माण भगवान के दिव्य प्रेम से होता है।
श्रीरूप गोस्वामी और उनके भाई श्रीसनातन गोस्वामी दोनों पहले बंगाल प्रांत में गौड़ देश के शासक के उच्चाधिकारी थे। हाथी-घोड़े, महल, खजाने, दास-दासियां अपरिमित ऐश्वर्य और संसार के सुख की सभी सामग्री इनको उपलब्ध थी। अपने महान वैभव का इन्होंने उल्टी (वमन) की तरह परित्याग कर वैराग्य धारण किया और व्रज में आकर श्रीराधाकृष्ण के अखण्ड भजन में लग गए।
एक बार श्रीरूप गोस्वामी नन्दगांव में कदम्ब टेर की अपनी कुटी में भजन कर रहे थे उसी समय उनके बड़े भाई श्रीसनातन गोस्वामी वृन्दावन से उनसे मिलने आए। बहुत दिनों के बाद दोनों एक-दूसरे से मिले और कुशल-क्षेम पूछा। श्रीरूप गोस्वामी ने देखा कि बड़े भाई बड़े दुर्बल हो गए हैं । श्रीसनातन गोस्वामी कभी भिक्षा मांगते, कभी नहीं मांगते, दिन-रात भजनानन्द में लीन रहते थे।
श्रीरूप गोस्वामी के मन में विचार आया कि आज बड़े भैया आए हैं, आज मैं अत्यंत स्वादिष्ट खीर का भोग ठाकुरजी को लगाकर वह प्रसाद अपने बड़े भाई को पवाऊंगा (खिलाऊंगा) किन्तु यहां इस घोर जंगल में दूध, चावल, शक्कर कहां से प्राप्त हो? श्रीरूपजी का शरीर तो भजन अवस्था में था, नेत्र बन्द, स्थिर आसन परन्तु मन बड़े भाई के आतिथ्य की कल्पनाओं में मग्न था।
उनके मन में भाई को खीर खिलाने का विचार आते ही उसी समय भक्तों के मनोरथ पूर्ण करने वाली लाड़िलीजी (श्रीराधा) एक बालिका के रूप में खीर का सब सामान – एक पात्र में दूध, चावल, शक्कर ले आईं और दरवाजे से ही आवाज देकर बोलीं – ‘रूप बाबा, ओ रूप बाबा!
श्रीरूपजी ने अधखुले नेत्रों से पूछा – ‘कौन है?’
मुस्कुराते हुए श्रीराधा ने कहा – ‘बाबा! मैं हूँ, मैया ने आपके लिए दूध भेजा है, साथ में चावल और शक्कर भी है, खीर बना लेना।
भजन में विघ्न के भय से श्रीरूपजी ने पूरे नेत्र नहीं खोले इसलिए वे अपनी आराध्या को पहचान नही पाए; किन्तु उनके भजन का सम्पूर्ण फल साक्षात् रूप में उनके सामने खड़ा था।
श्रीरूप गोस्वामी ने कहा – ‘लाली खीर कैसे बनाऊंगा। मेरे पास न अग्नि का साधन है और न ही खीर रखने के लिए कोई बर्तन।’ (व्रज में छोटी लड़कियों को लाली कहते हैं।)
श्रीराधा ने कहा – ‘बाबा! मैया ने कहा है कि बाबा यदि भजन कर रहे हों तो तू ही खीर बना देना।
श्रीरूप ने कहा – ‘अच्छा लाली! तो बना, जा!’
श्रीराधा ने बिना अग्नि के ही खीर बना दी और कदम्ब के पत्ते दोने बना दिए। उन दोनों में खीर रखकर वे चली गयी।
कदम्ब के पत्तों के दोने में उस खीर का श्रीरूप गोस्वामी ने ठाकुरजी को भोग लगाया। थोड़ी ही देर में बड़े भाई श्रीसनातन गोस्वामी भी अपना नित्य नियम का भजन पूरा करके आ गये।
श्रीरूप ने अपने बड़े भाई श्रीसनातन गोस्वामी को खीर का प्रसाद दिया। जैसे ही उन्होंने वह खीर मुंह से लगाई तो उन्हें प्रेम का नशा सा छा गया और वे प्रेम-मूर्च्छा में चले गए।
श्रीरूप बोले – ‘भैया! भैया!
भगवान की दृष्टि जहां पड़ती है, वहां सब वस्तुएं दिव्य और अलौकिक हो जाती हैं और भगवान के स्पर्श से वह भोजन दिव्य, अलौकिक, रसमय और परम मधुर हो जाता है। उस भोजन को करने से सारे शरीर में ऐसी प्रसन्नता, आनन्द और तृप्ति आ जाती है जिसका कि कोई ठिकाना नहीं।
श्रीसनातन ने पूछा – ‘यह खीर कहां से आई है? इसमें तो अलौकिक स्वाद है।’
श्रीरूप गोस्वामी ने कहा – ‘भैया! आज आपको खीर खिलाने की इच्छा हुई तभी एक छोटी बालिका खीर का सब सामान लेकर आई और स्वयं अपने हाथों से खीर बनाकर रख गई है।’
श्रीसनातनजी समझ गए कि श्रीराधा ही भक्त की इच्छा पूर्ण करने के लिए स्वयं सामान लाईं और खीर बनाने में कष्ट उठाया।
वे फफक-फफक कर रोने लगे।
श्रीसनातन गोस्वामी ने श्रीरूप गोस्वामी से कहा – ‘मेरी इस बात को दृढ़तापूर्वक हृदय में धारण कर लो और अब पुन: ऐसी इच्छा कभी मत करना। इस तुच्छ शरीर के लिए तुमने कामना की और अपने इष्ट को कष्ट दिया। आगे से तुम अपनी वैराग्य की चाल से ही चलना।
अपनी आराध्या श्रीराधा को कष्ट देने के कारण दोनों भाइयों की आंखों से प्रेमाश्रु बहने लगे।
कदम्ब टेर के मन्दिर में आज भी खीर का प्रसाद मिलता है और कदम्ब के वृक्षों पर आज भी इक्का-दुक्का दोने दिखाई पड़ जाते हैं जिन्हें पुजारी मन्दिर में सँजो कर रखते हैं।
🙏🏻🌷🌹💐🍀🌺🍁🌻🌹🌸🌷🙏🏻🌹 जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष 🌹
आपका जन्मदिन: 12 अक्टूबर
अंक ज्योतिष के अनुसार दिनांक 12 को जन्मे व्यक्तियों का मूलांक तीन आता है। यह बृहस्पति का प्रतिनिधि अंक है। आप दार्शनिक स्वभाव के होने के बावजूद एक विशेष प्रकार की स्फूर्ति रखते हैं। आपकी शिक्षा के क्षेत्र में पकड़ मजबूत होगी। आप एक सामाजिक प्राणी हैं। आप सदैव परिपूर्णता या कहें कि परफेक्शन की तलाश में रहते हैं यही वजह है कि अकसर अव्यवस्थाओं के कारण तनाव में रहते हैं। ऐसे व्यक्ति निष्कपट, दयालु एवं उच्च तार्किक क्षमता वाले होते हैं। अनुशासनप्रिय होने के कारण कभी-कभी आप तानाशाह भी बन जाते हैं।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 3, 12, 21, 30
शुभ अंक : 1, 3, 6, 7, 9
शुभ वर्ष : 2028, 2030, 2031, 2034, 2043, 2049, 2052
ईष्टदेव : देवी सरस्वती, देवगुरु बृहस्पति, भगवान विष्णु
शुभ रंग : पीला, सुनहरा और गुलाबी
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
व्यापार-नौकरी: नवीन व्यापार की योजना भी बन सकती है। नौकरीपेशा के लिए प्रतिभा के बल पर उत्तम सफलता का है। महत्वपूर्ण कार्य से यात्रा के योग भी है।
घर-परिवार: यह वर्ष आपके लिए अत्यंत सुखद है। घर या परिवार में शुभ कार्य होंगे। दांपत्य जीवन में सुखद स्थिति रहेगी। शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे।
करियर: किसी विशेष परीक्षा में सफलता मिल सकती है। मित्र वर्ग का सहयोग सुखद रहेगा।
🌹आज का राशिफल 🌹
*दिनांक : 12 अक्टूबर 2025*
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आपका आज के दिन का पहला भाग निराशा से भरा रहेगा। सम्पति का विवाद अथवा धन सम्बंधित कारणो से मानसिक रूप से चिंतित रहेंगे लेकिन किसी के आगे प्रकट नहीं होने देंगे। कार्य क्षेत्र पर ज्यादातर समय उदासीनता छायी रहेगी। लाभ के अवसर मिलते हुए भी हाथ से निकल सकते है। स्वयं अथवा किसी परिजन के स्वास्थ्य में अचानक खराबी आने से समय एवं धन व्यर्थ होगा। आज हर क्षेत्र पर विवेक एवं संयम का परिचय दें। स्वाभाव मे संतोष लाये तो आज का दिन खुशहाल बन सकता है।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन मिला-जुला फल देगा। दिन के पूर्वार्ध में थोड़ी बहुत स्वास्थ्य सम्बंधित शिकायते रह सकती है। आलस्य के कारण कार्य में मन नहीं लगेगा। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन सामान्य रहेगा। आकस्मिक यात्रा करनी पड़ सकती है। चोट आदि का भय है सावधान रहें। परिजनो के साथ भी आज कम ही जमेगी। लेकिन सामाजिक क्षेत्र पर आपके विचार अथवा निर्णयो को पसंद किया जायेगा। आध्यात्म से जुड़ें मानसिक शांति मिलेगी। संध्या के समय किसी रुके काम के बनने की सम्भावना है।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज के दिन आपका लक्ष्य मुख्य रूप से भौतिक संसाधनों में वृद्धि करना रहेगा। इसमें काफी हद तक सफलता भी मिल जायेगी। भागीदारी के कार्य आज सावधानी से करें छल होने का भय है। आज आप जो भी कार्य करें उसमे बड़ो की सलाह जरूर ले लाभदायक रहेगा। मध्यान तक आवश्यक कार्य पूर्ण कर लें इसके बाद थोड़ा व्यवधान आ सकता है। यात्रा लाभदायीं रहेगी। मित्र परिचितों के साथ आनंददायक समय बितायेंगे। सेहत ठीक ठाक रहेगी।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आपका आज का दिन विषम परिस्थिति वाला रहेगा। आज आपके वाणी अथवा व्यवहार से किसी का अहित भी हो सकता है। कार्यो में असफलता मिलने से क्रोध अधिक रहेगा। आज परिजन अथवा अधिकारी आपके खिलाफ कोई कठोर निर्णय ले सकते है। अनिर्णय की स्थिति रहने के कारण आज कोई महत्त्वपूर्ण कार्य हाथ में ना लें। धन की आमद आज बिना किसी के सहयोग के होना मुश्किल ही रहेगा और जो होंगी उसमे भी कोई ना कोई अडचन डालेगा सतर्क रहें। सर अथवा अन्य शारीरिक अंगों मे दर्द की समस्या ही सकती है।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन लाभदायक रहेगा। आज आप निश्चिन्त होकर दिनचर्या बितायेंगे। कार्य क्षेत्र पर सहयोगी वातावरण रहने से आशा से अधिक लाभ कमा सकते है। व्यवहार में मधुरता रखने से अटके काम बना सकते है। बड़े लोगो की दया दृष्टि रहने से अपनी बात मनवा लेंगे। परिजनों के साथ भी आज मित्र की तरह व्यवहार करने से आनंद की प्राप्ति होगी। सेहत छुट् पुट बातो को छोड़ सामान्य ही रहेगी। किसी से उधारी के व्यवहार को लेकर कहा सुनी होने की सम्भावना है।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन आपके लिए अनुकूल रहेगा। किसी परिचित की समस्या का समाधान करने पर सामाजिक क्षेत्र पर आज आपकी छवि बुद्धिमान जैसी बनेगी। आज के दिन सामाजिक अथवा मांगलिक कार्यक्रमो के कारण व्यस्तता अधिक रहेगी। कार्य क्षेत्र से भी आज धन का आगमन होगा। फिजूल खर्च भी लगे रहेंगे जिन पर अंकुश रखे। विपरीत लिंगीय से आज आकस्मिक लाभ हो सकता है नजदीकियां भी बढ़ेंगी। उपहार सम्मान मिलेगा। सेहत मे संध्या के समय बदलाव आ सकता है।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन आप सुख-शांति से व्यतीत करेंगे। स्वास्थ्य आज सर्दी जुखाम के कारण नरम रह सकता है फिर भी आपकी दिनचर्या पर इसका विशेष असर नहीं पड़ेगा। नौकरी व्यवसाय में आज आपके कार्य की प्रशंसा होगी। धन लाभ के कोई भी अवसर आज नहीं चूकेंगे। दाम्पत्य जीवन में सरसता बनी रहेगी। पत्नी संतान के साथ आज अच्छी पटेगी। सुखोपभोग के साधनों मे वृद्धि होंगी संध्या के आसपास किसी से कहा सुनी हो सकती है।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज के दिन आप शारीरिक एवं मानसिक रूप से अस्वस्थ्य रहेंगे। शरीर में दर्द की शिकायत रह सकती है जिस कारण कार्य में व्यधान पड़ सकता है। आज घर एवं बाहर के कार्यो की अधिकता रहेगी इनमे से कुछ एक से धन की आमद भी होंगी लेकिन कामचलाउ ही। मध्यान के बाद अत्यन्त थकान रहेगी। परिजनों के किन्ही अंदरूनी विषयो पर मतभेद भी रह सकता है। धन लाभ से खर्च अधिक रहेंगे उधार आज किसी को ना दें। शांति से दिन व्यतीत करें।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन भाग्य पक्ष मे वृद्धि कराने वाला रहेगा। आज के दिन आप में धर्म कर्म के प्रति विशेष लगाव रहेगा। गूढ़ विषयो को जानने में अधिक रुचि लेंगे। नास्तिक लोग भी आज चमत्कारिक रूप से धर्म का पालन करते दिखेंगे। विद्यार्थी वर्ग आज पढाई में ध्यान लगाएंगे परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। कार्य व्यवसाय के लिए आज का दिन सामान्य ही रहेगा। लाभ खर्च बराबर रहेंगे। परिवार में थोड़ी नोक-झोंक हो सकती है। लघु यात्रा के योग बनेंगे इससे कुछ ना कुछ लाभ मिलेगा।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन आपके पक्ष में रहेगा। परन्तु सेहत में थोड़ा उतार चढ़ाव बना रहेगा। पुराने लटके कार्यो में गति आएगी। नई योजनाएं अधिक फलीभूत होंगी। सामाजिक कारणों से भी आज अधिक व्यस्त रह सकते है। सरकारी अथवा धन सम्बंधित कार्य आज करना ठीक रहेगा थोड़े विलम्ब से ही सही निश्चित सफलता मिलेगी। संध्या के समय धन की आमद होने से आर्थिक स्थिति सुधरेगी। विरोधी आज शांत रहेंगे। घरेलु कार्य से बचने के चक्कर मे कहासूनी हो सकती है।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन आपके लिए मिश्रित फलदायक रहेगा। दिन के पूर्वार्ध में कार्य क्षेत्र पर बेहतर वातावरण मिलने से धन लाभ होगा। इसके बाद का समय गलत निर्णय लेने से हानिकर रहेगा। खर्च पर नियंत्रण नहीं रहने से आर्थिक समस्या भी बन सकती है। परिजनों का सहयोग बराबर मिलते रहने से मानसिक रूप से शान्ति रहेगी। मित्रो का भी साथ मिलेगा। सेहत मे कोई विकार आ सकता है। आज बोल चाल मे सतर्कता बरते। किसी दूर रहने वाले प्रिय जन से दुखद समाचार भी मिल सकता है।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन आपकी आशाओं के विपरीत रहने वाला है। रिश्तों को आज अहमियत दे अन्यथा व्यर्थ में अशान्ति बढ़ेगी। उधारी के व्यवहारों के कारण भी आज परेशान रहेंगे। आर्थिक रूप से दिन उलझन वाला है धन की कमी अनुभव होगी। नए कार्यो के प्रस्ताव अभी रोके रखें। बीमारी पर भी खर्च हो सकता है। नकारात्मक सोच से बचे। प्रेम प्रसंगों में आज दूरी बनाए अन्यथा मन दुःख के प्रसंग बनेंगे। यात्रा के प्रसंग बने तो टालना ही बेहतर रहेगा।

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