हर हर महादेव
*🌞~ आज का वैदिक पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक – 12 सितम्बर 2025*
*⛅दिन – शुक्रवार*
*⛅विक्रम संवत् – 2082*
*⛅अयन – दक्षिणायण*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – आश्विन*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – पञ्चमी सुबह 09:58 तक तत्पश्चात् षष्ठी*
*⛅नक्षत्र – भरणी सुबह 11:58 तक तत्पश्चात् कृत्तिका*
*⛅योग – व्याघात दोपहर 01:44 तक तत्पश्चात् हर्षण*
*⛅राहुकाल – सुबह 10:50 से दोपहर 12:23 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय – 06:12*
*⛅सूर्यास्त – 06:33 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल – पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 04:39 से प्रातः 05:26 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 11:58 से दोपहर 12:48 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:00 सितम्बर 13 से रात्रि 12:46 सितम्बर 13 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅️व्रत पर्व विवरण – पञ्चमी व षष्ठी का श्राद्ध, मासिक कार्तिगाई*
*⛅️विशेष – पञ्चमी को बेल फल खाने से कलंक लगता है व षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातून मुंह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
*🔹लक्ष्मीप्राप्ति व घर में सुख-शांति हेतु🔹*
*🔸 ‘परमात्मा मेरे आत्मा हैं । ॐ आनंद, ॐ शांति, ॐ माधुर्य… ।’ घर में अन्न की कमी हो तो ऐसा चिंतन करके जौ का ध्यान करें, अन्न की कमी सदा के लिए मिट जायेगी । – पूज्य बापूजी*
*🔸घर में टूटी-फूटी अथवा अग्नि से जली हुई प्रतिमा की पूजा नहीं करनी चाहिए । ऐसी मूर्ति की पूजा करने से गृहस्वामी के मन में उद्वेग या अनिष्ट होता है । (वराह पुराण :१८६.३७)*
*🔹जीवन में उपयोगी नियम 🔹*
*🔸1. जहाँ रहते हो उस स्थान को तथा आस-पास की जगह को साफ रखो ।*
*🔸2. हाथ पैर के नाखून बढ़ने पर काटते रहो । नख बढ़े हुए एवं मैल भरे हुए मत रखो ।*
*🔸3. अपने कल्याण के इच्छुक व्यक्ति को बुधवार व शुक्रवार के अतिरिक्त अन्य दिनों में बाल नहीं कटवाना चाहिए ।*
*🔸4. सोमवार, बुधवार और शनिवार शरीर में तेल लगाने हेतु उत्तम दिन हैं । यदि तुम्हें ग्रहों के अनिष्टकर प्रभाव से बचना है तो इन्हीं दिनों में तेल लगाना चाहिए ।*
*🔸5. शरीर में तेल लगाते समय पहले नाभि एवं हाथ-पैर की उँगलियों के नखों में भली प्रकार तेल लगा देना चाहिए ।*
*🔸6. पैरों को यथासंभव खुला रखो । प्रातःकाल कुछ समय तक हरी घास पर नंगे पैर टहलो । गर्मियों में मोजे आदि से पैरों को मत ढँको ।*
*🔸7. ऊँची एड़ी के या तंग पंजों के जूते स्वास्थ्य को हानि पहुँचाते हैं ।*
*🔸8. पाउडर, स्नो आदि त्वचा के स्वाभाविक सौंदर्य को नष्ट करके उसे रूखा एवं कुरूप बना देते हैं ।*
*🔸9. बहुत कसे हुए एवं नायलोन आदि कृत्रिम तंतुओं से बने हुए कपड़े एवं चटकीले भड़कीले गहरे रंग से कपड़े तन-मन के स्वास्थ्य के हानिकारक होते हैं । तंग कपड़ों से रोमकूपों को शुद्ध हवा नहीं मिल पाती तथा रक्त-संचरण में भी बाधा पड़ती है। बैल्ट से कमर को ज़्यादा कसने से पेट में गैस बनने लगती है । ढीले-ढाले सूती वस्त्र स्वास्थ्य के लिए अति उत्तम होते हैं ।*
*🔸10. कहीं से चलकर आने पर तुरंत जल मत पियो, हाथ पैर मत धोओ और न ही स्नान करो । इससे बड़ी हानि होती है । पसीना सूख जाने दो । कम-से-कम 15 मिनट विश्राम कर लो । फिर हाथ-पैर धोकर, कुल्ला करके पानी पीयो । तेज गर्मी में थोड़ा गुड़ या मिश्री खाकर पानी पीयो ताकि लू न लग सके ।*
*🔸11. अश्लील पुस्तक आदि न पढ़कर ज्ञानवर्धक पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए ।*
*🔸12. चोरी कभी न करो ।*
*🔸13. किसी की भी वस्तु लें तो उसे सँभाल कर रखो । कार्य पूरा हो फिर तुरन्त ही वापिस दे दो ।*
*🔸14. समय का महत्त्व समझो । व्यर्थ बातें, व्यर्थ काम में समय न गँवाओ । नियमित तथा समय पर काम करो ।*
*🔸15. स्वावलंबी बनो । इससे मनोबल बढ़ता है ।*
*🔸16. हमेशा सच बोलो । किसी की लालच या धमकी में आकर झूठ का आश्रय न लो ।*
*🔸17. अपने से छोटे दुर्बल बालकों को अथवा किसी को भी कभी सताओ मत । हो सके उतनी सबकी मदद करो ।*
*🔸18. अपने मन के गुलाम नहीं परन्तु मन के स्वामी बनो । तुच्छ इच्छाओं की पूर्ति के लिए कभी स्वार्थी न बनो ।*
*🔸19. किसी का तिरस्कार, उपेक्षा, हँसी-मजाक कभी न करो । किसी की निंदा न करो और न सुनो ।*
*🔸20. किसी भी व्यक्ति, परिस्थिति या मुश्किल से कभी न डरो परन्तु हिम्मत से उसका सामना करो ।*
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*सबको सब कुछ नहीं मिलता किसी का काश तो किसी का अगर रह ही जाता हैं जिस तरह थोड़ी सी औषधि भयं कर रोगों को शांत कर देती है उसी तरह ईश्वर की थोड़ी सी स्तुति बहुत से कष्टों और दुखों का नाश कर देती है संभल कर चल नादान ये इंसानों की बस्ती है ये तो रब को भी आजमा लेते हैं तेरी क्या हस्ती है आपका कद नहीं आपकी विनम्रता आपको बड़ा बनाती है सलाह हारे हुए की तजुर्बा जीते हुए का ओर दिमाग़ खुद का इन्सान को जीवन में कभी हारने नहीं देते यह कविता सुनकर झूम उठा व्यापारी समाज जिन सहृदय लोगों के हृदय में निःस्वार्थ परोप कार करने की भावना सदैव जागृत रहती है उन्हें दुख और विपत्ति कभी नहीं सताती है बल्कि उन्हें पग पग पर समृद्धि और खुशी प्राप्त होती है दूसरों में दोष नहीं दिखेगा अगर आपके विचार पाॅज़िटिव है जिस तरह थोड़ी सी औषधि भयं कर रोगों को शांत कर देती है उसी तरह ईश्वर की थोड़ी सी स्तुति बहुत से कष्टों और दुखों का नाश कर देती है चार दिन की जिंदगी किस से कतरा कर चलूं खाक हूं मैं खाक पर क्या खाक इतरा कर चलूं नाराजगी की उम्र कम रखी जाए तो रिश्तों की उम्र बढ़ जाती है खोई हुई वस्तु लौटे या ना लौटे मगर किया गया कर्म अवश्य लौटता है चाहे बुरा हो या भला कर्म प्रधान विश्व करि राखा जो जस कर ही सो तस फल पावा मन की ईर्ष्या को प्यार मे बदले जी वन मे कुछ लेकर नही आये थे की कोई हड़प लिया है ज़ब किसी को कुछ देने का मन ना हो तो मुख वाणी से प्रेम स्नेह सम्मान तो बाट ही सकते है इतना भी करने का मन नही है तो यह जीवन का कोई महत्व नही है*
*🔴🌹🌺उचित त्याग भी करें बड़े त्याग से ही बड़े लक्ष्य की प्राप्ति संभव है जीवन में जो कुछ भी हम प्राप्त करते हैं सब का कुछ न कुछ मूल्य अवश्य चुकाना ही पड़ता है बिना उचित मूल्य अदा किए जीवन में किसी भी वस्तु की प्राप्ति नहीं हो सकती है हम किसी वस्तु को लेने बाजार जाते हैं तो उसका एक उचित मूल्य अदा करने पर ही उसे प्राप्त कर पाते हैं स्वामी विवेका नन्द जी कहा करते थे कि महान त्याग के बिना महान लक्ष्य को पाना संभव नहीं है यदि आपके जीवन का लक्ष्य महान है तो इस विचार को छोड़ दीजिए कि बिना त्याग और समर्पण के उसे प्राप्त कर लेंगे नींव जितनी गहरी होगी भवन भी उतना ही ऊँचा एवं टिकाऊ बन पायेगा कई प्रहार सहने के बाद ही पत्थर के भीतर छिपा हुआ ईश्वर का रूप प्रगट होता है यदि आपका लक्ष्य चोटी तक पहुँचना है तो रास्ते में पड़े कंकड़ पत्थरों से होने वाले कष्ट को भी भूल जाना होगा*
*🔴🌹🌺स्वयं व्यक्ति को जिम्मेदारी और उत्तर दायित्व के साथ जीना चाहिए इससे दूसरे व्यक्ति को यह दिखाई देगा कि जिम्मेदारी और उत्तर दायित्व कितना महत्व पूर्ण हैं स्वयं व्यक्ति को सीखने की इच्छा और आत्म मूल्यांकन के साथ जीना चाहिए इससे दूसरे व्यक्ति को यह दिखाई देगा कि सीखने की इच्छा और आत्म मूल्यांकन कितना महत्वपूर्ण हैं इन बाताे को अपना कर आप एक अच्छे उदाहरण के रूप में दूसरे व्यक्ति के लिए प्रेरणा बन सकते हैं तभी जीवन जीने में आन्नद आयेगा और जीवन सुखद बनेगा*
*🔴🌹🌺जीवन को सार्थक करें जीवन भर की एकत्र कमाई को व्यय करने पर भी समय के एक पल को नहीं खरीदा जा सकता है इस मानव जीवन का एक एक क्षण बड़ा ही अमूल्य है इस लिए समय का दुरुपयोग करने से सदैव बचना चाहिए समय निरंतर गति शील एवं परिवर्तन शील है प्रति क्षण घट रहा है यह आज है कल नहीं और अभी है फिर नहीं समय मूल्य वान और बहु मूल्य नहीं वह तो अमूल्य है समय किसी के साथ नहीं चलता हमें ही इसके साथ चलना पड़ेगा समय का सदुपयोग बुद्धिमत्ता है तो समय का दुरुपयोग बहुत बड़ी बुद्धि हीनता है समय के महत्व को विशेष रूप से समझते हुए अपने जीवन को निरंतर सद् कार्यों में शुभ कार्यों में एवं श्रेष्ठ कार्यों में लगाया जाये ताकि यह मानव जीवन सार्थक हो सके*
*🔴🌹🌺थकान कभी भी काम के कारण नही होती बल्कि चिंता निराशा भय और असंतोष के कारण होती है बात इतनी मीठी रखो कि कभी वापिस लेनी पड़ जाए तो ख़ुद को कड़वी ना लगे श्री राम का नाम कलि युग में कल्प वृक्ष के समान है और सब प्रकार के श्रेष्ठ से श्रेष्ठ मंगलों का परम सार है राम नाम के स्मरण से ही सब सिद्धियाँ वैसे ही प्राप्त हो जाती हैं जैसे कोई चीज हथेली में ही रखी हो और पद पद पर परम आनंद की प्राप्ति होती है मोह की कथा सुनाने के बाद काक भुसुंडि जी गरूड़ महाराज से कहते हैं कि गरूड़ जी मेरा अपना अनुभव है कि भगवत भजन बिना कष्ट दूर नहीं होते हैं
*‼️🚩🔴🌹🌺अतुलित,बलधामं,हेमशैलाभदेहम्,दनुजवनकृशानुं,ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि👏🌺🌹🔴‼️*
*‼️🚩🔴🌹🌺संकट कटे मिटे सब पीरा,जपत निरन्तर हनुमत बलबीरा,जय जय जय हनुमान गोसाईं,कृपा करो गुरुदेव की नाई👏‼️*
*‼️🔴🌹🌺जय श्रीकृष्ण: राधेराधे👏🌹‼️*
भागवत का मुख्य विषय है निष्काम भक्ति,जहाँ भोगेच्छा है वहाँ भक्ति नहीं होती,भोग के लिए की गयी भक्ति से भगवान प्रसन्न नहीं होते,भोग के लिए भक्ति करने वाले को संसार प्यारा है,भगवान नहीं, भगवान के लिए ही भक्ति करो,भक्ति का फल भगवान ही होना चाहिए,संसार-सुख नहीं,क्षजो ऐसा सोचते है कि भगवान मेरा काम कर दें या भगवान मेरे काम आये,उसे वैष्णव नहीं कहा जा सकता।
भगवान से कोई सन्तान मांगता है तो कोई धन,तब भगवान सोचते है कि मेरे लिए तो मंदिर में कोई आता ही नहीं है, सब अपना-अपना मनोरथ मुझसे पूरा करने के लिए ही आते हैं, सच्चा वैष्णव तो भगवान से कहेगा कि “मैं तो अपनी ज्ञानेन्द्रियाँ, कर्मेन्द्रियाँ, मन सब कुछ तुम्हारे चरणों में अर्पित करने के लिए आया हूँ।”
सच्चा वैष्णव भगवान से न तो दर्शन मांगता है और न तो मुक्ति, वह यदि कुछ भी मांगेगा तो केवल इतना ही कि वह भगवान की सेवा में ही तन्मय होता रहे, मांगने से प्रेम की धारा टूट जाती है,प्रेम का प्रमाण घटने लगता है। इसलिए प्रभु से कुछ भी न मांगे, भगवान को अपना ऋणी बनायें।
श्रीरामचन्द्रजी ने राज्याभिषेक के प्रसंग पर सभी वानरों को भेंट दी किन्तु हनुमानजी को कुछ नहीं दिया,इस घटना से सीताजी को दुःख हुआ, उन्होंने राम से कहा कि हनुमानजी को भी कुछ दीजिये।
रामजी ने कहा की उसे क्या दूँ ?
उसने तो मुझ पर कितने उपकार किये है और मुझे ऋणी बनाया है, ब सीताजी का समाचार लेकर हनुमानजी वापस आये- तब -श्री राम हनुमानजी से कहते है-
“प्रति उपकार करउ का तोरा।
सन्मुख होइ न सकत मन मोरा।।”
हनुमान जी के उपकार के सामने -तीन भुवन के मालिक की नजर नीची हुई है,वो नजर नहीं मिला सके,शुद्ध प्रेम में लेने की भावना नहीं होती,देने की होती है।
“मोह” भोग की इच्छा करता है जब कि “प्रेम” भोग देता है, प्रेम में मांग नहीं होती, प्रेम में अपेक्षा का भाव जगा कि सच्चा प्रेम भागा ही समझें, भक्ति में मांगी हुई चीज मिलेगी जरूर किन्तु भगवान हाथ से निकल जायेंगे,नित्य देने वाला चला जायगा।
गीता में कहा है – “सकामी भक्त जिन- जिन देवताओं की पूजा करते है,उन सभी देवताओं द्वारा- मै इच्छित भोगों की पूर्ति करता हूँ, किन्तु मेरी निष्काम भॉति करने वाले भक्त मुझे ही प्राप्त करते है।”
भगवान से धन मांगोगे तो धन तो मिलेगा किन्तु भगवान स्वयं नहीं मिलेंगे, भगवान से जितना मांगोगे उतना वह देंगे पर प्रेम कम हो जायेगा, व्यवहार में भी हम यह अनुभव करते है कि जब तक कुछ माँगा न जाये तब तक दो मित्रों की मैत्री प्रेमपूर्ण रहती है।
गोपियाँ नैन (दृष्टी) श्रीकृष्ण को देती है और मन भी, वे श्रीकृष्ण से कुछ भी मांगने की अपेक्षा सर्वस्व अर्पण ही करती है।
भगवान से कुछ मांगेगे तो प्रेम खंडित होगा, हमेशा ऐसा ही माने की प्रभु ने मुझे बहुत दिया है, निष्काम भक्ति उत्तम है,वैष्णव मुक्ति की अपेक्षा नहीं करता, हरि के जन तो मुक्ति भी नहीं मांगते, मुक्ति की अपेक्षा से भक्ति में अलौकिक आनन्द है, जिसे भक्ति में जिसे आनन्द मिलता है, उसे मुक्ति का आनन्द तुच्छ- नगण्य लगता है।
वेदांती तो मानते हैं कि इस आत्मा को बन्धन है ही, नहीं तो फिर मुक्ति का प्रश्न ही कैसे उठता है।
वैष्णव मानते हैं कि मुक्ति तो मेरे भगवान की दासी है। दासी (मुक्ति) की अपेक्षा मेरे भगवान श्रेष्ठ हैं,भगवान मेरा काम करे ऐसी अपेक्षा कभी न करो।
रामकृष्ण परमहंस को कैंसर की बीमारी हुई, शिष्यों ने कहा कि माताजी से कहिये,वे आपकी बीमारी का इलाज करेगी, रामकृष्ण ने कहा कि अपनी माता को मैं अपने लिए तकलीफ नहीं दूंगा।
भक्ति का अर्थ यह नहीं है कि “अपने सुख के लिए हम भगवान को कष्ट दे।” मांगने से सच्ची मैत्री के गौरव की हानि होती है, सच्चा समझदार मित्र कभी कुच्छ नहीं मांगता।
सुदामा की भगवान के प्रति सच्ची भक्ति थी,वे दरिद्र थे, पत्नी ने कुच्छ मांगने के लिए उन्हें भगवान के पास भेजा।
सुदामा भगवान के पास आये किन्तु मांगने के लिए नहीं, मिलने के लिए, उन्होंने द्वारिकापति का वैभव देखा,फिर भी जुबान तक नहीं खोली।
सुदामा ने सोचा कि मैत्री-क्षमिलन से यदि भगवान की आँखे भीग गई है तो फिर अपनी दरिद्रता की बात बताने पर तो उन्हें कितना गहरा दुःख होगा,मेरे दुःख के कारण मेरे कर्म है, मेरे दुःख की गाथा सुनकर उनको दुःख होगा।
ऐसा सोचकर सुदामा ने भगवान से कुछ नहीं माँगा। उनकी इच्छा थी की अपने लाए हुए मुठ्ठी भर चावल का भगवान प्रेम से प्राशन करे।
ईश्वर पहले हमारा सर्वस्व लेता है और फिर अपना सर्वस्व देता है, जीव के निष्काम होने पर ही भगवान उसकी पूजा करते है, भक्त जब निष्काम होता है तो भगवान अपने स्वरुप का दान भक्त को देता है,जीव जब अपना जीवत्व छोड़कर ईश्वर के पास जाता है, तब भगवान भी अपना ईश्वर तत्त्व भूलकर भक्त से मिलते हैं।
सुदामा दस दिन से भूखे थे फिर भी अपना सर्वस्व (मुठ्ठी भर चावल) प्रभु को दे दिए,उस मुठ्ठी भर चावल की कोई कीमत नहीं थी किन्तु मूल्य तो सुदामा के प्रेम-भाव का है, यदि मेरे लिए ठाकुरजी को थोड़ा सा श्रम उठाना पड़ेगा तो मेरी भक्ति व्यर्थ है, निष्फल है ऐसा मानें।
भगवान से कुछ न मांगें, न मांगने से भगवान ऋणी होंगे।
गोपियों ने भगवान से कुछ नहीं माँगा था, उनकी भक्ति निष्काम थी,अतः भगवान गोपियों के ऋणी थे।
गोपी गीत में भी वे भगवान से कहती है की हम तो आपकी निःशुल्क क्षुद्र दासियाँ हैं, अर्थात निष्काम भाव से सेवा करने वाली दासियाँ है।
इसी तरह कुरुक्षेत्र में भी जब वे (गोपियाँ) भगवान से मिलती है तो वहाँ भी कुछ नहीं मांगती है। वे तो केवल इतनी इच्छा करती है – “इस -संसार रूपी कुएँ में गिरे हुओं को, उसमे से बाहर निकलने के अवलम्बन- रूप आपके “चरणकमल” घर में रहते हुए भी हमारे मन में सदा बसे रहे।”
जब उद्धवजी,श्रीकृष्ण का संदेश लेकर गोकुल आये थे, तब- एक सखी (गोपी) उद्धवजी से पूछती है कि – तुम किसका संदेश लेकर आये हो?
श्री कृष्ण का?
वे तो यहीं उपस्थित है, लोग कहते हैं कि वे मथुरा गए है पर यह बात गलत है, मेरे ठाकुरजी हमेशा मेरा साथ ही है, चौबीस घंटे का हमारा उनके साथ संयोग है।
गोपियों का प्रेम शुद्ध है, वे जब भी भगवान का स्मरण करती है,ठाकुर जी को प्रगट होना ही पड़ता है, गोपियों की भक्ति इतनी सत्वशील है की भगवान खींचे हुए चले आते है, ठाकुर जी को साथ रखेंगे तो जहॉं भी जायेंगे भक्ति कर सकेंगे।
इसीलिए तुकाराम कहते है कि “मुझे चाहे भोजन न मिले, परन्तु हे विट्ठलनाथ मुझे एक भी क्षण तुम अपने से अलग न करना।”
गोपियों का आदर्श आँख के सामने रखें और भगवन की भक्ति करें।
सुदामा की निष्काम भक्ति को याद रखकर प्रभु की भक्ति करें,सुदामा और गोपियों जैसी भक्ति सीखें,अपना सर्वस्व भगवान को अर्पण करें तो भगवान भी अपना सर्वस्व हमें देंगे।
निष्काम भक्ति ही भागवत का मुख्य विषय है, निष्काम भक्ति ही श्रेष्ठ भक्ति है, निष्काम भक्ति का श्रेष्ठ दृष्टान्त है श्रीकृष्ण के प्रति गोपियों की निष्काम ममता,निष्काम प्रेम, गोपियाँ तो मुक्ति की भी इच्छा नहीं रखती थी। श्रीकृष्ण का सुख ही अपना सुख है, ऐसा गोपियाँ मानती थी।
एक सखी (गोपी) ने उद्धवजी से कहा कि – “श्रीकृष्ण के वियोग में हमारी कैसी दशा है,वह आपने देखी।
मथुरा जाने पर श्रीकृष्ण से कहना कि यदि आप मथुरा में सुख से रहते है तो हमारे सुख के लिए व्रज में आने का कष्ट न करें, हमारा प्रेम अपने सुख के लिए नहीं है,किन्तु श्रीकृष्ण को ही सुखी करने के लिए है।
श्रीकृष्ण के वियोग में हम दुखी है और विलाप करती हैं
परन्तु हमारे विरह में यदि वे मथुरा में सुख से रहते है तो वे सुखी रहे, हमारे सुख के लिए वे यहाँ न आये, यदि अपने सुख के लिए वह यहाँ आना चाहे तो अवश्य पधारें। “
शांडिल्य मुनि ने अपने भक्ति सूत्र में लिखा है – “तत्सुखे सुखित्वम् प्रेमलक्षणम्” दूसरों के सुख में सुख का अनुभव करना ही सच्चे प्रेम का लक्षण है।
गोपी प्रेम की पागल अवस्था में भगवान का अनुभव करती है, सखी सोचती है कि – “मै वहां मिलने गई और मेरे मिलने से मेरे ठाकोरजी को कुछ कष्ट हुआ तो, वो तो राजा है,और यदि -उनको कुछ लज्जा हुई कि -मैं इस गाँव की ग्वालिन से मै खेलता था तो?
मुझे मथुरा नहीं जाना है, मेरे प्रेम में कुछ-न-कुछ न्यूनता ही रह गई है, इसलिए वह मुझे छोड़कर चले गए है।
मेरा प्रेम यदि सच्चा है तो वे अवश्य गोकुल लौटेंगे। उस समय तक मै विरह-दुःख सहन करती रहूंगी।”
इसलिए श्रीकृष्ण कहते है कि – “मुझे गोकुल में जो आनंद गोपियों से मिला है-वह द्वारिका में नहीं है।”
गोपियों का प्रेम निष्काम है, भगवान का जो आश्रय लेता है वह निष्काम बनता है।
गोपियों की ऐसी निष्काम भक्ति से परमात्मा गोपियों के ऋणी हुए, गोपी प्रेम की महिमा दर्शनीय है।
किसका निष्काम प्रेम श्रेष्ठ है, रानियाँ का कि गोपियाँ का।
वो दिखाने के लिए- श्रीकृष्ण ने एक बार बीमार होने का नाटक किया, कोई भी औषधि सफल नहीं हुई।
तब नारदजी वह पधारे-उन्होंने कहा- कि- जो कोई वैष्णव- भक्त अपनी चरण रज दे तो श्रीकृष्ण की बीमारी दूर हो सके,किन्तु कोई अपनी चरण-रज देनेको तैयार नहीं हुआ, तब- रानियों से चरण-रज मांगी।
तो उन्होंने कहा कि -“हम नहीं देंगे, ये तो महापाप है और हमे नरक में जाना पड़ेगा” कोई भी तैयार नहीं हुआ,अन्त में बात गोपियों तक पहुँची।
गोपियों ने कहा कि- “अगर हमारी चरण रज से वे ठीक हो सकते है तो हम देने के लिए तैयार हैं, हम नरक यातना भी भुगत लेंगे” उन्होंने अपनी चरण रज दी।
श्रीकृष्ण की बीमारी दूर हो गई, और ऐसे सच्चे निष्काम प्रेम की परीक्षा भी हो गई,भागवत का फल है निष्काम भक्ति, गोपियों जैसी निष्काम भक्ति की आदत डालें’, भक्ति से मुक्ति मिलती है,भक्ति के बिना ज्ञान और वैराग्य प्राप्त नहीं होता, बिना ज्ञान की भक्ति अंधी है और बिना भक्ति के ज्ञान पंगु है।
*🔴🌹🌺👏🌺🌹🔴*
*आज का राशिफल*
*मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)*
*आज का दिन आपके लिए सुखमय रहने वाला है। जीवनसाथी का आपको पूरा सहयोग मिलेगा और आप उनकी खूब केयर करेंगे। आप अपनी आय बढ़ाने के सोर्सो का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देंगे, लेकिन निवेश आपको थोड़ा समझदारी से करना होगा। प्रॉपर्टी को लेकर कोई वाद विवाद चल रहा था, तो वह भी दूर होगा और फैसला आपके पक्ष में आ सकता है। परिवार में किसी सदस्य के विवाह प्रस्ताव पर मोहर लग सकती है।*
*वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)*
*आज का दिन आपके लिए परोपकार के कार्यों से जुड़कर नाम कमाने के लिए रहेगा। कार्यक्षेत्र में यदि कोई वाद विवाद की स्थिति उत्पन्न होगी, तो आप उसे अपने विचारों से सामान्य बनाने में कामयाब रहेंगे। आपके साथी से रिश्ते भी बेहतर रहेंगे। आप शौक मौज की चीजों पर अच्छा खासा खर्चा करेंगे। आपको इधर-उधर की बातों में पड़ने से बचना होगा। आप अपनी मेहनत से एक अच्छा मुकाम हासिल करेंगे, जिससे आपको खुशी होगी।*
*मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)*
*आज का दिन आपके लिए आनंदमय रहने वाला है। आप अपनी मेहनत से एक अच्छा मुकाम हासिल करेंगे। संतान को पढ़ाई-लिखाई के लिए आप कहीं बाहर भेज सकते हैं। विदेशों से व्यापार कर रहे लोगों की कोई बड़ी डील मिल सकती है, जिससे उन्हें अपने व्यापार में कुछ नए लोगों को शामिल भी करना पड़ सकता है। आपके काम की गति तेज रहेगी, लेकिन आलस्य के कारण आप कुछ कामों को कल पर टालने की कोशिश करेंगे।*
*कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)*
*आज का दिन आपके लिए उन्नति की राह पर आगे बढ़ने के लिए रहेगा। आप किसी मनोरंजन के कार्यक्रम में सम्मिलित हो सकते हैं। परिवार में छोटे बच्चे आपसे किसी चीज की फरमाइश कर सकते हैं। आपको जीवनसाथी की सेहत को लेकर थोड़ा सा सतर्क रहना होगा। आपका कोई विरोधी आपको परेशान करने की कोशिश कर सकता है। आपको अपने पिताजी की कोई बात बुरी लगने से आपका मन परेशान रहेगा। पैतृक संपत्ति को लेकर कोई विवाद खड़ा हो सकता है।*
*सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)*
*आज का दिन आपके लिए नुकसानदायक रहने वाला है। आपको कोई काम बहुत ही संभालकर करना होगा। दूसरों के मामले में बोलने से आपको कोई टेंशन मिल सकती है। आप मित्रों के साथ किसी पार्टी आदि को करने की योजना बना सकते हैं। ससुराल पक्ष का कोई व्यक्ति आपसे मेल मुलाकात करने आ सकता है। आपको किसी से किए हुए बातें को पूरा करना होगा और आप अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति पर अच्छा खासा धन व्यय करेंगे। आपका डूबा हुआ धन आपको मिल सकता है, जो आपके बिजनेस में चार चांद लगाएंगे।*
*कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)*
*आज का दिन आपके लिए बेफिजूल के खर्चों पर रोक लगाने के लिए रहेगा। रोजगार को लेकर परेशान चल रहे किसी अच्छे अवसर को पाकर काफी खुश होंगे। परिवार में किसी नये मेहमान का आगमन हो सकता है, जो लोग किसी को पसंद करते हैं, वह उनसे अपने प्रेम का इजहार कर सकते हैं। आपकी वाणी की सौम्यता आपको मान सम्मान दिलवाएगी, लेकिन आपको किसी से मांगकर वाहन चलाने से बचना होगा। विद्यार्थी अपनी पढ़ाई लिखाई को लेकर लापरवाही बिल्कुल ना बरतें।*
*तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)*
*आज का दिन आपके लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा। आपके सहयोगी आपको कोई जिम्मेदारी दे सकते हैं। सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे लोग किसी परीक्षा को देने जाएंगे। आपकी व्यवसाय में मन मुताबिक लाभ मिलने से खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा, लेकिन आप अपनी आय और व्यय में संतुलन बनाकर चले, तो आपके लिए बेहतर रहेगा। आपकी पद और प्रतिष्ठा बढ़ने से खुशी होगी। वाहनों का प्रयोग आप थोड़ा सावधान रहकर करें।*
*वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)*
*आज का दिन व्यापार में वृद्धि लेकर आने वाला है। कारोबार में आपको पार्टनरशिप में कोई काम करने से बचना होगा। आपकी कोई मन की इच्छा पूरी हो सकती है, जिसके बाद आप अपने घर किसी तरह का पूजा पाठ का आयोजन कर सकते हैं। आपको किसी अनुभवी व्यक्ति का सहयोग मिलेगा। आपकी सोच समझ से काम पूरे होंगे। आपको अपनी कामों को लेकर योजना बनाकर चलना होगा और आपकी आय बढ़ने से खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा।*
*धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)*
*आज का दिन आपके लिए खर्चो से भरा रहने वाला है। सामाजिक कार्यों में आप बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे। आपको किसी काम की वजह से अचानक अपने कामों में बदलाव करना पड़ सकता है। जिससे आपका डेली रूटीन बिगड़ेगा। आपको यदि कोई दिल से संबंधित समस्या हो, तो उसको लेकर आप किसी अच्छे डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। माता-पिता के आशीर्वाद से आपकी कोई प्रॉपर्टी को लेकर डील अटकी हुई थी, तो वह फाइनल हो सकती है। आपको किसी से कोई जरूरी जानकारी शेयर करने से बचना होगा।*
*मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)*
*आज का दिन आपके लिए सफलता दिलाने वाला रहेगा। पारिवारिक जीवन में आपसी प्रेम और सहयोग आप पर बना रहेगा। भाई- बहनों से आपकी खूब पटेगी। जीवनसाथी के लिए आप कोई उपहार लेकर जा सकते हैं। आपके बिजनेस में धन को लेकर कोई काम रुका हुआ था, तो वह भी पूरा हो सकता है। आपको किसी की बातों पर भरोसा करने से बचना होगा और आपका कोई लंबे समय से रुका हुआ काम पूरा हो सकता है। आप अपने आसपास रह रहे लोगों को पहचानने की कोशिश करें।*
*कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)*
*आज का दिन आपके लिए बढ़िया रहने वाला है। आपकी सुख-सुविधाओं में वृद्धि होने से आपका मन काफी खुश रहेगा। आपके रहन-सहन के स्तर में भी सुधार आएगा। आप वैवाहिक जीवन में आप तालमेल बनाकर चलेंगे, जिससे आपकी साथी के साथ बॉन्डिंग अच्छी रहेगी। आपको यदि संतान के करियर को लेकर कोई टेंशन थी, तो वह भी दूर होते दिख रही है। आपको अपनी माताजी से कोई भी बात गुप्त नहीं रखनी है। यदि वह आपको कोई जिम्मेदारी दें, तो उसमें ढील बिल्कुल ना दें।*
*मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)*
*आज का दिन आपके लिए कुछ नई चुनौतियां लेकर आएगा, लेकिन आपको उनसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। आप अपने बिजनेस में किसी के साथ पार्टनरशिप ना करें और अपनी आंख और कान खुले रखकर कामों को करें। जीवनसाथी को नौकरी में यदि समस्या आ रही थी, तो वह भी दूर होगी। आप अपने पुराने कार्यों को भी उतारने की पूरी कोशिश करेंगे और सेहत में उतार-चढ़ाव लगा रहेगा, जिसमें आपको लापरवाही नहीं करनी है।*

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