Vaidik Panchang 11072025 Sawan Month Starts

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 11 जुलाई 2025*
🌤️ *दिन – शुक्रवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – वर्षा ऋतु*
🌤️ *मास – श्रावण (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार आषाढ)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – प्रतिपदा 12 जुलाई रात्रि 02:08 तक तत्पश्चात द्वितीया*
🌤️ *नक्षत्र -उत्तराषाढ़ा पूर्ण रात्रि तक*
🌤️ *योग – वैधृति रात्रि 08:45  तक तत्पश्चात विष्कंभ*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 11:04 से दोपहर 12:44 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:05*
🌤️ *सूर्यास्त – 07:23*
👉 *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – पूर्णिमांत श्रावण मास आरंभ, विद्यालाभ योग (प्रातः05:56 से रात्रि 11:45 तक) केवल गुजरात-महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश, आदि अमावस्यांत मास प्रचलन वाले राज्यो मे*
💥 *विशेष – प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
💥 *चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)*
💥 *चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।*
        🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

🌷 *श्रावण मास* 🌷
🙏🏻 *भगवान शिव का पवित्र श्रावण (सावन) मास 11 जुलाई 2025 शुक्रवार से शुरू हो रहा है, (उत्तर भारत हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार) (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार अषाढ़ मास चल रहा है वहा 25 जुलाई, शुक्रवार से श्रावण (सावन) मास आरंभ होगा)*


🙏🏻 *श्रावण हिन्दू धर्म का पञ्चम महीना है। श्रावण मास शिवजी को विशेष प्रिय है । भोलेनाथ ने स्वयं कहा है—*
🌷 *द्वादशस्वपि मासेषु श्रावणो मेऽतिवल्लभ: । श्रवणार्हं यन्माहात्म्यं तेनासौ श्रवणो मत: ।।*
*श्रवणर्क्षं पौर्णमास्यां ततोऽपि श्रावण: स्मृत:। यस्य श्रवणमात्रेण सिद्धिद: श्रावणोऽप्यत: ।।*
➡ *अर्थात मासों में श्रावण मुझे अत्यंत प्रिय है। इसका माहात्म्य सुनने योग्य है अतः इसे श्रावण कहा जाता है। इस मास में श्रवण नक्षत्र युक्त पूर्णिमा होती है इस कारण भी इसे श्रावण कहा जाता है। इसके माहात्म्य के श्रवण मात्र से यह सिद्धि प्रदान करने वाला है, इसलिए भी यह श्रावण संज्ञा वाला है।*
🙏🏻 *श्रावण मास में शिवजी की पूजाकी जाती है | “अकाल मृत्यु हरणं सर्व व्याधि विनाशनम्” श्रावण मास में अकालमृत्यु दूर कर दीर्घायु की प्राप्ति के लिए तथा सभी व्याधियों को दूर करने के लिए विशेष पूजा की जाती है। मरकंडू ऋषि के पुत्र मारकण्डेय ने लंबी आयु के लिए श्रावण माह में ही घोर तप कर शिव की कृपा प्राप्त की थी, जिससे मिली मंत्र शक्तियों के सामने मृत्यु के देवता यमराज भी नतमस्तक हो गए थे।*
🙏🏻 *श्रावण मास में मनुष्य को नियमपूर्वक नक्त भोजन करना चाहिए ।*
➡ *श्रावण मास में सोमवार व्रत का अत्यधिक महत्व है*
🌷 *“स्वस्य यद्रोचतेऽत्यन्तं भोज्यं वा भोग्यमेव वा। सङ्कल्पय द्विजवर्याय दत्वा मासे स्वयं त्यजेत् ।।”*
🙏🏻 *श्रावण में सङ्कल्प लेकर अपनी सबसे प्रिय वस्तु (खाने का पदार्थ अथवा सुखोपभोग) का त्याग कर देना चाहिए  और उसको ब्राह्मणों को दान देना चाहिए।*
🌷 *“केवलं भूमिशायी तु कैलासे वा समाप्नुयात”*
🙏🏻 *श्रावण मास में भूमि पर शयन का विशेष महत्व है। ऐसा करने से मनुष्य कैलाश में निवास प्राप्त करता है।*
➡ *शिवपुराण के अनुसार श्रावण में घी का दान पुष्टिदायक है।*


           🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

जुलाई पंचक 2025 तिथि

पंचक आरंभ: जुलाई 13, 2025, रविवार को शाम 06:53 बजे
पंचक अंत: जुलाई 18, 2025, शुक्रवार को तड़के सुबह 03:39 बजे


*”मन चंगा तो*
*कठौती में गंगा”*
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(सेवा का आकार नहीं, भाव का आधार मायने रखता है)

मंदिर में भंडारा चल रहा था।
भजन की स्वर-लहरियाँ, देसी घी की खुशबू, और श्रद्धालुओं की कतारें…
एक कोने में तीन युवा मित्र भोजन कर रहे थे। बातों-बातों में मन की एक कसक सामने आ गई…

पहला बोला —
“काश यार, हम भी ऐसे भंडारे कर पाते… सौ-दो सौ लोगों को खिलाते, पुण्य कमाते…”

दूसरा बोला —
“लेकिन सैलरी तो जैसे खर्चों से पहले ही विदा ले लेती है…”

तीसरा बोला —
“घर, बच्चे, खर्चे… कहाँ से करें भंडारा? हमारी तो हालत ही अलग है!”

पास ही बैठे महात्मा जी यह सब सुन रहे थे।
वे मुस्कराए, थाली एक ओर रखी और बोले:

> “बेटा, भंडारे के लिए ज़रूरी नहीं कि हजारों रुपए हों,
भंडारे के लिए चाहिए बड़ा मन, न कि बड़ी थाली।”

तीनों मित्र चौंक गए।

महात्मा जी बोले:

🐜 “एक बिस्किट का पैकेट लो, उसका चूर्ण बनाकर चींटियों के रास्ते में डाल दो…
ना निमंत्रण भेजना पड़ेगा, ना RSVP चाहिए।
वे बिना कहे आएँगी… यही तो है सच्चा भंडारा।”

🦉 “छत पर चावल के कुछ दाने डाल दो, कबूतर-चिड़ियाँ आ जाएँगी…
और देखना, कोई जवाब न देगा, पर मन भर जाएगा।”

🐄 “एक रोटी किसी गाय को, एक बूँद जल किसी प्यासे जीव को…
ईश्वर हर प्राणी के लिए भोजन तय करता है,
तुम बस उसके माध्यम बन जाओ।”

महात्मा बोले —

> “जो सेवा बिना शोर के हो, वही सच्चा पुण्य है।
बिना निमंत्रण, बिना प्रचार, बिना प्रतीक्षा —
जब कोई जीव आकर खा जाए,
वही है वो भंडारा, जो मन से निकलता है और स्वर्ग तक पहुँचता है।”

तीनों युवकों की आँखें नम थीं, पर दिल पूर्ण…
आज उन्होंने जाना कि सेवा का मूल्य थाली से नहीं, भावना से आँका जाता है।

*भावार्थ:*

जब मन में श्रद्धा हो और हाथों में सेवा,
तो कोई RSVP नहीं चाहिए… भगवान खुद आ जाते हैं..!!
    *🙏🏿🙏🙏🏾जय श्री कृष्ण*🙏🏻🙏🏼🙏🏽


उपदेशी-को-सीख

पंडितजी एक दिन मिथिला बाजार में चहल-कदमी कर रहे थे। वहाँ एक सेठ एक भारी बक्सा लिए बैठा था और बार-बार मजदूरों को बुलाता और उनसे कुछ बातें करता और मजदूर गर्दन हिलाते हुए या हाथ को मना की मुद्रा में हिलाते हुए वहाँ से चले जाते ।

काफी देर तक बाजार चौक पर यह दृश्य देखने के बाद पंडितजी ने सोचा चलो, चल के देखें कि माजरा क्या है? वैसे वे इतना समझ चुके थे कि सेठ वह बक्सा उठवाकर कहीं ले जाना चाहता है मगर मजदूर कम मेहनताना के कारण इनकार करके वहाँ से चले जा रहे हैं।

पंडितजी सेठ के पास पहुँचे और सेठ से पूछा -” क्या बात है सेठ जी, आप बहुत देर से यहाँ परेशान हाल बैठे हैं ?”

सेठ ने कहा -” हाँ, भाई ! मुझे एक मजदूर चाहिए जो यह बक्सा उठा-कर यहाँ से तीन कोस की दूरी पर जो गाँव है, वहाँ पहुँचा दे।” ।

पंडितजी ने कहा-“मैं भी यहाँ काम की तलाश में आया हूँ- चलिए, मैं ही पहुँचा दूँ! बोलिए मजूरी क्या देंगे ?”

सेठ मुस्कुराया, बोला-“मेरे पास देने के लिए तीन अनमोल उपदेश हैं जो मैं हर एक कोस पर तुम्हें एक-एक कर दूंगा !”

पंडितजी ने कहा “यानी पैसा-रुपया कुछ नहीं ? खाना-खुराकी भी नहीं ? सिर्फ उपदेश?”

सेठ ने कहा-“तीन अनमोल उपदेश, जिससे तुम्हारा जीवन बदल जाएगा।”

पंडितजी ने मजदूर की तरह ही हाव- भाव बनाते हुए कहा-“सो तो ठीक है, मगर उपदेश हर आधा कोस पर दीजिए!”

सेठ ने कहा -” ठीक है मगर तीसरा और अन्तिम उपदेश सुनने के बाद तुम्हें तीन कोस चलकर मुझे उस गाँव तक पहुँचाने का वादा करना होगा !”

पंडितजी ने वचन दे दीया । पंडितजी मन ही मन सोच रहे थे कि उपदेश लेना बुरा नहीं है । हो सकता है कि कोई काम की बात सुनने को मिल जाए और यदि सेठ ने ठगने की कोशिश की तो उसे सबक सिखाकर ही लौटूंगा …।

जब पंडितजी बक्सा उठाने के लिए झुके तो सेठ ने कहा-“अहा ! जरा सावधानी से ! इसमें बेहद नाजुक चीजें हैं !”

पंडितजी ने सावधानीपूर्वक सिर पर बक्सा उठा लिया । आधा कोस चले तो सेठ से कहा-“सेठ जी, पहला उपदेश दे दीजिए।”

“ऐसे आदमी पर भरोसा न करना जो कहे कि केवल अपना पेट भरने से अच्छा है भूखा रह जाना ।” सेठ ने उपदेश दिया ।

पंडितजी को सेठ की बात पसन्द आई ।

जब पंडितजी दूसरे आधे कोस में प्रवेश कर गए तब दूसरा उपदेश सुनने की बेचैनी होने लगी। उन्होंने सेठ से दूसरा उपदेश देने को कहा ।

सेठ ने दूसरा उपदेश सुनाया-“ऐसा व्यक्ति विश्वसनीय नहीं जो कहे, घोड़े पर सवार होने से अच्छा है पैदल चलना!”

पंडितजी यह सुनकर शान्त रह गए। बात ठीक भी थी कि जब घोड़ा हो तो कोई पैदल क्यों चले ?

तीसरे अधकोसी में प्रवेश के बाद पंडितजी ने सेठ से कई बार कहा कि उपदेश सुनाए मगर सेठ टालता गया । जब गन्तव्य की दूरी महज दो फर्लांग बची तो पंडितजी रुक गए और बोले-“अब तीसरा और अन्तिम उपदेश दे दीजिए सेठ जी वरना अब एक कदम आगे नहीं बढ़ाऊँगा! यदि आप यह सोच रहे हैं कि उपेदश सुनने के बाद मैं यह बक्सा आपके स्थान तक नहीं पहुचाऊँगा तो यह बात मन से निकाल दीजिए। मैं ब्राह्मण हूँ और झूठा वचन नहीं देता हूँ।”

विवश होकर सेठ ने तीसरा उपदेश सुनाया “उस व्यक्ति पर भरोसा न करना जो कहे कि संसार में तुमसे भी बड़ा कोई मूर्ख होगा !”

पंडितजी को बात समझ में आ गई कि सेठ उससे मुफ्त में बक्सा ढुलवा कर उन्हें संसार का सबसे बड़ा मूर्ख भी बता रहा है। मगर वे चुपचाप चलते रहे ।

जब सेठ का घर आ गया तब उसने पंडितजी से कहा-“बक्सा यहाँ रख दो !”

सेठ की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि पंडितजी ने बक्सा सिर से ही धरती पर पटक दिया धड़ाम-चनन्-चनाक-छन ! की आवाज बक्सा गिरते ही पैदा हुई ।

सेठ चीखा “अरे मैंने तुम्हें सावधानी बरतने को कहा था !”

पंडितजी ने कहा-“सेठ जी ! भूलिए मत ! आपने मुझे सावधानी से बक्सा उठाने के लिए कहा था-रखने के लिए नहीं।”

सेठ वहीं सिर पकड़कर बैठ गया क्योंकि बक्से में काँच से बनी चीजें रखी थीं और पंडितजी अपने होंठों पर विजयी मुस्कान लिए वहाँ से लौट आए..!!
🙏🏼🙏🏻🙏🏾जय श्री कृष्ण🙏🙏🏿🙏🏽


         *🌳 ब्रह्मचर्य 🌳*

दो सन्यासी बरसात के मौसम में एक आश्रम से दूसरे आश्रम की ओर जा रहे थे। बीच में नदी और जंगल पड़ती थी। दोनों सन्यासी पैदल यात्रा कर रहे थे। एक सन्यासी 25 वर्ष का था और दूसरा सन्यासी 65 वर्ष का। छोटे सन्यासी बड़े सन्यासी की बड़ी सेवा करते थे, आश्रम में नए सन्यासी सदैव अपने बड़े सन्यासियों के प्रति आदर सम्मान एवं सेवा का भाव रखते हैं। बड़े सन्यासी आगे आगे चल रहे थे। छोटे सन्यासी उनके ठीक पीछे चल रहे थे।

कुछ देर चलने के उपरांत अब उन्हें एक नदी पार करनी थी नदी के पास एक सुंदर सी युवा स्त्री खड़ी थी उसे स्त्री ने बड़े सन्यासी जी से निवेदन किया। स्त्री ने कहा मुझे तैरना नहीं आता और ये नदी पार करनी है। बड़े सन्यासी ने स्त्री की ओर अपना चेहरा घुमाया। स्त्री ने पुनः कहा मेरी सहायता कीजिए, मुझे नदी पार करवा दें। बड़े सन्यासी जी रुके और सोचने लगे, “क्या मुझे ऐसा करना चाहिए? मानवता के रूप से तो यह सही है। परंतु, मेरा इतने वर्षों का ब्रह्मचर्य है। कहीं स्त्री के स्पर्श से वह नष्ट ना हो जाए। मेरे इतने सालों की तपस्या है।

मैं यूं ही किसी की मदद करने के लिए उसे नष्ट नहीं कर सकता।” यह सब विचार कर बड़े सन्यासी जी ने हाथ जोड़कर उस महिला को मदद करने से मना कर दिया। बड़े सन्यासी जी नदी की ओर मुड़ कर नदी पार करने के लिए नदी में उतर पड़े।

जब नदी पार कर बड़े सन्यासी दूसरे छोर पर पहुंचे। तब उन्होंने पीछे मुड़कर छोटे सन्यासी को देखना चाहा कि, आखिर छोटे सन्यासी जी अभी कहां तक पहुंचे हैं। यह क्या? वह देखकर अचंभित रह गए। छोटे सन्यासी उस महिला को नदी पार करवाने में मदद कर रहे थे। छोटे संन्यासी ने उस महिला को अपनी पीठ पर चढ़ा रखा था और पानी में तैर रहे थे। यह सब देख बड़े सन्यासी हैरान भी थे और उन्हें क्रोध भी आ रहा था।

बड़े सन्यासी समझ नहीं पा रहे थे कि, वह इस बात से ज्यादा दुखी हैं या क्रोधित। वे सोच रहे थे आखिर कोई इतना मूर्ख कैसे हो सकता है कि अपने इतने सालों के संन्यास को और तपस्या को भंग कर दें? वह भी एक स्त्री के लिए! या फिर अभी इस छोटे सन्यासी की तपस्या में कमी थी? या वो अभी पूर्ण रूप से ब्रह्मचारी बन ही नहीं पाया था? एक स्त्री के सौंदर्य को देखकर भटक गया। यदि वह उसे मदद नहीं करता तो कौन सा मानव जाति पर कोई आपत्ति आ जानी थी?” यह सब सोच बड़े सन्यासी जल्दी-जल्दी आगे बढ़ते जा रहे थे।

बड़े संन्यासी ने जब फिर से पीछे मुड़कर देखा तो पाया कि वे दोनों नदी पार कर चुके हैं। छोटे सन्यासी उस महिला से कह रहे थे की, देवी आप अब सुरक्षित हैं। अब आप अपने गंतव्य स्थान को जा सकती हैं। मैं आपसे अब जाने की आज्ञा लेता हूँ। यह कह कर वह भी बड़े सन्यासी के पीछे-पीछे आने लगे। बड़े सन्यासी आगे मुड़कर वापस आगे जाने लगे। तभी बड़े सन्यासी के पैर में एक कांटा चुभ गया और बड़े सन्यासी के पैरों से लहू बहने लगा। यह देख छोटे सन्यासी दौड़े और बड़े सन्यासी के पैर से कांटा निकाल दिया। फिर उन्हें बिठाने के लिए एक शिला साफ किया। परंतु, बड़े सन्यासी छोटे सन्यासी से अत्यंत क्रुद्ध थे। उन्होंने छोटे सन्यासी को डपटते हुए कहा, “मुझे तुम्हारी सहायता या सेवा की आवश्यकता नहीं है।”

यह कहकर लंगड़ाते हुए वह आगे बढ़ने लगे। जब भी छोटे सन्यासी कोई बात कहना चाहते या बड़े सन्यासी की सेवा करना चाहे, तो बड़े सन्यासी झिड़क देते। छोटे सन्यासी समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर हुआ क्या है? उनके सोच में यह बात दूर-दूर तक नहीं थी कि महिला की मदद करने के कारण बड़े सन्यासी दुखी एवं क्रोधित हैं। चलते चलते दोनों सन्यासी दूसरे आश्रम तक पहुंच गए। उन दोनों के रहने की व्यवस्था एक ही कमरे में की हुई थी।

दूसरे आश्रम के सन्यासियों ने इन दोनों का स्वागत किया। जब आश्रम के बाकी लोग कमरे से चले गए, तब बड़े संन्यासी ने क्रोध में बोला, “ये तुम्हें सन्यासी समझ रहे हैं। पर इन्हें क्या मालूम? तुम सन्यासी नहीं! भोगी हो। तुम मे सन्यासी और ब्रह्मचारी के कोई लक्षण नहीं है। छोटे सन्यासी कुछ समझ नहीं पाए। तब उन्होंने हाथ जोड़कर कहा, “मुझ से क्या अपराध हुआ है? जिसके कारण आप मुझसे इतना क्रोधित है? आप ऐसा क्यों कह रहे हैं कि मुझ में सन्यासी ब्रह्मचारी के कोई लक्षण नहीं?

यह सब सुनकर बड़े सन्यासी कहने लगे, “जैसे तुम्हें पता ही नहीं कि तुमने क्या किया है? उस महिला ने मुझे भी तो मदद मांगी थी। पर मैंने अपने ब्रह्मचर्य को, अपने संन्यास को ताक पर रखकर, उसकी मदद नही की।
तुमने एक क्षण सोचना भी आवश्यक नहीं समझा की, क्या उचित है? क्या अनुचित है? उसके सौंदर्य के आगे, अपनी तपस्या अपने सन्यास एवं ब्रह्मचर्य को एक बार भी याद नहीं कर पाए। सब का त्याग कर, उस महिला के हाथ को पड़कर नदी पार करने लगे। ऐसे अमर्यादित कृत्य करने के बाद तुम मुझसे पूछ रहे हो कि, मैंने ऐसा क्या किया है? माथे पर जब रूप का आकर्षण चढ़ता है तब कुछ और नहीं दिखता।”

तब हाथ जोड़कर छोटे संन्यासी ने मुस्कुराते हुए कहा, “आप सही कह रहे हैं। जब रूप का आकर्षण माथे पर चढ़ता है, तब कुछ और नहीं दिखता। मैंने तो उस महिला का साथ कब का छोड़ दिया, परंतु वह अभी तक आपके माथे में बैठी हुई है। क्या क्रोध, कुंठा और दुख ब्रह्मचर्य को भंग नहीं करते? क्या केवल स्त्री का स्पर्श ब्रह्मचर्य को भंग करता है?

ब्रह्मचर्य का स्थान मनुष्य के अंदर है, बाहर नहीं। बाहर की कोई भी स्थिति, प्रस्थिति, वस्तु, या स्थान एक संन्यासी एक ब्रह्मचारी को भंग नहीं कर सकते। जब तक वह स्वयं अंदर से भंग ना हो। मैंने तो उस स्त्री को केवल एक असहाय मानव के रूप में देखा। उसकी सहायता की और आगे चल पड़ा। सन्यासी जीवन में तो काम, क्रोध, मद, मोह किसी के लिए भी स्थान नहीं है। ब्रह्मचर्य का अर्थ ब्रह्म जैसा आचरण होता है। सन्यासी का अर्थ हर प्रकार के बंधन से मुक्ति होता है।”

यह सब सुन, बड़े सन्यासी हाथ जोड़कर छोटे सन्यासी से कहने लगे, “मुझे क्षमा कीजिए सन्यासी जी, आप आयु में मुझसे छोटे हैं, परंतु ज्ञान में मुझे बहुत ही बड़े हैं। मुझसे अपराध हुआ है।” तब छोटे संन्यासी ने कहा, “आपने सीख ले ली यह पर्याप्त है। बाकी अब आप मुझे, आपकी सेवा करने दें। यहां यही मेरा धर्म कहता है और दोनों मुस्कुराने लगे।

शिक्षा:-इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की, मनुष्य बाहर की बुराइयों से तभी आकर्षित हो सकता है, जब उसके अंदर में उन बुराइयों के लिए स्थान हो। यदि मनुष्य अपने आप को अंदर से निर्मल कर ले, तो बाहर की बुराइयां उसे दूषित नहीं कर सकती..!!
    *🙏🙏🏾🙏🏼जय श्री कृष्ण*🙏🏽🙏🏻🙏🏿


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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
दिनांक 11 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 2 होगा, इस मूलांक को चंद्र ग्रह संचालित करता है। चंद्र ग्रह मन का कारक होता है। आप अत्यधिक भावुक होते हैं। ग्यारह की संख्या आपस में मिलकर दो होती है इस तरह आपका मूलांक दो होगा। आप स्वभाव से शंकालु भी होते हैं। दूसरों के दु:ख दर्द से आप परेशान हो जाना आपकी कमजोरी है। चंद्र ग्रह स्त्री ग्रह माना गया है। अत: आप अत्यंत कोमल स्वभाव के हैं।

आपमें अभिमान तो जरा भी नहीं होता। चंद्र के समान आपके स्वभाव में भी उतार-चढ़ाव पाया जाता है। आप अगर जल्दबाजी को त्याग दें तो आप जीवन में बहुत सफल होते हैं। आप मानसिक रूप से तो स्वस्थ हैं लेकिन शारीरिक रूप से आप कमजोर हैं।


शुभ दिनांक : 2, 11, 20, 29

शुभ अंक : 2, 11, 20, 29, 56, 65, 92

शुभ वर्ष : 2027, 2029, 2036



ईष्टदेव : भगवान शिव, बटुक भैरव

शुभ रंग : सफेद, हल्का नीला, सिल्वर ग्रे

जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :

किसी नवीन कार्य योजनाओं की शुरुआत करने से पहले बड़ों की सलाह लें। बगैर देखे किसी कागजात पर हस्ताक्षर ना करें। व्यापार-व्यवसाय की स्थिति ठीक-ठीक रहेगी। स्वास्थ्य की दृष्टि से संभल कर चलने का वक्त होगा। पारिवारिक विवाद आपसी मेलजोल से ही सुलझाएं। दखलअंदाजी ठीक नहीं रहेगी। लेखन से संबंधित मामलों में सावधानी रखना होगी।


मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज के दिन कुछ प्रतिकूल परिस्थितियां बनेगी लेकिन धार्मिक प्रवृत्ति एवं पूर्व संचित पूण्य इससे बाहर निकालने में सहायता करेंगे। दिन के आरंभ में बौद्विक परिश्रम करना पड़ेगा इसका लाभ सम्मान के रूप में अवश्य मिलेगा। आर्थिक रूप से आज का दिन सामान्य रहेगा अधिकांश कार्यो में केवल आश्वासन से ही काम चलाना पड़ेगा। सेहत का भी आज ध्यान रखें पेट खराब होने से अन्य शारीरिक अंगों में शिथिलता आएगी। पारिवारिक वातावरण तालमेल की कमी के कारण बिखर सकता है।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आपका आज का दिन मिश्रित फलदायी रहेगा। कार्य क्षेत्र पर लाभ के कई अवसर मिलेंगे परन्तु अन्य कामो में उलझने के कारण इनमे से कुछ एक ही हाथ लग पाएंगे। नौकरी पेशा जातक कामो को जल्दी निपटाने के चक्कर मे कोई बड़ी भूल कर सकते है सतर्क रहें। परिजनों अथवा रिश्तेदारों से आपसी संबंधों में व्यवहारिकता मात्र ही रहेगी स्वार्थवश व्यवहार करेंगे। घर के बड़े लोग आज अकारण ही नाराज हो सकते है। संध्या बाद कोई शुभ समाचार मिलने से मानसिक शांति मिलेगी। धन के लेन देन में स्पष्टता रखें।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज के दिन आप किसी इच्छा पूर्ति को लेकर जिद पर अडंगे जिससे परिवार का वातावरण कुछ समय के लिए अशांत बनेगा। व्यवहारिकता स्वभाव में कम रहेगी इसका दुष्परिणाम कार्य क्षेत्र पर देखने को मिलेगा संध्या से पहके सभी आवश्यक कार्यो को पूर्ण कर लें इसके बाद सफलता में संशय रहेगा। विपरीत लिंगीय के प्रति अधिक भावुकता आर्थिक हानि कराएगी दिखावे पर फिजूल खर्च हो सकता है। व्यवसायी एवं नौकरी पेशा जातक मनोरंजन की योजना बनाएंगे। धन का निवेश अथवा उधारी आज ना करें।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आपके लिए आज का दिन लाभदायी तो रहेगा परन्तु लाभ कमाने के चक्कर मे आज शरीर की अनदेखी करना आगे भारी पड़ सकता है। कुछ दिनों से जिस वस्तु की कामना कर रहे थे आज उसकी प्राप्ति होने से मन प्रफुल्लित रहेगा। आज धन लाभ के साथ साथ खर्च में भी बढ़ोतरी होगी फिर भी आर्थिक संतुलन बना रहेगा। भाई बंधुओ का साथ मिलने से शत्रुओं पर आसानी से विजय पा लेंगे लेकिन आज घर का ही कोई सदस्य आपके भेदों को सार्वजनिक कर सकता है सतर्क रहें।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन सामान्य ही रहेगा फिर भी अतिआत्मविश्वास की भावना हानि करा सकती है इसका ध्यान रखे। कार्य क्षेत्र पर थोड़ी तू तू में में होने की सम्भवना है धन को लेकर आज किसी से वैर ना करें भविष्य के लिए हानिकारक रहेगा। आर्थिक उलझने दिन के मध्यान तक परेशान करेंगी इसके बाद आकस्मिक लाभ होने से थोड़ी राहत मिलेगी। परिवार के सदस्यों की फरमाइश पूरी ना होने पर अशांति फैलेगी इसका निराकरण शीघ्र करे। मनोरंजन के अवसर आज मुश्किल से ही मिलेंगे।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज के दिन का अधिकांश भाग भी आपके लिए कलहकारी रहेगा। आर्थिक स्थिति भी गड़बड़ाने से क्रोध अधिक आएगा। संबंधों के प्रति लापरवाह रहेंगे जिससे घर मे अशांति के प्रसंग ज्यादा बढ़ेंगे। पारिवारिक सदस्य के आज आपके विचार मेल नही खाएंगे। व्यवसायी वर्ग मध्यान बाद तक व्यापार को लेकर परेशान रहेंगे इसके बाद स्थिति में सुधार आएगा परन्तु आपकी छोटि मानसिकता आज ओरो को परेशान करेगी। सेहत का भी ध्यान रखें असंयमित दिनचर्या हानि पहुचायेगी।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज के दिन परिस्थिति मे सुधार आपके व्यवहार के ऊपर निर्भर करेगा बात बात पर खींज निकालने से पारिवारिक माहौल गर्म रहेगा। दाम्पत्य जीवन मे तालमेल की कमी रहने से कड़वाहट बढ़ेगी। आर्थिक रूप से भी संध्या बाद ही थोड़ी तसल्ली मिल सकेगी। व्यवसायी वर्ग किसी की सहायता की आस लगाए रहेंगे जिसमे संभवतया निराशा मिलेगी। नौकरी पेशा जातक आज आराम के मूड में अधिक रहने से कार्यो को पूर्ण नही कर सकेंगे। आस-पड़ोसियों से आज विवेकी व्यवहार रखें झड़प हो सकती है।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आपका आज का दिन मिलाजुला रहेगा दिन का आरंभिक भाग शुभ समाचारो की प्राप्ति कराएगा मध्यान के समय व्यावसायिक अथवा अन्य कार्यो में व्यस्त रहेंगे इसका परिणाम सांध्य के आस-पास ही मिल सकेगा लाभ आज आशा के अनुरूप ही रहेगा। आवश्यक कार्य आज ही पूरा कर लें इसके बाद व्यवधान आने लगेंगे। नौकरी पेशा जातक अधिकारियों से नाराज होंगे। संध्या के समय रमणीक स्थानों की यात्रा की योजना बनेगी। घर मे आज झगड़ा हो सकता है।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज के दिन आप लक्ष्य बनाकर कार्य करें अन्यथा मूल उद्देश्य से भटक सकते है दिन लाभदायी है इसका सदउपयोग करें। बेरोजगार लोग थोड़ा अधिक प्रयास करें तो सफलता अवश्य मिलेगी। सरकारी अथवा अन्य महत्त्वपूर्ण कार्य संध्या से पहले पूर्ण करने का प्रयास करें इसके बाद हानि हो होगी। दूर प्रदेश से आज नए संबंध जुड़ेंगे परन्तु इनसे आर्थिक लाभ की आशा ना रखें। समाज के वरिष्ठ व्यक्ति का व्यवहार कुछ देर के लिए परेशानी में डालेगा। मित्र परिचितों के साथ पिकनिक पार्टी की योजना बनेगी।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज के दिन आपकी किसी मनोकामना पूर्ति की उम्मीद टूटने से मन दुखी रहेगा। व्यवसायी वर्ग आज पैसो के लेन देन में अत्यंत सावधानी बरतें धन के डूबने अथवा फंसने की सम्भवना है। परिजनों से वैर विरोध की भावना रहने से घर का वातावरण उदासीन रहेगा फिर भी महिलाये शांति बनाने के लिए पहल करेंगी। संध्या बाद का समय थोड़ा राहत प्रदान करेगा धन लाभ के अवसर मिलेंगे लेकिन अहंकार के कारण हाथ से ना निकले इसका ध्यान रखें।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज के दिन आप बड़ी-बड़ी योजनाए बनाएंगे लेकिन इनको साकार रूप देने में असफल रहेंगे फिर भी आर्थिक दृष्टिकोण से आज का दिन आशा के अनुरूप ही रहेगा। धन लाभ रुक-रुक कर परन्तु प्रचुर मात्रा में होगा जिससे अपनी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से कर सकेंगे। फिजूल के खर्च भी मध्यान के बाद अकस्मात ही बढ़ेंगे इनकी परवाह आज नही करेंगे। परिजन आज आपसे प्रसन्न रहेंगे लेकिन पति-पत्नि ने मामूली नोक-झोंक हो सकती है। संध्या के समय थकान ज्यादा रहेगी।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन आपको अधिकांश कार्यो में सफलता दिलाएगा। लेकिन धन संबंधित कार्य देखभाल कर ही करें। कार्य व्यवसाय से आज कम परिश्रम में ही अधिक लाभ अर्जित कर सकेंगे। प्रतिस्पर्धी स्वतः ही अपनी हार मान लेंगे जिससे लाभ के अवसर बढ़ेंगे। सेहत भी अनुकूल रहने से हर प्रकार की परिस्थितियों में काम कर लेंगे। जो लोग अबतक आपके विपरीत चल रहे थे वो भी आपका सहयोग एवं प्रशंशा करेंगे फिर भी आकस्मिक वाद-विवाद के प्रसंग बनेंगे इससे बच कर रहें। घर मे थोड़ी उग्रता रहने पर भी प्रेम बना रहेगा।

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Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton