Vaidik Panchang 10122025 Rashifal Samadhan

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 10 दिसम्बर 2025*
🌤️ *दिन – बुधवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – हेमंत ऋतु*
🌤️ *मास – पौष (गुजरात-महाराष्ट्र)मार्गशीर्ष*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – षष्ठी दोपहर 01:46 तक तत्पश्चात सप्तमी*
🌤️ *नक्षत्र – मघा 11 दिसंबर रात्रि 02:44 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी*
🌤️ *योग – वैधृति दोपहर 12:46 तक तत्पश्चात विष्कंभ*
🌤️ *राहुकाल – दोपहर 12:32 से दोपहर 01:53 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 07:06*
🌤️ *सूर्यास्त – 05:56*
👉 *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण -*
💥 *विशेष – षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
         🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
🌷  *तुलसी* 🌷
➡ *25 दिसम्बर को तुलसी पूजन दिवस है ।*
🙏🏻 *प्राचीन काल से ही यह परंपरा चली आ रही है कि घर में तुलसी का पौधा होना चाहिए। शास्त्रों में तुलसी को पूजनीय, पवित्र और देवी स्वरूप माना गया है, इस कारण घर में तुलसी हो तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। यदि ये बातें ध्यान रखी जाती हैं तो सभी देवी-देवताओं की विशेष कृपा हमारे घर पर बनी रहती है। घर में सकारात्मक और सुखद वातावरण बना रहता है, पैसों की कमी नहीं आती है और परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है। यहां जानिए शास्त्रों के अनुसार बताई गई तुलसी के संबंध में 8 खास बातें…*
🌿 *1. इन दिनों में नहीं तोड़ना चाहिए तुलसी के पत्ते-*
*शास्त्रों के अनुसार तुलसी के पत्ते कुछ खास दिनों में नहीं तोड़ने चाहिए। ये दिन हैं अमावश्या, पूनम, द्ववादशी, रविवार और सूर्य या चंद्र ग्रहण काल। इन दिनों में और रात के समय तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। बिना उपयोग तुलसी के पत्ते कभी नहीं तोड़ने चाहिए। ऐसा करने पर व्यक्ति को दोष लगता है। अनावश्यक रूप से तुलसी के पत्ते तोड़ना, तुलसी को नष्ट करने के समान माना गया है।*
🌿 *2. रोज करें तुलसी का पूजन-*
*हर रोज तुलसी पूजन करना चाहिए  साथ ही यहां बताई जा रही सभी बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। साथ ही, हर शाम तुलसी के पास दीपक लगाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि जो लोग शाम के समय तुलसी के पास दीपक लगाते हैं, उनके घर में महालक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है।*
🌿 *3. तुलसी से दूर होते हैं वास्तु दोष-*
*तुलसी घर-आंगन में होने से कई प्रकार के वास्तु दोष भी समाप्त हो जाते हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति पर शुभ असर होता है।*
🌿 *4. तुलसी का पौधा घर में हो तो नहीं लगती है बुरी नजर-*
*ऐसी मान्यता है कि तुलसी का पौधा होने से घर वालों को बुरी नजर प्रभावित नहीं कर पाती है। साथ ही, सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय नहीं हो पाती है। सकारात्मक ऊर्जा को बल मिलता है।*
🌿 *5. तुलसी का सूखा पौधा नहीं रखना चाहिए घर में-*
*यदि घर में लगा हुआ तुलसी का पौधा सूख जाता है तो उसे किसी पवित्र नदी में या तालाब में या कुएं में प्रवाहित कर देना चाहिए। तुलसी का सूखा पौधा घर में रखना अशुभ माना जाता है।*
🌿 *6. सूखा पौधा हटाने के बाद तुरंत लगा लेना चाहिए तुलसी का दूसरा पौधा-*
*एक पौधा सूख जाने के बाद तुरंत ही दूसरा तुलसी का पौधा लगा लेना चाहिए। सूखा हुआ तुलसी का पौधा घर में होने से बरकत पर बुरा असर पड़ सकता है। इसी वजह से घर में हमेशा पूरी तरह स्वस्थ तुलसी का पौधा ही लगाया जाना चाहिए।*
🌿 *7. तुलसी है औषधि भी-*
*तुलसी का धार्मिक महत्व तो है, साथ ही आयुर्वेद में इसे संजीवनीबूटी के समान माना जाता है। तुलसी में कई ऐसे गुण होते हैं जो कई बीमारियों को दूर करने और उनकी रोकथाम करने में सहायक हैं। तुलसी का पौधा घर में रहने से उसकी सुगंध वातावरण को पवित्र बनाती है और हवा में मौजूद बीमारी फैलाने वाले कई सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट कर देती है।*
🌿 *8. रोज तुलसी की एक पत्ती सेवन करने से मिलते हैं ये फायदे-*
*तुलसी की सुंगध हमें श्वास संबंधी कई रोगों से बचाती है। साथ ही, तुलसी की एक पत्ती रोज सेवन करने से हम सामान्य बुखार से बचे रहते हैं। मौसम परिवर्तन के समय होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बचाव हो सकता है। तुलसी की पत्ती सेवन करने से हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता काफी बढ़ जाती है, लेकिन हमें नियमित रूप से तुलसी की पत्ती का सेवन करते रहना चाहिए।
             🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

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।। श्री गणेशाय नमः ।।

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आदिपूज्यं गणाध्यक्षम् उमापुत्रं विनायकम्।
मंगलं परमं रूपं श्रीगणेशं नमाम्यहम्।।

अर्थ-
आदिदेव, प्रथमपूज्य, गणनायक, उमापुत्र, मंगलकारक श्री गणेशजी को मैं प्रणाम करता हूं।

हिंदुओं के जीवन और जगत में गणपति प्रथम पूज्य हैं। पूजा, अनुष्ठान, हवन आदि मांगलिक कार्यों में सर्वप्रथम गणेश जी का पूजन एवं आवाहन किया जाता है-

गणानाम् त्वा गणपतिं हवामहे …।

गणेश शब्द की व्युत्पत्ति इस प्रकार की जाती है-

ज्ञानार्थवाचको गश्च णश्च निर्वाणवाचक:।
तयोरीशं परब्रह्म गणेशं प्रणम्याम्यहम्।।

अर्थ-
‘ज्ञ’ ज्ञानार्थवाचक है और ‘ण’ निर्वाणवाचक है। इस प्रकार ज्ञान- निर्वाणवाचक गण के ईश अर्थात् गणेश परब्रह्म हैं। मैं उन्हें प्रणाम करता हूं।

भक्त तुलसीदास जी जहां मंगलाचरण के अंतर्गत श्री रामचरितमानस के प्रथम श्लोक में ही ‘वंदे वाणीविनायकौ’ के अंतर्गत मां सरस्वती तथा गणेश जी की वंदना करते हैं, वहीं हिंदी के प्रथम छन्द सोरठा को गणेश जी को ही समर्पित कर देते हैं-

जो सुमिरत सिधि होइ गननायक करिबर बदन।
करी अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन।।

अर्थ-
जिन्हें स्मरण करने से सब कार्य सिद्ध होते हैं, जो गणों के स्वामी और सुंदर हाथी के मुखवाले हैं, वे ही बुद्धि के राशि और शुभ गुणों के धाम (श्री गणेश जी) मुझ पर कृपा करें।

प्रणवस्वरूप ‘ॐ’ में गणेश जी की मूर्ति सदा स्थित रहती है। अतः ‘ॐ’ गणेशजी की प्रणवाकार मूर्ति है। गणेश पुराण में लिखा है-

ओंकाररूपी भगवान यो वेदादौ प्रतिष्ठित:।
यं सदा मुनयो देवा: स्मरन्तीन्द्रादयो हृदि।।

ओंकाररूपी भगवानुक्तस्तु गणनायक:।
यथा सर्वेषु कार्येषु पूज्यतेऽसौ विनायक:।।

अर्थ-
ओंकाररूपी भगवान जो वेदों के प्रारंभ में प्रतिष्ठित हैं , जिनको सर्वदा मुनि तथा इंद्रादि देवगण हृदय में स्मरण करते हैं। वे ओंकाररूपी भगवान गणनायक कहे गए हैं। वे ही विनायक सभी कार्यों में पूजित होते हैं।

गणेशजी विनायक के नाम से भी प्रसिद्ध है। विनायक का अर्थ होता है- विशिष्ट नायक। वैदिक मत के अनुसार, सभी कार्यों का शुभारंभ जिस देवता के पूजन से होता है, वही विनायक कहलाते हैं। इसलिए गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी भी कहते हैं।

२०वीं शताब्दी में ‘स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ की घोषणा करनेवाले कर्मयोगी बाल गंगाधर तिलक ने इस पर्व को आधार बनाकर देश पर छाई अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ युवा-वर्ग को संगठित करने के लिए ‘गणेश उत्सव’ का आयोजन किया था और विघ्ननाशक व संकटहरण भगवान गणपति से देश पर छाई गुलामी के संकट को दूर करने की प्रार्थना की थी, जिसके फलस्वरुप सारे विघ्नों को पार करते हुए अपना देश स्वतंत्र हुआ था।

गणेशजी हमारे देश के राजनीतिक नेताओं की बुद्धि को परिष्कृत और परिमार्जित करें तथा अपने देश पर आए संकटों- विघ्नों का समूल नाश करें एवं इस राष्ट्र की सनातनता को बनाए रखें।

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।। जय भगवान श्री गणेश ।।

ॐ उत्पातरूपो जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युति:।
सूर्य प्रियकरो विद्वान् पीड़ांहरतु मे बुध:।।

विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा।
संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते।।

जो व्यक्ति विद्यार्जन के आरंभ में, विवाहकाल में, नूतन गृहप्रवेश में , कार्यसिद्धि के लिए श्रीगणेश का स्मरण करता है उसके समक्षविघ्न उपस्थित नहीं होते।

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय
लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं।
नागाननायश्रुतियज्ञ विभूषिताय
गौरीसुतायगणनाथनमोनमस्ते।।

विघ्नेश्वर, वर देनेवाले, देवताओं को प्रिय, लम्बोदर, कलाओं से परिपूर्ण,जगत् का हित करनेवाले, गज के समान मुखवाले और वेद तथा यज्ञ से विभूषित पार्वतीपुत्र को नमस्कार है; हेगणनाथ! आपको नमस्कार है।

एकःक्षमावतां दोषो द्वितीयो नोपपद्यते।
यदेदं क्षमयायुक्तम् अशक्तं मन्यतेजनः।।
सोsस्यदोषोनमन्तव्यःक्षमाहि परमंबलम्।।
(महाभारत)

क्षमाशील मनुष्यों में एक ही दोष का आरोप होता है, दूसरे दोष की तो सम्भावना ही नहीं रहती है। दोष यह है कि क्षमाशील को लोग असमर्थ समझ लेते हैं, किन्तु क्षमाशील का वह दोष नहीं मानना चाहिए, क्योंकि क्षमा में बहुत बल होता है।

गुणा गणज्ञेषु गुणा भवन्ति
ते निर्गुणं प्राप्य भवन्ति दोषाः।
आस्वाद्यतोयाःप्रभवन्ति नद्यः
समुद्रमासाद्य भवन्त्यपेयाः।।
(हितोपदेश)

गुणीजनों के पास गुण, गुण ही बने रहते हैं, वे ही गुण निर्गुण मनुष्य के पास जाकर दोष रूप में परिणत हो जाते हैं। जैसे नदियों का जल पीने योग्य होता है, पर जब वे नदियां समुद्र में जाकर मिल जाती हैं तो उनका जल खारा होने के कारण अपेय हो जाता है।

बुधाग्रे नगुणान् ब्रूयात्,साधुवेत्ति यत:स्वयम्।
मूर्खाग्रेऽपिच न ब्रूयाद्,बुधप्रोक्तं नवेत्ति स:।।

अपने गुण बुद्धिमान् मनुष्य को न बताएँ, वह उन्हें अपने आप जान लेगा और अपने गुण बुद्धिहीन (मूर्ख) मनुष्य को तो कतई न बताएँ, वह उन्हें समझ ही नहीं सकेगा।

किंवर्णितेनबहुनालक्षणं गुणदोषयोः।
गुणदोष दृशिर्दोषोगुणस्तूभयवर्णितम्।।
(श्रीमद्भागवत)

गुण और दोष के बहुत सारे लक्षण क्या बताए जाएं ? गुण और दोष दोनों की ओर दृष्टि जाना ही दोष है और दोनों से अलग रहना ही गुण है।

गृहस्थो ब्रह्मचारी वा वानप्रस्थोऽथ भिक्षुकः।
यत्र यत्र स्थितो ज्ञानी परमाक्षरवित् सदा।।
(ब्रह्मविद्योपनिषद)

ब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थ, सन्न्यासी, कोई भी हो और वह कहीं भी रहता हो, परम- अक्षर-तत्व को जानने वाला सदैव ज्ञानी ही होता है।

श्रेयःसु गुरुवद्दृत्तिं नित्यमेव समाचरेत्।
गुरुपुत्रेषु चार्येषु रूरोश्चैव स्वबन्धुषु।।

शिष्य को विद्या और तप के कारण श्रेष्ठ पुरुषों में मन वचन कर्म से उत्तमजनों में, गुरुपुत्रों में और गुरु के बन्धु बान्धवों में सदैव गुरू तुल्य व्यवहार करना चाहिए।

शक्योवारयितुं जलेन हुतभुक्छत्रेणसूर्यातपो
नागेन्द्रोनिशितांकुशेन समदोदण्डेन गौर्गर्दभः।
व्याधिर्भेषजसंग्रहैश्चविविधैःमन्त्रप्रयोगैर्विषं
सर्वस्यौषधमस्तिशास्त्रविहितं मूर्खस्यनास्त्यौषधम्।।

अग्नि को पानी से शांत किया जा सकता है, छाते से सूर्य की धूप को, तीक्ष्ण अङ्कुश से हाथी को, लकडी से मदोन्मत्त भैंसे या घोड़े को काबू में किया जा सकता है; अलग अलग दवाईयों से रोग, और विविध मन्त्रों से विष दूर हो सकता है; सभी चीज़ के लिए शास्त्रों में औषधि है, लेकिन मूर्ख के लिए कोई औषधि नहीं है।

स्वर्गस्थितानामिह जीवलोके
चत्वारि चिह्नानि वसन्ति देहे।
दानप्रसंगो मधुरा च वाणी
देवार्चनं ब्राह्मणतर्पणं च।।
(चाणक्यनीति)

स्वर्ग से धरती पर आने वाले दैवीय लोगों में ये चार गुण मुख्य तौर पर पाए जाते हैं दान देने में रुझान, मीठी बोली, भगवान के प्रति निष्ठा और ब्रह्मज्ञानियों को तृप्त करने का यत्न।

धन्याःखलुमहात्मानो येबुद्ध्या कोपमुत्थितम्।
निरुन्धन्ति महात्मानो दीप्तमग्निमिवाम्भसा।।
(वाल्मीकिरामायण)

वे महान पुरुष धन्य हैं, जो अपने उठे हुए क्रोध को अपनी बुद्धि के द्वारा उसी प्रकार रोक देते हैं, जैसे दीप्त अग्नि को जल से रोक दिया जाता है।

शश्वच्च जायते यस्मात् शश्वत् संतिष्ठते यतः।
तस्मात् सर्वैःस्मृतःसूर्यो निगमज्ञैःमनीषिभिः।।
(साम्बपुराण)

जहां से अचेतनात्मक नश्वर संसार को चेतना की उपलब्धि होती हैं और जिसकी संचित चेतना प्राप्त होनेपर सम्पूर्ण प्राणी जीवनधारण की संज्ञा उपलब्ध करते हैं, उस अखण्ड मंडलाकार घन-प्रकाश को ही निगमागम ज्ञाता मनीषी सूर्य कहते हैं।

धर्मस्य दुर्लभोज्ञाता सम्यक्वक्ता ततोऽपिच।
श्रोता ततोऽपिश्रद्धावान्कर्ताकोऽपि ततःसुधीः।।

धर्म को जानने वाला दुर्लभ होता है, उसको श्रेष्ठ तरीके से बताने वाला उससे भी दुर्लभ है, श्रद्धा से सुनने वाला उससे भी दुर्लभ और धर्म का आचरण करनेवाला सुबुद्धिमान सबसेदुर्लभ है।

यः पठति लिखति पश्यति परिपृच्छति पंडितान् उपाश्रयति।
तस्य दिवाकरकिरणैः नलिनी दलं इव विस्तारिता बुद्धिः।।

जो व्यक्ति जिज्ञासु होता है, पढ़ता है, लिखता है, देखता है, प्रश्न पूछता है, बुद्धिमानों का आश्रय लेता है। उसकी बुद्धि उसी प्रकार बढ़ती है जैसे कि सूर्य की किरणों से कमल की पंखुड़ियाँ।

चिन्ता कापि न कार्या निवेदितात्मभि: कदापीति।
भगवानपि पुष्टिस्थो न करिष्यति लौकिकीं गतिम्।।
(वल्लभाचार्य)

जिसने प्रभुको आत्म-निवेदन कर दिया है, उन्हें कभी किसी प्रकार की चिन्ता नहीं करनी चाहिए। पुष्टि (कृपा) करनेवाले प्रभु अंगीकृत जीव की लौकिक (सामान्य मनुष्य के समान) गति नहीं करते।

विद्वान् प्रशस्यते लोके विद्वान् सर्वत्र गौरवम्।
विद्वया लभते सर्वं विद्या सर्वत्र पूज्यते।।
(चाणक्यनीति)

दुनिया में विद्वान ही प्रशंसा के योग्य हैं। विद्वान ही सभी जगह सम्मान पाता है। विद्या से सब कुछ प्राप्त होता है। विद्या ही सब जगहों पर पूजी जाती है।

मूर्खा यत्र न पूज्यन्ते धान्यं यत्र सुसञ्चितम्।
दम्पत्येःकलहो नाऽस्ति तत्र श्रीःस्वयमागता।।

जिस जगह मूर्ख पूजित नहीं होते और जहाँ अन्न आदि बहुत ज़्यादा मात्रा में एकत्र रहते हैं और जहाँ पति-पत्नी में लड़ाई-झगड़ा, वाद-विवाद नहीं होता- वहाँ लक्ष्मी ख़ुद आकर रहती है।

सर्वोषधीनामममृतं प्रधानं सर्वेषु सौख्येष्वशनं प्रधानम्।
सर्वेन्द्रियाणां नयनं प्रधानं सर्वेषु गात्रेषु शिरः प्रधानम्।।
(चाणक्यनीति)

सभी औषधियों में अमृत मुख्य है। सभी सुख देनेवाले साधनों में भोजन प्रधान है। सभी ज्ञानेन्द्रियों में नेत्र मुख्य हैं और सब अंगों में सिर सबसे अधिक श्रेष्ठ है।

सत्यमेव जयते नानृतम् सत्येन पन्था विततो देवयानः।
येनाक्रमत् मनुष्यो ह्यात्मकामो यत्र तत् सत्यस्य परं निधानं।।

जय सत्य का होता है,असत्य का नहीं। दैवीमार्ग सत्य से फैला हुआ है। जिस मार्ग पे जाने से मनुष्य आत्मकाम बनता है, वही सत्य का परम्धाम है।

बलवानप्यशक्तोऽसौ धनवानपि निर्धनः।
श्रुतवानपि मूर्खोऽसौ यो धर्मविमुखो जनः।।

जो व्यक्ति धर्म (कर्तव्य) से विमुख होता है वह व्यक्ति बलवान् होकर भी असमर्थ, धनवान् होकर भी निर्धन तथा ज्ञानी होकर भी मूर्ख होता है।

श्रद्धावान्ल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः।
ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति।।

श्रीकृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन, भगवान् में श्रद्धा रखने वाले मनुष्य, अपनी इन्द्रियों को वश में करके ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं और ज्ञान प्राप्त करने वाले ऐसे पुरुष शीघ्र ही परम शांति को प्राप्त करते हैं।

ध्यायतो विषयान्पुंसःसङ्गस्तेषूपजायते। सङ्गात्संजायतेकामःकामात्क्रोधोऽभिजायते।।

श्रीकृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन, लगातार विषयों और कामनाओं के बारे में सोचते रहने से मनुष्य के मन में उनके प्रति लगाव पैदा हो जाता है। ये लगाव ही इच्छा को जन्म देता है और इच्छा क्रोध को जन्म देती है।

हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम्, जित्वा वा भोक्ष्यसे महिम्।
तस्मात् उत्तिष्ठकौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय:।।

श्रीकृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन, यदि तुम युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त होते हो तो तुमको स्वर्ग की प्राप्ति होगी और यदि तुम युद्ध में जीत जाते हो तो धरती पर स्वर्गसमान राजपाट भोगोगे इसलिए बिना कोई चिंता किये उठो और युद्ध करो।

मां निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमःशाश्वतीःसमाः।
यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीःकाममोहितम्।।
(बाल्मीकिरामायण)

हे निषाद! तुमको अनंतकाल तक (प्रतिष्ठा) शांति न मिले, क्योकि तुमने प्रेम, प्रणय-क्रिया में लीन असावधान क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक की हत्या कर दी।

धर्म-धर्मादर्थःप्रभवति धर्मात्प्रभवते सुखम्।
धर्मण लभते सर्वं धर्मप्रसारमिदं जगत्।।
(बाल्मीकि रामायण)

धर्म से ही धन, सुख तथा सब कुछ प्राप्त होता है। इस संसार में धर्म ही सार वस्तु है।

कर्मफल-यदाचरित कल्याणि!शुभं वा यदि वाऽशुभम्।
तदेवलभतेभद्रे!कर्त्ताकर्मजमात्मनः।।

मनुष्य जैसा भी अच्छा या बुरा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है। कर्ता को अपने कर्म का फल अवश्य भोगना पड़ता है।

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बुधवार का दिन आप सभी के लिए शुभ एवं मङ्गलमय हो, भगवान शिवजी, श्रीहरि नारायण और श्रीगणेशजी महाराज आपकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करें।

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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
आपका जन्मदिन: 10 दिसंबर

दिनांक 10 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 1 होगा। आप राजसी प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। आपको अपने ऊपर किसी का शासन पसंद नहीं है। आप साहसी और जिज्ञासु हैं। आपका मूलांक सूर्य ग्रह के द्वारा संचालित होता है।

आप सौन्दर्यप्रेमी हैं। आपमें सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला आपका आत्मविश्वास है। इसकी वजह से आप सहज ही महफिलों में छा जाते हैं। आप अत्यंत महत्वाकांक्षी हैं। आपकी मानसिक शक्ति प्रबल है। आपको समझ पाना बेहद मुश्किल है। आप आशावादी होने के कारण हर स्थिति का सामना करने में सक्षम होते हैं।


आपके लिए खास

शुभ दिनांक : 1, 10, 20, 28

शुभ अंक : 1, 10, 20, 28, 37, 46, 55, 64, 73, 82


शुभ वर्ष : 2026, 2044, 2053, 2062

ईष्टदेव : सूर्य उपासना तथा मां गायत्री

शुभ रंग : लाल, केसरिया, क्रीम,


आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
स्वास्थ्य की दृष्टि से यह वर्ष उत्तम रहेगा। पारिवारिक मामलों में महत्वपूर्ण कार्य होंगे। अविवाहितों के लिए सुखद स्थिति बन रही है। विवाह के योग बनेंगे। नौकरीपेशा के लिए समय उत्तम हैं। पदोन्नति के योग हैं। बेरोजगारों के लिए भी खुशखबर है इस वर्ष आपकी मनोकामना पूरी होगी। यह वर्ष आपके लिए अत्यंत सुखद रहेगा। अधूरे कार्यों में सफलता मिलेगी।


🌹आज का राशिफल 🌹
*दिनांक : 10 दिसम्बर 2025*

मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज आपकी तार्किक शक्ति बढ़ी हुई रहेगी लेकिन इसका सही जगह प्रयोग नही करेंगे। प्रत्येक कार्य वह चाहे घरेलू हो अथवा व्यावसायिक उसमे कुछ ना कुछ नुक्स ही निकालेंगे इससे आपके सम्मान में कमी आ सकती है साथ ही परिजनों से कलह भी हो सकती है। आप आज सम्मान पाने के लिये अन्य लोगो के आगे स्वयं को हद से ज्यादा बुद्धिमान के रूप में पेश करेंगे लेकिन आज आपके विचार अन्य लोगो से कम ही मेल खाएंगे सम्मान मिलने की जगह हास्य के पात्र बन कर रह जाएंगे। कारोबार की दशा नीचे जाएगी किसी के सहयोग से खर्च लायक आमदनी हो ही जाएगी। सेहत ठीक रहेगी।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज के दिन आप स्वयं ही कलहकारी परिस्थितियों का निर्माण करेंगे। जबरदस्ती किसी के कार्यो में दखल देने अथवा बिना मांगे राय देने से बेज्जती हो सकती है इसका ध्यान रखें। कार्य क्षेत्र पर आपको सहकर्मियों का कार्य पसंद नही आएगा और सहकर्मियों को आपका व्यवहार इससे आपसी तालमेल नही बनने के कारण सामूहिक कार्य अधूरे ही रहेंगे। धन लाभ के लिए प्रयास करेंगे फिर भी आज आय की अपेक्षा व्यय का पलड़ा भारी रहेगा। घर मे परिजनों को आपके व्यवहार से पीड़ा होगी। वादा करके मुकरने पर वातावरण अशान्त होगा। मित्र रिश्तेदार भी आज आपसे दूरी बना कर ही रहेंगे। सर अथवा बदन दर्द की शिकायत हो सकती है।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज दिन के आरंभ में आर्थिक लाभ की संभावनाए बनेंगी इनके मध्यान के आस-पास पूर्ण होने की संभावना है। व्यवसायी वर्ग आज एक साथ कई कार्यो में भाग्य आजमाएंगे इनमे से कुछ लंबित रहेंगे लेकिन शेष कार्यो से अवश्य ही कुछ ना कुछ लाभ होगा। धन लाभ के लिए आज किसी अन्य के भरोसे नही रहना पड़ेगा। नौकरी करने वाले लोगो को आज अधिक भागदौड़ करनी पड़ेगी जिससे आरम्भ में थोड़ी परेशानी पर बाद में परिणाम पक्ष में रहने से प्रसन्नता मिलेगी। आज किसी पुराने परिचित से यादगार भेंट होगी कुछ समय के लिए अतीत की यादों में खोए रहेंगे। परिजनों के स्नेह में वृद्धि होगी। सेहत को लेकर आज पूर्ण संतुष्ट नही रहेंगे।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन भी आपके लिए विशेष नही रहेगा। आज आप संचित धन के ऊपर ही निर्भर रहेंगे आर्थिक लाभ होते होते टल ने पर निराश होंगे। व्यावसायिक क्षेत्र पर आज भय का वातावरण रहेगा अपनी किसी कमजोरी को लेकर मन मे चिंतित रहेंगे परन्तु जाहिर नही होने देंगे। विरोधी आपके लचीले व्यवहार का फायदा उठाएंगे लेकिन सहकर्मियों का सहयोग आवश्यकता पड़ने पर मिल जाएगा। आज ना चाह कर भी किसी से उधारी का व्यवहार करना पड़ेगा। खर्च आज कम रहने से आय-व्यय में संतुलन बना रहेगा। घरेलू कामो में टालमटोल करने पर वातावरण उग्र होगा कुछ समय मे स्वतः ही सामान्य भी हो जाएगा। आलस्य अधिक रहेगा।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन शुभ फलदायी है आज आप दिन के आरंभ में अपने कार्यो के प्रति लापरवाही करेंगे परन्तु धीरे धीरे व्यस्तता बढ़ने के साथ ही कार्य शैली में निखार आएगा मानसिक रूप से चंचल भी रहेंगे महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने में दुविधा होगी इसलिये किसी अनुभवी की सलाह अवश्य लें धन लाभ आज अचानक होगा दुबे धन की प्राप्ति भी हो सकती है। व्यवसायी वर्ग मेहनत का उचित फल मिलने से प्रसन्न रहेंगे। आज आपके ऊपर कोई आरोप भी लग सकता है जिससे परिवार में गलतफहमी पनपेगी परिजन आपकी बातों पर आज मुश्किल से ही यकीन करेंगे। महिलाये आज ज्यादा सतर्क रहें ज्यादा हंसना भी नुकसान करा सकता है। सेहत में सुधार आएगा।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज के दिन भी आप किसी ना किसी कारण से परेशान रहेंगे। सेहत आज भी प्रतिकूल रहेगी लेकिन कल की अपेक्षा में थोड़ा सुधार अवश्य आएगा। व्यवसाय की स्थिति भी दयनीय रहेगी दैनिक खर्च निकालने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। नौकरी वाले लोग अधिकारी वर्ग को प्रसन्न रखने में असफल रहेंगे भाग्य साथ ना देने के कारण दिन भर की भागदौड़ व्यर्थ जाएगी। लेकिन बेरोजगार लोग आज प्रयास करने में कमी ना रखें शीघ्र ही किसी रोजगार से जुड़ सकेंगे। पारिवारिक वातावरण उथल-पुथल रहेगा घरेलू कार्य सुलझने की जगह और अधिक उलझेंगे। भाई बंधुओ में आत्मीयता की कमी रहेगी। बुजुर्गो का सहयोग मिलने से कुछ राहत अनुभव करेंगे।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन आपको सभी जगह से मान-सम्मान दिलाएगा। आज आपकी जीवनशैली भी उच्चवर्गीय जैसी रहेगी। कैसी भी परिस्थितियां हो खर्च करने से पीछे नही रहेंगे आडम्बर भी आज कुछ अधिक रहेगा। महिलाये भी आज दिखावा करने से नही चूकेंगी आवश्यकता से अधिक खर्च कर बाद में पछताएगी। कार्य व्यवसाय आशानुकूल रहेगा किसी पुराने अनुबंद से धन लाभ होगा। राज पक्ष से भी शुभ समाचार मिलने की संभावना है सरकारी कार्यो में ढील ना दे आज पूरे तो नही होंगे लेकिन सफलता की संभावना अधिक रहेगी। घर का वातावरण मिला जुला रहेगा सभी सदस्य अपने कार्य मे मस्त रहेग।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन भी आपके अनुकूल बना हुआ है लेकिन आज किसी महत्त्वपूर्ण कार्यो को लेकर अन्य के भरोसे बैठना पड़ेगा जिसमे निराशा मिलने की संभावना अधिक है आज अपने बलबूते जो भी कार्य करेंगे उसमे देर से ही सही आशाजनक परिणाम मिलेंगे। व्यवसाय में वृद्धि तो होगी लेकिन आर्थिक लाभ समय पर ना होने के कारण आगे के कार्य प्रभावित होंगे। आज धन लाभ एवं खर्च बराबर रहने से संतुलन बना रहेगा। सहकर्मी आपसे कुछ अपेक्षा रखेंगे इसमे टालमटोल ना करें अन्यथा परेशानी हो सकती है। घर के सदस्य मनोकामना पूर्ण होने पर प्रसन्न रहेंगे लेकिन बुजुर्ग आपकी खर्चीली वृति से असंतोष जताएंगे।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन आपके लिये साधारण रहेगा। आज आप मानसिक रूप से शांत एवं संतुष्ट रहेंगे लेकिन महिलाओ के मन मे कुछ ना कुछ तिकड़म लगी रहेगी अपना काम बनाने के लिये आज किसी की बुराई करने से भी नही चूकेंगी।
कार्य व्यवसाय की गति सामान्य से कुछ कम रहेगी फिर भी निर्वाह योग्य आज हो जाएगी। आज आप अन्य लोगो से अपना काम निकालने के लिये मीठा व्यवहार करेंगे लेकिन किसी का कार्य स्वयं करने में आनाकानी करेंगे।  सहकर्मी अधिकारियों से आपकी चुगली कर सकते है सतर्क रहें। धन लाभ परिश्रम करने के बाद ही सीमित मात्रा में होगा। परिवार में आपको छोड़ अन्य सभी कुछ ना कुछ अभाव अनुभव करेंगे। घर किसी सदस्य की सेहत खराब रहेगी।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज के दिन भी परिस्थितियां आपकी आशाओ के विपरीत रहने वाली है धन संबंधित अथवा अन्य महत्त्वपूर्ण कार्य आज निरस्त करने ही बेहतर रहेगा। आज आप किसी सरकारी उलझन में भी फंस सकते है वाणी एवं व्यवहार संयमित रखें। धन को लेकर घर एवं बाहर विवाद के प्रसंग बनेंगे विवेक से काम ले अन्यथा मामला गंभीर रूप ले सकता है। नौकरी वाले लोगो के अधिकारियों से मतभेद रहेंगे फिर भी मनमारके इच्छा के विपरीत कार्य करना पड़ेगा। मित्र परिचित भी आपसे मतलबी व्यवहार करेंगे किसी से आज कोई वादा ना करें पूरा नही कर पाएंगे। धन के साथ ही आरोग्य में भी कमी आएगी। बड़े बुजुर्गों की बातों को अनदेखी ना करे।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज दिन के आरंभ में आप किसी कार्य को लेकर दुविधा में रहेंगे लेकिन बाद में उसी कार्य को करने पर धन लाभ के साथ ही सम्मान भी बढ़ेगा। नौकरी वाले जातक आज अपने मृदु व्यवहार के कारण अधिकारियों को प्रसन्न रखेंगे लेकिन सहकर्मियों को इससे जलन हो सकती है फिर भी निश्चिन्त रहे आज कोई चाहकर भी आपका अहित नही कर सकता। व्यवसायी वर्ग जिसभी कार्य मे हाथ डालेंगे उसमे जय होगी धन की आमद एकसाथ ना होकर रुक रुक कर होगी जिससे अन्य कार्य आरम्भ करने में थोड़ी परेशानी आ सकती है। गृहस्थ में आपकी बातों को महत्त्व दिया जाएगा भाइयो से फिर भी आज राग द्वेष बना रहेगा। प्रेम प्रसंगों में निकटता बढ़ेगी। सेहत उत्तम रहेगी।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन आपके लिये थोड़ा उलझनों वाला रहेगा। आज कोई भी कार्य भाग दौड़ किये बिना बनाना संभव नही रहेगा व्यवसायी वर्ग भी आज मंदी रहने के कारण लेदेकर काम बनाने के चक्कर मे रहेंगे बाद में असकमात धन लाभ हो जाने से पश्चाताप करेंगे। सरकारी अथवा पैतृक संपत्ति संबंधित कार्यो में थोड़ी परेशानी के बाद नतीजा आपके पक्ष में ही रहेगा। दो पक्षो के झगड़े को सुलझाने में मध्यस्थता करनी पड़ेगी परन्तु पक्षपात का आरोप लग सकता है निष्पक्ष होकर फैसला करें सम्मान में वृद्धि होगी। घरेलू वातावरण आज अन्य दिनों की अपेक्षा शांत रहेगा। संध्या बाद स्वास्थ्य में विकार आएगा।

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“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton