*┈┉══════❀((“”ॐ””))❀══════┉┈*
*🗓आज का पञ्चाङ्ग एवम् राशिफल 🗓*
*🌻 रविवार, ०९ नबंवर २०२५🌻*
*सूर्योदय: 🌅 ०६:३७*
*सूर्यास्त: 🌄 १७:४४*
*चन्द्रोदय: 🌝 २१:२८*
*चन्द्रास्त: 🌜 १०:४४*
*अयन 🌖 दक्षिणायन*
*ऋतु: 🌧️ हेमन्त*
*शक सम्वत: 👉 १९४७ (विश्वावसु)*
*विक्रम सम्वत: 👉 २०८२ (सिद्धार्थी)*
*युगाब्द (कलि संवत) 👉 ५१२६*
*मास 👉 मार्गशीर्ष (महाराष्ट्र एवम् गुजरात के अनुसार कार्तिक)*
*पक्ष 👉 कृष्ण*
*तिथि 👉 पंचमी (२५:५४+ से षष्ठी)*
*नक्षत्र 👉 आर्द्रा (२०:०४ से पुनर्वसु)*
*योग 👉 सिद्ध (१५:०२ से साध्य)*
*प्रथम करण 👉 कौलव (१५:०२ तक)*
*द्वितीय करण 👉 तैतिल (२५:५४+ तक)*
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*॥ गोचर ग्रहा: ॥*
*🌖🌗🌖🌗*
*सूर्य 🌟 तुला*
*चंद्र 🌟 मिथुन*
*मंगल 🌟 वृश्चिक (अस्त, पूर्व, मार्गी)*
*बुध 🌟 वृश्चिक (उदित, पूर्व, मार्गी)*
*गुरु 🌟 कर्क (उदित, पूर्व, मार्गी)*
*शुक्र 🌟 तुला (उदित, पूर्व, मार्गी)*
*शनि 🌟 मीन (उदित, पश्चिम, वक्री)*
*राहु 🌟 कुम्भ*
*केतु 🌟 सिंह*
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*शुभाशुभ मुहूर्त विचार*
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*अभिजित मुहूर्त 👉 ११:४८ से १२:३३*
*अमृत काल 👉 १०:५३ से १२:२१*
*विजय मुहूर्त 👉 १४:०२ से १४:४६*
*गोधूलि मुहूर्त 👉 १७:४४ से १८:१०*
*सायाह्न सन्ध्या 👉 १७:४४ से १९:०२*
*निशिता मुहूर्त 👉 २३:४५ से २४:३७+*
*ब्रह्म मुहूर्त 👉 २८:५४+ से २९:४५+*
*राहुकाल 👉 १६:२१ से १७:४४*
*गुलिक काल 👉 १४:५७ से १६:२१*
*यमगण्ड 👉 १२:११ से १३:३४*
*दुर्मुहूर्त 👉 १६:१५ से १७:००*
*विडाल योग 👉 २०:०४ से ३०:३७+*
*होमाहुति 👉 मंगल (२०:०४ से गुरू)*
*दिशा शूल 👉 पश्चिम*
*राहुकाल वास 👉 उत्तर*
*अग्निवास 👉 पाताल (२५:५४+ से पृथ्वी)*
*चन्द्र वास 👉 पश्चिम*
*शिववास 👉 नन्दी पर (२५:५४+ से भोजन में)*
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*☄चौघड़िया विचार☄*
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*॥ दिन का चौघड़िया ॥*
*१ – उद्वेग २ – चर*
*३ – लाभ ४ – अमृत*
*५ – काल ६ – शुभ*
*७ – रोग ८ – उद्वेग*
*॥ रात्रि का चौघड़िया॥*
*१ – शुभ २ – अमृत*
*३ – चर ४ – रोग*
*५ – काल ६ – लाभ*
*७ – उद्वेग ८ – शुभ*
*नोट👉 दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।*
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*शुभ यात्रा दिशा*
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*(पूर्व) दलिया, घी की दाल का सेवन करके यात्रा करें*
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*तिथि विशेष*
*🗓📆🗓📆*
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*मार्गशीर्ष कृष्ण पंचमी आदि*
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*आज जन्मे शिशुओं का नामकरण*
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*आज २०:०४ तक जन्मे शिशुओं के नाम आर्द्रा नक्षत्र के अनुसार क्रमशः (कू, घ, ड, छ) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है॥*
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*उदय लग्न मुहूर्त*
*तुला – ०४:५८ से ०७:१३*
*वृश्चिक – ०७:१३ से ०९:२९*
*धनु – ०९:२९ से ११:३४*
*मकर – ११:३४ से १३:२१*
*कुम्भ – १३:२१ से १४:५४*
*मीन – १४:५४ से १६:२४*
*मेष – १६:२४ से १८:०४*
*वृषभ – १८:०४ से २०:०२*
*मिथुन – २०:०२ से २२:१६*
*कर्क – २२:१६ से २४:३२+*
*सिंह – २४:३२+ से २६:४४+*
*कन्या – २६:४४+ से २८:५५+*
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*पञ्चक रहित मुहूर्त*
*शुभ मुहूर्त – ०६:३७ से ०७:१३*
*रोग पञ्चक – ०७:१३ से ०९:२९*
*शुभ मुहूर्त – ०९:२९ से ११:३४*
*मृत्यु पञ्चक – ११:३४ से १३:२१*
*अग्नि पञ्चक – १३:२१ से १४:५४*
*शुभ मुहूर्त – १४:५४ से १६:२४*
*मृत्यु पञ्चक – १६:२४ से १८:०४*
*अग्नि पञ्चक – १८:०४ से २०:०२*
*शुभ मुहूर्त – २०:०२ से २०:०४*
*रज पञ्चक – २०:०४ से २२:१६*
*शुभ मुहूर्त – २२:१६ से २४:३२+*
*चोर पञ्चक – २४:३२+ से २५:५४+*
*शुभ मुहूर्त – २५:५४+ से २६:४४+*
*रोग पञ्चक – २६:४४+ से २८:५५+*
*शुभ मुहूर्त – २८:५५+ से ३०:३७+*
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⭕नोट- पंचांग में जहां कहीं भी समय के साथ उपर्युक्त 👉(➕) चिन्ह का प्रयोग किया जा रहा है वहां उसका आशय अगले दिवस के समय के लिये समझा जाये॥😊🙏🏻
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*आज का सुविचार*
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*जो सदा त्याग के लिए तत्पर हो, उसकी कोई कमजोरियाँ नहीं होतीं ॥✅😊🙏🏻*
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*आज का राशिफल*
*🐐🐂💏💮🐅👩*
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*मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)*
*आज का दिन आपके लिए मिलाजुला रहने वाला है। कोई जमीन-जायदाद से जुड़ा मामला आपकी टेंशनों को बढ़ाएगा। आपको किसी बेवजह के काम को लेकर भागदौड़ करने से बचना होगा। आप किसी से बिना मांगे सलाह न लें। संतान को पढ़ाई-लिखाई को लेकर कोई समस्या आ रही थी, तो आप उनके गुरुजनों से बातचीत कर सकते हैं, जिससे वह आसानी से दूर हो जाएंगे। परस्पर सहयोग की भावना आपके मन में बनी रहेगी।*
*वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)*
*आज का दिन आपके लिए धन-धान्य में वृद्धि लेकर आने वाला है, लेकिन आपको यदि कुछ दिक्कतें आ रही थी, तो वह भी दूर होंगी और आप अपने बिजनेस को लेकर किसी अनुभव व्यक्ति से सलाह मशवरा भी करेंगे। रोजगार को लेकर परेशान चल रहे लोगों को कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। आपको किसी पुराने गलती से सबक लेना होगा, जो जातक सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे हैं, उन्हें कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है।*
*मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)*
*आज का दिन आपके लिए बढ़िया रहने वाला है। परिवार में किसी शुभ और मांगलिक कार्यक्रम का आयोजन होने से माहौल खुशनुमा रहेगा। आपको किसी कोर्ट-कचहरी से संबंधित मामले में राहत मिलेगी। संतान को यदि आप कोई जिम्मेदारी देंगे, तो वह भी उस पर खरी उतरेगी। आप अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति में काफी मेहनत करेंगे। आपके और जीवनसाथी के बीच यदि कोई गलतफहमी उत्पन्न हो, तो उसे बातचीत के जरिए दूर करने की कोशिश करें।*
*कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)*
*आज का दिन आपके लिए व्यस्तता से भरा रहने वाला है। आपकी कुछ खास लोगों से मुलाकात होगी। आप काम को लेकर काफी व्यस्त रहेंगे और आपके बॉस भी आपको कोई जिम्मेदारी भरा काम देंगे, लेकिन आप अपने मनमौजी स्वभाव के कारण थोड़ा परेशान रहेंगे। संतान पक्ष की ओर से आपको कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। भाग्य भी आपका पूरा साथ देगा। किसी दूर रह रहे परिजन से खुशखबरी सुनने को मिलेगी।*
*सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)*
*आज का दिन आपके लिए मेहनत से काम करने के लिए रहेगा। आप किसी वाद-विवाद से दूरी बनाकर रखें, तो आपके लिए बेहतर रहने वाला है। माता जी के स्वास्थ्य के प्रति आपको पूरा ध्यान देना होगा। आपको किसी पुरानी गलती से सबक लेना होगा, इसलिए उसमें बिल्कुल ढील न दें और प्रॉपर्टी को लेकर आपका कोई वाद-विवाद खड़ा हो सकता है। आपकी कोई मन की इच्छा पूरी होने से खुशी होगी। आप अपनी माताजी से किसी बात लेकर बातचीत कर सकते हैं।*
*कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)*
*आज का दिन जमीन-जायदाद से संबंधित मामलो में अच्छा रहने वाला है । आप अपनी आंखों और कान को खोलकर काम करें। आपको कोई गलत साबित करने की कोशिश कर सकता है। वरिष्ठ सदस्यों का आपको पूरा सहयोग मिलेगा। आप अपने घर की साज-सज्जा पर पूरा ध्यान देंगे। आप किसी वाद-विवाद से दूरी बनाकर ही रहे, तो आपके लिए बेहतर रहेगा। परिवार में किसी सदस्य से आपको सरप्राइस मिल सकता है।*
*तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)*
*आज का दिन आपके लिए मिश्रित रूप से फलदायक रहने वाला है। प्रेम जीवनी जी रहे लोगों की अपने साथी से मुलाकात हो सकती हैं। आपकी कोई मन की इच्छा पूरी होने से आपकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। आपकी कुछ खास लोगों से मुलाकात होगी। विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा के मार्ग प्रशस्थ होंगे। आपके मन में काम को लेकर नए-नए आइडिया आएंगे। आपके बॉस भी आपको कोई पुरस्कार या प्रमोशन आदि सकते हैं। सरकारी काम यदि लंबे समय से रुका हुआ था, तो वह भी पूरा हो सकता है।*
*वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)*
*आज का दिन बिजनेस कर रहे लोगों के लिए बढ़िया रहने वाला है। आप यदि किसी के साथ पार्टनरशिप करेंगे, तो वह भी अच्छी चलेगी। आपके कामों से आपको एक नई पहचान मिलेगी और आप अपनी जिम्मेदारियों से बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगे। भाई-बहनों का आपको बड़ा सहयोग मिलेगा और जीवनसाथी के साथ आप मिलकर चलेंगे, लेकिन आपको अपनी किसी पुरानी गलती से सबक लेना होगा।*
*धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)*
*आज का दिन राजनीति में कार्यरत लोगों के लिए बढ़िया रहने वाला है। नए संपर्को से आपको लाभ मिलेगा। आपको किसी अनुभवी व्यक्ति का उचित मार्गदर्शन मिलेगा। आपको अपनी सेहत को लेकर थोड़ा एतियात बरतनी होगी। पिताजी से आपकी किसी बात को लेकर खटपट हो सकती हैं। यदि आप कहीं घूमने जाने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो उसमें आपको वाहनों का प्रयोग थोड़ा संभलकर करना होगा।*
*मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)*
*आज का दिन आपके लिए ठीक-ठाक रहने वाला है। आप अपने घर के जरूरी कामों को समय से निपटाने की कोशिश करेंगे। आपके कुछ पारिवारिक मामले आपको समस्या दे सकते हैं। आपको अपनी किसी पुरानी गलती से सबक लेना होगा। आप अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सफल रहेंगे। यदि आपने किसी को धन उधार दिया था, तो वह भी आपको मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में आपको कोई कठिन कार्य मिलने से घबराने की आवश्यकता नहीं है।*
*कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)*
*आज आप अच्छे कामों से लोगों का दिल जीतने में कामयाब रहेंगे और आप अपने घर की मरम्मत आदि का काम भी शुरू कर सकते हैं, लेकिन आपको अपना खर्चों को थोड़ा कंट्रोल करके चलने की आवश्यकता है, अविवाहित जातकों के जीवन में उनके साथी की दस्तक हो सकती हैं। आप अपनी नौकरी को लेकर थोड़ा एतियात बरतें, इसलिए किसी भी काम को लेकर लापरवाही ना करें। आपको अनजान लोगों से दूरी बनाकर रखनी होगी।*
*मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)*
*आज का दिन आपके लिए मौज-मस्ती भरा रहने वाला है। आपको अकस्मात लाभ मिलने से खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। आपके घर किसी नए मेहमान का आगमन होने से आपका मन काफी खुश रहेगा। यदि आपकी कोई पारिवारिक समस्या आपको लंबे समय से घेरे हुए थे, तो वह भी दूर हो सकती है। माता-पिता के आशीर्वाद से आपका कोई रुका हुआ काम पूरा हो सकता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई-लिखाई को लेकर थोड़ा एतियात बरतनी होगी।*
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*जनजागृति हेतु लेख प्रसारण अवश्य करें*
नीरक्षीरविवेके हंस आलस्यं त्वं एव तनुषे चेत।
विश्वस्मिन अधुना अन्य:कुलव्रतम पालयिष्यति क: ॥
*सूर्यदेव भगवान जी की जय*
*हनुमानजी और शनि महाराज का एक रोचक प्रसंग*
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*तुलसीदासजी कहते हैं- “संकट ते हनुमान छुड़ावें” शनि को हम संकट कहते हैं, एक बार हनुमानजी पहाड़ की तलहटी में बैठे थे तभी शनि महाराज हनुमानजी के सिर पर आ गये, हनुमानजी ने सिर खुजाया लगता है कोई कीड़ा आ गया, हनुमानजी ने पूछा तू है कौन? शनिदेव ने कहां- मैं शनि हूँ, मैं संकट हूँ, हनुमानजी ने कहा मेरे पास क्यो आये हो? शनि बोले मैं अब आपके सिर पर निवास करूँगा।*
*हनुमानजी ने कहाँ- अरे भले आदमी, मैंने ही तुझे रावण के बंधन से छुड़वाया था और मेरे ही सिर पर आ गये, बोले हाँ क्यो छुड़ाया था आपने, इसका फल तो आपको भोगना पडे़गा, अच्छा कितने दिन रहना है? शनि बोला साढ़े सात साल और अच्छी खातिरदारी हो गयी तो ढाई साल और, हनुमानजी ने कहा भले आदमी किसी और के पास जाओं।*
*मैं भला श्री रामजी का मजदूर आदमी, सुबह से शाम तक सेवा में लगा रहता हूँ, मुश्किल पड़ जाएगी, तुम भी दुःख भोगेगे और मुझे भी परेशान करोगे, शनिदेव ने कहा मैं तो नही जाऊंगा, हनुमानजी बोले कोई बात नही तुम ऐसे नही मानोगे, हनुमानजी ने एक बहुत बड़ा पत्थर उठाया और अपने सिर पर रखा,*
*पत्थर शनिदेव के ऊपर आ गया, शनि महाराज बोले यह क्या कर रहे हो? बोले माँ ने कहा था कि चटनी बनाने के लिए एक बटना ले आना वह ले जा रहा हूँ, हनुमानजी ने जैसे ही पत्थर को उठाकर मचका दिया तो शनि चीं बोलने लगा, दूसरी बार किया तो बोले क्या करते हो? बोले चिन्ता मत करों, शनिदेव बोले- छोड़ो-छोड़ो, हनुमानजी बोले नहीं अभी तो साढ़े सात मिनट भी नहीं हुये है, तुम्हें तो साढ़े सात साल रहना है।*
*जब दो-तीन मचके ओर दिये तो शनिदेव तिलमिला गये, शनिदेव ने कहा भैय्या मेरे ऊपर कृपा करो, बोले ऐसी कृपा नही करूँगा, बोले वरदान देकर जाओं, शनि का ही दिन था, हनुमानजी ने कहा कि तुम मेरे भक्तो को सताना बंद करोगे, तब शनि ने कहा कि हनुमानजी के जो भी भक्त शनिवार को आपका स्मरण करेगा आपके चालीसा का पाठ करेगा मैं उसके यहाँ नही, बल्कि उसके पडोसी के वहाँ भी कभी नही जाऊंगा, उसका संकट दूर हो जायेगा।*
*फिर शनिदेव ने कहा कि हनुमानजी एक कृपा आप भी मुझ पर कर दीजिये, हनुमानजी बोले क्या? शनिदेव बोले- आपने इतनी ज्यादा मेरी हड्डियां चरमरा दी हैं, इसलिये थोड़ी तेल मालिश हो जाये तो बड़ी कृपा हो जायें, हनुमानजी ने कहा कि ठीक है मैं अपने भक्तो को कहता हूँ कि शनिवार के दिन जो शनिदेव को तेल चढ़ायेंगा उसके संकट मैं स्वयं दूर करूँगा।*
*दूसरा संकट क्या है? त्रिताप ही संकट है, दैविक, दैहिक तथा भौतिक ताप यही संकट है और इसकी मुक्ति का साधन क्या है? केवल भगवान् का सुमिरन, “राम राज बैठें त्रैलोका, हरषित भये गये सब सोका” रामराज कोई शासन की व्यवस्था का नाम नही है, रामराज मानव के स्वभाव की अवस्था का नाम है, समाज की दिव्य अवस्था का नाम है।*
*आज कहते हैं कि हम रामराज लायेंगे, तो भाई-बहनों फिर राम कहाँ से लायेंगे? नहीं-नहीं व्यवस्था नहीं, वह अवस्था जिसको रामराज कहते हैं, रामराज्य की अवस्था क्या है? “सब नर करहिं परस्पर प्रीती, चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती” यह रामराज्य की अवस्था है, व्यवस्था कैसी भी हो अगर, व्यक्तियों की और समाज की यह अवस्था रहेगी तो शासन में कोई भी बैठो राज्य राम का ही माना जायेगा,*
*राम मर्यादा है, धर्म है, सत्य है, शील है, सेवा है, समर्पण है, राम किसी व्यक्तित्व का नाम नही है, राम वृत्ति का नाम है, स्वरूप का नाम राम नहीं है बल्कि स्वभाव का नाम राम है, इस स्वभाव के जो भी होंगे वे सब राम ही कहलायेंगे, वेद का, धर्म की मर्यादा का पालन हो, स्वधर्म का पालन हो, यही रामराज्य है।*
*स्वधर्म का अर्थ हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध धर्म का पालन नही है, स्वधर्म का अर्थ है जिस-जिस का जो-जो धर्म है, पिता का पुत्र के प्रति धर्म, पुत्र का पिता के प्रति धर्म, स्वामी का धर्म, सेवक का धर्म, राजा का धर्म, प्रजा का धर्म, पति का धर्म, पत्नी का धर्म, शिक्षक का धर्म, शिष्य का धर्म।*
*यानी अपने-अपने कर्तव्य का पालन, जैसे सड़क पर अपनी-अपनी लाईन में यदि वाहन चलेंगे तो किसी प्रकार की टकराहट नही होगी, संघर्ष नही होगा और जब आप लाईन तोड़ देंगे जैसे मर्यादा की रेखा जानकीजी ने तोड़ दी थी, आखिर कितने संकट में फँस गयी, कितना बड़ा युद्ध करना पड़ा जानकीजी को छुड़ाने के लियें।*
*जरा सी मर्यादा का उल्लंघन जीवन को कितने बड़े संकट में फँसा सकता है, जो रामराज्य में रहेगा हनुमानजी उसके पास संकट आने ही नही देंगे, क्योंकि रामराज्य के मुख्य पहरेदार तो श्रीहनुमानजी महाराज हैं, तीनों कालों का संकट हनुमानजी से दूर रहता है, संकट होता है- शोक, मोह और भय से, भूतकाल का भय ऐसा क्यों कर दिया, ऐसा कर देता तो मोह होता है।*
*वर्तमान में जो कुछ सुख साधन आपके पास हैं यह बना रहे, इसको पकड़कर बैठना यह मोह और भय होता है, भविष्यकाल में कोई छीन न ले कोई लूट न ले, भविष्य का भय की मेरा क्या होगा? भाई-बहनों आपको भविष्य की चिंता छोड देना, क्योंकि, हनुमानजी सब कालों में विधमान हैं, “चारों जुग प्रताप तुम्हारा, है प्रसिद्ध जगत उजियारा” हनुमानजी तो अमर हैं।*
*चारों युगों में हैं सम्पूर्ण संकट जहाँ छूट जाते हैं शोक, मोह, भय वह है भगवान् श्री रामजी की कथा, कथा में हनुमानजी रहते हैं, अगर वृत्तियाँ न छूटे तो हनुमानजी छुड़ा देंगे, बिल्कुल मानस के अंत में पार्वतीजी ने प्रमाणित किया है, “सुनि भुसुंडि के बचन सुहाये, हरषित खगपति पंख फुलाये” तीनों संकट अगर दूर चले जाते हैं, या छोड़ देते हैं, मनुष्य को तो वह श्रीराम की कृपा मिल जाती है, और उस कृपा से मोह का नाश होता है,*
*बिनु सतसंग न हरि कथा, तेहि बिनु मोह न भाग।*
*मोह गएँ बिनु राम पद, होय न दृढ़ अनुराग।।*
*भगवत कथा, सत्संग यह मोह का नाश करती है, संत-मिलन संत-दर्शन शोक को दूर करता है “तोहि दैखि वेग शीतल भई छाती” जैसे हनुमानजी मिले तो जानकीजी का ह्रदय शान्त हो गया, शीतल हो गया, हनुमानजी के प्रति श्रद्धा रखियें, श्रद्धा से भय का नाश होता है, आपके मन में यदि भगवान् के प्रति श्रद्धा है तो आप कभी किसी से भयभीत नही होंगे।*
*जय श्री रामजी*
*जय श्री हनुमानजी,*
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*कर्म-योग क्या है ?*
*एक बार एक सात वर्ष का बालक रमन महर्षि के पास आया! उन्हे प्रणाम कर उसने अपनी जिज्ञासा उनके समक्ष रखी! वह बोला- ‘क्या आप मुझे बता सकते है कि कर्म-योग क्या है.? क्योंकि जब कभी भी मै यह प्रश्न अपने माता-पिता से पूछता हूँ, तो वे कहते है कि अभी तुम्हे इस विषय मे सोचने की आवश्यकता नही है! जब तुम बडे हो जाओगे, तो तुम्हे अपने आप समझ आ जाएगी!’*
*बालक की बात सुनकर मह-ऋषि बोले-*
‘ *मै तुम्हे इस प्रश्न का उतर दूँगा! पर अभी तुम यहाँ मेरे पास शांतिपूर्वक बैठ जाओ!’ बालक उनकी आज्ञा का पालन कर उनके पास जाकर बैठ गया!*
*कुछ समय बाद, वहाँ एक व्यक्ति डोसे लेकर आया! उसने सभी डोसे रमन महर्षि के समक्ष रख दिए! किंतु महर्षि किसी भी वस्तु को अकेले ग्रहण नही करते थे! इसलिए महर्षि ने डोसे का एक छोटा सा टुकडा अपने आगे रखा! फिर साथ बैठे उस बालक के पतल मे एक पूरा डोसा परोस दिया! उसके बाद वहाँ उपस्थित अन्य अनुयायियो मे शेष डोसे बाँटने का आदेश दिया! फिर उन्होने पास बैठे बालक से कहा- ‘अब जब तक मै अँगुली उठाकर इशारा नही करता, तब तक तुम यह डोसा खाते रहोगे! हाँ..ध्यान रहे कि…मेरे इस सँकेत से पहले तुम्हारा डोसा खत्म नही होना चाहिए! पर जैसे ही मै अँगुली उठाकर सँकेत दूँ, तो पतल पर डोसे का एक भाग भी शेष नही रहना चाहिए! उसी क्षण डोसा खत्म हो जाना चाहिए!’*
*महर्षि के इन वचनो को सुनते ही बालक ने पूरी एकाग्रता से रमन मह-ऋषि पर दृष्टि टिका दी! उसका मुख बेशक ही डोसे के निवाले चबा रहा था, किंतु उसकी नजरे एकटक महर्षि पर केन्द्रित थी! बालक ने शुरूआत मे बडे-बडे निवाले खाए! पर बाद मे, अधिक डोसा न बचने पर, उसने छोटे-छोटे निवाले खाने शुरू कर दिए! तभी अचानक उसे अपेक्षित संकेत मिला! इशारा मिलते ही बालक ने बचा हुआ डोसा एक ही निवाले मे मुख मे डाल दिया और निर्देशानुसार पतल पर कुछ शेष न रहा!*
*बच्चे की इस प्रतिक्रिया को देखकर मह-ऋषि बोले- ‘अभी-अभी जो तुमने किया, वही वास्तविक मे कर्म-योग है!’*
*मह-ऋषि ने आगे समझाते हुए कहा- ‘देखो! जब तुम डोसा खा रहे थे, तब तुम्हारा ध्यान केवल मुझ पर था! डोसे के निवाले मुख मे डालते हुए भी तुम हर क्षण मुझे ही देख रहे थे! ठीक इसी प्रकार संसार के सभी कार्य-व्यवहार करते हुए भी अपने मन-मस्तिष्क को ईश्वर (पूर्ण गुरू) पर केन्द्रित रखना! मतलब कि ईश्वर मे स्थित होकर अपने सभी कर्तव्यो को पूर्ण करना! यही वास्तविक कर्म-योग है।

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