Vaidik Panchang 08122025 Rashifal Samadhan

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️  *दिनांक – 08 दिसम्बर 2025*
🌤️ *दिन – सोमवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – हेमंत ॠतु*
🌤️ *मास – पौष (गुजरात-महाराष्ट्र)मार्गशीर्ष*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – चतुर्थी शाम 04:03 तक तत्पश्चात पंचमी*
🌤️ *नक्षत्र – पुष्य 09 दिसंबर रात्रि 02:52 तक तत्पश्चात अश्लेशा*
🌤️ *योग – ब्रह्म शाम 05:01 तक तत्पश्चात इन्द्र*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 08:26 से सुबह 09:47 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 07:05*
🌤️ *सूर्यास्त –  05:55*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण- रविपुष्य योग (प्रातः 04:11 से सूर्योदय तक)*
💥 *विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
             🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *कर्ज से मुक्ति* 🌷
🙏🏻 *कर्ज से शीघ्र मुक्ति पाने के लिए हर बुधवार के दिन वट वृक्ष के मूल में घी का दीप जला कर रख दें | इससे कर्जे से शीघ्र मुक्ति मिलेगी | और बुधवार के दिन खाने में मूँग या मूँग की दाल लें|*
🙏🏻
               🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *कारोबार में बरकत पाने के लिए* 🌷
🙏🏻 *जिनकी अपनी दुकान है, फैक्ट्री या कारोबार है वे लोग रोज नही तो हर बुधवार को गौ माता को हरा चारा खिलायें तो उन्हें लाभ होगा ओर गौ सेवा भी होगी ।*
            🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *शारीरिक कमजोरी* 🌷
💪🏻 *10 ग्राम काले तिल चबा लो, और ठंडा पानी पियो; 2 घंटे तक कुछ खाओ पियो नहीं l इससे शरीर की कमजोरी मिटकर शरीर मजबूत होगा l दांत व मसूड़े मज़बूत होंगे, मस्तक मज़बूत होगा ।*
💥 *विशेष – रात को तिल की चीजे नहीं खानी चाहिए ।*
🙏🏻
            🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞

महादेव की अष्ट मूर्तियों के रहस्य
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👉 शिवजी की अष्टमूर्तियों के नाम क्या हैं ?

👉 मनुष्य के शरीर में अष्टमूर्तियाँ कहाँ कहाँ हैं ?

👉 अष्ट मूर्तियों के तीर्थ कहाँ – कहाँ हैं ?

(1) अष्टमूर्तियों के नाम :
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भगवान शिव के विश्वात्मक रूप ने ही चराचर जगत को धारण किया है। यही अष्टमूर्तियाँ क्रमश: पृथ्वी, जल, अग्नि,वायु,आकाश, जीवात्मा सूर्य और चन्द्रमा को अधिष्ठित किये हुए हैं। किसी एक मूर्ति की पूजा- अर्चना से सभी मूर्तियों की पूजा का फल मिल जाता है।

1. शर्व
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क्षितिमूर्ति (शर्व)👉 शिव की शर्वी मूर्ति का अर्थ है कि पूवरे जगत को धारण करने वाली पृथ्‍वीमयी प्रतिमा के स्वामी शर्व है। शर्व का अर्थ भक्तों के समस्त कष्टों को हरने वाला।

2. भव
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जलमूर्ति (भव)👉 शिव की जल से युक्त भावी मूर्ति पूरे जगत को प्राणशक्ति और जीवन देने वाली कही गई है। जल ही जीवन है। भव का अर्थ संपूर्ण संसार के रूप में ही प्रकट होने वाला देवता।

3. रूद्र
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अग्निमूर्ति (रूद्र)👉 संपूर्ण जगत के अंदर-बाहर फैली समस्त ऊर्जा व गतिविधियों में स्थित इस मूर्ति को अत्यंत ओजस्वी मूर्ति कहा गया है जिसके स्वामी रूद्र है। यह रौद्री नाम से भी जानी जाती है। रुद्र का अर्थ भयानक भी होता है जिसके जरिये शिव तामसी व दुष्ट प्रवृत्तियों पर नियंत्रण रखते हैं।

4. उग्र
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वायुमूर्ति (उग्र)👉 वायु संपूर्ण संसार की गति और आयु है। वायु के बगैर जीवन संभव नहीं। वायुरूप में शिव जगत को गति देते हैं और पालन-पोषण भी करते हैं। इस मूर्ति के स्वामी उग्र है, इसलिए इसे औग्री कहा जाता है। शिव के तांडव नृत्य में यह उग्र शक्ति स्वरूप उजागर होता है।

5. भीम
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आकाशमूर्ति (भीम)👉 तामसी गुणों का नाश कर जगत को राहत देने वाली शिव की आकाशरूपी प्रतिमा को भीम कहते हैं। आकाशमूर्ति के स्वामी भीम हैं इसलिए यह भैमी नाम से प्रसिद्ध है। भीम का अर्थ विशालकाय और भयंकर रूप वाला होता है। शिव की भस्म लिपटी देह, जटाजूटधारी, नागों के हार पहनने से लेकर बाघ की खाल धारण करने या आसन पर बैठने सहित कई तरह उनका भयंकर रूप उजागर होता है।

6. पशुपति
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यजमानमूर्ति (पशुपति)👉 यह पशुवत वृत्तियों का नाश और उनसे मुक्त करने वाली होती यजमानमूर्ति है। इसलिए इसे पशुपति भी कहा जाता है। पशुपति का अर्थ पशुओं के स्वामी, जो जगत के जीवों की रक्षा व पालन करते हैं। यह सभी आंखों में बसी होकर सभी आत्माओं की नियंत्रक भी मानी गई है।

7. महादेव
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चन्द्रमूर्ति (महादेव)👉 चंद्र रूप में शिव की यह मूर्ति महादेव के रूप में प्रसिद्ध है। महादेव का अर्थ देवों के देव होता है। यानी सारे देवताओं में सबसे विलक्षण स्वरूप व शक्तियों के स्वामी शिव ही हैं। चंद्र रूप में शिव की यह साक्षात मूर्ति मानी गई है।

8. ईशान
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सूर्यमूर्ति (ईशान)👉 शिव का एक नाम ईशान भी है। यह सूर्य जगत की आत्मा है जो जगत को प्रकाशित करता है। शिव की यह मूर्ति भी दिव्य और प्रकाशित करने वाली मानी गई है। शिव की यह मूर्ति ईशान कहलाती है। ईशान रूप में शिव को ज्ञान व विवेक देने वाला बताया गया है।

(2) मनुष्यों के शरीर में अष्ट मूर्तियों का निवास
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1 आँखों में “रूद्र” नामक मूर्ति प्रकाशरूप है जिससे प्राणी देखता है

2 “भव ” ऩामक मूर्ति अन्न पान करके शरीर की वृद्धि करती है यह स्वधा कहलाती है।

3 “शर्व ” नामक मूर्ति अस्थिरूप से आधारभूता है यह आधार शक्ति ही गणेश कहलाती है।

4 “ईशान” शक्ति प्राणापन – वृत्ति को प्राणियों में जीवन शक्ति है।

5 “पशुपति ” मूर्ति उदर में रहकर अशित- पीत को पचाती है जिसे जठराग्नि कहा जाता है।

6 “भीमा ” मूर्ति देह में छिद्रों का कारण है।

7 “उग्र ” नामक मूर्ति जीवात्मा के ऐश्वर्य रूप में रहती है।

8 “महादेव ” नामक मूर्ति संकल्प रूप से प्राणियों के मन में रहती है।

इस संकल्प रूप चन्द्रमा के लिए
” नवो नवो भवति जायमान: ” कहा गया है ,
अर्थात संकल्पों के नये नये रूप बदलते हैं ||

(3) अष्टमूर्तियों के तीर्थ स्थल
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1 सूर्य👉 सूर्य ही दृश्यमान प्रत्यक्ष देवता हैं। सूर्य और शिव में कोई अन्तर नही है , सभी सूर्य मन्दिर वस्तुत: शिव मन्दिर ही हैं फिर भी काशीस्थ ” गभस्तीश्वर ” लिंग सूर्य का शिव स्वारूप है।

2 चन्द्र👉  सोमनाथ का मन्दिर है।

3 यजमान👉 नेपाल का पशुपतिनाथ मन्दिर है।

4 क्षिति लिंग👉 तमिलनाडु के शिव कांची में स्थित आम्रकेश्वर हैं।

5 जल लिंग👉 तमिलनाडु के त्रिचिरापल्ली में जम्बुकेश्वर मन्दिर है।

6 तेजो लिंग👉  अरूणांचल पर्वत पर है।

7 वायु लिंग👉  आन्ध्रप्रदेश के अरकाट जिले में कालहस्तीश्वर वायु लिंग है।

8 आकाश लिंग👉  तमिलनाडु के चिदम्बरम् मे स्थित है।
           
भवं भवानी सहितं नमामि
          
आप की माया आप को ही समर्पित है मुझ अज्ञानी में इतना सामर्थ्य कहाँ है जो आप की माया का वर्णन कर सकूँ।
           
ऊँ पूर्णं शिवं धीमहि

🌊 सोमनाथ महादेव
समुद्र तट पर स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग
सोमनाथ भारत का प्रथम ज्योतिर्लिंग है, जहाँ समुद्र की लहरें मानो स्वयं शिव का अभिषेक करती हैं। यह मंदिर गुजरात के प्रभास पाटन में अरब सागर के किनारे स्थित है, और इसकी दिव्यता का अनुभव मात्र दर्शन से ही हो जाता है।
🔱 दिव्य इतिहास
कथा है कि चंद्रदेव ने दक्ष के श्राप से मुक्ति पाने के लिए तप किया, और शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया। उसी कारण यह ज्योतिर्लिंग सोमनाथ कहलाया।इतिहास में इसे कई बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार फिर से बना 
🌅 आध्यात्मिक अनुभूति
सोमनाथ मंदिर समुद्र के किनारे ऐसा प्रतीत होता है जैसे शिव स्वयं प्रकृति के मध्य विराजमान हों।सूर्यास्त का समय यहाँ अत्यंत अलौकिक होता है  लहरें, आकाश और मंदिर एक ही दिव्य रेखा में मिलते हुए लगते हैं।
🕉 धार्मिक महत्व
सोमनाथ वह स्थल है जहाँ श्रीकृष्ण ने अपना देह-त्याग किया था।यह स्थान शिवभक्तों के लिए केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि मोक्षऊर्जा का केंद्र माना जाता है।
🌌 ईशा रेखा 
सोमनाथ से काशी तक शिवऊर्जा की सीधी रेखा
(वैज्ञानिक + आध्यात्मिक + भावात्मक)
भारत के मानचित्र पर यदि आप सोमनाथ से काशी तक एक सीधी रेखा खींचें, तो आश्चर्य होता है कि कई प्रमुख शिवधाम लगभग उसी दिशा में स्थित हैं  सोमनाथ, ओंकारेश्वर, और काशी विश्वनाथ।
यह केवल भूगोल नहीं, बल्कि एक दिव्य सामंजस्य है, एक ऊर्जा रेखा, जिसे कई लोग “ईशा रेखा” या “शिव-रेखा” भी कहते हैं।
🔱 १. वैज्ञानिक दृष्टि भू-रेखाओं का अद्भुत संयोग
सोमनाथ (प्रभास पाटन, गुजरात)
ओंकारेश्वर (नर्मदा तट, मध्य प्रदेश)
काशी विश्वनाथ (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)
ये तीनों लगभग एक ही देशांतर (लगभग ७०° E–79° E के बीच की सीधी-पट्टी) पर स्थित दिखाई देते हैं।
प्राचीन काल में इतनी सटीक रेखा में निर्माण करना लगभग असंभव माना जाता था, परंतु फिर भी भारत के इन शिवस्थलों की दिशा और स्थिति एक अद्भुत ज्यामितीय क्रम में प्रतीत होती है।
🕉 २. आध्यात्मिक दृष्टि  ईशा (ईशान) दिशा की ऊर्जा-रेखा
संस्कृत में “ईशा” का अर्थ है शिव।
जिस दिशा को ईशान कोण कहते हैं, वह देवताओं की ऊर्ध्व ऊर्जा की दिशा मानी जाती हैपवित्र, प्रकाशमय और चेतना से परिपूर्ण।
प्राचीन ऋषियों का मानना था कि पृथ्वी पर कुछ स्थानों पर ऊर्जा प्रवाह ऊर्ध्व दिशा में अधिक प्रबल होता है।
सोमनाथ से काशी तक की यह सीधी रेखा उसी ऊर्जा धारा की प्रतीत होती है।
🌟 आध्यात्मिक मान्यता यह कहती है
> “जहाँ शिव स्वयं को मूर्त करते हैं, वहाँ पृथ्वी की ऊर्जा आकाश से मिलती है, और एक रेखा बनाती है  ईशा रेखा।”
यानी इस रेखा पर स्थित प्रत्येक स्थल
शिव की एक ज्योति से दूसरी ज्योति तक का मार्ग है।
🌺 ३. भावात्मक दृष्टि  श्रद्धा की वो डोर जो तीन धामों को जोड़ती है
🌊 सोमनाथ, जहाँ समुद्र की लहरें शिव का अभिषेक करती हैं,
🕉 ओंकारेश्वर, जहाँ नर्मदा की धारा स्वयं ‘ॐ’ बनकर बहती है,
🌼 काशी विश्वनाथ, जहाँ मृत्यु भी मोक्ष का द्वार बन जाती है।
तीनों धाम मानो एक ही दिव्य कथा के तीन अध्याय हों
पहला अध्याय समुद्र की विशालता,
दूसरा नर्मदा की गूढ़ गहराई,
तीसरा काशी की शाश्वत शांति।
और तीनों के केंद्र में  शिव की अनंत उपस्थिति।
कहते हैं कि जो व्यक्ति इस रेखा को अपनी आस्था में महसूस कर लेता है, उसके भीतर एक अदृश्य प्रवाह जागता है:
जो अज्ञान को काटता है
मन के बोझ हल्के करता है
और आत्मा को ऊर्ध्व दिशा की ओर उठाता है।
यह रेखा केवल धरती पर नहीं खिंची
यह मन और आत्मा के बीच खिंची एक पवित्र डोर है।
✨ ईशा रेखा का समग्र अर्थ
जब विज्ञान, अध्यात्म और भावना तीनों मिलते हैं, तो यह रेखा केवल भूगोल नहीं रहती
यह एक साधना मार्ग बन जाती है।

सोमनाथ _ आरंभ की ज्योति
ओंकारेश्वर — मध्य की स्पंदन-ध्वनि
काशी विश्वनाथ — अंत की पूर्णता
तीनों मिलकर शिव की वह रेखा बनाते हैं
जो अनादि है, अनंत है, और पूर्णतः चेतन है।

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*‼️ऋषि चिंतन ‼️*

*‼️आत्मा को जानना कठिन तो है परन्तु असंभव नहीं है‼️*

👉 *”मज़्झीम  निकाय” में “तथागत” का  एक सुंदर उपदेश है, वह कहते हैं- “कल्पना करो कि किसी के पैर में विष बुझा तीर चुभ गया है। यदि यह मनुष्य कहे  कि मैं तब तक तीर नहीं निकलाऊंगा जब तक मुझे ज्ञात न हो जाए कि तीर चलाने वाले का नाम, कुल और गोत्र क्या था ? वह ऊँचा था या मझले कद का। धनुष कैसा था, प्रत्यंचा कैसी थी, तीर केसा था ?*
👉 लोग परमात्मा के संबंध में भी ऐसे ही तर्क-वितर्क, वाद-विवाद करते हैं, पर अपने हृदय में जीवन के बोझ, दुःख, कठिनाइयों, दैवी  आपत्तियों का जो तीर चुभा हुआ है, उसे निकालने की ओर किसी का ध्यान नहीं। *हमें सर्वप्रथम आत्मा के दरद को अनुभव करने की आवश्यकता है। बाह्य जीवन के प्रपंचों को छोड़कर अंतर्मुखी होने की बड़ी आवश्यकता है।* बाहरी क्रियाओं को केवल सहयोगी मानना चाहिए। *वे लक्ष्य, सत्य या परमात्मा की प्राप्ति का साधन बनाई जा सकती हैं,* इसलिए अपने शरीर, मन और भावनाओं के केंद्रबिंदु को बेधने की आवश्यकता नहीं कि कौन-सा तत्त्व कितना सुखद है, किस सुख की प्राप्ति के लिए किधर दौड़ना चाहिए? जब इन सब बातों को साधन बना लिया जाता है, तो आवश्यकताएँ भी घट जाती हैं और लक्ष्य भी अपने समीप ही स्पष्ट होने लगता है। उसे पाने के लिए न तो लंबे साधनों के लिए दौड़ना पड़ता है और न छोड़ना पड़ता है।
👉 उपनिषदों ने- *”आत्मा वारे द्रष्टव्यः श्रोतव्यो, मन्तव्यो, निदिध्यासितव्यः ।* – कहकर इसी तथ्य को व्यक्त किया है और  बताया है कि *विभिन्न साधनों से तुम अपने आप को पहचानो।* जिस दिन आत्म-शक्ति का विश्वास जाग जाता है, उस दिन परमात्मा के अस्तित्व का विश्वास जमते देर नहीं लगती। *विश्वास का जमना उतना ही आनंददायक है, जितना परमात्मा की प्राप्ति।*
👉 *मनुष्य अपनी छिपी हुई शक्तियों को पहचाने बिना शक्तिशाली नहीं बन सकता।* जो जैसा अपने को जानता है या जिसकी जैसी अभीप्सा है, वह वैसा ही बन जाता है। *अपने को जानना सब सिद्धियों में बड़ी सिद्धि है।* लाखों में एक-दो होते हैं, जो अपने को जानने का यत्न करते हैं, यत्न करने वालों में भी थोड़े-से ऐसे होते हैं, जो आत्मा के अस्तित्व को पहचानने के लिए देर तक आपने आपको निर्दिष्ट किए रहते हैं। *जिसने भी मनुष्य देह में जन्म लिया है वह आत्मा के समीप पहुँचा दिया गया है, किंतु थोड़े ही हैं, जो उसमें प्रवेश पाते हैं।*
👉 *शरीर में काम-क्रोध, मोह, संतोष, दंड, दया आदि अनेक  भावनाएँ हैं, यह सब या तो आनंद की प्राप्ति के लिए हैं या आनंद में विघ्न पैदा होने के कारण हैं।* आनंद सबका मूल है, वैसे  ही आनंद सबका लक्ष्य है। *”लक्ष्य” और उसकी “सिद्धि” दोनों ही आत्मा में विद्यमान हैं, जो “आत्मा” को ही लक्ष्य बनाकर “आत्मा” के ही द्वारा अपने आप को वेधता है, वह उसे पाता भी है।* आत्मा ही परमात्मा का अंश है, इसलिए *”आत्मा” का ज्ञान हो जाने पर परमात्मा की प्राप्ति अपने आप हो जाती है।*
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनायें बधाई ओर शुभ आशीर्वाद 🌹
आपका जन्मदिन: 8 दिसंबर

दिनांक 8 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 8 होगा। इस दिन जन्मे व्यक्ति धीर गंभीर, परोपकारी, कर्मठ होते हैं। आपकी वाणी कठोर तथा स्वर उग्र है। आप भौतिकतावादी है। आप अदभुत शक्तियों के मालिक हैं। यह ग्रह सूर्यपुत्र शनि से संचालित होता है। आप अपने जीवन में जो कुछ भी करते हैं उसका एक मतलब होता है। कई बार आपके कार्यों का श्रेय दूसरे ले जाते हैं। आपके मन की थाह पाना मुश्किल है। आपको सफलता अत्यंत संघर्ष के बाद हासिल होती है।

आपके लिए खास

शुभ दिनांक : 8, 17, 26

शुभ अंक : 8, 17, 26, 35, 44


शुभ वर्ष : 2042

ईष्टदेव : हनुमानजी, शनि देवता

शुभ रंग : काला, गहरा नीला, जामुनी


आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल

करियर: व्यापार-व्यवसाय की स्थिति उत्तम रहेगी। नौकरीपेशा व्यक्ति प्रगति पाएंगे। बेरोजगार प्रयास करें, तो रोजगार पाने में सफल होंगे। सभी कार्यों में सफलता मिलेगी। जो अभी तक बाधित रहे है वे भी सफल होंगे। राजनैतिक व्यक्ति भी समय का सदुपयोग कर लाभान्वित होंगे। शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे।


सेहत: स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अनुकूल ही रहेगा।


मेष (Aries)
स्वभाव: उत्साही
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: हरा
आज का दिन आपके लिए व्यस्तता से भरा रहने वाला है। आपको किसी जोखिम भरे काम में हाथ डालने से बचना होगा। आपको अपने भाई के स्वास्थ्य को लेकर यदि कोई चिंता है, तो आप उनके कुछ जरूरी टेस्ट आदि अवश्य कराएं। घूमने जाने के लिए आप योजना बना रहें हो, तो आपको अपने माता-पिता से पूछकर जाना बेहतर रहेगा। सरकारी मामलों में लापरवाही आपकी समस्याओं को बढ़ाएगी, इसलिए आप कोई निवेश बहुत ही सोच समझकर करें।

वृषभ (Taurus)
स्वभाव:  धैर्यवान
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: लाल
आज का दिन आपके लिए किसी प्रॉपर्टी की खरीदारी के लिए बेहतर रहेगा। सिंगल लोगों की अपने साथी से मुलाकात होगी, लेकिन आपके मन में आज कुछ कामों को लेकर उलझनें रहेगी, जिनको लेकर आप बिल्कुल आगे ना बढ़ें। विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा के मार्ग प्रशस्थ होंगे। आपको अपने परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। आप किसी मनोरंजन के कार्यक्रम में सम्मिलित हो सकते हैं। घूमने-फिरने के दौरान आपको कोई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। आपका मन इधर-उधर के कामों में ज्यादा लगेगा।

मिथुन (Gemini)
स्वभाव:  जिज्ञासु
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: गुलाबी
आज का दिन आपके लिए मध्यम रूप से फलदायक रहने वाला है। आपको छुटपुट लाभ की योजनाओं पर पूरा ध्यान देने की आवश्यकता है। आप यदि किसी परिजन से कोई मदद मांगेंगे, तो वह भी आपको आसानी से मिल जाएगी। भाग्य का आपको पूरा साथ मिलेगा। आप किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद के लिए आगे आएंगे। आपको जरूरत की आवश्यकताओं की पूर्ति पर पूरा ध्यान देने की आवश्यकता है। माता-पिता के आशीर्वाद से आपका कोई रुका हुआ काम पूरा होगा।

कर्क (Cancer)
स्वभाव:  भावुक
राशि स्वामी: चंद्र
शुभ रंग: नीला
आज का दिन आपके लिए किसी कानूनी मामले में बढ़िया रहने वाला है, क्योंकि आपको अच्छी सफलता हासिल होगी और आपके कोई मन की इच्छा भी पूरी हो सकती है। परिवार में किसी सदस्य के विवाह प्रस्ताव पर मोहर लगने से माहौल खुशनुमा रहेगा, तो किसी बात को लेकर कोई वैचारिक मतभेद हो, तो आप उसमें अपनी बात लोगों के सामने अवश्य रखें और आपकी बेवजह क्रोध करने की आदत के कारण आपकी समस्याएं बढ़ेंगी, इसलिए आपको अपनी आदत में बदलाव लाना होगा।

सिंह राशि (Leo)
स्वभाव:  आत्मविश्वासी
राशि स्वामी: सूर्य
शुभ रंग: सफेद
आज का दिन आपके लिए धन के मामले में थोड़ा कम़जोर रहेगा। सेहत में उतार-चढ़ाव रहने से आपका मन रहेगा। आपको किसी काम को लेकर लापरवाही बिल्कुल नहीं दिखानी है। किसी सदस्य के विवाह में आ रही बाधा भी दूर होगी। आप किसी को धन को लेकर सलाह देने से बचें। आप अपने घर के रिनोवेशन का काम शुरू कर सकते हैं। आपके मन में किसी काम को लेकर संशय हो, तो आप उसे बिल्कुल ना करें। आप अपने खान-पान पर पूरा ध्यान देंगे।

कन्या (Virgo)
स्वभाव:  मेहनती
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: गोल्डन
आज का दिन आपके लिए कुछ विशेषकर दिखाने के लिए रहेगा। आपकी तरक्की के मार्ग रास्ते खुलेंगे। विद्यार्थी शिक्षा में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। घर में सुख-सुविधाओं की वस्तुओं की खरीदारी पर आप अच्छा खासा खर्चा करेंगे, लेकिन आपको अपने भाई- बहनों से किसी बात को लेकर खरी खोटी सुनने को मिल सकती है। आप अपने बिजनेस पर पूरा फोकस बनाए रखें, क्योंकि कोई आपको धोखा देने की कोशिश करेगा। आप किसी अजनबी से कोई लेन देन ना करें।

तुला (Libra)
स्वभाव:  संतुलित
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: आसमानी
आज का दिन आपके लिए प्रसन्नता दिलाने वाला रहेगा। आपके चारों ओर का वातावरण खुशनुमा रहेगा और आपकी शत्रु भी आपके मित्र बन सकते हैं। परिवार में किसी नए मेहमान का आगमन हो सकता है। आपको अपने सगे संबंधियों का पूरा सहयोग मिलेगा। आपका कोई करीबी दोस्त आपको काम को लेकर कोई सलाह दे सकता है, जो आपके लिए बेहतर रहेगी। किसी नये वाहन की खरीदारी करने की आप योजना बना सकते हैं। आपकी स्वास्थ्य संबंधित समस्या परेशान कर सकती हैं।

वृश्चिक (Scorpio)
स्वभाव:  रहस्यमय
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: बैंगनी
आज का दिन आपके लिए कामकाज के मामले में अच्छा रहने वाला है। नौकरी में कार्यरत लोगों का अच्छा समय बीतेगा। घूमने फिरने के दौरान आपको कोई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। विदेशो से व्यापार कर रहे लोगों को थोड़ा सावधान रहने की आवश्यकता है। माताजी आपको कोई जिम्मेदारी दे सकती हैं, जिसको लेकर आपको ढील बिल्कुल नहीं देनी है। परिवार के सदस्यों के साथ आप कहीं घूमने फिरने जा सकते हैं। राजनीति में कार्यरत लोगों को किसी सम्मान की प्राप्ति हो सकती हैं।

धनु (Sagittarius)
स्वभाव:  दयालु
राशि स्वामी: गुरु
शुभ रंग: ग्रे
आज का दिन आपके लिए अक्समात लाभ दिलाने वाला रहेगा। संपत्ति से भी आपको अच्छा फायदा होगा और यदि आपने कोई पुराना इन्वेस्टमेंट किया था, तो उससे भी आपको अच्छे बेनिफिट मिलते दिख रहे हैं। आप आय को बढ़ाने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देंगे, लेकिन फिर भी आपको थोड़ा सावधानी बरतने की आवश्यकता है। आप अपने कामों में कोई बदलाव बहुत ही सोच समझकर करें। आपका कोई बड़ा लक्ष्य पूरा होगा। पारिवारिक रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी।

मकर (Capricorn)
स्वभाव:  अनुशासित
राशि स्वामी:  शनि
शुभ रंग: हरा
आज का दिन आपके लिए धैर्य और संयम से काम लेने के लिए रहेगा। छोटे बच्चों के साथ आप कुछ समय मौज-मस्ती करने में व्यतीत करेंगे। पारिवारिक संपत्ति को लेकर यदि कोई वाद-विवाद बात चल रहा था, तो वह भी दूर होगा। आप किसी नए काम की शुरुआत कर सकते हैं। प्रेम जीवन जी रहे लोगों की अपने साथी से किसी बात को लेकर खटपट होने की संभावना है। आपको बेवजह क्रोध करने से बचना होगा और आप अपनी वाणी की सौम्यता बनाए रखें।

कुंभ ( Aquarius)
स्वभाव:  मानवतावादी
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: नीला
आज का दिन आपके लिए आर्थिक दृष्टिकोण से अच्छा रहने वाला है। अवविवाहित जातकों के जीवन में किसी नये मेहमान की दस्तक हो सकती है। माता-पिता के सहयोग से आपका कोई रुका हुआ काम पूरा होगा। प्रेम और सहयोग की भावना आपके मन में बनी रहेगी। आप दिखावे के चक्कर में ना पड़ें और संतान को पढ़ाई-लिखाई के लिए आप कहीं बाहर भेज सकते हैं। वाहनों का प्रयोग आपको थोड़ा ध्यान देकर करना होगा, क्योंकि अकस्मात खराबी के कारण आपका खर्च बढ़ेगा।

मीन (Pisces)
स्वभाव: संवेदनशील
राशि स्वामी: बृहस्पति
शुभ रंग: आसमानी
आज आपका मान सम्मान बढ़ने से आपको खुशी होगी और कार्यक्षेत्र में भी आपको कोई पुरस्कार आदि मिल सकता है। आप बड़ों की बातों पर पूरा ध्यान दें और आप अपनी किसी शारीरिक समस्या को लेकर आपने किसी अच्छे डॉक्टर से परामर्श ले सकते हैं। यदि आपने किसी से कुछ कर्ज लिया था, तो वह आपसे वापस मांग सकते हैं। परिवार के सदस्यों के साथ आपका अच्छा समय बीतेगा। आप किसी मनोरंजन के कार्यक्रम में अच्छा खासा खर्चा करेंगे।

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Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton