🙏🏻 हर हर महादेव🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 07 अक्टूबर 2025*
🌤️ *दिन – मंगलवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शरद ऋतु*
🌤️ *मास – आश्विन*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – पूर्णिमा सुबह 09:16 तक तत्पश्चात प्रतिपदा*
🌤️ *नक्षत्र – रेवती 08 अक्टूबर रात्रि 01:28 तक तत्पश्चात अश्विनी*
🌤️ *योग – ध्रुव सुबह 09:31तक तत्पश्चात व्याघात*
🌤️ *राहुकाल – शाम 03:24 से शाम 06:52 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:32*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:19*
👉 *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – अश्विनी पूर्णिमा, कार्तिक व्रत-स्नान आरम्भ, पंचक (समाप्त : मध्यरात्रि 01:28 ), प्रतिपदा क्षय तिथि*
💥 *विशेष – पूर्णिमा एवं व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
🌷 *लक्ष्मी किसको सताती है, किसको सुख देती है* 🌷
👉🏻 *जहाँ शराब-कबाब का सेवन, दुर्व्यसन, कलह होता है वहाँ की लक्ष्मी ‘वित्त’ बनकर सताती है, दुःख और चिंता उत्पन्न करती है | जहाँ लक्ष्मी का धर्मयुक्त उपयोग होता है वहाँ वह महालक्ष्मी होकर नारायण के सुख से सराबोर करती हैं |*
🙏🏻
🕉️ ~ *वैदिक पंचांग* ~🕉️
🌷 *कार्तिक मास* 🌷
➡ *07 अक्टूबर, मंगलवार से कार्तिक व्रत-स्नान प्रारंभ ।*
💥 *विशेष ~ गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार 22 अक्टूबर, बुधवार से कार्तिक मास प्रारंभ।*
🌷 *कार्तिक मास में वर्जित*
🙏🏻 *ब्रह्माजी ने नारदजी को कहा : ‘कार्तिक मास में चावल, दालें, गाजर, बैंगन, लौकी और बासी अन्न नहीं खाना चाहिए | जिन फलों में बहुत सारे बीज हों उनका भी त्याग करना चाहिए और संसार – व्यवहार न करें |*’
🌷 *कार्तिक मास में विशेष पुण्यदायी*
🙏🏻 *प्रात: स्नान, दान, जप, व्रत, मौन, देव – दर्शन, गुरु – दर्शन, पूजन का अमिट पुण्य होता है | सवेरे तुलसी का दर्शन भी समस्त पापनाशक है | भूमि पर शयन, ब्रह्मचर्य का पालन, दीपदान, तुलसीबन अथवा तुलसी के पौधे लगाना हितकारी है |*
🙏🏻 *भगवदगीता का पाठ करना तथा उसके अर्थ में अपने मन को लगाना चाहिए | ब्रह्माजी नारदजी को कहते हैं कि ‘ऐसे व्यक्ति के पुण्यों का वर्णन महिनों तक भी नहीं किया जा सकता |’*
🙏🏻 *श्रीविष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करना भी विशेष लाभदायी है | ‘ॐ नमो नारायणाय ‘| इस महामंत्र का जो जितना अधिक जप करें, उसका उतना अधिक मंगल होता है | कम – से – कम १०८ बार तो जप करना ही चाहिए |*
🙏🏻 *प्रात: उठकर करदर्शन करें | ‘पुरुषार्थ से लक्ष्मी, यश, सफलता तो मिलती है पर परम पुरुषार्थ मेरे नारायण की प्राप्ति में सहायक हो’ – इस भावना से हाथ देखें तो कार्तिक मास में विशेष पुण्यदायी होता है |*
🙏🏻 *सूर्योदय के पूर्व स्नान अवश्य करें*
🙏🏻 *जो कार्तिक मास में सूर्योदय के बाद स्नान करता है वह अपने पुण्य क्षय करता है और जो सूर्योदय के पहले स्नान करता है वह अपने रोग और पापों को नष्ट करनेवाला हो जाता है | पूरे कार्तिक मास के स्नान से पापशमन होता है तथा प्रभुप्रीति और सुख – दुःख व अनुकूलता – प्रतिकूलता में सम रहने के सदगुण विकसित होते हैं |*
🙏🏻 *हम छोटे थे तब की बात है | हमारी माँ कार्तिक मास में सुबह स्नान करती, बहनें भी करतीं, फिर आस – पडोस की माताओं – बहनों के साथ मिल के भजन गातीं | सूर्योदय से पहले स्नान करने से पुण्यदायी ऊर्जा बनती है, पापनाशिनी मति आती है | कार्तिक मास का आप लोग भी फायदा उठाना |*
🌷 *३ दिन में पूरे कार्तिक मास के पुण्यों की प्राप्ति*
🙏🏻 *कार्तिक मास के सभी दिन अगर कोई प्रात: स्नान नहीं कर पाये तो उसे कार्तिक मास के अंतिम ३ दिन – त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा को ‘ॐकार’ का जप करते हुए सुबह सूर्योदय से तनिक पहले स्नान कर लेने से महिनेभर के कार्तिक मास के स्नान के पुण्यों की प्राप्ति कही गयी है |*
🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🕒 अक्टूबर 2025 पंचक के समय
प्रारंभ
शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2025 शाम 9:27 बजे
बुधवार, 8 अक्टूबर 2025 सुबह 1:28 बजे तक
कोजागार व्रत विधि, महात्म्य और कथा
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कोजागर व्रत पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा असम में मनाये जाने वाले प्रमुख त्यौहारों में से एक है, इस दिन देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा-आराधना की जाती है। इस व्रत में रात्रिकाल में जागरण करने का विधान है। कोजागर व्रत कथा के अनुसार आश्विन पूर्णिमा की रात्रि में माता लक्ष्मी संसार में भ्रमण हेतु निकलती हैं तथा जो भी भक्त उन्हें जागता हुआ मिलता है देवी माँ उसको धन-धान्य से सम्पन्न कर देती हैं।

रात्रिकाल में जागरण करने के कारण इस व्रत को कोजागर व्रत के नाम से जाना जाता है। यह व्रत आश्विन पुर्णिमा के दिन किया जाता है। इस व्रत को कोजागरी पूजा, बंगाली लक्ष्मी पूजा आदि नामों से भी जाना जाता है। आश्विन मास की पूर्णिमा को कौमुदी भी कहते हैं। अतः इस व्रत का एक नाम कौमुदी व्रत भी है। स्कन्दपुराण के अनुसार, कोजगर व्रत एक सर्वश्रेष्ठ व्रत है, जिसका विधिवत पालन करने से साधारण प्राणी भी उत्तम गति प्राप्त करता है तथा इस जन्म में और दूसरे जन्मों में भी ऐश्वर्य, आरोग्य एवं पुत्र-पौत्रादि का आनन्द भोगता है।
जिस दिन पूर्णिमा निशीथव्यापिनी हो, वही दिन कोजागर पूजा के लिये उत्तम माना जाता है।
कोजागर पूजा पूर्णिमा को भारत के अधिकांश हिस्सों में शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। हालाँकि, भारत में अधिकांश लोग दीवाली के दौरान अमावस्या तिथि पर देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं।
कोजागर व्रत महात्म्य
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कोजागर पूजा महातम्य वालखिल्य ऋषि द्वारा वर्णित किया गया है👇
ऋषि वालखिल्य के शिष्यों ने पूछा कि, कार्तिक के उपाङ्गव्रतों का वर्णन कीजिये जिनके करने से कार्तिक का व्रत सम्पन्न हो जाता है। वालखिल्य ने कहा कि, आश्विन माह कीे शुक्लपक्ष पूर्णिमा को रात्रि में जागरण के साथ श्रद्धापूर्वक लक्ष्मी जी की पूजा-अर्चना करना चाहिये। इस दिन नारियल-पानी पीने तथा चौसर खेलने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं। कोजागर पूजा की रात्रि में माता लक्ष्मी जागरण कर रहे भक्तों को वर देने हेतु पृथ्वीलोक पर भ्रमण करने आती हैं। जो भी भक्तगण दरिद्रता से घिरे हुये हैं, वे इस व्रत को अवश्य करें क्योंकि वलित नाम का एक दरिद्र ब्राह्मण भी इस व्रत के फलस्वरूप अत्यधिक धनी बन गया था।
ऋषियों ने पूछा, कौन वलित तथा उसे कहाँ से धन प्राप्त हुआ ? कृपया इस कथा को विस्तारपूर्वक वर्णित करें।
कोजागर व्रत विधि
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श्री व्रतराज के अनुसार कोजागर पूजा विधान निम्नलिखित हैं👇
👉 हाथी पर विराजमान हुई देवी महालक्ष्मी जी की आराधना करनी चाहिये।
👉 इस दिन श्रद्धापूर्वक उपवास एवं दीपदान करें।
👉 यथाशक्ति एक लाख, पचास हजार, अयुत सहस्र (एक करोड़) अथवा सौ घी या तिल के दीप प्रज्वलित करें।
👉 नृत्य एवं संगीत के साथ रात्रि में जागरण करें।
👉 क्षमतानुसार नगर की गलियों में, देवालयों में, बाग में तथा घर में दीप प्रज्वलित करें।
👉 ब्राह्मणों हेतु क्षीर, घी एवं शक्कर का भोज आयोजित करें।
👉 सहस्र ब्राह्मणों का वस्त्र एवं दक्षिणा सहित पूजन करें तथा यथाशक्ति सोने के दीपक देकर व्रत का पारण करें।
कोजागर पूजा मुहूर्त
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कोजागर पूजा निशिता काल मुहूर्त 👉 रात्रि 11:45 से 12:34
कोजागर पूजा के दिन चन्द्रोदय 👉 सायं 05:25 मिनट पर।
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ 👉 अक्टूबर 06, को दोपहर 12:21 बजे से।
पूर्णिमा तिथि समाप्त – अक्टूबर 07, को प्रातः 09:15 बजे तक।
कोजागर व्रत कथा
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मगध देश में वलित नामक एक ब्राह्मण निवास करता था। यूँ तो वह अनेक विद्याओं का धनी था तथा नित्य सन्ध्यास्नान आदि करता था किन्तु आर्थिक रूप से वह अत्यन्त निर्धन था। यदि कोई उसके घर आकार कुछ दान दे जाये तो स्वीकार कर लेता था अन्यथा वह किसी से कुछ भी नही माँगता था। जितना वह ब्राह्मण सज्जन था उसकी पत्नी उतनी ही अधिक दुष्ट व कलहप्रिय थी। वह प्रतिदिन इस बात पर क्लेश करती थी कि, उसकी बहन का विवाह कितने धन सम्पन्न परिवार में हुआ है और वह सोने – चाँदी के आभूषणों से सजी-धजी घूमती है। ब्राह्मण की पत्नी अन्य लोगों के मध्य भी अपने पति के कुल एवं विद्या को तिरिस्कृत करती थी और उसने एक प्रण लिया कि, जब तक वो धनवान नहीं होंगे, तब तक वह पति के हर आदेश के विपरीत ही कार्य करेगी।
एक दिन तो उसने अपने पति से राजा के यहाँ से धन चोरी कर लाने को कहा तथा ऐसा न करने पर मारने की चेतवानी दे डाली। वह दुर्जन स्त्री नाना प्रकार से वलित को पीड़ित करने लगी। कभी सहसा ही रुदन करने लग जाती तो कभी भोजन त्याग देती, कभी अत्यधिक भोजन ग्रहण करने लगती तो कभी अपना सिर फोड़ने लगती किन्तु वह ब्राह्मण किसी से भिक्षा माँगने की अपेक्षा उस स्त्री की प्रताड़ना सहना अधिक उचित समझता था। वह अपनी पत्नी से कभी कुछ नही कहता तथा जो प्राप्त हो जाता उसी में सन्तोष कर लेता था।
एक बार श्राद्धपक्ष का समय था एवं घर में श्राद्ध हेतु आवश्यक समस्त सामग्री भी उपलब्ध थी किन्तु ब्राह्मण इस बात से चिन्तित था कि उसकी पत्नी उसे घर में श्राद्ध आदि कर्म नहीं करने देगी और कलह करेगी। वह यह सब मन ही मन विचार कर ही रहा था कि, उसका एक मित्र वहाँ आ गया तथा वलित से उसकी चिन्ता का कारण पूछा। वलित ने अपने मित्र को सारी दुविधा बतायी। सारी बात सुनते ही उसका मित्र प्रसन्नतापूर्वक बोला कि, यह तो कोई समस्या ही नही है। यदि तुम्हारी पत्नी जो तुम कहते हो उसका उल्टा ही करती है तो तुम उससे जो भी कार्य तुम्हें करवाना है उसके विपरीत कार्य करने को कहोगे, तो तुम्हारी समस्या का समाधान हो जायेगा । इतना सुनते ही ब्राह्मण वलित हर्षित हो उठा और बोला कि, तुम सही कहते हो मुझे ऐसा ही करना चाहिये।
ब्राह्मण सन्ध्याकाल अपने घर आया तथा पत्नी से बोला कि, हे चण्डि! परसों मेरे पिता का श्राद्ध है किन्तु उन्होने मेरे लिये किसी प्रकार की धन – सम्पत्ति आदि नहीं छोड़ी जिसके कारण आज मुझे यह निर्धनता भोगनी पड़ रही है। अतः तुम उनके श्राद्ध की कोई व्यवस्था मत करना और यदि करो भी तो दुश्चरित्र व जुआरी ब्राह्मणों को निमन्त्रित करना। उसने पुनः अपनी पत्नी से कहा कि श्रेष्ठ ब्राह्मणों को न्यौता मत देना।
ब्राह्मण के वचन सुनकर उसकी पत्नी ने उसके कथन से विपरीत करने की तैयारी आरम्भ कर दी। उसने विभिन्न प्रकार के व्यञ्जन पकाये तथा नगर के उत्तम ब्राह्मणों को निमन्त्रण दिया। अपने पति के कथन का उल्टा करने की धुन में पत्नी ने विधि – विधान से श्राद्धकर्म सम्पन्न किया। श्राद्ध के अन्त में पिण्डदान करने के पश्चात ब्राह्मण ने पत्नी से कहा कि, तू पिण्डों को प्र्वाहित करना भूल गईं है, इन्हें गङ्गा जी में प्र्वाहित कर आना। इतना सुनते ही उसकी पत्नी ने पिण्डों को शौच की कूप में डाल दिया। इस घटना से वलित के हृदय को गहरा आघात पहुँचा और वह अत्यन्त क्रोध में अपने घर से माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के सङ्कल्प के साथ निकल पड़ा। उसने प्रण लिया कि जब तक माता लक्ष्मी उस पर कृपा नहीं करेंगी, तब तक वह निर्जन वन में निवास कर मात्र कन्द मूल आदि का सेवन करेगा एवं घर लौटकर नहीं आयेगा। लक्ष्मी जी को प्रसन्न करेने के लिए वह तीस दिनों तक धर्म नदी के तट पर बैठा रहा और उसी बीच आश्विन माह की पूर्णिमा आ गयी।
उस वन में कालीय नाग के वंश की कन्यायें लक्ष्मी जी की प्रसन्नता के लिये व्रत कर रहीं थीं। उन्होंने सुन्दर- स्वच्छ वस्त्र धारण कर रखे थे एवं उनका निवास स्थान श्वेत रँग की छटा बिखेर रहा था। नाग कन्याओं ने पञ्चामृत, रत्न एवं दर्पण आदि अर्पित कर देवी लक्ष्मी का श्रद्धापूर्वक पूजन किया। प्रथम पहर पूजन में व्यतीत हो गया तदोपरान्त जुआ खेलने की तैयारी हुयी, किन्तु जुआ खेलने के लिये चार व्यक्तियों की आवश्यकता थी और उन्हें चौथा भागीदार नहीं मिल रहा था। वह वन में चौथे व्यक्ति को खोज ही रहीं थीं कि, उनकी दृष्टि नदी तट पर बैठे वलित ब्राह्मण पर गयी, जो मुखाकृति से उन्हें सज्जन प्रतीत हुआ। नाग कन्याओं ने उससे पूछा कि आप कौन हैं? कृपया हमारे साथ लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने हेतु जुआ खेलने चलें।
ब्राह्मण ने उत्तर दिया, आप कैसी अनुचित बात कर रही हैं, जुआ खेलने से लक्ष्मी का क्षय व धर्म का नाश होता है। कन्या ने कहा कि, आप बोलते तो पण्डितों की भाँति हैं किन्तु आपके विचार मूर्खों जैसे हैं। इतना कहकर वह ब्राह्मण को अपने साथ मन्दिर में ले गयीं तथा उसको प्रसाद व नारियल पानी प्रदान किया। तत्पश्चात् ‘माता लक्ष्मी प्रसन्न हों’ ऐसा बोलते हुये ब्राह्मण के साथ जुआ खेलना आरम्भ कर दिया।
सर्वप्रथम नाग कन्यायों ने दाँव पर अमूल्य रत्न लगाये किन्तु ब्राह्मण के पास कुछ नहीं था इस कारण सर्वप्रथम उसने अपनी लँगोट दाँव पर लगायी जिसे वह हार गया। तत्पश्चात् उसने अपना जनेऊ को दाँव पर लगा दिया किन्तु नाग कन्याओं ने वह भी जीत लिया। अब कोई अन्य वस्तु न होने पर ब्राह्मण ने अपने शरीर को ही दाँव पर लगा दिया। इसी बीच मध्य रात्रि हो गयी और देवी लक्ष्मी भगवान श्री नारायण के साथ संसार में भ्रमण करते हुये वहाँ से गुजरीं। भ्रमण करते – करते उन्होंने देखा कि एक ब्राह्मण कौपीन व यज्ञोपवीत विहीन होकर घोर चिन्ता व निराशा से घिरा हुआ बैठा है। यह दृश्य देख भगवान विष्णु ने लक्ष्मी जी से कहा कि, आपका व्रत करने वाले ब्राह्मण की ऐसी दुर्दशा क्यों है? कृपया अपने इस भक्त के कष्ट का निवारण करके, उसे धन-वैभव व सुख-सौभाग्य प्रदान करें।
इतना सुनते ही माता लक्ष्मी ने ब्राह्मण पर अपनी कृपा दृष्टि डाली तथा उसकी समस्त दरिद्रता को नष्ट कर दिया। लक्ष्मी जी की कृपा होते ही ब्राह्मण का रूप कामदेव के समान स्त्रियॉं को मोहित करने वाला हो गया। उसका यह मनोहारी रूप देखकर नाग कन्याओं ने उससे कहा कि, हे विप्रवर, हमनें तुम्हें जीत लिया है इस कारण से अब तुम हमारे पति बनकर हमारे अनुसार कार्य करो। ब्राह्मण ने यह प्रस्ताव सहर्ष स्वीकार कर लिया। ब्राह्मण ने सभी कन्याओं से गन्धर्व विवाह किया तथा उन्हें नाना प्रकार के रत्नों के साथ वापस अपने घर के लिये निकल पड़ा।
वापस अपने घर पहुँचने पर ब्राह्मण का ऐसा मानना था कि, उसकी पत्नी के अनादर व तिरस्कार के कारण ही उसका भाग्य परिवर्तित हुआ है, ब्राह्मण ने अपनी पत्नी का सम्मान किया जिससे वह अत्यधिक प्रसन्न हो गयी तथा अपने पति की आज्ञा का पालन करने लगी। इस व्रत के प्रभाव से वलित ब्राह्मण की समस्त समस्याओं का अन्त हो गया तथा वह सर्व रूप से सुखी व सम्पन्न हो गया।
इस प्रकार कोजागर व्रत कथा सम्पन्न हुई, विधिवत् इस कथा के श्रवण से व्रत का फल भी प्राप्त होता है।
साभार~ पं देव शर्मा💐
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
आपका जन्मदिन: 7 अक्टूबर
दिनांक 7 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 7 होगा। यह अंक वरूण ग्रह से संचालित होता है। आप खुले दिल के व्यक्ति हैं। आपकी प्रवृत्ति जल की तरह होती है। जिस तरह जल अपनी राह स्वयं बना लेता है वैसे ही आप भी तमाम बाधाओं को पार कर अपनी मंजिल पाने में कामयाब होते हैं। किसी के मन की बात तुरंत समझने की आपमें दक्षता होती है। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति अपने आप में कई विशेषता लिए होते हैं। आप पैनी नजर के होते हैं।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 7, 16, 25
शुभ अंक : 7, 16, 25, 34
शुभ वर्ष : 2026
ईष्टदेव : भगवान शिव तथा विष्णु
शुभ रंग : सफेद, पिंक, जामुनी, मेहरून
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
करियर: नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए समय सुखकर रहेगा। अधिकारी वर्ग का सहयोग मिलेगा।
कारोबार: नवीन कार्य-योजना शुरू करने से पहले केसर का लंबा तिलक लगाएं व मंदिर में पताका चढ़ाएं। आपके कार्य में तेजी का वातावरण रहेगा। आपको प्रत्येक कार्य में जुटकर ही सफलता मिलेगी। व्यापार-व्यवसाय की स्थिति उत्तम रहेगी।
🌹आज का राशिफल 🌹
*दिनांक : 07 अक्टूबर 2025*
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन आपको कुछ ना कुछ हानि अवश्य कराएगा। प्रत्येक कार्य देखभाल कर ही करें। विशेषकर आज धन संबंधित कार्यों में अधिक स्पष्टता बरतें, किसी से धोखा अथवा अपमानित होने की संभावना है। कार्य क्षेत्र पर भी आज निवेश करने से पहले अनुभवी की सलाह जरूर लें घाटा हो सकता है। व्यवसाय को आज मेहनत के बाद भी नियंत्रित नहीं कर पाएंगे। धन लाभ के लिये विविध प्रयास विफल ही होंगे ऊपर से आकस्मिक खर्च आने से संचित कोष से खर्च करना पड़ेगा। आज आपकी मानसिकता धन लोलुप जैसी रहेगी प्रलोभन में शीघ्र आ जाएंगे जिसका बाद में दुख होगा। घर में किसी न किसी बात से कोहराम लगा रहेगा। दाम्पत्य जीवन में तालमेल नहीं बैठा पाएंगे। कुछ दिन धैर्य धारण करें सेहत में भी आज नया विकार बन सकता है।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज भी आपका व्यवहार सामने वाले को अहंकारी जैसा लगेगा लेकिन बाहर से रूखापन दिखने पर भी अंदर से नरमी रहेगी। आज कोई भी आवश्यकता पड़ने पर आपके पास से खाली हाथ नही जाएंगा। कार्य व्यवसाय से आज आशा से अधिक लाभ कमा सकते है परन्तु इसके लिये व्यर्थ के सामाजिक व्यवहारों में आज कमी लाने आवश्यक है। धन की आमद के लिये किसी की सहायता की आवश्यकता पड़ेगी जो आपके कुशल व्यवहार से तुरंत मिल जाएगी। व्यवसाय में आज गति रहने पर भी कुछ कमी अनुभव करेंगे जिसकी पूर्ति आज सम्भव नही इसपर ध्यान भी ना दें। सरकारी कार्य आज दिन रहते कर ले बाद में सहयोग की कमी के चलते अधूरे रह सकते है। घरेलू व सन्तानो का खर्च बढ़ चढ़ कर रहेगा। दाहिने नेत्र अथवा शरीर के दाहिने भाग में कोई समस्या बन सकती है।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन आपके लिये कार्य सफलता वाला रहेगा। बीते दिनों में समाज से मिले अनादर के कारण हीन भावना से ग्रस्त रहेंगे स्वभाव में ईर्ष्या का भाव आपको लाभ से दूर रखेगा इससे बचने का प्रयास करें तो दिन हर प्रकार से आनंददायक बन सकता है। आज काम-धंधा कुछ न कुछ लाभ अवश्य देगा कार्य क्षेत्र पर आज लोगो को आपके सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी इसका लाभ उठाएं मन से अहम की भावना को त्याग समाज सेवा करें इससे धन के साथ सम्मान की भी प्राप्ति होगी।आपके वादा करके टालमटोल करने पर घरेलू वातावरण कुछ समय के लिये अशांत बनेगा महिलाओ का आज वाणी पर नियंत्रण नही रहेगा फिर भी घर मे चलन पहल बनाये रखेंगी। यात्रा के योग बन रहे है इससे लाभ कम शरीर को थोड़ा कष्ट थकान अधिक बनेगी।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन मिला जुला फल देगा। प्रातः काल में किसी जरूरी कार्य को लेकर किसी के सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी लेकिन लोग स्पष्ट बात ना कर आपको टालने के प्रयास करेंगे। कार्य क्षेत्र पर आज व्यस्तता बढ़ेगी इसका लाभ भी अवश्य मिलेगा मध्यान के समय आपकी वाणी से किसी का दिल ना दुखे इसका ध्यान रखे। व्यवसायी वर्ग को धन की आमद आवश्यकता अनुसार आसानी से हो जाएगी। लेकिन नौकरी पेशाओ को आज परिश्रम का फल मिलना परेशानी भरा रहेगा लेट लतीफी एवं लापरवाही के कारण अधिकारी वर्ग के क्रोध का सामना करना पड़ेगा। घर का वातावरण सामान्य रहेगा सन्तानो के ऊपर खर्च बढ़ेगा बाहर घूमने की योजना बनेगी। सेहत को लेकर आशंकित रहेंगे लेकिन लापरवाही भी करेंगे। धर्म कर्म में आस्था बढ़ेगी।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन विषम परिस्थितियों वाला रहेगा। प्रातः काल से ही सेहत में कुछ ना कुछ कमी आएगी जिससे मध्यान तक कि दिनचार्य अस्त व्यस्त रहेगी पेट संबंधित संमस्या में लापरवाही ना करें अन्यथा बाद मे परिणाम गंभीर भी हो सकते है। सार्वजनिक क्षेत्र पर आपकी छवि रंगीन मिजाज जैसी बनेगी बोलते समय स्वयं पर नियंत्रण नही रहेगा इसका विपरीत प्रभाव आपकी सख्शियत पर पड़ेगा। कार्य व्यवसाय से आज लाभ अवश्य होगा लेकिन धन आते ही जाने के रास्ते बना लेगा। महिलाओ का स्वभाव आज सब सुख सुविधा मिलने के बाद भी असंतुष्ट ही रहेगा अन्य लोगो से अपनी तुलना करने पर मन हीन भावना से ग्रस्त होगा। आज पैतृक कार्यो को लेकर घर मे खींच तान हो सकती है। पिता से संबंधों में खटास आ सकती है। टोने टोटको पर खर्च करेंगे।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन बीते दिन की तुलना में काफी राहत प्रदान करेगा आज आप अपनी बुद्धि एवं व्यवहार के बल पर सम्मान के हकदार बनेंगे। दिन के पहले भाग में किसी घरेलू समस्या को लेकर मानसिक उलझन रहेगी लेकिन पुरानी घटना से अनुभव लेकर इससे पार पा लेंगे। सार्वजनिक क्षेत्र पर आपकी छवि अनुभवी एवं भद्र इंसान जैसी रहेगी मध्यान के समय कोई न कोई अपनी समस्या को लेकर आपसे परामर्श लेगा। काम धंधा आज संभावनाओं पर केंद्रित रहेगा फिर भी पुराने सौदे आज धन देकर जाएंगे। संध्या बाद घरेलू मामलों में लापरवाही करने पर परिजन से मतभेद हो सकते है आज समय पर आवश्यकताओं की पूर्ति करे अन्यथा कलह के लिये तैयार रहे। घर के किसी सदस्य की सेहत चिंता बढ़ाएगी।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज के दिन आप बैठे बिठाये फालतू के झगड़े मोल लेंगे। किसी काम मे विशेष योग्यता होने का पूरा फायदा उठाएंगे जिससे अन्य लोगो मे आपके प्रति कटु भावनाएं जन्म लेंगी लेकिन आज अपना हित साधने के लिये किसी भी बात या व्यवहारिकता की परवाह नही करेंगे। कार्य क्षेत्र पर मनमानी दिखाएंगे सहकर्मी अथवा जरूरतमंद आपसे मजबूरी में ही व्यवहार करेंगे। धन की आमद संतोषजनक रहेगी थोड़ा धन मिलने पर इसका प्रलोभन बढ़ता ही जायेगा जिससे मन शांत नहीं बैठेगा। आज माता, मशीनरी, संपत्ति अथवा पशु संबंधित कार्यो पर विशेष खर्च करना पड़ेगा इसके कारण अन्य खर्चो में कटौती करने पर घर के सदस्य नाराज हो सकते है। धर्म से ज्यादा कर्म को महत्त्व देंगे फिर भी गुप्त प्रयोग टोन टोटको के लिये भी थोड़ा समय निकाल लेंगे। लोहे की वस्तु अथवा वाहन से चोट का भय है।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज के दिन आप अपनी बुद्धि एवं पराक्रम का परिचय देंगे। दिन के पहले भाग में किसी से वैचारिक मतभेद बढ़ सकते है आपको अपने कार्य मे किसी का हस्तक्षेप करना अखरेगा विवेकी व्यवहार से बात बढ़ने नही देंगे फिर भी मन मे खटास अवश्य रह जायेगी। कार्य व्यवसाय में आज आप असम्भव कार्य को भी संभव बना लोगो की वाहवाही लूटेंगे धन की आमद किसी न किसी रूप में अवश्य होगी इसके लिये ज्यादा झंझट में ना पड़े वरना सामाजिक क्षेत्र पर किसी से बिना बात की दुश्मनी हो सकती है आज आप जिसे अपना हितैषी समझेंगे वही पीछे से हानि पहुचायेगा। जमीन जायदाद संबंधित मामले उलझेंगे इनको टालना ही बेहतर है। भाई बंधु एवं पति पत्नी के बीच स्वार्थी संबंध रहेंगे। सेहत मामूली बातो को छोड़ ठीक रहेगी वाहन से सावधानी बरतें।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आपके लिये आज का दिन प्रतिकूल है आज ना चाहते हुए भी किसी विवाद में उतारना पड़ेगा जिससे सम्मान को ठेस पहुच सकती है। वाणी एवं व्यवहार को नियंत्रण में रखें खास कर महिलाए पराये कामो में टांग ना फसाये तो बेहतर रहेगा अन्यथा बैठे बिठाये बदनामी हो सकती है। काम के सिलसिले से यात्रा करनी पड़ेगी इससे पहले खर्च करने पर धन लाभ तो होगा लेकिन आशा से कम ही दलाली के कार्य में अन्य कार्यो की तुलना में ज्यादा मुनाफा मिल सकता है। घर मे पैतृक संपत्ति अथवा अन्य कारणों से पक्षपात का आरोप लग सकता है घरेलू निर्णय बड़ो के ऊपर छोड़ दे इससे सम्मान बना रहेगा। सन्तानो को लेकर आज मन दुखी रहेगा। घर मे छोटी मोटी बातो को अनदेखा करें आवश्यकता पड़ने पर ही बोले। कमर अथवा पैर संबंधित संमस्या हो सकती है।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज आपके मन मे दिन भर कुछ ना कुछ उठापटक लगी रहेगी। आज आपको सामाजिक रीतियों के विपरीत कार्य करने में आनद आएगा। अपने कुतर्कों से आस पास के लोगो को दुविधा में डालेंगे इससे आपके ही व्यक्तित्त्व में कमी आएगी। कार्य व्यवसाय से आज जितनी उम्मीद लगाएंगे उसका आधा लाभ भी नही मिल पायेगा। व्यवहारिकता की कमी हर क्षेत्र पर नुकसान ही कराएगी। सहकर्मी अथवा कार्य क्षेत्र पर अन्य किसी से अहम को लेकर टकराव हो सकता है स्वभाव में परिवर्तन लाये किसी के भी ऊपर अनैतिक दबाव डालने पर सम्मान हानि तुरंत होगी। महिला वर्ग घरेलू एवं व्यक्तिगत आवश्यकताओं की लंबी लिस्ट बनाकर पुरुषों को परेशानी में डालेंगी। संध्या के समय टालने पर भी व्यर्थ के खर्च होंगे। मानसिक एवं शारीरिक क्षमता कम रहेगी।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन मिला जुला रहेगा। आज आपको पूर्व में किये किसी निवेश से काफी उम्मीद रहेगी लेकिन अंत समय मे निराशा ही हाथ लगेगी लाभ की जगह निवेश किया धन व्यर्थ होने की संभावना है। धन को लेकर आज कोई नई संमस्या खड़ी होगी व्यवसाय अथवा अन्य आवश्यक कार्यो के लिये माता अथवा अन्य किसी नापसंद व्यक्ति की आर्थिक सहायता लेनी पड़ेगी जिसमे पहले मामूली कलह का सामना भी करना पड़ेगा। आज भी मध्यान तक कोई बड़ा निर्णय ना ले इसके बाद स्वतंत्र होकर कर कर सकते है आवश्यकता पूर्ति अनुसार धन कहि न कही से उपलब्ध हो जाएगा। पैतृक कारणों से भाई बंधुओ के बीच स्नेह संबंध बिगड़ सकते है जहां तक संभव हो आज किसी के आगे हाथ ना फैलाये। मानसिक चंचलता और तनाव को छोड़ सेहत ठीक ही रहेगी।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन आपके लिये शुभ फल प्रदान करेगा। दिन के आरम्भ में जो भी योजना बनाएंगे उसमें कई उतार चढ़ाव देखने को मिलेंगे फिर भी ले देंकर सफलता अवश्य मिलेगी। कार्य क्षेत्र पर आज जिस भी काम को हाथ मे लेंगे उसमे कोई न कोई झंझट अवश्य रहेगा। शत्रु अथवा प्रतिस्पर्धी पक्ष आपको हानि पहुचाने का हर सम्भव प्रयास करेंगे इनको अनदेखा करना ही बेहतर रहेगा अन्यथा व्यर्थ की दुविधा में फंस कर अपने उद्देश्य से भटक सकते है। धन लाभ आकस्मिक होगा कार्य क्षेत्र पर सहकर्मी काम के समय मनमानी करेंगे पहले से ही आत्म निर्भर रहे तो परेशानी नही आएगी। लेखन से जुड़े लोग चाह कर भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित नही कर पाएंगे। दाम्पत्य एव संतान सुख आज न्यून रहेगा। संध्या बाद का समय राहत दिलाएगा लेकिन घर मे कम ही बोलें।

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