🙏🏻 हर हर महादेव🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 07 अगस्त 2025*
🌤️ *दिन – गुरूवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – वर्षा ऋतु*
🌤️ *मास – श्रावण*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – त्रयोदशी दोपहर 02:27 तक तत्पश्चात चतुर्दशी*
🌤️ *नक्षत्र – पूर्वाषाढा दोपहर 02:01 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा*
🌤️ *योग – विष्कंभ सुबह 06:43 तक तत्पश्चात प्रीति*
🌤️ *राहुकाल – दोपहर 02:22 से शाम 03:59 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:15*
🌤️ *सूर्यास्त – 07:12*
👉 *दिशाशूल – दक्षिण दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण -*
💥 *विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
💥 *चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)*
💥 *चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।*
🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
🌷 *रक्षाबंधन के पर्व पर दस प्रकार का स्नान*
🙏🏻 *श्रावण महिने में रक्षाबंधन की पूर्णिमा 09 अगस्त 2025 शनिवार वाले दिन वेदों में दस प्रकार का स्नान बताया गया है |*
👉🏻 *गतांक से आगे….*
5⃣ *गोरज स्नान – गायों के पैरों की मिट्टी थोड़ी ले ली, और वो लगा ली | गवां ख़ुरेंम ये वेद में आता है इसका नाम है दशविद स्नान | रक्षाबंधन के दिन किया जाता है | गवां ख़ुरेंम निर्धुतं यद रेनू गग्नेगतं | सिरसा तेल सम्येते महापातक नाशनं || अपने सिर पर वो गाय की खुर की मिट्टी लगा दी तो महापातक नाशनं | ये वेद भगवान कहते हैं |*
6⃣ *धान्यस्नान – जो हमारे गुरुदेव सप्तधान्य स्नान की बात बताते हैं | वो सब आश्रमों में मिलता है | गेंहूँ, चावल, जौ, चना, तिल, उड़द और मुंग ये सात चीजे | ये धान्यस्नान बताया | धान्योषौधि मनुष्याणां जीवनं परमं स्मरतं तेन स्नानेन देवेश मम पापं व्यपोहतु | सप्तधान स्नान ये भी पूनम के दिन लगाने का विधान है |*
7⃣ *फल स्नान – वेद भगवान कहते हैं फल स्नान मतलब कोई भी फल का थोडा रस लगा दिया | और कोई नहीं तो आँवला बढियाँ फल है | आँवला हरा तो मिलेगा नहीं तो थोडा आँवले का पाऊडर ले लिया और लगा दिया गया हो फल स्नान | मतलब हमारे जीवन में अनंत फल की प्राप्ति हो और सांसारिक फल की आसक्ति छूट जाय | इसलिए आज पूर्णिमा को हे भगवान फल के रस से थोडा स्नान कर रहें हैं | किसी को और फल मिल जाये और थोडा लगा दिये जाय तो कोई घाटा नहीं हैं |*
8⃣ *सर्वोषौधि स्नान – सर्वोषौधि माना आयुर्वेदिक औषधि खाना नहीं | इस स्नान में कई जड़ी बूटी आती हैं | उसमे दूर्वा, सरसों, हल्दी, बेलपत्र ये सब डालते हैं उसमें वो थोडासा पाऊडर लेके शरीर पर रगड के स्नान किया जाता है | मेरी सब इन्द्रियाँ आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा ये सब पवित्र हो | इसमें सर्वोषौधि स्नान, और मेरा मन पवित्र रहें| मेरे मन में किसी के प्रति बुरे विचार न आये |*
9⃣ *कुशोधक स्नान – कुश होता है वो थोडा पानी में मिला दिया और थोडा पानी हिला दिया | क्योंकि जो अपने घर में कुश रखते हैं ना तो उनके पास कोई मलिन आत्माएँ नहीं आ सकती | भूत, प्रेत आदि का जोर नहीं चलता | कुश क्या है ? जब भगवान का धरती पर वराह अवतार हुआ था | तो उनके शरीर से वो उखणकर जमीन पर गिरने लगे वही आज कुश के रूप में पाये जाते हैं, वो परम पवित्र है | वो कुश जहाँ पर हो वहाँ पर मलिन आत्मा नहीं आती हो तो भाग जाती हैं | तो कुश पानी में थोडा हिला दिया और प्रार्थना कर दी की, मेरे मन में जो मलिन विचार हैं, गंदे विचार हैं या कभी कभी आ जाते हैं वो सब भाग जाये | हरि ॐ … हरि ॐ … ॐ ,… करके उसे पानी में नहा दिया |*
1⃣0⃣ *हिरण्य स्नान – हिरण्य स्नान माने अगर अपने पास कोई सोने की चीज है | कोई सोने का गहना वो बाल्टी में डाल दिया, हिला दिया और स्नान कर लिया | हिलाने के बाद वो निकाल लेना बाल्टी में पड़ा नहीं रहे |*
🙏🏻 *तो ये दशविद स्नान वेद में बताया | श्रावण मास के पूर्णिमा का दिन किया जाता है | आप इसमें से आप जितने कर सकते हो उतने कर लेना | १ – २ न कर पाये तो जय सियाराम … कह दें प्रभु ! हमसे जितना हो सकता था वो किया |*
*और जब शरीर पर पानी डाल रहे हैं तो ये श्लोक बोलना –*
🌷 *नमामि गंगे तव पाद पंकजं सुरासुरैः वंदित दिव्यरूपं |*
*भुक्तिचं मुक्तिचं ददासनित्यं भावानुसारें न सारे न सदा स्मरानाम ||*
*गंगेच यमुनेच गोदावरी सरस्वती नर्मदे सिंधु कावेरी | जलस्म्ये सन्निधिं कुरु ||*
*ॐ ह्रीं गंगाय ॐ ह्रीं स्वाहा ||*
🙏🏻 *तीर्थों का स्मरण करते हुये स्नान करें | तो ये बड़ा पुण्यदायी स्नान श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) के दिन प्रभात को किया जाना चाहिये ऐसा वेद का आदेश है |*
👉🏻 *समाप्त…..*
🙏🏻
🕉️ ~ *वैदिक पंचांग* ~ 🕉️
🌷 *विद्यार्थी विशेष* 🌷
👧🏻 *विद्यार्थी पढ़ने में ज्यादा कमजोर हो तो –विद्यार्थी को सारस्वत मंत्र तो बापूजी देते ही है |*
➡ *पर समझो कोई बच्चा कमजोर है ज्यादा… पढ़ नहीं सकता तो उसको सिखा दें ॐ हयग्रीवाय नम : ॐ हयग्रीवाय नम : ॐ हयग्रीवाय नम : ॐ हयग्रीवाय नम :अपने आराध्य को स्मरण करके जप करें |*
🙏🏻 *भगवान विष्णु के चौबीस अवतार थे उसमे हयग्रीव अवतार हैं | ये अग्निपुराण में अग्निदेव वशिष्ठ से कहते हैं |*
💥 *विशेष – 08 अगस्त 2025 शुक्रवार को हयग्रीव जयंती हैं ।*
🙏🏻
🕉️ ~ *वैदिक पंचांग* ~ 🕉️
पंचक शुरू- 10 अगस्त 2025, रविवार को रात 02:11 बजे
पंचक खत्म- 14 अगस्त 2025, बृहस्पतिवार को सुबह 09:06 बजे
🕉️ ~ *वैदिक पंचांग* ~ 🕉️
।।श्रीमहाकालाष्टकम् II
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•••••यह स्तोत्र भगवान श्रीकृष्ण और महाकाल शिव की संयुक्त महिमा में अद्वितीय स्तुति है — जहाँ कृष्ण की माधुर्य लीलाओं के बीच महाकाल की तेजोमयी उपस्थिति गूंजती है।
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वचसि मम सन्निधत्तां मधुरस्मितभरितमन्थरापाङ्गी ।
करकलितललितवंशा कापि किशोरी कृपालहरी ॥१
अर्थ:- मेरे वचनों में, कोई ऐसी किशोरी (श्रीराधा या बालकृष्ण की लीला सहचरी), मन्द-मन्द मुस्कान और धीमी दृष्टि लिए हुए, हाथ में बाँसुरी थामे, करुणा की वर्षा करती हुई प्रकट हो।
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गर्वोद्रिक्तदिशागजेन्द्रपरिषत्सेवाप्रणामादृतं
यातायातसुरेन्द्रसैन्यलहरीमौलिप्रभावन्दितम् ।
वल्गत्पार्थिवसार्धमण्डलमहायात्रारवाराधितं
कार्त्स्न्यं कामभुवां (सदा) गजमुखज्योतिः किमप्याश्रये ॥२
अर्थ:- जो चारों दिशाओं के ऐरावत जैसे गर्वीले रथों से घिरे, देवताओं की सेनाओं की आवा-जाही से जिनका मुकुट शोभायमान है, राजाओं की महान यात्राओं के शब्दों से जिसकी महिमा गूँजती है — ऐसे समस्त कामभावना को सम्हालने वाले, गजमुख के ज्योति रूप, परम दिव्य महाकाल को मैं शरण में लेता हूँ।
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भूम्ने भुवनमाधुर्यसीम्ने सकलसम्पदाम् ।
स्थेम्ने सरसगोपालधाम्ने तदिदमों नमः ॥३
अर्थ:- हे अनन्त प्रभु! जो भुवनों के मधुर्य की सीमा हैं, समस्त सम्पत्तियों के आधार और श्रीगोपाल (कृष्ण) के अधिष्ठान हैं — उन्हें बारम्बार नमस्कार है।
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अज्ञानमथ नज्योतिः प्रज्ञेशानपदास्पदम् ।
आलम्बितनराकारमालम्बनमभूत् सताम् ॥४
अर्थ:- जो अज्ञान का नाश करने वाले दिव्य प्रज्ञा-ज्योति हैं, ज्ञानी जनों के चित्त का अधिष्ठान हैं, मानव रूप में प्रकट होकर सत्पुरुषों का आधार बने हैं।
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अमुष्य करुणापात्रमस्ति मस्करिणां मणिः ।
आदित्यप्रज्ञसंज्ञं यदादित्यादधिकं महः ॥५
अर्थ:- वह (महाकाल) करुणा के पात्र हैं, ज्ञानी योगियों के बीच रत्न हैं।उनकी “आदित्यप्रज्ञा” (सूर्य से भी अधिक चेतन) ऐसा प्रकाश है,जो स्वयं सूर्य से भी अधिक तेजस्वी है।
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निर्जितः समदृष्टयैव नीलोलं येन मन्मथः ।
अर्जितैरस्त्रकुसुमैरारादाराधयन् ययौ ॥६
अर्थ:- जिनकी समदृष्टि से ही कामदेव (मन्मथ) पराजित हो गया,
जिन्होंने प्रेम के पुष्पों जैसे अस्त्रों से ही अपनी साधना सफल की —ऐसे प्रभु को नमन।
🪷
आदित्यप्रज्ञपादानामादिकारुण्यभाजनम् ।
ईशानवेद इत्यासीदीशानो मुनितेजसाम् ॥७
अर्थ:- जो आदित्यप्रज्ञा (सर्वोच्च ज्ञान) के चरणों में स्थित हैं, जो करुणा के आदिस्रोत हैं — जिन्हें ईशानवेद (ईशान शिव का वेदस्वरूप) माना गया है, वे मुनियों के तेज का परम स्रोत हैं।
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आस्पदस्य हि यस्यासीदशेषगुणसम्पदाम् ।
अद्वितीय इति ख्यातिरात्मबुद्धया न केवलम् ॥८
अर्थ:- जो समस्त गुणों के अधिष्ठान हैं, और जिनकी ख्याति अद्वितीय है — यह केवल आत्मबुद्धि से नहीं, अपितु पूर्ण तत्वदर्शी भी यही मानते हैं।
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तयोरनुग्रहापाङ्गसङ्क्रान्तज्ञानसम्पदा ।
सागरा इव गम्भीराः सन्ति धन्याः सहस्रशः ॥९
अर्थ:- जिन पर प्रभु के कृपादृष्टि का प्रसाद बरसा, वे ज्ञान के महासागर बनकर गम्भीर हुए, ऐसे हजारों धन्य साधक इस संसार में विराजमान हैं।
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तयोरेव कृपापात्रं कृष्णलीलाशुको मुनिः ।
यदाश्रमाङ्गणे रमन्ते योगिनः सिद्धचेतसः ॥१०
अर्थ:- उन्हीं (महाकाल-श्रीकृष्ण) की कृपा से जो कृपापात्र बने — वे हैं मुनि कृष्णलीलाशुक। जिनके आश्रम के प्रांगण में योगीजन, सिद्ध पुरुष, और दिव्य आत्माएँ रमण करती हैं।
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तिलकं कुलपालीनां नीलीति निलयं श्रियाम् ।
यमलं जनयाञ्चके यं च कीर्तिं च शाश्वतीम् ॥११
अर्थ:- जो समस्त कुलों के रक्षक हैं, जिनका स्वरूप नील वर्ण है, जिन्होंने श्री (लक्ष्मी) और शाश्वत कीर्ति — इन दोनों को उत्पन्न किया।
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यस्य दामोदरो नाम सविता सवितृत्तमः ।
अनृणो यस्य धर्मार्थं मरुतां नायकैः सह ॥१२
अर्थ:- जिनका नाम ‘दामोदर’ है, जो स्वयं सूर्य के समान तेजस्वी और श्रेष्ठतम हैं; जिनके प्रति धर्म, अर्थ, मरुतगण आदि सभी ऋणमुक्त हो जाते हैं।
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यस्य तत्प्रियसर्वस्वं राज्यवेशानसंज्ञकम् ।
विनेयः स विधेयोऽसौ सुहृदां शरणं नु यः ॥१३
अर्थ:- जिन्हें राज्य और वैभव प्रिय तो हैं, परन्तु सर्वस्व नहीं; जो स्वयं विनयी हैं, योग्य हैं, और सच्चे मित्रों के शरणदाता हैं — वही सच्चे धर्मात्मा हैं।
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यस्य दक्षिणकैलासलीलापरिणतं महः ।
चर्चाचन्दनगन्धेन सुगन्धयति मानसम् ॥१४
अर्थ:- जिनका तेज दक्षिण कैलास की लीला का ही विस्तार है, जो चर्चा और चन्दन की सुगन्धि से मन को पवित्र करता है।
🪷
कृष्णलीलाशुकस्यास्य किशोरमधिदैवतम् ।
कृष्णरत्नमिदं ब्रूते वेणुवादिमुखेन्दुना ॥१५
अर्थ:- श्रीकृष्णलीलाशुक मुनि का किशोर देव यही है — वे इसे “कृष्णरत्न” कहते हैं, जो बाँसुरी बजाने वाले मुखचन्द्र के स्वरूप में प्रकट है।
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मदक्षीय भृङ्गाङ्गनालिङ्गिताङ्गं
महद्यैवतं मत्तहस्तीन्द्रगामि ।
पदच्छायया पाटलीकृत्य नृत्यं
परिक्रीडगानं भजध्वं भजध्वम् ॥१६
अर्थ:- जो सुंदर भौंरों (गोपिकाओं) द्वारा आलिंगित हैं, जो महा देवता हैं, मतवाले गजराज के समान चलने वाले — जिनकी चरणछाया नृत्य को पाटली (लालिमा) से रंग देती है, उनके क्रीड़ा गीत को गाओ, गाओ, और भजो!
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जीयाद्देवो महाकालो जगतामेकभूषणः ।
भाग्यभाजो गता यस्य भूषणत्वं भुजङ्गमाः ॥१७
अर्थ:- महाकाल देव सदा विजयशाली हों — जो जगत का एकमात्र भूषण हैं।
जिनके लिए स्वयं सर्प भी आभूषण बन जाते हैं — ऐसे सौभाग्यशाली देव!
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वन्दामहे वयं देवं चन्द्रलेखाशिखामणिम् ।
शङ्केयं कालभङ्गेन महाकालपदं गतम् ॥१८
अर्थ:- हम उस देव को वन्दना करते हैं, जिनके शीश पर चन्द्रलेखा का मुकुट है। मैं सोचता हूँ कि काल को भी नष्ट करने वाला वही महाकाल पद है।
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देवं महाकालममी दयाम्भोधिमुपास्महे ।
रतिगौर्यो दृशा वीक्ष्य येन चोन्मीमूलितः स्मरः ? ॥१९
अर्थ:- हम उस दयाम्बुधि (करुणा के समुद्र) महाकाल की उपासना करते हैं —
जिन्हें देखकर स्वयं कामदेव (स्मर) भी गम्भीर रूप से नष्ट हो गया।
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तस्य देवस्य माहात्म्यं महाकालस्य किं ब्रुवे ।
यस्य लीलापदानानि लिह्यन्ते श्रुतिमौलिभिः ॥२०
अर्थ:- उस महाकाल देवता की महिमा क्या कहूँ, जिनकी लीला के पदों को श्रुतियाँ (वेद) तक आत्मसात करती हैं।
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महाकालस्य त ? चरित्रे नातिचित्रता ।
पञ्चाननेन मु ? निर्जितः कोऽपि कुञ्जरः ॥२१
अर्थ:- महाकाल के चरित्र में कोई भी आश्चर्य नहीं — पाँच मुखों वाले ब्रह्मा द्वारा जो अद्भुत रूप में गजेन्द्र (कुंभकर्ण या इन्द्र) पर विजय प्राप्त की।
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महाकालपदच्छायापाटलिम्ने मुहुर्नमः ।
यदेव दिङ्मुखे शङ्के ? ? ? वतो गतम् ॥२२
अर्थ:- मैं बारम्बार महाकाल के चरणों की छाया को नमन करता हूँ, जो दिशाओं को भी पाटली रंग में रंग देती है।
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महाकालपदच्छाया ? ? भ वर्षतु ।
यस्यां निर्वृतिसाम्राज्यं निर्विवादं विजृम्भते ॥२३
अर्थ:- वह महाकाल की चरणछाया सदा हम पर वर्षा करे — जिसमें निर्विवाद आत्मानन्द का साम्राज्य खिलता है।
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महाकाल महादेव मनोहर तमोहर ।
महाधार जडाधार जयं कुरु दयां कुरु ॥२४
अर्थ:- हे महाकाल! हे महादेव! मन को मोहित करने वाले और अन्धकार को हरने वाले! आप महासार हैं, जड़-जगत के भी आधार हैं — हमें विजय दीजिए, कृपा कीजिए!
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महाकालमाहात्म्यगर्भैररदभ्रैः
पश्चषैरश्चितं किश्चिदेतत् ।
दशामष्टकं धन्यधन्यां दुहानं
दिशामक्षकं दीर्धकालं पुनीयात् ॥२५
अर्थ:- यह “महाकालाष्टक”, जो महाकाल की महिमा से परिपूर्ण है, अल्प शब्दों में गूढ़ रहस्य समेटे हुए है — यह दशा, दिशा, काल, और संपूर्ण मन को शुद्ध कर देता है। जो इसे पढ़े, सुने, जपे — वह धन्य हो जाता है।
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II इति श्रीकृष्णलीला शुकमहाकवि विरचितं महाकालाष्टकं सम्पूर्णम् II
🙏🏻🌷🌻🌹🍀🌺🌸🍁💐🌷🌹🙏🏻
जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
दिनांक 7 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 7 होगा। यह अंक वरूण ग्रह से संचालित होता है। आप खुले दिल के व्यक्ति हैं। आपकी प्रवृत्ति जल की तरह होती है। जिस तरह जल अपनी राह स्वयं बना लेता है वैसे ही आप भी तमाम बाधाओं को पार कर अपनी मंजिल पाने में कामयाब होते हैं। किसी के मन की बात तुरंत समझने की आपमें दक्षता होती है। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति अपने आप में कई विशेषता लिए होते हैं। आप पैनी नजर के होते हैं।
शुभ दिनांक : 7, 16, 25
शुभ अंक : 7, 16, 25, 34
शुभ वर्ष : 2026
ईष्टदेव : भगवान शिव तथा विष्णु
शुभ रंग : सफेद, पिंक, जामुनी, मेहरून
जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :
नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए समय सुखकर रहेगा। नवीन कार्य-योजना शुरू करने से पहले केसर का लंबा तिलक लगाएं व मंदिर में पताका चढ़ाएं। आपके कार्य में तेजी का वातावरण रहेगा। आपको प्रत्येक कार्य में जुटकर ही सफलता मिलेगी। अधिकारी वर्ग का सहयोग मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय की स्थिति उत्तम रहेगी।
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन संभावनाओं पर केंद्रित रहेगा। व्यवसाय में आय निश्चित नहीं रहेगी फिर भी आकस्मिक लाभ हो सकता है। पुराने कार्यो में पैसे रुकने से मन निराश होगा। धन को लेकर किसी से बहस भी हो सकती है। वाणी एवं व्यवहार संयमित रखें। बड़बोलापन सम्मान के साथ धन हानि भी करा सकता है। आज किसी के कार्य से अपना समय व्यर्थ करेंगे। व्यवसायिक कार्यो में जल्दबाजी ना दिखाए अन्यथा जितना लाभ होना चाहिए उतना नही हो सकेगा। संध्या के समय धन सम्बन्धीत शुभ समाचार मिलेंगे। परिवार में कुछ बातों को छोड़ तालमेल बना रहेगा।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन आपकी आशाओ के विपरीत रहने वाला है आज अपनी आवश्यकताओं को कम करने का प्रयास करें सुखी रहंगे। काम-काज के सिलसिले में भाग-दौड़ अधिक रहेगी परन्तु परिणाम अल्प रहने से निराशा होगी। आर्थिक कारणों से ज्यादा परेशान रहेंगे धन लाभ स्वयं के बल पर नही हो पायेगा घर मे किसी सदस्य की अथवा स्वयं की सेहत बिगड़ सकती है। आज कोई भी जोखिम वाला कार्य करने से परहेज करें। गहरे पानी अथवा ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने से बचे। आज आप जिद्दी स्वभाव के कारण कष्ट भोगेंगे विवेक से काम लें।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन आपको विजय दिलाने वाला रहेगा। जिस भी कार्य का मन बनाएंगे उसमे बेझिझक होकर निर्णय ले सकेंगे। सफलता थोड़ी विलम्ब से परन्तु अवश्य मिलेगी। धन लाभ के लिए आज ज्यादा सरदर्दी नही लेनी पड़ेगी सहज हो जाएगा। नौकरी व्यवसाय में आपको नए कार्य सौंपे जायेगे। परिजनों की जिद पर खर्च करना पड़ेगा सुख शांति बनाने में सहायक भी रहेगा। आज आप लगभग सभी की आकांक्षाओं पर खरे ही उतरेंगे। अहम की भावना भी थोड़ी बहुत रहेगी परन्तु परोपकार स्वभाव के आगे विलुप्त हो जाएगी। परोपकार भी स्वार्थ से ही करेंगे।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन धन और धन्य दोनो की वृद्धि करेगा। परिवार के साथ ही व्यक्तिगत आवश्यकताओं की पूर्ति पर अधिक खर्च करेंगे धन की आमद रुक रुक कर होते रहने से खर्च आपको अखरेगा नही। फिर भी आज कुछ फिजूल खर्च भी होंगे जिससे बजट प्रभावित हो सकता है। कार्य क्षेत्र पर आज आप मेहनत का उचित फल पाएंगे नौकरी वाले जातक अधिकारियों के प्रिय रहेंगे व्यवसायी वर्ग भी अपनी अलग पहचान बनाने में सफल होंगे। संध्या का समय घर से बाहर आनंद से बीतेगा। घर मे भी आज आपकी हास परिहास का वातावरण मिलेगा।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज के दिन आपमे अहम की भावना रहेगी। आस पास के लोग आज आपकी आदतों से असहज महसूस करेंगे। अपनी श्रेष्ठता दिखाने का कोई मौका नही छोड़ेंगे अन्य लोगो के कार्य में टांग अड़ाने में प्रसन्नता मिलेगी परन्तु बदनामी भी होगी सहकर्मी आज आपसे असंतुष्ट ही रहेंगे। व्यवसाय में कार्य बनते बनते आपकी ही जिद के कारण अटक सकते है। लोग आज केवल स्वार्थ वश ही आपकी प्रशंशा अथवा सहयोग करेंगे। आपके अंदर भी स्वार्थ सिद्धि अथवा ले देकर कार्य बनाने की प्रवृति रहेगी। घर का वातावरण तालमेल की कमी से अस्त-व्यस्त बनेगा।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज के दिन आपको इच्छा के विपरीत कोई कार्य करना पड़ेगा जिससे मन निराशा एवं ग्लानि से भरा रहेगा। आज धर्म के प्रति आस्था अधिक बढ़ेगी घरेलू कार्यो को भी गंभीरता से करने से टकराव की स्थिति से बचेंगे। कार्य व्यवसाय आज अन्य लोगो के निर्णय पर निर्भर रहेगा। व्यवसायियों को नए अनुबंध मिल सकते है परन्तु इसके लिये उच्चाधिकारियों अथवा किसी अन्य व्यापारी की खुशामद करनी पड़ेगी। धन लाभ आज सामान्य ही रहेगा खर्च आसानी से निकाल लेंगे। परिजन आज आपकी भावनाओं की कद्र करेंगे फिर भी व्यर्थ बोलने से बचें शांति रहेगी।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज के दिन आप नियमित आय के साथ ही अतिरिक्त आय भी कमा सकेंगे अथवा अतिरिक्त आय के द्वार खुलेंगे। भविष्य के लिए नई योजनाएं बनाएंगे। व्यवसाय में आज जहां उम्मीद नही होगी वहां से भी लाभ होगा। आर्थिक समस्याओं में कमी आने से मन प्रसन्न रहेगा। काम धंधे में सहयोगियों के साथ ही परिजनों का भी महत्त्वपूर्ण सहयोग मिलेगा। नए सौदे मिलने पर धन की आमद सुनिश्चित होगी। भागीदारी के कार्य में निवेश निकट भविष्य में लाभ देगा। परिवार के सदस्यों से आज अच्छी पटेगी भले ही मन मे स्वार्थ सिद्धि की भावना रहे।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज के दिन आप अधिकांश समय असमंजस की स्थिति में रहेंगे बचते बचते भी कलह पीछा नही छोड़ेगी। किसी ना किसी कारण से घर के सदस्यों से विवाद हो सकता है। घर के बुजुर्ग भी आपसे नाराज रहेंगे। आज कोई भी कार्य परिवार के सदस्यों की सलाह के बिना ना करें अन्यथा स्थिति गंभीर बनते देर नही लगेगी। काम-धंधा भी सुस्त रहने से आर्थिक विषमताओं का सामना करना पड़ेगा। अधिकांश कार्य बनते बनते अंतिम चरण में आकर लंबित रह जाएंगे। नौकरी पेशा जातक आज विशेष सावधानी बरतें मान हानि हो सकती है। धन लाभ न्यून रहेगा।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन आपके अनुकूल रहेगा। आज आपकी किसी इच्छा के पूर्ण होने से मन दिन भर प्रसन्न रहेगा। कार्य क्षेत्र पर कुछ गलतफहमी हो सकती है लेकिन जड़ ही स्थिति स्पष्ट होने से व्यवधान आने से बचेंगे। अधिकारी एवं कर्मचारी वर्ग दोनो कार्य के प्रति गंभीर रहेंगे जिससे सफलता निश्चित मिलेगी परन्तु अधिकारी वर्ग से काम निकालने के लिए विभिन्न युक्तियां लगानी पड़ेंगी। सरकारी कार्य भी आज थोड़े प्रयास से पूर्ण हो सकते है। धन लाभ आशानुकूल रहेगा परिवार में शुभ कार्य होंगे शुभ समाचार भी मिल सकते है।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन प्रतिकूल फलदायी है सभी कार्य विशेष कर यात्रा अथवा मशीन से जुड़े कार्य सतर्क हो कर करें आकस्मिक दुर्घटना में चोटादि का भय है। कार्य क्षेत्र पर भी आज चोरी अथवा अन्य कार्यो से हानि के योग है। नौकरी पेशा जातक अथवा व्यवसायी आज के दिन पहले अधूरे कार्य पूर्ण करें इसके बाद ही अन्य काम हाथ मे ले अन्यथा कोई बड़ी गलती होने से क्षति होगी। धन लाभ मुश्किल से निर्वाह योग्य हो सकेगा। सेहत के प्रति आज लापरवाही करेंगे जिसका परिणाम आगे गंभीर हो सकता है। घर का वातावरण उथल-पुथल रहेगा।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन बीते कुछ दिनों की अपेक्षा लाभदायी रहेगा। आवश्यक कार्यो में आरम्भ में कुछ उलझने रहेंगी परन्तु धीरे धीरे इनमे सफलता मिलती जाएगी। कार्य व्यवसाय में स्थिति पक्ष में होने के लिए कुछ समय लग सकता है फिर भी धन की आमद आज निश्चित होगी। आपके विचार अन्य लोगो से एकमत ना होने पर भी लाभ दिलाने वाले रहेंगे। विपरीत लिंगीय आकर्षण अधिक रहेगा महिला अथवा पुरुष मित्रो को बाते आंख बंद कर मान लेने भले ही इससे आपको परेशानी ही हो। परिवार में शांति रहेगी।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज के दिन आप सभी कार्यो में अपनी कार्यकुशलता का परिचय देंगे। आज आपके कुछ महत्त्वपूर्ण कार्य विलम्ब से होंगे जिससे थोड़ी बेचैनी रहेगी लेकिन इंतजार का फल मीठा ही रहेगा धन लाभ आवश्यकता से अधिक एवं एक से अधिक साधनों से होगा। आज आपको खर्च करने में संकोच नही करना पड़ेगा जब भी जिस भी वस्तु का मन करेगा आसानी से प्राप्त कर लेंगे। घर एवं बाहर मिलनसार माहौल मिलने से कार्यो की थकान कम होगी। परिजन आपकी पसंद का विशेष ध्यान रखेंगे। उत्तम भोजन वाहन सुख मिलेगा।

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