🌞 ~ वैदिक पंचांग ~ 🌞
⛅दिनांक – 06 नवम्बर 2025
⛅दिन – गुरुवार
⛅विक्रम संवत् – 2082
⛅अयन – दक्षिणायण
⛅ऋतु – हेमंत
⛅मास – मार्गशीर्ष
⛅पक्ष – कृष्ण
⛅तिथि – प्रतिपदा दोपहर 02:54 तक तत्पश्चात् द्वितीया
⛅नक्षत्र – कृत्तिका रात्रि 03:28 नवम्बर 07 तक तत्पश्चात् रोहिणी
⛅योग – व्यतीपात सुबह 07:05 तक, तत्पश्चात् वरीयान् रात्रि 02:41 नवम्बर 07 तक, तत्पश्चात् परिघ
⛅राहुकाल – दोपहर 01:34 से दोपहर 02:58 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅सूर्योदय – 06:35
⛅सूर्यास्त – 05:46 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅दिशा शूल – दक्षिण दिशा में
⛅ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से प्रातः 05:44 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:48 से दोपहर 12:33 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 11:45 से रात्रि 12:36 नवम्बर 07 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅व्रत पर्व विवरण – मासिक कार्तिगाई
🌥विशेष – प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
🔹आयुर्वेद में वर्णित सद्वृत🔹
🔹आयुर्वेदीय ग्रंथ चरक संहिता में आचार्य चरकजी बताते हैं : “जो व्यक्ति स्वस्थवृत ( सद्वृत्ति आदि ) का विधिपूर्वक पालन करता है, वह १०० वर्ष की रोगरहित आयु से पृथक नहीं होता तथा सज्जन एवं साधुपुरुषों द्वारा प्रशंसित होकर इस लोक में अपना यश फैला के धर्म-अर्थ को प्राप्त कर, प्राणिमात्र का हित करने से कारण सबका बंधु बन जाता है । इस प्रकार वह पुण्यकार्य करनेवाला पुरुष मरणोपरांत भी उत्तम गति को प्राप्त करता है । इसलिए सभी मनुष्यों को सर्वदा सद्वृत का पालन करना चाहिए ।”
🔹क्या करें🔹
🔸 १] निश्चित, निर्भीक, लज्जायुक्त, बुद्धिमान, उत्साही, दक्ष, क्षमावान, धार्मिक और आस्तिक बनें ।
🔸 २] सभी प्राणियों के साथ बंधुवत व्यवहार करें ।
🔸 ३] सत्यप्रतिज्ञ, शान्ति को प्रधानता देनेवाला एवं दुसरे के कठोर वचनों को सहनेवाला बनें ।
🔸 ४] भयभीत व्यक्तियों को आश्वासन व दीन-दु:खी को सहायता देनवाले हों ।
🔸 ५] अमर्ष (असहिष्णुता, क्रोध ) का नाशक, शांतिमान और राग-द्वेष उत्पन्न करनेवाले कारणों का नाश करनेवाला होना चाहिए ।
🔸 ६] गंदे कपड़े, अपवित्र केश का त्याग करनेवाला होना चाहिए ।
🔸 ७] सिर व पैर में प्रतिदिन तेल लगायें ।
🔹क्या न करें🔹
🔸 १] अधार्मिक, पागल, पतित, भ्रूणहत्यारे और क्षुद्र तथा दुष्ट व्यक्तियों के साथ न बैठें ।
🔸 २] पापी के साथ भी पाप का व्यवहार न करें ।
🔸 ३] दूसरे की गुप्त बातें जानने की चेष्टा न करें ।
🔸 ४] चैत्य (मंदिर आदि ), झंडा, गुरु तथा आदरणीय, प्रशस्त कल्याणकारी वस्तुओं की छाया को न लाँघें ।
🔸 ५] अधिक चमक या तेज से युक्त पदार्थ, जैसे – सूर्य, अग्नि आदि को तथा अप्रिय, अपवित्र और निंदित वस्तुओं को न देखें ।
🔸 ६] बिना शरीर की थकावट दूर किये, बिना मुख धोये एवं नग्न होकर स्नान न करें ।
🔸 ७] स्नान के बाद खोले हुए वस्त्रों को पुन: न पहनें ।
🔸 ८] जिस कपड़े को पहनकर स्नान किया गया हो उसी कपड़े से सिर का स्पर्श न करें ।
🌞 ~ वैदिक पंचांग ~ 🌞
नटराज के पैरों के नीचे कौन दबा रहता है….ll

जब भगवान शिव शंकर ने त्रिपुर नामक असुर का वध किया तो उसके बाद वे खुशी से झूमने लगे। नृत्य की शुरुआत में उन्होंने अपनी भुजाएं नहीं खोली क्योंकि वे जानते थे कि उससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ जायेगा और सृष्टि का विनाश होने लगेगा। लेकिन भगवान शिव कुछ समय पश्चात नृत्य में इतने मगन हो जाते हैं कि उन्हें किसी तरह कि सुध नहीं रहती और खुल कर नृत्य करने लगते हैं जिसके साथ-साथ सृष्टि भी डगमगाने लगती है। तब उस समय संसार की रक्षा के लिये देवी पार्वती भी प्रेम और आनंद में भरकर लास्य नृत्य आरंभ करती हैं जिससे सृष्टि में संतुलन होने लगता है व भगवान शिव भी शांत होने लगते हैं। भगवान शिव को सृष्टि के प्रथम नर्तक के रूप में भी जाना जाता है।
वहीं ऐतिहासिक रूप से भगवान शिव के नटराज स्वरूप के विकास को सातवीं शताब्दी के पल्लव एवं आंठवी से दसवीं शताब्दी के बीच दक्षिण भारत के चोल साम्राज्य से जोड़ा जाता है।
वहीं योगसूत्र के जनक महर्षि पतंजलि द्वारा बनवाये गये चिदंबरम में स्थित नटराज स्वरूप की भव्य मूर्ति पुख्ता प्रमाण भी मानी जा सकती है। हालांकि महर्षि पंतजलि ने भगवान शिव के नटराज स्वरूप को योगेश्वर शिव के रूप में निरूपित करने का प्रयास किया।
अपने नटराज स्वरूप में भगवान शिव एक बौने राक्षस पर तांडव नृत्य करते हुए लगते हैं। यहां शारीरिक दिव्यांगता को बौनापन नहीं माना बल्कि बौना अज्ञान का प्रतीक है। अज्ञानी व्यक्ति का कद समाज में हमेशा बौना माना जाता है।
अज्ञान को दूर कर ज्ञान प्राप्त करने पर जो खुशी मिलती है उन्हीं भावों को शिव के इस स्वरूप में देखा जा सकता है। भगवान शिव की यह नृत्य भंगिमा आनंदम तांडवम के रूप में चर्चित है।
इसी मुद्रा में उनके बायें हाथ में अग्नि भी दिखाई देती है जो कि विनाश की प्रकृति है शिव को विनाशक माना जाता है। अपनी इस अग्नि से शिव सृष्टि में मौजूद नकारात्मक सृजन को नष्ट कर ब्रह्मा जी को पुनर्निमाण के लिये आमंत्रित करते हैं।
नृत्य की इस मुद्रा में शिव का एक पैर उठा हुआ है जो कि स्वतंत्र रूप से हमें आगे बढ़ने का संकेत करता है। उनकी इस मुद्रा में एक लय एक गति भी नजर आती है जिसका तात्पर्य है परिवर्तन या जीवन में गतिशीलता।
शिव का यह आनंदित स्वरूप बहुत व्यापक है। जितना अधिक यह विस्तृत है उतना ही अनुकरणीय भी है।
हम सभी ने भगवान शिव के नटराज रूप को कई बार देखा है। किन्तु क्या आपने ध्यान दिया है कि नटराज की प्रतिमा के पैरों के नीचे एक दानव भी दबा रहता है?
आम तौर पर देखने से हमारा ध्यान उस राक्षस की ओर नहीं जाता किन्तु नटराज की मूर्ति के दाहिने पैर के नीचे आपको वो दिख जाएगा। क्या आपको पता है कि वास्तव में वो है कौन? आइये आज इस लेख में हम उस रहस्य्मयी दानव के विषय में जानते हैं।
भगवान नटराज के पैरों के नीचे जो दानव दबा रहता है उसका नाम है “अपस्मार”। उसका एक नाम “मूयालक” भी है। अपस्मार एक बौना दानव है जिसे अज्ञानता एवं विस्मृति का जनक बताया गया है। इसे रोग का प्रतिनिधि भी माना जाता है।
आज भी मिर्गी के रोग को संस्कृत में अपस्मार ही कहते हैं। योग में “नटराजासन” नामक एक आसन है जिसे नियमित रूप से करने पर निश्चित रूप से मिर्गी के रोग से मुक्ति मिलती है।
एक कथा के अनुसार अपस्मार एक बौना राक्षस था जो स्वयं को सर्वशक्तिशाली एवं दूसरों को हीन समझता था। स्कन्द पुराण में उसे अमर बताया गया है। उसे वरदान प्राप्त था कि वो अपनी शक्तियों से किसी की भी चेतना का हरण कर सकता था।
उसे लापरवाही एवं मिर्गी के रोग का प्रतिनिधि भी माना गया है। अपनी इसी शक्ति के बल पर अपस्मार सभी को दुःख पहुँचता रहता था। उसी के प्रभाव के कारण व्यक्ति मिर्गी के रोग से ग्रसित हो जाते थे और बहुत कष्ट भोगते थे।
अपनी इस शक्ति एवं अमरता के कारण उसे अभिमान हो गया कि उसे कोई परास्त नहीं कर सकता।
एक बार अनेक ऋषि अपनी-अपनी पत्नियों के साथ हवन एवं साधना कर रहे थे।
प्रभु की माया से उन्हें अपने त्याग और सिद्धियों पर अभिमान हो गया और उन्हें लगा कि संसार केवल उन्ही की सिद्धियों पर टिका है। तभी भगवान शंकर और माता पार्वती भिक्षुक के वेश में वहाँ पधारे जिससे सभी स्त्रियाँ उन्हें प्रणाम करने के लिए यज्ञ छोड़ कर उठ गयी।
इससे उन ऋषियों को बड़ा क्रोध आया और उन्होंने अपनी सिद्धि से कई विषधर सर्पों को उत्पन्न किया और उन्हें भिक्षुक रुपी महादेव पर आक्रमण करने को कहा किन्तु भगवान शंकर ने सभी सर्पों का दलन कर दिया।
तब उन ऋषियों ने वही उपस्थित अपस्मार को उनपर आक्रमण करने को कहा। स्कन्द पुराण में ऐसा भी वर्णित है कि उन्ही साधुओं ने अपनी सिद्धियों से ही अपस्मार का सृजन किया।
अपस्मार ने दोनों पर आक्रमण किया और अपनी शक्ति से माता पार्वती को भ्रमित कर दिया और उनकी चेतना लुप्त कर दी जिससे माता अचेत हो गयी। ये देख कर भगवान शंकर अत्यंत क्रुद्ध हुए और उन्होंने १४ बार अपने डमरू का नाद किया।
उस भीषण नाद को अपस्मार सहन नहीं कर पाया और भूमि पर गिर पड़ा। तत्पश्चात उन्होंने एक आलौकिक नटराज का रूप धारण किया और अपस्मार को अपने पैरों के नीचे दबा कर नृत्य करने लगे।
नटराज रूप में भगवान शंकर ने एक पैर से उसे दबा कर तथा एक पैर उठाकर अपस्मार की सभी शक्तियों का दलन कर दिया और स्वयं संतुलित हो स्थिर हो गए। उनकी यही मुद्रा “अंजलि मुद्रा” कहलाई।
उन्होंने उसका वध इसीलिए नहीं किया क्यूंकि एक तो वो अमर था और दूसरे उसके मरने पर संसार सेउपेक्षा का लोप हो जाता जिससे किसी भी विद्या को प्राप्त करना अत्यंत सरल हो जाता। इससे विद्यार्थियों में विद्या को प्राप्त करने के प्रति सम्मान समाप्त हो जाता।
जब उन साधुओं भगवान शंकर का वो रूप देखा तो उनका अभिमान समाप्त हो गया और वे बारम्बार उनकी स्तुति करने लगे। उन्होंने उसी प्रकार अपस्मार को निष्क्रिय रखने की प्रार्थना की ताकि भविष्य में संसार में कोई उसकी शक्तियों के प्रभाव में ना आये।
नटराज रूप में महादेव ने जो १४ बार अपने डमरू का नाद किया था उसे ही आधार मान कर महर्षि पाणिनि ने १४ सूत्रों वाले रूद्राष्टाध्यायी “माहेश्वर सूत्र” की रचना की।
एक अन्य कथा के अनुसार एक बार भगवान शंकर के मन में एक आलौकिक नृत्य करने की इच्छा हुई। उसे देखने के लिए सभी देवता, यक्ष, ऋषि, गन्धर्व इत्यादि कैलाश पर एकत्र हुए। स्वयं महाकाली ने उस सभा की अध्यक्षता की। देवी सरस्वती तन्मयता से अपनी वीणा बजाने लगी, भगवान विष्णु मृदंग बजाने लगे, माता लक्ष्मी गायन करने लगी, परमपिता ब्रह्मा हाथ से ताल देने लगे, इंद्र मुरली बजाने लगे एवं अन्य सभी देवताओं ने अनेक वाद्ययंत्रों से लयबद्ध स्वर उत्पन किया। तब महादेव ने नटराज का रूप धर कर ऐसा अद्भुत नृत्य किया जैसा आज तक किसी ने नहीं देखा था। उस मनोहारी नृत्य को देख कर सभी अपनी सुध-बुध खो बैठे।
जब नृत्य समाप्त हुआ तो सभी ने एक स्वर में महादेव को साधुवाद दिया। महाकाली तो इतनी प्रसन्न हुई कि उन्होंने कहा – “प्रभु! आपके इस नृत्य से मैं इतनी प्रसन्न हूँ कि मुझे आपको वर देने की इच्छा हुई है। अतः आप मुझसे कोई वर मांग लीजिये।” तब महादेव ने कहा – “देवी! जिस प्रकार आप सभी देवगण मेरे इस नृत्य से प्रसन्न हो रहे हैं उसी प्रकार पृथ्वी के सभी प्राणी भी हों, यही मेरी इच्छा है। अब मैं तांडव से विरत होकर केवल “रास” करना चाहता हूं।”
ये सुनकर महाकाली ने सभी देवताओं को पृथ्वी पर अवतार लेने का आदेश दिया और स्वयं श्रीकृष्ण का अवतार लेकर वृन्दावन पधारी। भगवान शंकर ने राधा का अवतार लिया और फिर दोनों ने मिलकर देवदुर्लभ “महारास” किया जिससे सभी पृथ्वी वासी धन्य गए।
तो इस प्रकार अपस्मार को अपने पैरों के नीचे दबाये अभय मुद्रा में भगवान शंकर का नटराज स्वरुप ये शिक्षा देता है कि यदि हम चाहें तो अपने किसी भी दोष को स्वयं संतुलित कर उसका दलन कर सकते हैं। महादेव का नटराज स्वरुप पाप के दलन का प्रतीक तो है ही किन्तु उसके साथ-साथ आत्मसंयम एवं इच्छाशक्ति का भी प्रतीक है।
।। जय श्री नटराजन ।।
आज का राशिफल
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन आपके लिए धन-धान्य में वृद्धि लेकर आने वाला है। आपको अपनी संतान की संगति पर थोड़ा ध्यान देने की आवश्यकता है, जो लोग किसी से प्रेम करते हैं, वह अपने प्रेम का इजहार कर सकते हैं। आप अपनी किसी बड़ी से बड़ी समस्या को दूर करेंगे, जिससे आपके रिश्ते काफी बेहतर रहेंगे। घर-परिवार में चल रही कोई समस्या फिर से सिर उठाएगी, लेकिन आप उसे समाप्त करने में कामयाब रहेंगे।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन आपके लिए कोई ऊर्जावान रहने वाला है। आप अपने मन में किसी के प्रति ईष्या की भावना ना रखें। यदि आप किसी के लिए अच्छा सोचते हैं, जिससे कि आप भी पॉजिटिव रहेंगे और आपके अच्छे रवैये से आपके मित्र भी बन सकते हैं। आप अपने घर-परिवार में जरूरत की चीजों की खरीदारी पर पूरा ध्यान देंगे। आपको किसी को बिना मांगे सलाह देने से बचना होगा और माता-पिता के आशीर्वाद से आपका कोई अच्छा मुकाम हासिल होगा।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन आपके आपके लिए सेहत के लिहाज से कमजोर रहने वाला है। आपको कोई आंखों से संबंधित समस्या हो सकती है और आपका खर्चों मे बढ़ोतरी होने से आपका मन परेशान रहेगा। प्रेम व सहयोग की भावना आपके मन में बनी रहेगी। आपको अपनी संतान की पढ़ाई-लिखाई को लेकर कुछ रूपयों का इंतजाम करना पड़ सकता है। आपका कोई मित्र आपके लिए कोई उपहार भी लेकर आ सकता है। आपकी कोई पुरानी गलती से पर्दा उठ सकता है।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन आपके लिए आय को बढ़ाने वाला रहेगा। आपको पुराने काम से अच्छा लाभ मिलेगा और धन को लेकर यदि कोई काम रुका हुआ था, तो उसे भी आप पूरा करने की पूरी कोशिश करेंगे। आप अपने किसी काम को लेकर लापरवाही बिल्कुल ना बरतें, नहीं तो बाद में इसमें आपकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आपको अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति पर पूरा ध्यान देना होगा। किसी पुराने मित्र से लंबे समय बाद मिलकर खुशी होगी।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन आपके लिए आर्थिक दृष्टिकोण से अच्छा रहने वाला है। आपके रुके हुए काम आसानी से पूरे होंगे और किसी कोर्ट-कचहरी से संबंधित मामले से भी पीछा छूटेगा, लेकिन आपको भागदौड़ अधिक रहेगी, लेकिन फिर भी आप उससे घबराएंगे नहीं और आपकी किसी बात को लेकर पिताजी आपसे नाराज हो सकते हैं। यदि ऐसा हो, तो आप उसे मनाने की पूरी कोशिश करें। आप धार्मिक कामों पर पूरा ध्यान देंगे।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन आपके लिए भाग्य के दृष्टिकोण से अच्छा रहने वाला है। तरक्की की राह में आगे बढ़ेंगे। रोजगार को लेकर परेशान चल रहे लोगों को भी कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती हैं। आपको कार्यक्षेत्र में कोई जिम्मेदारी भरा काम मिलेगा, लेकिन फिर भी आप उसे आसानी से कर सकेंगे। आपको किसी सहयोगी की कोई बात बुरी लग सकती है। विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा के मार्ग प्रशस्थ होंगे और आपको अपने शारीरिक समस्याओं को भी नजरंदाज करने से बचना होगा।
तुला⚖ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन आपके लिए अनुकूल रहने वाला है। आपका बिजनेस पहले से बेहतर चलेगा। आपको अपनी किसी पुरानी गलती से पर्दा उठ सकता है। आपको अपने आसपास रह रहे लोगों को पहचानकर चलने की आवश्यकता है। किसी विरोधी की बातों में आने से बचें। आपकी किसी बात को लेकर जीवनसाथी से आपकी कहासुनी हो सकती हैं। आप उन्हें कहीं घूमाने लेकर जाने की प्लानिंग कर सकते हैं।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन आपके लिए किसी नयी नौकरी के लिए बेहतर रहेगा। यदि आपकी कोई प्रिय वस्तु खो गयी थी, तो उसकी आपको मिलने की पूरी संभावना है। आपका अपनी किसी मन की इच्छा की पूर्ति होने से आपका मन काफी खुश रहेगा। आपको कोई विरोधी आपको परेशान करने की कोशिश करेगा और आपको अपने आसपास रह रहे लोगों को पहचानने की आवश्यकता है, क्योंकि कुछ आपके मित्र के रूप में आपके शत्रु हो सकते हैं।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन आपके लिए धन संबंधित मामले में कुछ कमजोर रहेगा, क्योंकि आपका धन कहीं फंस सकता है, इसलिए आपको सोच समझकर लाभ के चक्कर में पड़ने से बचना होगा। आप अपने खर्चों को लेकर परेशानी में आ सकते हैं, इसलिए आपको किसी को कर्ज थोड़ा सोच समझकर देना होगा। सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे लोगों को कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है और आपको किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करने का मौका मिले, तो अवश्य करें।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन आपके लिए बढ़िया रहने वाला है। आपको कुछ नए कामों से एक पहचान मिलेगी। राजनीति में भी आपकी अच्छी छाप रहेगी, लेकिन आप शीघ्रता और भावुकता में कोई निर्णय लेने से बचें। व्यापार में आपको मनमुताबिक लाभ मिलेंगे। आपकी संतान आपकी उम्मीदों खरी उतरेगी और आपको कार्यक्षेत्र में अच्छे काम के लिए कोई पुरस्कार मिल सकता है। आप अपनी इन्कम को बढ़ाने की कोशिश से बिल्कुल पीछे न हटें।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन आपके लिए किसी नए मकान, दुकान आदि की खरीदारी के लिए अच्छा रहने वाला है। आपको अपने घरेलू कामों को निपटाना होगा। आपको व्यापार में व्याकाग्रता बढ़ेगी। आपको यदि किसी से कोई बात बोले, तो बहुत ही सोच समझ कर बोले। परिवार में किसी नये मेहमान का आगमन हो सकता है। आपको किसी कोर्ट कचहरी से संबंधित मामले को लेकर टेंशन बनी रहेगी, इसलिए आपको धन को लेकर कोई डिसीजन लेने से बचना होगा।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन आपके लिए हौसला लेकर आने वाला है और आपका रोजगार भी बढ़िया चलेगा। आपको किसी नेत्र संबंधित समस्या को लेकर भागदौड़ बनी रहेगी। परिवार में भी कुछ समस्याएं फिर से सिर उठाएंगी। जो आपकी टेंशन को बढ़ा सकती हैं। आपको किसी कोर्ट कचहरी से संबंधित मामले को लेकर टेंशन बनी रहेगी और आप किसी पुराने विरोधी से यदि काम को लेकर कोई सलाह लेंगे, तो वह भी आपको आसानी से मिल जाएगी।

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