Vaidik Panchang 06012026 Rashifal Samadhan

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 06 जनवरी 2026*
🌤️ *दिन – मंगलवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शिशिर ऋतु*
🌤️ *मास – माघ (गुजरात-महाराष्ट्र पौष)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – तृतीया सुबह 08:01 तक तत्पश्चात चतुर्थी*
🌤️ *नक्षत्र – अश्लेशा दोपहर 12:17 तक तत्पश्चात मघा*
🌤️ *योग – प्रीति रात्रि 08:21 तक तत्पश्चात आयुष्मान*
🌤️ *राहुकाल – शाम 03:28 से शाम 04:50 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 07:18*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:10*
👉 *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – सकट चौथ, संकष्ट चतुर्थी, (चन्द्रोदय: रात्रि 09:07), अंगारकी-मंगलवारी चतुर्थी (सुबह 08:01 से 07 जनवरी सुबह 06:52 तक ),चतुर्थी क्षय तिथि*
💥 *विशेष – तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
          🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
🌷 *माघ मास* 🌷
🙏🏻 *माघ मास हिंदू पञ्चाङ्ग का 11 वां चंद्रमास है। इस मास में मघा नक्षत्र युक्त पूर्णिमा होने के कारण इसका नाम माघ रखा गया (मघायुक्ता पौर्णमासी यत्र मासे सः)।*
➡ *उत्तर भारत हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार माघ मास प्रारंभ हो चुका है।*
👉🏻 *माघ मास में श्रवण और मूल शून्य नक्षत्र हैं इनमें कार्य करने से धन का नाश होता है।*
🙏🏻 *माघ मास में कृष्ण पक्ष की पंचमी व शुक्ल पक्ष की षष्ठी मास शून्य तिथियां होती हैं।*
➡ *इन तिथियों शुभ काम नहीं करना चाहिए।*
🙏🏻 *महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 106 के अनुसार*
*माघं तु नियतो मासमेकभक्तेन य: क्षिपेत्।*
*श्रीमत्कुले ज्ञातिमध्ये स महत्त्वं प्रपद्यते।।*
👉🏻 *अर्थात जो माघ मास में नियमपूर्वक एक समय भोजन करता है, वह धनवान कुल में जन्म लेकर अपने कुटुम्बजनों में महत्व को प्राप्त होता है।*
➡ *माघ में मूली का त्याग करना चाहिए। देवता और पितर को भी मूली अर्पण न करें।*
🙏🏻 *श्री हरि नारायण को माघ मास अत्यंत प्रिय है। वस्तुत: यह मास प्रातः स्नान (माघ स्नान), कल्पवास, पूजा-जप-तप, अनुष्ठान, भगवद्भक्ति, साधु-संतों की कृपा प्राप्त करने का उत्तम मास है। माघ मास की विशिष्टता का वर्णन करते हुए महामुनि वशिष्ठ ने कहा है, ‘जिस प्रकार चंद्रमा को देखकर कमलिनी तथा सूर्य को देखकर कमल प्रस्फुटित और पल्लवित होता है, उसी प्रकार माघ मास में साधु-संतों, महर्षियों के सानिध्य से मानव बुद्धि पुष्पित, पल्लवित और प्रफुल्लित होती है। यानी प्राणी को आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है।*
🙏🏻 *पद्मपुराण, उत्तरपर्व में कहा गया है*
*ग्रहाणां च यथा सूर्यो नक्षत्राणां यथा शशी*
*मासानां च तथा माघः श्रेष्ठः सर्वेषु कर्मसु*
👉🏻 *अर्थात जैसे ग्रहों में सूर्य और नक्षत्रों में चन्द्रमा श्रेष्ठ है, उसी प्रकार महीनों में माघ मास श्रेष्ठ है।*
🙏🏻 *पद्मपुराण में कहा गया है की माघ मास आने पर नाना प्रकार के फूलों से भगवान की पूजा करें। उस समय कपूर से तथा नाना प्रकार के नैवेद्य एवं लड्डूओं से पूजा होनी चाहिए। इस प्रकार देवदेवेश्वर के पूजित होने पर मनुष्य निश्चय ही मनोवाञ्छित फलों को प्राप्त कर लेता है।*
🙏🏻 *पद्मपुराण में वसिष्ठजी कहते हैं कि वैशाख में जल और अन्न का दान उत्तम है, कार्तिक में तपस्या और पूजा की प्रधानता है तथा माघ में जप, होम और दान ये तीन बातें विशेष हैं। जिन लोगों ने माघ में प्रातः स्नान, नाना प्रकार का दान और भगवान विष्णु का स्तोत्र पाठ किया है, वे दिव्यधाम में आनन्दपूर्वक निवास करते हैं।*
🌷 *माघ मास में प्रातःकाल स्नान का विशेष महत्व है*
*व्रतैर्दानैस्तपोभिश्च न तथा प्रीयते हरि:। माघमज्जनमात्रेण यथा प्रीणाति केशव:।।*
*प्रीतये वासुदेवस्य सर्वपापापनुक्तये। माघस्नानं प्रकुर्वीत स्वर्ग लाभाय मानव:।।*
👉🏻 *पूरे माघ मास में प्रयाग में निवास तथा प्रयाग में त्रिवेणी संगम में स्नान बहुत भाग्यशाली मनुष्य को प्राप्त होता है ।*
🙏🏻 *स्कन्दपुराण वैष्णवखण्ड के अनुसार*
*प्रयागो माघमासे तु पुष्करं कार्तिके तथा ।।*
*अवन्ती माधवे मासि हन्यात्पापं युगार्जितम् ।।*
👉🏻 *माघ मास में प्रयाग, कार्तिक में पुष्कर और वैशाख मास में अवन्तीपुरी (उज्जैन) – ये एक युगतक उपार्जित किये हुए पापों का नाश कर डालते हैं।*
🙏🏻 *ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार*
*जो व्रती पुरुष चैत्र अथवा माघ मास में शंकर की पूजा करता है तथा बेंत लेकर उनके सम्मुख रात-दिन भक्ति पूर्वक नृत्य करने में तत्पर रहता है, वह चाहे एक मास, आधा मास, दस दिन, सात दिन अथवा दो ही दिन या एक ही दिन ऐसा क्यों न करे, उसे दिन की संख्या के बराबर युगों तक भगवान शिव के लोक में प्रतिष्ठा प्राप्त हो जाती है।*
👉🏻 *माघ में तिलों का दान जरूर जरूर करना चाहिए। विशेषतः तिलों से भरकर ताम्बे का पात्र दान देना चाहिए।*
🙏🏻 *महाभारत अनुशासन पर्व के 66वें अध्याय के अनुसार*
*माघ मासे तिलान् यस्तु ब्राह्मणेभ्यः प्रयच्छति। सर्वसत्वसमकीर्णं नरकं स न पश्यति॥*
👉🏻 *जो माघ मास में ब्राह्मणों को तिल दान करता है, वह समस्त जन्तुओं से भरे हुए नरक का दर्शन नहीं करता।*
🙏🏻 *माघ मास के शुक्ल पक्ष तृतीया को मन्वंतर तिथि कहते है उस दिन जो कुछ दान दिया जाता है उसका फल अक्षय बताया गया है ( पद्मपुराण – सृष्टि खंड )*
         🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

क्या आप को पता है कि #हनुमान_जी_चारो_युगों_में थे और आज भी जीवित हैं ?
चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥
संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
अंतकाल रघुवरपुर जाई, जहां जन्म हरिभक्त कहाई॥
और देवता चित्त ना धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई॥
चारों युग में हनुमानजी के ही परताप से जगत में उजियारा है। हनुमान को छोड़कर और किसी देवी-देवता में चित्त धरने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आज भी हनुमानजी हमारे बीच इस धरती पर सशरीर मौजूद हैं।हनुमान इस कलियुग में सबसे ज्यादा जाग्रत और साक्षात हैं। कलियुग में हनुमान की भक्ति ही लोगों को दुख और संकट से बचाने में सक्षम है। बहुत से लोग किसी बाबा, देवी-देवता, ज्योतिष और तांत्रिकों के चक्कर में भटकते रहते हैं, क्योंकि वे हनुमान की भक्ति-शक्ति को नहीं पहचानते। ऐसे भटके हुए लोगों का राम ही भला करे।
मारुति नंदन सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग में कब-कब कहां-कहां और किस-किस स्वरूप में किन लोगों के समक्ष प्रकट हुए, यह जानते हैं !
#सतयुग :=आप सोच रहे होंगे हनुमान तो त्रेतायुग में हुए फिर सतयुग में वे कैसे हो सकते हैं? इसका जवाब है कि इस युग में पवनपुत्र भगवान श्रीशंकर के स्वरूप से विश्व में स्थित थे, तभी तो उन्हें शिवस्वरूप (आठ रुद्रावतारों में से एक) लिखा और कहा गया है। तभी तो गोस्वामी तुलसीदासजी ने हनुमान चालीसा में उन्हें शंकर सुवन केसरी नंदन कहकर संबोधित किया है। में जब-जब श्रीराम ने हनुमानजी को गले से लगाया, तब-तब भगवान शंकर अति प्रसन्न हुए हैं। सतयुग में भोलेनाथ पार्वती से उनके स्वरूप का वर्णन करते हैं और वे उसी युग में पार्वती से दूर रहकर ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हैं। अत: यह प्रमाणित है कि श्रीहनुमानजी सतयुग में शिवरूप में थे और शिव तो अजर-अमर हैं।
#त्रेतायुग :=त्रेतायुग में तो पवनपुत्र हनुमान ने केसरी नंदन के रूप में जन्म लिया और वे राम के भक्त बनकर उनके साथ छाया की तरह रहे। वाल्मीकि ‘रामायण’ में हनुमानजी के संपूर्ण चरित्र का उल्लेख मिलता है। हनुमानजी के त्रेतायुग में होने के हजारों प्रमाण मिलते हैं।
सभी हैं हनुमान के ऋणी : श्रीराम, भरत, सीता, सुग्रीव, विभीषण और संपूर्ण कपि मंडल, कोई भी उनके ऋण से मुक्त अर्थात उऋण नहीं हो सकता। इस प्रकार त्रेतायुग में तो हनुमानजी साक्षात विराजमान हैं। इनके बिना संपूर्ण चरित्र पूर्ण होता ही नहीं।
ऐतिहासिक प्रमाण👉 वानर समान एक विलक्षण जाति हनुमान विषयक रामायण के समस्त वर्णन को मनन करने पर यह सिद्घांत स्थिर होता है कि आज से 9 लाख वर्ष पूर्व एक ऐसी विलक्षण वानर जाति भी भारतवर्ष में विद्यमान थी, जो आज से 15 हजार वर्ष पूर्व लुप्त हो गई। बच गए बस हनुमान!वाल्मीकि रामायण के उत्तरकाण्ड के चालीसवें अध्याय में इस बारे में प्रकाश डाला गया है। लंका विजय कर अयोध्या लौटने पर जब श्रीराम उन्हें युद्घ में सहायता देने वाले विभीषण, सुग्रीव, अंगद आदि को कृतज्ञतास्वरूप उपहार देते हैं तो हनुमानजी श्रीराम से याचना करते हैं- यावद् रामकथा वीर चरिष्यति महीतले। तावच्छरीरे वत्स्युन्तु प्राणामम न संशय:।।अर्थात : ‘हे वीर श्रीराम। इस पृथ्वी पर जब तक रामकथा प्रचलित रहे, तब तक निस्संदेह मेरे प्राण इस शरीर में बसे रहे।’ इस पर श्रीराम उन्हें आशीर्वाद देते हैं- ‘एवमेतत् कपिश्रेष्ठ भविता नात्र संशय:। चरिष्यति कथा यावदेषा लोके च मामिका तावत् ते भविता कीर्ति: शरीरे प्यवस्तथा। लोकाहि यावत्स्थास्यन्ति तावत् स्थास्यन्ति में कथा।’अर्थात् : ‘हे कपिश्रेष्ठ, ऐसा ही होगा, इसमें संदेह नहीं है। संसार में मेरी कथा जब तक प्रचलित रहेगी, तब तक तुम्हारी कीर्ति अमिट रहेगी और तुम्हारे शरीर में प्राण भी रहेंगे ही। जब तक ये लोक बने रहेंगे, तब तक मेरी कथाएं भी स्थिर रहेंगी।’
#द्वापरयुग :=द्वापर युग में हनुमानजी भीम की परीक्षा लेते हैं। इसका बड़ा ही सुंदर प्रसंग है। महाभारत में प्रसंग हैं कि भीम उनकी पूंछ को मार्ग से हटाने के लिए कहते हैं तो हनुमानजी कहते हैं कि तुम ही हटा लो, लेकिन भीम अपनी पूरी ताकत लगाकर भी उनकी पूछ नहीं हटा पाते हैं।दूसरा प्रसंग अर्जुन से जुड़ा है। अर्जुन के रथ पर हनुमान के विराजित होने के पीछे भी कारण है। एक बार किसी तीर्थ में अर्जुन का हनुमानजी से मिलन हो जाता है। इस पहली मुलाकात में हनुमानजी से अर्जुन ने कहा- अरे राम और रावण के युद्घ के समय तो आप थे? हनुमानजी- हां। तभी अर्जुन ने कहा- आपके स्वामी श्रीराम तो बड़े ही श्रेष्ठ धनुषधारी थे तो फिर उन्होंने समुद्र पार जाने के लिए पत्थरों का सेतु बनवाने की क्या आवश्यकता थी? यदि मैं वहां उपस्थित होता तो समुद्र पर बाणों का सेतु बना देता जिस पर चढ़कर आपका पूरा वानर दल समुद्र पार कर लेता।इस पर हनुमानजी ने कहा- असंभव, बाणों का सेतु वहां पर कोई काम नहीं कर पाता। हमारा यदि एक भी वानर चढ़ता तो बाणों का सेतु छिन्न-भिन्न हो जाता। अर्जुन ने कहा- नहीं, देखो ये सामने सरोवर है, मैं उस पर बाणों का एक सेतु बनाता हूं। आप इस पर चढ़कर सरोवर को आसानी से पार कर लेंगे। हनुमानजी ने कहा- असंभव। तब अर्जुन ने कहा- यदि आपके चलने से सेतु टूट जाएगा तो मैं अग्नि में प्रवेश कर जाऊंगा और यदि नहीं टूटता है तो आपको अग्नि में प्रवेश करना पड़ेगा। हनुमान ने कहा- मुझे स्वीकार है। मेरे दो चरण ही इसने झेल लिए तो मैं हार स्वीकार कर लूंगा।तब अर्जुन ने अपने प्रचंड बाणों से सेतु तैयार कर दिया। जब तक सेतु बनकर तैयार नहीं हुआ तब तक तो हनुमान अपने लघु रूप में ही रहे, लेकिन जैसे ही सेतु तैयार हुआ हनुमान ने विराट रूप धारण कर लिया। हनुमान राम का स्मरण करते हुए उस बाणों के सेतु पर चढ़ गए। पहला पग रखते ही सेतु सारा का सारा डगमगाने लगा, दूसरा पैर रखते ही चरमराया और तीसरा पैर रखते ही सरोवर के जल में खून ही खून हो गया।तभी श्रीहनुमानजी सेतु से नीचे उतर आए और अर्जुन से कहा कि अग्नि तैयार करो। अग्नि प्रज्वलित हुई और जैसे ही हनुमान अग्नि में कूदने चले वैसे भगवान श्रीकृष्ण प्रकट हो गए और बोले ठहरो! तभी अर्जुन और हनुमान ने उन्हें प्रणाम किया।भगवान ने सारा प्रसंग जानने के बाद कहा- हे हनुमान, आपका तीसरा पग सेतु पर पड़ा, उस समय मैं कछुआ बनकर सेतु के नीचे लेटा हुआ था। आपकी शक्ति से आपके पैर रखते ही मेरे कछुआ रूप से रक्त निकल गया। यह सेतु टूट तो पहले ही पग में जाता यदि में कछुआ रूप में नहीं होता तो।यह सुनकर हनुमान को काफी कष्ट हुआ और उन्होंने क्षमा मांगी। मैं तो बड़ा अपराधी निकला आपकी पीठ पर मैंने पैर रख दिया। मेरा ये अपराध कैसे दूर होगा भगवन्? तब कृष्ण ने कहा, ये सब मेरी इच्छा से हुआ है। आप मन खिन्न मत करो और मेरी इच्छा है कि तुम अर्जुन के रथ की ध्वजा पर स्थान ग्रहण करो।इसलिए द्वापर में श्रीहनुमान महाभारत के युद्ध में अर्जुन के रथ के ऊपर ध्वजा लिए बैठे रहते हैं। ये द्वापर का प्रसंग था।
#कलियुग👉 हनुमानजी कलियुग में गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं, ऐसा श्रीमद् भागवत में वर्णन आता है!
”यत्र-यत्र रघुनाथ कीर्तन तत्र कृत मस्तकान्जलि।
वाष्प वारि परिपूर्ण लोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तक॥”
अर्थात: कलियुग में जहां-जहां भगवान श्रीराम की कथा-कीर्तन इत्यादि होते हैं, वहां हनुमानजी गुप्त रूप से विराजमान रहते हैं। सीताजी के वचनों के अनुसार- अजर-अमर गुन निधि सुत होऊ।। करहु बहुत रघुनायक छोऊ॥
यदि मनुष्य पूर्ण श्रद्घा और विश्वास से इनका आश्रय ग्रहण कर लें तो फिर तुलसीदासजी की भांति उसे भी हनुमान और राम-दर्शन होने में देर नहीं लगती।हनुमानजी के जीवित होने के प्रमाण समय-समय पर प्राप्त होते रहे हैं, जो इस बात को प्रमाणित करता है कि हनुमानजी आज भी जीवित हैं। 16वीं सदी के महान संत कवि तुलसीदासजी को हनुमान की कृपा से रामजी के दर्शन प्राप्त हुए। कथा है कि हनुमानजी ने तुलसीदासजी से कहा था कि राम और लक्ष्मण चित्रकूट नियमित आते रहते हैं। मैं वृक्ष पर तोता बनकर बैठा रहूंगा, जब राम और लक्ष्मण आएंगे मैं आपको संकेत दे दूंगा।हनुमानजी की आज्ञा के अनुसार तुलसीदासजी चित्रकूट घाट पर बैठ गए और सभी आने- जाने वालों को चंदन लगाने लगे। राम और लक्ष्मण जब आए तो हनुमानजी गाने लगे ‘चित्रकूट के घाट पै, भई संतन के भीर। तुलसीदास चंदन घिसै, तिलक देत रघुबीर।।’ हनुमान के यह वचन सुनते ही तुलसीदास प्रभु राम और लक्ष्मण को निहारने लगे।’ इस प्रकार तुलसीदासजी को रामजी के दर्शन हुए।
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🌷🙏🏻
🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
आपका जन्मदिन: 6 जनवरी

दिनांक 6 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 6 होगा। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति आकर्षक, विनोदी, कलाप्रेमी होते हैं। आपमें गजब का आत्मविश्वास है। इसी आत्मविश्वास के कारण आप किसी भी परिस्थिति में डगमगाते नहीं है। आपको सुगंध का शौक होगा। आप अपनी महत्वाकांक्षा के प्रति गंभीर होते हैं। 6 मूलांक शुक्र ग्रह द्वारा संचालित होता है। अत: शुक्र से प्रभावित बुराई भी आपमें पाई जा सकती है। जैसे स्त्री जाति के प्रति आपमें सहज झुकाव होगा। अगर आप स्त्री हैं तो पुरुषों के प्रति आपकी दिलचस्पी होगी। लेकिन आप दिल के बुरे नहीं है।

आपके लिए खास

शुभ दिनांक : 6, 15, 24

शुभ अंक : 6, 15, 24, 33, 42, 51, 69, 78

शुभ वर्ष :, 2028

ईष्टदेव : मां सरस्वती, महालक्ष्मी

शुभ रंग : क्रीम, सफेद, लाल, बैंगनी

आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
करियर: जो विद्यार्थी सीए की परीक्षा देंगे उनके लिए शुभ रहेगा। व्यापार-व्यवसाय में भी सफलता रहेगी। नौकरीपेशा व्यक्ति अपने परिश्रम के बल पर उन्नति के हकदार होंगे। बैंक परीक्षाओं में भी सफलता अर्जित करेंगे।

परिवार: विवाह के योग भी बनेंगे। स्त्री पक्ष का सहयोग मिलने से प्रसन्नता रहेगी। दाम्पत्य जीवन में मिली जुली स्थिति रहेगी।

इस बात का रखें ध्यान: आर्थिक मामलों में सभंलकर चलना होगा।

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🌹आज का राशिफल 🌹
*दिनांक : 06 जनवरी 2026*

मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज दिन के कुछ भाग को छोड़ शेष समय अशुभ फलदायी रहेगा। दिन के आरम्भ से ही विवाद का भय रहेगा आज किसी की बातों में ना आए अन्यथा दांपत्यजीवन में कलह-क्लेश हो सकता है। कार्य क्षेत्र पर भी स्वयं के निर्णय से ही कार्य करने में लाभ मिल सकेगा सहकर्मियों की लत लतीफी कार्यो में विलंब के साथ गरमा गरमी कराएगी। भागीदारी के कार्यो से आज हानि की संभावना है। आर्थिक रूप से दिन सामान्य से कम फलदायक रहेगा। संतान की मनमानी से मन विचलित होगा। आज का दिन धैर्य से बिताने में ही भलाई है। शरीर के अंगों में दर्द एवं अकड़न की शिकायत रह सकती है।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आपका आज का दिन मिश्रित फलदायी रहेगा। दिन के पूर्वार्ध में समाज के श्रेष्ठ लोगो से पहचान होगी परन्तु घर के ही किसी सदस्य को इससे परेशानी होसकती है फिर भी निकट भविष्य को देखते हुए लाभदायक रहेगी। आज कार्यक्षेत्र में अधिकारियों की कृपा दृष्टि रहेगी आज इनका कोई भेद पता लगने से नरम व्यवहार करेंगे। शेयर मार्केट एवं सट्टे में निवेश से आकस्मिक लाभ हो सकता है। वैसे भी आज मध्यान बाद आकस्मिक धनलाभ की संभावना अधिक है। क्रोधी स्वभाव के कारण परिवारजनों के साथ व्यर्थ विवाद होने से रंग में भंग की स्थिति बनेगी। लंबी दूरी की यात्रा के प्रसंग बनेंगे। अग्नि से सावधानी रखें।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन आपके लिए उतार चढ़ाव से भरा रहेगा। दिन के आरम्भ से ही किसी अन्य के काम से भाग दौड़ करनी पड़ेगी फिर भी तुरंत कोई निष्कर्ष ना निकलने पर मायूस होंगे। आज अन्य लोगो की जगह अपने काम पर ध्यान दें अन्यथा बाद में पछताना पड़ेगा। नौजरी पेशाओ को कार्य क्षेत्र में प्रतिकूल परिस्थिति का सामना करना पड़ेगा आज अपने काम से काम रखें। अर्थ लाभ के लिए आज विशेष परिश्रम करने पर ही आशा से कुछ कम सफलता मिलेगी। व्यर्थ की यात्रा से थकान होगी। सर्जरी अथवा बीमारी पर खर्च होने की सम्भवना है। पारिवारिक वातावरण भी अस्त-व्यस्त रहेगा।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आपका आज का दिन आनंददायक रहेगा। आज के दिन आपका बुद्धि विवेक जाग्रत रहेगा प्रत्येक कार्य सोच समझ कर ही करेंगे जिसके परिणाम स्वरूप आज हानि अथवा धोखा होने की संभावना ना के बराबर रहेगी। आज शारीरिक एवं मानसिक रूप से भी चुस्त रहेंगे। व्यापार अच्छा चलने से आर्थिक स्थिति सुधरेगी फिर भी आज आर्थिक विषयो में बड़ो की सलाह लेकर कार्य करें। किसी इच्छित कार्य के पूर्ण होने से ख़ुशी होगी। बेरोजगारों को थोड़ा प्रयास करने पर रोजगार मिल सकता है। मित्रों अथवा परिजनों के साथ बाहर घूमने के प्रसंग बन सकते है। रक्तचाप अथवा अजीर्ण की शिकायत हो सकती है।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन प्रतिकूल रहने से लगभग सभी कामो में अड़चने आएंगी। पूर्व में किये निवेश का धन फंसने अथवा हानि होने से मानसिक व्याकुलता रहेगी। नए अनुबंध सोच-समझ कर हाथ मे लें। आज आत्मविश्वाश और सहयोग की कमी रहने से कार्य हानि की संभावना अधिक है। आर्थिक लेन-देन आज ना करें विशेषकर आज किसी से उधार लेने दें से बचे वापसी में परेशानी आएगी। धार्मिक कार्यों एवं सामाजिक समारोह में धन एवं समय लगेगा। परिवार का वातावरण उदासीन रहेगा छोटी छोटी बातों पर परिजनों के साथ मतभेद उजागर होंगे। सेहत में पल पल में नरम गरम रहेगी।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन आपको अनुकूल फल देगा। आज आपका स्वभाव एवं व्यवहार बनावटी रहेगा दिखावा अधिक पसंद करेंगे। छोटी छोटी उपलब्धियों को भी बड़ा चढ़ा कर पेश करेंगे समाज में दिखावे की प्रतिष्ठा बढ़ने से दिनभर मानसिक रूप से प्रसन्न रहेंगे। आरोग्य अच्छा रहेगा घर के लोग डरे सहमे से रहेंगे जिसके कारण शांति का वातावरण छाया रहेगा। आज बैठे बिठाए ही कार्य क्षेत्र पर नई योजनाएं हाथ में आएगी फिर भी आज आर्थिक लाभ के लिये लंबा इंतजार करना पड़ेगा। परिवार जनों के साथ आपसी संबंधों को महत्व देने से कई समस्याओं का समाधान स्वतः ही हो जाएगा। संतान का सुख संतोष प्रदान करेगा। रक्त अथवा पित्त संबंधित शिकायत हो सकती है। मादक एवं तले पदार्थो का परहेज रखें।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन शुभफलदायी है। आज आपको प्रातः काल से ही धन लाभ की संभावनाएं बनने लगेंगी लेकिन टलते टलते मध्यान के आस पाँच ही हो पाएगी। व्यापारियों को दैनिक लाभ के अतिरिक्त भी आय के अवसर मिलेंगे। नए अनुबंध मिलने से भविष्य की आर्थिक योजनाएं बनाएंगे लेकिन अधूरे कार्य पूर्ण होंने पर ही नयी योजनाएं बनाना शुभ रहेगा। आज आप आध्यत्म एवं गूढ़ रहस्यों में भी रुचि लेंगे। परिवार के बुजुर्गो का सहयोग मिलेगा। दाम्पत्य जीवन में प्रेम बढ़ेगा। संतान से किसी मामूली बात पर मतभेद हो सकता है। गले अथवा मल मूत्र संबंधित विकार होने की संभावना है।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज आपका दिन का अधिकांश भाग कार्य करते हुए भी आनंद, मनोरंजन में बीतेगा। कार्य क्षेत्र पर कई दिनों से बन रही बाधाएं दूर होने से नए प्रयोग अपनाएंगे फिर भी आज नये कार्यो का आरम्भ करने के लिए दिन शुभ नही है। व्यक्तिगत रूप से नौकरी करने वालों एवं व्यावसायिकों के लिए दिन अच्छा है धन लाभ की तुलना में सम्मान अधिक मिलेगा। दाम्पत्य जीवन का सुख भी आज छोटी मोटी बातों को छोड़ उत्तम रहेगा। खर्च अधिक रह सकते है इन पर नियंत्रण करे अन्यथा कर्ज लेना पड़ सकता है। उत्तम भोजन वाहन पर्यटन सुख मिलेगा। खान पान संतुलित रखें अन्यथा पेट खराब होने पर अन्य रोगों को निमंत्रण देगा।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आपका आज का दिन अशुभ फलदायी रहेगा। पूर्व में बरती लापरवाही एवं असंयमित खान-पान एवं कार्य की अधिकता के कारण सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। सर पेट, कमर, घुटनो की समस्या रहने से बेचैनी रहेगी कार्य क्षेत्र पर भी इनका असर देखने को मिलेगा दिनचर्या आज धीमी ही रहेगी। धन अथवा किसी प्रियजन संबंधित अशुभ समचार मिलने से  मन चिंताग्रस्त रहेगा। आज अपनी गलतियों का दोष किसी अन्य पर थोपने पर निजी सम्बंधियों से अनबन भी हो सकती है। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन लाभ की तुलना में अधिक खर्च वाला रहेगा। लोहे के औजार एवं अग्नि के कार्यो में विशेष सावधानी बरतें।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज आप का दिन लाभदायक सिद्ध होगा। आज भौतिक सुख के साधनो में वृद्धि होगी इसके ऊपर खर्च भी बजट से ज्यादा होगा फिर भी आज व्यापार में उन्नति के साथ-साथ पुराने रुके धन की उगाही होने पर खर्च अखरेगा नही। आज आप अपनी कल्पना को साकार रूप देने में सफल रहेंगे। लेकिन प्रेम प्रसंगों से बचकर रहे धन के साथ मान हानि भी हो सकती है। मध्यान पश्चात का समय कार्य क्षेत्र पर अलग अलग राय बनने से भ्रम में डालेगा लेकिन तुरंत निर्णय लेने की क्षमता भ्रम की स्थिति से बाहर निकाल लेगी। संध्या बाद कोई मनइच्छित कार्य होने से प्रसन्न रहेंगे। पेट मे जलन गैस एवं आँख संबंधित समस्या बन सकती है।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन आपको मिला-जुला फल देगा। आज दिन के आरम्भ से ही बे फिजूल की मानसिक दुविधाओं और उलझनों के कारण कार्य में उत्साह नहीं रहेगा। कार्य क्षेत्र पर काम करते समय भी मन कही और ही रहेगा शारीरिक रूप से भी शिथिलता और आलस्य अनुभव होगा। मध्यान पश्चात स्थिति सुधरेगी धन की आमद होने पर आर्थिक समस्याओं में कमी आएगी। आज बीते कुछ दिनों से दाम्पत्य में बनी कड़वाहट भ्रम दूर होने पर जीवनसाथी से सम्बन्ध मधुर होंगे लेकिन झगड़ा होबे के बाद ही। किसी पुराने मित्र से भेंट होने से हर्ष और खर्च होगा। सुख सुविधाएं जुटाने पर भी आज परिवार में सुख-शांति की कमी रहेगी।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज दिन आपके लिए आपके लिए लाभदायी रहेगा। आज प्रातःकाल के समय दिनचर्या थोड़ी सुस्त रहेगी लेकिन मध्यान आते आते गति पकड़ लेगी। कम समय मे बेहतर कार्य कर अधिकारी एवं सहकर्मी से प्रशंशा मिलेगी। आज कोई भी कार्य हो आप युक्तियों के बल पर उसे पूर्ण कर ही लेंगे। आज शेयर एवं सर्राफा व्यवसायियो को सरकारी कार्य से लाभ होगा। अन्य व्यवसाय से जुड़े जातको को भी संतोषजनक लाभ होगा। आज किसी सामाजिक कार्य अथवा धर्म क्षेत्र में अर्थ एवं श्रमदान से भी सम्मान में वृद्धि होगी। घर में मित्र रिश्तेदारो के आगमन से चहल-पहल रहेगी।

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“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton