Vaidik Panchang 04122025 Rashifal Samadhan

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 04 दिसम्बर 2025*
🌤️ *दिन – गुरूवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – हेमंत ऋतु*
🌤️ *मास – मार्गशीर्ष*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – चतुर्दशी रात्रि 08:37 तक तत्पश्चात पूर्णिमा*
🌤️ *नक्षत्र – कृत्तिका दोपहर 02:54 तक तत्पश्चात रोहिणी*
🌤️ *योग – शिव दोपहर 12:34 तक तत्पश्चात सिद्ध*
🌤️ *राहुकाल – दोपहर 01:51 से शाम 03:01 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 07:02*
🌤️ *सूर्यास्त – 05:55*
👉 *दिशाशूल – दक्षिण दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – व्रत पूर्णिमा, मार्गशीर्ष पूर्णिमा, पूर्णिमा क्षय तिथि*
💥 *विशेष – चतुर्दशी  अमावस्या व पूर्णिमा एवं व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
        🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
🌷 *विद्याध्ययन में आनेवाली पाँच बाधाएँ* 🌷
👉🏻 *बालकों को विद्याध्ययन में पाँच बाधाओं से सावधान रहना चाहिए*
➡ *1)  अभियान,*
➡ *2)  क्रोध,*
➡ *3)  प्रमाद ,*
➡ *4)  असंयम,*
➡️ *5)  आलस्य*
👉🏻 *ये पाँच दोष शिक्षा में बाधक बनते हैं |*
🙏🏻
            🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *ससुराल में तकलीफ़ हो तो* 🌷
👩🏻 *सुहागन देवियाँ को अगर ससुराल में बहुत कष्ट है …. अपनी शुभ मनोकामनाएं पूरी न होने की पीड़ा है, उनके लिए महर्षि अंगीरा के बताये अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को माँ पार्वती का स्मरण करते हुए उनको मन ही मन प्रणाम करें …. ” हे माँ मैं अपने घर में सुख … शांति … और समृद्धि की वृद्धि हेतु ये व्रत कर रही हूँ “… सुबह ये संकल्प करें और ११ मंत्र से माँ पार्वती को प्रणाम करें ….*
🌷 *ॐ पार्वतये नमः*
🌷 *ॐ हेमवत्ये नमः*
🌷 *ॐ अम्बिकाय नमः*
🌷 *ॐ गिरीश वल्लभाय नमः*
🌷 *ॐ गंभीर नाभ्ये नमः*
🌷 *ॐ अपर्नाये नमः*
🌷 *ॐ महादेव्यै नमः*
🌷 *ॐ कंठ कामिन्ये नमः*
🌷 *ॐ क्षण मुखाये नमः*
🌷 *ॐ लोक मोहिन्ये नमः*
🌷 *ॐ मेनका कुक्षी रत्नाये नमः*
🙏🏻 *ये 11 नाम कम से कम एक बार तो बोल ही लेना, ज्यादा भी बोल सकतें है । जो बहने ये न कर पायें तो उनकी ओर से घर का कोई भी ब्यक्ति उसके लिए कर सकता है  और प्रार्थनाा  करे की इसका पुण्य उन्हें पहुंचे उनके घर में भी सुख शांति बनी रहे ।*
💥 *विशेष – 04 नवम्बर 2025 गुरुवार को मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा है ।*
🙏🏻
          🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

पंचक आरंभ: नवंबर 27, 2025, गुरुवार को दोपहर 02:07 बजे
पंचक अंत: दिसंबर 1, 2025, सोमवार को रात 11:18 बजे
दिसंबर पंचक 2025 तिथि
पंचक आरंभ: दिसंबर 24, 2025, बुधवार को शाम 07:46 बजे
पंचक अंत: दिसंबर 29, 2025, सोमवार को सुबह 07:41 बजे

          🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

*भगवान दत्तात्रेय जी !!*

मार्गशीर्ष महीने की चौदस अर्थात भगवान श्री दत्तात्रेय की जन्म जयंती। भगवान दत्तात्रेय की उपासना साधको के लिए भौतिक उन्नति से ज्यादा सविशेष आध्यात्मिक उन्नति के लिए ज्यादा महत्व की मानी जाती है। आज भी भगवान दत्तात्रेय के एसे भक्त है जो पौराणिक काल से दत्त संप्रदाय के नाम से प्रचालित पंथ चला आ रहा है। 

भगवान दत्तात्रेय महर्षि अत्री और माता अनसूया के पुत्र है। भगवान दत्तात्रेय को शिवजी के अवतार माने जाते है, लेकिन वैष्णवजन उन्हे विष्णु के अवतार मानते है। उन्होनें  तीन धर्म वैष्णव, शैव और शक्त के संगम स्थल के रूप मे त्रिपुरा मे उन्होने लोगो को शिक्षा प्रदान की। उनके शिष्यो मे भगवन परशुराम का भी नाम लिया जाता है।

भगवान दत्तात्रेय ब्रह्माजी के मानस पुत्र ऋषि अत्री के पुत्र है और उनकी माता का नाम अनसुया है। कई ग्रंथो मे यह बताया गया है की ऋषि अत्री और अनसुया के तीन पुत्र है, ब्रह्माजी के अंश से चंद्रमा, शिवजी के अंश से दुर्वासा ऋषि और भगवान विष्णुजी के अंश से दत्तात्रेय का जन्म हुआ।

कहीं-कहीं पर यह उल्लेख मिलता है की भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी के सम्मिलित अवतार है।

जब माता अनसुया पतिव्रता धर्म का पालन कर रही थी, तब अपनी पत्नियों के कहने पर भगवान ब्रह्मा, भगवान महेश और भगवान विष्णु ने माता अनसूया की परीक्षा लेने के लिए ऋषियों के वेश मे उनकी कुटिया मे आए। और माता से कहा की आप हमे निर्वस्त्र हो कर खाना दे। उस समय माता अनसुया अपने पतिव्रता धर्म का पालन करते हुए तीनों देवों जो ऋषियों के वेश मे आए थे उन्हे बच्चे के रूप मे परिवर्तित कर दिया। और तीनों देवों को स्तनपान कराया। जिस के कारण माता को एक दिव्य अनुभूति हुई और उनके मन मे माता बनने की इच्छा प्रकट हुई।

जब तीनों देवताओं की पत्नियाँ अपने पतियों को खोजते हुए देवी अनसुया के आश्रम मे आ पहुँची, तो अपने पतियों को शिशु रूप मे पाया। अपनी गलतियों का अहसास होने पर तीनों देवियों ने देवी अनसुया से माफी माँगी। देवी अनसुया ने माफ कर दिया और तीनों देव ब्रह्मा, विष्णु और महेश को अपने वास्तविक रूप मे परिवर्तित कर दिया।

देवी अनसुया के पतिव्रता से प्रसन्न हो कर तीनों देवों ने उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा। देवी अनसुया ने तीनों देवों को पुत्र रूप मे प्राप्त करने की इच्छा जताई। तीनों देवो ने उनके घर मे पुत्र रूप मे जन्म लेने का वचन दिया। इस के बाद ब्रह्माजी चंद्र रूप मे, शिवजी ऋषि दुर्वासा के रूप मे और भगवान विष्णु दत्तात्रेय के रूप मे उनके घर पैदा हुए। इसी कारण से दत्तात्रेय को भगवान विष्णु का अंश माना गया है।

वर्णित कथा के अनुसार चंद्रमा और ऋषि दुर्वासा जब तपस्या करने चले गए तब उन्होने अपनी सारी शक्तियाँ और तेज भगवान दत्तात्रेय को दे दिया। जिससे दत्तात्रेय मे ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी की सभी शक्तियाँ समाहित हो गई। एसा माना जाता है की भगवान विष्णु के यह अवतार आज भी उनके योग के कारण इस संसार मे मौजूद है।

कहा जाता है की दत्तात्रेय भगवान कोल्हापुर मे निवास करते है, काशी मे गंगा स्नान करते है। कोल्हापुर में वे रोज जप करते है और भिक्षा भी मांगते है। एक मान्यता के अनुसार भगवान दत्तात्रेय सुबह ब्रह्माजी के रूप मे दोपहर मे विष्णुजी के रूप मे और शाम को शिवजी के रूप मे यहाँ रहते थे।

भगवान दत्तात्रेय के साथ एक गाय और चार कुत्ते हमेशा साथ मे रहते है। माना जाता है की जब भगवान विष्णुजी ने यह रूप लिया था। तब धरती माता ने गाय और चारो वेदों ने कुत्तो का रूप ले लिया था और भगवन दत्तात्रेय की रक्षा के लिए उनके साथ रहने लगे थे।
 
ऐसा माना गया है की भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु है।

पृथ्वी, पतंगा, कबूतर, हाथी, पिंगला वेश्या, वायु, सूर्य, हिरण, समुद्र, जल, आकाश, मछली, अग्नि, बालक, मधुमक्खी, कुरर पक्षी, चंद्रमा, साँप, तीर बनाने वाला, कुमारी कन्या, मकड़ी, भृंगी कीड़ा, अजगर और भौंरा।

*भगवान दत्तात्रेय का स्वरूप :* ब्रह्माजी के मानसपुत्र महर्षि अत्रि इनके पिता तथा सती अनुसूया इनकी माता थीं। पुराणों के अनुसार इनके तीन मुख, छह हाथ वाला त्रिदेवमय स्वरूप है। चित्र में इनके पीछे एक गाय तथा इनके आगे चार कुत्ते दिखाई देते हैं। औदुंबर वृक्ष के समीप इनका निवास बताया गया है। विभिन्न मठ, आश्रम और मंदिरों में इनके इसी प्रकार के चित्र का दर्शन होता है।

मान्यता के अनुसार दत्तात्रेय ने परशुरामजी को श्रीविद्या-मंत्र प्रदान किया था। यह भी मान्यता है कि शिवपुत्र कार्तिकेय को दत्तात्रेय ने विद्याएं और दीक्षा दी थीं।

भक्त प्रह्लाद को अनासक्ति-योग का उपदेश देकर उन्हें श्रेष्ठ राजा बनाने का श्रेय दत्तात्रेय को ही जाता है।

वहीं मुनि सांकृति को अवधूत मार्ग, कार्तवीर्यार्जुन को तन्त्र विद्या एवं नागार्जुन को रसायन विद्या इनकी कृपा से ही प्राप्त हुई।

गुरु गोरखनाथ को आसन, प्राणायाम, मुद्रा और समाधि-चतुरंग योग का मार्ग भगवान दत्तात्रेय की भक्ति से ही प्राप्त हुआ।

भगवान दत्तात्रेय को गुरु वंश का प्रथम गुरु, साथक, योगी और वैज्ञानिक माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार भगवान दत्तात्रेय ने चिकित्सा शास्त्र को नई दिशा दी।

भगवान दत्तात्रेय ने जीवन में कई लोगों से शिक्षा ली। उन्होने अन्य पशुओं के जीवन और उनके कार्यकलापों से भी शिक्षा ग्रहण की थी। भगवान दत्तात्रेय ने कहा है कि जिससे जितना गुण मिला है उनको उन गुणों को प्रदाता मानकर उन्हें अपना गुरु माना है, इस प्रकार मेरे 24 गुरु हैं। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, चंद्रमा, सूर्य, कपोत, अजगर, सिंधु, पतंग, भ्रमर, मधुमक्खी, गज, मृग, मीन, पिंगला, कुररपक्षी, बालक, कुमारी, सर्प, शरकृत, मकड़ी और भृंगी।

उनके प्रमुख तीन शिष्य थे जो तीनों ही राजा थे। दो यौद्धा जाति से और एक असुर था। उनके शिष्यों में भगवान परशुराम का भी नाम भी आता है। तीन संप्रदाय वैष्णव, शैव और शाक्त के संगम स्थल के रूप में भारतीय राज्य त्रिपुरा में उन्होंने शिक्षा-दीक्षा दी। माना जाता है कि इस त्रिवेणी के कारण ही प्रतीकस्वरूप उनके तीन मुख दर्शाए जाते हैं वैसे उनके तीन मुख नहीं थे।

ऐसी भी मान्यता है कि दत्तात्रेय नित्य प्रात: काशी में गंगाजी में स्नान करते थे। इसी कारण काशी के मणिकर्णिका घाट की दत्त पादुका दत्त भक्तों के लिए पूजनीय स्थान है। इसके अलावा मुख्य पादुका स्थान कर्नाटक के बेलगाम में स्थित है। देश भर में भगवान दत्तात्रेय को गुरु के रूप में मानकर इनकी पादुका का पूजन किया जाता है।।

*🐚शंख की वैदिक जानकारी*

        *🐚शंख को नादब्रह्म और दिव्यमंत्र की संज्ञा दी गई है। शंख की ध्वनि को ॐ की ध्वनि के समकक्ष माना गया है। शंखनाद से आसपास की नकारात्मक ऊर्जा का नाश तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शंख से निकलने वाली ध्वनि जहां तक जाती है, वहां तक बीमारियों के कीटाणुओं का नाश हो जाता है। समुद्र मंथन के समय प्राप्त चौदह अनमोल रत्नों में से शंख एक है।*
*लक्ष्मी के साथ उत्पन्न होने के कारण इसे लक्ष्मी भ्राता भी कहा जाता है।* *यही कारण है कि जिस घर में शंख होता है वहां लक्ष्मी का वास होता है।* *मान्यता के अनुसार यदि मोती शंख को कारखाने में स्था‍पित किया जाए, तो कारखाने में तेजी से आर्थिक उन्नति होती है। यदि व्यापार में घाटा हो रहा है, दुकान से आय नहीं हो रही हो, तो एक मोती शंख दुकान के गल्ले में रखा जाए तो इससे व्यापार में वृद्धि होती है।* *यदि मोती शंख को मंत्र सिद्ध व प्राण-प्रतिष्ठा कर और इसी में जल भरकर लक्ष्मी की चित्र के सम्मुख स्थापित किया जाए, तो लक्ष्मी प्रसन्न होती है और आर्थिक उन्नति होती है। मोती शंख को घर में स्थापित कर रोज ‘ॐ श्री महालक्ष्मै नम:’ 11 बार बोलकर 1-1 चावल का दाना शंख में भरते रहें। इस प्रकार 11 दिन तक प्रयोग करें। यह प्रयोग करने से आर्थिक तंगी समाप्त हो जाती है। इसी तरह प्रत्येक शंख से अलग- अलग लाभ प्रा‍प्त किए जा सकता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार सूर्य व चंद्र के समान शंख देवस्वरूप है, जिसके मध्य में वरुण, पृष्ठ में ब्रह्मा तथा अग्र में गंगा और सरस्वती नदियों का वास है। इसलिए तीर्थाटन से जो लाभ मिलता है, वही लाभ शंख के दर्शन और पूजन से मिलता है। शंख से कृष्ण या लक्ष्मी विग्रह पर जल या पंचामृत अभिषेक करने पर देवता प्रसन्न होते हैं।।*

      *🐚सेहत में फायदेमंद शंख :*

      *शंखनाद से सकारात्मक ऊर्जा का सर्जन होता है, जिससे आत्मबल में वृद्धि होती है। शंख में प्राकृतिक कैल्शियम, गंधक और फास्फोरस की भरपूर मात्रा होती है। प्रतिदिन शंख फूंकने वाले को गले और फेफड़ों के रोग नहीं होते। शंख बजाने से चेहरे, श्वसन तंत्र, श्रवण तंत्र तथा फेफड़ों का व्यायाम होता है। शंख वादन से स्मरण शक्ति बढ़ती है। शंख से मुख के तमाम रोगों का नाश होता है। गोरक्षा संहिता, विश्वामित्र संहिता, पुलस्त्य संहिता आदि ग्रंथों में दक्षिणावर्ती शंख को आयुर्वद्धक और समृद्धि दायक कहा गया है। पेट में दर्द रहता हो, आंतों में सूजन हो अल्सर या घाव हो तो दक्षिणावर्ती शंख में रात में जल भरकर रख दिया जाए और सुबह उठकर खाली पेट उस जल को पिया जाए, तो पेट के रोग जल्दी समाप्त हो जाते हैं। नेत्र रोगों में भी यह लाभदायक है। यही नहीं, तथाकथित पितृदोषमन्य कालसर्प योग में भी यह रामबाण का काम करता है।।*

       *🐚श्रेष्ठ शंख के लक्षण:*
    
*”शंखस्तुविमल: श्रेष्ठश्चन्द्रकांतिसमप्रभ:*
*अशुद्धोगुणदोषैवशुद्धस्तु सुगुणप्रद:।”*
*अर्थात् निर्मल व चन्द्रमा की कांति के समानवाला शंख श्रेष्ठ होता है।।*

     *🐚शंख से वास्तु दोष का निदान :*
    
      *शंख से वास्तु दोष भी मिटाया जा सकता है। शंख को किसी भी दिन लाकर पूजा स्थान पर पवित्र करके रख लें और प्रतिदिन शुभ मुहूर्त में इसकी धूप- दीप से पूजा की जाए तो घर में वास्तु दोष का प्रभाव कम हो जाता है। शंख में गाय का दूध रखकर इसका छिड़काव घर में किया जाए तो, इससे भी सकारात्मक उर्जा का संचार होता है।।*

       *🐚गणेश शंख:*
     
       *इस शंख की आकृति भगवान श्रीगणेश की तरह ही होती है। यह शंख दरिद्रता नाशक और धन प्राप्ति का कारक है।।*

      *🐚अन्नपूर्णा शंख :*
     
      *अन्नपूर्णा शंख का उपयोग घर में सुख- शान्ति और  श्री समृद्धि के लिए अत्यन्त उपयोगी है। गृहस्थ जीवन यापन करने वालों को प्रतिदिन इसके दर्शन करने चाहिए।।*

      *🐚कामधेनु शंख :*
     
       *कामधेनु शंख का उपयोग तर्क शक्ति को और प्रबल करने के लिए किया जाता है। इस शंख की पूजा- अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।।*

       *🐚मोती शंख :*
    
      *इस शंख का उपयोग घर में सुख और शांति के लिए किया जाता है। मोती शंख हृदय रोग नाशक भी है। मोती शंख की स्थापना पूजा घर में सफेद कपड़े पर करें और प्रतिदिन पूजन करें, लाभ मिलेगा।।*

      *🐚ऐरावत शंख :*
      
      *ऐरावत शंख का उपयोग मनचाही साधना सिद्ध को पूर्ण करने के लिए, शरीर की सही बनावट देने तथा रूप- रंग को और निखारने के लिए किया जाता है। प्रतिदिन इस शंख में जल डाल कर उसे ग्रहण करना चाहिए। शंख में जल प्रतिदिन 24 – 28 घण्टे तक रहे और फिर उस जल को ग्रहण करें, तो चेहरा कांतिमय होने लगता है।।*

        *🐚विष्णु शंख :*
       
       *इस शंख का उपयोग लगातार प्रगति के लिए और असाध्य रोगों में शिथिलता के लिए किया जाता है। इसे घर में रखने भर से घर रोगमुक्त हो जाता है।।*

       *🐚पौण्ड्र शंख :*
      
      *पौण्ड्र शंख का उपयोग मनोबल बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग विद्यार्थियों के लिए उत्तम है। इसे विद्यार्थियों को अध्ययन कक्ष में पूर्व की ओर रखना चाहिए।।*

       *🐚मणि पुष्पक शंख :*
      
       *मणि पुष्पक शंख की पूजा-अर्चना से यश कीर्ति, मान-सम्मान प्राप्त होता है। उच्च पद की प्राप्ति के लिए भी इसका पूजन उत्तम है।।*

       *🐚देवदत्त शंख :*
      
      *इसका उपयोग दुर्भाग्य नाशक माना गया है। इस शंख का उपयोग न्याय क्षेत्र में विजय दिलवाता है। इस शंख को शक्ति का प्रतीक माना गया है। न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोग इसकी पूजा कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।।*

      *🐚दक्षिणावर्ती शंख :*
     
      *इस शंख को दक्षिणावर्ती इसलिए कहा जाता है, क्योंकि जहां सभी शंखों का पेट बाईं ओर खुलता है वहीं इसका पेट विपरीत दाईं और खुलता है। इस शंख को देव स्वरूप माना गया है। दक्षिणावर्ती शंख के पूजन से खुशहाली आती है और लक्ष्मी प्राप्ति के साथ- साथ सम्पत्ति भी बढ़ती है। इस शंख की उपस्थिति ही कई रोगों का नाश कर देती है। यही दक्षिणावर्ती शंख पेट के रोग में भी बहुत लाभदायक है। विशेष कार्य में जाने से पहले दक्षिणावर्ती शंख के दर्शन करने भर से उस काम के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।।*

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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष 🌹
आपका जन्मदिन: 4 दिसंबर

दिनांक 4 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 4 होगा। ऐसे व्यक्ति को जीवन में अनेक परिवर्तनों का सामना करना पड़ता है। जैसे तेज स्पीड से आती गाड़ी को अचानक ब्रेक लग जाए ऐसा उनका भाग्य होगा। लेकिन यह भी निश्चित है कि इस अंक वाले अधिकांश लोग कुलदीपक होते हैं। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति जिद्दी, कुशाग्र बुद्धि वाले, साहसी होते हैं। आपका जीवन संघर्षशील होता है। इनमें अभिमान भी होता है। ये लोग दिल के कोमल होते हैं किन्तु बाहर से कठोर दिखाई पड़ते हैं। इनकी नेतृत्त्व क्षमता के लोग कायल होते हैं।

आपके लिए खास

शुभ दिनांक : 4, 8, 13, 22, 26, 31

शुभ अंक : 4, 8,18, 22, 45, 57

शुभ वर्ष : 2031, 2040, 2060

ईष्टदेव : श्री गणेश, श्री हनुमान

शुभ रंग : नीला, काला, भूरा

आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल

शुभ कार्य : मान-सम्मान में वृद्धि होगी, वहीं मित्र वर्ग का सहयोग मिलेगा। नौकरीपेशा प्रयास करें तो उन्नति के चांस भी है।

व्यापार : नवीन व्यापार की योजना प्रभावी होने तक गुप्त ही रखें। यह वर्ष पिछले वर्ष के दुष्प्रभावों को दूर करने में सक्षम है। आपको सजग रहकर कार्य करना होगा। शत्रु पक्ष पर प्रभावपूर्ण सफलता मिलेगी।

परिवार : परिवारिक मामलों में सहयोग के द्वारा सफलता मिलेगी। विवाह के मामलों में आश्चर्यजनक परिणाम आ सकते हैं।

🌹आज का राशिफल 🌹
*दिनांक : 04 दिसम्बर 2025*

मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज आप अपने आस-पास कई बदलाव अनुभव करेंगे। कार्य क्षेत्र पर आज आपके मन के अनुसार कार्य होने से प्रसन्नता रहेगी लेकिन मध्यान के समय आप अपनी आलसी प्रवृति के कारण लाभ के अवसर हाथ से गवां सकते है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रमो को प्राथमिकता से पूर्ण करना हितकर रहेगा। संध्या के समय थानाक रहने पर भी अपने आपको परिस्थितयो के अनुसार ढाल कर लाभ उठाएंगे। सहकर्मी आपकी कार्य कुशलता के कायल हो जाएंगे। किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में खर्च करेंगे। विरोधियों अथवा प्रतिस्पर्धियों को आज हलके में लेना हानि कराएगा। आकस्मिक खर्च होंगे। घरेलू सुख सामान्य रहेगा। ठंडी वस्तुओ का परहेज करें।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज के दिन आपमें भावुकता अधिक रहने के कारण छोटी-छोटी बाते दिल पर लेंगे अपने कार्यो को छोड़ अन्य के काम मे टांग अड़ाएंगे इसके परिणामस्वरूप स्नेहीजनों से आज दूरी बन सकती है। सेहत सामान्य रहेगी लेकिन एकाग्रता की कमी हर कार्य मे बाधक बनेगी। व्यर्थ की बहस या झगड़ो से बचें अपने काम से काम रखे तो अपनी दिनचर्या से लाभ उठा सकते है। सरकारी कार्य लंबित रहेंगे। मध्यान बाद माश्पेशी में अकड़न की समस्या रह सकती है। व्यावसायिक यात्रा का विचार बनेगा। घर का वातावरण स्थिर रहेगा। संध्या के समय आपके स्वयं लिए निर्णय सफल होंगे आवश्यकता अनुसार धन लाभ हो जाएगा लेकिन भ्रामक खबरों पर यकीन ना करें।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज के दिन आपको दैनिक कार्यो के अतिरिक्त भाग दौड़ करनी पड़ेगा लेकिन इसका कोई सकारात्मक परिणाम नही मिलेगा। आज अधिकांश कार्य किसी अन्य पर निर्भर रहने के कारण अधूरे रह सकते है जोर जबरदस्ती करने पर हानि ही होगी। कार्य व्यवसाय अथवा सरकारी क्षेत्र से अशुभ समाचार मिलने या किसी अप्रिय घटना की संभावना मन को बेचैन  रखेगी। धन की आमद सीमित रहेगी लेकिन ख़र्च अनियंत्रित होने पर बजट प्रभावित होगा। कार्य क्षेत्र पर सहकर्मी अथवा अधिकारी वर्ग से गलतफहमी बनेगी फिर भी मामला गंभीर नही होने देंगे। परिवार के सदस्य से हानि हो सकती है धैर्य से काम लें। यात्रा से सेहत में अकस्मात नरमी आएगी। बुजुर्गो के प्रति आदर भाव बढेगा।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन आपके लिए लाभदायक रहेगा। दिन के आरंभिक भाग में विदेश स्थित रिश्तेदारो अथवा व्यवहारों से शुभ समाचार मिलेंगे। विदेश यात्रा का अवसर भी मिल सकता है। नए अनुबंधों की शुरुआत के लिए आज का दिन उत्तम है।
कमीशन के व्यवसाय से अधिक लाभ की संभावना है। सामाजिक व्यवहार बढ़ने से कार्य क्षेत्र पर भी आज कई बार आकस्मिक लाभ के अवसर मिलेंगे परंतु सभी का लाभ नहीं उठा पाएंगे। फिर भी आवश्यकता से अधिक धन लाभ सहज हो जाएगा। परिजनों के सहयोग से भाग्योन्नति होगी। आज के दिन प्रेम-प्यार से दूर रहें  लंबी यात्रा अधिक आवश्यक होने पर ही करें नए पुराने मित्रो से सम्बन्ध प्रगाढ़ होंगे। गर्म सर्द की परेशानी की संभावना है।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज के दिन पूर्वार्ध में पहले मिली सफलता के कारण निश्चिन्त रहेंगे महत्त्वपूर्ण कार्यो में लापरवाही करेंगे लेकिन मध्यान के बाद ही स्थिति को भाँप कर मेहनत के लिये प्रेरित होंगे। आज किये परिश्रम का फल निकट भविष्य में कुछ ना कुछ आर्थिक अथवा अन्य प्रकार से वृद्धि कराएगा। घर मे सुखोपभोग के साधन की खरीद की योजना बनेगी परन्तु आज बजट की कमी के कारण टालना भी पड़ सकता है। धन लाभ आशाजनक लेकिन भाग दौड़ के बाद ही होगा खर्च साथ लगे रहने से परिजनों की इच्छापूर्ति करने में विलंब होगा फिर भी आपसी तालमेल बना रहेगा स्वास्थ्य को लेकर आशंकित रहेंगे।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन संभावनाओं पर ज्यादा केंद्रित रहेगा। परिश्रम करने में कमी नही रखेंगे फिर भी सफलता असफलता संपर्क में रहने वालों पर निर्भर रहेगी। मध्यान तक का समय उदासीनता में बीतेगा इसके बाद व्यस्तता बढ़ेगी कार्य व्यवसाय में गति आने से लाभ की संभावना जागेगी लेकिन धन प्राप्ति में विलंब होगा फिर भी आज के दिन से वृद्धि की आशा रख सकते है भले ही इसमें विलंब क्यो ना हो। सहकर्मी अपने मनमाने व्यवहार से कुछ समय के लिये परेशानी में डालेंगे लेकिन इससे बाहर भी स्वयं ही निकालेंगे। गृहस्थ में शांति रहेगी परन्तु आज किसी व्यक्ति विशेष का अभाव भी अनुभव करेंगे। सेहत को लेकर थोड़ी समस्या बनेगी पर प्रदर्शित नही करेंगे।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन आपको प्रतिकूल फल देगा। आज दिन भर शरीर में स्फूर्ति की कमी रहेगी भावुकता भी अधिक रहने से स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। आज आप अधिकांश कार्यो को बे मन से करेंगे जिससे कार्यो में विलम्ब होगा। सहकर्मियों से अहं को लेकर मतभेद होगा। अधिकारी वर्ग से सावधान रहें। प्रतिस्पर्धा अधिक रहने से व्यवसाय मंदा रहेगा मध्यान पश्चात स्थिति में सुधार आएगा पुराने संपर्कों से आंशिक लाभ होगा। अटपटे व्यवहार के कारण सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी आएगी। पारिवारिक जीवन भी संघर्षमय रहेगा। संध्या बाद एकाग्रता बढ़ेगी पत्नी-संतान का सहयोग भी मिलेगा लेकिन घर के बुजुर्ग आपसे नाराज ही रहेंगे। यात्रा आज स्थगित रखे।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज के दिन आप अपनी ही धुन में रहेंगे। मन की ज्यादा सुनेंगे और करेंगे भी वैसा ही किसी का कार्यो में दखल देना कुछ ज्यादा ही अखरेगा जरासी बात पर नाराज हो जाएंगे जिससे मुख्य लक्ष्य से भटक सकते है। कार्य व्यवसाय आज अन्य दिन की तुलना में थोड़ा धीमा रहेगा इसका एक कारण आपका मानसिक रूप से तैयार ना होना भी रहेगा। लाभ हानि की परवाह किये बिना ही कार्य हाथ मे लेंगे बाद में ले देकर पूरा करने का प्रयास कुछ ना कुछ हानि ही कराएगा। घर में किसी ना किसी से व्यर्थ की बातों पर बहस कर समय खराब करेंगे। मानसिक रूप से बेचैनी अधिक रहने पर पूजा पाठ से भी विमुख रहेंगे एक साथ दो जगह मन भटकने के कारण आध्यात्मिकता का लाभ नही मिल सकेगा।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन भी आपके लिए लाभदायक रहेगा। आज सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। कार्य क्षेत्र पर आज बेहतर काम के लिए सम्मानित होंगे। पूर्व निर्धारित कार्य ले देकर पूर्ण होने से मन को राहत पहुचेगी। सरकारी कार्यो में भी आज आसानी से सफलता मिलेगी। संध्या के समय आकस्मिक लाभ होगा। दाम्पत्य जीवन में खुशहाली बढ़ेगी पिता का सहयोग अथवा पैतृक कार्यो से समृद्धि आएगी। सामाजिक कार्यों में योगदान देंगे। किसी प्रियजन से शुभ समाचार मिलेगा लेकिन ध्यान रहे आज लालची प्रवृति के कारण सामाजिक सम्मान में कमी भी आ सकती है। गले सम्बंधित रोग होने की संभावना है। आवश्यक कार्य आज ही पूर्ण कर लें कल पर टालना विलंब कराएगा।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज के दिन आपको बुद्धि विवेक का लाभ मिलेगा आपकी सोच दूरदर्शी रहेगी लेकिन इससे मनिच्छित सफलता नही मिल सकेगी दिन के पहले भाग में घर मे पुरानी बात के कारण मतभेद रहेंगे शांत रहने का प्रयास करें अन्यथा दिन भर मानसिक अशांति रहेगी। कार्य क्षेत्र पर नए तरीके से काम करने का प्रयास करेंगे इससे अन्य लोगो मे आपकी बुद्धि कौशल का प्रचार होगा पर धन लाभ के लिये तरसना पड़ेगा परिश्रम करने पर भी अल्प लाभ से संतोष करना पड़ेगा। लोग केवल मीठा बोलकर अपना हित साधेंगे सहयोग कोई नही करेगा। सेहत में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। परिवार की आवश्यकता पूर्ती करने में असमर्थ रहेंगे।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज के दिन आपमे धैर्य की कमी रहेगी। किसी भी कार्यो को लेकर पहले लापरवाही करेंगे बाद में उसे जल्दबाजी में करने पर कुछ ना कुछ कमी रह जायेगी। धन संबंधित मामलों में जल्दबाजी ना करें अन्यथा आज के दिन का उचित लाभ लेने से वंचित रह जाएंगे कार्य व्यवसाय से आरंभ में ज्यादा आशा नही रहेगी लेकिन धीरे धीरे जमने पर अकस्मात धन के मार्ग खुलने से उत्साह बढेगा। दान-पुण्य के साथ किसी की सहायता पर खर्च करना पड़ेगा परोपकार की भावना के कारण अखरेगा नही। आज घर मे समय पर वादा पूर्ति ना करने पर विवाद हो सकता है। स्वास्थ्य आज सामान्य ही रहेगा। क्रोध से बचें।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज आप धन लाभ की कामना से अधिकांश कार्य करेंगे लाभ होगा भी लेकिन खर्च लगे रहने से हाथ मे रुकेगा नही। कार्य व्यवसाय में तेजी मंदी लगी रहने के कारण बनी बनाई योजना लटकी रह जायेगी। आज आप असमर्थ होते हुए भी अन्य लोगो की सहायता के लिये तत्पर रहेंगे लेकिन परिजनों को आपका परोपकार कम ही जमेगा। आवश्यकता की वस्तुओं की जगह आज व्यर्थ के कार्यो पर खर्च होगा। घर मे किसी न किसी से इच्छा पूर्ति ना होने पर नाराजगी रहेगी। संध्या का समय अपेक्षा से अधिक आनंद दायक रहेगा। मित्र परिजनों के साथ मनोरंजन के अवसर मिलेंगे लेकिन एक दूसरे के प्रति आदर का अभाव रहेगा।

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“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton