🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक – 03 नवम्बर 2025*
🌤️ *दिन – सोमवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – हेमंत ॠतु*
🌤️ *मास – कार्तिक*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – त्रयोदशी 04 नवम्बर रात्रि 02:05 तक तत्पश्चात चतुर्दशी*
🌤️ *नक्षत्र – उत्तरभाद्रपद शाम 03:05 तक तत्पश्चात रेवती*
🌤️ *योग – हर्षण शाम 07:40 तक तत्पश्चात वज्र*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 08:07 से सुबह 09:32 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:43*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:00*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण- अति पुष्करिणी योग,सोम प्रदोष व्रत,पंचक*
💥 *विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *व्यतिपात योग* 🌷
➡️ *05 नवम्बर 2025 बुधवार को दोपहर 11:28 से 06 नवम्बर, गुरुवार को सुबह 07:05 तक व्यतिपात योग है।*
🙏🏻 *व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।*
🙏🏻 *वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *वैकुंठ चतुर्दशी के दिन सुख समृद्धि बढ़ाने* 🌷
➡ *04 नवम्बर 2025 को वैकुंठ चतुर्दशी है |*
🙏🏻 *देवीपुराण के अनुसार इस दिन जौ के आटे की रोटी बनाकर माँ पार्वती को भोग लगाया जाता है और प्रसाद में वो रोटी खायी जाती है | माँ पार्वती को भोग लगाकर जौ की रोटी प्रसाद में जो खाते है उनके घर में सुख और संम्पति बढती जायेगी, ऐसा देवीपुराण में लिखा है | वैकुंठ चतुर्दशी के दिन अपने-अपने घर में जौ की रोटी बनाकर माँ पार्वती को भोग लगाते समय ये मंत्र बोले –*
🌷 *ॐ पार्वत्यै नम:*
🌷 *ॐ गौरयै नम:*
🌷 *ॐ उमायै नम:*
🌷 *ॐ शंकरप्रियायै नम:*
🌷 *ॐ अंबिकायै नम:*
🙏🏻 *माँ पार्वती का इन मंत्रों से पूजन करके जौ की रोटी का भोग उनको लगायें, फिर घर में सब रोटी खायें | जौ का दलिया, जौ के आटे की रोटी खानेवाले जब तक जियेंगे तब तक उनकी किडनी बढ़िया रहेंगी, किडनी कभी ख़राब नहीं होगी | शरीर में कही भी सूजन हो किडनी में सूजन, लीवर में सूजन, आतों में सूजन है तो जौ की रोटी खायें, इससे सब तकलीफ दूर हो जाती है |*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~*🌞
🌸🌸 *श्रीहरि:* 🌸🌸
नमः कमलनेत्राय नमः कमलमालिने।
नमः कमलनाभाय कमलापतये नमः॥
बर्हापीडाभिरामाय रामायाकुण्ठमेधसे।
रमामानसहंसाय गोविन्दाय नमो नमः॥
नारायण! नारायण!! नारायण!!!

🌸🌸 *श्रीहरि:* 🌸🌸
*शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं,*
*विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम् ।*
*लक्ष्मीकांत कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं,*
*वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्व लौकेक नाथम् ॥*
● शान्ताकारम् — जिनका स्वभाव और रूप अत्यन्त शांत है, जो सर्वथा निरामय और स्थिर हैं।
● भुजग-शयनम् — जो शेषनाग (भुजंग) पर शयन करते हैं।
● पद्मनाभम् — जिनके नाभि से कमल उत्पन्न हुआ है (जिससे ब्रह्मा जी उत्पन्न हुए)।
● सुरेशम् — जो देवताओं के भी ईश्वर हैं।
● विश्वाधारम् — जो सम्पूर्ण विश्व का आधार हैं।
● गगन-सदृशम् — जिनका रूप आकाश के समान सर्वव्यापक और निर्मल है।
● मेघवर्णम् — जिनका वर्ण घने मेघ के समान श्याम है।
● शुभाङ्गम् — जिनके अंग अति मंगलमय हैं।
● लक्ष्मीकान्तम् — जो देवी लक्ष्मी के पति हैं।
● कमल-नयनम् — जिनकी आँखें कमल की पंखुड़ियों के समान हैं।
● योगि-हृदि ध्यान-गम्यम् — जो केवल योगियों के हृदय में ध्यान द्वारा ही प्राप्त होते हैं।
● वन्दे विष्णुम् — मैं उन भगवान विष्णु को नमस्कार करता हूँ।
● भव-भय-हरम् — जो जन्म-मृत्यु के भय को दूर करते हैं।
● सर्व-लोक-एक-नाथम् — जो सम्पूर्ण लोकों के एकमात्र नाथ हैं।
भावार्थ:-
मैं उन भगवान विष्णु को नमस्कार करता हूँ, जो अत्यन्त शांत स्वभाव वाले हैं, शेषनाग की शय्या पर विराजमान हैं, जिनके नाभि से कमल निकला है, जो देवताओं के भी देव हैं, जो सम्पूर्ण सृष्टि के आधार हैं, जिनका रंग मेघ के समान श्याम है, जिनके अंग शुभ हैं, जो लक्ष्मी जी के पति हैं,
जिनकी आँखें कमल के समान हैं, जो योगियों के हृदय में ध्यान द्वारा ही देखे जा सकते हैं, जो जन्म-मृत्यु के भय को नष्ट करते हैं, और जो समस्त लोकों के एकमात्र स्वामी हैं।
नारायण! नारायण!! नारायण!!!
🍁🍁 *नारायण* 🍁🍁
*।। तुलसी गीता ।।*
यह श्रीहरि एवं तुलसी संवाद रूप का शुद्ध पाठ है हिन्दी अनुवाद, सहित यह मूलस्रोत- बृहद्धर्मपुराण, पद्मपुराण, और तुलसीमहात्म्य से संकलित यह गीता तुलसी आराधना का सार है।
श्रीभगवानुवाच-
प्राग्दत्वार्घं ततोऽभ्यर्च्य गन्धपुष्पाक्षतादिना।
स्तुत्वा भगवतीं तां च प्रणमेद्दण्डवद्भुवि।।१।।
पहले तुलसी देवी को अर्घ्य देकर, गंध, पुष्प, अक्षत आदि से पूजन करें, फिर भगवती तुलसी की स्तुति करके भूमि पर दण्डवत प्रणाम करें।
श्रियं श्रिये श्रियावासे नित्यं श्रीधवसत् रते।
भक्त्या दत्तं मया देवि अर्घं गृह्ण नमोऽस्तु ते।।२।।
हे देवी! आप लक्ष्मी की स्वरूपा, लक्ष्मी के निवास-स्थान और श्रीहरि की प्रिय हैं। मैं श्रद्धा से दिया हुआ यह अर्घ्य आपको समर्पित करता हूँ- आपको नमस्कार।
निर्मिता त्वं पुरा देवैरर्चिता त्वं सुरासुरैः।
तुलसि हर मे पापं पूजां गृह्ण नमोऽस्तु ते।।३।।
हे तुलसी! तुम देवताओं द्वारा निर्मित और देवासुर दोनों द्वारा पूजित हो। मेरे पापों का नाश करो, मेरी पूजा स्वीकार करो- तुम्हें नमस्कार।
महाप्रसादजननी आधिव्याधिविनाशिनी।
सर्वसौभाग्यदे देवि तुलसि त्वां नमोऽस्तु ते।।४।
हे तुलसी देवी! आप महाप्रसाद की जननी हैं, समस्त रोग-दोषों का नाश करने वाली हैं,और सर्व सौभाग्य प्रदान करने वाली देवी हैं- आपको नमस्कार।
या दृष्टा निखिलाघसंघशमना… तस्यै तुलस्यै नमः।।५।।
हे तुलसी! जिनका दर्शन पापों को हर लेता है, जिनका स्पर्श शरीर को पवित्र करता है, जिनका पूजन रोगों का नाश करता है,जिनका जल मृत्यु के भय को मिटाता है, जो भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में रोपित होकर मुक्ति प्रदान करती हैं- ऐसी तुलसी देवी को बार-बार नमस्कार।
भगवत्यास्तुलस्यास्तु माहात्म्यामृतसागरे।
लोभात् कूर्द्दितुमिच्छामि क्षुद्रस्तत् क्षम्यतां त्वया।।६।।
हे तुलसी भगवती! आपके महात्म्य रूप अमृत-सागर में डूबने की इच्छा मुझे लोभवश हो रही है। मैं क्षुद्र मानव हूँ, कृपा कर इसे क्षमा करें।
श्रवणाद्वादशीयोगे शालग्रामशिलार्चने।
यद्फलं सङ्गमे प्रोक्तं तुलसीपूजनेन तत्।।७।।
श्रवण नक्षत्रयुक्त द्वादशी तिथि पर शालग्राम की पूजा से जो फल मिलता है, वही फल तुलसी पूजा से प्राप्त होता है।
धात्रीफलेन यत् पुण्यं जयन्त्यां समुपोषणे।
तद्फलं लभते मर्त्यास्तुलसीपूजनेन तत्।।८।।
जयन्ती तिथि पर उपवास करने या आंवले (धात्रीफल) के सेवन से जो पुण्य मिलता है,
वही तुलसी पूजा से प्राप्त होता है।
यद्फलं प्रयागस्नाने काश्यां प्राणविमोक्षणे।
तद्फलं विहितं देवैस्तुलसीपूजनेन तत्।।९।।
प्रयाग में स्नान करने या काशी में शरीर त्यागने से जो फल मिलता है, वही फल तुलसी पूजन से भी मिलता है।
चतुर्णामपि वर्णानामाश्रमाणां विशेषतः।
स्त्रीणां च पुरुषाणां च पूजितेष्टं ददाति च।।१०।।
तुलसी देवी चारों वर्णों और चारों आश्रमों के लोगों- स्त्री, पुरुष सभी को उनकी इच्छा अनुसार वर देती हैं।
तुलसी रोपिता सिक्ता दृष्टा स्पृष्टा च पावयेत्।
आराधिता प्रयत्नेन सर्वकामफलप्रदा।।११।।
जो तुलसी को रोपता है, सींचता है, देखता या छूता है- वह पवित्र हो जाता है। जो तुलसी की भक्तिपूर्वक आराधना करता है, उसे सभी कामनाओं के फल मिलते हैं।
प्रदक्षिणं भ्रमित्वा ये नमस्कुर्वन्ति नित्यशः।
न तेषां दुरितं किञ्चिदक्षीणमवशिष्यते।।१२।।
जो प्रतिदिन तुलसी की परिक्रमा और प्रणाम करते हैं, उनके सभी पाप क्षीण हो जाते हैं।
पूज्यमाना च तुलसी यस्य वेश्मनि तिष्ठति।
तस्य सर्वाणि श्रेयांसि वर्धन्तेऽहरहः सदा।।१३।।
जिसके घर में तुलसी पूजित रूप में विद्यमान रहती हैं, उसके घर में दिन-प्रतिदिन शुभता और समृद्धि बढ़ती रहती है।
पक्षे पक्षे च द्वादश्यां… तुलसीवनपूजनम्।।१४।।
हर पक्ष की द्वादशी तिथि को स्वयं ब्रह्मा आदि देवता भी तुलसीवन की पूजा करते हैं।
अनन्यमनसा नित्यं तुलसीं स्तौति यो जनः।
पितृदेवमनुष्याणां प्रियो भवति सर्वदा।।१५।।
जो व्यक्ति नित्य तुलसी की भक्ति से स्तुति करता है, वह देवताओं, पितरों और मनुष्यों- सभी का प्रिय बन जाता है।
रतिं करोमि नान्यत्र तुलसीकाननं विना… कलौ तिष्ठामि भामिनि।।१६-१७।।
भगवान श्रीहरि कहते हैं- हे प्रिये तुलसी! मुझे अन्य किसी स्थान में उतनी रति नहीं जितनी तुलसीवन में है। सत्य कहता हूँ- कलियुग में मैं तीर्थों और पर्वतों को छोड़कर सदैव तुलसीवन में निवास करता हूँ।
न धात्रा सफला यत्र न विष्णुस्तुलसीवनम्।
तत् स्मशानसमं स्थानं सन्ति यत्र न वैष्णवाः।।१८।।
जहाँ विष्णु या तुलसीवन नहीं है, वह स्थान मृत-भूमि के समान है;जहाँ वैष्णव नहीं रहते, वह स्थान भी स्मशान तुल्य है।
तुलसीगन्धमादाय यत्र गच्छति मारुतः।
दिशो दश च पूताः स्युर्भूतग्रामाश्चतुर्दशः।।१९।।
जहाँ तुलसी की सुगंध लेकर वायु प्रवाहित होती है, वहाँ की दसों दिशाएँ और चौदहों लोक शुद्ध हो जाते हैं।
तुलसीवनसंभूता छाया पतति यत्र वै।
तत्र श्राद्धं प्रदातव्यं पितॄणां तृप्तिहेतवे।।२०।।
जहाँ तुलसीवन की छाया पड़ती है, वहाँ श्राद्ध करने से पितर अत्यंत तृप्त होते हैं।
तुलसी पूजिता नित्यं सेविता रोपिता शुभा।
स्नापिता तुलसी यैस्तु ते वसन्ति ममालये।।२१।।
जो लोग तुलसी की नित्य पूजा, सेवा, रोपण और स्नान करते हैं, वे मेरे धाम में निवास करते हैं।
सर्वपापहरं सर्वकामदं तुलसीवनम्।
न पश्यति समं सत्ये तुलसीवनरोपणात्।।२२।।
तुलसीवन पापों का नाशक और सभी कामनाओं का पूरक है। सत्य युग में भी तुलसीवनारोपण के समान कोई पुण्य नहीं।
तुलस्यलङ्कृता ये वै तुलसीवनपूजकाः।
तुलसीस्थापका ये च ते त्याज्या यमकिङ्करैः।।२३।।
जो तुलसीवन की स्थापना, पूजन और तुलसीमाला धारण करते हैं, यमदूत उन्हें कभी नहीं छूते।
दर्शनं नर्मदायास्तु गङ्गास्नानं कलौ युगे।
तुलसीदलसंस्पर्शः सममेतत्त्रयं स्मृतम्।।२४।।
कलियुग में नर्मदा-दर्शन, गंगा-स्नान और तुलसीदल-स्पर्श- तीनों समान पुण्यदायक माने गए हैं।
दारिद्र्यदुःखरोगार्तिपापानि सुबहून्यपि।
हरते तुलसीक्षेत्रं रोगानिव हरीतकी।।२५।।
जैसे हरड़ रोगों को हर लेती है, वैसे ही तुलसीवन दारिद्र्य, दुःख, रोग और पाप- सबको दूर कर देता है।
तुलसीकानने यस्तु मुहूर्तमपि विश्रमेत्।
जन्मकोटिकृतात् पापात् मुच्यते नात्र संशयः।।२६।।
जो व्यक्ति तुलसीवन में केवल एक मुहूर्त भी विश्राम करता है, वह करोड़ों जन्मों के पापों से मुक्त हो जाता है।
नित्यं तुलसिकारण्ये तिष्ठामि स्पृहया युतः।
अपि मे क्षतपत्रैकं कश्चिद्धन्योऽर्पयेदिति।।२७।।
भगवान श्रीहरि कहते हैं- मैं तुलसीवन में सदा रहता हूँ, इस आशा से कि कोई धन्य भक्त मुझे एक भी तुलसीपत्र अर्पित करे।
तुलसीनाम यो ब्रुयात् त्रिकालं वदने नरः।
विवर्णवदनो भूत्वा तल्लिपिं मार्जयेद्यमः।।२८।।
जो मनुष्य दिन में तीन बार “तुलसी” नाम लेता है, उसके मुख की लिपि (कर्मफल) यमराज स्वयं मिटा देते हैं।
शुक्लपक्षे यदा देवि तृतीया बुधसंयुता।
श्रवणया च संयुक्ता तुलसी पुण्यदा तदा।।२९।।
जब शुक्लपक्ष की तृतीया बुधवार के साथ और श्रवण नक्षत्रयुक्त हो, उस दिन तुलसी पूजा विशेष पुण्य प्रदान करती है।
।। इति श्री तुलसीगीता सम्पूर्ण: ।।
तुलसी देवी श्रीहरि की अर्धांगिनी स्वरूपा हैं। जो मनुष्य श्रद्धा से तुलसी की सेवा, पूजन, रोपण या नामस्मरण करता है,वह विष्णुलोक का अधिकारी होता है। तुलसीवन ही कलियुग का जीवंत तीर्थ है।
*।। जय जय तुलसी मैया की।।*
*🕉️लोभम हित्व सुखी भवति🕉️*
अर्थात् लोभ पर विजय पाकर ही सुख का बोध हो सकता है। लोभ हमें भौतिक, बौध्दिक और आध्यात्मिक तीनों प्रकार के सुखों से दूर कर देता है। दुर्योधन-दुशासन भी लालच के वशीभूत, असीम वैभव पाकर भी आनन्दमय जीवन न जी सके थे। इसलिए हमें लालच को हृदय से निकाल देना चाहिए, और यह, केवल त्याग की भावना को विकसित करके ही सम्भव है। जीवन में जब त्याग या दान की प्रबलता बढ़ेगी तो लोभ या लालच स्वतः पलायन कर जाएगा। हम जल से भरे गिलास को दूध से नहीं भर सकते, इसके लिए पहले गिलास को खाली करना होगा, फिर उसमें दूध भरा जा सकता है। इसी तरह, हमको जीवन के सुखों का आनंद लेने के लिए लोभ से छुटकारा पाना होगा और अपने हृदय को त्याग एवं बलिदान से सराबोर करना होगा।
अपने जीवन में लालच का परित्याग करना सीखिए, यही से जीवन में सुख का आभास होना शुरू हो जाएगा।
🙏🏻🌷🌻☘🌸🌹🌼🌺💐🙏🏻🎉✨ 🌹 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 🌹 ✨🎉
🙏 जिनका आज जन्मदिन है, उन्हें हृदय से शुभकामनाएं, बधाई और मंगल आशीर्वाद! 🙏
📅 जन्मदिन: 3 नवम्बर
🔢 मूलांक: 3 (बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधि अंक)
🪔 आपका स्वभाव:
आप निष्कपट, दयालु, तथा तार्किक विचारों वाले व्यक्ति हैं। आपके व्यक्तित्व में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और दार्शनिक दृष्टिकोण की झलक रहती है।
आप सामाजिक, ऊर्जावान और परिपूर्णता के पक्षधर हैं। अनुशासनप्रिय होने के कारण कई बार आप कठोर भी प्रतीत हो सकते हैं, परंतु आपका उद्देश्य सदा न्यायपूर्ण होता है।
🌟 आपके लिए विशेष:
🗓️ शुभ दिनांक: 3, 12, 21, 30
🔢 शुभ अंक: 1, 3, 6, 7, 9
🎆 शुभ वर्ष: 2028, 2030, 2031, 2034, 2043, 2049, 2052
🎨 शुभ रंग: पीला, सुनहरा, गुलाबी
🛕 ईष्टदेव: माँ सरस्वती, देवगुरु बृहस्पति, भगवान विष्णु
📈 आपका आज का भविष्यफल:
🕉️ घर या परिवार में शुभ कार्य होंगे।
🤝 मित्रों का सहयोग मिलेगा, और समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा।
🚘 किसी विशेष कार्य से यात्रा संभव है, जो लाभदायक सिद्ध होगी।
💼 व्यापार में नई योजनाएँ बन सकती हैं, सफलता के योग प्रबल हैं।
🎓 शिक्षा या परीक्षा में सफलता के संकेत हैं।
❤️ दांपत्य जीवन सुखद रहेगा, मानसिक शांति प्राप्त होगी।
🌼 ईश्वर से प्रार्थना है कि आपका जीवन सदैव प्रकाश, प्रेम और समृद्धि से आलोकित रहे। 🌼
🙏 शुभ जन्मदिन! 🙏
💛 देवगुरु बृहस्पति के आशीर्वाद से आपके जीवन में सदैव ज्ञान, सम्मान और सफलता बनी रहे। 💛
*आज का राशिफल*
*〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️*
*मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)*
*आज का दिन आपके लिए मान-सम्मान में वृद्धि लेकर आने वाला है। आपको बिजनेस में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। दान पुण्य के कार्यों में आपकी काफी रुचि रहेगी। जीवनसाथी का सहयोग और सानिध्य आपको भरपूर मात्रा में मिलेगा। आपको अपने बेवजह के कामों को लेकर कुछ टेंशन हो सकती है। आपने यदि ससुराल पक्ष के किसी व्यक्ति से कोई लेनदेन किया, तो उससे आपका कोई नुकसान होने की संभावना है।*
*वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)*
*आज आपको काम को लेकर टेंशन बनी रहेगी। आपकी किसी मित्र से भी खटपट हो सकती हैं। संतान के करियर को लेकर आप उन्हें कहीं बाहर भेज सकते हैं। कारोबार में आपको एक नई गति मिलेगी। आप अपने अनुभवों से काम करेंगे, तो आपको अच्छी सफलता हासिल होगी। घूमने-फिरने के दौरान आपको कोई महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। आपके पिताजी की सेहत में उतार-चढ़ाव रहने से आप परेशान रहेंगे।*
*मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)*
*आज का दिन आपके लिए स्वास्थ्य के लिहाज से कमजोर रहने वाला है। आपका कोई बनते-बनते काम अटक सकता है। माता जी से कुछ पारिवारिक मामलों को लेकर बातचीत कर लें, नहीं तो कोई भयंकर लड़ाई झगड़ा हो सकता है। कार्यक्षेत्र में आप पर उच्च अधिकारियों की कृपा बनी रहेगी। आपका किसी पुरानी गलती से पर्दा उठ सकता है। आपको अपनी इन्कम को बढ़ाने के सोर्सो पर ध्यान दें।*
*कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)*
*आज का दिन आपके लिए बढ़िया रहने वाला है। आपको किसी नए पद की प्राप्ति होने से खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा और आपका कोई सरकारी काम यदि लंबे समय से अटका हुआ था, तो वह भी पूरा हो सकता है। आप कहीं धार्मिक यात्रा पर जाने की तैयारी कर सकते हैं। आपकी मन को आज सुकून मिलेगा, क्योंकि जीवनसाथी भी आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। आपके परिवार में पद प्रतिष्ठा बढ़ने से आज खुशी होगी। जल्दबाजी में आपसे कोई गड़बड़ी हो सकती है।*
*सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)*
*आज का दिन आपके लिए जिम्मेदारी से काम करने के लिए रहेगा। आप अपने लंबे समय से रुके हुए कामों को पूरा करेंगे और संतान पक्ष की ओर से आपको कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। आपका कोई विरोधी आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकता है। प्रेम जीवन जी रहे लोगों को अपने साथी के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। राजनीति में कार्यरत लोग किसी नए पद को पाकर काफी खुश होंगे।*
*कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)*
*आज का दिन आपके लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। आपके शत्रु में प्रबल रहेंगे, लेकिन वह आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। प्रेम जीवन में चल रही समस्याओं से आपको छुटकारा मिलेगा। मन में प्रसन्नता बनी रहेगी। विद्यार्थियों ने यदि किसी परीक्षा में भाग लिया था, तो उसके परिणाम आ सकते हैं। आपको वरिष्ठ सदस्यों का पूरा सहयोग मिलेगा। आपकी एक साथ कई काम हाथ लगने से व्याकाग्रता बढ़ेगी।*
*तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)*
*आज का दिन आपके लिए इनकम को बढ़ाने वाला रहेगा। आपको अपनी वाणी की सौम्यता को बनाए रखना होगा। नौकरी मे आपको कुछ समस्या चल रही थी, तो आप उसे दूर करने की कोशिश करेंगे। आपको कोई जिम्मेदारी भरा काम मिलने से आप उसको लेकर लापरवाही ना दिखाएंगे। आपके पिताजी का कोई पुराना रोग उभर सकता है, जो आपकी टेंशन को बढ़ाएगा।*
*वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)*
*आज आपकी यश और कीर्ति बढ़ेगी। नौकरी में कार्यरत लोगों को अपने वाणी पर संयम रखना होगा। आपको आपका रुका हुआ धन मिलने से आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन आप अपने कामों को लेकर ढील बिल्कुल ना दें। आपका समय मौज-मस्ती में बीतेगा। आपके बॉस से आपकी किसी बात को लेकर कहासुनी हो सकती है। आपको किसी दूसरे के मामले में बेवजह बोलने से बचना होगा।*
*धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)*
*आज आपको अपने बढ़ते खर्च पर कंट्रोल करने की आवश्यकता है। आपका धन यदि कहीं फंसा हुआ था, तो वह भी आपको मिल सकता है। परिवार में यदि प्रॉपर्टी को लेकर कोई मतभेद उत्पन्न हो, तो आप उसमें किसी अजनबी से कोई सलाह मशवरा ना करें। आपको अपने खर्चों को लेकर बजट बनाकर चलना होगा। व्यापार के सिलसिले में आपको यात्राएं भी करनी पड़ेगी। आपकी कोई मन की इच्छा पूरी हो सकती है।*
*मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)*
*आज का दिन आपके लिए अनुकूल रहने वाला है। आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी, जो विद्यार्थी किसी प्रतियोगिता की तैयारी में लगे हैं, उन्हें अपने कामों पर पूरा ध्यान देना होगा। वाहन की अकस्मात खराबी के कारण आपका खर्चा बढ़ सकता है। कार्यक्षेत्र में आपको टीमवर्क के जरिए काम करने का मौका मिलेगा। आप किसी धार्मिक स्थान पर जाने की प्लानिंग कर सकते हैं। आपको अपने किसी पुराने मित्र से लंबे समय बाद मिलकर खुशी होगी।*
*कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)*
*आज का दिन आपके लिए किसी नई संपत्ति की प्राप्ति के लिए रहेगा। आपको आर्थिक लेनदेन मे सावधानी बरतनी होगी। आप अपने जरूरी कागजातों पर पूरा ध्यान दें। घर परिवार में सदस्यों का आपको पूरा सपोर्ट मिलेगा। परिवार में किसी नए मेहमान का आगमन हो सकता है। विद्यार्थी शिक्षा में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। आपको अपनी किसी पुरानी गलती से सबक लेना होगा। आपकी कुछ नया करने की इच्छा जागृत हो सकती है।*
*मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)*
*आज का दिन आपके लिए एक के बाद एक खुशखबरी लेकर आने वाला है। आपको अपनी बुद्धि से लिए गए निर्णय से फायदा होगा। आप किसी अजनबी पर भरोसा ना करें। माता-पिता का आशीर्वाद से आपका रुका हुआ काम होगा पूरा होगा। बिजनेस कर रहे लोगों के लिए दिन लाभदायक रहने वाला है। आपकी सेहत में कुछ उतार-चढ़ाव रहने से आपका मन परेशान रहेगा। दांपत्य जीवन में खुशियां रहेगी। आप कहीं घूमने-फिरने की प्लानिंग कर सकते हैं।*

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