🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक – 03 जनवरी 2026*
🌤️ *दिन – शनिवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शिशिर ॠतु*
🌤️ *मास – पौष*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – पूर्णिमा शाम 03:32 तक तत्पश्चात प्रतिपदा*
🌤️ *नक्षत्र – आर्द्रा शाम 05:27 तक तत्पश्चात पुनर्वसु*
🌤️ *योग – ब्रह्म सुबह 09:05 तक तत्पश्चात इन्द्र*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 10:00 से सुबह 11:22 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 07:18*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:08*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – व्रत पूर्णिमा, पौषी पूर्णिमा,माघ स्नान आरम्भ*
💥 *विशेष – पूर्णिमा एवं व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *पुष्य नक्षत्र योग* 🌷
➡ *04 जनवरी 2026 रविवार को दोपहर 03:11 से 05 जनवरी सूर्योदय तक रविपुष्यामृत योग है ।
🙏🏻 *१०८ मोती की माला लेकर जो गुरुमंत्र का जप करता है, श्रद्धापूर्वक तो २७ नक्षत्र के देवता उस पर खुश होते हैं और नक्षत्रों में मुख्य है पुष्य नक्षत्र, और पुष्य नक्षत्र के स्वामी हैं देवगुरु ब्रहस्पति | पुष्य नक्षत्र समृद्धि देनेवाला है, सम्पति बढ़ानेवाला है | उस दिन ब्रहस्पति का पूजन करना चाहिये | ब्रहस्पति को तो हमने देखा नहीं तो सद्गुरु को ही देखकर उनका पूजन करें और मन ही मन ये मंत्र बोले –*
*ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |…… ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |*
🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *कैसे बदले दुर्भाग्य को सौभाग्य में* 🌷
🌳 *बरगद के पत्ते पर गुरुपुष्य या रविपुष्य योग में हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें |*
🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *रविपुष्यामृत योग* 🌷
🙏🏻 *‘शिव पुराण’ में पुष्य नक्षत्र को भगवान शिव की विभूति बताया गया है | पुष्य नक्षत्र के प्रभाव से अनिष्ट-से-अनिष्टकर दोष भी समाप्त और निष्फल-से हो जाते हैं, वे हमारे लिए पुष्य नक्षत्र के पूरक बनकर अनुकूल फलदायी हो जाते हैं | ‘सर्वसिद्धिकर: पुष्य: |’ इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है | पुष्य नक्षत्र में किये गए श्राद्ध से पितरों को अक्षय तृप्ति होती है तथा कर्ता को धन, पुत्रादि की प्राप्ति होती है |*
🙏🏻 *इस योग में किया गया जप, ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य में विवाह व उससे संबधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं | (शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याय 10)*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
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आओ समझें ज्योतिष व तंत्र का रहस्य….
पं. कृपाराम उपाध्याय (भोपाल)
“पित्र-श्राप” का सही पता सिर्फ जन्म कुण्डली देखकर ही नहीं लगाया जा सकता है, अपितु कुंंडली ना होने पर इसके अलावा प्रश्न कुंडली, हस्त-रेखा (सामुद्रिक विज्ञान), अपराविज्ञान और शकुन शास्त्र के माध्यम से भी “पित्र दोष” का सही पता लगाया जा सकता है, परन्तु प्राय ये विधिंयाँ प्रचलन में नहीं है लुप्तप्राय सी हो गयी हैं।
मुख्य रूप से जन्म कुण्डली से ही पित्र दोष का निर्णय किया जाता है।
चार प्रकार के प्रवल पित्र-दोष :-
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सूर्य…. आत्मा एवं पिता का कारक गृह है पित्र पक्ष का विचार सूर्य से होता है।
“चन्द्रमा” मन एवं माता पक्ष का कारक ग्रह है।
मंगल… हमारे रक्त , जीन्स, परम्परा, पौरुष और बंधुत्व पक्ष का कारक ग्रह है।
सुक्र…. भी हमारे भोग, ऐश्वर्य और स्त्री पक्ष का कारक ग्रह है।
सूर्य जब राहु- की युति में हो तो ग्रहण योग बनता है, सूर्य का ग्रहण अतः पिता या आत्मा का ग्रहण हुआ यानि पित्र-श्राप या श्रापित आत्मा। और चंद्र केतु की युति, अमावस्या दोष या चंद्र ग्रहण दोष भी एक प्रकार का पित्र दोष ही होता है क्यों कि चंद्र हमारी भोंतिक देह का कारक है।
चार अत्यंत कष्टकर पित्र-दोष :-
“सूर्य”—- सूर्य राहू सूर्य शनी या सूर्य केतु की युति पित्र दोष का निर्माण करती है।
“चन्द्र”— अगर राहू, केतुु , शनी या सूर्य की युति में हो तो पित्र दोष (मात्र पक्ष) होता है।
“मंगल”— भी यदि पूर्णास्त है या इन क्रूर ग्रहों से युक्त है तो भी वंशानुगत पित्र दोष होता है।
“सुक्र”— या सप्तम भाव यदि सूर्य, मंगल, शनी या राहु से युक्त हो तो भी स्त्री पक्ष से पित्र श्राप बनता है।
वैसे समस्त ग्रहों के दूषित होने से कुंंडली में विभिन्न प्रकार के अन्य पित्रादि श्राप भी बन सकते हैं…. परंतु अभी हम कुछ प्रमुख पित्र दोषों (श्रापों) को समझते हैं :-
शनि सूर्य पुत्र है, यह सूर्य का नैसर्गिक शत्रु भी है, अतः शनि की सूर्य पर दर्ष्टि भी पित्र दोष उत्पन करती है। इसी पित्र दोष से जातक आदि-व्याधि-उपाधि तीनो प्रकार की पीड़ाओं से कष्ट उठाता है, उसके प्रत्येक कार्ये में अड़चनें आती रहती हैं, कोई भी कार्य सामान्य रूप से निर्विघ्न सम्पन्न नहीं होते है, दूसरे की दृष्टि में जातक सुखी-सम्पंन दिखाई तो पड़ता है, परन्तु जातक आंतरिक रूप से दुखी होता रहता है, जीवन में अनेक प्रकार के कष्ट उठाता है, कष्ट किस प्रकार के होते है इसका विचार व निर्णय सूर्य राहु की युति अथवा सूर्य शनि की दृष्टि सम्बन्ध या युति जिस भाव में हो उसी पर निर्भर करता है, कुंडली में चतुर्थ भाव नवम भाव, तथा दशम भाव में सूर्य राहु अथवा चन्द्र राहु की युति से जो पित्र दोष उतपन्न होता उसे श्रापित पितृ दोष कहते है, इसी प्रकार पंचम भाव में राहु गुरु की युति से बना गुरु चांडाल योग भी प्रबल पितृ दोष कारक होता होता है, संतान भाव में इस दोष के कारण प्रसव कष्टकारक होते हैं, आठवे या बारहवे भाव में स्थित गुरु प्रेतात्मा से पित्र दोष करता है, यदि इन भावो में राहु बुध की युति में हो तथा सप्तम, अष्टम भाव में राहु और शुक्र की युति में हो तब भी पूर्वजो के दोष से पित्र दोष होता है, यदि राहु शुक्र की युति द्वादश भाव में हो तो पित्र दोष स्त्री जातक से होता है इसका कारण भी स्पष्ट कर दें क्योंकि बारहवाँ भाव भोग एव शैया सुख का स्थान है, अतः इस भावके दूषित होने से स्त्री जातक से दोष (श्राप) होना स्वभाविक है ये अनैतिक संबंधों का कारण भी हो सकता है।
अन्य श्रापित योग :-
1⃣ —यदि कुण्डली में अष्टमेश राहु के नक्षत्र में तथा राहु अष्टमेश के नक्षत्र में स्थित हो तथा लग्नेश निर्वल एवं पीड़ित हो तो जातक पित्र दोष एव भूत प्रेतादि आदि से शीघ्र प्रभावित होते हैं।।
2⃣–यदि जातक का जन्म सूर्य चन्द्र ग्रहण में हो तथा घटित होने वाले ग्रहण का सम्बन्ध जातक के लग्न, षष्ट एव अष्टम भाव से बन रहा हो तो ऐसे जातक पित्र दोष,भूत प्रेत, एव आत्माओं के प्रभाव से पीड़ित रहते हैं।।
3⃣– यदि लग्नेश जन्म कुण्डली में अथवा नवमांश कुण्डली में अपनी नीच राशि में स्थित हो तथा राहु , शनि, मंगल के प्रभाव से युक्त हो तो जातक पित्र दोष, प्रेत्माओं का शिकार होता है।।
4⃣ — यदि जन्म कुण्डली में अष्टमेश पंचम भाव तथा पंचमेश अष्टम भाव में स्थित हो तथा चतुर्थेश षष्ठ भाव में स्थित हो और लग्न या लग्नेश पापकर्तरी (प्रतिबंधक) योग में स्थित हो तो जातक मातृ श्राप एवं अतृप्त मात्र आत्माओं से प्रभावित होता है।।
5⃣– यदि चन्द्रमा जन्म कुण्डली अथवा नवमांश कुण्डली में अपनी नीच राशि में स्थित हो या चन्द्र एव लग्नेश का सम्बन्ध क्रूर एव पाप ग्रहो से बन रहा हो तो जातक पित्र दोष, प्रेत-वाधा, एवं
पित्रात्माओं से प्रभावित होता है।।
6⃣– यदि कुंडली में शनि एव चन्द्रमा की युति हो अथवा चन्द्रमा शनि के नक्षत्र में, अथवा शनि चन्द्रमा के नक्षत्र में स्थित हो तो जातक पित्र दोष, एव अतृप्त आत्माओं से शीघ्र प्रभावित होता है।।
7⃣– यदि लग्नेश जन्म कुंडली में अपनी शत्रु राशि में निर्बल आव दूषित होकर स्थित हो तथा क्रूर एव पाप ग्रहो से युक्त हो तथा शुभ ग्रहो की दृष्टि लग्न भाव एव लग्नेश पर नहीं पड़ रही हो, तो जातक प्रेतात्माओं, एव पित्र दोष से पीड़ित होता है।।
8⃣– यदि जातक का जन्म कृष्ण पक्ष की अष्टमी से शुक्ल पक्ष की सप्तमी के मध्य हुआ हो और चन्द्रमा अस्त, निर्बल, एव दूषित हो, अथवा चन्द्रमा पक्षबल में निर्बल हो, तथा राहु शनि से युक्त नक्षत्र परिवर्तन योग बना रहा हो तो श्राप के कारण जातक अदृश्य रूप से मानसिक बाधाऔं का शिकार होता है।।
9⃣– यदि कुंडली में चन्द्रमा राहु के नक्षत्र में स्थित हो तथा अन्य क्रूर एव पाप ग्रहो का प्रभाव चन्द्रमा, लग्नेश, एव लग्न भाव पर हो तो जातक अतृप्त आत्माओं से प्रभावित होता है।।
🔟–यदि कुंडली में गुरु का सम्बन्ध राहु से हो तथा लग्नेश एव लग्न भाव पापकर्तरी योग में हो तो जातक को अतृप्त आत्माए अधिक परेशान करती है ।।
⏸–यदि बुध एव राहु में नक्षत्रीय परिवर्तन हो तथा लग्नेश निर्बल होकर अष्टम भाव में स्थित हो साथ ही लग्न एव लग्नेश पर क्रूर एव पाप ग्रहो का प्रभाव हो तो जातक अतृप्त आत्माओं से परेशान रहता है और मनोरोगी बन जाता है।।
1⃣2⃣– यदि कुंडली में अष्टमेश लग्न में स्थित हो (मेष लग्न को छोडकर अन्य लग्नों में) तथा लग्न भाव तथा लग्नेश पर अन्य क्रूर तथा पाप ग्रहो का प्रभाव हो तो जातक अतृपत आत्माओं का शिकार होता है।।
1⃣3⃣– यदि जन्म कुण्डली में राहु जिस राशि में स्थित हो उसका स्वामी निर्बल एव पीड़ित होकर अष्टम भाव में स्थित हो तथा लग्न एव लग्नेश पापकर्तरी योग में स्थित हो तो जातक ऊपरी हवा, प्रेत बाधित और आत्माओं से परेशान रहता है ।।
सिर्फ इतना ही नहीं और भी दूषित ग्रहों से पित्र-ऋण (श्राप) दोष भी बनते हैं जो जीवन में बहुत ही अवरोध पैदा करके नाना भाँति के कष्ट देते हैं :-
जैसे:-
पित्र दोष(श्राप) के कारण व प्रकार
1- “सूर्य” से पिता, चाचा, ताऊ, दादा, परदादा, नाना, मामा, मौसा या समतुल्य पैत्रिक (पित्रपुरुस) ऋण (श्राप)।
2-“चंद्र” से मात्र, मात्रपक्ष या मात्रतुल्य स्त्रियों के ऋण (श्राप)।
3-“मंगल” से भाई, मित्र, स्नेही या इनके समान पित्रों का ऋण (श्राप)।
4-“बुध” से बहन-भांजी बुआ, साली, ननद या समतुल्य का ऋण (श्राप)।
5-“गुरू” से गुरुदेव, ब्राह्मण, महात्मा, ज्ञानीजन, शिक्षक, विद्वान, पंडित या कुल पूज्य पुरुस आदि का ऋण (श्राप)।
6-“सुक्र” से पत्नी, प्रेमिका अथवा शैया सुख देने वाली अन्य स्त्रियों का ऋण (श्राप)।।
7-“शनी” से सेवक, कर्मचारी, मातहत, वेटर, मजदूर, मिश्त्री, चांडाल (डोम), भिकारी, या दीन-दुखियों का ऋण (श्राप)।।
8-“राहु-केतु” से प्राकृतिक, पर्यावरण, सामाजिक, क्षेत्रपाल, देश, मात्रभूमी, सरकारी अधिकारी, कर चोरी, जाने-अन्जाने की गई हिंसा, जीवहत्या या अनैतिक व्यवहार व व्यापार के अभिश्राप (ऋण)।।
👉 हस्त-रेखा से भी:-
भिन्न-भिन्न ग्रह पर्वतों के योग एवं पर्वतों पर पाऐ जाने वाले चिन्ह जैसे:- क्रोस, जाल, द्वीप, वलय, भंग, दाग (तिलादि), झाँई, या अन्य अशुभ चिन्हों से भी सभी प्रकार के पित्रादि दोषों (श्रापों) को सहजता से जाना जा सकता है। बस थोडे से अभ्यास की जरूरत होती है ये सब देखने के लिऐ।।
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पितृ दोष (श्राप) भी भांति भांति के पाऐ जाते हैं, इन्ही पित्रादि दोषो के कारण जातक को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, और शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, पारिवारिक, अकस्मात दुर्घटनाओं से परेशान रहता है, और शनै-शनै जातक का जीवन नर्क बनता जाता है, एवं कई बार तो दिखने में सम्पंन व्यक्ती भी आंतरिक तौर से पीडित होकर मृतकों जैसा जीवन जीने पर मजबूर हो सकता है और दोष की सही जानकारी ना होने पर श्रापमुक्ती के लिऐ दर-दर भटकता रहता है व तमाम तंत्र, मंत्र, रत्न , व्रत, जाप या उपाय करके भी पीडित रहता है अन्ततः वैदिक तंत्र-ज्योतिषादि को ही ढ़ोंग मान बैठता है।।
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👉 तब जाचक करें क्या:-
एक बात ध्यान दें कि मोत के अलावा हर बीमारी का इलाज भी है हर एक श्राप, दोष, दुर्भाग्य, और पाप का प्रायश्चित कर्म-विधान व उसको करने का सही स्थान और मुहुर्त भी हमारे वैदिक शास्त्रों में बताया है एवं अत्यंत फलदायी भी होता है ये अकाट्य सत्य है वर्तमान कर्मों से … भविष्य का लेख भी बदल सकता है।।
अतः जिस तरह पित्रादि-दोष (श्राप) या ऋण कई प्रकार के होते हैं….. उसी तरह इनके निदान (प्रायश्चित कर्म-विधान) भी देश, काल, परिस्थितियों के आधीन होकर विभिन्न तरीके से ही कराना उचित होता है।
👉 इसलिऐ सर्वप्रथम जाचक को… इस विषय के विषेशज्ञ व तत्वज्ञ ज्योतिषाचार्य से उचित दक्षिणा देकर सही परामर्श लेना चाहिये और तत्पश्चात उसके द्वारा बताऐ गये “स्थान व मुहुर्त” में ….. पूर्ण श्रद्धा और समर्पण भाव से इन श्रापों (दोषों) का प्रायश्चित कर्म-विधान करवाना चाहिऐ…. तथा आचार्यों द्वारा बताऐ गये नियम-संयमों का पूर्ण विस्वास से पालन करना चाहिऐ…. फिर आप देखेंगे ये दोष भी आपकी उन्नती में मील के पत्थर बन जाऐंगे…. शुभास्तु।।
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻🙏🏻
जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष 🙏🏻
आपका जन्मदिन: 3 जनवरी
अंक ज्योतिष के अनुसार आपका मूलांक 3 आता है। यह बृहस्पति का प्रतिनिधि अंक है। ऐसे व्यक्ति निष्कपट, दयालु एवं उच्च तार्किक क्षमता वाले होते हैं। आप दार्शनिक स्वभाव के होने के बावजूद एक विशेष प्रकार की स्फूर्ति रखते हैं। आपकी शिक्षा के क्षेत्र में पकड़ मजबूत होगी। आप एक सामाजिक प्राणी हैं। आप सदैव परिपूर्णता या कहें कि परफेक्शन की तलाश में रहते हैं यही वजह है कि अकसर अव्यवस्थाओं के कारण तनाव में रहते हैं। अनुशासनप्रिय होने के कारण कभी-कभी आप तानाशाह भी बन जाते हैं।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 3, 12, 21, 30
शुभ अंक : 1, 3, 6,7, 9,
शुभ वर्ष : 2028, 2030, 2031, 2034, 2043, 2049, 2052
ईष्टदेव : देवी सरस्वती, देवगुरु बृहस्पति, भगवान विष्णु
शुभ रंग : पीला, सुनहरा और गुलाबी
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
शुभ कार्य : घर या परिवार में शुभ कार्य होंगे। मित्र वर्ग का सहयोग सुखद रहेगा।
शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे। महत्वपूर्ण कार्य से यात्रा के योग भी है।
व्यापार : यह माह आपके लिए अत्यंत सुखद है। नवीन व्यापार की योजना भी बन सकती है।
करियर : किसी विशेष परीक्षा में सफलता मिल सकती है। नौकरीपेशा के लिए प्रतिभा के बल पर उत्तम सफलता का है। दांपत्य जीवन में सुखद स्थिति रहेगी।
🌹आज का राशिफल 🌹
*दिनांक : 03 जनवरी 2026*
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन आपको कई शुभ फल प्रदान करेगा। नए कार्य में निवेश करने के लिए आज का दिन अनुकूल रहेगा लेकिन नए कार्य का आरम्भ आज ना करें अन्यथा हानि हो सकती है। आज शेयर मार्किट में निवेश भविष्य के लिए लाभदायी रहेगा। आज भाई-बंधुओं अथवा सांझेदार के साथ व्यापार एवं घर के महत्त्वपूर्ण विषयो पर चर्चा होगी लेकिन आपका सनकी स्वभाव बनती बात को बीच मे बिगाड़ सकता है। परिवार में किसी मांगलिक कार्यक्रम का आयोजन अथवा इसकी रूप रेखा बनेगी। सेहत की पहले ही जांच करा लें आने वाले दिनों में गड़बड़ हो सकती है।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन आपके लिए मध्यम फलदायी रहेगा। मध्यान तक का समय आलस्य में रहने के कारण किसी भी कार्य को लेकर गंभीर नही रहेंगे आज नौकरी व्यवसाय में लाभ के लिए थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है इसका फल थोड़ी विलम्ब से ही पर अवश्य मिलेगा। नौकरी-व्यवसाय में परिवर्तन का विचार भी मन में उठ सकता है। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन निराशाजनक रहेगा धन की आमद के हिसाब से खर्च दुगना होगा। परिवारजनों के साथ बैठकर पुराने महत्वपूर्ण विषयो पर चर्चा करेंगे लेकिन आज कोई निष्कर्ष निकलना मुश्किल ही है। धर्म कर्म में आस्था बढ़ेगी धार्मिक पर्यटन भी करेंगे।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन आपके लिए आशाजनक रहेगा। आज विशेषकर के दिनों से उलझे पैतृक कार्य एवं विदेश सम्बंधित मामलो में अधिक सफल होने की सम्भवना है। व्यवसायी वर्ग आज आलस्य से भरे रहेंगे कार्य क्षेत्र पर मन मारकर कार्य करेंगे लेकिन इनको आयत-निर्यात से अच्छा लाभ हो सकता है। आज विदेश जाने के इच्छुक व्यक्ति के लिए आगे के मार्ग प्रशस्त होंगे। बाहरी लोगो का सहयोगात्मक वातावरण से आत्मविश्वाश बढेगा। रुके कार्य पूर्ण होंगे। घर मे आज किसी सदस्य की शंकालु प्रवृति कुछ समय के लिये अशान्ति फैलाएगी। मनोरंजन पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आपका आज का दिन अशुभ फलदायी रहेगा आज आपमे अंदरूनी तौर पर बुद्धि विवेक भरा रहेगा लेकिन इसे व्यवहार में नही उतार पाएंगे स्वभाव भी आज मौज शौक पूर्ण कराने को तैयार रहेगा। कार्य क्षेत्र पर परिश्रम के अनुरूप ही लाभ होगा इसलिए व्यर्थ के कार्यो में पड़कर समय खराब करने से बचे मध्यान के बाद आकस्मिक खर्च परेशान करेंगे। धन की उगाही के कारण विवाद हो सकता है। पारिवारिक सदस्यों के साथ भी वाणी की कटुता के कारण विवाद की स्थिति बन सकती है। लंबी यात्रा की योजना बनेगी लेकिन यथा संभव बचे अन्यथा बीमार पड़ सकते है। शरीर के अंगों में दर्द की शिकायत रहेगी।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आपके आज के दिन का अधिकांश समय सामाजिक गतिविधियों में व्यतीत होगा। स्वभाव में परोपकार की भावना रहने से किसी के कार्य को जल्दी से मना नही कर पाएंगे जिससे अपने ही कार्यो में विलंब होगा। व्यापार सामान्य रहेगा धन की आमद खर्च अनुसार हो जाएगी लेकिन आज फिजूल खर्चो में अधिकता आएगी जिससे बजट प्रभावित होगा। दान-पुण्य के अवसर आएंगे। किसी पुराने मित्र से भेंट होने पर पुरानी यादें ताजा होंगी। संध्या के समय रमणीय-पर्यटक स्थल पर भोजन एवं मनोरंजन रोमांचित करेगा। पारिवारिक दायित्वों की पूर्ति करेंगे।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन आपके लिए लाभदायक रहेगा। आज आपकी परोपकार की भावना फलीभूत होगी पूर्व में किसी की सहायता करने का फल प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में अवश्य मिलेगा। वैसे तो आज आप ज्यादा काम करने के पक्ष में नही रहेंगे फिर भी जिस भी कार्य मे हाथ डालेंगे वसमे अन्य की तुलना में कम समय मे अधिक लाभ कमा लेंगे प्रत्येक क्षेत्र से आज आपको आशाजनक मिलेगा। व्यापार एवं नौकरी में आत्मविश्वाश के साथ कार्य करेंगे। परंतु आज किसी भी प्रकार के सरकारी दस्तावेज ना करवाये। पत्नी एवं पुत्र का पूर्ण सहयोग मिलेगा लेकिन इनकी किसी बड़ी मनोकामना पूर्ति में अधिक धन खर्च करना पड़ेगा।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन मिश्रित फलदायी रहेगा। आज व्यापार में आय एवं खर्च बराबर रहने से बचत नहीं कर पाएंगे स्वभाव से संतोषी रहने के कारण आप ज्यादा झंझट वाले कार्यो में पड़ना पसंद भी नही करेंगे लेकिन आज थोड़े परिश्रम में अधिक लाभ कमा सकते है इसके लिये आलस्य एवं लापरवाही स्वभाव से निकालनी होगी। कार्य क्षेत्र पर महत्त्वपूर्ण सौदे हाथ से ना निकल जाए इसका ध्यान रखे। दोपर के बाद मनोरंजन के अवसर तलाशेंगे इसपर खर्च भी होगा। परिवार में किसी बात को लेकर व्यर्थ बहस हो सकती है। किसी पुरानी बीमारी के फिर से उभरने पर तकलीफ हो सकती है।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आपका आज का दिन सेहत के दृष्टिकोण से हानिकारक रहेगा दिन के पहके भाग में शरीर मव शिथिलता अनुभव करेंगे अत्यधिक कार्य बोझ के कारण सेहत बिगड़ सकती है। नेत्र एवं रक्त सम्बंधित रोग की आशंका है। आज आर्थिक हो या व्यवहारिक किसी भी कार्य मे जोखिम लेने से बचे खासकर आज किसी की जमानत भूल कर भी ना ले अन्यथा बदनामी होने का भय है। किसी परिचित से धोखा मिलने की भी सम्भवना है। उधार संबंधित आर्थिक लेन-देन से बचें। कोर्ट-कचहरी के कार्यो को आज ना करें। आज पूँजी निवेश के कार्यो में हानि हो सकती है। परिजनों को भी आज मन का भेद ना दें।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन आपके लिए अनुकूलता से भरा रहेगा। आज जो कार्य आपको कठिन नजर आ रहे थे वे भी आपके प्रत्येक कार्य आसानी से पूर्ण होते जाएंगे। आर्थिक रूप से दिन प्रसन्नता दायक रहेगा अकस्मात धन की आमद होने पर भविष्य के लिए बचत कर पाएंगे। कार्यालय तथा व्यावसायिक आज कम ही समय दे पाएंगे फिर भी यहाँ का सहयोगी वातावरण मिलने से अधूरे कार्य कुछ विलंब से पूर्ण हो जाएंगे। परिजन भी कई दिनों के बाद आपके कार्य की सभी प्रशंशा करेंगे। बुजुर्गो का आशीर्वाद मिलेगा। संध्या बाद स्वास्थ्य संबंधित छोटी मोटी शिकायत रह सकती है।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन आपके लिए विपरीत फलदायक रहेगा। पूर्व में जिन कार्यो से लाभ की संभावना देख रहे थे उनके निरस्त होने अथवा किसी अन्य कारण से हानि होने के प्रबल योग है आज किसी भी नए कार्य का आरंभ ना करें आर्थिक विषयक पूर्व निर्धारित कार्यो को भी आज टालना ही बेहतर रहेगा। बनते कार्यो में विघ्न आने से बौखलाहट की स्थिति बनेगी। आपकी वाणी एवं व्यवहार से आज किसी का दिल दुखी ना हो इसका ध्यान रखें आकस्मिक क्रोध से बचे अन्यथा स्नेहीजनों से संबंधों में कटुता आएगी। स्वयं अथवा किसी प्रेमीजन की बीमारी पर आकस्मिक खर्च हो सकता है। आज किसी भी बात में अपनी प्रतिक्रिया देने से पहले ठीक से जांच लें।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन आपको मिश्रित फल देगा। आज प्रातः से ही किसी कार्य को लेकर दुविधा में फंसे रहेंगे खास कर आज किसी मनोकामना पूर्ति के लिये असमंजस की स्थिति में रहेंगे पूर्ति करने पर किसी के नाराज होने का भय सताएगा। किसी आसपडोसी अथवा स्वजनं से झड़प होने पर मन की एकाग्रता भंग होने से निर्णय शक्ति की कमी रहेगी। कार्य क्षेत्र पर आज मन कम ही लगेगा लाभ के अवसर हाथ से ना निकले इसका ध्यान रखे। आज आपका मुह पर बोलना व्यर्थ के झगडे करा सकता है। परिवार में आज वातावरण अशान्त रहेगा बड़े निर्णय सोच समझ कर ही लें। खर्च अधिक रहने की संभावना है।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आपका आज का दिन प्रतिकूल रहेगा। आज प्रातः किसी के साथ वाद-विवाद होने की संभावना है विवाद गंभीर रूप ना ले इसका ध्यान रखे क्रोध पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है अन्यथा प्रतिष्ठा की हानि होने के योग है। कार्य क्षेत्र पर लाभ की जगह उलझने बढ़ने से मेहनत करने से कतराएंगे। आज सरकार विरोधी निषेधात्मक कार्यो से बचे। आर्थिक लाभ आज ना के बराबर होगा ऊपर से आकस्मिक खर्च बढ़ने से हताशा होगी। फिजूल खर्च से आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी। तीखे एवं मादक पदार्थ के सेवन से बचें उदर सम्बंधित रोग हो सकते है।

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