Sanatan Panchang 01032026 Rashifal Samadhan

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🚩 ~ सनातन पंचांग ~ 🚩
🌤️ दिनांक – 01 मार्च 2026
🌤️ दिन – रविवार
🌤️ विक्रम संवत 2082
🌤️ शक संवत -1947
🌤️ अयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – वसंत ॠतु
🌤️ मास – फाल्गुन
🌤️ पक्ष – शुक्ल
🌤️ तिथि – त्रयोदशी शाम 07:09 तक तत्पश्चात चतुर्दशी
🌤️ नक्षत्र – पुष्य सुबह 08:34 तक तत्पश्चात अश्लेशा
🌤️ योग – शोभन दोपहर 02:33 तक तत्पश्चात अतिगण्ड
🌤️ राहुकाल – शाम 05:15 से शाम 06:46 तक
🌤️ सूर्योदय – 07:01
🌤️ सूर्यास्त – 06:41
👉 दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे

🚩 व्रत पर्व विवरण – प्रदोष व्रत, रविपुष्य योग (सूर्योदय से सुबह 08:34 तक)

💥 विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

🚩 ~ सनातन पंचांग ~ 🚩

🌷 ग्रहण दर्शन ना करें 🌷
➡️ 03 मार्च 2026 मंगलवार को खग्रास चन्द्रग्रहण (भारत में दिखेगा, जहां दिखेगा वहां ग्रहण के नियम पालनीय हैं।)

🌗 कोई-कोई TV Channel वाले नादान होते हैं, ग्रहण का दृश्य लाईव दिखाते हैं। ये नहीं देखना चाहिए और ग्रहण की छाया भी हम पर न पड़े इसका ध्यान रखना चाहिए।

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🚩 ~ सनातन पंचांग ~ 🚩

🌷 ग्रहण के समय उसके देवता का मंत्र जप 🌷

🌔 ग्रहण के समय चन्द्र देव के मंत्र —

🌷 ॐ सोमाय नमः
🌷 ॐ रोहिणी कान्ताय नमः
🌷 ॐ चन्द्रमसे नमः

👉 चन्द्र स्तुति —
दधीशंख: तुषाराभम् क्षीरोरदार्णव संनिभम्, नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्

👉 चन्द्र गायत्री मंत्र —
ॐ अमृतांगाय विदमहे कलारूपाय धीमहि तन्नः सोमः प्रचोदयात

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🚩 ~ सनातन पंचांग ~ 🚩

🌷 होली विशेष 🌷

🔥 होली के दिन भगवान भूधर स्वरूप का ध्यान एवं जप —

ॐ भूधराय नमः
ॐ भूधराय नमः
ॐ भूधराय नमः

धरणीम् च तथा देवीं अशोकेती च कीर्तयेत् ।
यथा विशोकाम धरणी कृत्वान्स्त्वां जनार्दनः ॥

होली की रात चंद्रमा को अर्घ्य देकर गुरुमंत्र जप करना अत्यंत शुभ माना गया है।

🌷 ॐ सोमाय नमः
🌷 ॐ नारायणाय नमः
🌷 ॐ श्रीं नमः

🙏🏻 लक्ष्मी मंत्र — ॐ श्रीं नमः

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हिन्दू धर्म से संबंधित तीन पशु पक्षी से जुड़े शकुन-अपशकुन
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प्राचीन समय के ऋषियों मुनियों ने अपने शोध में बताया था की प्रत्येक जानवर के विचित्र व्यवहार एवं हरकतों का कुछ न कुछ प्रभाव अवश्य होता है. जानवरों के संबंध में अनेको बाते  हमारे पुराणों एवं ग्रंथो में भी विस्तार से बतलाई गई है।

हमारे सनातन धर्म में माता के रूप में पूजनीय गाय के संबंध में तो बहुत सी बाते आप लोग जानते है होंगे परन्तु आज हम जानवरों के संबंध में पुराणों से ली गई कुछ ऐसी बातो के बारे में बतायेंगे जो आपने पहले कभी भी किसी से नहीं सुनी होगी. जानवरों से जुड़े रहस्यों के संबंध में पुराणों में बहुत ही विचित्र बाते बतलाई गई जो किसी को आश्चर्य में डाल देंगी।

कौए का रहस्य :-
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कौए के संबंध में पुराणों बहुत ही विचित्र बाते बतलाई गई है मान्यता है की कौआ अतिथि आगमन का सूचक एवं पितरो का आश्रम स्थल माना जाता है।

हमारे धर्म ग्रन्थ की एक कथा के अनुसार इस पक्षी ने  देवताओ और राक्षसों के द्वारा समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत का रस चख लिया था. यही कारण है की कौआ की कभी भी स्वाभाविक मृत्यु नहीं होती. यह पक्षी कभी किसी बिमारी अथवा अपने वृद्धा अवस्था के कारण मृत्यु को प्राप्त नहीं होता. इसकी मृत्यु आकस्मिक रूप से होती है।

यह बहुत ही रोचक है की जिस दिन कौए की मृत्यु होती है उस दिन उसका साथी भोजन ग्रहण नहीं करता. ये आपने कभी ख्याल किया हो तो यह बात गौर देने वाली है की कौआ कभी भी अकेले में भोजन ग्रहण नहीं करता यह पक्षी किसी साथी के साथ मिलकर ही भोजन करता है।

कौआ की लम्बाई करीब 20  इंच होता है, तथा यह गहरे काले रंग का पक्षी है. जिनमे नर और मादा दोनों एक समान ही दिखाई देते है. यह बगैर थके मिलो उड़ सकता है. कौए के बारे में पुराण में बतलाया गया है की किसी भविष्य में होने वाली घटनाओं का आभास पूर्व ही हो जाता है।

पितरो का आश्रय स्थल :- श्राद्ध पक्ष में कौए का महत्व बहुत ही अधिक माना गया है . इस पक्ष में यदि कोई भी व्यक्ति कौआ को भोजन कराता है तो यह भोजन कौआ के माध्यम से उसके पीतर ग्रहण करते है. शास्त्रों में यह बात स्पष्ट बतलाई गई है की कोई भी क्षमतावान आत्मा कौए के शरीर में विचरण कर सकती है।

भादौ महीने के 16 दिन कौआ हर घर की छत का मेहमान बनता है. ये 16 दिन श्राद्ध पक्ष के दिन माने जाते हैं. कौए एवं पीपल को पितृ प्रतीक माना जाता है. इन दिनों कौए को खाना खिलाकर एवं पीपल को पानी पिलाकर पितरों को तृप्त किया जाता है।

कौवे से जुड़े शकुन और अपशकुन :-
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👉 यदि आप शनिदेव को प्रसन्न करना चाहते हो कौआ को भोजन करना चाहिए।

👉 यदि आपके मुंडेर पर कोई कौआ बोले तो मेहमान अवश्य आते है।

👉 यदि कौआ घर की उत्तर दिशा से बोले तो समझे जल्द ही आप पर लक्ष्मी की कृपा होने वाली है।

👉 पश्चिम दिशा से बोले तो घर में मेहमान आते है।

👉  पूर्व में बोले तो शुभ समाचार आता है।

👉  दक्षिण दिशा से बोले तो बुरा समाचार आता है।

👉  कौवे को भोजन कराने से अनिष्ट व शत्रु का नाश होता है।

चीटियों का रहस्य :-
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चीटियों को हम एक बहुत तुच्छ एवं छोटा जानवर समझते है, परन्तु चीटियां बहुत ही मेहनती और एकता से रहने वाला जीव है. सामूहिक प्राणी होने के कारण चींटी सभी कार्यों को बांटकर करती है।

विश्वभर में लगभग 14000 से अधिक प्रजाति की चीटियां है.

चींटी के बारे में वैज्ञानिकों ने कई रहस्य उजागर किए हैं. चींटियां आपस में बातचीत करती हैं, वे नगर बनाती हैं और भंडारण की समुचित व्यवस्था करना जानती हैं. हमारे इंजीनियरों से कहीं ज्यादा बेहतर होती हैं ‍चींटियां. चींटियों का नेटवर्क दुनिया के अन्य नेटवर्क्स से कहीं बेहतर होता है. ये मिलकर एक पहाड़ को काटने की क्षमता रखती है।

चींटियां शहर को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं. चींटियां खुद के वजन से 100 गुना ज्यादा वजन उठा सकती हैं. मानव को चींटियों से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।

चीटियों दो प्रकार की होती है लाल चीटियां एवं काली चीटियां. शास्त्रों के अनुसार लाल चीटियां को शुभ तथा काली चीटियों को अशुभ माना गाय है. दोनों ही तरह की चींटियों को आटा डालने की परंपरा प्राचीनकाल से ही विद्यमान है. चींटियों को शकर मिला आटा डालते रहने से व्यक्ति हर तरह के बंधन से मुक्त हो जाता है।

हजारों चींटियों को प्रतिदिन भोजन देने से वे चींटियां उक्त व्यक्ति को पहचानकर उसके प्रति अच्छे भाव रखने लगती हैं और उसको वे दुआ देने लगती हैं. चींटियों की दुआ का असर आपको हर संकट से बचा सकता है।

👉  यदि आप कर्ज से परेशान है तो चीटियों को शक़्कर और आता डाले. ऐसा करने पर कर्ज की समाप्ति जल्द हो जाती है।

👉 जो प्रत्येक दिन चीटियों को आता देता है वह वैकुंठ धाम को प्रस्थान करता है।

👉 यदि आप लाल चीटियों को मुंह में अंडे दबाए देखते हो यह भी शुभ माना जाता है तथा परिवार में सुख समृद्धि बढ़ती है।

कुत्ते का रहस्य :-
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हमारे पुराणों में यह बतलाया गया है की कुत्ता यमराज दूत है।कुत्ते को भैरव देवता का सेवक भी कहा जाता है। भैरव देवता को प्रसन्न करने के लिए कुत्ते को भोजन करना चाहिए।यदि भैरव देवता अपने भक्त से प्रसन्न रहते है तो किसी भी प्रकार की समस्या एवं रोग उसे छू नहीं सकता।

मान्यता है की यदि आप कुत्ते को प्रसन्न रखते है तो वह आपके सामने किसी भी तरह की आत्माओं को फटकने नहीं देता. आत्माएं कुत्ते से दूर भागती है।

कुत्ते की क्षमता के बारे में पुराण में बतलाया गया है की दरअसल कुत्ता एक ऐसा प्राणी है जिसे भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्व आभास होता है तथा वह सूक्ष्म जगत को यानि की आत्माओं को देख सकता है।

हिन्दू धर्म में कुत्ते को एक रहस्मयी प्राणी माना गया है, परन्तु इसे भोजन कराने से हर प्रकार के संकट से बचा जा सकता है।

कुत्ते से जुड़े शकुन एवं अपशकुन :-
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👉 कुत्ते की रोने की आवाज को अपशकुन माना जाता है. जब भी कुत्ता कराहता है तो समझ लीजिए की नकरात्मक शक्तियां आस पास है।

👉 शस्त्रों में कुत्ते के संबंध में यह बात कहि गई की यदि किसी परिवार में रोगी हो तो कुत्ता पालने से वह रोगी की बिमारी को अपने उपार ले लेता है।

👉 यदि किसी शुभ कार्य के दौरान कुत्ता आपका मार्ग रोके तो इसे विषमता या अनिश्चय प्रकट होती है।

👉 यदि संतान की प्राप्ति न हो रही हो तो काले कुत्ते को पालना चाहिए।

👉 अन्य शास्त्रीय मतांतर के अनुसार कुत्ते को पालने की जगह बाहर ही किसी काले कुत्ते को प्रतिदिन तेल से चुपड़ी रोटी खिलाने से परिवार की कई समस्याओं का स्वतः ही निदान हो जाता है।

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🚩 ~ सनातन पंचांग ~ 🚩

आधे-रास्ते-को-मंजिल-ना-समझे
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जंगल के किनारे एक छोटा सा गाँव था. जंगल में जंगली जानवरों की बहुतायत थी. इसलिए गाँव के लोगों को पेड़ पर चढ़ने का ज्ञान होना अति-आवश्यक था, ताकि जंगली जानवरों से सामना होने पर वे पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचा सकें.

जो लोग जंगल में लकड़ियाँ काटने जाते थे, उनके जंगली जानवरों से दो-चार होने की अधिक संभावना थी. इसलिए वे लोग पेड़ पर चढ़ना अवश्य सीखते थे.

उस गाँव में एक बुजुर्ग सज्जन रहा करते थे. सब लोग उन्हें ‘बाबा’ बुलाते थे. वे पेड़ पर चढ़ने की विधा में माहिर थे और लोगों को पेड़ पर चढ़ने का प्रशिक्षण दिया करते थे. गाँव के अधिकांश लोग उनसे ही प्रशिक्षण प्राप्त करने जाया करते थे.

एक दिन बाबा ने उन युवकों के समूह को बुलाया, जिन्हें वे पेड़ पर चढ़ने का प्रशिक्षण दे रहे थे. वह उस समूह के प्रशिक्षण का अंतिम दिन था.

बाबा उन्हें एक पेड़ के पास लेकर गए. वह एक ऊँचा और चिकना पेड़ था, जिस पर चढ़ना बेहद कठिन था.

बाबा युवकों से बोले, “आज तुम्हारे प्रशिक्षण का अंतिम दिन है. मैं देखना चाहता हूँ कि क्या तुम लोग पेड़ पर चढ़ने में माहिर हो गए हो. इसलिए मैं तुम्हें इस चिकने और ऊँचे पेड़ पर चढ़ने की चुनौती दे रहा हूँ. यदि तुम सब इस पेड़ पर चढ़ने में सफ़ल रहते हो, तो दुनिया के किसी भी पेड़ पर आसामी से चढ़ सकते हो.”

बाबा की बात सुनकर सभी युवक उत्त्साहित हो गये. वे पेड़ पर चढ़ने के लिए एक पंक्ति में खड़े हो गए. सबसे पहला युवक पेड़ पर चढ़ने लगा. वह बड़ी ही आसानी से पेड़ पर चढ़ा और फिर नीचे उतरने लगा. उतरते समय जब वह आधे रास्ते में था, तब बाबा बोले, “सावधान…आराम से संभलकर उतरो. कोई जल्दी नहीं है.”

उस युवक ने वैसा ही किया. वह आराम से सावधानी से नीचे उतरा. उसके बाद एक-एक कर सारे युवक पेड़ पर चढ़ने लगे. जब वे पेड़ पर चढ़ते, तब तो बाबा उन्हें कुछ नहीं कहते. लेकिन जब वे पेड़ से उतरते समय आधे रास्ते पर होते या बस नीचे पहुँचने वाले होते, तो बाबा कहते, “सुनो, आराम से, थोड़ा संभलकर और पूरी सावधानी से उतरो. किसी प्रकार की कोई जल्दी नहीं है.”

सभी युवकों ने बाबा की बात मानी और पेड़ पर चढ़कर नीचे उतरने में सफ़ल हुए.

सब बड़े ख़ुश थे. लेकिन एक बात उन्हें खटक रही थी और वह यह थी कि बाबा ने उन्हें पेड़ से उतरते समय ही सावधान रहने को क्यों कहा. पेड़ पर चढ़ते समय क्यों नहीं?

उन्होंने बाबा से पूछ ही लिया, “बाबा इस पेड़ की सबसे ऊपरी शाखा पर चढ़ना सबसे कठिन था. लेकिन आपने उस पर चढ़ते समय हमें संभलकर रहने नहीं कहा. लेकिन पेड़ से उतरते समय जब जमीन तक की दूरी बहुत कम रह गई थी, तब आपने हमें संभलकर और सावधान रहने को कहा. ऐसा क्यों?”

बाबा बोले, “देखो, पेड़ की सबसे ऊपरी शाखा पर चढ़ना बहुत कठिन है. ये मैं भी जानता हूँ और तुम भी. इसलिए मेरे बिना बोले ही तुम पहले से ही सतर्क थे. ऐसा हर किसी के साथ होता है. कार्य के प्रारंभ में सब सतर्कता से ही आगे बढ़ते हैं. किंतु सतर्कता और सावधानी में चूक तब होती है, जब हम मंजिल के समीप होते हैं. तब हमें लगने लगता है कि हमारा काम तो पूरा होने को है. मंजिल अब दूर नहीं और वहाँ हमारा ध्यान भटक जाता है और हम गलती कर जाते हैं. इसलिए हमेशा याद रखो कि मंजिल के नज़दीक पहुँचने और यथार्थ में मंजिल पर पहुँचने में  बहुत फ़र्क है.”

युवकों को बाबा की इस बात से जीवन की एक बहुत बड़ी सीख प्राप्त हुई.

हमारे जीवन में भी ऐसा कई बार होता है कि किसी काम को पूरा करने के कगार पर होकर भी हम उसे पूरा नहीं कर पाते. अंतिम क्षणों में कुछ गड़बड़ हो जाती है और हम पछताते रह जाते हैं. अंतिम क्षणों की ज़रा सी असावधानी से हमारा पूरा काम बिगाड़ देती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मंजिल के करीब पहुँचकर हम अपना धैर्य खो देते हैं. धैर्य खो देने के कारण हमसे चूक हो जाती है. इसलिए जब तक  मंजिल तक न पहुँचे, धैर्य बनाकर रखें. कार्य के प्रारंभ में जितना धैर्य और सावधानी आवश्यक है, कार्य समाप्ति तक भी आवश्यक है. इसलिए कार्य पूर्ण होने तक धैर्य न खोएं. उतने ही सावधान रहें,जितने प्रारंभ. कहीं धैर्य खो देना लक्ष्य खो देने का कारण न बन जाए..!
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आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं, बधाई और शुभाशीष 🌹

आपका जन्मदिन: 1 जनवरी

दिनांक 1 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 1 होता है। आपका मूलांक सूर्य ग्रह द्वारा संचालित होता है। आप महत्वाकांक्षी, आत्मविश्वासी, साहसी और नेतृत्वप्रिय होते हैं।

शुभ दिनांक : 1, 10, 20, 28
शुभ अंक : 1, 10, 20, 28, 37, 46, 55, 64, 73, 82
शुभ वर्ष : 2028, 2044, 2053, 2062
ईष्टदेव : सूर्य उपासना तथा मां गायत्री
शुभ रंग : लाल, केसरिया, क्रीम

जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल

करियर: पदोन्नति के योग हैं। बेरोजगारों की मनोकामना पूरी होगी। अधूरे कार्यों में सफलता मिलेगी।
सेहत: स्वास्थ्य उत्तम रहेगा।
परिवार: पारिवारिक कार्य होंगे, विवाह के योग बनेंगे।

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🌼 मासिक राशिफल 🌼
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मेष
मेष राशि के जातकों के लिए मार्च महीने की शुरुआत अत्यंत ही दुखद रहने वाली है। माह की शुरुआत में आपके द्वारा किये गये परिश्रम और प्रयास का पूरा फल मिलेगा। इस दौरान आप करियर और कारोबार में पूरे मनोयोग के साथ काम करेंगे। व्यवसाय से जुड़े लोगों को मनचाहा लाभ मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तो वहीं नौकरीपेशा लोगों की आय के अतिरिक्त स्रोत बनेंगे। शुभता एवं लाभ की यह स्थिति लगभग दो सप्ताह तक बनी रहेगी। हालांकि इस दौरान आपको धन को खुले हाथ से खर्च से बचना होगा।

माह के मध्य का समय सेहत, संबंध और करियर की दृष्टि से थोड़ा प्रतिकूल रहेगा। व्यस्तता के कारण रिश्तों पर ध्यान कम रहेगा। सेहत संबंधी समस्या चिंता दे सकती है। कार्यक्षेत्र में कुछ मुश्किलें आएंगी जिन्हें धैर्य से सुलझाना होगा। जोखिम भरे निवेश से बचें। परिवार में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं। प्रेम संबंध में सावधानी रखें।

उपायः प्रतिदिन हनुमान जी की पूजा में बजरंग बाण का पाठ करें।

वृषभ
वृषभ राशि के जातकों के लिए मार्च का महीना अधिकांशतः अनुकूल रहेगा। शुरुआत में सौभाग्य का साथ मिलेगा। करियर और कारोबार में प्रगति होगी। पदोन्नति या नए अवसर मिल सकते हैं। सीनियर का सहयोग मिलेगा।

माह के मध्य में बाजार की मंदी लाभ को प्रभावित कर सकती है और सेहत का ध्यान रखना होगा। रिश्तों में संतुलन बनाए रखें। उत्तरार्ध में विरोधियों पर विजय मिलेगी और कोर्ट-कचहरी मामलों में राहत मिल सकती है। प्रेम एवं वैवाहिक जीवन मधुर रहेगा।

उपायः प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाकर रुद्राष्टकं अथवा शिव चालीसा का पाठ करें।

मिथुन
मिथुन राशि के लिए मार्च नए अवसर लेकर आएगा। आलस्य और अहंकार से बचें तो सफलता बढ़ेगी। नौकरी परिवर्तन या रोजगार मिलने के योग हैं। परिवार और मित्रों का सहयोग मिलेगा।

सेहत सामान्य रहेगी। संबंध सुधारने के लिए संवाद बनाए रखें। यात्राएं लाभकारी रहेंगी और जीवनसाथी से संबंध प्रगाढ़ होंगे।

उपायः प्रतिदिन भगवान श्री गणेश जी को दूर्वा अर्पित कर चालीसा पाठ करें।

कर्क
कर्क राशि वालों के लिए महीना मिश्रित फलदायी रहेगा। शुरुआत में कार्यक्षेत्र और भूमि संबंधी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। जल्दबाजी से बचें। वाहन सावधानी से चलाएं।

मध्य के बाद स्थिति सुधरेगी। कारोबार पटरी पर आएगा और पैतृक विवाद सुलझेंगे। प्रेम संबंध में उतावलेपन से बचें।

उपायः शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाकर शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ करें।

सिंह
सिंह राशि के लिए महीने की शुरुआत शुभ रहेगी। अटके कार्य पूरे होंगे और कार्यक्षेत्र में प्रशंसा मिलेगी। व्यवसाय में लाभ और बड़ी डील संभव है। राजनीति से जुड़े लोगों को पद मिल सकता है।

तीसरे सप्ताह में रिश्तों में गलतफहमी से बचें। महीने के अंत में शुभ समाचार मिलेगा।

उपायः भगवान विष्णु की पूजा एवं विष्णु सहस्त्रनाम पाठ करें।

कन्या
कन्या राशि के जातकों के लिए शुरुआत शुभ रहेगी। करियर में प्रगति और यात्रा योग बनेंगे। सीनियर का सहयोग मिलेगा।

उत्तरार्ध में छात्रों को पढ़ाई में कठिनाई और अचानक खर्च बढ़ सकते हैं। रिश्तों में तनाव संभव है।

उपायः गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

तुला
तुला राशि के लिए अधिकांश महीना शुभ रहेगा। बड़े प्रोजेक्ट में सफलता मिलेगी। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। कारोबार विस्तार के अवसर मिलेंगे।

मध्य में भौतिक सुख-सुविधाओं पर खर्च बढ़ेगा। प्रेम संबंध मजबूत रहेंगे।

उपायः देवी दुर्गा चालीसा का पाठ करें।

वृश्चिक
वृश्चिक राशि वालों के लिए अत्यंत शुभ समय रहेगा। कार्यों में सफलता, सम्मान वृद्धि और कोर्ट मामलों में लाभ होगा। यात्रा लाभकारी रहेगी। ऋण चुकाने के योग बनेंगे।

उपायः हनुमान जी को गुड़-चना अर्पित कर चालीसा पाठ करें।

धनु
धनु राशि के लिए उतार-चढ़ाव भरा महीना रहेगा। शुरुआत अनुकूल लेकिन मध्य में सावधानी जरूरी है। योजनाएं गुप्त रखें। निवेश सोच-समझकर करें।

घरेलू चिंताएं बढ़ सकती हैं। जीवनसाथी की सेहत का ध्यान रखें।

उपायः भगवान विष्णु को केसर तिलक लगाकर नारायण कवच का पाठ करें।

मकर
मकर राशि के लिए मिश्रित परिणाम मिलेंगे। घरेलू समस्याएं मन विचलित कर सकती हैं। कार्यक्षेत्र में सावधानी रखें।

मध्य में तनाव लेकिन उत्तरार्ध में स्थिति सुधरेगी और निवेश से लाभ होगा।

उपायः शिव पूजा एवं शिव चालीसा पाठ करें।

कुंभ
कुंभ राशि के लिए पूर्वार्ध अत्यंत शुभ रहेगा। अटके कार्य पूरे होंगे और सफलता मिलेगी। व्यापार विस्तार और पद लाभ के योग हैं।

उत्तरार्ध में सेहत का ध्यान रखें। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी।

उपायः हनुमान जी की पूजा में सुंदरकांड पाठ करें।

मीन
मीन राशि के जातकों के लिए मार्च अत्यंत शुभ रहेगा। किस्मत का साथ मिलेगा। धनागम होगा और कार्य समय पर पूरे होंगे। सेहत अच्छी रहेगी और पारिवारिक समस्याओं का समाधान मिलेगा।

मध्य में भौतिक सुख-सुविधाओं पर खर्च और वाहन या संपत्ति सुख मिल सकता है।

उपायः भगवान विष्णु की पूजा करें एवं विष्णु मंत्र जप करें।

🚩 ~ सनातन पंचांग ~ 🚩
🙏🏻🌷🌸 शुभ दिन मंगलमय हो 🌸🌷🙏🏻

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Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton