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उपनिषद का एक शक्तिशाली उद्धरण: “आत्मना लभते बलं, विद्यायामृतमश्नुते” (केनोपनिषद् २.४ से प्रेरित भावार्थ) हिंदी में व्याख्या: आत्मा की प्राप्ति… READ MORE
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🙏🏻 हर हर महादेव 🙏🏻 ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय ॥(बृहदारण्यक उपनिषद्) यह… READ MORE
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असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । (यह मंत्र बृहदारण्यक उपनिषद से लिया गया है)… READ MORE
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“असत्य से मुझे सत्य की ओर ले चलो, अंधकार से मुझे प्रकाश की ओर ले चलो, मृत्यु से मुझे अमरता… READ MORE
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ब्रह्म (परम सत्य) ही सब कुछ का आधार है। जगत् उसके प्रतिबिंब मात्र—जैसे समुद्र की लहरें समुद्र ही हैं, वैसे… READ MORE
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“असतो मा सद्गमय” अर्थात् असत्य (माया या भ्रम) से सत्य (परमात्मा की वास्तविकता) की ओर ले चलो। “तमसो मा ज्योतिर्गमय”… READ MORE
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9431848786:-:-:( समस्त सृष्टि—जो कुछ भी इस जगत में विद्यमान है—सर्वत्र ईश्वर की परम चेतना से व्याप्त है। अर्थात्, हर वस्तु,… READ MORE
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यह दिव्य वाक्य हमें आत्मा की महानता का बोध कराता है। ‘अहं ब्रह्मास्मि’ का अर्थ है ‘मैं स्वयं ब्रह्म हूँ’।… READ MORE
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जीवन में कोई कमी या अभाव नहीं है—सब कुछ पहले से ही पूर्ण और संपूर्ण है। जैसे अनंत सागर से… READ MORE
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संस्कृत में उदाहरण (छांदोग्य उपनिषद् ६.८.७): तत् त्वम् असि। (उच्चारण: तत् त्वम् असि) हिंदी अनुवाद: तुम वही हो। सरल शब्दों… READ MORE
“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”
~ Richie Norton
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