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ब्रह्म (परम सत्य) ही सब कुछ का आधार है। जगत् उसके प्रतिबिंब मात्र—जैसे समुद्र की लहरें समुद्र ही हैं, वैसे… READ MORE
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“असतो मा सद्गमय” अर्थात् असत्य (माया या भ्रम) से सत्य (परमात्मा की वास्तविकता) की ओर ले चलो। “तमसो मा ज्योतिर्गमय”… READ MORE
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9431848786:-:-:( समस्त सृष्टि—जो कुछ भी इस जगत में विद्यमान है—सर्वत्र ईश्वर की परम चेतना से व्याप्त है। अर्थात्, हर वस्तु,… READ MORE
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यह दिव्य वाक्य हमें आत्मा की महानता का बोध कराता है। ‘अहं ब्रह्मास्मि’ का अर्थ है ‘मैं स्वयं ब्रह्म हूँ’।… READ MORE
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जीवन में कोई कमी या अभाव नहीं है—सब कुछ पहले से ही पूर्ण और संपूर्ण है। जैसे अनंत सागर से… READ MORE
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संस्कृत में उदाहरण (छांदोग्य उपनिषद् ६.८.७): तत् त्वम् असि। (उच्चारण: तत् त्वम् असि) हिंदी अनुवाद: तुम वही हो। सरल शब्दों… READ MORE
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मान लीजिए कोई दीपक है। उसकी लौ अलग-अलग दिखती है, लेकिन प्रकाश का स्रोत एक ही है। उसी तरह हर… READ MORE
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इस संसार में जो कुछ भी चल-अचल है वह सब परमात्मा से ही आच्छादित है। इसलिए मनुष्य को त्याग और… READ MORE
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सफलता केवल भाग्य से नहीं मिलती, बल्कि धैर्य, परिश्रम और ईश्वर पर अटूट विश्वास से प्राप्त होती है READ MORE
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष 🌹 READ MORE
“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”
~ Richie Norton
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