Sanatan Panchang 12022026 Rashifal Samadhan

हर हर महादेव
सनातन पंचांग
दिनांक – 12 फरवरी 2026
दिन – गुरूवार
विक्रम संवत 2082
शक संवत – 1947
अयन – उत्तरायण
ऋतु – शिशिर ऋतु
मास – फाल्गुन ( गुजरात- महाराष्ट्र -माघ )
पक्ष – कृष्ण
तिथि – दशमी दोपहर 12:22 तक तत्पश्चात एकादशी
नक्षत्र – ज्येष्ठा दोपहर 01:42 तक तत्पश्चात मूल
योग – हर्षण 13 फरवरी रात्रि 03:06 तक तत्पश्चात वज्र
राहुकाल – दोपहर 02:19 से शाम 03:44 तक
सूर्योदय – 07:12
सूर्यास्त – 06:33
दिशाशूल – दक्षिण दिशा मे

व्रत पर्व विवरण-

विशेष –

सनातन पंचांग

एकादशी के दिन करने योग्य

12 फरवरी 2026 गुरूवार को दोपहर 12:22 से 13 फरवरी, शुक्रवार को दोपहर 02:25 तक एकादशी है।

विशेष – 13 फरवरी, शुक्रवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे।

एकादशी को दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें। विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो 10 माला गुरुमंत्र का जप कर लें। अगर घर में झगड़े होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे।

सनातन पंचांग

विष्णुपदी-कुंभ संक्रांति

जप तिथि : 13 फरवरी 2026 शुक्रवार को (विष्णुपदी- कुंभ संक्रांति)
पुण्यकाल सूर्योदय से दोपहर 12:41 तक।

विष्णुपदी संक्रांति में किये गये जप-ध्यान व पुण्यकर्म का फल लाख गुना होता है। – (पद्म पुराण, सृष्टि खंड)

सनातन पंचांग

महाशिवरात्रि – भाग्य की रेखा बदलने हेतु ( युवा विशेष)

जिनकी उम्र 15 से 45 साल के अन्दर है, उनको अगर कोई बीमारी नहीं है, शुगर नहीं है, हो सके तो हिम्मत दिखाकर सुबह के सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक पानी भी न पिए। भाग्य की रेखा न बदले तो मुझे कहना। महा शिवरात्रि के सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक निर्जला उपवास। जो ज्यादा दुबले-पतले हो वे ये न करें। जो बराबर ठीकठाक हो वे जरूर करें। बहुत फायदा होगा।

युवा भाई-बहनों को आग्रहपूर्वक कहूंगा कि महाशिवरात्रि के दिन निर्जला उपवास जरूर करें और रात को सोएं नहीं। रात को 2-3-4 बजे तक जगकर जप करें। युवा भाई-बहनें खास हिम्मत करें और जप करो तो पूर्व और उत्तर के बीच ईशान कोण पड़ता है, उधर मुंह करके जप करना।

और एक माला महामृत्युंजय मंत्र की अपने गुरुदेव को दक्षिणा दें और प्रार्थना करें –
हे भोला नाथ! हमारे बापूजी हमें प्रीति देते हैं, ज्ञान देते हैं, शक्ति देते हैं, दीक्षा देते हैं। ऐसे हमारे गुरुदेव का स्वास्थ्य बढ़िया रहे और हमारे गुरुदेव की आयु खूब-खूब लंबी हो।

रात को 12 बजे, 12:30 बजे, 1 बजे जब भी करना चाहो तब करना जरूर। ये पवित्र तिथि के दिन अपना भजन-भक्ति बढ़ाने के दिन हैं। इसका जरूर फायदा उठाएं।

विशेष – 15 फरवरी 2026 रविवार को महाशिवरात्रि है।

सनातन पंचांग

हमेशा संघर्ष से ही व्यक्तित्व का निर्माण होता है और सफलता मिलती है।

प्रेशर से डायमंड बनते हैं — यह केवल एक आधुनिक मोटिवेशनल पंक्ति नहीं, बल्कि सनातन जीवन-दर्शन का सार है। सनातन धर्म में जीवन को संघर्षों की प्रयोगशाला माना गया है, जहाँ आत्मा तप, संयम और धैर्य से परिष्कृत होकर अपने श्रेष्ठ स्वरूप को प्राप्त करती है। व्यक्तित्व विकास कोई तात्कालिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मिक परिपक्वता की दीर्घ यात्रा है।

संघर्ष: विकास का प्रमाण

गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं—

“न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।”
(भगवद्गीता 3.5)

अर्थात कोई भी व्यक्ति क्षणभर भी बिना कर्म किए नहीं रह सकता। जीवन में संघर्ष इस बात का संकेत है कि हम कर्मपथ पर अग्रसर हैं। यदि जीवन में चुनौतियाँ हैं, तो इसका अर्थ है कि हम ठहरे नहीं हैं, बल्कि आगे बढ़ रहे हैं। जैसे धरती के गर्भ में अत्यधिक दबाव से कोयला हीरा बनता है, वैसे ही जीवन का दबाव हमारे व्यक्तित्व को निखारता है।

रुकावटें: वापसी का सेटअप

सनातन ग्रंथ हमें सिखाते हैं कि हर बाधा, पराजय नहीं बल्कि पुनरुत्थान का बीज होती है। महाभारत में पांडवों का जीवन इसका जीवंत उदाहरण है—वनवास, अपमान, संघर्ष, और अंततः विजय।
“आपदि स्थैर्यम्।”
(मनुस्मृति)

आपत्ति में स्थिर रहना ही सच्चे व्यक्तित्व की पहचान है। जीवन की रुकावटें हमें तोड़ने नहीं, बल्कि भीतर से मज़बूत बनाने आती हैं। जब-जब जीवन हमें रोकता है, तभी वह हमें भीतर झाँकने, स्वयं को सुधारने और अधिक सक्षम बनने का अवसर देता है।

प्रक्रिया पर भरोसा: धैर्य का महत्व

आज का युग त्वरित परिणाम चाहता है, पर सनातन धर्म प्रक्रिया पर भरोसा करना सिखाता है। उपनिषद कहते हैं—
“श्रद्धया देयम्, अश्रद्धया अदेयम्।”
(तैत्तिरीय उपनिषद)

श्रद्धा और धैर्य से किया गया कर्म ही फलदायी होता है। यदि प्रगति धीमी है, तो निराश होने के बजाय यह समझना चाहिए कि प्रकृति कभी भी अधूरा निर्माण नहीं करती। वृक्ष एक दिन में फल नहीं देता, साधना वर्षों में सिद्धि देती है।

व्यक्तित्व विकास भी तपस्या है—जहाँ आत्मसंयम, निरंतर अभ्यास और आत्मनिरीक्षण आवश्यक है।

समय: सफलता का संस्कार

अच्छी चीज़ों में समय लगता है—यह सत्य सनातन काल से स्थापित है। ऋषियों की साधना वर्षों तक चली, तब जाकर उन्हें ब्रह्मज्ञान प्राप्त हुआ।

“उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।”
(भगवद्गीता 6.5)

मनुष्य स्वयं अपना उद्धार करता है। यह उद्धार समय, अनुशासन और आत्मविश्वास से संभव है। व्यक्तित्व विकास में समय लगना असफलता नहीं, बल्कि गहराई का प्रमाण है।

आत्मविकास: बाह्य नहीं, आंतरिक यात्रा

सनातन धर्म व्यक्तित्व को केवल बाहरी सफलता से नहीं मापता, बल्कि आंतरिक संतुलन से आँकता है। अहंकार रहित आत्मविश्वास, करुणा, सत्य और विवेक—ये ही श्रेष्ठ व्यक्तित्व के गुण हैं।

रामायण में श्रीराम का चरित्र इसका सर्वोत्तम उदाहरण है—राजा होकर भी विनम्र, शक्तिशाली होकर भी मर्यादित।

संघर्ष, रुकावट, धैर्य और समय—ये सब जीवन की बाधाएँ नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण के संस्कार हैं। सनातन धर्म हमें सिखाता है कि जीवन की हर परीक्षा हमें भीतर से परिष्कृत करने आती है।

जब दबाव बढ़े, तो डरिए मत—समझिए कि हीरा बनने की प्रक्रिया चल रही है।
जब संघर्ष हो, तो जानिए कि आप ऊपर उठ रहे हैं।
जब रुकावट आए, तो समझिए वापसी की तैयारी हो रही है।

और जब समय लगे, तो धैर्य रखें—क्योंकि श्रेष्ठ निर्माण कभी जल्दी नहीं होता।

सनातन दृष्टि में यही सच्चा व्यक्तित्व विकास है—आत्मा से आत्मबल तक की यात्रा।

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हमेशा संघर्ष से ही व्यक्तित्व का निर्माण होता और सफलता मिलती है।

प्रेशर से डायमंड बनते हैं — यह केवल एक आधुनिक मोटिवेशनल पंक्ति नहीं, बल्कि सनातन जीवन-दर्शन का सार है। सनातन धर्म में जीवन को संघर्षों की प्रयोगशाला माना गया है, जहाँ आत्मा तप, संयम और धैर्य से परिष्कृत होकर अपने श्रेष्ठ स्वरूप को प्राप्त करती है। व्यक्तित्व विकास कोई तात्कालिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मिक परिपक्वता की दीर्घ यात्रा है।

संघर्ष: विकास का प्रमाण

गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं—

“न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।”
(भगवद्गीता 3.5)

अर्थात कोई भी व्यक्ति क्षणभर भी बिना कर्म किए नहीं रह सकता। जीवन में संघर्ष इस बात का संकेत है कि हम कर्मपथ पर अग्रसर हैं। यदि जीवन में चुनौतियाँ हैं, तो इसका अर्थ है कि हम ठहरे नहीं हैं, बल्कि आगे बढ़ रहे हैं। जैसे धरती के गर्भ में अत्यधिक दबाव से कोयला हीरा बनता है, वैसे ही जीवन का दबाव हमारे व्यक्तित्व को निखारता है।

रुकावटें: वापसी का सेटअप

सनातन ग्रंथ हमें सिखाते हैं कि हर बाधा, पराजय नहीं बल्कि पुनरुत्थान का बीज होती है। महाभारत में पांडवों का जीवन इसका जीवंत उदाहरण है—वनवास, अपमान, संघर्ष और अंततः विजय।
“आपदि स्थैर्यम्।”
(मनुस्मृति)

आपत्ति में स्थिर रहना ही सच्चे व्यक्तित्व की पहचान है। जीवन की रुकावटें हमें तोड़ने नहीं, बल्कि भीतर से मज़बूत बनाने आती हैं। जब-जब जीवन हमें रोकता है, तभी वह हमें भीतर झाँकने, स्वयं को सुधारने और अधिक सक्षम बनने का अवसर देता है।

प्रक्रिया पर भरोसा: धैर्य का महत्व

आज का युग त्वरित परिणाम चाहता है, पर सनातन धर्म प्रक्रिया पर भरोसा करना सिखाता है। उपनिषद कहते हैं—
“श्रद्धया देयम्, अश्रद्धया अदेयम्।”
(तैत्तिरीय उपनिषद)

श्रद्धा और धैर्य से किया गया कर्म ही फलदायी होता है। यदि प्रगति धीमी है, तो निराश होने के बजाय यह समझना चाहिए कि प्रकृति कभी भी अधूरा निर्माण नहीं करती। वृक्ष एक दिन में फल नहीं देता, साधना वर्षों में सिद्धि देती है।

व्यक्तित्व विकास भी तपस्या है—जहाँ आत्मसंयम, निरंतर अभ्यास और आत्मनिरीक्षण आवश्यक है।

समय: सफलता का संस्कार

अच्छी चीज़ों में समय लगता है—यह सत्य सनातन काल से स्थापित है। ऋषियों की साधना वर्षों तक चली, तब जाकर उन्हें ब्रह्मज्ञान प्राप्त हुआ।

“उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।”
(भगवद्गीता 6.5)

मनुष्य स्वयं अपना उद्धार करता है। यह उद्धार समय, अनुशासन और आत्मविश्वास से संभव है। व्यक्तित्व विकास में समय लगना असफलता नहीं, बल्कि गहराई का प्रमाण है।

आत्मविकास: बाह्य नहीं, आंतरिक यात्रा

सनातन धर्म व्यक्तित्व को केवल बाहरी सफलता से नहीं मापता, बल्कि आंतरिक संतुलन से आँकता है। अहंकार रहित आत्मविश्वास, करुणा, सत्य और विवेक—ये ही श्रेष्ठ व्यक्तित्व के गुण हैं।

रामायण में श्रीराम का चरित्र इसका सर्वोत्तम उदाहरण है—राजा होकर भी विनम्र, शक्तिशाली होकर भी मर्यादित।

संघर्ष, रुकावट, धैर्य और समय—ये सब जीवन की बाधाएँ नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण के संस्कार हैं। सनातन धर्म हमें सिखाता है कि जीवन की हर परीक्षा हमें भीतर से परिष्कृत करने आती है।

जब दबाव बढ़े, तो डरिए मत—समझिए कि हीरा बनने की प्रक्रिया चल रही है।
जब संघर्ष हो, तो जानिए कि आप ऊपर उठ रहे हैं।
जब रुकावट आए, तो समझिए वापसी की तैयारी हो रही है।

और जब समय लगे, तो धैर्य रखें—क्योंकि श्रेष्ठ निर्माण कभी जल्दी नहीं होता।

सनातन दृष्टि में यही सच्चा व्यक्तित्व विकास है—आत्मा से आत्मबल तक की यात्रा।

जानिए, शिव के प्रतीक और उनका गहन रहस्य

शिव औढरदानी, कल्याण के देवता माने गए हैं। सृष्टि निर्माण में एक ही शक्ति तीन रूपों में अपना कार्य संपादन करती हुई दिखाई देती है। ब्रह्मा सृष्टि का निर्माण करते हैं, विष्णु पालन-पोषण करते हैं और शिव संहार करते हैं। यानी निर्माण से नाश तक जगत का चक्र परम सत्ता द्वारा निरंतर प्रकृति में चलता रहता है।

वेदों में प्रकृति के उपादानों की उपासना की गई है। प्रत्येक उपादान को देवता का रूप दिया गया है। यह प्रकृति-विज्ञान का सारा प्रपंच बड़ा रहस्यमय है, जिसे समझना सामान्यजन के लिए कठिन है। अनादिकाल से ऋषियों ने इन रहस्यों का मनन-चिंतन द्वारा अनुसंधान करने का प्रयत्न किया है।

ऋग्वेद के रात्रि सूक्त में रात्रि को नित्य प्रलय और दिन को नित्य सृष्टि कहा गया है। दिन में हमारा मन और हमारी इंद्रियां भीतर से बाहर निकलकर प्रपंच की ओर दौड़ती हैं और रात्रि में फिर बाहर से भीतर जाकर शिव की ओर प्रवृत्त हो जाती हैं। इसीलिए दिन सृष्टि का और रात प्रलय की द्योतक है। आइए पहचानें शिव के प्रतीक और उनका गहन रहस्य।

वृषभ : शिव का वाहन

वृषभ शिव का वाहन है। वह हमेशा शिव के साथ है। वृषभ का अर्थ धर्म है। मनुस्मृति के अनुसार ‘वृषो हि भगवान धर्म:’। वेद ने धर्म को चार पैरों वाला प्राणी कहा है। उसके चार पैर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हैं। महादेव इस चार पैर वाले वृषभ की सवारी करते हैं यानी धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष उनके अधीन हैं।

वृषभ का एक अर्थ वीर्य और शक्ति भी है। अथर्ववेद में वृषभ को पृथ्वी का धारक, पोषक, उत्पादक आदि बताया गया है। वृष का अर्थ मेघ भी है। इसी धातु से वर्षा, सृष्टि आदि शब्द बने हैं।

जटाएं

शिव अंतरिक्ष के देवता हैं। उनका नाम व्योमकेश है, अतः आकाश उनकी जटास्वरूप है। जटाएं वायुमंडल की प्रतीक हैं। वायु आकाश में व्याप्त रहती है। सूर्यमंडल से ऊपर परमेष्ठि मंडल है। इसके अर्थतत्व को गंगा की संज्ञा दी गई है, अतः गंगा शिव की जटा में प्रवाहित है। शिव रुद्रस्वरूप उग्र और संहारक रूप धारण करने वाले भी माने गए हैं।

गंगा और चंद्रमा

इस उग्रता का निवास मस्तिष्क में है, इसीलिए शांति की प्रतीक गंगा और अर्द्धचंद्र शिव के मस्तक पर विराजमान होकर उनकी उग्र वृत्ति को शांत-शीतल रखते हैं। विषपान के कारण वे जो नीलकंठ हुए, उसकी जलन को शांति भी गंगा और चंद्रमा से प्राप्त होती है।

चंद्रमा मन का प्रतीक है। शिव का मन भोला, निर्मल, पवित्र और सशक्त है। उनका विवेक सदा जाग्रत रहता है। उनके मस्तिष्क में कभी अविवेकपूर्ण विचार नहीं पनपते। शिव का चंद्रमा स्वच्छ और उज्ज्वल है। उसमें मलीनता नहीं, वह अमृत की वर्षा करता है। चंद्रमा का एक नाम ‘सोम’ है, जो शांति का प्रतीक है। इसी हेतु सोमवार शिवपूजन का दिन माना गया है।

तीन नेत्र

शिव को त्रिलोचन कहते हैं यानी उनकी तीन आंखें हैं। वेदानुसार सूर्य और चंद्र विराट पुरुष के नेत्र हैं। अग्नि शिव का तीसरा नेत्र है, जो यज्ञाग्नि का प्रतीक है। सूर्य बुद्धि के अधिदेवता हैं और इसी ज्ञान नेत्र से उन्होंने कामदेव को भस्म किया था।

शिव के ये तीन नेत्र सत्व, रज, तम—तीन गुणों, भूत, भविष्य, वर्तमान—तीन कालों और स्वर्ग, मृत्यु, पाताल—तीन लोकों के प्रतीक हैं। अतः शिव को त्र्यंबक भी कहते हैं।

सर्पों का हार

भगवान शंकर के गले और शरीर पर सर्पों का हार है। सर्प तमोगुणी और संहारक वृत्ति का जीव है। यदि वह मनुष्य को डस ले तो उसका प्राणांत हो जाता है।

अतः संहारिकता के प्रतीकस्वरूप शिव उसे धारण किए हुए हैं अर्थात शिव ने तमोगुण को अपने वश में कर रखा है। सर्प जैसा क्रूर जीव महाकाल के अधीन है।

त्रिशूल

शिव के हाथों में त्रिशूल है। सृष्टि में मानवमात्र आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक—इन तीन तापों से त्रस्त रहता है। शिव का त्रिशूल इन तापों को नष्ट करता है।

शिव की शरण में जाकर ही भक्त इन दुखों से छूटकर आनंद की प्राप्ति कर सकता है। त्रिशूल इच्छा, ज्ञान और क्रिया का सूचक है।

डमरू

शिव के हाथ में डमरू है। तांडव नृत्य के समय वे उसे बजाते हैं। पुरुष और प्रकृति के मिलन का नाम ही तांडव है। उस समय अणु-अणु में क्रियाशीलता जागृत होती है और सृष्टि का निर्माण होता है।

अणुओं के मिलन और संघर्ष से शब्द का जन्म होता है। शास्त्रों में शब्द को ब्रह्म कहा गया है। डमरू का नाद ही ब्रह्म रूप है। वही ‘ओंकार’ का व्यंजक है।

महाशिवरात्रि 15 फरवरी को

जानिए, शिव के प्रतीक और उनका गहन रहस्य

मुंडमाला

शिव के गले में मुंडमाला यह दर्शाती है कि उन्होंने मृत्यु को गले लगाया है और उससे भयभीत नहीं हैं। श्मशानवास का अर्थ है कि जो जन्मता है, वह एक दिन अवश्य मरता है। जीवित अवस्था में ही नश्वरता का बोध होना चाहिए।

प्रलयकाल में सारा ब्रह्मांड श्मशान हो जाता है। श्मशान का दर्शन क्षणिक वैराग्य उत्पन्न करता है।

व्याघ्र चर्म

शिव की देह पर व्याघ्र चर्म धारण करने की कल्पना की गई है। व्याघ्र अहंकार और हिंसा का प्रतीक है। शिव ने अहंकार और हिंसा दोनों को वश में कर रखा है।

भस्म

शिव अपने शरीर पर भस्म धारण करते हैं। भस्म जगत की निस्सारता का बोध कराती है। प्रलय में सब भस्म हो जाता है। शरीर की भी यही दशा है। भस्म से नश्वरता का स्मरण होता है। रुद्र को अग्नि का प्रतीक माना गया है। अग्नि का कार्य भस्म करना है, इसलिए भस्म शिव का श्रृंगार है।

रुद्र

शिव को रुद्रस्वरूप भी कहा गया है। पुराणानुसार रुद्र 11 हैं। वैदिक वाक्य ‘अग्निर्वेरुद्र:’ का अर्थ है कि अग्नि ही रुद्र है। रुद्र रौद्र रस और क्रोध के प्रतीक भी माने गए हैं। प्रकृति में जो शक्तियां कार्य करती हैं, उन्हीं की उपासना वेदों में बताई गई है।

इसीलिए वेदों में प्रकृति के उपादानों की स्तुतियां की गई हैं। मूर्ति शिल्प के माध्यम से इन रहस्यों को सरल रूप में समझाया गया है।

10 आयुध

मूर्तियों का निर्माण संकेत शास्त्र के आधार पर हुआ है। शिव अग्नितत्व या रुद्र तत्व से व्याप्त हैं। एक ही अग्नितत्व अग्नि, वायु और सूर्य रूप में प्रकट होता है। सूर्यात्मक रुद्र पांच दिशाओं में व्याप्त होकर पंचमुख बनते हैं।

पंचमुख शिव के दस हाथ माने गए हैं। इनमें अभय, टंक, शूल, वज्र, पाश, खड्ग, अंकुश, घंटा, नाद और अग्नि—ये दस आयुध हैं।

5 मुख 10 हाथ

महादेव के पांच मुख पंचमहाभूतों के सूचक हैं। दस हाथ दस दिशाओं के सूचक हैं। अस्त्र-शस्त्र जगतरक्षक शक्तियों के प्रतीक हैं।

सृष्टि, स्थिति, लय, अनुग्रह और निग्रह—इन पांच कार्यों की संकेतक पांच शक्तियां ही शिव के पांच मुख हैं। पूर्व मुख सृष्टि, दक्षिण मुख स्थिति, पश्चिम मुख प्रलय, उत्तर मुख अनुग्रह और ऊर्ध्व मुख ज्ञान का प्रतीक है।

जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं, बधाई और शुभ आशीष
आपका जन्मदिन: 12 फरवरी

अंक ज्योतिष के अनुसार दिनांक 12 को जन्मे व्यक्तियों का मूलांक तीन आता है। यह बृहस्पति का प्रतिनिधि अंक है। आप दार्शनिक स्वभाव के होने के बावजूद एक विशेष प्रकार की स्फूर्ति रखते हैं। आपकी शिक्षा के क्षेत्र में पकड़ मजबूत होगी। आप एक सामाजिक प्राणी हैं। आप सदैव परिपूर्णता की तलाश में रहते हैं, यही वजह है कि अकसर अव्यवस्थाओं के कारण तनाव में रहते हैं। ऐसे व्यक्ति निष्कपट, दयालु एवं उच्च तार्किक क्षमता वाले होते हैं। अनुशासनप्रिय होने के कारण कभी-कभी आप तानाशाह भी बन जाते हैं।

आपके लिए खास

शुभ दिनांक : 3, 12, 21, 30
शुभ अंक : 1, 3, 6, 7, 9
शुभ वर्ष : 2028, 2030, 2031, 2034, 2043, 2049, 2052
ईष्टदेव : देवी सरस्वती, देवगुरु बृहस्पति, भगवान विष्णु
शुभ रंग : पीला, सुनहरा और गुलाबी

आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल

व्यापार-नौकरी: नवीन व्यापार की योजना भी बन सकती है। नौकरीपेशा के लिए प्रतिभा के बल पर उत्तम सफलता का योग है। महत्वपूर्ण कार्य से यात्रा के योग भी हैं।

घर-परिवार: यह वर्ष आपके लिए अत्यंत सुखद है। घर या परिवार में शुभ कार्य होंगे। दांपत्य जीवन में सुखद स्थिति रहेगी। शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे।

करियर: किसी विशेष परीक्षा में सफलता मिल सकती है। मित्र वर्ग का सहयोग सुखद रहेगा।

मेष राशि
आज आपके घर किसी अतिथि का आगमन होने से माहौल खुशनुमा रहेगा। आप उनकी आवभगत में व्यस्त रहेंगे। आप अपने कामों को कल पर डालने से बचें। परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताकर आपके आपसी रिश्तों में चल रही अनबन भी दूर होगी। सामाजिक कार्यक्रम में आपको सम्मिलित होने का मौका मिलेगा। आपको अपने काम के साथ-साथ जीवनसाथी के लिए भी समय निकालना होगा, जिससे कि आपके रिश्ते में दूरी आने से बच सकें।

वृषभ राशि
आज आपकी किसी पुरानी गलती से पर्दा उठ सकता है, जिससे आपके आपसी रिश्ते खराब हो सकते हैं। आप किसी विरोधी की बातों में आकर कोई इंवेस्टमेंट करने से बचें। जीवनसाथी आपके कामों में आपका पूरा साथ देंगे। संतान के अड़ियल रवैय को लेकर आप थोड़ा परेशान रहेंगे, इसलिए आपको उन पर पूरी निगरानी बनाकर रखने की आवश्यकता है। आप किसी से धन उधार बिल्कुल ना लें, क्योंकि उसे उतारने में आपकी समस्याएं बढ़ेंगी।

मिथुन राशि
आज का दिन आपके लिए धन के मामले में बढ़िया रहेगा, क्योंकि जिससे आपकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी और यदि आपका कोई काम धन को लेकर रुका हुआ था, तो उसके भी पूरा होने की संभावना है। आपको अपने कुछ सरकारी कामों को लेकर लापरवाही बिल्कुल नहीं करनी है। आप अपने धन को किसी योजना में अच्छे इन्वेस्टमेंट के लिए धन लगाने की सोचेंगे। कोई सरकारी काम आपका यदि लंबे समय से पेंडिंग था, तो वह भी पूरा हो सकता है।

कर्क राशि
आज का दिन आपके लिए लेनदेन से संबंधित मामलों में सावधानी बरतने के लिए रहेगा। आपकी अंदर प्रतिस्पर्धा का भाव बना रहेगा और आपको अपनी मेहनत से बिल्कुल पीछे नहीं हटना है। परिवार में किसी सदस्य से यदि आपने कोई वादा किया था, तो उसे पूरा करने के लिए समय अवश्य निकाले। आप कहीं घूमने-फिरने जाने की योजना बना सकते हैं, जिसमें आपको अपनी जेब का ख्याल अवश्य रखना होगा। आप अच्छे कामों से लोगों के दिल में जगह बनाने में कामयाब रहेंगे।

सिंह राशि
आज आपकी वाणी की सौम्यता आपको मान-सम्मान दिलवाएगी, इसलिए आपको किसी से कोई बात सोच समझकर कहनी होगी। अपनी उन्नति की राह पर आगे बढ़ेंगे। आप अपने कर्जो को भी उतारने के पूरे कोशिश करेंगे। परिवार में सदस्यों में एकजुटता बनी रहेगी और आप दिखावे के चक्कर में पड़कर अपना काफी धन व्यय कर सकते हैं। आपको किसी सरकारी काम को लेकर अपने किसी मित्र से बातचीत करनी पड़ेगी, तभी वह पूरा होता दिख रहा है।

कन्या राशि
आज का दिन आपके लिए सामान्य रहने वाला है। यदि आपकी कोई प्रॉपर्टी को लेकर डील लंबे समय से आटकी हुई थी, तो वह फाइनल हो सकती है। आप अच्छे खानपान का आनंद लेंगे, जिससे आपके और जीवनसाथी के बीच प्रेम और गहरा होगा। आप यदि कहीं घूमने-फिरने जाएं, तो उसमें अपने माता-पिता से आशीर्वाद अवश्य लेकर जाएं। आपकी जल्दबाजी की आदत के कारण ही आप कोई गड़बड़ी कामों में करेंगे, जिस पर आपको ध्यान देना होगा।

तुला राशि
आज का दिन आपके लिए सोच समझकर कोई निर्णय लेने के लिए रहेगा। परिवार में किसी सदस्य की सेहत को लेकर आपको थोड़ी टेंशन रहेगी। आप उनके कुछ जरूरी टेस्ट आदि भी करा सकते हैं। यदि किसी सामाजिक आयोजन में सम्मिलित होने का मौका मिले, तो वहां पर भी आप पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ें। आपके घर किसी अतिथि का आगमन होने से माहौल खुशनुमा रहेगा।

वृश्चिक राशि
आज का दिन आपके लिए धैर्य और संयम से काम लेने के लिए रहेगा। आपको किसी बात को लेकर ज्यादा उतावलापन नहीं दिखाना है। आप अपने लिए कुछ शॉपिंग आदि कर सकते हैं, लेकिन माता-पिता के आशीर्वाद से किसी प्रॉपर्टी की प्राप्ति हो सकती है। आपकी इन्कम पहले से बेहतर रहेगी, जो आपको खुशी देगी। दोस्तों के साथ आप किसी पार्टी आदि को करने की योजना बना सकते हैं, जिसमें आपका अच्छा खासा खर्चा भी होगा।

धनु राशि
आज का दिन आपके लिए स्वास्थ्य के लिहाज से कमजोर रहेगा, जिस कारण आपको समस्या होगी, इसलिए आपको अपने खान-पान पर भी थोड़ा कंट्रोल करके चलना होगा और यदि कोई समस्या हो, तो उसे छोटा बिल्कुल ना समझें। आप किसी नए घर आदि की खरीदारी कर सकते हैं, जिसकी आप लंबे समय से कोशिश कर रहे थे। संतान पक्ष की ओर से आपको कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है।

मकर राशि
आज का दिन विद्यार्थियों के लिए बढ़िया रहने वाला है। आपकी किसी परीक्षा के परिणाम बेहतर रहेंगे, जिससे आपको परिवार के सदस्यों का भी प्यार मिलेगा और किसी पार्टी का आयोजन भी हो सकता है। आप यदि कहीं घूमने-फिरने जाने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो उसमें अपनी जेब का ख्याल अवश्य रखें। आपको आय-व्यय में भी संतुलन बनाकर चलना होगा। किसी सामाजिक कार्यक्रम में आपकी अच्छी छवि रहेगी, जिससे कोई सम्मान की प्राप्ति भी हो सकती है।

कुंभ राशि
आज आपको कार्यक्षेत्र में किसी की कोई बात बुरी लग सकती है, जिससे आपके आपसी रिश्ते खराब होंगे, लेकिन आपको अपने बॉस की बातों पर पूरा ध्यान देना होगा। लेन-देन से संबंधित मामलों में आपको अपनी आंख और कान खुले रखें और संतान को नौकरी से संबंधित किसी काम को लेकर कहीं बाहर जाना पड़ सकता है। पारिवारिक बिजनेस पहले से बेहतर रहेगा, जिससे आपको खुशी होगी।

मीन राशि
आज का दिन आपके लिए किसी विपरीत परिस्थिति में धैर्य बनाए रखने के लिए रहेगा। यदि आपको किसी दूर रह रहे परिजन से कोई निराशाजनक सूचना सुनने को मिले, तो आप उसमें थोड़ा संयम दिखाएं और अपने खर्चों को थोड़ा कंट्रोल करके चलने की कोशिश करें, क्योंकि आप जल्दबाजी के कारण भी कोई गड़बड़ी कर सकते हैं। घर परिवार में चल रही समस्याएं आपकी टेंशनों को बढ़ाएंगी, जिन पर आपको पूरा ध्यान देना होगा।

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Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton