हर हर महादेव
~ वैदिक पंचांग ~
दिनांक – 23 जनवरी 2026
दिन – शुक्रवार विक्रम संवत – 2082 शक संवत – 1947 अयन – उत्तरायण ऋतु – शिशिर ऋतु मास – माघ पक्ष – शुक्ल तिथि – पंचमी 24 जनवरी रात्रि 01:46 तक तत्पश्चात षष्ठी नक्षत्र – पूर्वभाद्रपद दोपहर 02:33 तक तत्पश्चात उत्तरभाद्रपद योग – परिघ शाम 03:59 तक तत्पश्चात शिव राहुकाल – सुबह 11:27 से दोपहर 12:51 तक सूर्योदय – 07:19 सूर्यास्त – 06:21 दिशाशूल – पश्चिम दिशा में व्रत पर्व विवरण – वसंत पंचमी, श्री पंचमी विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) ~वैदिक पंचांग ~ माघ शुक्ल सप्तमी 25 जनवरी 2026 रविवार को माघ शुक्ल सप्तमी है। माघ शुक्ल सप्तमी को अचला सप्तमी, रथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी, भानु सप्तमी, अर्क सप्तमी आदि अनेक नामों से सम्बोधित किया गया है और इसे सूर्य की उपासना के लिए बहुत ही सुन्दर दिन कहा गया है। पुत्र प्राप्ति, पुत्र रक्षा तथा पुत्र अभ्युदय के लिए इस दिन संतान सप्तमी का व्रत भी किया जाता है। स्कन्द पुराण के अनुसार यस्यां तिथौ रथं पूर्वं प्राप देवो दिवाकरः॥सा तिथिः कथिता विप्रैर्माघे या रथसप्तमी॥ ५.१२९ ॥ तस्यां दत्तं हुतं चेष्टं सर्वमेवाक्षयं मतम्॥ सर्वदारिद्र्यशमनं भास्करप्रीतये मतम्॥ ५.१३० ॥ भगवान सूर्य जिस तिथि को पहले-पहल रथ पर आरूढ़ हुए, वह ब्राह्मणों द्वारा माघ मास की सप्तमी बताई गयी है, जिसे रथसप्तमी कहते हैं। उस तिथि को दिया हुआ दान और किया हुआ यज्ञ सब अक्षय माना जाता है। वह सब प्रकार की दरिद्रता को दूर करने वाला और भगवान सूर्य की प्रसन्नता का साधन बताया गया है। भविष्य पुराण के अनुसार सप्तमी तिथि को भगवान् सूर्य का आविर्भाव हुआ था | ये अंड के साथ उत्पन्न हुए और अंड में रहते हुए ही उन्होंने वृद्धि प्राप्त कि | बहुत दिनोंतक अंड में रहने के कारण ये ‘मार्तण्ड’ के नामसे प्रसिद्ध हुए | भविष्य पुराण के अनुसार ही सूर्य को अपनी भार्या उत्तरकुरु में सप्तमी तिथि के दिन प्राप्त हुई, उन्हें दिव्य रूप सप्तमी तिथि को ही मिला तथा संताने भी इसी तिथि को प्राप्त हुई, अत: सप्तमी तिथि भगवान् सूर्य को अतिशय प्रिय हैं | भविष्य पुराण : श्रीकृष्ण उवाच ॥ शुक्लपक्षे तु सप्तम्यां यदादित्यदिनं भवेत् । सप्तमी विजया नाम तव्र दत्तं महाफलम् ॥ स्त्रांन दानं जपो होम उपवासस्तथैव च । सर्वें विजयसप्तम्पां महापातकनाशनम् ॥
प्रदक्षिणां यः कुरुते फलैः पुष्पौर्दिवाकरम् । स सर्वगुणसंपन्नं पुव्रं प्राप्नोत्यनुत्तमम ॥
भगवान श्रकृष्ण कहते है– राजन! शुक्ल पक्षकी सप्तमी तिथि को यदि आदित्यवार (रविवार) हो तो उसे विजय सप्तमी कहते है. वह सभी पापोका विनाश करने वाली है .उस दिन किया हुआ स्नान ,दान्, जप, होम तथा उपवास आदि कर्म अनन्त फलदायक होता है. जो उस दिन फल् पुष्प आदि लेकर भगवान सूर्यकी प्रदक्षिणा करता है। वह सर्व गुण सम्पन्न उत्तम पुत्र को प्राप्त करता है। नारद पुराण में माघ शुक्ल सप्तमी को “अचला व्रत” बताया गया है। यह “त्रिलोचन जयन्ती” है। इसी को रथसप्तमी कहते हैं। यही “भास्कर सप्तमी” भी कहलाती है, जो करोङों सूर्य-ग्रहणों के समान है। इसमें अरूणोदय के समय स्नान किया जाता है। आक और बेर के सात-सात पत्ते सिर पर रखकर स्नान करना चाहिए। इससे सात जन्मों के पापों का नाश होता है। इसी सप्तमी को ‘’पुत्रदायक ” व्रत भी बताया गया है। स्वयं भगवान सूर्य ने कहा है – ‘जो माघ शुक्ल सप्तमी को विधिपूर्वक मेरी पूजा करेगा, उसपर अधिक संतुष्ट होकर मैं अपने अंश से उसका पुत्र होऊंगा’। इसलिये उस दिन इन्द्रियसंयमपूर्वक दिन-रात उपवास करे और दूसरे दिन होम करके ब्राह्मणों को दही, भात, दूध और खीर आदि भोजन करावें। अग्नि पुराण में अग्निदेव कहते हैं – माघ मासके शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथिको (अष्टदल अथवा द्वादशदल) कमल का निर्माण करके उसमें भगवान् सूर्यका पूजन करना चाहिये | इससे मनुष्य शोकरहित हो जाता है | चंद्रिका में लिखा है “सूर्यग्रहणतुल्या हि शुक्ला माघस्य सप्तमी। अरुणोदगयवेलायां तस्यां स्नानं महाफलम्॥” अर्थात माघ शुक्ल सप्तमी सूर्यग्रहण के तुल्य होती है सूर्योदय के समय इसमें स्नान का महाफल होता है । नारद पुराण के अनुसार “अरुणोदयवालायां शुक्ला माघस्य सप्तमी ॥ प्रयागे यदि लभ्येत सहस्रार्कग्रहैः समा॥ अयने कोटिपुण्यं स्याल्लक्षं तु विषुवे फलम् ॥११२॥” चंद्रिका में भी विष्णु ने लिखा है “अरुणोदयवेलायां शुक्ला माघस्य सप्तमी ॥ प्रयागे यदि लभ्येत कोटिसूर्यग्रहैः समा” अर्थात माघ शुक्ल सप्तमी यदि अरुणोदय के समय प्रयाग में प्राप्त हो जाए तो कोटि सूर्य ग्रहणों के तुल्य होती है । मदनरत्न में भविष्योत्तर पुराण का कथन है की “माघे मासि सिते पक्षे सप्तमी कोटिभास्करा। दद्यात् स्नानार्घदानाभ्यामायुरारोग्यसम्पदः॥” अर्थात माघ मास की शुक्लपक्ष सप्तमी कोटि सूर्यों के बराबर है उसमें सूर्य स्नान दान अर्घ्य से आयु आरोग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती हैं ।

वसंत पंचमी
वसंत पंचमी, जिसे श्री पंचमी या सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है और मुख्य रूप से विद्या, ज्ञान, कला, संगीत तथा बुद्धि की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है।
धार्मिक महत्व
इसका धार्मिक महत्व मां सरस्वती की पूजा से जुड़ा है, जहां पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवी का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इसे उनकी जन्मतिथि के रूप में मनाया जाता है, तथा विद्यार्थी, शिक्षक, कलाकार, लेखक और संगीतकार विशेष रूप से उनकी आराधना करते हैं ताकि ज्ञान, विवेक और सृजनात्मकता प्राप्त हो; शास्त्रों में इसे ऋषि पंचमी के रूप में उल्लेखित किया गया है, जो विष्णु और कामदेव की पूजा का भी अवसर प्रदान करता है, साथ ही मान्यता है कि इस दिन पूजा से सात जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सफलता मिलती है। इसके अलावा, इसे देवी त्रिमूर्ति (सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती) से जोड़ा जाता है, तथा प्राचीन काल में सरस्वती नदी का त्योहार माना जाता था, जहां एक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव की तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को भेजा था जो वसंत की ऊर्जा का प्रतीक है।
सांस्कृतिक और मौसमी महत्व
सांस्कृतिक और मौसमी रूप से यह वसंत ऋतु के आगमन का सूचक है, जब प्रकृति नई ऊर्जा से भर जाती है, खेतों में सरसों के पीले फूल खिलते हैं, आम के पेड़ों पर बौर आते हैं और चारों ओर रंग-बिरंगी तितलियां मंडराती हैं, जो शरद से वसंत के परिवर्तन का प्रतीक है, तथा पीले रंग का विशेष महत्व है क्योंकि लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं, पीले व्यंजन बनाते हैं और पीले फूलों से पूजा करते हैं। यह प्रेम की ऋतु के रूप में भी जाना जाता है जहां फूलों के बाणों से हृदय प्रेम से सराबोर हो जाता है, तथा बच्चों की शिक्षा की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है जहां कई जगहों पर अक्षरारंभ संस्कार किया जाता है।
उत्सव कैसे मनाया जाता है?
भारत, नेपाल, बांग्लादेश और अन्य देशों में यह बड़े उल्लास से मनाया जाता है, जिसमें मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित कर फूल, फल, मिठाई और किताबें चढ़ाई जाती हैं, विद्यालयों में सरस्वती वंदना होती है, कुछ क्षेत्रों में पतंगबाजी की जाती है, तथा नए कार्यों जैसे शिक्षा, व्यवसाय या विवाह संबंधी चर्चा की शुरुआत शुभ मानी जाती है।
कुल मिलाकर, वसंत पंचमी ज्ञान, प्रकृति और नई शुरुआत का उत्सव है जो जीवन में खुशियां और ऊर्जा भरता है।
वसंत पंचमी पूजा विधि 2026
वसंत पंचमी, जिसे सरस्वती पूजा या श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है, ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। यह माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह 23 जनवरी (शुक्रवार) को है, जो वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से बुद्धि, वाणी और रचनात्मकता में वृद्धि होती है। यह नए कार्यों की शुरुआत जैसे विद्यारंभ, गृह प्रवेश या अन्य शुभ कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। नीचे घर पर पूजा की सरल और शास्त्रोक्त विधि स्टेप बाय स्टेप बताई गई है।
शुभ मुहूर्त (2026 के लिए)
पूजा का मुख्य मुहूर्त: सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक।
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक।
ध्यान दें: पूजा ब्रह्म मुहूर्त या सुबह जल्दी करने से विशेष फल मिलता है। राहुकाल (सुबह 11:27 से दोपहर 12:51 तक) में पूजा से बचें।
पूजा सामग्री
मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र
भगवान गणेश की मूर्ति
पीला कपड़ा (आसन के लिए)
पीले फूल (जैसे गेंदा या सरसों के फूल)
अक्षत (चावल), हल्दी, केसर, चंदन
पीले फल (केला, आम आदि)
पीली मिठाई (बेसन के लड्डू, पीली खीर)
पीले वस्त्र या चुनरी
धूप, अगरबत्ती, दीपक, घी
फल, मेवा, माला
भोग के लिए: केसर हलवा, बूंदी या पीली खीर
कलम, किताबें, कॉपी, वाद्य यंत्र (विद्यार्थियों के लिए)
कलश के लिए: घड़ा, सुपारी, दूर्वा, मुद्रा, आम का पल्लव, नारियल, मोली
आरती की थाली और घंटी
पूजा विधि (स्टेप बाय स्टेप)
स्नान और तैयारी: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान करें और पीले या सफेद/हल्के रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मन में पूजा का संकल्प लें।
पूजा स्थान की सफाई: पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। साथ में भगवान गणेश की मूर्ति भी रखें (पूजा हमेशा गणेश जी से शुरू होती है)।
कलश स्थापना (वैकल्पिक लेकिन शुभ): घड़े या लोटे पर मोली बांधें, ऊपर आम का पल्लव रखें। अंदर सुपारी, दूर्वा, अक्षत, मुद्रा डालें। नारियल पर वस्त्र लपेटकर कलश पर रखें। हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर वरुण देवता का ध्यान करें।
देवी का आह्वान: धूप, अगरबत्ती और दीपक जलाएं। मां सरस्वती को पीले फूल, अक्षत, चंदन, हल्दी, केसर अर्पित करें। पीले फल, पीली मिठाई और चुनरी चढ़ाएं। माला पहनाएं।
भोग लगाना: मां को पीले रंग का भोग जैसे केसर हलवा, पीली खीर या बूंदी का भोग लगाएं। विद्यार्थी अपनी किताबें, कलम और वाद्य यंत्र मां के चरणों में रखें (विद्यारंभ संस्कार के लिए)।
मंत्र जाप: पूजा के दौरान निम्न मंत्रों का जाप करें (कम से कम 108 बार):
मूल मंत्र: “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” या “ॐ सरस्वत्यै नमः”।
सरस्वती वंदना: “या कुन्देन्दु तुषार हार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता। या वीणा वर दण्ड मण्डित करा, या श्वेत पद्मासना॥ या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभृतिभि: देवै: सदा पूजिता। सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाड्यापहा॥”
आरती और प्रार्थना: मां सरस्वती की आरती करें (जैसे “जय सरस्वती माता” गीत)। स्तुति करें और परिवार के साथ प्रार्थना करें। छोटे बच्चों का विद्यारंभ संस्कार करें (उन्हें पहला अक्षर लिखवाएं)।
समापन: पूजा के अंत में फल, मिठाई का प्रसाद ग्रहण करें और सभी को वितरित करें। दान-पुण्य करें, जैसे ब्राह्मण को भोजन या दक्षिणा दें।
इस पूजा से सात जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
पीला रंग विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह वसंत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
यदि संभव हो, तो स्कूल या मंदिर में भी पूजा करें। बच्चों को शामिल करें ताकि वे विद्या के महत्व समझें।
सात्विक भोजन ग्रहण करें और मांस-मदिरा से दूर रहें।
यह विधि सरल है और घर पर आसानी से की जा सकती है। यदि कोई विशेष परंपरा हो, तो पंडित से सलाह लें। शुभकामनाएं! हर हर महादेव।
~ वैदिक पंचांग ~
जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
आपका जन्मदिन: 23 जनवरी
23 का अंक देखने पर ॐ का आभास देता है। जो कि भारतीय परंपरा में शुभ प्रतीक है। आप बेहद भाग्यशाली हैं कि आपका जन्म 23 को हुआ है। 23 का अंक आपस में मिलकर 5 होता है। जबकि 5 का अंक बुध ग्रह का प्रतिनिधि करता है। ऐसे व्यक्ति अधिकांशत: मितभाषी होते हैं। कवि, कलाकार, तथा अनेक विद्याओं के जानकार होते हैं।
आपमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन करना मुश्किल है। अर्थात अगर आप अच्छे स्वभाव के व्यक्ति हैं तो आपको कोई भी बुरी संगत बिगाड़ नहीं सकती। अगर आप खराब आचरण के हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सुधार नहीं सकती। लेकिन सामान्यत: 23 तारीख को पैदा हुए व्यक्ति सौम्य स्वभाव के ही होते हैं। आपमें गजब की आकर्षण शक्ति होती है। आपमें लोगों को सहज अपना बना लेने का विशेष गुण होता है। अनजान व्यक्ति की मदद के लिए भी आप सदैव तैयार रहते हैं।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 1, 5, 7, 14, 23
शुभ अंक : 1, 2, 3, 5, 9, 32, 41, 50
शुभ वर्ष : 2030, 2032, 2034, 2050, 2059, 2052
ईष्टदेव : देवी महालक्ष्मी, गणेशजी, मां अम्बे।
शुभ रंग : हरा, गुलाबी जामुनी, क्रीम
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल करियर: नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए यह वर्ष निश्चय ही सफलताओं भरा रहेगा। वर्ष आपके लिए सफलताओं भरा रहेगा। अभी तक आ रही परेशानियां भी इस वर्ष दूर होती नजर आएंगी।
परिवार: पारिवारिक प्रसन्नता रहेगी। संतान पक्ष से खुशखबर आ सकती है। दाम्पत्य जीवन में मधुर वातावरण रहेगा। अविवाहित भी विवाह में बंधने को तैयार रहें। कारोबार: व्यापार-व्यवसाय में प्रगति से प्रसन्नता रहेगी।
आज का राशिफल दिनांक : 23 जनवरी 2026
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) आज आपका दिन अनर्गल कार्यो में व्यर्थ ना हो इसका विशेष ध्यान रखें दिन का कोई लक्ष्य ना होने के कारण कार्यो से भटक सकते है। आज आप एक कार्य को करते हुए अन्य कार्यो के प्रति चिंतित रहेंगे जिससे किसी भी कार्य में सफलता मिलने में संदेह रहेगा। पारिवारिक वातावरण में आज भी नोकझोंक लगी रहेगी घरेलू समस्याओ का मिल बैठ कर समाधान करें अन्यथा आपसी संबंध खराब होने के पूर्ण आसार है। कार्य व्यवसाय में भी किसी ना किसी बात को लेकर सहकर्मी अथवा अन्य लोगो से बहस होगी। व्यावसायिक क्षेत्र पर बहस से बचें ख्याति में कमी आने से भविष्य के लिये हानिकारक रहेगा। संध्या बाद माहौल सुधरने से राहत मिलेगी।
वृष (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) आज के दिन आपको पूर्व में किये गए सामाजिक एवं घरेलु कार्यो से मान-सम्मान मिलेगा। दिनचार्य आज थोड़ी अव्यवस्थित रहेगी फिर भी संतुष्ट रहेंगे। कार्य व्यवसाय अपेक्षा से थोड़ा मंदा रहेगा धन की आमद परिश्रम के बाद ही होगी। कार्य क्षेत्र पर अधूरे कार्यो को पूर्ण करने की शीघ्रता रहेगी। स्वभाव में गर्मी भी रहेगी फिर भी अकारण ही क्रोध नही करेंगे। नौकरी वालो का किसी से झगड़ा होने की संभावना है कोई भी ऐसा कार्य करने से बचे जिससे आपके ऊपर आरोप आये। पारिवारिक वातावरण संध्या बाद कि परिस्थिति दिन से बेहतर बनेगी। स्वास्थ्य में रक्त पित्त संबंधित विकार आ सकता है।
मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा) आज का दिन संध्या तक आपके लिए शुभ बना रहेगा इसके बाद स्थिति एकदम विपरीत होने लगेगी आवश्यक कार्य दिन रहते पूर्ण कर लें। दिन के आरंभ में धन लाभ की आशा लागये रहेंगे इसके पूर्ण होने में मध्यान तक इंतजार करना पड़ेगा। आज किसी अवांछित खर्च के आने से थोड़े परेशान भी होंगे लेकिन स्थिति को संभाल लेंगे। कार्य व्यवसाय में आकस्मिक वृद्धि के योग बन रहे है आज आपकी तुरंत निर्णय लेने की क्षमता अवश्य ही लाभ दिलायेगी। सार्वजिक क्षेत्र पर भी सम्मान पाने के हकदार बनेंगे। व्यवहार कुशलता से उच्च प्रतिष्ठित लोगो को अपने पक्ष में कर लेंगे। घर मे आनंद का वातावरण रहेगा संध्या बाद किसी से झगड़ा होने की सम्भवना भी है।
कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) आज के दिन परिस्थितियों में धीरे-धीरे सुधार आने लगेगा सेहत पूर्ण रूप से ठीक ना होने पर भी मजबूरी में कार्य करना पड़ेगा। आज आपके स्वभाव में जल्दबाजी रहेगी जिससे बनते हुए काम बिगड़ने की संभावना है। प्रत्येक कार्य को धैर्य से करें शीघ्र लाभ पाने के चक्कर मे लाभ की जगह हानि हो सकती है। मध्यान तक का समय लाभ की अपेक्षा ज्यादा मेहनत वाला रहेगा लेकिन निराश ना हो इसके बाद मेहनत फलती होगी आवश्यकता अनुसार धन कही ना कही से मिल ही जायेगा। धार्मिक कार्यो के प्रति आस्था बढ़ेगी देवदर्शन के अवसर मिलेंगे। घर के अस्त-व्यस्त माहौल मे भी संध्या बाद सुधार आएगा।
सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) आज का दिन उतार चढ़ाव वाला रहेगा आज आपके मन मे काफी योजनाए चलती रहेंगी लेकिन असफलता के डर से इन्हें साकार रूप देने में दिक्कत आएगी दिन के आरंभ से ही मन किसी अरिष्ट की आशंका से व्याकुल रहेगा।मध्यान के आस पास कोई अशुभ समाचार मिलने की संभावना है। पूर्व में की किसी गलती का फल आज मिलेगा। आर्थिक कमी आज दिन भर बनी रहेगी फिर भी प्रयास करते रहे धन लाभ मेहनत करने पर ही होगा। प्रेम प्रसंग संबंधित विचार संध्या तक दिमाग से दूर ही रखें शांति रहेगी। परिवारिक माहौल पल पल में बदलता रहेगा घर के सदस्य आज एक दूसरे के ऊपर कम ही विश्वास करेंगे। संध्या बाद से स्थिति सुधरने लगेगी।
कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) आज का दिन मिश्रित फलदायी रहेगा दिन के प्रथम भाग में पूर्व में कई गई मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिलने से उत्साह में रहेंगे। मध्यान तक लगभग सभी अधुरेकार्य पूर्ण हो जाएंगे बस आज जो काम ज्यादा महत्त्वपूर्ण होगा वही अधूरा रहेगा। धन की आमद आशा से कम होगी। मध्यान बाद स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज होगी सेहत को लेकर लापरवाही ना करें अन्यथा परिणाम गंभीर भी हो सकते है शारीरिक अकडन दर्द की शिकायत बनेगी। घर के सदस्य अपने मे ही मस्त रहेंगे कुछ काम बताने पर नाराज होंगे। लालच देकर ही काम निकाला जा सकता है। ज्यादा किसी झमेले में ना पड़े आराम करें।
तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) आज आपके अधिकांश कार्य असमंजस की स्थिति के कारण लटके रहेंगे आज आप किसी की सहायता भी लेना पसंद नही करेंगे इसलिए कार्यो के पूर्ण होने की संभावना कम ही रहेगी फिर भी धन संबंधित परेशानी नही रहेगी। आर्थिक लाभ किसी ना किसी रूप में अवश्य होगा। आप किसी से भी मजाक कर लेंगे लेकिन किसी अन्य का आप सहन नही कर पाएंगे जिससे आपसी मन मुटाव होगा। कार्य व्यवसाय में परिश्रम का फल विलंब से मिलने के कारण निराश होंगे आपके बनते कार्यो में कोई विघ्न डाल सकता है। जल्द से किसी के ऊपर भरोसा न करें हित शत्रु प्रबल रहेंगे। घर का वातावरण शांत रहेगा।
वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) आज आप दिन के आरंभ से ही किसी अधूरे कार्य को करने में जुट जाएंगे मध्यान तक इसमे सफल भी रहेंगे लेकिन आपके कार्यो में विघ्न डालने वाले भी मिलेंगे हर किसी की बातों में ना आये अन्यथा लाभ से वंचित रह जाएंगे। कार्य व्यवसाय में सामान्य लाभ होगा धन की आमद मध्यम रहेगी आज अन्य महत्त्वपूर्ण कार्य सरकारी अथवा कागजी कार्यो की रूपरेखा बना कर रखें निकट भविष्य में इनमे सफल होने की संभावना बनेगी। मित्र सहकर्मियों से वादा पूरा ना करने पर अनबन हो सकती है। परिवार में छूट-पुट कहासुनी के बाद शांति स्थापित होगी। धार्मिक क्षेत्र की लघु यात्रा होगी। आज थकान ज्यादा रहेगी।
धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे) आज के दिन आप दिन भर ख्याली पुलाव पकाएंगे आपकी कल्पनाएं असामान्य रहेंगी असंभव कार्यो को भी संभव करने की सोचेंगे। कार्य क्षेत्र पर भी मेहनत करने के मूड में नही रहेंगे बैठे बिठाये लाभ कमाने की मानसिकता के चलते सीमित लाभ से ही संतोष करना पड़ेगा। आज आपको व्यवसाय विस्तार के मार्गदर्शन मिलेंगे लेकिन किसी अभाव के कारण सम्भव नही हो सकेगा। नौकरी वाले लोगो को ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी जल्द ही इसका परिणाम सकारात्मक रूप में मिलेगा। परिवार के सभी सदस्यों में एक दूसरे से श्रेष्ठ बनने की होड़ लगेगी लेकिन वातावरण शांत ही रहेगा। कुछ समय के लिये शारीरक शिथिलता अनुभव होगी।
मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी) आज का दिन भी लाभदायक बना है परन्तु आपकी आलसी प्रवृति के कारण होने वाले लाभ में कमी भी आ सकती है। दिन के आरंभ से ही प्रत्येक कार्य मे लापरवाही करेंगे जिस वजह से कार्य एक बार बिगड़ा तो आज सम्भलना मुश्किल होगा। मध्यान के समय परिस्थिति प्रतिकूल बनेगी लेकिन हिम्मत ना हारे आज नही तो कल मेहनत का फल आशाजनक मिलेगा। कार्य क्षेत्र पर सहयोगियों की कमी रहने से अधिकांश कार्यो में आत्मनिर्भर रहना पड़ेगा। धन लाभ आवश्यकता अनुसार हो जाएगा फिर भी कुछ कमी अखरेगी। परिजनों का प्रत्येक कार्यो में सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य को लेकर थोड़े आशंकित रह सकते है।
कुंभ (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा) आज आप का स्वभाव संतोषी रहेगा किसी भी कार्य को लेकर ज्यादा उधेड़ बुन में नही पड़ेंगे। आज दिन में आपको प्रलोभन के अवसर भी मिलेंगे देख भाल कर ही निर्णय लें कार्य व्यवसाय में निवेश कर सकते है संध्या बाद से धन लाभ की संभावनाए अधिक रहेंगी लेकिन शेयर आदि कार्यो में जोखिम ना लें नुकसान हो सकता है। व्यावसायिक एवं सामाजिक कार्य एकसाथ आने एवं सहकर्मियों का मनमाने व्यवहार से असुविधा होगी परन्तु किसी स्वयं जन का सहयोग मिलने से काम आसान हो जाएगा। पारिवार के सदस्य महत्त्वपूर्ण विषयो पर चिंतन करेंगे। संध्या बाद मनोकामना पूर्ति होने से प्रसन्न रहेंगे। सेहत साथ देगी।
मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) आज भी दिन आपके लिए सुख-शांति दायक रहेगा दिन के आरंभ से ही यात्रा की योजना बनेगी लंबी यात्रा के प्रति उत्साहित रहेंगे लेकिन इससे लाभ की जगह खर्च ही होगा। कार्य व्यवसाय में मंदी रहेगी खर्च निकालने लायक आमदनी भी किसी के सहयोग के बाद ही बन सकेगी। लोग आपकी पीछे से बुराई करेंगे लेकिन मनमौजी स्वभाव रहने के आज आपका कोई साथ दे या ना दे आपके ऊपर कोई फर्क नही पड़ेगा। मित्र रिश्तेदारों से सुखद भेंट होगी पुरानी यादें ताजा होने से अतीत में खोए रहेंगे। संध्या बाद प्रतिकूल समय होने लगेगा अकस्मात हानि होने की संभावना है। संध्या पश्चात वाहन के प्रयोग में सावधानी बरतें।

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