Vaidik Panchang 11012026 Rashifal Samadhan

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 11 जनवरी 2026*
🌤️ *दिन – रविवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शिशिर ऋतु*
🌤️ *मास – माघ (गुजरात-महाराष्ट्र पौष)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – अष्टमी सुबह 10:20 तक तत्पश्चात नवमी*
🌤️ *नक्षत्र – चित्रा शाम 06:12 तक तत्पश्चात स्वाती*
🌤️ *योग – सुकर्मा शाम 05:27 तक तत्पश्चात धृति*
🌤️ *राहुकाल – शाम 04:53 से शाम 06:15 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 07:19*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:13*
👉 *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण -*
💥 *विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है (ब्रह्मवैवर्त पुराण ब्रह्म खण्ड: 27,29,34)*
           🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️

🙏🕉  जय सूर्यदेव भगवान 🕉️🙏

      🌞सूर्यदेव के सिद्ध मंत्र:–

🎪🌞🎪 ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
⚘️⚘️⚘️ यह मंत्र सूर्यदेव की कृपा और सकारात्मकता के लिए है।

🎪🌞🎪 ॐ घृणि सूर्याय नमः
⚘️⚘️⚘️ यह एक शक्तिशाली मंत्र है जो ऊर्जा और स्वास्थ्य प्रदान करता है।

🎪🌞🎪 ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा:
⚘️⚘️⚘️ यह मंत्र मनचाही इच्छाओं को पूरा करने के लिए है।

🎪🌞🎪 ॐ सूर्याय नमः
⚘️⚘️⚘️ यह एक सरल और प्रभावी मंत्र है जिसका जाप सूर्य को जल चढ़ाते समय किया जा सकता है।
🌷 *मकर संक्रांति* 🌷
🙏🏻 *आत्मोद्धारक व जीवन-पथ प्रकाशक पर्व – मकर संक्रांति (14 जनवरी 2026 बुधवार को पुण्यकाल दोपहर 03:13 से सूर्यास्त तक )*
🌞 *जिस दिन भगवान सूर्यनारायण उत्तर दिशा की तरफ प्रयाण करते हैं, उस दिन उतरायण (मकर संक्रांति) का पर्व मनाया जाता है | इस दिन से अंधकारमयी रात्रि कम होती जाती है और प्रकाशमय दिवस बढ़ता जाता है | उत्तरायण का वाच्यार्थ है कि सूर्य उत्तर की तरफ, लक्ष्यार्थ है आकाश के देवता की कृपा से ह्दय में भी अनासक्ति करनी है | नीचे के केन्द्रों में वासनाएँ, आकर्षण होता है व ऊपर के केन्द्रों में निष्कामता, प्रीति और आनंद होता है | संक्रांति रास्ता बदलने की सम्यक सुव्यवस्था है | इस दिन आप सोच व कर्म की दिशा बदलें | जैसी सोच होगी वैसा विचार होगा, जैसा विचार होगा वैसा कर्म होगा | हाड-मांस के शरीर को सुविधाएँ दे के विकार भोगकर सुखी होने की पाश्चात्य सोच है और हाड-मांस के शरीर को संयत, जितेन्द्रिय रखकर सदभाव से विकट परिस्थितियों में भी सामनेवाले का मंगल चाहते हुए उसका मंगलमय स्वभाव प्रकट करना यह भारतीय सोच है |*
*सम्यक क्रांति…. ऐसे तो हर महिने संक्रांति आती है लेकिन मकर संक्रांति साल में एक बार आती है | उसीका इंतजार किया था भीष्म पितामह ने | उन्होंने उत्तरायण काल शुरू होने के बाद ही देह त्यागी थी |*
*पुण्यपुंज व आरोग्यता अर्जन का दिन*
🌞 *जो संक्रांति के दिन स्नान नहीं करता वह ७ जन्मों तक निर्धन और रोगी रहता है और जो संक्रांति का स्नान कर लेता है वह तेजस्वी और पुण्यात्मा हो जाता है | संक्रांति के दिन उबटन लगाये, जिसमे काले तिल का उपयोग हो |*
🌞 *भगवान सूर्य को भी तिलमिश्रित जल से अर्घ्य दें | इस दिन तिल का दान पापनाश करता है, तिल का भोजन आरोग्य देता है, तिल का हवन पुण्य देता है | पानी में भी थोड़े तिल डाल के पियें तो स्वास्थ्यलाभ होता है | तिल का उबटन भी आरोग्यप्रद होता है | इस दिन सुर्योद्रय से पूर्व स्नान करने से १० हजार गौदान करने का फल होता है | जो भी पुण्यकर्म उत्तरायण के दिन करते हैं वे अक्षय पुण्यदायी होते हैं | तिल और गुड के व्यंजन, चावल और चने की दाल की खिचड़ी आदि ऋतु-परिवर्तनजन्य रोगों से रक्षा करती है | तिलमिश्रित जल से स्नान आदि से भी ऋतु-परिवर्तन के प्रभाव से जो भी रोग-शोक होते हैं, उनसे आदमी भिड़ने में सफल होता है |*
🌞 *सूर्यदेव की विशेष प्रसन्नता हेतु मंत्र*
*ब्रम्हज्ञान सबसे पहले भगवान सूर्य को मिला था | उनके बाद रजा मनु को, यमराज को…. ऐसी परम्परा चली | भास्कर आत्मज्ञानी हैं, पक्के ब्रम्ह्वेत्ता हैं | बड़े निष्कलंक व निष्काम हैं | कर्तव्यनिष्ठ होने में और निष्कामता में भगवान सूर्य की बराबरी कौन कर सकता है ! कुछ भी लेना नहीं, न किसी से राग है न द्वेष है | अपनी सत्ता-समानता में प्रकाश बरसाते रहते हैं, देते रहते हैं |*
🌞 *‘पद्म पुराण’ में सूर्यदेवता का मूल मंत्र है : ॐ ह्रां ह्रीं स: सूर्याय नम: |  अगर इस सूर्य मंत्र का ‘आत्मप्रीति व आत्मानंद की प्राप्ति हो’ – इस हेतु से भगवान भास्कर का प्रीतिपूर्वक चिंतन करते हुए जप करते हैं तो खूब प्रभु-प्यार बढेगा, आनंद बढेगा |*
🌞 *ओज-तेज-बल का स्त्रोत : सूर्यनमस्कार*
*सूर्यनमस्कार करने से ओज-तेज और बुद्धि की बढ़ोत्तरी होती है | ॐ सूर्याय नम: | ॐ भानवे नम: | ॐ खगाय नम: ॐ रवये नम: ॐ अर्काय नम: |….. आदि मंत्रो से सूर्यनमस्कार करने से आदमी ओजस्वी-तेजस्वी व बलवान बनता है | इसमें प्राणायाम  भी हो जाता है, कसरत भी हो जाती है |*
*सूर्य की उपासना करने से, अर्घ्य देने से, सूर्यस्नान व सूर्य-ध्यान आदि करने से कामनापूर्ति होती है | सूर्य का ध्यान भ्रूमध्य में करने से बुद्धि बढती है और नाभि-केंद्र में करने से मन्दाग्नि दूर होती है, आरोग्य का विकास होता है |*
🌞 *आरोग्य व पुष्टि वर्धक : सूर्यस्नान*
*सूर्य की धूप में जो खाद्य पदार्थ, जैसे-घी, तेल आदि २ – ४ घंटे रखा रहे तो अधिक सुपाच्य हो जाता है | धूप में रखे हुए पानी से कभी –कभी स्नान कर सकते हैं | इससे सूखा रोग (Rickets) नहीं होता और रोगनाशिनी शक्ति बरक़रार रहती है |*
         🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

*चार प्रकार के भक्तों की व्याख्या साधक संजीवनी से साभार*
(पुस्तक में विस्तृत व्याख्या है)
   *।। ॐ श्रीपरमात्मने नमः ।।*
         *श्रीमद्भगवद्गीताजी*
            *सप्तमोऽध्यायः*
          *श्लोक  संख्या १६*
*************************
*चतुर्विधा भजन्ते मां जनाः सुकृतिनोऽर्जुन ।*
*आर्तो जिज्ञासुरर्थार्थी ज्ञानी भरतर्षभ ।।१६।।*
      *अर्थ* – *भरतर्षभ, अर्जुन* हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन! *सुकृतिनः* पवित्र कर्म करनेवाले *अर्थार्थी* अर्थार्थी, *आर्तः* आर्त, *जिज्ञासुः* जिज्ञासु *च* और *ज्ञानी* ज्ञानी अर्थात् प्रेमी– (ये) *चतुर्विधाः* चार प्रकारके *जनाः* मनुष्य *माम्* मेरा *भजन्ते* भजन करते हैं अर्थात् मेरे शरण होते हैं।
      *व्याख्या* – *’चतुर्विधा भजन्ते मां जनाः सुकृतिनोऽर्जुन’* – सुकृती पवित्रात्मा मनुष्य अर्थात् भगवत्सम्बन्धी काम करनेवाले मनुष्य चार प्रकारके होते हैं। ये चारों मनुष्य मेरा भजन करते हैं अर्थात् स्वयं मेरे शरण होते हैं।
       पूर्वश्लोकमें *’दुष्कृतिनः’* पदसे भगवान् में न लगनेवाले मनुष्योंकी बात आयी थी। अब यहाँ *’सुकृतिनः’* पदसे भगवान् में लगनेवाले मनुष्योंकी बात कहते हैं। ये सुकृती मनुष्य शास्त्रीय सकाम पुण्य कर्म करनेवाले नहीं हैं, प्रत्युत भगवान् से अपना सम्बन्ध जोड़कर भगवत्सम्बन्धी कर्म करनेवाले हैं। सुकृती मनुष्य दो प्रकारके होते हैं– एक तो यज्ञ, दान, तप आदि और वर्ण, आश्रमके शास्त्रीय कर्म भगवान् के लिये करते हैं अथवा उनको भगवान् के अर्पण करते हैं और दूसरे भगवन्नामका जप तथा कीर्तन करना, भगवान् की लीला सुनना तथा कहना आदि केवल भगवत्सम्बन्धी कर्म करते हैं।
       जिनकी भगवान् में रुचि हो गयी है, वे ही भाग्यशाली हैं, वे ही श्रेष्ठ हैं और वे ही मनुष्य कहलानेयोग्य हैं। वह रुचि चाहे किसी पूर्व पुण्यसे हो गयी हो, चाहे आफतके समय दूसरोंका सहारा छूट जानेसे हो गयी हो, चाहे किसी विश्वसनीय मनुष्यके द्वारा समयपर धोखा देनेसे हो गयी हो, चाहे सत्संग, स्वाध्याय अथवा विचार आदिसे हो गयी हो, किसी भी कारणसे भगवान् में रुचि होनेसे वे सभी सुकृति मनुष्य हैं।
      *’आर्तो जिज्ञासुरर्थार्थी ज्ञानी च भरतर्षभ’* – अर्थार्थी, आर्त, जिज्ञासु और ज्ञानी अर्थात् प्रेमी– ये चार प्रकारके भक्त भगवान् का भजन करते हैं अर्थात् भगवान् के शरण होते हैं।
      *’अर्थार्थी भक्त’* – जिनको अपने न्याययुक्त सुख सुविधाकी इच्छा हो जाती है अर्थात् धन सम्पत्ति, वैभव आदिकी इच्छा हो जाती है, परन्तु उसको वे केवल भगवान् से ही चाहते हैं, दूसरोंसे नहीं, ऐसे भक्त अर्थार्थी भक्त कहलाते हैं।
       चार प्रकारके भक्तोंमें अर्थार्थी आरंभिक भक्त होता है। पूर्व संस्कारोंसे उसकी धनकी इच्छा रहती है और वह धनके लिये चेष्टा भी करता है, पर वह समझता है कि भगवान् के समान धनकी इच्छा पूरी करनेवाला दूसरा कोई नहीं है। ऐसा समझकर वह धनप्राप्तिके लिये तत्परतापूर्वक भगवन्नामका जप कीर्तन, भगवत्स्वरूपका ध्यान आदि करता है। धन प्राप्त करनेके लिये उसका भगवान् पर ही विश्वास, निष्ठा होती है।
      *’आर्त भक्त’* – प्राण संकट आनेपर, आफत आनेपर, मनके प्रतिकूल घटना घटनेपर जो दुःखी होकर अपना दुःख दूर करनेके लिये भगवान् को पुकारते हैं और दुःखको दूर करना केवल भगवान् से ही चाहते हैं, दूसरे किसी उपायको काममें नहीं लेते, वे आर्त भक्त कहलाते हैं। आर्त भक्तोंमें उत्तराका दृष्टान्त लेना ठीक बैठता है। कारण कि वह जब उसपर आफत आयी तब उसने भगवान् के सिवाय अन्य किसी उपायका सहारा नहीं लिया। अन्य उपायोंकी तरफ उसकी दृष्टि ही नहीं गयी। उसने केवल भगवान् का ही सहारा लिया। तात्पर्य यह हुआ कि सकामभाव रहनेपर भी आर्त भक्त उसकी पूर्ति केवल भगवान् से ही चाहते हैं।
      *’जिज्ञासु भक्त’* – जिसमें अपने स्वरूपको भगवत्तत्त्वको जाननेकी जोरदार इच्छा जाग्रत् हो जाती है कि वास्तवमें मेरा स्वरूप क्या है ? भगवत्तत्त्व क्या है ? इस प्रकार तत्त्वको जाननेके लिये शास्त्र, गुरु अथवा पुरुषार्थ (श्रवण, मनन, निदिध्यासन आदि उपायों) का भी आश्रय न रखते हुए केवल भगवान् के आश्रित होकर उस तत्त्वको केवल भगवान् से ही जो जानना चाहते हैं; वे जिज्ञासु भक्त कहलाते हैं।
       जिज्ञासु भक्त वही होता है, जिसका जिज्ञास्य केवल भगवत्तत्त्व और उपाय केवल भगवद्भक्ति ही होती है अर्थात् उपेय और उपायमें अनन्यता होती है।
       जिज्ञासु भक्तोंमें उद्धवजीका नाम लिया जाता है। भगवन् ने उद्धवजीको दिव्यज्ञानका उपदेश दिया था, जो ‘उद्धवगीता’ (श्रीमद्भागवत ११।७-३०) के नामसे प्रसिद्ध है।
      *’ज्ञानी (प्रेमि) भक्त’* -अर्थार्थी अर्त और जिज्ञासु– तीनों भक्तोंसे ज्ञानी भक्तकी विलक्षणता बतानेके लिये यहाँ ‘च’ अव्यय आया है।
       ज्ञानी भक्तको अनुकूल से अनुकूल और प्रतिकूल से प्रतिकूल परिस्थिति, घटना, व्यक्ति, वस्तु आदि सब भगवत्स्वरूप ही दीखते हैं अर्थात् उसको अनुकूल प्रतिकूल परिस्थिति केवल भगवल्लीला ही दीखती है। जैसे भगवान् में अपने लिये अनुकूलता प्राप्त करने, प्रतिकूलता हटाने, बोध प्राप्त करने आदि किसी तरहकी कभी किंचिन्मात्र भी इच्छा होती ही नहीं, वे तो केवल भक्तोंके प्रेममें ही मस्त रहते हैं; ऐसे ही ज्ञानी (प्रेमी) भक्तोंमें किंचिन्मात्र भी कोई इच्छा नहीं होती, वे केवल भगवान् के प्रेममें ही मस्त रहते हैं।
*🙏जय श्री राम कृष्ण हरि 🙏*

चुना खाने से क्या लाभ होता है

चूना जो पान में लगा के खाया जाता है , उसके गेहूं के बराबर छोटे छोटे टुकड़े करके घर में रखे .यह सत्तर प्रकार की बीमारियों को ठीक कर देता है . गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी #पीलिया ठीक हो जाता है।

#शुगर #मरीज रोज़ सुबह ख़ाली पेट एक गिलास पानी में एक छोटे चने के बराबर चुना मिलकर पीने से शुगर जड़ से ख़त्म हो सकती हैं ( समय समय पर जाँच करवाते रहे.. वरना शुगर का लेवल माइनस भी हो सकता हैं)

#जब कोई माँ #गर्भावस्था में है तो गेहूं के बराबर चूना रोज खाना चाहिए क्योंकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा केल्शियम की जरुरत होती है और चूना केल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है .

#चूना #घुटने_क_दर्द ठीक करता है , कमर का दर्द ठीक करता है , कंधे का दर्द ठीक करता है, एक खतरनाक बीमारी है Spondylitis वो चुने से ठीक होता है . कई बार हमारे रीढ़ की हड्डी में जो मनके होते है उसमे दूरी बढ़ जाती है Gap आ जाता है जिसे ये चूना ही ठीक करता है . रीढ़ की हड्डी की सब बीमारिया चूने से ठीक होती है . अगर हड्डी टूट जाये तो टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे ज्यादा चूने में है . इसके लिए गेहूं के बराबर चूने का सेवन सुबह खाली पेट कर सकते है.

#अगर मुंह में ठंडा गरम पानी लगता है तो चूना खाने से बिलकुल ठीक हो जाता है , मुंह में अगर छाले हो गए है तो चूने के पानी से कुल्ला करने पर तुरन्त ठीक हो जाता है । शरीर में जब खून कम हो जाये तो चूना जरुर लेना चाहिए , एनीमिया है खून की कमी है उसकी सबसे अच्छी दवा है ये चूना . गन्ने के रस में , या संतरे के रस में , नही तो सबसे अच्छा है अनार के रस में डाल कर चूना ले . अनार के रस में चूना पिने से खून बहुत बढता है , बहुत जल्दी खून बनता है – एक कप अनार का रस और गेहूँ के दाने के बराबर चूना डालकर सुबह खाली पेट ले सकते है.

#भारत के जो लोग चूने से पान खाते है, बहुत होशियार है और वे महर्षि वाग्भट के अनुयायी है . पर पान बिना तम्बाखू , सुपारी और कत्थे के ले . तम्बाखू ज़हर है और चूना अमृत है . कत्था  केंसर का कारण बनता है, पान में सौंठ , इलायची , लौंग , केसर , सौंफ , गुलकंद , चूना , कसा हुआ नारियल आदि के खाए .

#अगर घुटने में घिसाव आ गया हो और डॉक्टर कहे के घुटना बदल दो तो भी जरुरत नही चूना खाते रहिये और हरसिंगार ( पारिजातक या प्राजक्ता ) के पत्ते का काढ़ा पीजिये , घुटने बहुत अच्छे काम करेंगे ।
चूना खाइए पर चूना लगाइए मत .
ये चूना लगाने के लिए नही है खाने के लिए है.
🙏🏻🌷🍀🌹🌻🍁🌸🌺💐🌷🙏🏻

जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
दिनांक 11 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 2 होगा, इस मूलांक को चंद्र ग्रह संचालित करता है। चंद्र ग्रह मन का कारक होता है। आप अत्यधिक भावुक होते हैं। ग्यारह की संख्या आपस में मिलकर दो होती है इस तरह आपका मूलांक दो होगा। आप स्वभाव से शंकालु भी होते हैं। दूसरों के दु:ख दर्द से आप परेशान हो जाना आपकी कमजोरी है। चंद्र ग्रह स्त्री ग्रह माना गया है। अत: आप अत्यंत कोमल स्वभाव के हैं।

आपमें अभिमान तो जरा भी नहीं होता। चंद्र के समान आपके स्वभाव में भी उतार-चढ़ाव पाया जाता है। आप अगर जल्दबाजी को त्याग दें तो आप जीवन में बहुत सफल होते हैं। आप मानसिक रूप से तो स्वस्थ हैं लेकिन शारीरिक रूप से आप कमजोर हैं।


आपके लिए खास

शुभ दिनांक : 2, 11, 20, 29

शुभ अंक : 2, 11, 20, 29, 56, 65, 92


शुभ वर्ष : 2027, 2029, 2036

ईष्टदेव : भगवान शिव, बटुक भैरव

शुभ रंग : सफेद, हल्का नीला, सिल्वर ग्रे


आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल

करियर: किसी नवीन कार्य योजनाओं की शुरुआत करने से पहले बड़ों की सलाह लें।

कारोबार: व्यापार-व्यवसाय की स्थिति ठीक-ठीक रहेगी।

सेहत और परिवार: स्वास्थ्य की दृष्टि से संभल कर चलने का वक्त होगा। पारिवारिक विवाद आपसी मेलजोल से ही सुलझाएं। दखलअंदाजी ठीक नहीं रहेगी।


आज की सलाह: बगैर देखे किसी कागजात पर हस्ताक्षर ना करें। लेखन से संबंधित मामलों में सावधानी रखना होगी।


🌹आज का राशिफल 🌹
*दिनांक : 11 जनवरी 2026*

मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन भी आपके लिये शुभ रहेगा। व्यावसायिक क्षेत्र पर आज विविध क्षेत्रों से लाभ के अवसर मिलेंगे लेकिन लापरवाही के चलते सफलता कुछएक में ही मिल पाएगी। सामाजिक व्यवहारों के लिये दिनचार्य में बदलाव करना पड़ेगा मित्र परिचितों के आयोजनों में योगदान देंगे। नौकरी पेशा जातको को आज थोडा अधिक परिश्रम करना पड़ेगा इसका उचित लाभ भी मिलेगा लेकिन इंतजार के बाद ही। पारिवारिक आवश्यकताओ की पूर्ति पर खर्च करेंगे। थोड़ी नौक झोंक के बाद दाम्पत्य जीवन का सुख मिलेगा। छोटी यात्रा के योग भी है जो केवल खर्चीली ही रहेगी। कुछ समय के मानसिक तनाव को छोड़ सेहत ठीक रहेगी।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन आपके लिए मिश्रित फलदायक रहेगा। दिन के पूर्वार्ध में स्वभाव में जल्दबाजी रहने से कोई गलती होने की संभावना है धर्य से काम करें अन्यथा बाद में अपनी गलती का गुस्सा किसी और पर उतार कर अशांति फैलाएंगे। कार्य क्षेत्र पर जिस कार्य मे अधिक परिश्रम करेंगे उसकी जगह किसी अन्य मार्ग से धन लाभ होने पर अचंभित होंगे। मध्यान बाद का समय अशांति वाला रहेगा किसी पडोसी अथवा स्वजन से अहम् को लेकर टकराव की स्थिति बनेगी। कार्य स्थल पर भी उधारी वाले परेशान करेंगे किसी का आर्थिक सहयोग मिलने से समस्या कुछ कम होगी। बुजुर्गो का सहयोग मार्गदर्शन मिलेगा। शुभ आयोजनों में सम्मिलित होंगे।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
बीते दिन की तुलना में आज का दिन राहत वाला रहेगा परन्तु स्वभाव में थोड़ी गरमी आज भी बनी रहेगी लोग आपसे बात करने में झिझकेंगे। सेहत के दृष्टिकोण से आज का दिन शुभ रहेगा बीमारियों से निजात मिलेगी लेकिन थोड़ा बहुत आलस्य बना रहेगा। कार्य क्षेत्र पर आज पूरा ध्यान देंगे थोड़े परिश्रम से नए अनुबंध मिल सकते है मध्यान के बाद जहां से उम्मीद नही होगी वहां से आकस्मिक लाभ होगा। महिला मित्र से सम्बन्ध प्रगाढ़ होंगे फिर भी मर्यादा बनाये रखें संध्या के बाद का समय रिश्तेदारी अथवा परिवारिक मांगलिक आयोजन में व्यस्त रहेंगे। वाहन चलाने में सावधानी बरतें चोटादि का भय है।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन आपको मिला जुला फल देगा। दिन के आरंभ से मध्यान तक स्वभाव को नरम रखे अन्यथा पूर्व में बनाये व्यवहार खराब हो सकते है। मध्यान तक सार्वजनिक व्यवहारों से लाभ के अवसर मिलेंगे कार्य क्षेत्र पर मेहनत के अनुसार लाभ मिलेगा धन लाभ आवश्यकता अनुसार होने पर भी संतोष नही होगा। दोपहर बाद आपकी आलसी प्रवृति के कारण किसी महत्त्वपूर्ण कार्य अनुबंध के आज हाथ आते आते निकलने की संभावना है। शारीरिक एवं मानसिक विकारों के कारण बेचैनी रहेगी। किसी मित्र का सहयोग मिलने से लाभ होगा। भविष्य के लिये आज निवेश करने से बचें।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन आपके लिए कई नए अवसर लाएगा लेकिन भाग्य भरोसे बैठने की स्थिति में परिणाम विपरीत बीबी हो सकते है मेहनत करने में आज कसर ना छोड़े बेरोजगारों को रोजगार की उम्मीद जगेगी व्यवसायी वर्ग को अतिरिक्त आय होने की संभावना अधिक है। किसी निकटस्थ के सहयोग से भाग्योदय होगा। नौकरी पेशा जातको को परिश्रम का उचित लाभ मिलेगा अधिकारी वर्ग आप के ऊपर विश्वास करेंगे। संध्या बाद उपहार सम्मान का लाभ मिलेगा मित्रों के साथ रमणीक स्थल पर घूमने का अवसर मिलेगा लेकिन आज बाहर की अपेक्षा घर मे थोड़ी खटपट रहने पर भी अधिक सुरक्षित अनुभव करेंगे। फिजूल खर्ची से बचें।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन आपके लिए मिश्रित फलदायक रहेगा। प्रातःकाल से ही किसी न किसी पारिवारिक अथवा सामाजिक कार्यो में व्यस्त रहने से कार्य क्षेत्र पर कम योगदान दे पाएंगे। नौकरी पेशा जातको को आज परिश्रम का उचित फल पाने के लिये अधिक मेहनत और नाराजगी का सामना करना पड़ेगा लेकिन पूर्व और आज मध्यान तक कि गई मेहनत का फल संध्या बाद से देखने को मिलेगा असंभव कार्य भी सम्भव होते प्रतीत होंगे। धन लाभ होने के साथ ही खर्च भी तुरंत हो जाएगा। मध्यान पश्चात मित्र-परिचितों के साथ मनोरंजन में समय व्यतीत करेंगे। व्यर्थ का धन खर्च अधिक होगा।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज के दिन का पहला हिस्सा आपके लिए उतार चढ़ाव वाला रहेगा। सेहत में थोड़ी नरमी रहेगी। रुके हुए काम पूर्ण करने में अधिक संघर्ष करना पड़ेगा सहयोग की कमी रहने से मामूली कार्य भी पहाड़ जैसा लगेगा फिर भी मेहनत से पीछे ना हटे मध्यान बाद से परिस्थिति अनुकूल बनने लगेगी लेकिन मन मे चंचलता भी आने से निर्णय लेने में परेशानी होगी फिर भी मानसिक रूप से राहत मिलेगी। धन का निवेश आज भूलकर भी ना करें लंबी यात्रा से बचे हानि हो सकती है। स्वभाव में नरमी आने से परिजनों से सम्बन्ध मधुर होंगे लेकिन प्रेम प्रसंगों से मान हानि होगी। उलझनों से स्वयं को दूर रख आज शांति से समय बिताए।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज दिन का आधा भाग आपके लिए विपरीत फलदायक रहेगा। आज मन दुविधा में रहने से निर्णय लेने की क्षमता न्यून रहेगी जिस कार्य को करने का प्रयास करें उसी में विलंब होगा आरम्भ होने के बाद भी सफलता संदिग्ध रहने के कारण उत्साह से काम नही कर पाएंगे। कार्य क्षेत्र एवं घर मे किसी न किसी बात पर तकरार की स्थिति बनेगी कुछ भी बोलने से पहले एक बार विचार अवश्य करें। किसी भी बड़े कार्य को करने से पहले अनुभवियों की सलाह लेना हितकर रहेगा। भावनाओ में बहकर अनुचित कार्य से बचे। मध्यान से बुद्धि विवेक विकसित होगा अपने व्यवहार की ग्लानि होने पर परिजनों से स्नेहपूर्ण सम्बन्ध बनेंगे। आध्यत्म का सहारा लें।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन आपके लिए लाभदायक रहेगा। पूर्व में किये परिश्रम का आज फल धन लाभ अथवा किसी न किसी रूप में अवश्यके मिलेगा। पुराने धन की उगाही के लिए आज का दिन शुभ है देनदारी को भी तुरंत निपटाने के प्रयास करें अथवा कहा सुनी हो सकती है। व्यवसाय में अतिरिक्त आय होने से आय के मार्ग बनेंगे लेकिन खर्च भी आज अनियंत्रित रहने के कारण बचत नही कर पाएंगे। सरकारी कार्यो में आज विलम्ब होगा इसलिये ज्यादा समय व्यर्थ ना करें। सगे संबंधियों के मांगलिक आयोजन में सम्मिलित होंगे। दिखावे की मानसिकता से बचे बाद में परेशानी होगी। सेहत अधिक थकान होने से नरम होगी।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन आपको शुभ फल प्रदान करने वाला रहेगा मध्यान तक किसी भी कार्य अथवा निर्णय लेने से पहले भविष्य में मिलने वाले परिणाम को देखकर ही कार्य करे सफलता की संभावना बढ़ेगी।दोपहर के बाद पूर्व में किये गए परिश्रम एवं प्रयास आज फलीभूत होंगे धन लाभ असमय होने से अधिक सतर्क रहना पड़ेगा। आकस्मिक यात्रा के कारण कार्य व्यवसाय में ठीक से समय नही दे  पाएंगे फिर भी सहकर्मी एवं अधीनस्थों के सहयोग से काम चलता रहेगा। अधिकारी वर्ग आज मेहरबान रहेगा। अभीष्ट सिद्धि के योग है अतिआत्मविश्वाश से बचें। भावनाओ में बहकर सामर्थ्य से अधिक खर्च करेंगे बाद में पछताना ना पड़े इसका भी ध्यान रहे। सेहत संध्या बाद थोड़ी प्रतिकूल रहेगी।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन आपको मिला-जुला फल प्रदान करेगा। दिन के आरम्भ में कई लाभ के अवसर आएंगे। परंतु अनिर्णय की स्थिति के कारण इनका समय पर लाभ नहीं ले पाएंगे। नौकरी अथवा स्थान परिवर्तन के भी योग है। आज कोई भी निर्णय जल्दबाजी में ना ले अन्यथा बाद में पछताना पड़ेगा। महिला वर्ग विशेष कर स्थिति को भापकर ही कुछ बोले बेतुकी बातो से आस पास का वातावरण खराब हो सकता है। नौकरी पेशाओ को आज भाग्य में कुछ कमी अनुभव होगी लापरवाही में कार्य करने पर अधिकारियो से बहस होगी। सरकारी कार्यो में विघ्न आएंगे आज ना ही करें। परिजनों का सहयोग केवल स्वार्थी के लिये ही मिलेगा। सेहत में कुछ न कुछ कमी लगी रहेगी।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन आपके लिए विषम फलदायी रहेगा। मध्यान तक का समय किसी कार्य को लेकर असमंजस में खराब होगा लेकिन आज आप जो भी निर्णय लेंगे निकट भविष्य में उसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेगा। कार्य क्षेत्र पर लाभ हानि की परवाह किये बिना लेदेकर काम करेंगे। मध्यान बाद परिस्थिति बदलने से कार्यो में  विलम्ब एवं असफलता मिलने से मानसिक चिंता के कारण परेशान रहेंगे सेहत में भी बदलाव आने से उत्साह घटेगा। खर्चे यथावत रहने से धन की कमी अनुभव होगी। छोटी यात्रा पर जा सकते है। आकस्मिक दुर्घटना अथवा बीमारी पर खर्च होगा। पारिवारिक वातावरण अशान्त रहेगा।

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Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton