🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक – 10 जनवरी 2026*
🌤️ *दिन – शनिवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शिशिर ॠतु*
🌤️ *मास – माघ (गुजरात-महाराष्ट्र पौष)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – सप्तमी सुबह 08:23 तक तत्पश्चात अष्टमी*
🌤️ *नक्षत्र – हस्त शाम 03:40 तक तत्पश्चात चित्रा*
🌤️ *योग – अतिगण्ड शाम 04:59 तक तत्पश्चात सुकर्मा*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 10:02 से सुबह 11:24 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 07:19*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:13*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण-
💥 *विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
💥 *ब्रह्म पुराण’ के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- ‘मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।’ (ब्रह्म पुराण’)*
💥 *शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय।’ का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण’)*
💥 *हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है ।(पद्म पुराण)*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
शनिवार के पीपल के वृक्ष के उपाय:
जल अर्पण और दीपक:
शनिवार को पीपल की जड़ में जल, दूध, शक्कर और काले तिल मिलाकर चढ़ाएं.
सरसों के तेल का दीपक जलाएं (काले तिल डालकर) और ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें.
यह पितृ दोष और शनि प्रकोप से राहत दिलाता है.
परिक्रमा और मंत्र:
पीपल के पेड़ की परिक्रमा करें, ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए.
इससे ग्रह बाधाएं दूर होती हैं और कार्य सिद्ध होते हैं.
पीपल के पत्ते के उपाय:
11 पीपल के पत्ते तोड़कर उनकी माला बनाएं और शनिदेव को अर्पित करें.
5 पीपल के पत्ते काले धागे में बांधकर घर के मुख्य दरवाजे पर लगाएं, इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.
कष्ट निवारण:
शारीरिक कष्टों (कमर दर्द, थकान) के लिए पीपल की जड़ या लकड़ी को काले कपड़े में बांधकर सिरहाने रखें (सेवा के साथ).
मनोकामना पूर्ति के लिए जल में गुड़ और दूध मिलाकर चढ़ाएं और परिक्रमा करें.
ध्यान रखने योग्य बातें:
पीपल के पेड़ को नुकसान न पहुँचाएं, केवल सेवा भाव से पूजा करें.
इन उपायों से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *ध्यान की महिमा* 🌷
👉🏻 *आज्ञाचक्र में ओंकार या गुरु का ध्यान करने से बुद्धि विकसित होती है और नाभि में ओंकार या गुरु का ध्यान करने से आरोग्य एवं रोग प्रतिकारक शक्ति विकसित होती है l*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *सुख-शांति व बरकत के उपाय* 🌷
🔥 *तुलसी को रोज जल चढायें तथा गाय के घी का दीपक जलायें |
🍃 *सुबह बिल्वपत्र पर सफेद चंदन का तिलक लगाकर संकल्प करके शिवलिंग पर अर्पित करें तथा ह्र्द्यपुर्वक प्रार्थना करें |*
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🚩युगों का वचन: जब हनुमान जी ने उठाया था गोवर्धन🙏🏻
त्रेता का अधूरा वचन, द्वापर में हुआ पूरा
हम सभी जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा (छोटी) उंगली पर गोवर्धन पर्वत को धारण किया था। किन्तु, बहुत कम लोग जानते हैं कि श्रीकृष्ण से पहले, त्रेतायुग में पवनपुत्र हनुमान जी ने भी गोवर्धन पर्वत को उठाया था। यह कथा उस ‘वचन’ की है, जिसने भगवान को एक युग बाद वापस आने पर विवश कर दिया।
1. रामसेतु निर्माण की चुनौती
त्रेतायुग का समय था। प्रभु श्रीराम की वानर सेना रामेश्वरम के तट पर खड़ी थी। समुद्र पर सेतु (पुल) बनाने का कार्य जोरों पर था। नल और नील के नेतृत्व में वानर और भालू छोटे-बड़े पत्थर ला रहे थे।
तभी वानर सेना में एक चर्चा छिड़ी—”यह महासागर इतना विशाल और गहरा है। छोटे-छोटे पत्थरों से इसे पाटने में तो वर्षों लग जाएंगे। यदि हमें लंका शीघ्र पहुँचना है, तो हमें विशालकाय पर्वतों की आवश्यकता है।”
यह सुनते ही संकटमोचन हनुमान जी ने विचार किया, “प्रभु का कार्य रुकना नहीं चाहिए।” उन्होंने उत्तर दिशा की ओर उड़ान भरी, ज9हाँ विशाल पर्वतों का राजा ‘गोवर्धन’ स्थित था।
2. हनुमान जी और गोवर्धन का संवाद
हनुमान जी वायु वेग से द्रोणाचल पर्वत की श्रृंखलाओं में पहुंचे। वहां उन्होंने परम तेजस्वी और विशाल गोवर्धन पर्वत को देखा। समय कम था, इसलिए हनुमान जी ने तुरंत गोवर्धन को उठाने के लिए जैसे ही स्पर्श किया, एक अद्भुत घटना घटी।
शाप या परीक्षा?
गोवर्धन को छूते ही हनुमान जी का आधा शरीर पाषाण (पत्थर) जैसा कठोर और सुन्न होने लगा। उसी क्षण पर्वतराज गोवर्धन ने गंभीर वाणी में कहा:
“हे वानर! तुम्हारी यह धृष्टता कैसे हुई? मैं कोई साधारण शिला नहीं हूँ। देवगण भी मुझे नमन करते हैं। मुझे बिना अनुमति स्पर्श करने का साहस तुमने कैसे किया?”
हनुमान जी, जो स्वयं रुद्रावतार हैं, मुस्कुराए। उनका शरीर वज्र का था, वे चाहते तो अपनी शक्ति से पर्वत को चकनाचूर कर सकते थे या बलपूर्वक ले जा सकते थे। पर वे रामदूत थे, विनय उनकी शक्ति थी।
हनुमान जी ने हाथ जोड़कर विनम्रता से कहा:
“हे गिरिराज! मैं अपनी शक्ति के प्रदर्शन के लिए नहीं आया हूँ। मैं तो रघुकुल शिरोमणि प्रभु श्रीराम का सेवक हूँ। मैं चाहूँ तो आपको जबरन ले जा सकता हूँ, किन्तु मैं आपसे भिक्षा मांगता हूँ। प्रभु का कार्य रुका हुआ है, कृपया मेरे साथ चलिए और सेतु का हिस्सा बनकर धन्य हो जाइए।”
3. गोवर्धन की शर्त और हनुमान का वचन
‘श्रीराम’ का नाम सुनते ही गोवर्धन का क्रोध कपूर की तरह उड़ गया। उनका मन द्रवित हो गया। वे बोले:
“हनुमान! यदि कार्य प्रभु श्रीराम का है, तो मैं चलने को तैयार हूँ। मेरा जन्म ही शायद इसीलिए हुआ है। परन्तु, मेरी एक शर्त है।”
हनुमान जी ने पूछा—”क्या शर्त है पर्वतराज?”
गोवर्धन ने कहा—”मैं तुम्हारे साथ तभी चलूंगा जब तुम मुझे वचन दोगे कि स्वयं प्रभु श्रीराम अपने कर-कमलों से मेरा स्पर्श करेंगे। मैं उनके चरणों की धूलि और उनके हाथों का स्पर्श पाना चाहता हूँ।”
हनुमान जी ने तुरंत वचन दिया—”मैं वचन देता हूँ गिरिराज! प्रभु आपको अवश्य स्पर्श करेंगे।” और फिर हनुमान जी ने उस विशाल पर्वत को अपनी हथेली पर उठा लिया और आकाश मार्ग से दक्षिण की ओर उड़ चले।
4. विधि का विधान और अधूरा सफर
हनुमान जी गोवर्धन को लेकर उड़ ही रहे थे कि रास्ते में (ब्रज मंडल के ऊपर) उन्हें एक आकाशवाणी सुनाई दी या विभीषण जी का संदेश मिला:
“सेतु बंध गया है! अब और पर्वतों की आवश्यकता नहीं है।”
हनुमान जी धर्मसंकट में पड़ गए। यदि वे पर्वत को रामेश्वरम ले जाते हैं, तो उसका उपयोग नहीं होगा। और यदि यहीं छोड़ते हैं, तो वचन का क्या होगा?
विवश होकर हनुमान जी ने गोवर्धन पर्वत को वहीं ब्रज भूमि पर धीरे से रख दिया।
गोवर्धन पर्वत फूट-फूट कर रोने लगे। उन्होंने कहा—”हनुमान! तुमने तो मुझे धोखा दिया। न मैं अपने घर (उत्तर) का रहा, न प्रभु के काम (दक्षिण) आ सका। और मेरा वह वचन? क्या मुझे प्रभु का स्पर्श कभी नहीं मिलेगा?”
5. प्रतीक्षा और श्रीकृष्ण अवतार
गोवर्धन की पीड़ा देखकर हनुमान जी का हृदय भर आया। उन्होंने गोवर्धन को ढांढस बंधाते हुए एक भविष्यवाणी की:
“हे गिरिराज! निराश मत होइए। रघुकुल की रीति है—’प्राण जाए पर वचन न जाए’। मेरा वचन खाली नहीं जाएगा। त्रेतायुग में सेतु का काम पूरा हो चुका है, इसलिए प्रभु अभी आपको स्पर्श नहीं कर सकते। लेकिन आप यहीं प्रतीक्षा करें।”
“द्वापर युग में जब प्रभु श्रीराम ‘कृष्ण’ के रूप में अवतार लेंगे, तब वे केवल आपको स्पर्श ही नहीं करेंगे, बल्कि सात दिनों तक अपनी उंगली पर उठाकर रखेंगे। आपको देवों के राजा इंद्र के प्रकोप से ब्रज की रक्षा करने का गौरव मिलेगा और आप ‘गिरिराज महाराज’ के नाम से पूजे जाएंगे।”
6. वचन की पूर्ति
युग बीते। द्वापर आया। भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में लीलाएं रचीं। जब इंद्र ने ब्रज को डुबोने के लिए प्रलयंकारी वर्षा की, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उसी गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठा लिया।
हनुमान जी का वह वचन सत्य सिद्ध हुआ। श्रीराम ने केवल एक बार छूने का वचन दिया था, लेकिन श्रीकृष्ण रूप में उन्होंने गोवर्धन को सात दिन और सात रात तक लगातार स्पर्श किए रखा। त्रेता का वह अधूरा पत्थर, द्वापर में भगवान का ‘छत्र’ बन गया।
सार:
यह कथा सिखाती है कि ईश्वर के कार्य में की गई प्रतीक्षा कभी व्यर्थ नहीं जाती। गोवर्धन पर्वत को युगों तक धूप और बारिश सहनी पड़ी, लेकिन अंत में उन्हें वह स्थान मिला जो देवताओं को भी दुर्लभ है—साक्षात भगवान के हाथों का स्पर्श।
।। जय श्री राम ।। ।। जय श्री कृष्ण ।।
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
आपका जन्मदिन: 10 जनवरी
दिनांक 10 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 1 होगा। आप राजसी प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। आपको अपने ऊपर किसी का शासन पसंद नहीं है। आप साहसी और जिज्ञासु हैं। आपका मूलांक सूर्य ग्रह के द्वारा संचालित होता है।
आप सौन्दर्यप्रेमी हैं। आपमें सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला आपका आत्मविश्वास है। इसकी वजह से आप सहज ही महफिलों में छा जाते हैं। आप अत्यंत महत्वाकांक्षी हैं। आपकी मानसिक शक्ति प्रबल है। आपको समझ पाना बेहद मुश्किल है। आप आशावादी होने के कारण हर स्थिति का सामना करने में सक्षम होते हैं।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 1, 10, 20, 28
शुभ अंक : 1, 10, 20, 28, 37, 46, 55, 64, 73, 82
शुभ वर्ष : 2026, 2044, 2053, 2062
ईष्टदेव : सूर्य उपासना तथा मां गायत्री
शुभ रंग : लाल, केसरिया, क्रीम,
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
स्वास्थ्य की दृष्टि से यह वर्ष उत्तम रहेगा। पारिवारिक मामलों में महत्वपूर्ण कार्य होंगे। अविवाहितों के लिए सुखद स्थिति बन रही है। विवाह के योग बनेंगे। नौकरीपेशा के लिए समय उत्तम हैं। पदोन्नति के योग हैं। बेरोजगारों के लिए भी खुशखबर है इस वर्ष आपकी मनोकामना पूरी होगी। यह वर्ष आपके लिए अत्यंत सुखद रहेगा। अधूरे कार्यों में सफलता मिलेगी।
🌹 आज का राशिफल🌹
मेष
राशि
आज आपका दिन व्यस्तता से भरा रहेगा. आज आपको व्यापारिक लाभ कमाने का बेहतरीन अवसर प्राप्त होगा, आपकी आय के नए स्रोत बनेंगे, आपका आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा. आज ऑफिस में थोड़ा ज्यादा काम रहेगा, जिसकी वजह से आपको शारीरिक थकान हो सकती हैं. आज आर्थिक मामलों में माता-पिता का सहयोग मिलता रहेगा. जिससे आपके काम चलते रहेंगे. आज आपका कोई मित्र आपके घर दावत पर आ सकता है, जिसके साथ बैठकर आप खूब बातें करेंगे. आज आपकी नए वाहन को लेने की इच्छा पूरी होगी.
भाग्यशाली अंक: 9
भाग्यशाली रंग: लाल
उपाय: हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं.
वृष राशि
आज का दिन आपके लिए ठीक–ठाक रहने वाला है. आज आप कारोबार से जुड़े मामलों पर ध्यान देंगे और उसे आगे बढ़ाने में किसी की मदद लेंगे. आज आपको उच्चाधिकारी के सामने बात रखने पर पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिलेगा. आज इस राशि की महिलाएं अपने जीवनसाथी को आज कुछ मीठा बना कर खिला सकती हैं, दोनों के बीच रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी. आज छात्र शिक्षक से किसी विषय को अधिक समझने के लिए एक्स्ट्रा क्लासेस ले सकते हैं. आज आप किसी धार्मिक आयोजन में शामिल होंगे, आपको मानसिक शांति मिलेगी.
भाग्यशाली अंक: 6
भाग्यशाली रंग: सफेद
उपाय: मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं.
मिथुन राशि
आज का दिन आपके लिए मिला-जुला रहने वाला है. आज आप कार्यक्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करेंगे, जिसमें कलीग का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा. आज आप कंस्ट्रक्शन से जुड़े कार्यों में किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह ले सकते हैं, जिससे आपका काम अच्छा और आसानी से हो जायेगा. आज आपको किसी परिजन की तरफ से खुशखबरी सुनने को मिल सकती है, जिससे घर का माहौल भी खुशनुमा बना रहेगा. आज आपको पिताजी के स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा, खास कर उनके खान–पान को लेकर. आज आप अपने काम को पूरा करने के लिए भाई की मदद ले सकते हैं.
भाग्यशाली अंक: 5
भाग्यशाली रंग: हरा
उपाय: गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें.
कर्क राशि
आज का दिन आपके लिए अच्छा रहने वाला है. आज आपको रोजगार के तमाम बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे और आपकी आय के नए स्त्रोत भी बनेंगे, जिससे आपका आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा. आज प्रोजेक्ट कार्य में आपको अपने जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा, जो आगे सफलता के लिए मददगार साबित होगा. आज आपके मन में बिजनेस को लेकर नए और इफेक्टिव आइडियाज आएंगे. आज आपका मन रचनात्मक चीजों को करने में लगेगा, जिससे आपका मूड अच्छा रहेगा. आज स्वास्थ्य के लिहाज से दिन ठीक है, आप खुद को ऊर्जावान महसूस करेंगे.
भाग्यशाली अंक: 2
भाग्यशाली रंग: सफेद
उपाय: शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं.
सिंह राशि
आज का दिन आपके अनुकूल बना रहेगा. आज आप अपने सहकर्मियों के साथ मित्रवत व्यवहार करें, तो आने वाले समय में वो आपका अच्छा लाभ करायेंगे. यदि आप अपने खर्चों पर नियंत्रण बनाए रखेंगे तो धीरे–धीरे आपका आर्थिक पक्ष मजबूत होगा. आज आप किसी नए काम की शुरुआत करना चाह रहे हैं तो दिन शुभ है, आप कर सकते हैं, आपको काम में सफलता मिलने के अच्छे योग बनते दिख रहे हैं. आज जीवनसाथी की मदद से आप किसी प्रोजेक्ट को पूरा करने में सफल रहेंगे.
भाग्यशाली अंक: 1
भाग्यशाली रंग: सुनहरा
उपाय: सूर्य को जल अर्पित करें.
कन्या राशि
आज का दिन आपके लिए उत्तम रहने वाला है. आज आप पेंडिंग कार्यों को निपटाने के लिए किसी करीबी की मदद ले सकते हैं. आज आप परिवार के सदस्यों के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर जाने की प्लानिंग कर सकते हैं. आज आप कुछ समय मित्रों के साथ बितायेंगे और किसी दोस्त की बर्थडे पार्टी एंजॉय करेंगे. आज आप पैतृक सम्पत्ति को लेकर अपने कजिन से बात कर सकते हैं, जिसमें वो आपको अच्छी सलाह देंगे. आज आपकी रुचि साहित्य को पढ़ने और लिखने में रहेगी, आपको किसी व्यक्ति के माध्यम से साहित्यिक पुस्तक भी प्राप्त होगी.
भाग्यशाली अंक: 4
भाग्यशाली रंग: हरा
उपाय: गाय को हरा चारा खिलाएं.
तुला
राशि
आज का दिन आपके लिए बेहतर रहने वाला है. आज आप अपने कारोबार में डबल मुनाफा कमायेंगे और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सफल बनेंगे. आज आपको बड़ों का आशीर्वाद मिलेगा जिससे आपके काम में उन्नति होगी और आपका मान-सम्मान बढ़ेगा. आज आपके घर में शुभ समाचार मिलने की संभावना बन रही है, आपका दाम्पत्य जीवन सुखमय व्यतीत होगा. आज आपको आय के नए स्रोत मिलेंगे, जिनका लाभ लेकर आप अच्छा धन कमा सकते हैं. आज बच्चे खेल–कूद के साथ–साथ पढ़ाई भी अच्छे से करेंगे.
भाग्यशाली अंक: 6
भाग्यशाली रंग: गुलाबी
उपाय: मां लक्ष्मी को गुलाब के फूल चढ़ाएं.
वृश्चिक राशि
आज का दिन आपके लिए लाभदायक रहने वाला है. आज आप अपने बिजनेस में कुछ बदलाव कर सकते हैं, जिसका जल्द ही आपको पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिलेगा. आज आपकी मुलाकात बचपन के किसी दोस्त से होगी, आपकी पुरानी यादें ताज़ा होंगी. आज आपको किसी समस्या से छुटकारा मिलेगा, जिससे आपके दिल का बोझ कम होगा. आज परिवार में सुख–शांति का माहौल बना रहेगा. आज इस राशि के लेखकों के मन में कोई स्टोरी लिखने का भी विचार आ सकता है, जिसे आने वाले समय में खूब पसंद किया जायेगा.
भाग्यशाली अंक: 9
भाग्यशाली रंग: लाल
उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें.
धनु राशि
आज का दिन आपके लिए अच्छा रहने वाला है. आज आप व्यापारिक लाभ कमाने के साथ–साथ अपने खर्चों के ऊपर भी ध्यान दें. आज आप कोई भी निर्णय लेने से पहले उस पर सोच–विचार करें और घर के बड़ों से भी सलाह–मशवरा कर सकते हैं. इस राशि के राजनीतिक क्षेत्रों में कार्यरत व्यक्तियों को बड़े नेताओं से मिलने का अवसर मिलेगा. आज आपकी नौकरी में स्थान परिवर्तन की संभावना बन रही है. आज आपकी मुलाकात ऐसे व्यक्ति से हो सकती है, जो आपके प्रोजेक्ट को पूरा करने में आपकी मदद करेगा.
भाग्यशाली अंक: 3
भाग्यशाली रंग: पीला
उपाय: केले के पेड़ को जल चढ़ाएं.
मकर राशि
आज का दिन आपके लिए ठीक–ठाक रहने वाला है. आज आपकी योजनाओं को सही दिशा मिलेगी, जिससे वो अपने उद्देश्य की तरफ आगे बढ़ेंगी. आज आपकी कुछ नए लोगों से मुलाकात होगी, जो काम में आपकी मदद करेंगे. आज आपको बड़ों का साथ व सहयोग भरपूर मात्रा में मिलेगा. आज आपकी शिक्षा में आ रही रुकावटों से छुटकारा मिलेगा, जिससे आपको खुशी होगी. आज आप किसी मांगलिक कार्यक्रम में बढ़–चढ़कर हिस्सा लेंगे, आपकी तारीफ होगी और आपको खुशी मिलेगी.
भाग्यशाली अंक: 8
भाग्यशाली रंग: नीला
उपाय: शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाएं.
कुम्भ राशि
आज का दिन आपके लिए अच्छा रहने वाला है. आज आप व्यावसायिक रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए कुछ अहम फैसले करेंगे, जिससे आपका बिजनेस अच्छा चल सके. आज आप इन्वेस्टमेंट के मामलों में किसी आर्थिक सलाहकार की मदद ले सकते हैं. इस राशि के छात्र आज प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे, जिसमें स्कूल प्रशासन आपकी पूरी हेल्प करेगा. आज आपके दांपत्य जीवन में खुशहाली बढ़ेगी, बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त होगा. आज आप किसी काम की शुरुआत पॉजिटिव माइंडसेट के साथ करें, आपको लाभ अवश्य होगा.
भाग्यशाली अंक: 7
भाग्यशाली रंग: आसमानी
उपाय: जरूरतमंद को कंबल दान करें.
मीन राशि
आज का दिन आपके लिए खुशनुमा रहने वाला है. आज ऑफिस में बॉस आपके काम की तारीफ करेंगे और जूनियर भी आपसे कुछ सीखने का प्रयास करेंगे. प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे छात्रों को तैयारी जारी रखनी चाहिए. जिस व्यक्ति की आपने कभी मदद की थी वह आज आपके काम आएगा. आज आपका मन आध्यात्म की तरफ थोड़ा ज्यादा रहेगा, जिससे आपका मन शांत होगा.
भाग्यशाली अंक: 3
भाग्यशाली रंग: पीला
उपाय: भगवान विष्णु की पूजा करें.
।।श्रीहरिः।।
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“मन का आधार“
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निकुञ्जलीला का एक बड़ा सुन्दर संस्कृत ग्रन्थ है-प्रेम-दर्शन। इसमें एक प्रसंग आता है कि जब भगवान् श्रीकृष्ण मथुरा पधार गये तब श्रीगोपाङ्गनायें बड़ी विकट स्थिति में हैं। यह एक अलग दूसरी चीज है कि भगवान् कभी प्रेमियों को छोड़कर अलग जाते ही नहीं और गये भी नहीं परन्तु प्रेम-सरिता के दो तट होते हैं-विप्रलम्भ और संयोग। विप्रलम्भावस्था प्रेम के स्वारस्य को बढ़ाने वाली होती है।
प्रेम-रस का संवर्धन करती है। यह विप्रलम्भ रस की बात है। जो लोग शास्त्रवेत्ता हैं वे जानते हैं, सभी नहीं समझेंगे। उन गोपांगनाओं की स्थिति बड़ी विकट है और उनमें भी राधाजी की स्थिति बड़ी ही शोचनीय है। तब एक सखी उनको समझाती हैं।
मैं यहाँ केवल भावानुवाद बता रहा हूँ। राधाजी से सखी कहती है-‘राधे ! तुम दु:खी न हो। जो इतना छल कर सकता है, जो इतना कपट कर सकता है, जो इतना धोखा दे सकता है (यह प्रेमराज्य के शब्द हैं। इनको लेकर डरना नहीं चाहिये कि भगवान् को ऐसी बात क्यों कही गयी।) फिर भला उसका स्मरण तुम क्यों करती हो ? जो कुछ भी तुमको पीड़ा है वह तो उसकी स्मृति की ही है न! तुम भूल जाओ। तुम यह मान लो कि कोई ऐसा था ही नहीं। तुम अपने घर में हो।
तुम्हारा समृद्धिशाली राज्य है। तुम जो चाहे सो कर सकती हो। तुम रोकर व्यर्थ में अपने जीवन को क्यों बिगाड़ रही हो ? समझो।’ बड़ी युक्तियों से सखी ने समझाया।
इस प्रसंग में राधिकाजी ने एक ही उत्तर दिया कि ‘सखी! मैं चाहती तो हूँ कि भूल जाऊँ। मैं याद रखने का अभ्यास नहीं करती और न ही याद रखने की इच्छा रखती हूँ बल्कि मैं ऐसा चाहती हूँ कि स्मरण न हो। परन्तु क्या करूँ, मेरा मन इतना उनके अनुराग से भर गया है कि दूसरी वस्तु मेरे मन में आती ही नहीं है। मैं करूँ तो क्या करूं ?
किसी भी दूसरी वस्तु को मन में लाने के लिये प्रयत्न करने पर भी दूसरी वस्तु विलुप्त हो जाती है मेरे सामने से। मेरे मन की वृत्ति से, मेरे मन के सामने दूसरी वस्तु का अस्तित्व ही नहीं रहता। दूसरी वस्तु की सत्ता मिट जाती है मेरे मन में सामने आते ही। मैं क्या जानबूझ कर याद रखती हूँ ? मैं स्त्री हूँ।’ स्मरण के लिये यह जरूरी है कि हमारे अन्दर भय, आवश्यकता और प्रीति इन तीनों में से कोई एक जाग जाय। भय तामस है, आवश्यकता राजस है और प्रीति सात्त्विक है। प्रीति साधनकाल में सात्त्विक है नहीं तो यह विनाशिनी है। प्रेम बिना शर्त होता है। प्रीति में विनिमय नहीं होता है।
अतएव मन लगाने के लिये आवश्यकता है किसी आधार की। बिना आधार के मन नहीं लगता है। वह आधार तो हम लोगों के लिये यह है कि जिससे मिलेंगे वह बन्धन में है। बन्धन का दु:ख मुक्ति के सुख को सामने लाता है और मुक्ति का सुख भगवान् में मन लगाने से, भगवान् के स्मरण से होगा। इसलिये स्मरण करते हैं। यह भी एक कारण है। यदि मुक्ति की तीव्र वांछा हो जाय तो स्मरण होगा।

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