🙏🏻 हर हर महादेव🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक – 07 दिसम्बर 2025*
🌤️ *दिन – रविवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – हेमंत ॠतु*
🌤️ *मास – पौष (गुजरात-महाराष्ट्र)मार्गशीर्ष*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – तृतीया शाम 06:24 तक तत्पश्चात चतुर्थी*
🌤️ *नक्षत्र – पुनर्वसु 08 दिसंबर प्रातः 04:11 तक तत्पश्चात पुष्य*
🌤️ *योग – शुक्ल रात्रि 08:07 तक तत्पश्चात ब्रह्म*
🌤️ *राहुकाल – शाम 04:35 से शाम 05:57 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 07:04*
🌤️ *सूर्यास्त – 05:55*
👉 *दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण- संकष्ट चतुर्थी (चंद्रोदय: रात्रि 08:15)*
💥 *विशेष – तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *कोई कष्ट हो तो* 🌷
➡️ *07 दिसंबर 2025 रविवार को संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय रात्रि 08:15)*
🙏🏻 *हमारे जीवन में बहुत समस्याएँ आती रहती हैं, मिटती नहीं हैं ।, कभी कोई कष्ट, कभी कोई समस्या | ऐसे लोग शिवपुराण में बताया हुआ एक प्रयोग कर सकते हैं कि, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (मतलब पुर्णिमा के बाद की चतुर्थी ) आती है | उस दिन सुबह छः मंत्र बोलते हुये गणपतिजी को प्रणाम करें कि हमारे घर में ये बार-बार कष्ट और समस्याएं आ रही हैं वो नष्ट हों |*
👉🏻 *छः मंत्र इस प्रकार हैं –*
🌷 *ॐ सुमुखाय नम: : सुंदर मुख वाले; हमारे मुख पर भी सच्ची भक्ति प्रदान सुंदरता रहे ।*
🌷 *ॐ दुर्मुखाय नम: : मतलब भक्त को जब कोई आसुरी प्रवृत्ति वाला सताता है तो… भैरव देख दुष्ट घबराये ।*
🌷 *ॐ मोदाय नम: : मुदित रहने वाले, प्रसन्न रहने वाले । उनका सुमिरन करने वाले भी प्रसन्न हो जायें ।*
🌷 *ॐ प्रमोदाय नम: : प्रमोदाय; दूसरों को भी आनंदित करते हैं । भक्त भी प्रमोदी होता है और अभक्त प्रमादी होता है, आलसी । आलसी आदमी को लक्ष्मी छोड़ कर चली जाती है । और जो प्रमादी न हो, लक्ष्मी स्थायी होती है ।*
🌷 *ॐ अविघ्नाय नम:*
🌷 *ॐ विघ्नकरत्र्येय नम:*
🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *कैसे बदले दुर्भाग्य को सौभाग्य में* 🌷
➡️ *08 दिसंबर 2025 को प्रातः 04:11 से सूर्योदय तक रविपुष्यामृत योग है।*
🌳 *बरगद के पत्ते पर गुरुपुष्य या रविपुष्य योग में हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें |*
🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *रविपुष्यामृत योग* 🌷
🙏🏻 *‘शिव पुराण’ में पुष्य नक्षत्र को भगवान शिव की विभूति बताया गया है | पुष्य नक्षत्र के प्रभाव से अनिष्ट-से-अनिष्टकर दोष भी समाप्त और निष्फल-से हो जाते हैं, वे हमारे लिए पुष्य नक्षत्र के पूरक बनकर अनुकूल फलदायी हो जाते हैं | ‘सर्वसिद्धिकर: पुष्य: |’ इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है | पुष्य नक्षत्र में किये गए श्राद्ध से पितरों को अक्षय तृप्ति होती है तथा कर्ता को धन, पुत्रादि की प्राप्ति होती है |*
🙏🏻 *इस योग में किया गया जप, ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य में विवाह व उससे संबधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं | (शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याय 10)*
*_।।🕉️समस्त साधनों का सार।।_*
साधक को ये चार बातें दृढ़तापूर्वक मान लेनी चाहिये-
१. परमात्मा यहाँ हैं।
२. परमात्मा अभी हैं।
३. परमात्मा अपने में हैं।
४. परमात्मा अपने हैं।
इस दृष्टि से-
परमात्मा सब जगह (सर्वव्यापी) होने से यहाँ भी हैं। सब समय (तीनों कालों में) होने से अभी भी हैं।
सबमें होने से अपने में भी हैं और सबके होने से अपने भी हैं।
परमात्मा यहाँ होने से उनको प्राप्त करने के लिये दूसरी जगह जाने की आवश्यकता नहीं है। अभी होने से उनकी प्राप्ति के लिये भविष्य की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है।
अपने में होने से उन्हें बाहर ढूँढ़ने की आवश्यकता नहीं है। और अपने होने से उनके सिवाय किसी को भी अपना मानने की आवश्यकता नहीं है।
अपने होने से वे स्वाभाविक ही अत्यन्त प्रिय लगेंगे।
प्रत्येक साधक के लिये उपर्युक्त चारों बातें अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और तत्काल लाभदायक हैं। साधक को ये चारों बातें दृढ़ता से मान लेनी चाहिये। समस्त साधनों का यह सार साधन है। इसमें किसी योग्यता, अभ्यास, गुण आदि की भी जरूरत नहीं है। ये बातें स्वतः सिद्ध और वास्तविक हैं, इसलिये इसको मानने के लिये सभी योग्य हैं, सभी पात्र हैं, सभी समर्थ हैं। शर्त यही है कि वे एकमात्र परमात्मा को ही चाहते हों।
संचित कर्म —- क्रियमाण कर्म तो हर समय होते रहते हैं, उनमें कुछ तो भोग लिए जाते हैं और शेष इकट्ठा होते रहते हैं।
इस प्रकार चित्त -रूपी गोदाम में एकत्रित हुए कर्मों को संचित कर्म कहते हैं । कर्म का भंडार अक्षय है। उसको भोगते -भोगते जीव अनादि काल से 84 लाख योनियों में शरीर धारण करता चला आ रहा है , फिर भी कर्म का भंडार अक्षय ही बना रहता है।
जीव को यह कर्म सुख व दुख रूप में मिश्रित अवस्था में भोगने को दिये जाते हैं, अगर जीव चाहे तो सत्कर्म करते हुए भगवान की भक्ति करते हुए अपने सभी संचित कर्मों से मुक्त हो सकता है।
श्री कृष्ण जी अर्जुन से कहते हैं, अर्थात हे अर्जुन! जैसे प्रज्वलित अग्नि ईंधन को भस्म कर देती है वैसे ही ज्ञान रूपी अग्नि संपूर्ण कर्मों को भस्म कर देती है।
उस ज्ञान को भक्ति योग के द्वारा शुद्ध अंतःकरण हुआ पुरुष आत्मा में अनुभव करता है। ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं होती।
इसे भगवान की निष्काम भक्ति के मार्ग पर चलते हुए भी प्राप्त किया जा सकता है।।
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
II कोणार्क का प्रसिद्ध सूर्य मंदिर II
कोणार्क उड़ीसा प्रदेश के पुरी जिले में पुरी के जगन्नाथ मन्दिर से 21 मील उत्तर-पूर्व समुद्रतट पर चंद्रभागा नदी के किनारे स्थित है। यहाँ का सूर्य मन्दिर बहुत प्रसिद्ध है। इस मंदिर की कल्पना सूर्य के रथ के रूप में की गई है। रथ में बारह जोड़े विशाल पहिए लगे हैं और इसे सात शक्तिशाली घोड़े तेजी से खींच रहे हैं। जितनी सुंदर कल्पना है, रचना भी उतनी ही भव्य है। मंदिर अपनी विशालता, निर्माणसौष्ठव तथा वास्तु और मूर्तिकला के समन्वय के लिये अद्वितीय है और उड़ीसा की वास्तु और मूर्तिकलाओं की चरम सीमा प्रदर्शित करता है। एक शब्द में यह भारतीय स्थापत्य की महत्तम विभूतियों में है।
कोणार्क का सूर्य मंदिर : यह विशाल मंदिर मूलत: चौकोर (865न्540 फुट) प्राकार से घिरा था जिसमें तीन ओर ऊँचे प्रवेशद्वार थे। मंदिर का मुख पूर्व में उदीयमान सूर्य की ओर है और इसके तीन प्रधान अंग देउल (गर्भगृह), जगमोहन (मंडप) और नाटमंडप; एक ही अक्ष पर हैं। सबसे पहले दर्शक नाटमंडप में प्रवेश करता है। यह नाना अलंकरणों और मूर्तियों से विभूषित ऊँची जगती पर अधिष्ठित है जिसकी चारों दिशाओं में सोपान बने हैं। पूर्व दिशा में सोपानमार्ग के दोनों ओर गजशार्दूलों की भयावह और शक्तिशाली मूर्तियाँ बनी हैं। नाटमंडप का शिखर नष्ट हो गया है, पर वह नि:संदेह जगमोहन शिखर के आकार का रहा होगा। उड़ीसा के अन्य विकसित मंदिरों में नाटमंडप और भोगमंदिर भी एक ही अक्ष में बनते थे जिससे इमारत लंबी हो जाती थी। कोणार्क में नाटमंडप समानाक्ष होकर भी पृथक् है और भोगमंदिर अक्ष के दक्षिणपूर्व में है; इससे वास्तुविन्यास में अधिक संतुलन आ गया है।
नाटमंडप से उतरकर दर्शक जगमोहन की ओर बढ़ता है। दोनों के बीच प्रांमण में ऊँचा एकाश्म अरूणस्तंभ था जो अब जगन्नाथपुरी के मंदिर के सामने लगा है।
जगमोहन और देउल एक ही जगती पर खड़े हैं और परस्पर संबद्ध हैं। जगती के नीचे गजथर बना है जिसमें विभिन्न मुद्राओं में हाथियों के सजीव दृश्य अंकित हैं। गजथर के ऊपर जगती अनेक घाटों और नाना भाँति की मूर्तियों से अलंकृत है। इसके देवी देवता, किन्नर, गंधर्व, नाग, विद्याधरव्यालों और अप्सराओं के सिवा विभिन्न भावभंगियों में नर नारी तथा कामासक्त नायक नायिकाएँ भी प्रचुरता से अंकित हैं। संसारचक्र की कल्पना पुष्ट करने के लिये जगती की रचना रथ के सदृश की गई है और इसमें चौबीस बृहदाकार (9 फुट 8 इंच व्यास के) चक्के लगे हैं जिनका अंगप्रत्यंग सूक्ष्म अलंकरणों से लदा हुआ है। जगती के अग्र भाग में सोपान-पंक्ति है जिसके एक ओर तीन और दूसरी ओर चार दौड़ते घोड़े बने हैं। ये सप्ताश्व सूर्यदेव की गति और वेग के प्रतीक हैं जिनसे जगत् आलोकित और प्राणन्वित है।
देउल का शिखर नष्ट हो गया है और जंघा भी भग्नावस्था में है पर जगमोहन सुरक्षित है और बाहर से 100 फुट लंबा चौड़ा और इतना ही ऊँचा है। भग्नावशेष से अनुमान है कि देउल का शिखर 200 फुट से भी अधिक ऊँचा और उत्तर भारत का सबसे उत्तुंग शिखर रहा होगा। देउल और जगमोहन दोनों ही पंचरथ और पंचांग है पर प्रत्येक रथ के अनेक उपांग है और तलच्छंद की रेखाएँ शिखर तक चलती है। गर्भगृह (25 फुट वर्ग) के तीनों भद्रों में गहरे देवकोष्ठ बने हैं जिनमें सूर्यदेव की अलौकिक आभामय पुरूषाकृति मूर्तियाँ विराजमान हैं।
जगमोहन का अलंकृत अवशाखा द्वार ही भीतर का प्रवेशद्वार है। जगमोहन भीतर से सादा पर बाहर से अलंकरणों से सुसज्जित है। इसका शिखर स्तूपकोणाकार (पीढ़ा देउल) है और तीन तलों में विभक्त है। निचले दोनों तलों में छह छह पीढ़ हैं जिनमें चतुरंग सेना, शोभायात्रा, रत्यगान, पूजापाठ, आखेट इत्यादि के विचित्र दृश्य उत्कीर्ण हैं। उपरले में पाँच सादे पीढ़े हैं। तलों के अंतराल आदमकद स्त्रीमूर्तियों से सुशोभित हैं। ये ललित भंगिमों में खड़ी बाँसुरी, शहनाई, ढोल, मृढंग, झाँझ और मजीरा बजा रही हैं। उपरले तल के ऊपर विशाल घंटा और चोटी पर आमलक रखा है। स्त्रीमूर्तियों के कारण इस शिखर में अद्भुत सौंदर्य के साथ प्राण का भी संचार हुआ है जो इस जगमोहन की विशेषता है। वास्तुतत्वज्ञों की राय में इससे सुघड़ और उपयुक्त शिखर कल्पनातीत है।
इस मंदिर का निर्माण गंग वंश के प्रतापी नरेश नरर्सिह देव (प्रथम) (1238-64 ई.) ने अपने एक विजय के स्मारक स्वरूप कराया था। इसके निर्माण में 1200 स्थपति 12 वर्ष तक निरंतर लगे रहे। अबुल फजल ने अपने आइने-अकबरी में लिखा है कि इस मंदिर में उड़ीसा राज्य के बारह वर्ष की समुची आय लगी थी। उनका यह भी कहना है कि यह मंदिर नवीं शती ई. में बना था, उस समय उसे केसरी वंश के किसी नरेश ने निर्माण कराया था। बाद में नरसिंह देव ने उसको नवीन रूप दिया। इस मंदिर के आस पास बहुत दूर तक किसी पर्वत के चिन्ह नहीं हैं, ऐसी अवस्था में इस विशालकाय मंदिर के निर्माण के लिये पत्थर कहाँ से और कैसे लाए गए यह एक अनुत्तरित जिज्ञासा है।
इस मंदिर के निर्माण के संबंध में एक दंतकथा प्रचलित है कि संपूर्ण प्रकार के निर्माण हो जाने पर शिखर के निर्माण की एक समस्या उठ खड़ी हुई। कोई भी स्थपति उसे पूरा कर न सका तब मुख्य स्थपति के धर्मपाद नामक 12 वर्षीय पुत्र ने यह साहसपूर्ण कार्य कर दिखाया। उसके बाद उसने यह सोचकर कि उसके इस कार्य से सारे स्थपतियों की अपकीर्ति होगी और राजा उनसे नाराज हो जाएगा, उसने उस शिखर से कूदकर आत्महत्या कर ली। एक अन्य स्थानीय अनुश्रुति है कि मंदिर के शिखर में कुंभर पाथर नामक चुंबकीय शक्ति से युक्त पत्थरलगा था। उसके प्रभाव से इसके निकट से समुद्र में जानेवाले जहाज और नौकाएँ खिंची चली आती थीं और टकराकर नष्ट हो जाती थीं।
कहा जाता है कि काला पहाड़ नामक प्रसिद्ध आक्रमणकारी मुसलमान ने इस मंदिर को ध्वस्त किया किंतु कुछ अन्य लोग इसके ध्वंस का कारण भूकंप मानते हैं।
इस स्थान के एक पवित्र तीर्थ होने का उल्लेख कपिलसंहिता, ब्रह्मपुराण, भविष्यपुराण, सांबपुराण, वराहपुराण आदि में मिलता है। उनमें इस प्रकार एक कथा दी हुई है। कृष्ण के जांबवती से जन्मे पुत्र सांब अत्यन्त सुंदर थे। कृष्ण की स्त्रियाँ जहाँ स्नान किया करती थीं, वहाँ से नारद जी निकले। उन्होंने देखा कि वहाँ स्त्रियाँ सांब के साथ प्रेमचेष्टा कर रही है। यह देखकर नारद श्रीकृष्ण को वहाँ लिवा लाए। कृष्ण ने जब यह देखा तब उन्होंने उसे कोढ़ी हो जाने का शाप दे दिया। जब सांब ने अपने को इस संबंध में निर्दोष बताया तब कृष्ण ने उन्हें मैत्रये बन (अर्थात् जहाँ कोणार्क है) जाकर सूर्य की आराधना करने को कहा। सांब की आराधना से प्रसन्न होकर सूर्य ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिया। दूसरे दिन जब वे चंद्रभागा नदी में स्नान करने गए तो उन्हें नदी में कमल पत्र पर सूर्य की एक मूर्ति दिखाई पड़ी। उस मूर्ति को लाकर सांब ने यथाविधि स्थापना की और उसकी पूजा के लिये अठारह शाकद्वीपी ब्राह्मणों को बुलाकर वहाँ बसाया। पुराणों में इस सूर्य मूर्ति का उल्लेख कोणार्क अथवा कोणादित्य के नाम से किया गया है।
कहते है कि रथ सप्तमी को सांब ने चंद्रभागा नदी में स्नानकर उक्त मूर्ति प्राप्त की थी। आज भी उस तिथि को वहाँ लोग स्नान और सूर्य की पूजा करने आते हैं।
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष 🌹
आपका जन्मदिन: 7 दिसंबर
दिनांक 7 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 7 होगा। यह अंक वरूण ग्रह से संचालित होता है। आप खुले दिल के व्यक्ति हैं। आपकी प्रवृत्ति जल की तरह होती है। जिस तरह जल अपनी राह स्वयं बना लेता है वैसे ही आप भी तमाम बाधाओं को पार कर अपनी मंजिल पाने में कामयाब होते हैं। किसी के मन की बात तुरंत समझने की आपमें दक्षता होती है। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति अपने आप में कई विशेषता लिए होते हैं। आप पैनी नजर के होते हैं।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 7, 16, 25
शुभ अंक : 7, 16, 25, 34
शुभ वर्ष : 2026
ईष्टदेव : भगवान शिव तथा विष्णु
शुभ रंग : सफेद, पिंक, जामुनी, मेहरून
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
करियर: नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए समय सुखकर रहेगा। अधिकारी वर्ग का सहयोग मिलेगा।
कारोबार: नवीन कार्य-योजना शुरू करने से पहले केसर का लंबा तिलक लगाएं व मंदिर में पताका चढ़ाएं। आपके कार्य में तेजी का वातावरण रहेगा। आपको प्रत्येक कार्य में जुटकर ही सफलता मिलेगी। व्यापार-व्यवसाय की स्थिति उत्तम रहेगी।
मेष (Aries)
स्वभाव: उत्साही
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: हरा
आज आपकी यश और कीर्ति बढ़ेगी। आपको किसी काम को करने के लिए जल्दबाजी नहीं करनी है और आर्थिक स्थिति को लेकर आप कोई महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं। पार्टनरशिप में कोई काम करना आपके लिए बेहतर रहेगा, लेकिन आप दिल से लोगों का भला सोचेंगे। लोग इसे आपका स्वार्थ समझ सकते हैं। आप परिवार में किसी मांगलिक कार्यक्रम का आयोजन होने से व्यस्त रहेंगे। परिजनों का आना-जाना लगा रहेगा। रोजगार के कुछ नए अवसर प्राप्त होंगे।
वृषभ (Taurus)
स्वभाव: धैर्यवान
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: लाल
आज का दिन आपके लिए जिम्मेदारी से काम करने के लिए रहेगा। आप परिवार के सदस्यों के साथ आनंदमय समय व्यतीत करेंगे। आप मौज मस्ती के मूड में रहेंगे। यदि आपको कोई टेंशन थी, तो उसका भी समाधान आपको आसानी से मिल जाएगा। आप अपने मित्रों की सेवा के लिए भी कुछ समय निकालेंगे। संतान पक्ष की ओर से आपको कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। आपको अपने ध्यान को केंद्रित करके कामों को करना होगा।
मिथुन (Gemini)
स्वभाव: जिज्ञासु
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: गुलाबी
आज आपको वरिष्ठ सदस्यों का पूरा सहयोग मिलेगा। कोई फैसला बहुत ही सोच समझकर ले। आप संतान के ऊपर कोई जिम्मेदारी ना डालें, नहीं तो वह आपसे नाराज हो सकती हैं। आज आपको किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करने का मौका मिले, तो अवश्य करें। आप अपने व्यवसाय में कुछ नहीं योजनाओं को शामिल करके उसे बढ़ाने की कोशिश करते रहेंगे। वाहनों का प्रयोग आपको थोड़ा सावधान रहकर करना होगा।
कर्क (Cancer)
स्वभाव: भावुक
राशि स्वामी: चंद्र
शुभ रंग: नीला
आज आपको आय और व्यय में संतुलन बनाकर चलने की आवश्यकता है। आपके अपने अधूरे काम पूरे होंगे। आपके काम की गति भी थोड़ी तेज रहेगी। आपका कोई अधूरा सपना पूरा होने से आपको खुशी होगी और जीवनसाथी के साथ आप कुछ समय बिताएंगे, जिससे दोनों को एक दूसरे को बेहतर जानने का मौका मिलेगा। आपका किसी बात को लेकर मन परेशान रहेगा। संतान की आपसे किसी बात को लेकर कहासुनी हो सकती है।
सिंह राशि (Leo)
स्वभाव: आत्मविश्वासी
राशि स्वामी: सूर्य
शुभ रंग: सफेद
आज आपको आसपास रह रहे विरोधियों से सतर्क रहने की आवश्यकता है और व्यस्त रहने के कारण आप अपने कामों को कल पर टालने की कोशिश करेंगे, जो आपकी मुश्किलों को बढ़ाएंगे। किसी नई संपत्ति की खरीदारी करना आपके लिए अच्छा रहेगा। परिवार के सदस्यों के साथ आपको समय बिताने का मौका मिलेगा। आपकी कोई मन की इच्छा पूरी होने से खुशी होगी। आप किसी नए काम की शुरुआत करने की आप योजना बनाएंगे, जिससे माहौल भी खुशनुमा रहेगा।
कन्या (Virgo)
स्वभाव: मेहनती
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: गोल्डन
आज आपको जल्दबाजी में कोई काम करने से बचाव होगा। आपको काम को लेकर मेहनत अधिक रहेगी, लेकिन आपको उससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। प्रेम जीवन जी रहे लोग साथी के साथ रोमांटिक समय व्यतीत करेंगे। आपको आर्थिक लेनदेन से थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता है। विद्यार्थियों की कुछ नया करने की इच्छा जागृत हो सकती है। आपको पढ़ाई-लिखाई पर पूरा फोकस बनाए रखना होगा।
तुला (Libra)
स्वभाव: संतुलित
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: आसमानी
आज का दिन आपके लिए किसी वाद विवाद से दूर रहने के लिए रहेगा। आपको धन कमाने के अनेक अवसर मिलेंगे, जिनसे आप बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगे। परिवार में चल रही कलह भी बातचीत के जरिए दूर होगी। आप किसी को धन उधार देने से बचें और किसी परिजन से आपको कोई बात बहुत ही सोच समझकर बोलनी होंगी। कोई जमीन ज्यादा से थोड़ा मामला आपकी टेंशनों को बढ़ा सकता है। बिजनेस में आपको अच्छे बेनिफिट मिलेंगे।
वृश्चिक (Scorpio)
स्वभाव: रहस्यमय
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: बैंगनी
आज का दिन आपके लिए कारोबार के मामले में बढ़िया रहने वाला है। आपको पुराने इन्वेस्टमेंट सबसे अच्छा लाभ मिलेगा और आपकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी। आप परिवार के सदस्यों को किसी धार्मिक यात्रा पर लेकर जाने की योजना बना सकते हैं। आप अपने माता-पिता का सम्मान करें और यदि वह आपको कोई जिम्मेदारी दे, तो उसे समय रहते पूरा करने की कोशिश करें। सरकारी मामलों में आपको थोड़ा ध्यान देने की आवश्यकता है।
धनु (Sagittarius)
स्वभाव: दयालु
राशि स्वामी: गुरु
शुभ रंग: ग्रे
आज का दिन आपके लिए सावधानी और सतर्कता बरतने के लिए रहेगा। कार्यक्षेत्र में कामों को लेकर आपके मन में उथल-पुथल रहेगी। आपने यदि किसी बैंक से कोई कर्ज लेने का सोचा था, तो वह भी आपको मिल जाएगा। आज आपको अपनी संतान की संगति पर विशेष ध्यान देना होगा। परिवार में किसी नये मेहमान का आगमन हो सकता है। यदि आपका धन कहीं फंस गया था, तो उसके भी आपको मिलने की पूरी संभावना है। आपके कुछ नया करने के प्रयास बेहतर रहेंगे।
मकर (Capricorn)
स्वभाव: अनुशासित
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: हरा
आज का दिन आपके लिए अनुकूल रहने वाला है। आप काम को लेकर पार्टनरशिप कर सकते हैं, जो आपके लिए अच्छी रहेगी। सरकारी नौकरी से जुड़े लोगों को ईमानदारी से काम लेना होगा। आपके अधिकारी आपके कामों में पूरा साथ देंगे। आप अपने मनपसंद भोजन का आनंद लेंगे। ससुराल पक्ष का कोई व्यक्ति आपसे मेल-मिलाप करने आ सकता है। आपकी किसी अजनबी से बिजनेस को लेकर कोई बातचीत नहीं करनी है।
कुंभ ( Aquarius)
स्वभाव: मानवतावादी
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: नीला
आज आपको सेहत के प्रति सचेत रहना होगा। कार्यक्षेत्र में जल्दबाजी में यदि आप कोई काम करेंगे, तो उसमें कोई गड़बड़ी हो सकती है। आप अपने रहन-सहन के स्तर में भी सुधार लाने की कोशिश करेंगे। आपकी दीर्घकालीन योजनाओं को गति मिलेगी और आपको किसी सहयोगी की कोई बात बुरी लग सकती हैं। आज आप कार्यक्षेत्र में काम को लेकर यदि अपने बॉस को कोई सलाह देंगे, तो वह उस पर अमल अवश्य करेंगे और आपको डूबा हुआ धन मिलने से आपको खुशी होगी।
मीन (Pisces)
स्वभाव: संवेदनशील
राशि स्वामी: बृहस्पति
शुभ रंग: आसमानी
आज का दिन आपके लिए धन के मामले में थोड़ा सावधानी बरतने के लिए रहेगा, इसलिए आप किसी बड़े निवेश में हाथ डालने से बचें, नहीं तो बाद में आपको कोई भारी नुकसान हो सकता है। शेयर मार्केट से जुड़े लोगों को किसी एक्सपर्ट के राय के बिना आगे बढ़ने से नुकसान होगा। आप अपनी आंख व कान खुले रखकर कार्य करें, इसलिए किसी अजनबी की बातों पर भरोसा न करें। आपके पिताजी की सेहत में गिरावट आने से भागदौड़ अधिक रहेगी।

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