🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक – 25 नवम्बर 2025*
🌤️ *दिन – मंगलवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – हेमंत ॠतु*
🌤️ *मास – मार्गशीर्ष*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – पंचमी रात्रि 10:56 तक तत्पश्चात षष्ठी*
🌤️ *नक्षत्र – उत्तराषाढा रात्रि 11:57 तक तत्पश्चात श्रवण*
🌤️ *योग – गण्ड दोपहर 12:50 तक तत्पश्चात वृद्धि*
🌤️ *राहुकाल – शाम 03:11 से शाम 04:33 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:56*
🌤️ *सूर्यास्त – 05:54*
👉 *दिशाशूल – उत्तर दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण-
💥 *विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *क्लेश कम करने के लिए* 🌷
👉🏻 *पोछा लगाते हैं घर में तो उस पानी में सैंधा नमक और थोड़ा गो-झरण दाल दे तो घर में क्लेश कम होता और शान्ति बढ़ती है..*
🙏🏻
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *वास्तु दोष* 🌷
🏡 *जिन के घर का मुख दक्षिण में हो, वे अपने घर के दरवाजे के बाहर एक गमले में आम का पौधा लगायें और गुरुमंत्र का जप करें ।*
🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *गंगा स्नान का फल* 🌷
🙏🏻 *”जो मनुष्य आँवले के फल और तुलसीदल से मिश्रित जल से स्नान करता है, उसे गंगा स्नान का फल मिलता है ।” (पद्म पुराण , उत्तर खंड)*
🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
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🚩🕉️विवाह पंचमी : आज हुआ था भगवान श्री राम और माता सीता का विवाह, जानिए 10 खास बातें
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🚩🕉️राम विवाह कहते हैं कि मार्गशीर्ष के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन श्रीराम और माता सीता का विवाह हुआ था। जिसका वर्णन श्रीरामचरितमानस में महाकवि गोस्वामी तुलसीदासजी ने बड़ी ही सुंदरता से किया है।
🚩🕉️1. एक कथा के अनुसार सीता स्वयंवर से पहले एक तोते ने बगीचे में मां सीता को उनके भावी पति के बारे में पहले ही बता दिया था। इस तोते के श्राप के कारण ही माता को पति से विवाह सहना पड़ा था क्योंकि माता सीता ने तोते की तोती को पकड़ लिया और कहा था कि जब तक तुम्हारी भविष्यवाणी सही नहीं हो जाती तब तक यह मेरी कैद में रहेगी।
🚩🕉️2. भगवान श्री राम ने स्वयंवर प्रतियोगिता में शिवजी का धनुष तोड़कर किया था सीता से स्वयंवर। असल में सीता ने राम और राम ने सीता को पहले ही चुन लिया था।
🚩🕉️3. स्वयंवर के बाद मार्गशीर्ष (अगहन) मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को भगवान श्रीराम तथा जनकपुत्री जानकी (सीता) का विवाह हुआ था, तभी से इस पंचमी को ‘विवाह पंचमी पर्व’ के रूप में मनाया जाता है।
🚩🕉️4. कहा जाता है कि उनका विवाह देखने को स्वयं ब्रह्मा, विष्णु एवं रूद्र ब्राह्मणों के वेश में आए थे। दूसरी ओर सभी देवी और देवता भी विभिन्न वेश में उपस्थित थे। चारों भाइयों में श्रीराम का विवाह सबसे पहले हुआ।
🚩🕉️5. विवाह के समय ब्रह्महर्षि वशिष्ठ एवं राजर्षि विश्वामित्र उपस्थित थे। विवाह का मंत्रोच्चार चल रहा था और उसी बीच कन्या के भाई द्वारा की जाने वाली रस्म की बारी आई। तब वहीं पर धरती माता भी बैंठी थी तो उनके पुत्र मंगलदेव ने इस रस्म को पूरा किया। हालांकि इस घटना का उल्लेख रामायण में बहुत कम ही मिलता है।
🚩🕉️6. श्रीराम और सीताजी के विवाह में सभी देव, देवी, यक्ष एवं गंधर्व पधारे थे। पुराणों में इस विवाह का बहुत वर्णन मिलता है। कोई भी इस विवाह को देखने का मौका छोड़ना नहीं चाहता था।
🚩🕉️7. इस विवाह का रोचक वर्णन आपको रामचरित मानस में मिलेगा।
🚩🕉️8. कुछ लोग श्रीराम और सीता के विवाह को दुख:द घटना मानकर इस दिन यानी पंचमी के दिन विवाह नहीं करते हैं, क्योंकि दोनों को वनवास हुआ था और बाद में दोनों को 2 वर्ष तक एक दूसरे से अलग रहना पड़ा था।
🚩🕉️9. विवाह के समय श्रीराम की उम्र 13 साल और देवी सीता की उम्र 6 वर्ष बताई जाती है। विवाह के 12 वर्ष बाद वनवास पर जाते समय श्रीराम की आयु 25 और सीताजी की आयु 18 वर्ष थीं।
🚩🕉️10. कहते हैं कि विवाह के बाद दोनों 6 वर्ष तक जनक जी के महल में ही रहे थे। इसके बाद श्रीराम को वनवास हुआ तो माता सीता भी उनके साथ चली गई और 14 वर्ष के वनवास में अंतिम दो वर्ष माता सीता रावण की कैद में रही।
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🚩🕉️जनकपुरी में गूँजते मंगलध्वनि- आज़ भगवान श्री राम-सीता माता का विवाह
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🚩🕉️मिथिला की धरती उस दिन कुछ और ही अलौकिक थी। राजमहल के प्रांगण में सुगंधित पुष्पों की वर्षा हो रही थी, नगाड़ों की गूँज मानो आकाश को छू रही थी और नगरवासियों के चेहरों पर एक उम्मीद तैर रही थी—आज जगत-जननी सीता का स्वयंवर था। राजा जनक स्वयं उस विशाल सभा को देख रहे थे, जहाँ दूर-दूर के राजकुमार अपने सामर्थ्य का परिचय देने आए थे।
🚩🕉️सभागार के मध्य में रखी शिवधनुष की विशालता देखकर हर कोई विस्मित था। पत्थरों पर उकेरी गई पौराणिक कथाएँ कहती थीं कि यह धनुष स्वयं महादेव को प्रिय था, और इसे उठाना तो दूर, छूना भी सामान्य शक्ति से परे था। जनक के मन में एक चिंता थी—यदि धनुष कोई न उठा पाया, तो क्या सीता का हाथ किसी योग्य को मिल पाएगा?
🚩🕉️उधर सीता माता, अपनी सखियों के साथ ऊपर के कक्ष से सब नज़ारा देख रही थीं। उनका हृदय शांत था—जैसे उन्हें पहले से आभास हो कि आज समय कौन-सी दिशा खोलने वाला है। वे मंद स्मित के साथ बोलीं, “जिसे प्रभु ने मेरे लिए नियत किया है, वही धनुष को उठाएगा।” सखियाँ उनके विश्वास को देखकर मोहित हो उठीं।,
🚩🕉️सभा शुरू हुई। एक-एक कर नाना सामर्थ्यवान राजा आगे आए—सभी धनुष को हिलाने का प्रयास करते, पर वह अपनी जगह अडिग पड़ा रहा। किसी के हाथ में कम्पन, किसी की सांस फूल जाती, तो कोई पास पहुँचते ही भयभीत होकर लौट पड़ता। जनक की दृष्टि निराश होने लगी।
🚩🕉️उसी समय द्वारपालों ने घोषणा की—”अयोध्या से आए महाराज दशरथ के पुत्र यहाँ उपस्थित होना चाहते हैं।” सभागार में सन्नाटा सा छा गया।
🚩🕉️चार राजकुमार भीतर प्रवेश कर रहे थे—कृपालु लक्ष्मण, विनम्र भरत, शांत शत्रुघ्न और सबसे आगे सौम्य और तेजस्वी राम। राम का सौंदर्य किसी तपस्वी की शांति और किसी योद्धा की पराक्रम-रेखा दोनों का संगम था। सीता की दृष्टि अनायास ही उनके चेहरे पर ठहर गई। मानो दो दिव्य आत्माएँ एक ही क्षण में एक-दूसरे को पहचान गई हों।
🚩🕉️विश्राम के बाद गुरुवर विश्वामित्र ने जनक से कहा, “राजन्, अब इन कुमारों को भी अवसर प्रदान कीजिए।”जनक ने सम्मानपूर्वक अनुमति दी।
🚩🕉️राम आगे बढ़े। सभा की आँखें उन पर टिक गईं। उन्होंने धनुष के पास पहुँचकर पहले उसे प्रणाम किया। यह विनम्रता ही उनके दिव्य स्वरूप का परिचय थी। फिर उन्होंने दोनों हाथों से धनुष को ऐसे उठाया जैसे यह वर्षों से उन्हीं का प्रतीक्षारत हो। पल भर में धनुष तन गया—और अगले ही क्षण एक गगनभेदी ध्वनि के साथ टूट गया।
🚩🕉️संपूर्ण सभा स्तब्ध। देवलोक से फूलों की वर्षा। जनक की आँखों में खुशी के आँसू। सीता का हृदय मधुर धड़कनों से भर उठा—भावना जैसे शब्द बनकर फुसफुसाती हो, “स्वामी…।”
🚩🕉️जनक ने घोषणा की—”मैं अपनी पुत्री सीता का वरण श्री राम से कराता हूँ।” पूरे मिथिला में उत्सव की लहर दौड़ पड़ी।
🚩🕉️विवाह की दिव्य तैयारी
🚩🕉️अयोध्या में सूचना पहुँची तो महाराज दशरथ आनंद से भर उठे। वे बारात लेकर मिथिला की ओर चले। मार्ग में जिस भी ग्राम से बारात गुज़रती, लोग मंगलगान गाते और दीप जलाते। यह केवल दो कुलों का नहीं, दो महान आदर्शों का मिलन था—मर्यादा और पवित्रता का संगम।
🚩🕉️जनकपुरी में बारात का स्वागत राजसी वैभव के साथ हुआ। जनक, सुनयना, उर्मिला—सभी ने मिलकर ऐसा स्वागत किया कि स्वयं देवता भी रुककर निहारें। राम और सीता की पहली झलक बारात और जनक परिवार दोनों के लिए एक आशीर्वाद जैसी थी।
🚩🕉️जब मंडप सजाया गया, उसकी छत पर सुवर्ण घंटियाँ लटक रहीं थीं। वे मंद हवा में बजतीं तो ऐसा लगता जैसे ऋषियों का मंत्रोच्चार गूँज रहा हो। सीता पीले रेशमी वस्त्रों में सुघड़ता की मूर्ति-सी प्रतीत हो रही थीं, और राम दिव्य तेज से दीप्त।
🚩🕉️विवाह के क्षण में सीता ने राम के गले में वरमाला डाली—उनकी आँखों में वही सौम्य विश्वास था जो स्वयंवर के समय था। फिर राम ने वरमाला पहनाई; सीता का मुख प्रेम और सम्मान से भर उठा।
🚩🕉️अग्नि साक्षी बना। सप्तपदी आरंभ हुई—
पहला फेरा धर्म का,
दूसरा सदाचार का,
तीसरा समृद्धि का,
चौथा प्रेम का,
पाँचवाँ संतति और कर्तव्य का,
छठा ऋतुचक्र के समान संतुलन का,
सातवाँ जन्म-जन्मांतर के साथ का।
🚩🕉️संसार में शायद ही कोई ऐसा क्षण रहा हो जिसमें प्रेम, मर्यादा और ईश्वरत्व एक साथ प्रकट हुए हों।
🚩🕉️विवाह के उपरांत जब राम ने सीता का हाथ थामा, दोनों के सामने जैसे भविष्य का उजला पथ खुल गया—जिसमें वनवास की कठिनाई भी थी और अयोध्या का राजतिलक भी, पर प्रेम और धर्म की विजय सबसे ऊपर थी।
🚩🕉️मिथिला की रात दीपों से जगमगा उठी। आसमान में तारा-मंडल जैसे गा रहा था—“आज पृथ्वी ने अपना आदर्श युगल पा लिया।”
🚩🕉️यही था विवाह पंचमी का दिव्य प्रसंग—जहाँ दो जीवन नहीं, बल्कि दो आदर्शों का पावन मिलन हुआ।
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🚩🕉️राम मंदिर में आज़ होगा भव्य ध्वजारोहण, 25 नवंबर को PM मोदी करेंगे पताकारोहण; जानिए इससे जुड़ी कुछ खास बातें
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🚩🕉️25 नवंबर को राम मंदिर के मुख्य मंदिर का ध्वजारोहण होगा, जिसमें 22×11 फीट का केसरिया ध्वज फहराया जाएगा, जिस पर रामायणकालीन प्रतीक अंकित होंगे। यह भव्य परिसर 5 अगस्त 2020 को आधारशिला रखे जाने के पांच साल के भीतर, पांच लाख बीस हजार घनफुट गुलाबी सैंडस्टोन से बनकर तैयार हुआ है, जिसमें मुख्य गर्भगृह में विष्णु, लक्ष्मी, ब्रह्मा-शिव की मूर्तियां और ऊपरी तलों पर श्रीराम दरबार व जगमोहन का निर्माण शामिल है।
🚩🕉️22 जनवरी 2024 की तारीख सभी राम भक्तों को याद है। इस दिन श्री राम मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम हुआ था। मंदिर परिसर में अन्य मंदिरों और टीलों के निर्माण से पूरे परिसर को भव्यता को दर्शता है। आने वाली 25 नवंबर की तारीख यानी कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य मंदिर का पताकारोहण करेंगे। आपको बता दें कि, मुख्य मंदिर का ध्वज 22 फीट और 11 फीट का आकार का होगा। केसरिया रंग के इस ध्वज में रामायणकालीन को विदार वृक्ष और इक्ष्वाकु वंश के प्रतीक सूर्यदेव, ओंकर के साथ अंकित होंगे। इसके अलावा, परिसर में जो अन्य सात मंदिर हैं, उन सभी के ध्वज का रंग भी केसरिया होगा जिसके केंद्र में सूर्यदेव ओंकार के साथ अंकित किया जाएगा।
🚩🕉️5 वर्ष में पूर्ण हुआ परिसर
🚩🕉️5 अगस्त 2020 को इस विशाल और भव्य मंदिर के निर्माण की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विधि विधान के साथ रखी थी। मंदिर की आधारशिला के दौरान 1989 में विश्वभर से आई शिलाओं की भी पूजा की गई थी और वे मंदिर की नींव में डाली गई।
🚩🕉️आपको बता दें कि, 1989 में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान मंदिर निर्माण हेतु दुनिया भर से पूजित शिलाएं अयोध्या भेजी गई थीं। आधारशिला रखे जाने के लगभग पांच वर्ष बाद नवनिर्मित मंदिर परिसर पूर्ण रूप से तैयार हो गया। पूरे परिसर के निर्माण में लगभग पांच लाख बीस हजार घनफुट गुलाबी सैंडस्टोन का उपयोग किया गया, जिन्हें राजस्थान के बंसी पहाड़पुर से लाया गया था। इन्हीं पत्थरों ने मंदिर की भव्यता और आकर्षण को और भी बढ़ा दिया है।
🚩🕉️जो सुमिरत सिधि होइ
🚩🕉️प्रभु श्री राम का मुख्य मंदिर में जहां से गर्भगृह आरंभ होता है वहां सफेद संगमरमर शिलाओं पर उकेरी गई चंद्रधारी गंगा यमुना की बहुत ही सुंदर मूर्तियां है। गर्भगृह की बाई तरफ बड़े से मंडप में एक ताखे पर गणेश जी की मूर्ति है और उसके ऊपर रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ के चिन्ह बनाए गए हैं। एक ताखे में हनुमान जी की प्रणाम मुद्रा की मूर्ति के ऊपर अंगद, सुग्रीव और जामवंत की मूर्तियां बनाई गई हैं। गर्भगृह के मुख्यद्वार के ठीक ऊपर समस्त सृष्टि के पालक विष्णु भगवान की शेषनाग पर लेटी मुद्रा को पत्थर पर उकेरा गया है। साथ ही में देवी लक्ष्मी बैठी हुई है।
🚩🕉️शेष शैया पर लेटे विष्णु भगवान के साथ ब्रह्मा जी और शिवजी की मूर्तियां भी बनाई गई है। गर्भगृह के ऊपर वाले तल पर श्रीराम दरबार स्थापित किया गया है, जबकि उसके ठीक ऊपर के तल पर एक विशाल जगमोहन निर्मित है, जो फिलहाल खाली रखा गया है। इस स्थान का आगे किस प्रकार उपयोग किया जाएगा, इसका निर्णय श्रीराम तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा लिया जाएगा।
🚩🕉️उत्तर-पूर्व में विशाल यज्ञ मंडप
🚩🕉️मुख्य मंदिर के उत्तर-पूर्व में विशाल यज्ञ मंडप का निर्माण किया गया है और इसके पास ही मां सीता कूप भी बनाया गया है। मंदिर परिसर में भगवान गणेश, शंकर, सूर्य भगवान, हनुमान जी, मां दुर्गा और माता अन्नापूर्णा का मंदिर भी निर्मित किया गया है। मंदिर निर्माण से जुड़े लोगों ने बताया कि जहां पहले मां सीता की रसोई हुआ करती खी उसी जगह या उसके पास ही माता अन्नापूर्णा का मंदिर बनाया जाएगा।
🚩🕉️इसके साथ ही परिसर में शेष रुप में लक्ष्मण जी की मूर्ति वाले शेषावतार मंदिर को भी नव्य स्वरुप प्रदान किया गया है। इन मंदिरों की मूर्तियों का स्केच पद्मश्री वासुदेव कामथ ने तैयार किया है और मूर्तियों का निर्माण जयपुर में करवाया गया है। यहां से प्रतिमा अयोध्या लाकर मंदिरों में स्थापित किया गया है।
🚩🕉️सप्त मंदिरों की अनुपम शोभा
🚩🕉️ श्री राम जन्मभूमि परिसर में अत्यंत सुंदर ढंग से सप्त मंदिरों का निर्माण किया गया है। इन सात मंदिरों में आदिकवि महर्षि वाल्मीकि का मंदिर विशेष रूप से उल्लेखनीय है। महर्षि वाल्मीकि ने ही भारतीय संस्कृति के आदर्शों को आलोकित करने वाले महान ग्रंथ ‘रामायण’ की रचना की थी। इसी प्रकार सूर्यवंश के कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपने तपोबल से रघुवंश के नरेशों को शक्ति प्रदान की और सनातन धर्म के गौरव का विस्तार किया।
🚩🕉️किशोर श्री राम को शिक्षित करने के लिए अपने साथ ले गए और प्रशिक्षण के दौरान महादेव से प्राप्त विविध दिव्यास्त्र श्री राम को प्रदान किए। इसके साथ ही देवी अहल्या का मंदिर बनाया गया है। महर्षि अगस्त्य को राष्ट्रसंरक्षक ऋषि कहा जाता है, उनका मंदिर भी जन्मभूमि परिसर में सप्त मंदिर में से एक है। माता शबरी और निषादराज गुह के मंदिर भी बनाए गए है।
🚩🕉️वैष्णव परंपरा को समर्पित द्वार
🚩🕉️जन्मभूमि परिसर के चारों द्वार वैष्णव परंपरा के प्रमुख संतों—जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य, जगद्गुरु श्री माध्वाचार्य, जगद्गुरु आदि शंकराचार्य और जगद्गुरु श्री रामानुजाचार्य के नाम पर स्थापित किए गए हैं। मुख्य मंदिर के लोअर प्लिंथ पर वाल्मीकि रामायण की कथा के विभिन्न प्रसंगों पर आधारित चित्रांकन वासुदेव कामथ द्वारा तैयार किया गया है, जिनका परिचयात्मक लेखन यतीन्द्र मिश्र ने किया है। मंदिर परिसर में एक भव्य स्मृति स्तंभ भी बनाया गया है, जिसमें उन सभी ज्ञात और अज्ञात व्यक्तियों के नाम अंकित हैं जिन्होंने श्रीराम मंदिर के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
🚩🕉️भव्य स्वरूप मिला टीलों को
🚩🕉️मंदिर परिसर में कई टीलों को भी भव्य स्वरुप प्रदान कर रहे हैं। मंदिर में श्री कुबेर टीला इनमें से एक है। धार्मिक मान्यता है कि धन-धान्य के प्रतीक स्वरुप कुबेर जी का यहां निवास है। वहीं, अंगद टीला को भी नव्य स्वरुप प्रदान किया है। जटायु की बड़ी आकृति भी मंदिर परिसर में स्थापित की गई है। रामसेतु के निर्माण में गिलहरी ने भी योगदान दिया है। मंदिर परिसर में एक स्थल का नाम है ‘पावन गिलहरी’। वहीं, तीर्थयात्री सहायता केंद्र के बिल्कुल समीप तुलसीदास जी की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है।
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🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष 🌹
आपका जन्मदिन: 25 नवंबर
दिनांक 25 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 7 होगा। यह अंक वरूण ग्रह से संचालित होता है। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति अपने आप में कई विशेषता लिए होते हैं। आप खुले दिल के व्यक्ति हैं। आप पैनी नजर के होते हैं। किसी के मन की बात तुरंत समझने की आपमें दक्षता होती है। आपकी प्रवृत्ति जल की तरह होती है। जिस तरह जल अपनी राह स्वयं बना लेता है वैसे ही आप भी तमाम बाधाओं को पार कर अपनी मंजिल पाने में कामयाब होते हैं।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 7, 16, 25
शुभ अंक : 7, 16, 25, 34
शुभ वर्ष : 2026
ईष्टदेव : भगवान शिव तथा विष्णु
शुभ रंग : सफेद, पिंक, जामुनी, मेहरून
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
करियर: नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए समय सुखकर रहेगा। अधिकारी वर्ग का सहयोग मिलेगा। आपके कार्य में तेजी का वातावरण रहेगा।
सलाह: नवीन कार्य-योजना शुरू करने से पहले केसर का लंबा तिलक लगाएं। मंदिर में पताका चढ़ाएं।
कारोबार: व्यापार-व्यवसाय की स्थिति उत्तम रहेगी। आपको प्रत्येक कार्य में जुटकर ही सफलता मिलेगी।
मेष (Aries)
स्वभाव: उत्साही
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: नीला
आज आपके ऊपर काम का दवाब अधिक रहेगा, लेकिन आपके शत्रु भी आपका काम बिगड़ने की पूरी कोशिश करेंगे। आपकी धार्मिक कामों में भी काफी रुचि रहेगी। आप किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद के लिए आगे आएंगे। आपको अपने कामों को लेकर योजना बनाकर चलना होगा, तभी वह समय से पूरे हो सकेंगे। जीवनसाथी के स्वास्थ्य को लेकर आपको थोड़ा सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि उनके सेहत में कोई समस्या खड़ी हो सकती है।
वृषभ (Taurus)
स्वभाव: धैर्यवान
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: हरा
आज का दिन आपके लिए खुशनुमा रहने वाला है। परिवार में किसी नए मेहमान का आगमन हो सकता है। आपको किसी पुरानी गलती से आपको सबक लेना होगा। समाज में आपके अच्छे कामों की सराहना होगी और आपके मान-सम्मान में भी वृद्धि होगी। आप कोई काम समय से पूरा करने के लिए समय निकालेंगे। आप वाहनों का प्रयोग थोड़ा सावधान रहकर करें, इसलिए किसी से मांगकर वाहन ना चलाएं। आपके रहन-सहन के स्तर में सुधार आएगा।
मिथुन (Gemini)
स्वभाव: जिज्ञासु
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: लाल
आज का दिन आपके लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा। उच्च अधिकारियों की कृपा आप पर बनी रहेगी। नौकरी बदलने का प्रयास कर रहे लोगों को अच्छी सफलता मिलेगी। यदि आपकी कोई प्रिय वस्तु खो गई थी, तो उसके भी आपको मिलने की पूरी संभावना है। आप काम को लेकर काफी व्यस्त रहेंगे, लेकिन फिर भी आप परिवार के सदस्यों के लिए समय निकालेंगे, जिससे आपको उनके मन में चल रही समस्याओं को दूर करने का मौका मिलेगा।
कर्क (Cancer)
स्वभाव: भावुक
राशि स्वामी: चंद्र
शुभ रंग: ग्रे
आज का दिन आपके लिए पद-प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला रहेगा। पार्टनरशिप में आप कोई व्यवसाय करने की ना सोंचे। यदि आप किसी सरकारी योजना में इन्वेस्टमेंट करने की सोच रहे हैं, तो वह आपके लिए अच्छा रहेगा। आप किसी काम को लेकर जल्दबाजी न दिखाएं, नहीं तो बाद में आपको उसके लिए पछतावा होगा। यदि आपने किसी को धन उधार दिया दिया था, तो आपके उस धन के वापस आने की संभावना बहुत कम है। पिताजी की सेहत में गिरावट आ सकती है, जो आपकी टेंशनों को बढ़ाएगी।
सिंह राशि (Leo)
स्वभाव: आत्मविश्वासी
राशि स्वामी: सूर्य
शुभ रंग: आसमानी
आज का दिन आपके लिए मिला जुला रहने वाला है। आप अपने दोस्तों के साथ समय बिताएंगे और अच्छे खान-पान का आनंद लेंगे। राजनीति से जुड़ा कोई मामला आज सुलझ जाएगा, जो आपके लिए अच्छा रहेगा। आपको अपने कामों को धैर्य व संयम से निपटाने की आवश्यकता है। मित्रों का सहयोग आप पर बना रहेगा। आपको परिवार के सदस्यों के साथ किसी मांगलिक उत्सव में सम्मिलित होने का मौका मिलेगा। आप अपनी जरूरत की आवश्यकताओं की पूर्ति पर अच्छा खासा खर्चा करेंगे।
कन्या (Virgo)
स्वभाव: मेहनती
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: गुलाबी
आज का दिन आपके लिए अक्समात लाभ दिलाने वाला रहेगा। लंबे समय से चली आ रही परेशानी दूर होंगी। आपको अपने गुस्से पर काबू रखना होगा और यदि आपने किसी से कोई वादा किया था, तो उसे आप समय रहते पूरा करने की कोशिश करें। आपकी तरक्की की राह में आ रही बाधाएं दूर होंगी। संतान पढ़ाई-लिखाई को लेकर किसी नए कोर्स में दाखिला ले सकती है। माता-पिता की सेवा के लिए भी आप समय निकालेंगे, जिससे आपको मानसिक शांति मिलेगी।
तुला (Libra)
स्वभाव: संतुलित
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: सफेद
आज का दिन आपके लिए इन्कम को बढ़ाने वाला रहेगा। आप अपनी इन्कम के बढ़ने से काफी खुश होंगे। विद्यार्थी किसी प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। मौसम का विपरीत प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर पड़ेगा। कुछ नए लोगों से आपकी जान पहचान बढ़ेगी। बेवजह के भागदौड़ अधिक रहेगी। ससुराल पक्ष के किसी व्यक्ति से आपको धन संबंधित मदद मिल सकती है, जिससे आपको खुशी होगी। आपके परिवार में किसी सदस्य के विवाह प्रस्ताव पर मोहर लगने से माहौल खुशनुमा रहेगा।
वृश्चिक (Scorpio)
स्वभाव: रहस्यमय
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: लाल
आज का दिन आपके लिए स्वास्थ्य के लिहाज से कमजोर रहने वाला है। आपको यदि किसी बात को लेकर कोई समस्या चली आ रही है, तो वह भी दूर होगी। आपके मन में किसी काम को लेकर कोई उलझन है, तो उसे दूर करने की कोशिश करें। आप किसी मनोरंजन के कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे और परिवार के सदस्यों के साथ आप आनंदमय में समय व्यतीत करेंगे, लेकिन आपकी किसी बात को लेकर कहासुनी हो सकती है।
धनु (Sagittarius)
स्वभाव: दयालु
राशि स्वामी: गुरु
शुभ रंग: पीला
आज का दिन आपके लिए लेनदेन से संबंधित मामलों में सावधानी बरतने के लिए रहेगा। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। आपको कोई जोखिम लेने से बचना होगा। आप किसी विपरीत परिस्थिति में धैर्य बनाए रखें। आपको किसी नई नौकरी की प्राप्ति हो सकती है। अपने बॉस से आप किसी काम को लेकर बातचीत कर सकते हैं। घूमने-फिरने के दौरान आपको कोई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। माता-पिता के आशीर्वाद से आपकी कोई रुकी हुई डील फाइनल हो सकती है।
मकर (Capricorn)
स्वभाव: अनुशासित
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: गुलाबी
आज आपको पारिवारिक जीवन में सफलता मिलेगी। आपको अपने किसी मित्र से लंबे समय बाद मिलने का मौका मिलेगा। आपकी कोई मन की इच्छा पूरी हो सकती है। विद्यार्थी पढ़ाई-लिखाई पर पूरा फोकस बनाएंगे, तभी उन्हें किसी परीक्षा में सफलता हासिल होगी। घूमने-फिरने के दौरान आपको कोई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। आपको किसी सामाजिक आयोजन में सम्मिलित होने का मौका मिलेगा, जो विद्यार्थी विदेश जाने की योजना बना रहे थे, तो उन्हें अच्छी सफलता हासिल होगी।
कुंभ ( Aquarius)
स्वभाव: मानवतावादी
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: लाल
आज आप अपनी जरूरत के हिसाब से खर्च करें, तो बेहतर रहेगा। आप दिखावे के चक्कर में ना पड़ें। आप संतान की करियर से निर्णय ले सकते हैं। ससुराल पक्ष के किसी व्यक्ति से आपको धन लाभ मिलता दिख रहा है। आपको अपने पारिवारिक मामलों को मिल बैठकर निपटाने की आवश्यकता है। पैतृक संपत्ति को लेकर कोई नया विवाद खड़ा हो सकता है। आज आप मित्रों के साथ आनंद में समय व्यतीत करेंगे। परिवार में किसी सदस्य के विवाह के बाद पक्की हो सकती है।
मीन (Pisces)
स्वभाव: संवेदनशील
राशि स्वामी: बृहस्पति
शुभ रंग: गोल्डन
आज का दिन आपके लिए लाभदायक रहने वाला है। वैवाहिक जीवन भी आनंदमय रहेगा और आपके चारों ओर का माहौल खुशनुमा रहेगा। आपको एक के बाद एक खुशखबरी मिलने से काफी खुश होंगे। किसी कानूनी मामले में आपको जीत मिलती दिख रही है। आपकी किसी नये काम के प्रति रुचि जागृत होगी। आप अपने परिवार के सदस्यों के साथ टाइम स्पेंड करेंगे और धन को लेकर कोई समस्या थी, तो वह भी दूर होगी। माता-पिता का आशीर्वाद आप पर बना रहेगा। भाई व बहनों के साथ से आपका कोई रुका हुआ काम पूरा होगा।

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