🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 14 नवम्बर 2025*
🌤️ *दिन – शुक्रवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – हेमंत ऋतु*
🌤️ *मास – (मार्गशीर्ष)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – दशमी रात्रि 12:49 तक तत्पश्चात एकादशी*
🌤️ *नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी रात्रि 09:20 तक तत्पश्चात उत्तरा फाल्गुनी*
🌤️ *योग – वैधृति 15 नवम्बर सुबह 06:26 तक तत्पश्चात विष्कंभ*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 10:59 से दोपहर 12:23 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:49*
🌤️ *सूर्यास्त – 05:56*
👉 *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण -*
💥 *विशेष -*
🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
👉🏻 *कब करें उत्पत्ति एकादशी का व्रत 14 या 15 नवम्बर | उत्पत्ति एकादशी व्रत कथा*!
🌷 *एकादशी व्रत के लाभ* 🌷
➡️ *14 नवम्बर 2025 शुक्रवार को रात्रि 12:49 से 16 नवम्बर, को रात्रि 02:37 तक (यानी 15 नवम्बर को पूरा दिन) एकादशी है।*
💥 *विशेष – 15 नवम्बर, शनिवार को एकादशी का व्रत उपवास रखें ।*
🙏🏻 *एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।*
🙏🏻 *जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
🙏🏻 *जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
🙏🏻 *एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
🙏🏻 *धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।*
🙏🏻 *कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।*
🙏🏻 *परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है । पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ ।भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।*
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *एकादशी के दिन करने योग्य* 🌷
🙏🏻 *एकादशी को दिया जला के विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें… विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l*
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *एकादशी के दिन ये सावधानी रहे* 🌷
🙏🏻 *महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो चावल खाता है… तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है…*
*🚩 जय हो मात श्री धोली सती दादीजी की🚩*
🕉️ *~ वैदिक पंचाग ~* 🕉️
🙏🍀🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🌹🙏🌹
🌹मंदिर जाना क्यों जरूरी और जानिए मंदिर संबंधी अपराध..🌹
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⭕मंदिर’ का अर्थ होता है- मन से दूर कोई स्थान। ‘मंदिर’ का शाब्दिक अर्थ ‘घर’ है और मंदिर को द्वार भी कहते हैं, जैसे रामद्वारा, गुरुद्वारा आदि। मंदिर को आलय भी कह सकते हैं, जैसे कि शिवालय, जिनालय। लेकिन जब हम कहते हैं कि मन से दूर जो है, वह मंदिर है तो उसके मायने बदल जाते हैं। मंदिर को अंग्रेजी में भी ‘मंदिर’ ही कहते हैं ‘टेम्पल’ (Temple) नहीं। जो लोग ‘टेम्पल’ कहते हैं, वे मंदिर के विरोधी हो सकते हैं।
मंदिर में संध्योपासना की जाती है, जिसे संध्यावंदन भी कहते हैं। संध्योपासना के 5 प्रकार हैं-
🚩1. प्रार्थना,
🚩2. ध्यान,
🚩3. कीर्तन,
🚩4. यज्ञ और
🚩5. पूजा-आरती।
🔔व्यक्ति की जिसमें जैसी श्रद्धा है वह वैसा करता है। सभी के अलग-अलग समय नियुक्त हैं।
⚜️इसलिए मंदिर जाना जरूरी…
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🚩पहला कारण:- मंदिर जाना इसलिए जरूरी है कि वहां जाकर आप यह सिद्ध करते हैं कि आप देव शक्तियों में विश्वास रखते हैं तो देव शक्तियां भी आपमें विश्वास रखेंगी। यदि आप नहीं जाते हैं तो आप कैसे व्यक्त करेंगे की आप परमेश्वर या देवताओं की तरफ है? यदि आप देवताओं की ओर देखेंगे तो देवता भी आपकी ओर देखेंगे। यदि नहीं तो नहीं।
🚩दूसरा कारण:- अच्छे मनोभाव से जाने वाले की सभी तरह की समस्याएं प्रतिदिन मंदिर जाने से समाप्त हो जाती है। मंदिर जाते रहने से मन में दृढ़ विश्वास और उम्मीद की ऊर्जा का संचार होता है। विश्वास की शक्ति से ही धन, समृद्धि और पुत्र-पुत्री रत्न की प्राप्ति होती है।
🚩तीसरा कारण:- यदि आपने कोई ऐसा अपराध किया है कि जिसे आप ही जानते हैं तो आपके लिए प्रायश्चित का समय है। आप क्षमा प्रार्थना करके अपने मन को हल्का कर सकते हैं। इससे मन की बैचेनी समाप्त होती है और आप का जीवन फिर से पटरी पर आ जाता है।
🚩चौथा कारण:- मंदिर में शंख और घंटियों की आवाजें वातावरण को शुद्ध कर मन और मस्तिष्क को शांत करती हैं। धूप और दीप से मन और मस्तिष्क के सभी तरह के नकारात्मक भाव हट जाते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
🚩पांचवां कारण:- मंदिर के वास्तु और वातावरण के कारण वहां सकारात्मक उर्जा ज्यादा होती है। प्राचीन मंदिर ऊर्जा और प्रार्थना के केंद्र थे। धरती के दो छोर हैं- एक उत्तरी ध्रुव और दूसरा दक्षिणी ध्रुव। उत्तर में मुख करके पूजा या प्रार्थना की जाती है इसलिए प्राचीन काल के सभी मंदिरों के द्वार उत्तर में होते थे। हमारे प्राचीन मंदिर वास्तुशास्त्रियों ने ढूंढ-ढूंढकर धरती पर ऊर्जा के सकारात्मक केंद्र ढूंढे और वहां मंदिर बनाए। मंदिर में शिखर होते हैं। शिखर की भीतरी सतह से टकराकर ऊर्जा तरंगें व ध्वनि तरंगें व्यक्ति के ऊपर पड़ती हैं। ये परावर्तित किरण तरंगें मानव शरीर आवृत्ति बनाए रखने में सहायक होती हैं। व्यक्ति का शरीर इस तरह से धीरे-धीरे मंदिर के भीतरी वातावरण से सामंजस्य स्थापित कर लेता है। इस तरह मनुष्य असीम सुख का अनुभव करता है। मंदिर का भव्य होना जरूरी है। भव्यता से ही दिव्यता का अवतरण होता है। मंदिर वास्तु का ध्यान रखना जरूरी है।
⚜️मंदिर के अपराधी कौन…
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🔔यदि आप मंदिर में हैं तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें अन्यथा आपकी पूजा, प्रार्थना आदि करने का कोई महत्व नहीं रहेगा। निम्नलिखित बातें करके आप मंदिर और देव संबंधी अपराध करते हैं। इसके दुष्परिणाम भी आपको ही झेलना होंगे। शास्त्रों में जो मना किया गया है उसे करना पाप और कर्म को बिगाड़ने वाला माना गया है। यहां प्रस्तुत हैं कुछ प्रमुख आचरण जिन्हें मंदिर में नहीं करना चाहिए अन्यथा आपकी प्रार्थना या पूजा निष्फल तो होती ही है, साथ ही आप देवताओं की नजरों में गिर जाते हो।
- भगवान के मंदिर में खड़ाऊं या सवारी पर चढ़कर जाना,
- भगवान के सामने जाकर प्रणाम न करना,
- उच्छिष्ट या अपवित्र अवस्था में भगवान की वन्दना करना,
- एक हाथ से प्रणाम करना,
- भगवान के सामने ही एक स्थान पर खड़े-खड़े प्रदक्षिणा करना,
- भगवान के आगे पांव फैलाना,
- मंदिर में पलंग पर बैठना या पलंग लगाना,
- मंदिर में सोना,
- मंदिर में बैठकर परस्पर बात करना,
- मंदिर में रोना या जोर जोर से हंसना,
- चिल्लाना, फोन पर बात करना, झगड़ना, झूठ बोलना, गाली बकना,
- खाना या नशा करना,
- किसी को दंड देना,
- कंबल ओढ़कर बैठना,
- अधोवायु का त्याग करना,
- अपने बल के घंमड में आकर किसी पर अनुग्रह करना,
- दूसरे की निंदा या स्तुति करना,
- स्त्रियों के प्रति कठोर बात कहना,
- भगवत-सम्बन्धी उत्सवों का सेवन न करना।
- शक्ति रहते हुए गौण उपचारों से पूजा करना,
- मुख्य उपचारों का प्रबन्ध न करना,
- भगवान को भोग लगाए बिना ही भोजन करना,
- सामयिक फल आदि को भगवान कीसेवा में अर्पण न करना,
- उपयोग में लाने से बचे हुए भोजन को भगवान के लिए निवेदन करना,
- आत्म-प्रशंसा करना,
- देवताओं को कोसना,
- आरती के समय उठकर चले जाना,
- मंदिर के सामने से निकलते हुए प्रणाम न करना,
- भजन-कीर्तन आदि के दौरान किसी भी भगवान का वेश बनाकर खुद की पूजा करवाना,
- मूर्ति के ठीक सामने खड़े होना,
- मंदिर से बाहर निकलते वक्त भगवान को पीठ दिखाकर बाहर निकलना,
- हिन्दू देवी-देवताओं को छोड़कर अन्य किसी का मंदिर बनाना सबसे घोर अपराध है। धर्म की रक्षा के लिए नियुक्त श्रीहनुमानजी और माता कालिका ऐसे अपराधियों पर नजर रखे हुए हैं। इसके अलावा आप:, यम और धर्मराज की नजर भी आपके पाप और पुण्य पर हैं।
🛑आजकल मंदिर के नाम पर लोग गोड़से, लालू, रजनीकांत, अमिताभ बच्चन सहित अन्य मनमाने देवताओं का मंदिर बनाने का घोर अपराध कर रहे हैं। ये सभी हिन्दू धर्म के अपराधी हैं, जिन्होंने मंदिर का मजाक उड़ाया। इन सभी को शास्त्र सम्मत सजा का प्रावधान है।
⚜️मंदिर में प्रवेश से पूर्व…ये जानना जरूरी
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🚩आचमन विधान:- मंदिर में प्रवेश से पूर्व शरीर और इंद्रियों को जल से शुद्ध करने के बाद आचमन करना जरूरी है। इस शुद्ध करने की प्रक्रिया को ही आचमन कहते हैं। मनुस्मृति में कहा गया है कि- नींद से जागने के बाद, भूख लगने पर, भोजन करने के बाद, छींक आने पर, असत्य भाषण होने पर, पानी पीने के बाद, और अध्ययन करने के बाद आचमन जरूर करें।
शास्त्रों में कहा गया है कि त्रिपवेद आपो गोकर्णवरद् हस्तेन त्रिराचमेत्। यानी आचमन के लिए बाएं हाथ की गोकर्ण मुद्रा ही होनी चाहिए तभी यह लाभदायी रहेगा। गोकर्ण मुद्रा बनाने के लिए दर्जनी को मोड़कर अंगूठे से दबा दें। उसके बाद मध्यमा, अनामिका और कनिष्ठिका को परस्पर इस प्रकार मोड़ें कि हाथ की आकृति गाय के कान जैसी हो जाए।
🚩आचमन करते समय हथेली में 5 तीर्थ बताए गए हैं:-
- देवतीर्थ,
- पितृतीर्थ,
- ब्रह्मातीर्थ,
- प्राजापत्यतीर्थ और
- सौम्यतीर्थ।
कहा जाता है कि अंगूठे के मूल में ब्रह्मातीर्थ, कनिष्ठा के मूल में प्रजापत्यतीर्थ, अंगुलियों के अग्रभाग में देवतीर्थ, तर्जनी और अंगूठे के बीच पितृतीर्थ और हाथ के मध्य भाग में सौम्यतीर्थ होता है, जो देवकर्म में प्रशस्त माना गया है। आचमन हमेशा ब्रह्मातीर्थ से करना चाहिए। आचमन करने से पहले अंगुलियां मिलाकर एकाग्रचित्त यानी एकसाथ करके पवित्र जल से बिना शब्द किए 3 बार आचमन करने से महान फल मिलता है। आचमन हमेशा 3 बार करना चाहिए।
⚜️मंदिर में जाने का सर्वश्रेष्ठ वार, जानिए कौन-सा….
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शिव के मंदिर में सोमवार, विष्णु के मंदिर में रविवार, हनुमान के मंदिर में मंगलवार, शनि के मंदिर में शनिवार और दुर्गा के मंदिर में बुधवार और काली व लक्ष्मी के मंदिर में शुक्रवार को जाने का उल्लेख मिलता है। गुरुवार को गुरुओं का वार माना गया है।
🚩रविवार और गुरुवार धर्म का दिन :- विष्णु को देवताओं में सबसे ऊंचा स्थान प्राप्त है और वेद अनुसार सूर्य इस जगत की आत्मा है। शास्त्रों के अनुसार रविवार को सर्वश्रेष्ठ दिन माना जाता है। रविवार (विष्णु) के बाद देवताओं की ओर से होने के कारण बृहस्पतिवार (देव गुरु बृहस्पति) को प्रार्थना के लिए सबसे अच्छा दिन माना गया है।
🚩गुरुवार क्यों सर्वश्रेष्ठ?:- रविवार की दिशा पूर्व है किंतु गुरुवार की दिशा ईशान है। ईशान में ही देवताओं का स्थान माना गया है। यात्रा में इस वार की दिशा पश्चिम, उत्तर और ईशान ही मानी गई है। इस दिन पूर्व, दक्षिण और नैऋत्य दिशा में यात्रा त्याज्य है। गुरुवार की प्रकृति क्षिप्र है। इस दिन सभी तरह के धार्मिक और मंगल कार्य से लाभ मिलता है अत: हिन्दू शास्त्रों के अनुसार यह दिन सर्वश्रेष्ठ माना गया है अत: सभी को प्रत्येक गुरुवार को मंदिर जाना चाहिए और पूजा, प्रार्थना या ध्यान करना चाहिए।
⚜️मंदिर में पूजा या प्रार्थना क्यों…
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🚩पूजा:- पूजा एक रासायनिक क्रिया है। इससे मंदिर के भीतर वातावरण की पीएच वैल्यू (तरल पदार्थ नापने की इकाई) कम हो जाती है जिससे व्यक्ति की पीएच वैल्यू पर असर पड़ता है। यह आयनिक क्रिया है, जो शारीरिक रसायन को बदल देती है। यह क्रिया बीमारियों को ठीक करने में सहायक होती है। दवाइयों से भी यही क्रिया कराई जाती है, जो मंदिर जाने से होती है।
🚩प्रार्थना:- प्रार्थना में शक्ति होती है। प्रार्थना करने वाला व्यक्ति मंदिर के ईथर माध्यम से जुड़कर अपनी बात ईश्वर या देव शक्ति तक पहुंचा सकता है। देवता सुनने और देखने वाले हैं। प्रतिदिन की जा रही प्रार्थना का देवताओं पर असर होने लगता है। मानसिक या वाचिक प्रार्थना की ध्वनि आकाश में चली जाती है। प्रार्थना के साथ यदि आपका मन सच्चा और निर्दोष है तो जल्द ही सुनवाई होगी और यदि आप धर्म के मार्ग पर नहीं हैं तो प्रकृति ही आपकी प्रार्थना सुनेगी देवता नहीं।
प्रार्थना का दूसरा पहलू यह कि प्रार्थना करने से मन में विश्वास और सकारात्मक भाव जाग्रत होते हैं, जो जीवन के विकास और सफलता के अत्यंत जरूरी हैं। खुद के जीवन के बारे में निरंतर सकारात्मक सोचते रहने से अच्छे भविष्य का निर्माण होता है। मंदिर का वातावरण आपके दिमाग को सकारात्मक दिशा में गति देने लगता है। परमेश्वर की प्रार्थना के लिए वेदों में कुछ ऋचाएं दी गई है, प्रार्थना के लिए उन्हें याद किया जाना चाहिए।
⚜️मंदिर में जाने का समय…
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हिन्दू मंदिर में जाने का समय होता है। सूर्य और तारों से रहित दिन-रात की संधि को तत्वदर्शी मुनियों ने संध्याकाल माना है। संध्या वंदन को संध्योपासना भी कहते हैं। संधिकाल में ही संध्या वंदना की जाती है। वैसे संधि 5 वक्त (समय) की होती है, लेकिन प्रात:काल और संध्याकाल- उक्त 2 समय की संधि प्रमुख है अर्थात सूर्य उदय और अस्त के समय। इस समय मंदिर या एकांत में शौच, आचमन, प्राणायामादि कर गायत्री छंद से निराकार ईश्वर की प्रार्थना की जाती है।
दोपहर 12 से अपराह्न 4 बजे तक मंदिर में जाना, पूजा, आरती और प्रार्थना आदि करना निषेध माना गया है अर्थात प्रात:काल से 11 बजे के पूर्व मंदिर होकर आ जाएं या फिर अपराह्नकाल में 4 बजे के बाद मंदिर जाएं। *🚩#हरिऊँ🚩* 🙏🏻🙏🏻🙏🏻
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष 🌹
आपका जन्मदिन: 14 नवंबर
आप बेहद भाग्यशाली हैं कि आपका जन्म 14 को हुआ है। ऐसे व्यक्ति अधिकांशत: मितभाषी होते हैं। कवि, कलाकार, तथा अनेक विद्याओं के जानकार होते हैं। आपमें गजब की आकर्षण शक्ति होती है। आपमें लोगों को सहज अपना बना लेने का विशेष गुण होता है। 14 का अंक आपस में मिलकर 5 होता है। 5 का अंक बुध ग्रह का प्रतिनिधि करता है। अनजान व्यक्ति की मदद के लिए भी आप सदैव तैयार रहते हैं। आपमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन करना मुश्किल है। अर्थात अगर आप अच्छे स्वभाव के व्यक्ति हैं तो आपको कोई भी बुरी संगत बिगाड़ नहीं सकती। अगर आप खराब आचरण के हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सुधार नहीं सकती। लेकिन सामान्यत: 14 तारीख को पैदा हुए व्यक्ति सौम्य स्वभाव के ही होते हैं।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 1, 5, 7, 14, 23
शुभ अंक : 1, 2, 3, 5, 9, 32, 41, 50
शुभ वर्ष : 2030, 2032, 2034, 2050, 2059, 2052
ईष्टदेव : देवी महालक्ष्मी, गणेशजी, मां अम्बे।
शुभ रंग : हरा, गुलाबी जामुनी, क्रीम
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
परिवार : दाम्पत्य जीवन में मधुर वातावरण रहेगा। अविवाहित भी विवाह में बंधने को तैयार रहें। परिवारिक प्रसन्नता रहेगी। संतान पक्ष से खुशखबर आ सकती है।
करियर: यह वर्ष आपके लिए सफलताओं भरा रहेगा। नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए यह वर्ष निश्चय ही सफलताओं भरा रहेगा।
कारोबार: व्यापार-व्यवसाय में प्रगति से प्रसन्नता रहेगी। अभी तक आ रही परेशानियां भी इस वर्ष दूर होती नजर आएंगी।
मेष (Aries)
स्वभाव: उत्साही
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: नीला
आज आपकी आय में वृद्धि होने से खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा और आप ऊर्जा से भरपूर रहेंगे, इसलिए प्रत्येक काम को करने के लिए तत्पर रहेंगे। यदि आपको कोई शारीरिक समस्या थी, तो उससे भी आपको काफी हद तक राहत मिलेगी। आप अपने जीवनसाथी के साथ कुछ समय बिताएंगे, जिससे आपको उनके मन में चल रही समस्याओं को भी जानने का मौका मिलेगा। संतान को पढ़ाई-लिखाई के लिए आप कहीं बाहर भेज सकते हैं।
वृषभ (Taurus)
स्वभाव: धैर्यवान
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: हरा
आज का दिन आपके लिए खुशनुमा रहने वाला है। धन को लेकर यदि कोई समस्या थी, तो वह भी दूर होगी और आपका डूबा हुआ धन भी आपको मिलने की संभावना है। बिजनेस में कुछ उतार-चढ़ाव लगे रहेंगे। आपको अपने आसपास रह रहे लोगों को पहचानकर चलने की आवश्यकता है। परिवार में बड़े बुजुर्गों का आपको पूरा सहयोग मिलेगा। प्रेम जीवन जी रहे लोगों की अपने साथी से मुलाकात होगी, जिससे वह फूले नहीं समाएंगे। बिजनेस को लेकर आप कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं।
मिथुन (Gemini)
स्वभाव: जिज्ञासु
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: गुलाबी
आज का दिन आपके लिए किसी वाद-विवाद से दूर रहने के लिए रहेगा। आपका किसी करीबी से वाद-विवाद खड़ा हो सकता है। कार्यक्षेत्र में आपको महिला मित्र से सावधानी बरतनी होगी। किसी सामाजिक आयोजन में आप बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे। आपके कामों से आपकी छवि और निखरेगी। वाहनों के प्रयोग आप सावधान रहकर करें, क्योंकि कोई दुर्घटना होने की संभावना है। आप किसी से उधार का लेनदेन ना करें, नहीं तो आपकी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
कर्क (Cancer)
स्वभाव: भावुक
राशि स्वामी: चंद्र
शुभ रंग: सफेद
आज का दिन आपके लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में आपको कोई बड़ा टास्क मिलेगा, जिसे आप आसानी से पूरा करेंगे। आप अपने कामों से लोगों का दिल जीतेंगे। आपकी किसी बात को लेकर परिवार के सदस्यों में नोंक झोंक होने की संभावना है। आपकी कोई मन की इच्छा पूरी हो सकती है। संतान को तरक्की करते देख आपकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। विद्यार्थियों को बौद्धिक और मानसिक बोझ से छुटकारा मिलेगा।
सिंह राशि (Leo)
स्वभाव: आत्मविश्वासी
राशि स्वामी: सूर्य
शुभ रंग: आसमानी
आज का दिन आपके लिए सेहत के मामले में ठीक-ठाक रहने वाला है। धन को लेकर आपको थोड़ा सावधानी बरतनी होगी। यदि आप किसी यात्रा पर जाने की तैयारी कर रहे थे, तो उसे कुछ समय के लिए स्थगित कर दें। आपको अपनी किसी पुराने मित्र से लंबे समय बाद मिलकर खुशी होगी। जीवनसाथी की भावनाओं का आपको सम्मान करना होगा, जो जातक सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे हैं ,उन्हें कोई कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती हैं ।
कन्या (Virgo)
स्वभाव: मेहनती
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: पीला
आज का दिन आपके लिए कड़ी मेहनत से काम करने के लिए रहेगा। नौकरी में मन मुताबिक काम मिलने से आपकी खुशी का ठिकाना नहीं लगेगा। आर्थिक मामलों को लेकर आपको थोड़ा ध्यान देने की आवश्यकता है। आपको अपनी शारीरिक समस्याओं को लेकर थोड़ा एतियात बरतनी होगी। कुछ नया करने की इच्छा आपकी जागृत हो सकती है। राजनीति की ओर प्रयास कर रहे लोगों को थोड़ा समझदारी दिखाने की आवश्यकता है।
तुला (Libra)
स्वभाव: संतुलित
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: गुलाबी
आज का दिन आपके लिए आत्मविश्वास से भरपूर रहने वाला है। करियर में आपको कोई अच्छी सफलता हासिल होगी। बैंकिंग क्षेत्रों में कार्यरत लोगों को अच्छा इन्वेस्टमेंट करने का मौका मिलेगा। आप उन्नति के राह पर आगे बढ़ेंगे। आपको किसी बड़े लक्ष्य को पकड़कर चलना होगा। पारिवारिक मामलों को आप मिल बैठकर निपटाएं, तो आपके लिए बेहतर रहेगा। आप अपने कामों से लोगों को खुश रहेंगे। वैवाहिक जीवन में चल रही समस्याएं दूर होगी।
वृश्चिक (Scorpio)
स्वभाव: रहस्यमय
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: सफेद
आज का दिन आपके लिए तनावग्रस्त रहने वाला है। खर्चों के कारण आपकी जीवनसाथी से कहासुनी हो सकती है। आपको खर्चों को कंट्रोल करना होगा, नहीं तो भविष्य में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। आपको किसी निवेश को समझदारी से करना होगा। जीवनसाथी के साथ यदि रिश्तों में कुछ खटास आ गई थी, तो वह भी दूर होगी। नौकरी में कार्यरत लोगों को उनके अनुभव का अच्छा लाभ मिलेगा।
धनु (Sagittarius)
स्वभाव: दयालु
राशि स्वामी: गुरु
शुभ रंग: नीला
आज का दिन आपके लिए ठीक-ठाक रहने वाला है। आपको अपनी पारिवारिक मामलों को लेकर यदि कोई टेंशन है, तो आप उसे परिवार के सदस्यों से बातचीत करके निपटा लें, तो आपके लिए अच्छा रहेगा। कार्यक्षेत्र में बॉस से आप कोई बात सोच समझकर बोले। आपका यदि कोई काम धन को लेकर रुका हुआ था, तो उसे भी आप पूरा करने की पूरी कोशिश करेंगे। परिवार में किसी सदस्य के विवाह में आ रही बाधाएं भी दूर होंगी।
मकर (Capricorn)
स्वभाव: अनुशासित
राशि स्वामी: ग्रे
शुभ रंग: गोल्डन
आज का दिन आपके लिए अपने कामों में सोच समझकर बदलाव करने के लिए रहेगा। आपका मन परेशान रहेगा। आप काम को लेकर आलस्य करेंगे, जो बाद में आपके लिए टेंशन बनेंगे। दोस्तों के साथ आप कुछ समय मौज मस्ती करने में व्यतीत करेंगे। आपने यदि किसी को धन उधार दिया था, तो वह आपको वापस मिल सकता है। यदि आप किसी दूसरी नौकरी के लिए अप्लाई करेंगे, तो वहां आपको अच्छा लाभ मिलेगा। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी।
कुंभ ( Aquarius)
स्वभाव: मानवतावादी
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: नीला
आज का दिन आपके लिए किसी जोखिम भरे काम में हाथ डालने से बचने के लिए रहेगा। आपकी किसी बात को किसी पैतृक संपत्ति संबंधित मामले में लड़ाई-झगड़ा खड़ा हो सकता है। वाहन की अकस्मात खराबी के कारण आपका खर्च बढ़ेगा। आपको अपने पिताजी से कोई बात सोच समझकर कहनी होगी। आपकी कोई पुरानी बीमारी उभरने से आप परेशान रहेंगे। आप अपने घर की मरम्मत आदि की योजना बना सकते हैं।
मीन (Pisces)
स्वभाव: संवेदनशील
राशि स्वामी: बृहस्पति
शुभ रंग: पीला
आज का दिन आपके लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा। आज आपको किसी नई नौकरी की प्राप्ति होने से आपका मन काफी खुश रहेगा। आपको अपनी चिंताओं को लेकर अपने जीवनसाथी से बातचीत करनी होगी। आप अपने माताजी से किए हुए वादे को पूरा करेंगे। आपका कोई लेनदेन से संबंधित मामला यदि आपको समस्या दे रहा था, तो वह भी दूर होगा। विद्यार्थियों को पढ़ाई-लिखाई को लेकर लापरवाही करने से बचना होगा, नहीं तो समस्याएं बढ़ेगी।

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