Vaidik Panchang 27102025 Rashifal Samadhan

🙏🏻 हर हर महादेव🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 27 अक्टूबर 2025*
🌤️ *दिन – सोमवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – हेमंत ऋतु*
🌤️ *मास – कार्तिक*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – षष्ठी पूर्ण रात्रि तक*
🌤️ *नक्षत्र – मूल दोपहर 01:27 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढा*
🌤️ *योग – अतिगण्ड सुबह 07:27  तक तत्पश्चात सुकर्मा*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 08:05 से सुबह 09:31 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:40*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:04*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – षष्ठी वृद्धि तिथि*
💥 *विशेष – षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
             🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *सूर्य षष्ठी* 🌷
🙏🏻 *कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान सूर्य की पूजा करने का विधान है। इस पर्व को सूर्य षष्ठी व्रत के रूप में मनाया जाता है। इस बार ये व्रत 28 अक्टूबर, मंगलवार को है। यह दिन सूर्य की पूजा और उससे जुड़े उपाय करने के लिए खास माना जाता है।*
➡ *घर की 8 खास जगहों पर रखें तांबे के सूर्य, हर काम में मिलेगा दोगुना फल*
👉🏻 *वास्तु पंच तत्वों पर आधारित है । ये पंच तत्व है अग्नि, वायु, पानी, पृथ्वी व आकाश । सूर्य भी अग्नि का ही स्वरूप माना गया है । सूर्य भी वास्तु शास्त्र को प्रभावित करता है । अगर वास्तु अनुसार घर की इन 8 जगहों पर तांबे के सूर्य को दीवार पर लगाया जाएं तो हर इच्छा पूरी की जा सकती है ।*
1⃣ *रात 12 से 3 बजे तक सूर्य पृथ्वी के उत्तरी भाग में होता है । उत्तर धन की दिशा होती है । अगर धन की कमी हो तो घर में जहां कीमती वस्तुओं या जेवरात आदि रखें हो, वहां तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से घर में कभी पैसों की कमी नहीं होती ।*
2⃣ *रात 3 से सुबह 6 बजे तक सूर्य पृथ्वी के उत्तर-पूर्वी भाग में होता है । यह समय चिंतन व अध्ययन का होता है । बच्चे पढ़ाई में कमजोर हो तो स्टडी रुम या बच्चों के कमरे में सूर्य प्रतिमा लगाने से पढ़ाई में सफलता मिलती है ।*
3⃣ *सुबह 6 से 9 बजे तक सूर्य पृथ्वी के पूर्वी हिस्से में रहता है । इस समय सूर्य की रोशनी रोगों से बचाती है । घर में अगर बीमारियाँ ज्यादा हो तो हाॅल में सूर्य प्रतिमा लगानी चाहिए, जहां घर के सभी सदस्य ज्यादा से ज्यादा समय बिताते हों ।*
4⃣ *सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक सूर्य पृथ्वी के दक्षिण-पूर्व में होता है । यह समय भोजन पकाने के लिए उत्तम होता है । इसलिए घर के किचन में तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती ।*
5⃣ *दोपहर 12 से 3 बजे के दौरान सूर्य दक्षिण में होता है, इसे विश्रांति काल (आराम का समय) मानते है । अगर घर में अशांति या झगड़े का माहौल रहता है तो घर के मुखिया के बेडरूम में सूर्य प्रतिमा लगाने से कोई परेशानी नहीं आती ।*
6⃣ *दोपहर 3 से शाम 6 के दौरान सूर्य दक्षिण-पश्चिम भाग में होता है। यह समय अध्ययन और कार्य का समय होता है । व्यापार में नुकसान हो रहा हो तो ऑफिस या दुकान में सूर्य प्रतिमा लगाने पर बिजनेस में लगातार तरक्की होती है ।*
7⃣ *शाम 6 से रात 9 में सूर्य पश्चिम दिशा की ओर आता है । इस समय में देव पूजा और ध्यान के लिए अच्छा मानते है । इसलिए घर के मंदिर में तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से घर-परिवार पर सूर्य देव की कृपा बनी रहती है ।*
8⃣ *रात 9 से मध्य रात्रि के समय सूर्य उत्तर-पश्चिम में होता है । घर के बेडरूम में तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने पर वहां रहने और सोने वालों को मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।*
       🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

*शिवजी को कैसे मिले नाग, डमरु, त्रिशूल, त्रिपुंड और नंदी ?*


*🚩 शिव जी का त्रिशूल🔱*

भगवान शिव का ध्यान करने मात्र से मन में जो एक छवि उभरती है वो एक वैरागी पुरुष की। इनके एक हाथ में त्रिशूल, दू सरे हाथ में डमरु, गले में सर्प माला, सिर पर त्रिपुंड चंदन लगा हुआ है। माथे पर अर्धचन्द्र और सिर पर जटाजूट जिससे गंगा की धारा बह रही है। थोड़ा ध्यान गहरा होने पर इनके साथ इनका वाहन नंदी भी नजर आता है। कहने का मतलब है कि शिव के साथ ये 7 चीजें जुड़ी हुई हैं।

आप दुनिया में कहीं भी चले जाइये आपको शिवालय में शिव के साथ ये 7 चीजें जरुर दिखेगी। आइये जानें कि शिव के साथ इनका संबंध कैसे बना यानी यह शिव जी से कैसे जुड़े। क्या यह शिव के साथ ही प्रकट हुए थे या अलग-अलग घटनाओं के साथ यह शिव से जुड़ते गए।

भगवान शिव सर्वश्रेष्ठ सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों के ज्ञाता हैं लेकिन पौराणिक कथाओं में इनके दो प्रमुख अस्त्रों का जिक्र आता है एक धनुष और दूसरा त्रिशूल।

त्रिपुरासुर का वध और अर्जुन का मान भंग, यह दो ऐसी घटनाएं हैं जहां शिव जी ने अपनी धनुर्विद्या का प्रदर्शन किया था। जबकि त्रिशूल का प्रयोग शिव जी ने कई बार किया है।

त्रिशूल से शिव जी ने शंखचूर का वध किया था। इसी से गणेश जी का सिर काटा था और वाराह अवतार में मोह के जाल में फंसे विष्णु जी का मोह भंग कर बैकुण्ठ जाने के लिए विवश किया था।

भगवान शिव के धनुष के बारे में तो यह कथा है कि इसका आविष्कार स्वयं शिव जी ने किया था। लेकिन त्रिशूल कैसे इनके पास आया इस विषय में कोई कथा नहीं है।

माना जाता है कि सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मनाद से जब शिव प्रकट हुए तो साथ ही रज, तम, सत यह तीनों गुण भी प्रकट हुए। यही तीनों गुण शिव जी के तीन शूल यानी त्रिशूल बने।

इनके बीच सांमजस्य बनाए बगैर सृष्टि का संचालन कठिन था। इसलिए शिव ने त्रिशूल रूप में इन तीनों गुणों को अपने हाथों में धारण किया।

*🚩 शिव जी का डमरू.🪘*

भगवान शिव जी को संहारकर्ता के रूप में वेदों और पुराणों में बताया गया है। जबकि शिव का नटराज रूप ठीक इसके विपरीत है। यह प्रसन्न होते हैं और नृत्य करते हैं। इस समय शिव के हाथों में एक वाद्ययंत्र होता है जिसे डमरू करते हैं।

इसका आकार रेत घड़ी जैसा है जो दिन रात और समय के संतुलन का प्रतीक है। शिव भी इसी तरह के हैं। इनका एक स्वरूप वैरागी का है तो दूसरा भोगी का है जो नृत्य करता है परिवार के साथ जीता है।

इसलिए शिव के लिए डमरू ही सबसे उचित वाद्य यंत्र है। यह भी माना जाता है कि ‌जिस तरह शिव आदि देव हैं उसी प्रकार डमरू भी आदि वाद्ययंत्र है।

भगवन शिव के हाथों में डमरू आने की कहानी बड़ी ही रोचक है। सृष्टि के आरंभ में जब देवी सरस्वती प्रकट हुई तब देवी ने अपनी वीणा के स्वर से सष्टि में ध्वनि जो जन्म दिया। लेकिन यह ध्वनि सुर और संगीत विहीन थी।

उस समय भगवान शिव ने नृत्य करते हुए चौदह बार डमरू बजाए और इस ध्वनि से व्याकरण और संगीत के धन्द, ताल का जन्म हुआ। कहते हैं कि डमरू ब्रह्म का स्वरूप है जो दूर से विस्तृत नजर आता है लेकिन जैसे-जैसे ब्रह्म के करीब पहुंचते हैं वह संकुचित हो दूसरे सिरे से मिल जाता है और फिर विशालता की ओर बढ़ता है। सृष्टि में संतुलन के लिए इसे भी भगवान शिव अपने साथ लेकर प्रकट हुए थे।

*🚩 शिव के गले में विषधर नाग🐍*

भगवान शिव के साथ हमेशा नाग होता है। इस नाग का नाम है वासुकी। इस नाग के बारे में पुराणों में बताया गया है कि यह नागों के राजा हैं और नागलोक पर इनका शासन है। सागर मंथन के समय इन्होंने रस्सी का काम किया था जिससे सागर को मथा गया था।

कहते हैं कि वासुकी नाग शिव के परम भक्त थे। इनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी ने इन्हें नागलोक का राजा बना दिया और साथ ही अपने गले में आभूषण की भांति लिपटे रहने का वरदान दिया।

*🚩 नंदी ऐसे बने शिव के वाहन🐂*

नंदी के बारे में पुराणों में जो कथा मिलती है उसके अनुसार नंदी और शिव वास्तव में एक ही हैं। शिव ने ही नंदी रूप में जन्म लिया था। कथा है कि शिलाद नाम के ऋषि मोह माया से मुक्त होकर तपस्या में लीन हो गए।

इससे इनके पूर्वज और पितरों को चिंता हुई कि इनका वंश समाप्त हो जाएगा। पितरों की सलाह पर शिलाद ने शिव जी की तपस्या करके एक अमर पुत्र को प्राप्त किया जो नंदी नाम से जाना गया।

शिव का अंश होने के कारण नंदी शिव के करीब रहना चाहता था। शिव जी की तपस्या से नंदी शिव के गणों में प्रमुख हुए और वृषभ रूप में शिव का वहन बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।

*🚩 शिव के सिर पर चन्द्र कैसे पहुंचे🌙*

शिव पुराण के अनुसार चन्द्रमा का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से हुआ था। यह कन्याएं 27 नक्षत्र हैं। इनमें चन्द्रमा रोहिणी से विशेष स्नेह करते थे। इसकी शिकायत जब अन्य कन्याओं ने दक्ष से की तो दक्ष ने चन्द्रमा को क्षय होने का शाप दे दिया।

इस शाप बचने के लिए चन्द्रमा ने भगवान शिव की तपस्या की। चन्द्रमा की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने चन्द्रमा के प्राण बचाए और उन्हें अपने शीश पर स्थान दिया।

जहां चन्द्रमा ने तपस्या की थी वह स्थान सोमनाथ कहलाता है। मान्यता है कि दक्ष के शाप से ही चन्द्रमा घटता बढ़ता रहता है।

*🚩 शिव के माथे पर त्रिपुंड इस तरह आया*

भगवान शिव के माथे पर भभूत (राख) से बनी तीन रेखाएं हैं। माना जाता है कि यह तीनों लोको का प्रतीक है। इसे रज, तम और सत गुणों का भी प्रतीक माना जाता है। लेकिन शिव के माथे पर भभूत की यह तीन रेखाएं कैसे आयी इसकी बड़ी रोचक कथा है।

पुराणों के अनुसार दक्ष प्रजपति के यज्ञ कुंड में सती के आत्मदाह करने के बाद भगवान शिव उग्र रूप धारण कर लेते हैं और सती के देह को कंधे पर लेकर त्रिलोक में हहाकार मचाने लगते हैं। अंत में विष्णु चक्र से सती के देह को खंडित कर देते हैं। इसके बाद भगवान शिव अपने माथे पर हवन कुंड की राख मलते और इस तरह सती की याद को त्रिपुंड रूप में माथे पर स्थान देते हैं।

*🚩 इस तरह शिव की जटा में समाई गंगा 🌊*

भगवान शिव के माथे पर गंगा के विराजमान होने की घटना का संबंध राजा भगीरथ से माना जाता है। कथा है कि भगीरथ ने अपने पूर्वज सगर के पुत्रों को मुक्ति दिलाने के लिए गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर उतारा था। लेकिन इस कथा के पीछे कई कथाएं हैं जिनसे भगीरथ का प्रयास सफल हुआ।

कथा है कि ब्रह्मा की पुत्री गंगा बड़ी मनमौजी थी एक दिन दुर्वासा ऋषि जब नदी में स्नान करने आए तो हवा से उनका वस्त्र उड़ गया और तभी गंगा हंस पड़ी। क्रोधी दुर्वासा ने गंगा को शाप दे दिया कि तुम धरती पर जाओगी और पापी तुम में अपना पाप धोएंगे।

इस घटना के बाद भगीरथ का तप शुरू हुआ और भगवान शिव ने भगीरथ को वरदान देते हुए गंगा को स्वर्ग से धरती पर आने के लिए कहा। लेकिन गंगा के वेग से पृथ्वी की रक्षा के लिए शिव जी ने उन्हें अपनी जटाओं में बांधना पड़ा। कथा यह भी है कि गंगा शिव के करीब रहना चाहती थी इसलिए धरती पर उतरने से पहले प्रचंड रूप धारण कर लिया। इस स्थिति को संभालने के लिए शिव जी ने गंगा को अपनी जटाओं में स्थान दिया।
🙏🌹🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🌷🙏🌹

जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष 🌹
आपका जन्मदिन: 27 अक्टूबर
अंक ज्योतिष का सबसे आखरी मूलांक है नौ। आप बेहद साहसी हैं। आपके स्वभाव में एक विशेष प्रकार की तीव्रता पाई जाती है। आप सही मायनों में उत्साह और साहस के प्रतीक हैं। मंगल ग्रहों में सेनापति माना जाता है। अत: आप में स्वाभाविक रूप से नेतृत्त्व की क्षमता पाई जाती है। लेकिन आपको बुद्धिमान नहीं माना जा सकता। आपके जन्मदिन की संख्या आपस में जुड़ कर नौ होती है। यह मूलांक भूमि पुत्र मंगल के अधिकार में रहता है। मंगल के मूलांक वाले चालाक और चंचल भी होते हैं। आपको लड़ाई-झगड़ों में भी विशेष आनन्द आता है। आपको विचित्र साहसिक व्यक्ति कहा जा सकता है।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 9, 18, 27
शुभ अंक : 1, 2, 5, 9, 27, 72
शुभ वर्ष :  2036, 2045
ईष्टदेव : हनुमान जी, मां दुर्गा।
शुभ रंग : लाल, केसरिया, पीला
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
करियर: अधिकार क्षेत्र में वृद्धि संभव है। नौकरी में आ रही बाधा दूर होगी। महत्वपूर्ण कार्य योजनाओं में सफलता मिलेगी। राजनैतिक व्यक्ति सफलता का स्वाद चख सकते हैं।
सेहत: स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा।
परियार: मित्रों स्वजनों का सहयोग मिलने से प्रसन्नता रहेगी। आप अपनी शक्ति का सदुपयोग कर प्रगति की और अग्रसर होंगे। पारिवारिक विवाद सुलझेंगे।

मेष (Aries)
स्वभाव: उत्साही
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: हरा
आज का दिन आपके लिए सेहत पर थोड़ा ध्यान देने के लिए रहेगा और आप अपने घर किसी धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन कर सकते हैं। बिजनेस की कोई डील लंबे समय से आपकी हुई थी, तो उसके भी फाइनल होने की संभावना है और आपकी कार्यक्षेत्र में कोई झूठा आरोप लगाने की कोशिश कर सकता है यदि ऐसा हो, तो आप अपनी बात लोगों के सामने अवश्य रखें और किसी से मांगकर वाहन चलाने से बचें।
वृषभ (Taurus)
स्वभाव:  धैर्यवान
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: नीला
आज आपको कोई निर्णय जल्दबाजी में या भावनाओं में बेहतर लेने से बचना होगा। आप अपने कामों में थोड़ा समझदारी व बुद्धि का प्रयोग करके ही आगे बढ़ें, तो आपके लिए बेहतर रहेगा। आपको कोई बहलाने फुसलाने की कोशिश करेगा। आप अनजान लोगों से दूरी बनाकर रखें और किसी से कोई जरूरी जानकारी शेयर ना करें। आपकी कोई मन की इच्छा पूरी हो सकती है। परिवार में किसी मांगलिक कार्यक्रम की तैयारी होने से आपका मन काफी खुश रहेगा।
मिथुन (Gemini)
स्वभाव:  जिज्ञासु
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: लाल
आज का दिन सामाजिक क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के लिए बढ़िया रहने वाला है। आपका मान-सम्मान बढ़ने से आपका मन काफी खुश रहेगा। आपके सुख-साधनों में वृद्धि होगी। आप किसी मनोरंजन के कार्यक्रम में भी सम्मिलित हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपके बिजनेस में कोई योजना आपकी टेंशनों को बढ़ाएगी, जिसको लेकर आप किसी एक्सपर्ट से राय अवश्य लें। वाहनों का प्रयोग आप थोड़ा सावधान रहकर करें।
कर्क (Cancer)
स्वभाव:  भावुक
राशि स्वामी: चंद्र
शुभ रंग: सफेद
आज का दिन आपके लिए लाभदायक रहने वाला है। आपको बिजनेस में भी छुटपुट लाभ के अवसरों पर पूरा ध्यान देना होगा। यदि आपका ध्यान कहीं फंसा हुआ था, तो वह आपको वापस मिल सकता है। विद्यार्थी किसी सरकारी नौकरी से संबंधित प्रतियोगिता की तैयारी करने में जुटे रहेंगे। आपके जीवनसाथी आपसे किसी बात को लेकर नाराज हो सकते है। आपको उन्हे मनाने की पूरी कोशिश करनी होगी। शेयर मार्केट से जुड़े लोगों के लिए दिन अच्छा रहेगा।
सिंह राशि (Leo)
स्वभाव:  आत्मविश्वासी
राशि स्वामी: सूर्य
शुभ रंग: पीला
आज का दिन नौकरी में कार्यरत लोगों के लिए बढ़िया रहने वाला है, उनका प्रमोशन होने से उनका मन काफी खुश रहेगा। आपको कोई दूसरी नौकरी का ऑफर भी आ सकता है। आपका कोई शुभचिंतक आज आपसे किसी बात को लेकर बातचीत कर सकता है, लेकिन परिवार के सदस्यों को आप कहीं घूमाने फिराने लेकर जा सकते हैं। आपकी अपनी किसी मित्र से लंबे समय बाद मुलाकात होगी, जिससे कुछ पुरानी यादें ताजा होगी।
कन्या (Virgo)
स्वभाव:  मेहनती
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: गोल्डन
आज का दिन आपके लिए मिला-जुला रहने वाला है। परिवार के सदस्यों का आपको पूरा सहयोग मिलेगा। आपको कुछ विशेष व्यक्तियों से मिलने का मौका मिलेगा।  आपकी कला व कौशल में निखार आएगा।  आपका कोई निर्णय आपको समझदारी से लेना होगा। आप किसी दूसरे की बातों में आकर किसी  ऐसी बात ना बोले, जो की लड़ाई झगड़े की वजह बने। माता-पिता के आशीर्वाद से आपका कोई रोका हुआ काम पूरा होगा।
तुला (Libra)
स्वभाव:  संतुलित
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: हरा
आज आपके कुछ नए विरोधी उत्पन्न हो सकते हैं। सामाजिक कार्यों में आप कोई भी काम थोड़ा समझदारी दिखाते हुए करें, क्योंकि आपके शत्रु आपकी छवि खराब करने की कोशिश कर सकते हैं। आप अपनी बचत पर भी पूरा ध्यान देंगे और संतान को आप कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकते हैं। आप अपने किसी पेंडिंग काम को भी समय से करने की कोशिश करें। किसी पुरानी गलती से आपको सबक लेना होगा।
वृश्चिक (Scorpio)
स्वभाव:  रहस्यमय
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: नीला
आज का दिन आपके लिए मिश्रित रूप से फलदायक रहने वाला है। आपके सामने  कुछ खर्च ऐसे आएंगे, जो मजबूरी में ना चाहते हुए भी करने पड़ेंगे। परिवार के सदस्यों में किसी बात को लेकर वाद विवाद हो, तो आपस उसमें चुप रहने की कोशिश करें। आपको किसी पुरानी गलती से सबक लेना होगा।  आप किसी लंबी दूरी की यात्रा पर जाने की प्लानिंग कर सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपको किसी उपहार के मिलने की संभावना है।
धनु (Sagittarius)
स्वभाव:  दयालु
राशि स्वामी: गुरु
शुभ रंग: लाल
आज का दिन आपके लिए बढ़िया रहने वाला है। आपका कोई महत्वपूर्ण काम पूरा हो सकता है। आपको किसी काम को लेकर कहीं बाहर जाना पड़ सकता है, जिसके लिए यात्राएं भी अधिक होगी। आपको कोई पेट संबंधित समस्या थी, तो आपको अपने खाने-पीने पर ज्यादा ध्यान देना होगा। आपके उस धन के फंसने  की संभावना है और आप अपने घर परिवार में जिम्मेदारियां को लेकर थोड़ा सतर्क रहे। धार्मिक कार्यों में आप बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे।
मकर (Capricorn)
स्वभाव:  अनुशासित
राशि स्वामी: ग्रे
शुभ रंग: लाल
आज का दिन आपके लिए मिलाजुला रहने वाला है। आपको कुछ विशेष व्यक्तियों से मिलने का मौका मिलेगा। आप किसी की कही सुनी बातों पर भरोसा ना करें, नहीं तो बेवजह का लड़ाई झगड़ा होने की संभावना है। जीवनसाथी के लिए आप कोई सरप्राइज गिफ्ट लेकर आ सकते हैं। दान पुण्य के कार्यों में भी आपकी काफी रुचि रहेगी और आप किसी बात को लेकर घबराएंगे नहीं, वाहन की अकस्मात खराबी के कारण आपका धन खर्च बढ़ सकता है, जिस पर आप थोड़ा ध्यान अवश्य दें।
कुंभ ( Aquarius)
स्वभाव:  मानवतावादी
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: पीला
आज का दिन आपके लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा। करियर में आपका अच्छा उछाल देखने को मिलेगा। आपका बिजनेस भी पहले से बेहतर रहेगा, जो आपको खुशी देगा, क्योंकि आपकी कोई मन की इच्छा पूरी हो सकती है। संतान के विवाह में आ रही बाधा भी दूर होगी। आप दिल से लोगों का भला सोचेंगे, जिससे आपके मन को भी सुकून मिलेगा। यदि आपने कोई प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बनाया था, तो  उसके लिए आज का दिन बेहतर रहेगा।
मीन (Pisces)
स्वभाव: संवेदनशील
राशि स्वामी: बृहस्पति
शुभ रंग: हरा
आज का दिन आपके लिए खुशनुमा रहने वाला है। आप अपने परिवार के सदस्यों के साथ कुछ समय बातचीत करने में व्यतीत करेंगे, जिससे पुराने गिले शिकवे भी दूर होंगे और कारोबार में भी आपको अच्छी सफलता मिलेगी। आपकी कोई बड़ी दिल फाइनल हो सकती है, जो आपकी इन्कम को भी बढ़ाएगी। परिवार में किसी नए मेहमान का आगमन होने से माहौल खुशनुमा रहेगा। आपकी कुछ नई कोशिश रंग लाएगी। आपको कोई ऐसी खुशखबरी सुनने को मिल सकती है, जिसकी आप लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे।

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Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton