Vaidik Panchang 16102025 Rashifal Samadhan

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 16 अक्टूबर 2025*
🌤️ *दिन – गुरूवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शरद ऋतु*
🌤️ *मास – कार्तिक (गुजरात-महाराष्ट्र आश्विन*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – दशमी  सुबह 10:35 तक तत्पश्चात एकादशी*
🌤️ *नक्षत्र – अश्लेशा दोपहर 12:42 तक तत्पश्चात मघा*
🌤️ *योग – शुभ 17 अक्टूबर रात्रि 02:11 तक तत्पश्चात शुक्ल*
🌤️ *राहुकाल – दोपहर 01:51 से शाम 03:19*
🌤️ *सूर्योदय – 06:35*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:12*
👉 *दिशाशूल – दक्षिण दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण -*
💥 *विशेष -*
          🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
🌷 *संक्रांति* 🌷
➡ *17 अक्टूबर 2025 शुक्रवार को संक्रांति (पुण्यकाल : सुबह 10:02 से शाम 05:46 तक)*
🙏🏻 *इसमें किया गया जप, ध्यान, दान व पुण्यकर्म अक्षय होता है ।*
          🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
🌷 *एकादशी व्रत के लाभ* 🌷
➡️ *16 अक्टूबर 2025 गुरूवार को सुबह 10:35 से 17 अक्टूबर, शुक्रवार को सुबह 11:12 तक एकादशी है।*
💥 *विशेष – 17 अक्टूबर, शुक्रवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे।*
🙏🏻 *जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
🙏🏻 *जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
🙏🏻 *एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं । इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
🙏🏻 *धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।*
🙏🏻 *कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।*
🙏🏻 *परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है । पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ । भगवान शिवजी  ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।*
        🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *एकादशी के दिन करने योग्य* 🌷
🙏🏻 *एकादशी को दिया जला के विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें
विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l*
🙏🏻
         🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *एकादशी के दिन ये सावधानी रहे* 🌷
🙏🏻 *महीने में १५-१५ दिन में  एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो  चावल खाता है… तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है…🙏🏻
          🕉️ *~ वैदिक पंचाग ~* 🕉️

*गीता का दर्शन शाश्त्र  (402)*
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(अध्‍याय-11)

*साधना के चार चरण*

एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक डेलाबार प्रयोगशाला में, आक्सफोर्ड में, फूलों के चित्र ले रहा था। और एक दिन बहुत चकित हुआ। उसने एक बहुत ही संवेदनशील नई खोजी गई फिल्म पर एक गुलाब की कली का चित्र लिया। लेकिन वह चकित हो गया। कली तो थी बाहर और चित्र आया फूल का। तो घबड़ा गया कि यह हुआ कैसे! पर उसने प्रतीक्षा की। और हैरानी तो तब उसकी बढ़ गई कि जब वह कली खिलकर फूल बनी, तो वह ठीक वही फूल थी, जिसका चित्र आ गया था।

डेलाबार प्रयोगशाला एक अनूठी प्रयोगशाला है दुनिया में। और वहां वे प्रयोग करते हैं इस बात के कि अगर फूल थोड़ी देर बाद खिलने वाला है, तो किसी गहरे सूक्ष्म तल पर अभी भी पंखुड़ियां खिल गई होंगी। तब तक, जब यह घटना घटी थी, आज से कोई दस साल पहले, तब तक वैज्ञानिकों के पास कोई व्याख्या नहीं थी कि यह फूल का फोटो कैसे आया? जो फूल अभी है नहीं, थोड़ी देर बाद होगा; अभी तो कली है, तो फूल का चित्र आने का अर्थ क्या हुआ?

लेकिन फिर रूस में एक दूसरे विचारक और वैज्ञानिक ने, जो कि फोटोग्राफी पर काम कर रहा है गहन पिछले तीस वर्षों से, उसने राज खोजा निकाला। उसने हजारों चित्र लिए हैं भविष्य के, थोड़ी देर बाद के। और उसने जो आधार खोज निकाला है, वह यह है कि जब फूल की कली खिलती है, तो खिलने के पहले— अभी फूल तो बंद है— खिलने के पहले फूल के आस—पास का जो प्रकाश—आभा है, प्रकाश—वर्तुल है, फूल की पत्तियों से जो किरणें निकल रही हैं, वे खिल जाती हैं पहले। वे रास्ता बनाती हैं पंखुड़ियों के खिलने का; वे पहले खिल जाती हैं। प्रकाश की सूक्ष्म किरणें पहले खिल जाती हैं, ताकि रास्ता बन जाए। फिर उन्हीं के आधार पर, उन्हीं प्रकाश की किरणों के आधार पर फूल की पंखुड़ियां खिलती हैं।

तो वह जो चित्र आया था धुंधला, वह उन प्रकाश की पत्तियों का था, जो असली हमारी आख में दिखाई पड़ने वाली पत्तियों के पहली खिलती हैं।

इस रूसी वैज्ञानिक का कहना है कि हम बहुत शीघ्र आदमी की मृत्यु का चित्र ले सकेंगे। क्योंकि मरने के पहले प्रकाश के जगत में उसकी मृत्यु घट जाती है। हम तो बहुत दिन से मानते हैं कि छह महीने पहले, मरने के छह महीने पहले आदमी की जो आभा है, उसका जो ऑरा है, उसका जो प्रकाशमंडल है, वह धूमिल हो जाता है। और प्रकाशमंडल की किरणें जो बाहर जा रही थीं, वे लौटकर वापस अपने में गिरने लगती हैं, जैसे पंखुड़ी बंद हो जाती है।

इस रूसी वैज्ञानिक का कहना है कि अब हम चित्र ले सकते हैं। एक और अनूठी घटना उसको खुद घटी। वह प्रयोग कर रहा था, कुछ फूलों के चित्र ले रहा था। वह चकित हुआ कि हाथ में फूल लिए हुए उसने एक चित्र लिया, तो उसके हाथ का जो चित्र आया, वह बहुत अजीब था। ऐसा कभी नहीं आया था। हाथ का उसका चित्र कई बार आया था फूल के साथ। लेकिन इस बार इस हाथ की हालत बड़ी अजीब थी, जैसे हाथ अस्तव्यस्त था। और हाथ में जो किरणें दिखाई पड़ रही थीं, वे एक—दूसरे से लड़ रही थीं। लेकिन हाथ ठीक वैसा ही था। कोई तकलीफ न थी। कोई अड़चन न थी। कोई बीमारी न थी।

तीन महीने बाद बीमार पड़ा वह और उसके हाथ में फोड़े—फुसी आए। और उसके हाथ की चमड़ी पर रोग फैल गया। तब उसने जो चित्र लिया हाथ का, तब उसे पता चला कि वह ठीक जो तीन

महीने पहले झलक मिली थी, वही झलक गहरी हो गई है। फिर उसने स्वस्थ हाथों के चित्र लिए। उनमें किरणों की झलक अलग है; हारमोनियस है। सब किरणें लयबद्ध हैं। बीमार— लय टूट जाती है।

उसका कहना है कि अगर हाथ में कोई बीमारी आ रही हो, तो तीन महीने पहले हाथ की किरणों की लय टूट जाती है। उसका कहना यह भी है कि बहुत शीघ्र हम अस्पतालों में इसकी व्यवस्था कर सकेंगे कि आदमी बीमार होने के पहले सूचित किया जा सके कि तुम फलां बीमारी से इतने महीने बाद परेशान हो जाओगे। अभी इलाज कर लो, ताकि वह बीमारी न आ सके।

भविष्य का अर्थ है कि हमें दिखाई नहीं पड़ रहा है। ऐसा समझें कि मैं एक बहुत लंबे वृक्ष के नीचे बैठा हूं आप वृक्ष के ऊपर बैठे हैं। एक बैलगाड़ी रास्ते से आती है, मुझे दिखाई नहीं पड़ रही है। रास्ता लंबा है, मुझे दिखाई नहीं पड़ रही। मेरे लिए बैलगाड़ी अभी नहीं है; भविष्य में है। आप झाडू के ऊपर बैठे हैं, आपको बैलगाड़ी दिखाई पड़ती है। आप कहते हैं, एक बैलगाड़ी रास्ते पर आ रही है। मैं कहता हूं झूठ। बैलगाड़ी रास्ते पर नहीं है। आप कहते हैं, थोड़ी देर में दिखाई पड़ेगी। तुम्हारे लिए अभी भविष्य में है, मेरे लिए वर्तमान में है, क्योंकि मुझे दूर तक दिखाई पड़ रहा है।

फिर बैलगाड़ी आती है और मैं कहता हूं आपकी भविष्यवाणी सच थी। कोई भविष्यवाणी न थी, सिर्फ दूर तक दिखाई पड़ रहा था। फिर बैलगाड़ी चलती हुई आगे निकल जाती है। थोड़ी देर बाद मुझे दिखाई नहीं पड़ती। मैं कहता हूं बैलगाड़ी फिर खो गई। आप वृक्ष के ऊपर से कहते हैं, अभी भी नहीं खोई बैलगाड़ी। अभी भी रास्ते पर है, क्योंकि मुझे दिखाई पड़ रही है।

जैसे जमीन पर बैठकर अलग दिखाई पड़ता है, वृक्ष पर बैठकर ज्यादा दिखाई पड़ता है। ठीक चेतना की भी अवस्थाएं हैं। जहां हम खड़े हैं..।

जैसे मैंने चार अवस्थाएं कहीं आपसे। पहली, जहां मैं की भीड़ है। वहां से हमें कुछ भी दिखाई नहीं पड़ता। जब तक ठीक हमारी आख के सामने न आ जाए, हमें कुछ दिखाई नहीं पड़ता। फिर एक मैं रह जाए; हमारी दृष्टि बढ़ जाती है। हम ऊंचे तल पर आ गए; भीड़ से ऊपर उठ गए। एक बड़े वृक्ष पर बैठे हुए हैं। हमें दूर तक दिखाई पड़ने लगता है। कोई चीज आती है, उसके पहले दिखाई पड़ने लगती है। फिर तीसरा और ऊंचा तल है, जहां कि मुझे पता चल गया कि मैं नहीं हूं। यह बड़ी ऊंचाई आ गई। इस ऊंचाई से वे चीजें दिखाई पड़ने लगती है, जो बहुत दूर है; कभी होंगी। फिर एक और ऊंचाई है, जहां कि मैं नहीं हूं यह भी नहीं बचा। यह आखिरी ऊंचाई है। इससे ऊपर जाने का कोई उपाय नहीं है। यहां से सब दिखाई पड़ने लगता है। ऐसी अवस्था के व्यक्ति को हमने सर्वज्ञ कहा है। इसके लिए फिर कुछ भी भविष्य नहीं रह जाता है। इसके लिए सभी कुछ वर्तमान हो जाता है।

यह जो कृष्‍ण में अर्जुन को दिखाई पड़ा योद्धाओं का समा जाना और वह घबड़ाकर पूछने लगा। कृष्ण उससे कह रहे हैं कि तू भयभीत न हो अर्जुन। मैं इन युद्ध के लिए इकट्ठे हुए वीरों का अंत करने के लिए आया हूं। मैं इस समय महाकाल हूं। उसकी ही झलक तूने देख ली, जो थोड़ी देर बाद होने वाला है। उसका प्रि—व्‍यू उसकी पूर्व—झलक तुझे दिखाई पड़ गई है।

इससे तू खड़ा हो, यश को प्राप्त कर, शत्रुओं को जीत। ये शूरवीर पहले से ही मेरे द्वारा मारे जा चुके हैं। तू यह चिंता भी मत कर कि तू इन्हें मारेगा। तू यह ध्यान भी मत रख कि तू इनके मारने का कारण है। तू कारण नहीं है, तू निमित्त है।

निमित्त और कारण में थोड़ा फर्क हमें समझ लेना चाहिए। कारण का तो अर्थ होता है, जिसके बिना घटना न घट सकेगी। निमित्त का अर्थ होता है, जिसके बिना भी घटना घट सकेगी।

आप पानी गर्म करते हैं। गर्म करना, आग कारण है। अगर आग न हो, तो फिर पानी गर्म नहीं हो सकेगा। कोई उपाय नहीं है। लेकिन जिस बर्तन में रखकर आप गर्म कर रहे हैं, वह कारण नहीं है, वह निमित्त है। इस बर्तन के न होने पर कोई दूसरा बर्तन होगा, कोई तीसरा’ बर्तन होगा। बर्तन न होगा, तो कोई और उपाय भी हो सकता है। जिस चूल्हे पर आप गर्म कर रहे हैं, यह चूल्हा न होगा, तो कुछ और होगा। कोई सिगड़ी होगी। कोई स्टोव होगा। कोई बिजली का यंत्र होगा। कोई और उपाय हो सकता है। गर्मी तो कारण है। लेकिन ये सब निमित्त हैं।

आप गर्म कर रहे हैं, यह भी निमित्त है। कोई और गर्म कर सकता है—कोई पुरुष, कोई स्त्री, कोई बच्चा, कोई का, कोई जवान। आप भी नहीं होंगे, तो कोई गर्म नहीं होगा पानी, ऐसा नहीं है। एक बात, आग चाहिए, वह कारण है। बाकी सब निमित्त है। निमित्त बदले जा सकते हैं, कारण नहीं बदला जा सकता।

कृष्य यह कह रहे हैं, कारण तो मैं हूं तू निमित्त है। अगर तू नहीं मारेगा, कोई और मारेगा। इनकी मृत्यु होने वाली है। इनकी मृत्यु आ चुकी है। इनकी मृत्यु एक अर्थ में घटित हो चुकी है। मैं इन्हें मार ही चुका हू? अर्जुन अब तू तो सिर्फ मुर्दो को मारने का काम में लगाया जा रहा है।

मुल्ला नसरुद्दीन की मुझे एक घटना याद आती है। मुल्ला नसरुद्दीन के गांव में एक योद्धा आया। और वह योद्धा काफी हाउस में बैठकर अपनी बहादुरी की बड़ी चर्चा करने लगा। और उसने कहा, आज युद्ध बड़ा घमासान था। और मैंने न मालूम कितने लोगों की गर्दनें साफ कर दीं। गिनती भी नहीं है। कितने लोगों को मैंने काटकर गिरा दिया, जैसे कोई घास काट रहा हो।

नसरुद्दीन भी बैठा था, उससे नहीं रहा गया। उसने कहा, यह कुछ भी नहीं। एक दफा मेरे जीवन में भी ऐसा मौका आया था। युद्ध में मैं भी गया था। और गिनती तो नहीं की, लेकिन फिर भी अंदाज से कहता हूं कम से कम पचास आदमियों की टांगें मैंने ऐसे काट डालीं, जैसे घास काटा हो।

उस योद्धा ने कहा, टांगें! हमने कभी सुना नहीं कि टांगें भी युद्ध में काटी जाती हैं! सिर काटने चाहिए थे। नसरुद्दीन ने कहा, सिर तो कोई पहले ही काट चुका था। वह मौका मुझे नहीं मिला। मैं तो गया तो देखा कि सिर तो कटे पड़े थे, मैंने कहा, क्यों चूकना। मैंने टांगें काट डालीं। कोई गिनती नहीं है।

यह कृष्ण अर्जुन से यही कह रहे हैं कि तू बहुत परेशान मत हो, जिनको तू मारने की सोच रहा है, उनको मैं पहले ही काट चुका हूं। टांगें ही काटने का तेरे ऊपर जिम्मा है, सिर कट चुके हैं। और ये टांगें काटने के कारण, अकारण ही तू यश को प्राप्त हो जाएगा, धन को, राज्य को। वह तेरी मुफ्त उपलब्धि होगी, सिर्फ निमित्त होने के कारण। जिन्हें तू सोचता है कि इन्हें मारने से हिंसा लगेगी, वे मर चुके हैं, वे मृत हैं। तू सिर्फ मुर्दों को आखिरी धक्का दे रहा है। जैसे ऊंट पर कोई आखिरी तिनका रखे और ऊंट बैठ जाए। बस, तू आखिरी तिनका रख रहा है। और ऊंट बैठने के ही करीब है। तू नहीं सहारा देगा, तो कोई और यह तिनका रख देगा। यह पैर काटने का काम दूसरा भी कर सकता है, क्योंकि गर्दन काटने का असली काम हो चुका है। नियति उन्हें काट चुकी है।

इसका क्या अर्थ है? इसका अर्थ है कि दुर्योधन जहां खड़ा है, उसके साथी जहां खड़े हैं, उसके मित्रों की फौज जहां खड़ी है, वे जो कुछ भी कर चुके हैं, घड़ा भर चुका है, फूटने के करीब है। तू मुफ्त ही यश का भागी हो जाएगा। तू यह मौका मत छोड़। और ध्यान रखना कि तू निमित्त ही था, इसलिए किसी अहंकार को बनाने की चेष्टा मत करना, कि मैं जीत गया, कि मैंने मार डाला।

इसमें दोहरी बातें हैं। एक तो कृष्ण यह कह रहे हैं, तू नियति को स्वीकार कर ले। जो हो रहा है, उसे हो जाने दे। और दूसरा, उससे भी महत्वपूर्ण जो बात है, वह यह कह रहे हैं कि अगर तू जीत जाएगा..। और जीत जाएगा, क्योंकि मैं तुझसे कहता हूं जीत निश्चित है। जीत हो ही गई है। तू जैसा है, उसके कारण तू जीत गया है। तू जो करेगा, उसके कारण नहीं। तू जैसा है, उसके कारण तू जीत गया है।

राम और रावण को युद्ध पर खड़े देखकर कहा जा सकता है कि राम जीत जाएंगे। जिसको जीवन की गहराइयों का पता है, जिसे सूत्र पढ़ने आते हैं, वह कह सकता है कि राम जीत जाएंगे। राम जीत ही गए हैं। क्योंकि रावण जो भी कर रहा है, वे हारने के ही उपाय हैं। बुराई हारने का उपाय है। राम कुछ भी बुरा नहीं कर रहे हैं। वे जीतते जा रहे हैं। वह जो अच्छा करना है, वह जीतने का उपाय है। तो हारने के पहले भी कहा जा सकता है कि रावण हार जाएगा।

हारने के पहले कहा जा सकता है कि दुर्योधन और उसके साथी हार जाएंगे। उन्होंने जो भी किया है, वह पाप पूर्ण है। उन्होंने जो भी किया है, वह बुरा है। सबसे बड़ी बुराई उन्होंने क्या की है? सबसे बड़ी बुराई उन्होंने यह की है कि जगत की सत्ता से अपने को तोडकर वे निरे अहंकारी हो गए हैं। उन्होंने प्रवाह से अपने को तोड़ लिया है।

ऐसा समझें। हमें दिखाई नहीं पड़ता, इसलिए समझना मुश्किल होता है। एक नदी में हम दो लकडी के छोटे—छोटे टुकड़े डाल दें। और एक टुकड़ा चेष्टा करने लगे नदी के विपरीत धारा में बहने की। करेगा नहीं, क्योंकि लकड़ी के टुकड़े इतने नासमझ नहीं होते, जितने आदमी होते हैं! मगर मान लें कि आदमियों जैसे लकड़ी के टुकड़े हैं। आदमियों की बीमारी उनको लग गई। आदमियों के साथ रहने से इनफेक्यान हो गया। और एक टुकड़ा नदी की तरफ ऊपर बहने लगा।

क्योंकि आदमी को हमेशा धारा के विपरीत बहने में मजा आता है। धारा में बहने में क्या रखा है? कोई भी बह जाता है। कुछ उलटा करो। चौगड्डे पर आप शीर्षासन लगाकर खड़े हो जाएं, भीड़ लग जाएगी। पैर पर खड़े रहें, कोई देखने नहीं आएगा! क्या, मामला क्या है? सिर के बल जो आदमी खड़ा है, उलटा कुछ कर रहा है। यह आकर्षित करता है।

आदमी उलटा करने में उत्सुक है। क्यों? क्योंकि उलटे से अहंकार सिद्ध होता है। सीधे से कोई अहंकार सिद्ध होता नहीं। अगर आप किसी को रास्ते में से चलते में से गिर रहा हो कोई, सम्हाल लें; अखबार में कोई खबर नहीं छपेगी। रास्ते में कोई चल रहा हो, धक्का देकर गिरा दें, दूसरे दिन खबर छप जाएगी। कुछ अच्छा करिए, दुनिया में किसी को पता नहीं चलेगा। कुछ बुरा करिए, फौरन पता चल जाएगा।

अखबार उठाकर देखते हैं आप! पहली लकीर से लेकर आखिरी लकीर तक, सारी लकीर उन लोगों के बाबत है, जो कुछ उलटा कर रहे हैं। कहीं कोई दंगा—फसाद हो रहा हो, कहीं कोई हड़ताल हो रही हो, कहीं कोई चोरी, कहीं डाका, कहीं कोई ट्रेन उलटाई हो, कहीं कुछ उपद्रव हुआ हो, तो अखबार में खबर बनती है।

आदमी उलटे में उत्सुक है, तो हो सकता है, लकड़ी का टुकड़ा उलटा बहे। जो टुकड़ा उलटा बहेगा, हम पहले से ही कह सकते हैं किनारे खड़े हुए कि यह हारेगा। इसमें कोई बड़ी बुद्धिमत्ता की जरूरत नहीं है। क्योंकि धारा के विपरीत लकड़ी का टुकड़ा बहने की कोशिश कर रहा है। यह हारेगा, अर्जुन! कृष्ण कह सकते हैं कि यह हारेगा।

और जो नदी की धारा के साथ बह रहा है, हम कह सकते हैं, इसको हराने का कोई उपाय नहीं है। इसको हराइएगा कैसे? इसने कभी जीतने की कोई कोशिश ही नहीं की। इसको हराइएगा कैसे? यह तो नदी की धारा में पहले से ही बह रहा है, स्वीकार करके। यह तो कहता है, धारा ही मेरा जीवन है। जहां ले जाए, जाऊंगा। कहीं और मुझे जाना नहीं है।

राम नदी की धारा में बहते हुए हैं। इसलिए पहले से ही कहा जा सकता है, वे जीतेंगे। रावण हारेगा, वह धारा के विपरीत बह रहा है।

यह कृष्ण अर्जुन से जो कह रहे हैं, यह किसी पक्षपात के कारण नहीं कि मैं तेरे पक्ष में हूं तेरा मित्र हूं इसलिए तू जीतेगा। इसका गहन कारण यह है कि कृष्ण देख सकते हैं कि अर्जुन जिस पक्ष में खड़ा है, वह धारा के अनुकूल बहता रहा है। और अर्जुन के विपरीत जो लोग खड़े हैं, वे धारा के प्रतिकूल बहते रहे हैं। उनकी हार निश्चित है। वे हारेंगे, पराजित होंगे।

इसलिए तू नाहक ही अड़चन में पड़ रहा है। और तेरी अड़चन तुझे धारा के विपरीत बहने की संभावना जुटाए दे रही है। तू है क्षत्रिय। तेरी सहज धारा, तेरा स्वधर्म यही है कि तू लड़। और लड़ने में निमित्त मात्र हो जा। तू संन्यास की बातें कर रहा है, वे उलटी बातें हैं।

अर्जुन अगर संन्यासी हो जाए, तो प्रभावित बहुत लोगों को करेगा। प्रभावशाली व्यक्ति था। लेकिन हो नहीं पाएगा संन्यासी। और अगर संन्यास लेकर बैठ भी जाए कहीं जंगल में ध्यान वगैरह करने, तो ज्यादा देर नहीं चलेगा ध्यान वगैरह उसका! एक हरिण दिखाई पड़ जाएगा और उसके हाथ धनुष—बाण खोजने लगेंगे। और एक कौआ ऊपर से बीट कर देगा, तो पत्थर उठाकर उसका वह वहीं फैसला कर देगा। वह जो उसका होना है, जो स्वधर्म है उसका, वह योद्धा है। उसमें कहीं भी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे कि वह संन्यासी हो सके।

तो कृष्‍ण उससे कह रहे हैं कि तू नदी में उलटे बहने की कोशिश कर रहा है। अगर तू सोचता है कि मैं ऐसा करूं, वैसा करूं; यह ठीक नहीं है, वह ठीक है…। कृष्‍ण उससे कह रहे हैं, तू सिर्फ बह जा, नियति के हाथ में छोड़ दे। तू निमित्त हो जा। उनकी हार निश्चित है। और विपक्ष में खड़े योद्धा मेरे मुंह में जा रहे हैं, मृत्यु में, यह निश्चित है। वे पहले ही मारे जा चुके हैं। ये द्रोणाचार्य, भीष्म पितामह, ये जयद्रथ और कर्ण, जो महाप्रतापी हैं, महावीर हैं, इनसे भी तू भय मत कर। क्योंकि जिनके साथ ये खड़े हैं, वे गलत लोग हैं। उनके साथ ये पहले ही डूब चुके।

भीष्म पितामह भले आदमी हैं। लेकिन गलत लोगों के साथ खड़े हैं। अक्सर भले आदमी कमजोर होते हैं। और अक्सर भले आदमी कई दफा चुपचाप बुराई को सह लेते हैं और बुराई के साथ खड़े हो जाते हैं। ये जो खड़े हैं बुराई के साथ, ये कितने ही भले हों, और इनके पास कितनी ही शक्ति हो, तेरी शक्ति से ये नहीं कटेंगे, विराट की शक्ति के विपरीत होने से ये कट गए हैं।

इस अर्थ को ठीक से समझ लें।

तू इन्हें नहीं मार पाएगा। अर्जुन और कर्ण में सीधा मुकाबला हो सकता था। और कुछ तय करना मुश्किल है कि कौन जीतेगा। वे एक ही मां के बेटे हैं। और कर्ण रत्तीभर भी कम नहीं है। डर तो यह है कि वह ज्यादा भी साबित हो सकता है। लेकिन हारेगा। कोई ताकत के कारण ही नहीं, हारेगा इसलिए कि विराट की शक्ति के विपरीत खड़ा है। जो विराट चाहता है, उसके विपरीत खड़ा है। विराट के विपरीत खड़ा होना खतरनाक है। फिर कभी छोटा आदमी भी हरा सकता है।

जापान में जुजुत्सु, खे की कला होती है। उसमें छोटा बच्चा भी पहलवान को हरा देता है। स्त्री भी पुरुष को हरा देती है। अभी तो पश्चिम में चूंकि स्त्रियों का आंदोलन चलता है, लिब मूवमेंट,

स्वतंत्रता का, तो सभी स्त्रियां जुजुत्सु सीख रही हैं। क्योंकि पुरुषों से अगर टक्कर लेनी पड़े, तो क्या उपाय है? क्योंकि पुरुष शरीर से तो ज्यादा ताकतवर है। इसलिए अमेरिका में नगर—नगर में जुजुत्सु के स्कूल खुलते जा रहे हैं। स्त्रियां ट्रेनिंग ले रही हैं। और थोड़े सावधान रहना, आज नहीं कल यहां भी लेंगी ही।

अगर जुजुत्सु की ट्रेनिंग ठीक से ले ली हो, तो बड़े से बड़ा ताकतवर पुरुष साधारण कमनीय स्त्री से हार जाता है। कला क्या है? कला यही है, जो कृष्‍ण कह रहे हैं।

जुजुत्सु की कला यह है कि विराट के साथ रहना। इस आदमी की फिक्र मत करना, विराट की फिक्र करना। इस आदमी से सीधे मत लड़ना। तुम तो विराट के साथ सहयोग करना। फिर यह आदमी नहीं जीत सकेगा। उसके सहयोग का पूरे का पूरा प्रशिक्षण है, पूरी साधना है कि विराट से कैसे सहयोग करना।

तो जुजुत्सु का पहला नियम है कि जुजुत्सु का साधक जब खड़ा होगा, तो वह यह नहीं कहता कि मैं लड़ रहा हूं। वह अपने को पहले समर्पित कर देता है विराट को, कि अब मैं परमात्मा को समर्पित हूं। अगर तेरी मर्जी हो, तो जो हो। फिर वह लड़ता है। फिर लड़ने में वह हमला नहीं करता। जुजुत्सु का साधक हमला नहीं करता, सिर्फ हमला सहता है। वह कहता है, तुम मुझे मारो, मैं सहूंगा, क्योंकि परमात्मा मेरे साथ है।

आप जानकर हैरान होंगे कि अगर कोई व्यक्ति बिलकुल शांत सहने को राजी हो और आप घूंसा मार दें उसको और वह जरा भी विरोध न करे, अचेतन विरोध भी न करे..,। साधना यही है। क्योंकि अगर कोई घूंसा आपको मारने आता है, तो अचेतन आप कड़े हो जाते हैं। आपने विरोध शुरू कर दिया, आपकी हड्डियां कड़ी हो जाती है। जुजुत्सु की कला कहती है कि आपकी हड्डियां अगर कड़ी हो गईं और उसने चोट मारी, तो कड़े होने की वजह से टूट जाती हैं, उसकी चोट से नहीं टूटतीं। अगर आप नर्म रहे और आपने जरा भी रेसिस्ट नहीं किया, आप सहने को राजी रहे, कि तुम घूंसा मारो, हम तुम्हारे घूंसे को पी जाएंगे, क्योंकि विराट हमारे साथ खड़ा है— उसका हाथ टूट जाएगा; हाथ में फ्रैक्चर हो जाएगा।

और यह वैज्ञानिक है। इसको आप ऐसा भी देख सकते हैं कि एक बैलगाड़ी में आप बैठे हैं और एक शराबी बैठा है। बैलगाड़ी उलट जाए, आपको फ्रैक्यर हो जाएंगे, शराबी को बिलकुल नहीं होंगे। शराबी रोज गिर रहा है सड़क पर। कम से कम इतना तो सीखो उससे! कि चोट नहीं खाता। रोज सुबह देखो, फिर ताजे हैं!

नहा— धोकर फिर चले जा रहे हैं! और रोज गिर रहे हैं, इनको चोट क्यों नहीं लगती?

शराबी अपने को अलग नहीं रखता। जब शराब पी लेता है, तो बेहोश हो गया, वह प्रकृति का हिस्सा हो गया। अब उसको कोई होश नहीं कि मैं हूं। अब वह गिरता है, तो कड़ा नहीं हो पाता। बैलगाड़ी उलट रही है, आप भी उलट रहे हैं, वह भी उलट रहा है आपके साथ। आप सम्हल गए, बचने लगे। आपका अहंकार आ गया कि मैं बचूं। और शराबी का कोई अहंकार नहीं आया, वे लुढ़क गए। जैसे ही बैलगाड़ी लुढकी, उसी के साथ लुढ़क गए। उनका कोई विरोध नहीं है, कोई प्रतिरोध नहीं है; को—आपरेशन है, सहयोग है। उनको चोट नहीं लगेगी।

छोटे बच्चे गिरते हैं, उनको चोट नहीं लगती। जैसे—जैसे बड़े होने लगते हैं, चोट लगने लगती है। जिस दिन से आपके बच्चे को चोट लगने लगे, समझना कि अहंकार निर्मित हो गया। जब तक उसको चोट नहीं लग रही, तब तक अहंकार नहीं है। वह गिरता है, तो गिरने के साथ होता है। रोकता नहीं कि अरे, मैं गिर रहा हूं। अभी कोई है नहीं, जो गिरने से रोके अपने को। वह गिर जाता है। गिरकर वह उठ जाता है। कहीं कोई चोट घटती नहीं।

यह जो कृष्‍ण का कहना है कि तू जीता ही हुआ है, वह इसीलिए कि तू उस पक्ष में है, जो बुराई के साथ नहीं है। तू विपरीत नहीं बह रहा है, तू साथ बह रहा है। और ये हारे ही हुए हैं। ये विपरीत बह रहे हैं। यह नियति तय हो गई है अर्जुन, इसलिए तू व्यर्थ चिंतित न हो, निस्संदेह तू जीतेगा; युद्ध कर।

         🕉️ *~ वैदिक पंचाग ~* 🕉️
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
आपका जन्मदिन: 16 अक्टूबर
दिनांक 16 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 7 होगा। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति अपने आप में कई विशेषता लिए होते हैं। यह अंक वरूण ग्रह से संचालित होता है। आप खुले दिल के व्यक्ति हैं। आपकी प्रवृत्ति जल की तरह होती है। जिस तरह जल अपनी राह स्वयं बना लेता है वैसे ही आप भी तमाम बाधाओं को पार कर अपनी मंजिल पाने में कामयाब होते हैं। आप पैनी नजर के होते हैं। किसी के मन की बात तुरंत समझने की आपमें दक्षता होती है।
शुभ दिनांक : 7, 16, 25
शुभ अंक : 7, 16, 25, 34
शुभ वर्ष : 2029
ईष्टदेव : भगवान शिव तथा विष्णु
शुभ रंग : सफेद, पिंक, जामुनी, मेहरून
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
करियर: आपके कार्य में तेजी का वातावरण रहेगा। अधिकारी वर्ग का सहयोग मिलेगा। नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए समय सुखकर रहेगा। आपको प्रत्येक कार्य में जुटकर ही सफलता मिलेगी।

🌹आज का राशिफल 🌹
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज के दिन स्थिति में सुधार आने से राहत अनुभव करेंगे। कुछ दिनों से चल रही शारीरिक एवं पारिवारिक समस्याओं का समाधान होने से मानसिक शांति मिलेगी। आज सामाजिक कार्य के प्रति अधिक रूचि दिखाएंगे। कला एवं खाद्य पदार्थ के क्षेत्र से जुड़े जातको के लिए आज का दिन लाभदायी सिद्ध होगा। लेकिन आज किसी के ऊपर भी आंख बंद कर भरोसा ना करें खास कर उधारी वाले मामलो में सतर्कता बरते अन्यथा हानि भी हो सकती है। मित्रो के ऊपर खर्च होगा। संतान की प्रगति के समाचार मिलेंगे।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज के दिन परिस्थितियां प्रतिकूल रहने से कोई राहत नहीं मिलेगी। मन किसी अरिष्ट के भय ये व्याकुल हो सकता है। आर्थिक पक्ष कमजोर होने से मानसिक चिंता बढ़ेगी। मध्यान पश्चात सेहत में अकस्मात गिरावट अथवा अन्य रूप से शारीरिक कष्ट हो सकता है। स्वाभाव में रूखापन एवं वाणी में कड़वाहट झगडे का कारण बनेगी। कार्य क्षेत्र पर प्रतिस्पर्धा के चलते व्यवसाय कुछ समय के लिये ही गति पकड़ेगा इसमे जितना लाभ उठा सकते है उठायें। मध्यान का समय करामात खर्चीला भी रहेगा। आज अनैतिक कार्यो में ना पड़े।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आर्थिक दृष्टिकोण से आज का दिन आकस्मिक फायदे कराने वाला रहेगा। आज आप किसी से अधिक व्यवहार करना पसंद नहीं करेंगे इससे कई समस्याओं से भी बचे रहेंगे। सामाजिक क्षेत्र पर भी आज आपके योगदान की प्रशंसा होगी। समाज के वरिष्ठ जनो के साथ नविन संपर्क बनेंगे। स्त्री-पुत्र अथवा बाहरी किसी महिला से लाभदायक समाचार मिल सकते है। विपरीत लिंगीय आकर्षण आज कम रहेगा। परिवार में संध्या बाद का समय थोड़ा खींचतान वाला फिर भी सुखद रहेगा। सेहत आज ठीक रहेगी।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आप का आज का दिन मिश्रित फलदायी है। दिन के पूर्वार्ध में सेहत में गिरावट रहने से बेचैनी बढ़ेगी। बीमारी पर आकस्मिक खर्च होगा। भाई-बंधुओ के बीच मामूली सी बात पर मनमुटाव हो सकता है। अपनी वाणी एवं व्यवहार में सावधानी बरतें। जमीन-जायदाद सम्बंधित कार्यो को फिलहाल स्थगित करें। मध्याह्न के बाद का समय अपेक्षकृत बेहतर रहेगा कार्य क्षेत्र अथवा अन्य साधनों से धन या कीमती वस्तुओ का लाभ होगा। लेकिन आज अनचाही यात्रा से थकान बढ़ेगी। धन की उधारी आज ना करें।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज के दिन आपका मन अनिर्णय की स्थिति में रहेगा मानसिक स्थिति पल पल में बदलने के कारण दिनचर्या में विलंब होगा। दिन के पूर्वार्ध में प्रत्येक कार्य सोच विचार कर करें। नए कार्य का आरम्भ आज करना उचित नहीं। आज किये अधिकांश कार्य अधूरे रहेंगे। स्वभाव की मनमानी के चलते परिवार के बुजुर्गो अथवा कार्य क्षेत्र में आधिकारियो के साथ मनमुटाव हो सकता है। क्रोध एवं वाणी में संयम रखकर आज का दिन शांति से बिताना ही हितकर रहेगा। सेहत भी मानसिक स्थिति की तरह नरम गरम बनी रहेगी।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन विषम परिस्थितियों वाला रहेगा। आज मन में भावुकता एवं क्रोध की अधिकता रहने से छोटी-छोटी बातों को दिल से लगा लेंगे जो बातें आपके काम की नही उन्हें अनदेखा करें अन्यथा मामूली बात गंभीर विवाद का रूप ले सकती है। मध्यान पश्चात संतान और जीवनसाथी के स्वास्थ्य ख़राब हो सकता है। वाणी एवं व्यवहार संयमित रखें अन्यथा सम्मान में कमी आ सकती है। सरकारी कार्यो को संभवतः टाले निर्णय आपके विपरीत रहेंगे। धन लाभ की जगह खर्च अधिक रहेंगे। यात्रा आज ना करें।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज के दिन का पहला भाग सुख शांति से व्यतीत करेंगे। कोई रुका कार्य पूर्ण होने से धन लाभ होगा। आज के दिन आप थोड़े परिश्रम में अधिक लाभ भी कमा सकते है परंतु आलस्य एवं लापरवाही के कारण महत्त्वपूर्ण सौदे हाथ से निकलने की भी सम्भावना है। भागीदारी के कार्य की अपेक्षा एकल व्यवसाय में लाभ अधिक होगा। आस पड़ोसियों के कारण परिवार में किसी बात को लेकर व्यर्थ बहस हो सकती है। ठंडी चीजो से बचे सर्द गरम की समस्या हो सकती है।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन घर एवं बाहर के वातावरण में बदलाव लाने वाला रहेगा। दिनभर सेहत थोड़ी नरम रहने से आलस्य रहेगा फिर भी आज आप घरेलु समस्याओं के समाधान के प्रति अधिक सतर्क रहेंगे। आज वाणी एवं व्यवहार में भी कल की अपेक्षा नरमी रहेगी। कार्य क्षेत्र पर आज कुछ महत्त्वपूर्ण बदलाव कर सकते है। धन की आमद रुक रुक कर होते रहने से संतोष करेंगे। संध्या के समय मनोरंजन के अवसर तलाशेंगे। विद्यार्थियों के लिये आज का दिन कुछ परेशानी वाला हो सकता है।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन आध्यात्म एवं धार्मिक आस्था में वृद्धि करने वाला रहेगा। पुण्योदय होने से भाग्योन्नति के अवसर मिलेंगे। फिर भी आज आपके निर्णय सही दिशा ले रहे है या नहीं इसकी जांच अवश्य कर लें। धार्मिक यात्रा देव दर्शन के योग है। घर में वैवाहिक कार्यो की रूप रेखा बनेगी। कार्य व्यवसाय पर भी दिन लाभ कराने वाला रहेगा। धन की आमद सुबह से शाम तक रुक रुक कर होती रहेगी लेकिन खर्च भी आज लगे रहने से बचत मुश्किल ही कर पाएंगे। पुराने परिचितों से भेंट होने पर कुछ परेशानी होगी। सेहत और धन संबंधित मामले दोनो से आज निश्चिन्त रहेंगे।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन विपरीत फल प्रदान करने वाला है। आज दिन भर सतर्क रहने की आवश्यकता है। सेहत नरम रहने से स्वभाव मे चिढ़चिढ़ापन आएगा फलस्वरूप किसी प्रियजन से मन मुटाव के प्रसंग बनेंगे। आर्थिक कारणों से चिंता बैचेनी रहेगी। कार्य क्षेत्र पर आज अव्यवस्था बनेगी सहयोगी अथवा सहकर्मी मनमानी करेंगे फलस्वरूप लाभ भी अनिश्चित रहेगा। आकस्मिक घटनाओं से मन दुखी होगा। स्वयं अथवा किसी परिजन की सेहत पर आकस्मिक खर्च रहेगा।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज के दिन का अधिकांश समय आपके अनुकूल रहेगा। आज स्वास्थ्य भी उत्तम बना रहेगा। कार्यो के प्रति आज अधिक ईमानदार रहेंगे। व्यावसायिक अथवा नौकरी अथवा अन्य किसी सम्बन्ध में लंबी यात्रा हो सकती है विदेश यात्रा के भी योग बनरहे है। मध्यान के समय शुभ समाचार मिलने से मन में आनंद छाया रहेगा धन लाभ के लिये आज इंतजार करना पड़ेगा या अल्प लाभ से ही संतोष करना पड़ेगा। संतानों के व्यवहार से आज थोड़ी पीड़ा भी होगी।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज प्रातः काल से ही किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के कारण भाग-दौड़ रहेगी लेकिन सफलता को लेकर मन में संशय रहेगा। परिजनों से भी आज मामूली घरेलु कारणों से मतभेद होगा इसके कारण दिन भर दिमाग मे उल्टे सीधे विचार आएंगे संध्या के समय मामला सुलझने से राहत मिलेगी। संतानों के भविष्य के कारण भी चिंता रहेगी। मध्यान के बाद किसी स्त्री द्वारा अथवा सहयोग से आर्थिक अथवा अन्य लाभ की संभावना है। नौकरी पेशा जातक अधिकारी वर्ग से सतर्क रहें। आलस्य भारी पड़ सकता है।

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Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton