🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक – 14 अक्टूबर 2025*
🌤️ *दिन – मंगलवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शरद ॠतु*
🌤️ *मास – कार्तिक (गुजरात-महाराष्ट्र आश्विन*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – अष्टमी सुबह 11:09 तक तत्पश्चात नवमी*
🌤️ *नक्षत्र – पुनर्वसु सुबह 11:54 तक तत्पश्चात पुष्य*
🌤️ *योग – सिद्ध 15 अक्टूबर प्रातः 04:11 तक तत्पश्चात साध्य*
🌤️ *राहुकाल – शाम 03:20 से शाम 04:47 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:35*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:13*
👉 *दिशाशूल – उत्तर दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण –
💥 *विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है (ब्रह्मवैवर्त पुराण ब्रह्म खण्ड: 27,29,34)*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *धनतेरस के दिन दीपदान* 🌷
👉🏻 *पहले बताई विधि के अनुसार यमदीपदान करें।*
🔥 *निर्धनता दूर करने के लिए अपने पूजाघर में धनतेरस की शाम को अखंड दीपक जलाना चाहिए जो दीपावली की रात तक जरूर जलता रहे . अगर दीपक भैयादूज तक अखंड जलता रहे तो घर के सारे वास्तु दोष भी समाप्त हो जाते हैं.*
🔥 *घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। बत्ती में रुई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें साथ ही दिए में थोड़ी सी केसर भी डाल दें।*
🔥 *घर के तेल का दीपक प्रज्वलित करें तथा उसमें दो काली गुंजा डाल दें, गन्धादि से पूजन करके अपने घर के मुख्य द्वार पर अन्न की ढ़ेरी पर रख दें। साल भर आर्थिक अनुकूलता बनी रहेगी। स्मरण रहे वह दीप रातभर जलते रहना चाहिये, बुझना नहीं चाहिये ।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
कार्य में सफलता के लिए: अगर किसी काम में बाधा आ रही है, तो मंगलवार को हनुमान जी के दाहिने कंधे से सिंदूर लेकर अपने माथे पर तिलक लगाएं। यह बिगड़े काम को बनाने में मदद कर सकता है।
🌷 *दीपावली पर लक्ष्मी प्राप्ति की साधना-विधियाँ* 🌷
➡ *18 अक्टूबर 2025 शनिवार को धनतेरस है ।*
👉🏻 *धनतेरस से आरम्भ करें*
➡ *सामग्री:*
*दक्षिणावर्ती शंख, केसर, गंगाजल का पात्र,धूप , अगरबत्ती, दीपक, लाल वस्त्र l*
➡ *विधि: साधक अपने सामने गुरुदेव व लक्ष्मीजी के फोटो रखें तथा उनके सामने लाल रंग का वस्त्र बिछाकर उस पर दक्षिणावर्ती शंख रख दें l उस पर केसर से सतिया बना लें तथा कुम कुम से तिलक कर दें l*
🙏🏻 *बाद में स्फटिक की माला से निम्न मंत्र की ७ मालाएँ करें l तीन दिन तक ऐसा करने योग्य है l इतने से ही मंत्र-साधना सिद्ध हो जाती है l मंत्रजाप पूरा होने के पश्चात् लाल वस्त्र में शंख को बांधकर घर में रख दें l*
🙏🏻 *कहते हैं- जब तक वह शंख घर में रहेगा, तब तक घर में निरंतर उन्नति होती रहेगी l*
🌷 *मंत्र : ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं महालक्ष्मी धनदा लक्ष्मी कुबेराय मम गृहे स्थिरो ह्रीं ॐ नमः l*
🙏🏻 *पर्वो का पुंज दीपावली पुस्तक से*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
पंचक:
31 अक्टूबर 2025, 06:48:58 बजे से शुरू —
4 नवंबर 2025, 12:35:11 बजे तक

*रामायण में वर्णित श्रीराम जी का वनवास मार्ग…*
1. तमसा नदी : अयोध्या से 20 किमी दूर है तमसा नदी। यहां पर उन्होंने नाव से नदी पार की।
2. श्रृंगवेरपुर तीर्थ : प्रयागराज से 20-22 KM दूर वे श्रृंगवेरपुर पहुंचे, जो निषादराज गुह का राज्य था। यहीं पर गंगा के तट पर उन्होंने केवट से गंगा पार करने को कहा था। श्रृंगवेरपुर को वर्तमान में सिंगरौर कहा जाता है।
3. कुरई गांव : सिंगरौर में गंगा पार कर श्रीराम कुरई में रुके थे।
4. प्रयाग : कुरई से आगे चलकर श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सहित प्रयाग पहुंचे थे। कुछ पहले तक प्रयाग को इलाहाबाद कहा जाता था।
5. चित्रकूणट : प्रभु श्रीराम ने प्रयाग संगम के समीप यमुना नदी को पार किया और फिर पहुंच गए चित्रकूट। चित्रकूट वह स्थान है, जहां राम को मनाने के लिए भरत अपनी सेना के साथ पहुंचते हैं। तब जब दशरथ का देहांत हो जाता है। भरत यहां से राम की चरण पादुका ले जाकर उनकी चरण पादुका रखकर राज्य करते हैं।
6. सतना : चित्रकूट के पास ही सतना (मध्यप्रदेश) स्थित अत्रि ऋषि का आश्रम था। हालांकि अनुसूइया पति महर्षि अत्रि चित्रकूट के तपोवन में रहा करते थे लेकिन सतना में ‘रामवन’ नामक स्थान पर भी श्रीराम रुके थे, जहां ऋषि अत्रि का एक ओर आश्रम था।
7. दंडकारण्य : चित्रकूट से निकलकर श्रीराम घने वन में पहुंच गए। असल में यहीं था उनका वनवास। इस वन को उस काल में दंडकारण्य कहा जाता था। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर दंडकाराण्य था। दंडकारण्य में छत्तीसगढ़, ओडिशा एवं आंध्रप्रदेश राज्यों के अधिकतर हिस्से शामिल हैं। दरअसल, उड़ीसा की महानदी के इस पास से गोदावरी तक दंडकारण्य का क्षेत्र फैला हुआ था। इसी दंडकारण्य का ही हिस्सा है आंध्रप्रदेश का एक शहर भद्राचलम। गोदावरी नदी के तट पर बसा यह शहर सीता-रामचंद्र मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर भद्रगिरि पर्वत पर है। कहा जाता है कि श्रीराम ने अपने वनवास के दौरान कुछ दिन इस भद्रगिरि पर्वत पर ही बिताए थे। स्थानीय मान्यता के अनुसार दंडकारण्य के आकाश में ही रावण और जटायु का युद्ध हुआ था और जटायु के कुछ अंग दंडकारण्य में आ गिरे थे। ऐसा माना जाता है कि दुनियाभर में सिर्फ यहीं पर जटायु का एकमात्र मंदिर है।
8. पंचवटी नासिक : दण्डकारण्य में मुनियों के आश्रमों में रहने के बाद श्रीराम अगस्त्य मुनि के आश्रम गए। यह आश्रम नासिक के पंचवटी क्षेत्र में है जो गोदावरी नदी के किनारे बसा है। यहीं पर लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी। राम-लक्ष्मण ने खर व दूषण के साथ युद्ध किया था। गिद्धराज जटायु से श्रीराम की मैत्री भी यहीं हुई थी। वाल्मीकि रामायण, अरण्यकांड में पंचवटी का मनोहर वर्णन मिलता है।
9. सर्वतीर्थ : नासिक क्षेत्र में शूर्पणखा, मारीच और खर व दूषण के वध के बाद ही रावण ने सीता का हरण किया और जटायु का भी वध किया था जिसकी स्मृति नासिक से 56 किमी दूर ताकेड गांव में ‘सर्वतीर्थ’ नामक स्थान पर आज भी संरक्षित है। जटायु की मृत्यु सर्वतीर्थ नाम के स्थान पर हुई, जो नासिक जिले के इगतपुरी तहसील के ताकेड गांव में मौजूद है। इस स्थान को सर्वतीर्थ इसलिए कहा गया क्योंकि यहीं पर मरणासन्न जटायु ने सीता माता के बारे में बताया। रामजी ने यहां जटायु का अंतिम संस्कार करके पिता और जटायु का श्राद्ध-तर्पण किया था। इसी तीर्थ पर लक्ष्मण रेखा थी।
10. पर्णशाला : पर्णशाला आंध्रप्रदेश में खम्माम जिले के भद्राचलम में स्थित है। रामालय से लगभग 1 घंटे की दूरी पर स्थित पर्णशाला को ‘पनशाला’ या ‘पनसाला’ भी कहते हैं। पर्णशाला गोदावरी नदी के तट पर स्थित है। मान्यता है कि यही वह स्थान है, जहां से सीताजी का हरण हुआ था। हालांकि कुछ मानते हैं कि इस स्थान पर रावण ने अपना विमान उतारा था। इस स्थल से ही रावण ने सीता को पुष्पक विमान में बिठाया था यानी सीताजी ने धरती यहां छोड़ी थी। इसी से वास्तविक हरण का स्थल यह माना जाता है। यहां पर राम-सीता का प्राचीन मंदिर है।
11. तुंगभद्रा : सर्वतीर्थ और पर्णशाला के बाद श्रीराम-लक्ष्मण सीता की खोज में तुंगभद्रा तथा कावेरी नदियों के क्षेत्र में पहुंच गए। तुंगभद्रा एवं कावेरी नदी क्षेत्रों के अनेक स्थलों पर वे सीता की खोज में गए।
12. शबरी का आश्रम : तुंगभद्रा और कावेरी नदी को पार करते हुए राम और लक्ष्मण चले सीता की खोज में। जटायु और कबंध से मिलने के पश्चात वे ऋष्यमूक पर्वत पहुंचे। रास्ते में वे पम्पा नदी के पास शबरी आश्रम भी गए, जो आजकल केरल में स्थित है। शबरी जाति से भीलनी थीं और उनका नाम था श्रमणा। ‘पम्पा’ तुंगभद्रा नदी का पुराना नाम है। इसी नदी के किनारे पर हम्पी बसा हुआ है। पौराणिक ग्रंथ ‘रामायण’ में हम्पी का उल्लेख वानर राज्य किष्किंधा की राजधानी के तौर पर किया गया है। केरल का प्रसिद्ध ‘सबरिमलय मंदिर’ तीर्थ इसी नदी के तट पर स्थित है।
13. ऋष्यमूक पर्वत : मलय पर्वत और चंदन वनों को पार करते हुए वे ऋष्यमूक पर्वत की ओर बढ़े। यहां उन्होंने हनुमान और सुग्रीव से भेंट की। सीता के आभूषणों को देखा और श्रीराम ने बाली का वध किया। ऋष्यमूक पर्वत वाल्मीकि रामायण में वर्णित वानरों की राजधानी किष्किंधा के निकट स्थित था। ऋष्यमूक पर्वत तथा किष्किंधा नगर कर्नाटक के हम्पी, जिला बेल्लारी में स्थित है। पास की पहाड़ी को ‘मतंग पर्वत’ माना जाता है। इसी पर्वत पर मतंग ऋषि का आश्रम था जो हनुमानजी के गुरु थे।
14. कोडीकरई : हनुमान और सुग्रीव से मिलने के बाद श्रीराम ने वानर सेना का गठन किया और लंका की ओर चल पड़े। तमिलनाडु की एक लंबी तटरेखा है, जो लगभग 1,000 किमी तक विस्तारित है। कोडीकरई समुद्र तट वेलांकनी के दक्षिण में स्थित है, जो पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण में पाल्क स्ट्रेट से घिरा हुआ है। यहां श्रीराम की सेना ने पड़ाव डाला और श्रीराम ने अपनी सेना को कोडीकरई में एकत्रित कर विचार विमर्ष किया। लेकिन राम की सेना ने उस स्थान के सर्वेक्षण के बाद जाना कि यहां से समुद्र को पार नहीं किया जा सकता और यह स्थान पुल बनाने के लिए उचित भी नहीं है, तब श्रीराम की सेना ने रामेश्वरम की ओर कूच किया।
15. रामेश्वरम : रामेश्वरम समुद्र तट एक शांत समुद्र तट है और यहां का छिछला पानी तैरने और सन बेदिंग के लिए आदर्श है। रामेश्वरम प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ केंद्र है। महाकाव्य रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने के पहले यहां भगवान शिव की पूजा की थी। रामेश्वरम का शिवलिंग श्रीराम द्वारा स्थापित शिवलिंग है।
16. धनुषकोडी : वाल्मीकि के अनुसार तीन दिन की खोजबीन के बाद श्रीराम ने रामेश्वरम के आगे समुद्र में वह स्थान ढूंढ़ निकाला, जहां से आसानी से श्रीलंका पहुंचा जा सकता हो। उन्होंने नल और नील की मदद से उक्त स्थान से लंका तक का पुनर्निर्माण करने का फैसला लिया। धनुषकोडी भारत के तमिलनाडु राज्य के पूर्वी तट पर रामेश्वरम द्वीप के दक्षिणी किनारे पर स्थित एक गांव है। धनुषकोडी पंबन के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। धनुषकोडी श्रीलंका में तलैमन्नार से करीब 18 मील पश्चिम में है।
इसका नाम धनुषकोडी इसलिए है कि यहां से श्रीलंका तक वानर सेना के माध्यम से नल और नील ने जो पुल (रामसेतु) बनाया था उसका आकार मार्ग धनुष के समान ही है। इन पूरे इलाकों को मन्नार समुद्री क्षेत्र के अंतर्गत माना जाता है। धनुषकोडी ही भारत और श्रीलंका के बीच एकमात्र स्थलीय सीमा है, जहां समुद्र नदी की गहराई जितना है जिसमें कहीं-कहीं भूमि नजर आती है।
17. नुवारा एलिया’ पर्वत श्रृंखला : वाल्मीकिय-रामायण अनुसार श्रीलंका के मध्य में रावण का महल था। ‘नुवारा एलिया’ पहाड़ियों से लगभग 90 किलोमीटर दूर बांद्रवेला की तरफ मध्य लंका की ऊंची पहाड़ियों के बीचोबीच सुरंगों तथा गुफाओं के भंवरजाल मिलते हैं। यहां ऐसे कई पुरातात्विक अवशेष मिलते हैं जिनकी कार्बन डेटिंग से इनका काल निकाला गया है।
श्रीलंका में नुआरा एलिया पहाड़ियों के आसपास स्थित रावण फॉल, रावण गुफाएं, अशोक वाटिका, खंडहर हो चुके विभीषण के महल आदि की पुरातात्विक जांच से इनके रामायण काल के होने की पुष्टि होती है। आजकल भी इन स्थानों की भौगोलिक विशेषताएं, जीव, वनस्पति तथा स्मारक आदि बिलकुल वैसे ही हैं जैसे कि रामायण में वर्णित किए गए है।
*जय श्रीराम*
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
आपका जन्मदिन: 14 अक्टूबर
आप बेहद भाग्यशाली हैं कि आपका जन्म 14 को हुआ है। ऐसे व्यक्ति अधिकांशत: मितभाषी होते हैं। कवि, कलाकार, तथा अनेक विद्याओं के जानकार होते हैं। आपमें गजब की आकर्षण शक्ति होती है। आपमें लोगों को सहज अपना बना लेने का विशेष गुण होता है। 14 का अंक आपस में मिलकर 5 होता है। 5 का अंक बुध ग्रह का प्रतिनिधि करता है। अनजान व्यक्ति की मदद के लिए भी आप सदैव तैयार रहते हैं। आपमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन करना मुश्किल है। अर्थात अगर आप अच्छे स्वभाव के व्यक्ति हैं तो आपको कोई भी बुरी संगत बिगाड़ नहीं सकती। अगर आप खराब आचरण के हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सुधार नहीं सकती। लेकिन सामान्यत: 14 तारीख को पैदा हुए व्यक्ति सौम्य स्वभाव के ही होते हैं।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 1, 5, 7, 14, 23
शुभ अंक : 1, 2, 3, 5, 9, 32, 41, 50
शुभ वर्ष : 2030, 2032, 2034, 2050, 2059, 2052
ईष्टदेव : देवी महालक्ष्मी, गणेशजी, मां अम्बे।
शुभ रंग : हरा, गुलाबी जामुनी, क्रीम
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
परिवार : दाम्पत्य जीवन में मधुर वातावरण रहेगा। अविवाहित भी विवाह में बंधने को तैयार रहें। परिवारिक प्रसन्नता रहेगी। संतान पक्ष से खुशखबर आ सकती है।
करियर: यह वर्ष आपके लिए सफलताओं भरा रहेगा। नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए यह वर्ष निश्चय ही सफलताओं भरा रहेगा।
कारोबार: व्यापार-व्यवसाय में प्रगति से प्रसन्नता रहेगी। अभी तक आ रही परेशानियां भी इस वर्ष दूर होती नजर आएंगी।
मेष (Aries)
स्वभाव: उत्साही
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: लाल
आज आपके मन में काम को लेकर कुछ नए-नए आइडिया आएंगे। बिजनेस में काम को लेकर यदि आपने किसी काम को लेकर पार्टनरशिप की, तो पार्टनर आपके लिए कोई नई समस्या खड़ी कर सकते हैं। आपको लोगों की पूरी जांच पड़ताल करके ही आगे बढ़ाना बेहतर रहेगा। आप अपनी शारीरिक समस्याओं को नजरअंदाज न करें। जीवनसाथी को किसी नई नौकरी की प्राप्ति होने से आपका मन काफी खुश रहेगा।
वृषभ (Taurus)
स्वभाव: धैर्यवान
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: हरा
आज का दिन आपके लिए कुछ विशेष कर दिखाने के लिए रहेगा। आपके मौज-मस्ती की आदत आपको समस्या देगी। आपका कोई पुराना लेनदेन आपको समस्या दे सकता है। यदि आपने किसी से किए हुए वादे को लेकर लापरवाही दिखायी, तो वह आपको टेंशन देंगी। वाहन की अक्समात खराबी के कारण भी आपका खर्चा बढ़ सकता है। आप अपने कामों में कोई बदलाव सोच समझकर करें।
मिथुन (Gemini)
स्वभाव: जिज्ञासु
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: सफेद
आज आप अपने कामों को लेकर धैर्य और संयम बनाए रखने की कोशिश करें। आप किसी कानूनी मामले को लेकर थोड़ा परेशान रहेंगे, जिसके लिए आपको कुछ अनुभवी व्यक्तियों से भी बातचीत करने की आवश्यकता है। आज दिखावे के चक्कर में ना पड़ें, क्योंकि आप अपने स्टेटस को मेंटेन करने में अच्छा खासा धन खर्चा करेंगे और सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे लोगों को कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है।
कर्क (Cancer)
स्वभाव: भावुक
राशि स्वामी: चंद्र
शुभ रंग: आसमानी
आपको अपने खर्चों को लेकर योजना बनाकर चलना होगा। प्रेम जीवन जी रहे लोगों की अपने प्यार से मुलाकात होगी। आपको अपने मन में किसी के प्रति ईष्या की भावना ना रखें। बॉस आपके प्रमोशन की बात आगे कर सकते हैं। आपको परिवार में किसी सदस्य से कोई बात सोच समझकर करना होगा। आपकी सेहत में उतार-चढ़ाव रहने से आप अपने कामों को कल पर टालने की कोशिश करेंगे, जो बाद में आपके लिए टेंशन बन सकते हैं।
सिंह राशि (Leo)
स्वभाव: आत्मविश्वासी
राशि स्वामी: सूर्य
शुभ रंग: ग्रे
आज का दिन आपके लिए सेहत में उतार-चढ़ाव लेकर आएगा। आपकी अपने पिताजी से किसी बात को लेकर बहसबाजी हो सकती है। आप अपने घर के कामों में कोई बदलाव न करें और जिम्मेदारियां को लेकर आप कोई लापरवाही बिल्कुल ना दिखाएं। कार्यक्षेत्र में कोई आपको बहलाने-फुसलाने की कोशिश कर सकता है, जिससे आपके काम आसानी से पूरे होंगे। आप धार्मिक कार्यक्रम में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे।
कन्या (Virgo)
स्वभाव: मेहनती
राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: हरा
आज का दिन आपके लिए आय पर विशेष ध्यान देने के लिए रहेगा। आपको अपनी संतान की संगति पर विशेष ध्यान देना होगा। एक साथ कई काम हाथ लगने से आपकी व्याकाग्रता बढ़ सकती है। पारिवारिक मामलों को भी आप मिल बैठकर निपटाएं। आप अपने किसी काम को लेकर किसी दूसरे पर डिपेंड न रहें, नहीं तो उसे पूरा करने में समस्या अवश्य आएगी। आपकी बिजनेस को लेकर योजनाएं फलीभूत होंगी।
तुला (Libra)
स्वभाव: संतुलित
राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: पीला
आज का दिन आपके लिए किसी नए घर आदि की खरीददारी के लिए रहेगा। आप यदि किसी मित्र से धन उधार लेंगे, तो वह भी आपको आसानी से मिल जाएगा और आपको अपने परिवार में किसी सदस्य की कोई बात बुरी लगने से आपका मन परेशान रहेगा। आप अपने किसी विरोधी की बातों में ना आएं। भाई-बहनों का आपको पूरा सहयोग मिलेगा। आप दिखावे के चक्कर में पड़ेंगे जो आपके खर्चों को बढ़ाएगा।
वृश्चिक (Scorpio)
स्वभाव: रहस्यमय
राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: गुलाबी
आज का दिन आपके लिए उन्नति की राह पर आगे बढ़ने के लिए रहेगा। विद्यार्थी पढ़ाई लिखाई में जुटेंगे। आपकी कुछ नए लोगों से मुलाकात होगी और आपको किसी से कोई जरूरी जानकारी शेयर करने से बचाना है। बिजनेस को लेकर आप पार्टनरशिप को बहुत ही देखभाल करे। आपको घूमने-फिरने के दौरान कोई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। आप जिस काम में हाथ डालेंगे, उसमें आपको सफलता अवश्य मिलेगी, जो आपको खुशी देंगे।
धनु (Sagittarius)
स्वभाव: दयालु
राशि स्वामी: गुरु
शुभ रंग: ग्रे
आज का दिन आपके लिए सोच समझकर कोई काम करने के लिए रहेगा। आपको कार्यक्षेत्र में कोई बहलाने फुसलाने की कोशिश कर सकता है। भगवान की भक्ति में आपका खूब मन लगेगा। आप अपने कामों से एक नयी पहचान बनाएंगे। आपको काम को लेकर भागदौड़ भी अधिक रहेगी, लेकिन फिर भी आप अपने परिवार के सदस्यों के लिए समय निकालेंगे। माताजी से आप अपने मन की इच्छा को लेकर बातचीत कर सकते हैं।
मकर (Capricorn)
स्वभाव: अनुशासित
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: लाल
आज का दिन आपके लिए मौज मस्ती भरा रहने वाला है। आपके चारों ओर का माहौल खुशनुमा रहेगा और आप छोटे बच्चों को लेकर कहीं घूमने फिरने भी जा सकते हैं। आपका प्रमोशन आदि मिलने से आप काफी खुश होंगे और माताजी से आप अपनी चल रही अनबन को भी दूर करने की पूरी कोशिश करेंगे। आपको वाहनों का प्रयोग थोड़ा सावधान रहकर करना होगा। आप लोगों से काम से काम मतलब रखें, तो आपके लिए बेहतर रहने वाला है।
कुंभ ( Aquarius)
स्वभाव: मानवतावादी
राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: गोल्डन
आज का दिन आपके लिए समस्याओं से भरा रहने वाला है। आपको किसी नए काम को करना बेहतर रहेगा। आपकी कोई मन की इच्छा पूरी होने से खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। विद्यार्थियों को पढ़ाई लिखाई में पूरी मेहनत से जुटना होगा। आप किसी दूसरे के मामले में बेवजह ना बोले। जीवनसाथी से यदि किसी बात को लेकर अनबन चल रही थी, तो उसे भी आप बातचीत के जरिए दूर करने की कोशिश करेंगे। आपके घर किसी सरप्राइज पार्टी का आयोजन हो सकता है।
मीन (Pisces)
स्वभाव: संवेदनशील
राशि स्वामी: बृहस्पति
शुभ रंग: आसमानी
आज का दिन आपके लिए बढ़िया रहने वाला है। आपका रुका हुआ धन मिलने से आपके काम भी आसानी से पूरे होगे। प्रॉपर्टी डीलिंग का काम कर रहे लोगों को थोड़ा सावधान रहना होगा। आपके आसपास का वातावरण खुशनुमा रहेगा। जो लोग किसी को पसंद करते हैं, अपने साथी से प्रेम का इजहार कर सकते है। आपको कार्यक्षेत्र में किसी राजनीति का हिस्सा बनने से बचना होगा। आप अपनी शौक मौज की चीजों की खरीददारी पर अच्छा खासा धन लगाएंगे।

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