Shardiya Navaratri 2025 Starts From September 22

🌸 नवरात्रि संदेश 🌸
आप सभी को आश्विन माह के पवित्र नवरात्र की हार्दिक बधाई शुभकामनाएं!

शेर नहीं हाथी पर सवार हो आ रही हैं मां दुर्गा, जानें इसके पीछे का महत्व, देवी के हाथी वाहन से होने वाले शुभ फल : शारदीय नवरात्रि 2025 में मां दुर्गा इस बार हाथी की सवारी पर पधार रही हैं … वैसे तो माता रानी का वाहन शेर है, मगर नवरात्रि के दौरान वह अलग-अलग वाहन पर सवार हो पधारती हैं। यह गणना देवी भागवत पुराण के आधार पर वार के हिसाब से बताई गई है।अलग-अलग वाहन से देवी के पधारने के फल भी अलग-अलग होते हैं। इस बार देवी हाथी से पधार रही हैं, इसके क्‍या फल देखने को मिलेंगे चलिए पंडित जी से विस्‍तार से जानते हैं।Navratri में मां दुर्गा के हाथी पर आने से क्‍या होता है?

इस वर्ष मां दुर्गा हाथी पर सवार हो कर आ रही हैं और ज्‍योतिष शास्‍त्र के अनुसार यह बहत ही शुभ माना गया है। पंडित जी बताते हैं, ” नवरात्रि सोमवार 22 सितंबर से शुरू हो रही है।जब भी नवरात्रि सोमवार से शुरू होती है, तब मां का आगमन हाथी पर सवार होकर होता है। हर दिन के अनुसार नवरात्रि में मां के आगमन की सवारी इसी तरह बदलती रहती है। इस बार मां का हाथी से आना बहुत ही शुभ होगा।

“जब मां दुर्गा नवरात्रि में हाथी पर सवार होकर आती हैं, तो भक्‍तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती हैं। मां दुर्गा का हाथी की सवारी करना वैभव ओर ऐश्‍वर्य का प्रतीक है। इसलिए माना जाता है कि यह घटना लोगों के जीवन में आर्थिक समृद्धि लेकर आती है।हाथी र सवार होकर मां का आना यह भी संकेत देता है कि किसी को भी अन्‍न की कमी नहीं होगी। किसानों के लिए यह खासतौर पर शुभ होती है।मां का हाथी पर सवार होकर आना यह भी संकेत देता है कि पूरे वर्ष अच्‍छी वर्षा होगी, जिससे खेती-बाड़ी का काम अच्‍छे से होगा और किसानों को धन की कमी नहीं होगी।

नवरात्रि, भगवती का सानिध्य प्राप्त करने का अद्भुत अवसर है। यह समय है चैतन्य तत्व को पाने का, स्वयं को ऊर्जावान बनाने का और जीवन को एक नई दिशा देने का।

प्रकृति इस काल में अपनी सर्वोच्च ऊर्जा प्रदान करती है। यही वह समय है जब साधक अपनी सुषुप्त चेतना शक्ति को जागृत कर अत्यंत तीव्र ऊर्जा का अनुभव कर सकता है। यदि इन नौ दिनों का सदुपयोग कर लिया जाए तो साधक का पूरा जीवन परिवर्तित हो सकता है।

इन पावन दिनों में साधना, ब्रह्मचर्य और नियमों का पालन आवश्यक है। साधक को चाहिए कि वह काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकारों से दूर रहकर केवल भगवती की आराधना में लीन हो। यही साधना आपके जीवन के दुख, कष्ट और आपत्तियों को दूर कर सकती है।

पूर्वज कहते थे कि नवरात्रि के समय देवियाँ आकाश मार्ग में रथ लेकर विचरण करती हैं। यह समय देवी-देवताओं, कुल शक्तियों और पितृ शक्तियों की विशेष कृपा पाने का होता है। यदि इस अवसर पर साधना और सेवा की जाए तो जीवन में पीछे मुड़कर देखने की आवश्यकता नहीं रहती।

प्रकृति स्वयं इस समय अपना रूप बदलती है, जैसे साँप अपनी केंचुली त्यागता है। उसी प्रकार यह नौ दिन आपके जीवन में भी परिवर्तन ला सकते हैं।

यदि आपने यह समय भगवती की आराधना और साधना को समर्पित कर दिया तो आने वाले वर्षों तक आपके भीतर ऊर्जा और शक्ति का प्रवाह बना रहेगा, जो आपके जीवन के हर कार्य को सहजता से पूर्ण करेगा।

आइए, इस नवरात्रि को अपने जीवन परिवर्तन की रात्रि बनाएँ और भगवती आदि शक्ति की असीम कृपा प्राप्त करें।

अश्विन माह (शारदीय) नवरात्रि 2025 की घटस्थापना 22 सितंबर को होगी। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः 06:09 बजे से 08:06 बजे तक रहेगा और अभिजीत मुहूर्त 11:49 से 12:38 बजे तक रहेगा। इस वर्ष नवरात्रि की अवधि 10 दिन की होगी, 22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक, और दशहरा 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

घटस्थापना और नवरात्रि तिथियां
घटस्थापना/कलश स्थापना: 22 सितंबर 2025 (प्रातः 06:09 से 08:06 व अभिजीत मुहूर्त 11:49 से 12:38 तक)

नवरात्रि आरंभ: 22 सितंबर 2025

दुर्गा अष्टमी: 30 सितंबर 2025

महानवमी: 1 अक्टूबर 2025

विजयादशमी (दशहरा): 2 अक्टूबर 2025

नवरात्रि के विशेष तथ्य
इस बार नवरात्रि 10 दिन की है, क्योंकि तृतीया तिथि दो दिन पड़ने के कारण पर्व लम्बा है, जिसे बहुत शुभ माना जाता है।

प्रतिपदा तिथि 22 सितंबर को देर रात 01:23 बजे शुरू होगी और 23 सितंबर को 02:55 बजे समाप्त होगी।

देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा प्रतिदिन की जाती है और आखिरी दिन कन्या पूजन/हवन किया जाता है।

घटस्थापना विधि संक्षेप में
स्वच्छ मिट्टी के पात्र में जौ बोई जाती है, उस पर जल से भरा कलश स्थापित किया जाता है।

कलश पर नारियल, आम/पान के पत्ते, कलावा आदि समर्पित किए जाते हैं।

घटस्थापना के बाद लगातार नौ दिन देवी दुर्गा के स्वरूपों की पूजा, व्रत, मंत्र-जप, कथा, आरती व हवन किया जाता है।

धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व
नवरात्रि शक्ति, साधना, आत्मशुद्धि और महासिद्धि का पर्व है।

पूजा, व्रत व साधना पूरे परिवार के कल्याण, सुख-समृद्धि और संकटों की निवृत्ति के लिए की जाती है।

🙏 भगवती की कृपा सभी पर बनी रहे। 🙏

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Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton