
🙏🏻 हर हर महादेव🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 07 सितम्बर 2025*
🌤️ *दिन – रविवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शरद ऋतु*
🌤️ *मास – भाद्रपद*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – पूर्णिमा रात्रि 11: 38 तक तत्पश्चात प्रतिपदा*
🌤️ *नक्षत्र – शतभिषा रात्रि 09:41 तक तत्पश्चात पूर्वभाद्रपद*
🌤️ *योग – सुकर्मा सुबह 09:23 तक तत्पश्चात धृति*
🌤️ *राहुकाल – शाम 05:16 से शाम 06:49 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:24*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:48*
👉 *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – व्रत पूर्णिमा, भाद्रपद पूर्णिमा, प्रौष्ठपदी पूर्णिमा, संयासी चतुर्मास समाप्त, पितृपक्ष प्रारंभ, महालय श्राद्ध आरंभ, पूर्णिमा का श्राद्ध, पंचक, खग्रास चंद्रग्रहण (भारत मे दिखेगा, ग्रहण के नियम पालनीय है) (ग्रहण समय : रात्रि 09:57 से मध्यरात्रि 01:26 तक)*
💥 *विशेष – पूर्णिमा व व्रत और रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
🌷 *श्राद्ध के लिए विशेष मंत्र* 🌷
🙏 *” ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधादेव्यै स्वाहा । “*
🌞 *इस मंत्र का जप करके हाथ उठाकर सूर्य नारायण को पितृ की तृप्ति एवं सदगति के लिए प्रार्थना करें । स्वधा ब्रह्माजी की मानस पुत्री हैं । इस मंत्र के जप से पितृ की तृप्ति अवश्य होती है और श्राद्ध में जो त्रुटी रह गई हो वे भी पूर्ण हो जाती है।*
🙏
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *ग्रहण दर्शन ना करें* 🌷
🌗 *कोई-कोई TV Channel वाले नादान होते हैं.. ग्रहण का दृश्य लाईव दिखाते हैं .. ये नहीं देखना चाहिए और ग्रहण की छाया भी हम पर न पड़े इसका ध्यान रखना चाहिए*
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🕉️ ~ *वैदिक पंचांग* ~ 🕉️
🌷 *ग्रहण के समय उसके देवता का मंत्र जप* 🌷
🌔 *ग्रहण का समय हो तो उस समय ग्रहण के देव का नाम जप करने से उस ग्रह का माने सूर्य या चन्द्र का विशेष आशीवार्द प्राप्त होते हैं चन्द्र ग्रहण में चन्द्र देव का मंत्र …*
🌷 *ॐ सोमाय नमः*
🌷 *ॐ रोहिणी कान्ताय नमः*
🌷 *ॐ चन्द्रमसे नमः*
👉🏻 *फिर चन्द्र देव की स्तुति का श्लोक*
🌷 *”दधीशंख: तुषाराभम् क्षीरोरदार्णव संनिभम्, नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्”*
👉🏻 *फिर चन्द्र गायत्री मंत्र बोलें …*
🌷 *” ॐ अमृतान्गाय विदमहे कलारुपाय धीमहि तन सोमः प्रचोदयात “*
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🕉️ ~ *वैदिक पंचांग* ~ 🕉️
!! श्री गणेश की सुहाग का आशीर्वाद देने वाली कथा !!
एक समय की बात है एक भाई बहन रहते थे। बहन का नियम था कि वह अपने भाई का चेहरा देखे ही खाना खाती थी। हर रोज वह सुबह उठती थी और जल्दी-जल्दी सारा काम करके अपने भाई का मुंह देखने के लिए उसके घर जाती थी। एक दिन रास्ते में एक पीपल के नीचे गणेश जी की मूर्ति रखी थी। उसने भगवान के सामने हाथ जोड़कर कहा कि मेरे जैसा अमर सुहाग और मेरे जैसा अमर पीहर सबको दीजिए। यह कहकर वह आगे बढ़ जाती थी। जंगल के झाड़ियों के कांटे उसके पैरों में चुभा करते जाते थे।
एक दिन भाई के घर पहुंची और भाई का मुंह देख कर बैठ गई, तो भाभी ने पूछा पैरों में क्या हो गया हैं। यह सुनकर उसने भाभी को जवाब दिया कि रास्ते में जंगल के झाड़ियों के गिरे हुए कांटे पांव में छुप गए हैं। जब वह वापस अपने घर आ जाए तब भाभी ने अपने पति से कहा कि रास्ते को साफ करवा दो, आपकी बहन के पांव में बहुत सारे कांटा चुभ गए हैं। भाई ने तब कुल्हाड़ी लेकर सारी झाड़ियों को काटकर रास्ता साफ कर दिया। जिससे गणेश जी का स्थान भी वहां से हट गया। यह देखकर भगवान गुस्सा हो गए और उसके भाई के प्राण हर लिए।
लोग अंतिम संस्कार के लिए जब भाई को ले जा रहे थे, तब उसकी भाभी रोते हुए लोगों से कहीं थोड़ी देर रुक जाओ, उसकी बहन आने वाली है। वह अपने भाई का मुंह देखे बिना नहीं रह सकती है। उसका यह नियम है। तब लोगों ने कहा आज तो देख लेगी पर कल कैसे देखेगी। रोज दिन की तरह बहन अपने भाई का मुंह देखने के लिए जंगल में निकली। तब जंगल में उसने देखा कि सारा रास्ता साफ किया हुआ है। जब वह आगे बढ़ी तो उसने देखा कि सिद्धिविनायक को भी वहां से हट दिया गया हैं।
तब उसने जाने से पहले गणेश जी को एक अच्छे स्थान पर रखकर उन्हें स्थान दिया और हाथ जोड़कर बोली भगवान मेरे जैसा अमर सुहाग और मेरे जैसा अमर पीहर सबको देना और फिर बोलकर आगे निकल गई।
तब भगवान सोचने लगे अगर इसकी नहीं सुनी तो हमें कौन मानेगा, हमें कौन पूजेगा। तब सिद्धिविनायक ने उसे आवाज दी, बेटी इस खेजड़ी की सात पत्तियां लेकर जा और उसे कच्चे दूध में घोलकर भाई के उपर छींटा मार देना वह उठकर बैठ जाएगा। यह सुनकर जब बहन जब पीछे मुड़ी तो वहां कोई नहीं था। फिर वह यह सोचने लगी कि ठीक है जैसा सुना वैसा कर लेती हूं। फिर वह 7 खेजड़ी की पत्तियां लेकर अपने भाई के घर पहुंची। उसने देखा वहां कई लोग बैठे हुए हैं। भाभी बैठी रो रही और भाई की लाश रखी हैं। तब उसने उस पत्तियों को बताए हुए नियम के तहत भाई के उपर इस्तेमाल किया। तब भाई उठ कर बैठ गया। भाई बोला बहन से बोला मुझे बहुत ही गहरी नींद आ गई थी। तब बहन बोली यह नींद किसी दुश्मन को भी ना आए और उसने सारी बात अपने भाई को बता दी।
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️








🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
कर्पुर (कपूर) के चमत्कारिक प्रभाव
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कर्पूर या कपूर मोम की तरह उड़नशील दिव्य वानस्पतिक द्रव्य है। इसे अक्सर आरती के बाद या आरती करते वक्त जलाया जाता है जिससे वातावरण में सुगंध फैल जाती है और मन एवं मस्तिष्क को शांति मिलती है। कपूर को संस्कृत में कर्पूर, फारसी में काफूर और अंग्रेजी में कैंफर कहते हैं।
वास्तु एवं ज्योतिष शास्त्र में भी इसके महत्व और उपयोग के बारे में बताया गया है। कर्पूर के कई औषधि के रूप में भी कई फायदे हैं। इस लेख के माध्यम से हम जानेंगे कि कर्पूर या कपूर से आप कैसे अपनी परेशानी कम कर सकते हैं ,और कैसे आप अपने ग्रह और घर को भी बाधा मुक्त रख सकते हैं।
पुण्य प्राप्ति हेतु :
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कर्पूर जलाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। शास्त्रों के अनुसार देवी-देवताओं के समक्ष कर्पूर जलाने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। अत: प्रतिदिन सुबह और शाम घर में संध्यावंदन के समय कर्पूर (कपूर) जरूर जलाएं।
पितृदोष और कालसर्पदोष से मुक्ति हेतु :
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कर्पूर जलाने से देवदोष व पितृदोष का शमन होता है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि हमें शायद पितृदोष है या काल सर्पदोष है। दरअसल, यह राहु और केतु का प्रभाव मात्र है। इसको दूर करने के लिए घर के वास्तु को ठीक करें।
यदि ऐसा नहीं कर सकते हैं तो प्रतिदिन सुबह, शाम और रात्रि को तीन बार घी में भिगोया हुआ कर्पूर जलाएं। घर के शौचालय और बाथरूप में कर्पूर की 2-2 टिकियां रख दें। बस इतना उपाय ही काफी है।
आकस्मिक घटना या दुर्घटना से बचाव :
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आकस्मिक घटना या दुर्घटना का कारण राहु, केतु और शनि होते हैं। इसके अलावा हमारी तंद्रा और
क्रोध भी दुर्घटना का कारण बनते हैं। इसके लिए रात्रि में हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद कर्पूर जलाएं।
प्रतिदिन सुबह और शाम जिस घर में कर्पूर जलता रहता है उस घर में किसी भी प्रकार की आकस्मिक घटना और दुर्घटना नहीं होती। रात्रि में सोने से पूर्व कर्पूर जलाकर सोना तो और भी लाभदायक है।
वैज्ञानिक शोधों से यह भी ज्ञात हुआ है कि इसकी सुगंध से जीवाणु, विषाणु आदि बीमारी फैलाने वाले जीव नष्ट हो जाते हैं जिससे वातावरण शुद्ध हो जाता है तथा बीमारी होने का भय भी नहीं रहता।
सकारात्मक उर्जा और शांति के लिए :
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घर में यदि सकारात्मक उर्जा और शांति का निर्माण करना है तो प्रतिदिन सुबह और शाम कर्पूर को
घी में भिगोकर जलाएं और संपूर्ण घर में उसकी खुशबू फैलाएं। ऐसा करने से घर की नकारात्मक उर्जा नष्ट हो जाएगी। दु:स्वप्न नहीं आएंगे और घर में अमन शांति बनी रहेगी है।
वास्तु दोष मिटाने के लिए
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यदि घर के किसी स्थान पर वास्तु दोष निर्मित हो रहा है तो वहां कर्पूर की 2 टिकियां रख दें। जब वह टिकियां गलकर समाप्त हो जाए तब दूसरी दो टिकिया रख दें। इस तरह बदलते रहेंगे तो वास्तुदोष निर्मित नहीं होगा।
भाग्य उन्नति के लिए
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पानी में कर्पूर के तेल की कुछ बूंदों को डालकर नहाएं। यह आपको तरोताजा तो रखेगा ही आपके भाग्य को भी चमकाएगा। यदि इस में कुछ बूंदें चमेली के तेल की भी डाल लेंगे तो इससे राहु, केतु और शनि का दोष नहीं रहेगा, लेकिन ऐसे सिर्फ शनिवार को ही करें।
धन-धान्य बंधन हटाने के लिए
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रात्रि काल के समय रसोई समेटने के बाद चांदी की कटोरी में लौंग तथा कपूर जला दिया करें। यह कार्य नित्य प्रतिदिन करेंगे तो धन-धान्य से आपका घर भरा रहेगा। धन की कभी कमी नहीं होगी।
साभार~ पं देवशर्मा💐
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🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
इस धरती पर गरुड़ और नागों की उत्पत्ति कैसे हुई,
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क्यों गरुड़ नाग के दुशमन हुए, क्यों नागो की जीभ आगे से दो हिस्सों में बटी हुई है और कैसे गरुड़, भगवान विष्णु के वाहन बने ? महर्षि कश्यप की तेरह पत्नियां थी। लेकिन विनता और कद्रू नामक अपनी दो पत्नियों से वे विशेष प्रेम करते थे। एक दिन महर्षि जब आनंद भाव में बैठे थे तो उनकी दोनों पत्नियां उनके समीप पहुंची और पति के पांव दबाने लगी। प्रसन्न होकर महर्षि ने बारी-बारी से दोनों को सम्बोधित किया- “तुम दोनों ही मुझे विशेष प्रिय हो। तुम्हारी कोई इच्छा हो तो बताओ।”
कद्रू बोली- “स्वामी ! मेरी इच्छा है कि मैं हजार पुत्रो की माँ बनूं।” फिर महर्षि ने विनता से पूछा। विनता ने कहा- “मैं भी माँ बनना चाहती हूं स्वामी ! किन्तु हजार पुत्रो की नहीं, बल्कि सिर्फ एक ही पुत्र की। लेकिन मेरा पुत्र इतना बलवान हो कि कद्रू के हजार पुत्र भी उसकी बराबरी न कर सके।”
महर्षि बोले- “शीघ्र ही मैं एक यज्ञ करने वाला हूं। यज्ञोपरांत तुम दोनों की माँ बनने की इच्छाएं अवश्य पूरी होगी।”
महर्षि कश्यप ने यज्ञ किया। देवता और ऋषि-मुनियों ने सहर्ष यज्ञ में हिस्सा लिया। यज्ञ सम्पूर्ण करके महर्षि कश्यप पुनः तपस्या करने चले गए। कुछ माह पश्चात विनता ने दो तथा कद्रु ने एक हजार अंडे दिए। कुछ काल के पश्चात कद्रु ने अपने अंडे फोड़े तो उनमे से काले नागों के बच्चे निकल पड़े। कद्रु ने ख़ुशी से चहकते हुए विनता को पुकारा- “विनता ! देखो तो मेरे अन्डो से कितने प्यारे बच्चे बाहर निकले है।”
विनता बोली- “सचमुच बहुत खूबसूरत है कद्रू ! बधाई हो, अब मैं भी अपने दोनों अंडो को फोड़कर देखती हूं।
यह कहकर विनता अपने दोनों अंडो के पास गई। उसने एक अंडा फोड़ दिया, लेकिन अंडे के अंदर से एक बच्चे का आधा बना शरीर देखकर वह सहम गई। बोली- “हे भगवान ! जल्दीबाजी में मैने ये क्या कर डाला। यह बच्चा तो अभी अपूर्ण है।”
तभी फूटे हुए अंडे के अंदर से बालक बोल पड़ा- “जल्दबाजी में अंडा फोड़कर तुमने बहुत बड़ा अपराध कर डाला है। फलस्वरूप तुम्हे कुछ समय तक दासता करनी होगी।
विनता बोली- “अपराध तो मुझसे हो ही गया। लेकिन इसका निराकरण कैसे होगा पुत्र ?
अपूर्ण बालक बोला-“दूसरे अंडे को फोड़ने में जल्दबाजी मत करना। यदि तुमने ऐसा किया तो जीवन भर दासता से मुक्त नहीं हो पाओगी। क्योंकि उसी अंडे से पैदा होने वाला तुम्हारा पुत्र तुम्हे दासता से मुक्ति दिलाएगा।
इतना कहकर अंडे से उत्पन्न अपूर्ण बालक आकाश में उड़ गया और विनता दूसरे अंडे के पकने तक इंतजार करने लगी। समय पाकर अंडा फूटा और उसमे से एक महान तेजस्वी बालक उत्पन्न हुआ, जिसका नाम गरुड़ रखा गया। गरुड़ दिन-प्रतिदिन बड़ा होने लगा और कद्रू के हजार पुत्रों पर भारी पड़ने लगा। परिणामस्वरूप विनता और कद्रू के संबंध दिन-प्रतिदिन कटु से कटुतर होते गए
फिर एक दिन जब विनता और कद्रू भृमण कर रही थी। कद्रू ने सागर के किनारे दूर खड़े सफेद घोड़े को देखकर विनता से कहा- “बता सकती हो विनता ! दूर खड़ा वह घोडा किस रंग का है ?
विनता बोली- “सफेद रंग का।
कद्रू बोली- “शर्त लगाकर कह सकती हो कि घोडा सफेद रंग का ही है। मुझे तो इसकी पूंछ काले रंग की नजर आ रही है।
विनता बोली- “तुम्हारा विचार गलत है। घोडा पूंछ समेत सफेद रंग का है।
दोनों में काफी देर तक यही बहस छिड़ी रही। आखिर में कद्रू ने कहा- “तो फिर हम दोनों में शर्त हो गई। कल घोड़े को चलकर देखते है। यदि वह सम्पूर्ण सफेद रंग का हुआ तो मैं हारी, और यदि उसकी पूंछ काली निकली तो मैं जीत जाऊंगी। उस हालत में जो भी हम दोनों में से जीतेगी, तो हारने वाली को जितने वाली की दासी बनना पड़ेगा। बोलो तुम्हे मंजूर है ?
विनता बोली- “मुझे मंजूर है।
रात को ही कद्रू ने अपने सर्प पुत्रों को बुलाकर कहा- “आज रात को तुम सब उच्चेः श्रवा घोड़े की पूंछ से जाकर लिपट जाना। ताकि सुबह जब विनता देखे तो उसे घोड़े की पूंछ काली नजर आए।
योजनानुसार नाग उच्चेः श्रवा घोड़े की पूंछ से जाकर लिपट गए। परिणामस्वरूप सुबह जब कद्रू ने विनता को घोड़े की पूंछ काले रंग की दिखाई तो वह हैरान रह गई। बोली- “ऐसा कैसे हो गया। कल तो इसकी पूंछ बिलकुल सफेद थी
कद्रू बोली- “खूब तसल्ली से देख लो। घोड़े की पूंछ आरम्भ से ही काली है। शर्त के मुताबित तुम हार चुकी हो। इसलिए अब तुम्हे मेरी दासी बनकर रहना पड़ेग
विवशतापूर्वक विनता को कद्रू की दासता स्वीकार करनी पड़ी। माता को उदास देखकर गरुड़ ने पूछा- “क्या ऐसा कोई उपाय नहीं है जिससे आप कद्रू की दासता से मुक्त हो जाए ?”
विनता बोली- “यह तो कद्रू से ही पूछना पड़ेगा। यदि वह प्रसन्न हो जाती है तो मुझे दासता से मुक्त कर देगी
गरुड़ अपनी माता विनता को लेकर कद्रू के पास पहुंचा और कहा- “क्या ऐसा नहीं हो सकता कि आप मेरी माता को अपनी दासता से मुक्त कर दे।
कद्रू बोली- “हो सकता है। बशर्ते कि तुम मेरे पुत्रों को अमृत लाकर दे दो।
यह सुनकर गरुड़ सोच में पड़ गया। उसने अपनी माता से पूछा- “माँ ! अमृत कहा मिलेगा जिसे लेकर मैं तुम्हे दासी जीवन से मुक्त कर संकू।
विनता ने कहा- “अमृत का पता तुम्हारे पिता बता सकते है पुत्र ! तुम उन्हीं के पास जाकर पूछो
गरुड़ महर्षि कश्यप के पास पहुंचा। कश्यप अपने पुत्र को देखकर बहुत प्रसन्न हुए। गरुड़ ने उनसे पूछा- “पिताश्री ! मैं अमृत लेकर अपनी माता को दासता से मुक्ति दिलाना चाहता हूं। कृपया मुझे बताइये कि अमृत कहा मिलेगा
महर्षि बोले- “पुत्र ! देवराज इंद्र ने अमृत की सुरक्षा के लिए बहुत व्यापक प्रबंध कर रखा है। वहां तक पहुचना कठिन है।
गरुड़ बोला- “इंद्र ने कितनी ही कड़ी सुरक्षा प्रबंध क्यों न कर रखे हो। मगर मैं अमृत ले आऊंगा। आप मुझे सिर्फ उस स्थान का पता बता दीजिये।
महर्षि कश्यप ने गरुड़ को इंद्र का पता बता दिया। गरुड़ ने फिर पूछा- “पिताजी ! मुझे भूख बहुत लगती है। कृपया मुझे यह भी बता दीजिये कि इस लम्बे मार्ग में क्या खाकर अपना पेट भरु।
महर्षि बोले- “अमृत जिस स्थान पर रखा है उस सरोवर तक पहुंचने में तुम्हे वक्त लग जाएगा। इस बीच समुद्र के किनारे तुम्हे निषादों की अनेक बस्तिया मिलेगी। ये निषाद बहुत पतित है और इनके आचरण असुरो जैसे है। तुम इन्हे खाकर अपनी भूख मिटा लेना।
गरुड़ बोला- “और उसके बाद भी मेरा पेट न भरा तो
महर्षि बोले- “सरोवर के अंदर एक विशाल कछुआ रहता है और उसके साथ ही वन में एक महा भयंकर हाथी भी रहता है। दोनों ही बहुत क्रूर और आसुरी प्रवृति के है। तुम उन्हें भी खा सकते हो।
पिता का आदेश पाते ही गरुड़ अमृत सरोवर की ओर बढ़ चला। मार्ग में उसने निषादों को खाकर अपनी भूख मिटाई। फिर अमृत सरोवर पर पहुंचकर कच्छप और हाथी को अपने पंजो में दबाया और दोनों को खाने के लिए किसी उचित जगह की तलाश में उड़ चला।”
सोमगिरि पर्वत पर लहलहाते ऊंचे वृक्षों को देखकर जैसे ही उसने एक वृक्ष पर बैठना चाहा तो उनके भार से वृक्ष की शाखा टूटकर नीचे गिरने लगी। यह देख गरुड़ तुरंत उड़ा और दूसरे वृक्ष पर जा बैठा। जिस शाखा पर वह बैठा उस शाखा पर उसने उलटे लटके कुछ ऋषियों को तपस्या करते देखा।
लेकिन वह शाखा उनके भार से टूटकर नीचे गिरने लगी। यह देख गरुड़ ने शाखा को चोंच में दबाया और हाथी तथा कच्छप को पंजे में दबाए हुए वह अपने पिता के आश्रम की ओर उड चला
कश्यप के आश्रम में गरुड़ ने उड़ते-उड़ते अपने पिता से पूछा- “पिताजी ! मेरे भार से उस पेड़ की शाखा टूट गई है जिस पर कुछ ऋषि उलटे लटके तपस्या कर रहे थे। मुझे बताइये अब मैं इस शाखा को कहां छोडूं ?”
महर्षि कश्यप बोले- “तुमने बहुत अच्छा किया पुत्र ! जो सीधे यहां चले आए। शाखा, से उलटे लटके हुए ये बालखिल्य ऋषिगण है। अगर इन्हे कष्ट पहुंचा तो ये शाप देकर तुम्हे भस्म कर देंगे।”
गरुड़ बोले- “तो फिर बताइये अब मैं क्या करूं ?”
महर्षि बोले- “ठहरो, मैं ऋषिगण से प्रार्थना करता हूं कि वे अपना स्थान छोड़कर नीचे आ जाए।”
महर्षि कश्यप ने ऋषि गणो से प्रार्थना की। बालखिल्य ऋषियों ने कश्यप की प्रार्थना स्वीकार कर शाखा छोड़ दी और वे हिमालय में तपस्या करने चले गए। चोंच में दबी शाखा को नीचे फेंककर गरुड़ ने भी आनंद से कछुए और हाथी का आहार किया और तृप्त होकर पुनः अमृत लाने के लिए उड़ चला। गरुड़ अमृत सरोवर के पास पहुंचा तो अमृत की रक्षा करते हुए महाकाय देवो और अमृत कलश के चारो ओर घूमते हुए चक्र को देखकर वह हैरान हो गया। उसने सोचा कि ये देव और चक्र देवराज इंद्र ने अमृत कलश की सुरक्षा के लिए लगाए हुए है। चक्र में फंसकर मेरे पंख कट सकते है। इसलिए मैं अत्यंत छोटा रूप धारण कर इसके मध्य में प्रवेश करूंगा।
गरुड़ को देखकर एक देव ने कहा- “यह कोई असुर है जो वेश बदलकर अमृत चुकाने यहां तक पहुंचा है। हमे इसे खत्म कर देना चाहिए।”
दोनों देव विद्युत गति से गरुड़ पर टूट पड़े। लेकिन गरुड़ ने अपने पैने पंजो और तीखी चोंच से इन्हे इतना घायल कर दिया कि शीघ्र ही वे दोनों बेहोश होकर गिर पड़े। गरुड़ ने अमृत कलश पंजो में दबाया और वापस उड़ गया।
होश में आते ही दोनों रक्षक देव घबराए हुए इंद्र के पास पहुंचे और गरुड़ द्वारा अमृत कलश ले उड़ने की घटना बता दी।
यह सुनके इंद्र चकित होकर बोला- “ऐसा कैसे हो गया। सरोवर में रहने वाले विशाल कच्छप और तट पर रहने वाले महाकाय हाथी का क्या हुआ ?
“उन दोनों को भी उस विशाल गरुड़ ने अपना भोजन बना लिया।
यह सुनकर इंद्र अपनी देव सेवा की एक टुकड़ी के साथ वज्र उठाए इन्द्रपुरी से निकला और गरुड़ की खोज में बढ़ चला। आकाश मार्ग में उड़ते हुए शीघ्र ही उसने गरुड़ को देख लिया और अपना वज्र चला दिया। इंद्र के वज्र का गरुड़ पर कोई असर न हुआ। उसके डैनों से सिर्फ एक पंख वज्र से टकराकर नीचे आ गिरा। देव गरुड़ पर टूट पड़े लेकिन कुछ ही समय में गरुड़ ने उन्हें अपनी पैनी चोंच की मार से अधमरा कर दिया।
यह देख इंद्र सोचने लगा- “यह तो महान पराक्रमी है। मेरे वज्र का इस पर जरा भी असर नहीं हुआ। जबकि मेरे वज्र के प्रहार से पहाड़ तक टूट के चूर्ण बन जाते है। ऐसे पराक्रमी को शत्रुता से नहीं मित्रता से काबू में करना चाहिए।” यह सोचकर इंद्र ने गरुड़ से कहा- “पक्षीराज ! मैं तुम्हारी वीरता से बहुत प्रभावित हुआ हूं। इस अमृत कलश को मुझे सौंप दो और बदले में जो भी वर मांगना चाहते हो मांग लो।
गरुड़ बोला- “यह अमृत मैं अपने लिए नही, अपनी माता को दासता से मुक्त कराने के लिए नाग माता को देने के लिए ले जा रहा हूं। इसलिए यह कलश मैं तुम्हे नहीं दूंगा।
इंद्र बोला- “ठीक है, इस समय तुम कलश ले जाकर नाग माता को सौंप दो किन्तु उन्हें इसे प्रयोग मत करने देना। उचित मौका देखकर मैं वहां से यह कलश गायब कर दूंगा।
गरुड़ बोला- “अगर मैं तुम्हारी बात को मान लूं तो मुझे बदले में क्या मिलेगा ?
इंद्र बोला- “तुम्हारा मनपसंद भरपेट भोजन। तब मैं तुम्हे इन्ही नागो को खाने की इजाजत दे दूंगा।
गरुड़ बोला- “यही तो मैं चाहता हूं। नाग मेरे स्वादिष्ट भोजन है किन्तु एक ही पिता की संतान होने के कारण मैं इन्हे कहते हुए हिचकता हूं। अब मेरी हिचक दूर हो गई। अब मैं आपके कथानुसार ही कार्य करूंगा
यह कहकर गरुड़ अमृत कलश लेकर कद्रु के पास पहुंचा और उससे बोला- “माते ! अपनी प्रतिज्ञानुसार मैं अमृत कलश ले आया हूं। अब आप अपने वचन से मेरी माता को मुक्त कर दे
कद्रु ने उसी क्षण विनता को वचन से मुक्त कर दिया और अगली सुबह अमृत नागो को पिलाने का निश्चय कर वहां से चली गई। रात को उचित मौका देखकर इंद्र ने अमृत कलश उठा लिया और पुनः उसी स्थान पर पहुंचा दिया
दूसरे दिन सुबह नाग जब वहां पहुंचे तो अमृत कलश गायब देखकर दुखी हुए। उन्होंने उस कुशा को ही जिस पर अमृत कलश रखा था चाटना आरम्भ कर दिया जिसके कारण उनकी जीभ दो हिस्सों में फट ग
गरुड़ की मातृभक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु गरुड़ के सम्मुख प्रकट हो गए और बोले- “मैं तुम्हारी मातृभक्ति देखकर बहुत प्रसन्न हूं पक्षीराज ! मैं चाहता हूं कि अब से तुम मेरे वाहन के रूप में मेरे साथ रहा करो।”
गरुड़ बोला- “मैं बहुत भाग्यशाली हूं प्रभु जो स्वयं आपने मुझे अपना वाहन बनाना स्वीकार किया। आज से मैं हर क्षण आपकी सेवा में रहूंगा और आपको छोड़कर कही नहीं जाऊंगा।
इस तरह उसी दिन से पक्षीराज गरुड़ भगवान विष्णु के वाहन के रूप में प्रयुक्त होने लगे। गरुड़ के भगवान विष्णु की सेवा में जाते ही देवता भयमुक्त हो गए
और चूँकि नागों के छल के कारण गरुड़ की माँ विनीता को दासता स्वीकार करनी पड़ी इसलिए नाग और गरुड़ एक दूसरे के दुशमन है।
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
आपका जन्मदिन: 7 सितंबर
दिनांक 7 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 7 होगा। यह अंक वरूण ग्रह से संचालित होता है। आप खुले दिल के व्यक्ति हैं। आपकी प्रवृत्ति जल की तरह होती है। जिस तरह जल अपनी राह स्वयं बना लेता है वैसे ही आप भी तमाम बाधाओं को पार कर अपनी मंजिल पाने में कामयाब होते हैं। किसी के मन की बात तुरंत समझने की आपमें दक्षता होती है। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति अपने आप में कई विशेषता लिए होते हैं। आप पैनी नजर के होते हैं।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 7, 16, 25
शुभ अंक : 7, 16, 25, 34
शुभ वर्ष : 2026
ईष्टदेव : भगवान शिव तथा विष्णु
शुभ रंग : सफेद, पिंक, जामुनी, मेहरून
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
करियर: नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए समय सुखकर रहेगा। अधिकारी वर्ग का सहयोग मिलेगा।
कारोबार: नवीन कार्य-योजना शुरू करने से पहले केसर का लंबा तिलक लगाएं व मंदिर में पताका चढ़ाएं। आपके कार्य में तेजी का वातावरण रहेगा। आपको प्रत्येक कार्य में जुटकर ही सफलता मिलेगी। व्यापार-व्यवसाय की स्थिति उत्तम रहेगी।
🌹❤️आज का राशिफल 🌹❤️
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन आपके लिए लाभप्रद रहेगा। आप जिस कार्य को वृथा भाग-दौड़ वाला समझेंगे वही धन लाभ कराएगा। लापरवाही स्वभाव में दिनभर बनी रहेगी जिसके चलते कुछ ना कुछ हानि अवश्य उठानी पड़ेगी। कार्यक्षेत्र पर सहकर्मी अथवा नौकरों के ऊपर अति विश्वास नुकसान करा सकता है इसका ध्यान रखें। मध्यान्ह के आसपास विचित्र स्थिति बनेगी परिजन अथवा अन्य कोई वरिष्ठ व्यक्ति जिस कार्य को करने के लिए मना करेगा आप जबरदस्ती उस कार्य को करेंगे आरंभ में विरोध भी देखना पड़ेगा लेकिन सफलता मिलने पर सभी बगलें झांकने नजर आएंगे। जीवनसाथी को आप के कारण कुछ कष्ट हो सकता है। व्यवहार कुशल रहें अन्यथा घरेलू सुख को भूल ही जाएं। आज दिन के आरंभ में ही शनि संबंधित वस्तुओं का दान करने से प्रत्येक कार्य में सफलता की संभावना बढ़ेगी। सेहत व्यसन अथवा चोट के कारण गड़बड़ हो सकती है।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन आपकी उम्मीद पर खरा उतरेगा। आज दिन के आरम्भ में घरेलू मामलों को लेकर लापरवाही करेंगे। लेकिन आज व्यवसायिक कार्यों में अधिक गंभीरता दिखाएंगे। कार्यक्षेत्र पर धन की आमद रुक-रुककर होती रहेगी। आज जहां से सहज काम नहीं बनेगा वहां से दंड की नीति भी अपना सकते हैं। सहकर्मी अधीनस्थों को डरा धमका कर अपना काम चलाएंगे। पारिवारिक वातावरण कुछ समय के लिए उथल पुथल होगा। किसी परिजन की अनैतिक मांग को लेकर जिद बहस हो सकती है। परिवार के बड़े बुजुर्ग कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौप कर दुविधा में डालेंगे। संध्या का समय थकान से भरा रहेगा फिर भी मनोरंजन के अवसर तलाश ले लेंगे। सर दर्द अथवा बुखार की शिकायत हो सकती है।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज के दिन आपमें अध्यात्म के प्रति विशेष लगाव रहेगा। मन में धर्म के गूढ विषयों को जानने की जिज्ञासा रहेगी। व्यस्तता एवं व्यवधानों के बाद भी दिन का कुछ समय धार्मिक कार्यों के साथ टोने टोटको के प्रयोग में भी देंगे। कार्यक्षेत्र पर मध्यान तक विविध उलझनों का सामना करना पड़ेगा। जिस किसी से भी सहयोग की आशा रखेंगे वही अपने निजी परेशानी बता कर पीछा छुड़ाएगा। फिर भी आज युक्ति मुक्ति लगाकर आवश्यकता अनुसार धन प्राप्त कर ही लेंगे। परिवार में अचल संपत्ति को लेकर कुछ ना कुछ परेशानी खड़ी होगी निवास स्थान में परिवर्तन के बारे में भी विचार कर सकते हैं।
विदेश अथवा अन्य लंबी दूरी की यात्रा में अक्समात बाधा आने से मन निराश होगा। संध्या का समय मानसिक बेचैनी फिर भी दिन की अपेक्षा ठीक ही रहेगा।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज दिन के आरंभ से ही सेहत में उतार-चढ़ाव आना शुरू हो जाएगा। इस वजह से दिनचर्या अस्त-व्यस्त ही रहेगी कार्यक्षेत्र पर जिस आशा से कार्य करेंगे उस में कुछ ना कुछ कमी रहेगी। उलझे हुए कार्यों को अपनी अथवा किसी निकटस्थ स्वजन की पद-प्रतिष्ठा का हवाला देकर पूर्ण करने का प्रयास करेंगे लेकिन इसमें भी कुछ अड़चन ही आएगी। आज केवल पैतृक कार्यों से बिना किसी झंझट के सहज लाभ कमा लेंगे। अन्य कार्यों से भी जोड़-तोड़ करने का प्रयास करेंगे लेकिन सफलता संदिग्ध ही रहेगी। कोई व्यावसायिक अथवा घरेलू कार्य से यात्रा की योजना अंत समय में निरस्त करनी पड़ सकती है। आरंभ में यह निराशा बढ़ाएगी लेकिन आज यात्रा में कुछ ना कुछ अनिष्ट होने का डर है यथासंभव टालना ही बेहतर है। घर में जीवनसाथी अथवा किसी अन्य प्रियजन को शारीरिक कष्ट पहुंच सकता है स्वयं भी जोखिम वाले कार्यों से बचें।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन बीते कई दिनों की तुलना में बेहतर रहने वाला है। पूर्व में मिली असफलताओं के चलते आज कार्य व्यवसाय के प्रति ज्यादा उत्साह नहीं रहेगा लेकिन आज कार्य क्षेत्र से अवकाश लेना महंगा पड़ सकता है। दोपहर तक परिश्रम के बाद धन की आमद आरंभ हो जाएगी आज पूर्व में जो सौदे मजबूरी में निरस्त करने पड़े थे। वह पुनः मिलने से कुछ ना कुछ लाभ दे कर जाएंगे। धन की आमद आशाजनक तो नहीं दैनिक आवश्यकता से अधिक ही होगी। नौकरी पेशा लोग कार्य पूर्ण करने के दबाव में जल्दबाजी करेंगे। घर परिवार में संतान अथवा किसी अन्य महत्वपूर्ण कारण से दोराय रहेगी। आप जिस कार्य को करने के पक्ष में रहेंगे परिजन उसके विपरीत ही अपना निर्णय लेंगे। अनैतिक मार्ग से धन कमाने का अवसर मिलेगा इसमें कुछ ना कुछ फायदा ही होगा। आकस्मिक अथवा पर्यटक यात्रा करनी पड़ेगी। सेहत सामान्य रहेगी लेकिन शुगर के रोगियों को चोट अथवा घाव होने से गंभीर परेशानी हो सकती है।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज के दिन आप थोड़ी-बहुत मानसिक बेचैनी को छोड़ चैन से ही बताएं। कार्यक्षेत्र पर कम परिश्रम से अधिक लाभ मिल सकता है। पर थोड़ी गुप्त युक्तियों का सहारा भी लेना पड़ेगा। किसी महत्वपूर्ण सौदे अथवा कार्य को लेकर मन में भय की स्थिति बनेगी यहां स्वयं निर्णय लेने से बचें अनुभवी व्यक्ति की सलाह अवश्य लें लाभ नहीं तो नुकसान से भी बचेंगे। धन की आमद आश्चर्यजनक होने पर कई दिनों से लगा आर्थिक सूखा मिटेगा। लेकिन विविध खर्चे पहले ही सर पर रहने के कारण बचेगा नहीं। पारिवारिक वातावरण किसी न किसी बात पर आपकी इच्छा के विरुद्ध ही रहेगा। इस कारण घर से ज्यादा बाहर समय बिताना पसंद करेंगे। भाई बंधुओं से अति आवश्यक होने पर ही बात करें अन्यथा आपको व्यर्थ की बातों में उलझाकर कलह कर सकते हैं। आज यात्रा से बचे वाहन अथवा उपकरणों से भी सावधानी रखें।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन आपके लिए सामान्य फलदायक रहेगा। दिन के आरंभ में माता अथवा किसी अन्य परिजन से मतभेद हो सकते हैं। इसका प्रमुख कारण आपके अंदर अतिआत्मविश्वास एवं परिजनों के विरुद्ध कार्य करना होगा। कार्य क्षेत्र पर आज थोड़ी तेजी रहेगी धन की आमद थोड़े से प्रयास के बाद हो जाएगी लेकिन कार्य करते हुए भी मन में अनजाना भय रहने से खुलकर निर्णय नहीं ले पाएंगे। आज परिजन अथवा किसी अन्य विशेष व्यक्ति के कारण मानसिक बंधन भी अनुभव करेंगे। संध्या का समय दिन की अपेक्षा राहत भरा रहेगा। किसी प्रियजन से मुलाकात होगी सम्मान उपहार का आदान प्रदान मन को प्रसन्न रखेगा। आज दिनभर जिस व्यक्ति को दोष देंगे संध्या के आसपास वही किसी महत्वपूर्ण कार्य को बनाने में सहयोगी बनेगा। सरकारी कार्य बनाने के लिए धन खर्च करना पड़ेगा। आज किसी गुम चोट अथवा गुप्त रोग के कारण परेशानी हो सकती है।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन आपके लिए विपरीत फलदायक रहेगा। आप अपनी ही गलती से शत्रु वृद्धि करेंगे। दिन के आरंभ में किसी पारिवारिक सदस्य से व्यर्थ की जिद बहस होगी इसका निर्णय कुछ नहीं निकलेगा लेकिन परिवार में अशांति फैलेगी। आज अध्यात्म के प्रति कुछ ज्यादा आस्था नहीं रहेगी फिर भी कार्यक्षेत्र पर पूर्व में किए किसी परोपकार का फल धन लाभ के रुप में मिल सकता है। कार्यक्षेत्र पर सहकर्मी अथवा अधीनस्थ निजी स्वार्थ पूर्ति के लिए आपके गलत निर्णय पर भी हां में हां मिलाएंगे। कई दिनों से अटके सरकारी कार्य प्रयास करने पर या तो तुरंत बन जाएंगे अथवा परिणाम आप के विरुद्ध जा सकता है। संध्या का समय मित्र परिचितों के साथ आनंद में बिताएंगे लेकिन मित्र मंडली में बैठते समय आज भावुक होने से बचे अन्यथा सार्वजनिक क्षेत्र पर अपमान जैसी स्थिति बन सकती है। खानपान देखभाल कर करें पेट संबंधित परेशानी अन्य रोगों का कारण बन सकती है।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज के दिन आप व्यर्थ की उलझन में फंस सकते हैं। सार्वजनिक क्षेत्र पर वाणी एवं व्यवहार का प्रयोग बहुत सोच-समझकर करें कोई व्यक्ति केवल अपने मनोरंजन के लिए आपको विविध प्रकार से परख सकता है। कार्यक्षेत्र पर बुद्धि विवेक एवं धैर्य का परिचय देंगे लेकिन आज ना चाहकर भी उधार के व्यवहार बढ़ने से आर्थिक विषमताओं का सामना करना पड़ेगा। दोपहर के बाद धन लाभ के अवसर उपलब्ध होंगे फिर भी आर्थिक आमद संतोष प्रदान नहीं कर पाएगी। आज आप लंबी यात्रा की योजना भी बनाएंगे। संध्या बाद का समय सभी प्रकार से संतोषजनक रहेगा मित्र परिजनों के साथ वाहन उत्तम भोजन का सुख मिलेगा। सेहत भी आज के बीते दिन की तुलना में ठीक ही रहेगी फिर भी ठंडी वस्तुओं के प्रयोग से परहेज करें। बाहर ठीक रहेंगे पर घर में आते ही मन विचलित होगा।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज के दिन आप परिस्थिति अनुसार स्वयं को ढालने में सफल रहेंगे। आप की मानसिकता जितना मिल जाए उतने में संतोष करने की रहेगी। लेकिन परिजन विशेषकर परिवार के छोटे सदस्य अन्य लोगों की देखा-देखी किसी बहुमूल्य कार्य अथवा वस्तु के लिए जिद कर आपको दुविधा में डालेंगे। आज व्यवसायी हो या नौकरीपेशा दैनिक सुख सुविधा की पूर्ति के लिए किसी को भी ज्यादा भाग दौड़ करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी नहीं आप इसके पक्ष में रहेंगे। कार्य क्षेत्र से धन की आमद मध्यान्ह के बाद अक्समात बढ़ेगी। आज पुराने आर्थिक व्यवहार के कारण किसी से कहासुनी होने की संभावना है। घर का वातावरण भी कुछ समय के लिए उग्र होगा लेकिन आपके नरम व्यवहार के कारण गंभीर रूप धारण नहीं कर पाएगा। संध्या का समय दिन भर की उलझन को भुलाकर शांति से बिताएंगे। लेकिन भविष्य की चिंता मन में लगी ही रहेगी। किसी न किसी रूप में चोट घाव का भय है।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज के दिन आप का मन वर्जित कार्यों के प्रति सहज आकर्षित होगा। स्वभाव में भावुकता भी अधिक रहेगी किसी की कही सुनी बातों पर तुरंत विश्वास कर लेंगे। जिसके परिणाम स्वरुप बाहरी संपर्कों की हानि एवं बदनामी हो सकती है। कार्यक्षेत्र पर उतार चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा नौकरी पेशा जातक फिर भी परिस्थिति अनुसार स्वयं को ढाल लेंगे लेकिन व्यवसायी वर्ग को ऐसा करने में परेशानी होगी। फिर भी धन लाभ आज एक से अधिक मार्ग से होगा भले ही थोड़ी थोड़ी मात्रा में ही हो। पारिवारिक वातावरण में असंतोष की भावना रहेगी। स्वयं अथवा परिजन के अनैतिक आचरण के कारण पड़ोसी अथवा किसी अन्य से झगड़ा होने की संभावना है। व्यर्थ के खर्चों पर नियंत्रण रखना आवश्यक है अन्यथा ऋण वृद्धि होगी। पैतृक सुख सुविधा की वृद्धि के चक्कर में शत्रु वृद्धि के साथ शारीरिक कष्ट भी उठाना पड़ेगा। किसी भी आकस्मिक घटना दुर्घटना के लिए पहले से ही तैयार रहें।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन आपके लिए हानिकारक रहेगा। आप किसी भी कार्य को पूरी तरह से देखे भाले बिना ही अपना निर्णय देंगे अथवा बिना जांच पड़ताल किए उस पर कार्य आरंभ कर देंगे। इस कारण बाद में आर्थिक हानि के साथ समय भी बर्बाद होगा। कारोबारियों को आज कम समय में अथवा कम निवेश में ज्यादा लाभ कमाने के प्रलोभन मिलेंगे इनको बिना सोचे समझे ही मना कर दें यही आपके लिए हितकर रहेगा। धन की आमद ले-देकर कामचलाऊ हो ही जाएगी लेकिन मन को संतोष नहीं होगा। परिवार में आज अपने बुद्धि विवेक से तालमेल बैठाए रखेंगे। लेकिन घर के छोटे सदस्य एवं महिलाओं को परिस्थिति अनुसार ढालने में असमर्थ होंगे। संध्या के बाद परिस्थिति में धीरे-धीरे सुधार आने लगेगा फिर भी आर्थिक व्यवहार आज किसी से ना करें। रक्तचाप की शिकायत हो सकती है। वाहन आदि से भी सतर्कता बरतें।

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