🙏🏻 हर हर महादेव🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 06 सितम्बर 2025*
🌤️ *दिन – शनिवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शरद ऋतु*
🌤️ *मास – भाद्रपद*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – चतुर्दशी 07 सितम्बर रात्रि 01:41 तक तत्पश्चात पूर्णिमा*
🌤️ *नक्षत्र – धनिष्ठा रात्रि 10:55 तक तत्पश्चात शतभिषा*
🌤️ *योग – अतिगण्ड सुबह 11:52 तक तत्पश्चात सुकर्मा*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 09:30 से सुबह 11:03 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:24*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:49*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – अनंत चतुर्दशी, श्रीगणेश महोत्सव समाप्त, श्रीगणेश विसर्जन, पंचक (आरंभ:दोपहर 11:21)*
💥 *विशेष – चतुर्दशी, पूर्णिमा व व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
🌷 *चंद्र ग्रहण मंत्र* 🌷
👉🏻 *07 सितम्बर 2025 रविवार को खंडग्रास चन्द्रग्रहण (भारत में दिखेगा, नियम पालनीय) ग्रहण समय रात्रि 09:57 से मध्यरात्रि 01:26*
🌔 *जब भी चंद्र ग्रहण हो तो एक माला नीचे मंत्र की करें :-*
🌙 *मंत्र – ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम: | …. ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम: | …. ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:*
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🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *ग्रहण में क्या करें, क्या न करें* 🌷
🌘 *चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फल होता है। श्रेष्ठ साधक उस समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का आठ हजार जप करने के पश्चात ग्रहणशुद्धि होने पर उस घृत को पी ले। ऐसा करने से वह मेधा (धारणशक्ति), कवित्वशक्ति तथा वाक् सिद्धि प्राप्त कर लेता है।*
🌘 *सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक ‘अरुन्तुद’ नरक में वास करता है।*
🌘 *सूर्यग्रहण में ग्रहण चार प्रहर (12 घंटे) पूर्व और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर (9) घंटे पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बूढ़े, बालक और रोगी डेढ़ प्रहर (साढ़े चार घंटे) पूर्व तक खा सकते हैं।*
🌘 *ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए।*
🌘 *ग्रहण वेध के प्रारम्भ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यंतआवश्यक परिस्थिति में ही करना चाहिए और ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए।*
🌘 *ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य के समय होम, देव-पूजन और श्राद्ध तथा अंत में सचैल (वस्त्रसहित) स्नान करना चाहिए। स्त्रियाँ सिर धोये बिना भी स्नान कर सकती हैं।*
🌘 *ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए।*
🌘 *ग्रहणकाल में स्पर्श किये हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए।*
🌘 *ग्रहण के स्नान में कोई मंत्र नहीं बोलना चाहिए। ग्रहण के स्नान में गरम जल की अपेक्षा ठंडा जल, ठंडे जल में भी दूसरे के हाथ से निकाले हुए जल की अपेक्षा अपने हाथ से निकाला हुआ, निकाले हुए की अपेक्षा जमीन में भरा हुआ, भरे हुए की अपेक्षा बहता हुआ, (साधारण) बहते हुए की अपेक्षा सरोवर का, सरोवर की अपेक्षा नदी का, अन्य नदियों की अपेक्षा गंगा का और गंगा की अपेक्षा भी समुद्र का जल पवित्र माना जाता है।*
🌘 *ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्रदान से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।*
🌘 *ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ने चाहिए। बाल तथा वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिए व दंतधावन नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मल-मूत्र का त्याग, मैथुन और भोजन – ये सब कार्य वर्जित हैं।*
🌘 *ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।*
🌘 *ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से सुअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है। गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए।*
🌘 *तीन दिन या एक दिन उपवास करके स्नान दानादि का ग्रहण में महाफल है, किन्तु संतानयुक्त गृहस्थ को ग्रहण और संक्रान्ति के दिन उपवास नहीं करना चाहिए।*
🌘 *भगवान वेदव्यासजी ने परम हितकारी वचन कहे हैं- ‘सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना और सूर्यग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है। यदि गंगाजल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्यग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है।’*
🌘 *ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम-जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है।*
🌘 *ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से बारह वर्षों का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो जाता है। (स्कन्द पुराण)*
🌘 *भूकंप एवं ग्रहण के अवसर पर पृथ्वी को खोदना नहीं चाहिए।(देवी भागवत)*
🌘 *अस्त के समय सूर्य और चन्द्रमा को रोगभय के कारण नहीं देखना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्णजन्म खं. 75.24)*
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🕉️ ~ *वैदिक पंचांग* ~ 🕉️,
*किसने की पता नहीं पर ताश के 52 पत्ते और दो जोकर पर जो रिसर्च हुई है सो प्रस्तुत है!*
ताश के पत्तों में कुछ महानुभाव ज्योतिष्य ज्ञान का प्रतिफल युक्त गणित आजमाते है, आप भी देखें: अपने पूर्वजों का ज्ञानार्जन ….
…….!! *ताश का मर्म* !!……
हम ताश खेलते है, अपना मनोरंजन करते है। पर शायद कुछ ही लोग जानते होंगे कि *ताश का आधार वैज्ञानिक है* व साथ साथ ही *प्रकृति* से भी जुड़ा हुआ है :-
आयताकार मोंटे कागज़ से बने पत्ते चार प्रकार के ….. ईंट, पान, चिड़ी, और हुक्म, प्रत्येक 13 पत्तों को मिलाकर कुल 52 पत्ते होते हैं।
पत्ते…. एक्का से दस्सा, गुलाम, रानी एवं राजा
1. 52 पत्ते …….52 सप्ताह
2. 4 प्रकार के पत्ते …. 4 ऋतु
3. प्रत्येक रंग के 13 पत्ते…. प्रत्येक ऋतु में 13 सप्ताह
4. सभी पत्तों का जोड़ ..1 से 13 = 91 × 4 = 364
5. एक जोकर….. 364+1= 365 दिन…1 वर्ष
6. दूसरा जोकर गिने..365 +1=366 दिन..लीप वर्ष
7. 52 पत्तों में 12 चित्र वाले पत्ते – 12 महिने
8. लाल और काला रंग … दिन और रात!
*पत्तों का अर्थ:-*
1 *दुक्की* – पृथ्वी और आकाश
2 *तिक्की*- ब्रम्हा, विष्णू, महेश
3. *चौकी* – चार वेद (अथर्व वेद, सामवेद, ऋग्वेद, यजुर्वेदे )
4. *पंजी* – पंच प्राण (प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान)
5. *छक्की* – षड रिपू (काम, क्रोध, मद, मोह, मत्सर, लोभ)
6. *सत्ती*- सात सागर
7. *अटठी*- आठ सिद्धी
8. *नव्वा*- नौ ग्रह
9. *दस्सी*- दस इंद्रियां
10. *गुलाम*- मन की वासना
11. *रानी*- माया
12. *राजा* – शासक
13. *ईक्का- एक ईश्वर*
मित्रो अवश्य पढ़ें। आनंद के साथ साथ ज्ञान भी। *भारतीय संस्कार और परंपरा को नमन* जो हर कार्य में अच्छाई ढूंढ लेती हुई।
दृष्टिकोण दृष्टि बदल देता है
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🕉️ ~ *वैदिक पंचांग* ~ 🕉️
*🌳🦚आज की कहानी🦚🦚*
*💐💐बदलाव💐💐*
बूढ़े दादा जी को उदास बैठे देख बच्चों ने पूछा , “क्या हुआ दादा जी , आज आप इतने उदास बैठे क्या सोच रहे हैं ?”
“कुछ नहीं , बस यूँही अपनी ज़िन्दगी के बारे में सोच रहा था !”, दादा जी बोले ।
“जरा हमें भी अपनी लाइफ के बारे में बताइये न …”, बच्चों ने ज़िद्द्द की ।
दादा जी कुछ देर सोचते रहे और फिर बोले , “ जब मैं छोटा था , मेरे ऊपर कोई जिम्मेदारी नहीं थी , मेरी कल्पनाओं की भी कोई सीमा नहीं थी …. मैं दुनिया बदलने के बारे में सोचा करता था …
जब मैं थोड़ा बड़ा हुआ …बुद्धि कुछ बढ़ी ….तो सोचने लगा ये दुनिया बदलना तो बहुत मुश्किल काम है …इसलिए मैंने अपना लक्ष्य थोड़ा छोटा कर लिया … सोचा दुनिया न सही मैं अपना देश तो बदल ही सकता हूँ ।
पर जब कुछ और समय बीता , मैं अधेड़ होने को आया … तो लगा ये देश बदलना भी कोई मामूली बात नहीं है …हर कोई ऐसा नहीं कर सकता है …चलो मैं बस अपने परिवार और करीबी लोगों को बदलता हूँ …
पर अफ़सोस मैं वो भी नहीं कर पाया और अब जब मैं इस दुनिया में कुछ दिनों का ही मेहमान हूँ तो मुझे एहसास होता है कि बस अगर मैंने खुद को बदलने का सोचा होता तो मैं ऐसा ज़रूर कर पाता …और हो सकता है मुझे देखकर मेरा परिवार भी बदल जाता …और क्या पता उनसे प्रेरणा लेकर ये देश भी कुछ बदल जाता … और तब शायद मैं इस दुनिया को भी बदल पाता !
ये कहते-कहते दादा जी की आँखें नम हो गयीं और वे धीरे से बोले, “बच्चों ! तुम मेरी जैसी गलती मत करना …कुछ और बदलने से पहले खुद को बदलना …बाकि सब अपने आप बदलता चला जायेगा।
*शिक्षा*
मित्रों, हम सभी में दुनिया बदलने की ताकत है पर इसकी शुरआत खुद से ही होती है । कुछ और बदलने से पहले हमें खुद को बदलना होगा …हमें खुद को तैयार करना होगा …अपने कौशल को मजबूत करना होगा …अपने attitude को सकारात्मक बनाना होगा …अपने लक्ष्य को फौलाद करना होगा …और तभी हम वो हर एक बदलाव ला पाएंगे जो हम सचमुच लाना चाहते हैं।
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🕉️ ~ *वैदिक पंचांग* ~ 🕉️
कर्मों का फल
बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गाँव में रामलाल नाम का एक किसान रहता था। मेहनती, सरल और ईमानदार रामलाल का जीवन अपनी पत्नी के साथ बड़े स्नेह और संतोष से बीत रहा था। शादी के कुछ वर्षों बाद उन्हें एक बेटा हुआ, जिससे उनका परिवार पूर्ण हो गया। लेकिन जब बेटा पाँच साल का हुआ, तभी अचानक उसकी पत्नी की बीमारी से मृत्यु हो गई।
पत्नी की मृत्यु के बाद रामलाल का जीवन वीरान हो गया। रिश्तेदारों और दोस्तों ने उसे समझाया, “रामलाल, दूसरी शादी कर लो। बच्चे की देखभाल भी हो जाएगी और तुम्हारा जीवन भी आसान हो जाएगा।” शुरू में वह नहीं माना, लेकिन दो-तीन साल बाद उसने महसूस किया कि बेटे के भविष्य के लिए एक माँ की ज़रूरत है। अंततः उसने दूसरी शादी कर ली।
नई पत्नी से भी उसे एक बेटा हुआ। लेकिन दुर्भाग्य से, कुछ ही वर्षों में उसकी दूसरी पत्नी की भी मृत्यु हो गई। अब रामलाल अकेला था, लेकिन उसके पास दोनों बेटे थे। उसने बच्चों की परवरिश पूरी मेहनत से की।
समय बीतता गया। बड़ा बेटा शादी के लायक हुआ तो रामलाल ने उसकी शादी धूमधाम से कर दी। लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद, रामलाल की भी मृत्यु हो गई। अब घर में बड़ा बेटा, उसकी पत्नी और छोटा सौतेला भाई साथ रहने लगे।
बड़ा भाई और भाभी छोटे भाई का ख्याल तो रखते थे, लेकिन मन के किसी कोने में यह बात चुभती रहती थी कि वह सौतेली माँ का बेटा है। धीरे-धीरे समय बीतता गया, पर नियति को कुछ और ही मंजूर था। छोटा भाई अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। बड़े भाई ने इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी — वैद्य, हकीम, डॉक्टर, सबको दिखाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
एक रात बड़े भाई और भाभी आपस में बैठकर बात कर रहे थे। भाभी बोली, “इतना खर्चा हो चुका है, फायदा कुछ नहीं। अगर यह बच गया तो प्रॉपर्टी का आधा हिस्सा भी इसे देना पड़ेगा।” बड़े भाई ने सोचा और धीरे से कहा, “सही कहती हो, अगर यह नहीं रहा तो किसी को शक भी नहीं होगा।”
अगले दिन बड़े भाई ने वैद्य से बात की और लालच में उसे पैसे देकर कहा, “अब दवा की जगह जहर देना।” वैद्य भी पैसे के प्रलोभन में आ गया। दवा के नाम पर जहर दिया जाने लगा और कुछ ही दिनों में छोटे भाई की मृत्यु हो गई।
भैया-भाभी ने सोचा अब हमारा जीवन सुख से बीतेगा। समय बीता, उन्हें एक बेटा हुआ, जिसका उन्होंने बड़े लाड़-प्यार से पालन-पोषण किया। बेटे की शादी भी धूमधाम से करवाई। सबकुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन अचानक नियति ने करवट ली। उनका बेटा गंभीर बीमारी में पड़ गया। इलाज पर उन्होंने सब कुछ खर्च कर दिया, खेत-बाड़ी, गहने, घर का धन — सब बिक गया, लेकिन बेटे की सेहत नहीं लौटी।
एक दिन बेटा चारपाई पर लेटा था, पिता उसके पास बैठे थे। बेटा धीरे से बोला,
“भैया… हिसाब-किताब पूरा हो गया है। बस कफन और लकड़ी का इंतज़ाम बाकी है, फिर मैं चला जाऊंगा।”
पिता चौंक गए, बोले, “बेटा! मैं तुम्हारा पिता हूँ, भैया नहीं।”
बेटे ने मुस्कुराते हुए कहा,
“नहीं, आप मेरे भैया हैं। वही भैया… जिसने लालच में आकर मुझे दवा की जगह जहर देकर मारा था। मैंने इस जन्म में तुम्हारे घर बेटे का रूप लिया, ताकि कर्मों का हिसाब पूरा हो सके। जिस वैद्य ने जहर दिया था, वह कुछ ही सालों में मर गया और इस जन्म में मेरी पत्नी बनकर आई थी। वह भी जा चुकी है। अब मेरा काम भी पूरा हो गया है। बस ध्यान रखना… कर्मों का फल यहीं चुकाना पड़ता है।”
इतना कहकर बेटे ने अपनी आँखें बंद कर लीं।
बड़ा भाई, जो अब बूढ़ा हो चुका था, चीख-चीखकर रोने लगा। उसे समझ आ चुका था कि अपने छोटे भाई के साथ किया अन्याय आज उसी के जीवन की सबसे बड़ी सजा बन गया है।
कहानी का सार:
इस छोटी-सी घटना से हमें यही शिक्षा मिलती है कि कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है। चाहे वह अच्छा हो या बुरा, जो भी हम करते हैं, उसका परिणाम हमें इसी जन्म में या अगले जन्म में जरूर चुकाना पड़ता है। इसलिए अपने कर्मों पर ध्यान दें, किसी का अहित न करें, क्योंकि जो हम देंगे, वही लौटकर हमारे पास आएगा।
“कर्म करो, फल की चिंता मत करो;
लेकिन याद रखो — कर्म का फल कभी व्यर्थ नहीं जाता।”
🙏राधे राधे🙏
🕉️ ~ वैदिक पंचांग ~ 🕉️
🌿🌼 *काकभुशुण्डिजी की आत्मकथा*🌼🌿
श्रीरामचरितमानसके उत्तरकाण्डमें काकभुशुण्डि और गरुड़जीका बृहत् संवाद मिलता है। काकभुशुण्डि नीलगिरिमें निवास करते हैं। वे रामकथाके पारंगत व्याख्याता हैं। उनसे रामकथा सुननेके लिये अनेक पक्षी वहाँ आते हैं। मोहग्रस्त गरुड़ भी निज-सन्देह-निवारणार्थ उनके आश्रममें पहुँचते हैं। काकभुशुण्डि उन्हें विस्तारपूर्वक रामकथा सुनाकर उनका भ्रम दूर करते हैं। पश्चात् गरुड़के पूछनेपर काकभुशुण्डि उनको अपने दो जन्मोंका वृत्तान्त सुनाते हैं।
वे कहते हैं- हे खगेश ! भगवान् आशुतोषके अपरिमित प्रसादसे मुझे अपने सभी पूर्वजन्मोंका ज्ञान एवं स्मृति प्राप्त है। अब मैं अपने दो जन्मोंका इतिवृत्त आपको सुनाता हूँ।
पूर्व कल्पके किसी कलियुगमें मेरा जन्म अयोध्यापुरी में शूद्र वर्णमें हुआ था। मैं उस जन्ममें मन, वाणी और कर्मसे शिवका परम भक्त तो था, परंतु अन्य देवताओंकी निन्दा भी किया करता था। धन-वैभवसे सम्पन्न होनेके कारण मैं वाचाल एवं अहंकारी हो गया था। मैं दम्भ एवं पाखण्डकी सीमाएँ पार कर चुका था। उस समय मैं रामनगरीकी महिमासे पूर्णतः अनभिज्ञ था। उस भयंकर कलिकालमें मैंने चिरकालतक अयोध्यापुरीमें निवास किया।
एक बार वहाँ भयंकर दुष्काल पड़ा। पूरे अवध- मण्डलमें हाहाकार मच गया। अन्न-जलके अभावमें लोग मरने लगे। उस भीषण परिस्थितिमें मैं भी दीन, हीन, दरिद्र हो गया। धनार्जनके लिये भटकते-भटकते मैं महाकालकी नगरी उज्जैनी जा पहुँचा। दो-तीन वर्ष व्यतीत होनेपर मैंने थोड़ा-थोड़ा करके पर्याप्त धन अर्जित कर लिया। सौभाग्यवश एक भव्य शिवमन्दिरमें स्थान भी मिल गया और मैं वहीं रहकर नियमित रूपसे शिवकी उपासना करने लगा। वहींपर मुझे एक शिवभक्त वैदिक ब्राह्मण भी मिल गये। वे हरि एवं हरके अनन्य उपासक थे। मैं कपटपूर्वक उनकी सेवा किया करता था, फिर भी वे दयालु विप्रदेवता मुझे अपने पुत्रकी भाँति पढ़ाते थे। उन्होंने मुझे बड़े प्रेमसे शिवमन्त्रकी दीक्षा भी दी। मैं स्वभावसे बहुत ही कुटिल और नीच था, विष्णु और विष्णुभक्तोंसे सदैव ईर्ष्या-द्वेष रखता था। मेरे उदार गुरुजीने बताया कि राम ही चिन्मय-परात्पर ब्रह्म हैं। ब्रह्मा और शिव भी निरन्तर रामकी सेवा करते रहते हैं। गुरुके मुखसे अपने आराध्य शिवको विष्णुका सेवक सुनकर मेरा
हृदय सन्तप्त हो उठा। एक बार मैं उसी शिवमन्दिरमें बैठा हुआ शिव-मन्त्र का जप कर रहा था। उसी समय मेरे गुरुजी ने मन्दिरमें प्रवेश किया। वहाँ भी अहंकारके वशीभूत होकर मैंने गुरुचरणोंमें प्रणाम नहीं किया। यद्यपि यह अशिष्ट और दुर्विनीत आचरण क्षमाके योग्य नहीं था, तथापि कुसुमके समान कोमल चित्तवाले गुरुदेवको मुझपर लेशमात्र भी क्रोध नहीं आया। परंतु गुरुदेवके इस अपमानको भगवान् आशुतोष नहीं सहन कर सके। तुरन्त ही मन्दिरमें नभवाणी हुई और मुझे सर्प होनेका दारुण शाप मिला। मेरी दयनीय स्थितिसे द्रवीभूत होकर गुरुदेवने स्वरचित स्तोत्रसे शिवजीकी स्तुति की। उनकी स्तुतिसे आशुतोष शीघ्र ही सन्तुष्ट हो गये और मुझपर वरदानोंकी झड़ी लगा दी – ‘जन्म और मृत्युके समय प्राणीको जो भयंकर कष्ट होता है, वह तुम्हें स्वल्पमात्र भी नहीं होगा। जन्म-जन्मान्तरकी स्मरण-शक्ति कभी नष्ट नहीं होगी। मेरी कृपासे अब तुम्हारे हृदयमें अखण्ड रामभक्तिका उदय होगा। तुम्हारी यातायात शक्ति तीनों लोकोंमें अव्याहत रूपसे कार्य करेगी। तुम्हारे लिये संसारमें कुछ भी दुर्लभ नहीं होगा।’
निश्चय ही इन आशीर्वचनोंकी बौछार गुरुकृपाका ही फल है। शिव-शापके कारण मैं तत्काल सर्पाकृतिमें परिणत हो गया और विन्ध्यगिरिके गहन वनमें जाकर निवास करने लगा। कालान्तरमें मैंने सर्पदेहका त्याग किया। पुनः मैंने न जाने कितनी बार जन्म लिया और बिना किसी पीड़ाके अनायास ही शरीरका त्याग किया। प्रत्येक जन्ममें मेरी स्मृति, भक्ति, शक्ति एवं गति अकुण्ठित रहती थी।
हे पक्षिराज ! अब मैं आपको अपने वर्तमान जन्मकी कथा सुनाता हूँ। मेरा जन्म ब्राह्मणकुलमें हुआ, किंतु इस समय मैं आपको काकशरीरमें दिखायी पड़ रहा हूँ। अब मैं आपकी इस जिज्ञासाको भी शान्त करूँगा कि मैं मनुष्योंमें सर्वश्रेष्ठ विप्रदेहसे चाण्डालपक्षी (काक)- शरीरको कैसे प्राप्त हो गया। वर्तमान जन्ममें बाल्यावस्थासे ही मेरा मन प्रभु श्रीरामके चरणकमलोंमें अनुरक्त रहता था। मैं श्रीरामके सगुण-साकाररूपका उपासक था। निर्गुण-निराकार ब्रह्मकी उपासना मुझे रुचिकर नहीं लगती थी। मैं मुनियोंके आश्रममें जाकर श्रीरघुनाथजीके गुण, स्वभाव, चरित्र, यश, लीला आदिका श्रवण- कीर्तन, स्मरण करते हुए समय-यापन किया करता था। यही मेरी प्रिय दिनचर्या थी।
सुमेरु (मेरु) गिरिके उत्तुंग शिखरपर एक विशाल वट वृक्षके नीचे महर्षि लोमशका पवित्र आश्रम था।
पर्यटन करते हुए मैं उनके आश्रम जा पहुँचा और उनके श्रीचरणोंमें मस्तक झुकाकर प्रणाम किया। पहले तो मैंने अपना सम्यक् परिचय दिया। तत्पश्चात् उनके पूछनेपर अपने वहाँ आनेका प्रयोजन बताया। ‘मैं सगुण ब्रह्मकी उपासना-पद्धतिका ज्ञान प्राप्त करनेके लिये आपके चरणोंमें उपस्थित हुआ हूँ। मैं अपने प्रभु श्रीरामके सगुण-साकार रूपका साक्षात्कार करना चाहता हूँ। कृपया इस प्रयोजन-सिद्धिमें यथोचित मार्गदर्शन कीजिये।’ किंतु इसके विपरीत, महर्षिने अपना निर्गुण पक्ष मेरे सामने प्रस्तुत किया। मैंने उसे काटकर अपना सगुण पक्ष उनके समक्ष स्थापित किया। इस प्रकार अपने मतका खण्डन देखकर लोमशजीका मुखमण्डल क्रोधसे आरक्त हो गया, भृकुटी वक्र हो गयी, अधर फड़कने लगे और उसी क्षण ही उन्होंने मुझे चाण्डाल पक्षी (काक) हो जानेका प्रचण्ड शाप दे दिया। मैंने अत्यन्त विनीत भावसे उनके शापको अंगीकार कर लिया और तत्काल द्विजदेहसे काकशरीरको प्राप्त हो गया; तभीसे मेरा नया नाम
‘काकभुशुण्डि’ हो गया। मेरे मतका खण्डन करनेमें महर्षिका लेशमात्र भी दोष नहीं था। मैं तो यही मानता हूँ कि श्रीरघुनाथजी मेरी सगुण भक्तिकी परीक्षा लेना चाहते थे।
इस परीक्षामें मैं पूर्णतः सफल हो गया। भगवान्ने मन, वाणी और कर्मसे मुझे अपना सेवक जानकर महर्षिकी मतिको पुनः पूर्ववत् स्थिर कर दिया। वे अनुतापकी अग्निमें जलने लगे। मेरी विनम्रतासे सन्तुष्ट होकर उन्होंने मुझे स्नेहपूर्वक अपने पास बैठाया और प्रफुल्लित मनसे ‘राममन्त्र’ प्रदान किया। उन्होंने मेरे इष्ट बालरूप रामकी ध्यानविधिको अच्छी तरह समझाया।
कृपालु लोमशजीने मुझे अपने आश्रममें बहुत दिनोंतक रोककर अतिशय पावनी रामकथाको विस्तारसे सुनाया। उन्होंने मुझे यह बताया कि उनको यह भवभयमोचनी रामकथा भगवान् शंकरसे प्राप्त हुई थी।
रामकथा सुननेके पश्चात् मैंने महर्षि लोमशको नतमस्तक होकर प्रणाम किया। उन्होंने मेरे ऊपर आशीर्वचनोंकी झड़ी लगा दी, जिसके प्रभावसे मुझे भगवान् रामकी अविरल भक्ति प्राप्त हो गयी; मैं इच्छानुसार शरीर धारण करनेमें समर्थ हूँ; मुझे ज्ञान- विज्ञानादि सब कुछ प्राप्त है; मेरी सभी मनोकामनाएँ फलीभूत हैं; मेरा मोह नष्ट हो चुका है। लोमशजीकी अनुमति पाकर, उनको बार-बार प्रणाम करके मैं इसी नीलशैलपर चला आया, जो सुमेरुपर्वतसे सुदूर उत्तरमें स्थित है। यहींपर मेरा आश्रम है। मेरे आश्रमके चारों ओर एक योजन (चार कोश) तक कहीं भी अविद्याका प्रभाव नहीं पड़ सकता- यह भी महर्षि लोमशका आशीर्वाद है।
मुझे इस नीलशैलमें निवास करते हुए सत्ताईस कल्प बीत चुके हैं। मैं प्रतिदिन नियमित समयचक्रानुसार रामकथा कहता हूँ, जिसको सुननेके लिये नाना प्रकारके पक्षी यहाँ आया करते हैं।
हृदयाभिराम कविधाम बालरूप भगवान् राम ही मेरे इष्टदेव हैं। भक्तोंका कल्याण करनेके लिये जब जब त्रेतायुगमें भगवान् राम अवधपुरीमें मनुजरूपमें अवतार लेते हैं, तब-तब काकशरीरधारी मैं वहाँ पाँच वर्षपर्यन्त रहकर अपने इष्टदेव बालरूप रामकी मनोमुग्धकारिणी अद्भुत छवि एवं उनकी मधुर-सरस लीलाओंका आनन्द लेता हूँ।
एक बार अपने इष्टदेवको शिशुओंकी भाँति लीला करते हुए देखकर मेरे मनमें भी मोहका अंकुरण हो गया। यह भी उन्हींकी मायाका प्रभाव था। बालक्रीड़ा करते हुए उन्होंने मुझे पकड़नेके लिये अपना नन्हा-सा हाथ फैलाया। मैं भी अपनी रक्षाके लिये खेल-ही-खेलमें उड़ने लगा, फिर भी उनका हाथ मेरे पास ही दिखायी पड़ा। यहाँतक कि मैं आकाशमें उड़ते-उड़ते ब्रह्मलोकतक जा पहुँचा। वहाँ भी उनका हाथ मेरे अति समीप दिखायी पड़ा। भगवान् शिवके वरदानसे मैं किसी भी लोकमें अबाध गतिसे जा सकता था। ब्रह्मलोकके ऊपर भी रामकी भुजाको अपने अति सन्निकट देखकर मैंने घबराहटसे अपने नेत्रोंको बन्द कर लिया, फिर जब मेरे नेत्र खुलते हैं, तब मैं अपने आपको पुनः अयोध्यापुरीमें पाता हूँ। मेरी व्यग्रता देखकर परम कौतुकी रामको अनायास ही हँसी आ गयी। उनके हँसते ही मैं उनके मुख-द्वारसे प्रवेश करके उदरमें चला गया। प्रभु रामके उदरमें मैंने अनेकानेक ब्रह्माण्ड एवं नाना प्रकारकी विचित्र सृष्टियोंका अवलोकन किया। वहींपर भ्रमण करते हुए मैं अपने आश्रम (नीलशैल) पहुँच गया। उदरके अन्दर ही मैंने सुना कि मेरे इष्टदेव रामने अयोध्यापुरीमें मनुजरूपमें अवतार लिया है। इतना सुनते ही मैं वहाँ पहुँचकर उनका जन्मोत्सव एवं उनकी मनोहारिणी बालसुलभ चेष्टाएँ देख-देखकर आनन्दित होता हूँ। वस्तुतः इन सब प्रपंचोंको देखनेमें केवल दो घड़ीका समय ही व्यतीत हुआ, किंतु मुझे ऐसा लगा मानों एक सौ कल्प बीत गये हों। रामके भीतर रामको देखकर मेरी बुद्धि चकरा गयी। मुझे आर्त देखकर रामको पुनः हँसी आ गयी। उनके हँसते ही मैं उनके मुखसे बाहर आ गया और अत्यन्त दीनभावसे प्रार्थना करने लगा- ‘हे कृपानिधान! मेरी रक्षा करो, मैं आपकी शरणमें हूँ।’ मेरी करुण पुकार सुनकर मायाधीश भगवान् रामने अपनी मायाको नियन्त्रित कर लिया और मेरे सिरपर अपना कोमल करकमल रख दिया, जिससे मेरा सारा मोह, अज्ञान एवं भ्रम नष्ट हो गया, मेरे ज्ञानचक्षु खुल गये।
मैंने रामसे केवल अखण्ड भक्तिका वरदान ही माँगा था, किंतु उन्होंने भक्तिके साथ-साथ मुझे ज्ञान- विज्ञान-वैराग्य आदि दुर्लभ वस्तुएँ भी दे दीं। उन्होंने मुझसे कहा, ‘जड़-चेतनमय अखिल जगत् मेरी मायासे ही उत्पन्न है। मेरी माया दुस्तर है। आजसे तुम्हारे ऊपर मेरी मायाका प्रभाव नहीं पड़ेगा। काल तुम्हारे आगे सदा नतमस्तक रहेगा।’
इतना कहनेके पश्चात् वे पुनः अपने राजभवनके मणिजटित विशाल एवं भव्य प्रांगणमें जानुपाणि (घुटनोंके बल) चलते हुए अपनी मधुर लीलाओंसे कौसल्यादि माताओंका मनोविनोद करने लगे। मैं भी उनके साथ मिलकर क्रीड़ा करता। वे प्राकृत शिशुकी तरह मुझे पकड़नेके लिये दौड़ते, तब मैं उड़ जाता। कुछ दिन वहाँ रहनेके बाद मैं अपने आश्रममें लौट आया।
हे हरियान ! काकशरीर मुझे कैसे प्राप्त हुआ-यह सारा वृत्तान्त मैंने आपको सुनाया। इसी काकशरीरसे मुझे बालरूप श्रीरामका दर्शन प्राप्त हुआ, अतः यह शरीर मुझे अतिप्रिय है।
🕉️ ~ *वैदिक पंचांग* ~ 🕉️
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
आपका जन्मदिन: 6 सितंबर
दिनांक 6 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 6 होगा। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति आकर्षक, विनोदी, कलाप्रेमी होते हैं। आपमें गजब का आत्मविश्वास है। इसी आत्मविश्वास के कारण आप किसी भी परिस्थिति में डगमगाते नहीं है। आपको सुगंध का शौक होगा। आप अपनी महत्वाकांक्षा के प्रति गंभीर होते हैं। 6 मूलांक शुक्र ग्रह द्वारा संचालित होता है। अत: शुक्र से प्रभावित बुराई भी आपमें पाई जा सकती है। जैसे स्त्री जाति के प्रति आपमें सहज झुकाव होगा। अगर आप स्त्री हैं तो पुरुषों के प्रति आपकी दिलचस्पी होगी। लेकिन आप दिल के बुरे नहीं है।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 6, 15, 24
शुभ अंक : 6, 15, 24, 33, 42, 51, 69, 78
शुभ वर्ष : 2026
ईष्टदेव : मां सरस्वती, महालक्ष्मी
शुभ रंग : क्रीम, सफेद, लाल, बैंगनी
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
करियर: जो विद्यार्थी सीए की परीक्षा देंगे उनके लिए शुभ रहेगा। व्यापार-व्यवसाय में भी सफलता रहेगी। नौकरीपेशा व्यक्ति अपने परिश्रम के बल पर उन्नति के हकदार होंगे। बैंक परीक्षाओं में भी सफलता अर्जित करेंगे।
परिवार: विवाह के योग भी बनेंगे। स्त्री पक्ष का सहयोग मिलने से प्रसन्नता रहेगी। दाम्पत्य जीवन में मिली जुली स्थिति रहेगी।
इस बात का रखें ध्यान: आर्थिक मामलों में सभंलकर चलना होगा।
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन आपके लिए कोई नई समस्या लेकर आएगा। बुद्धि विवेक होते हुए भी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाएंगे। घर में संतान के कारण कोई ना कोई परेशानी लगी रहेगी। संतानों का अनापेक्षित अथवा उद्दंड व्यवहार मन को दुखी कर सकता है। कार्य क्षेत्र पर आपका कुशल व्यवहार एवं निर्णय लेने की क्षमता लोगों को पसंद आएगी लेकिन लाभ प्राप्त करने के लिए सहयोगी नहीं बनेगी। आज किसी की खुशामद अथवा कुछ उटपटांग कार्य करके ही लाभ प्राप्त किया जा सकता है। परंतु इससे शत्रु वृद्धि भी होनी संभव है। संध्या के आस-पास दिन भर की मेहनत रंग लाएगी धन लाभ किसी ना किसी साधन से अवश्य होगा। पारिवारिक जीवन में भाई बंधुओं के अतिरिक्त अन्य किसी से कोई अपेक्षा ना रखें। मध्यान्ह बाद सुखोपभोग में वृद्धि होने से मानसिक राहत मिलेगी। सेहत मानसिक तनाव को छोड़ सामान्य ही रहेगी।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज के दिन परिवार अथवा कार्य क्षेत्र पर पूर्व में बरती किसी अनियमितता के चलते अव्यवस्था अथवा अन्य उलझन बढ़ने का भय दिन के आरंभ से ही लगा रहेगा। दिन के आरंभ में पूर्व की गतिविधियों का अवलोकन करेंगे इन में सुधार करने का निर्णय लेंगे लेकिन परिस्थितिवश ऐसा कर नहीं पाएंगे। कार्यक्षेत्र पर आज किसी न किसी रूप में परिजन अथवा अन्य पैतृक संबंधी ही बाधक बन सकते हैं। लाभ कमाने के लिए आज जोखिम से ना घबराए जिस कार्य में झंझट लगेगा उससे बाद में कुछ ना कुछ लाभ अवश्य मिलेगा। धन की आमद संतोषजनक हो जाएगी। लेकिन बिना मानसिक एवं बौद्धिक परिश्रम किए सफल नहीं हो सकते। दांपत्य जीवन में आज सुख की कमी अनुभव होगी धैर्य से आज का दिन बताए रात्रि के बाद वातावरण में स्वत ही परिवर्तन आने लगेगा। किसी कुटुंबी जन के कारण यात्रा हो सकती है। सेहत में छुटपुट विकार लगे रहेंगे।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन बीते कल की तुलना में राहत भरा रहेगा सेहत में थोड़ा सुधार आएगा। फिर भी सेहत से संबंधित लापरवाही से बचें खासकर ज्यादा परिश्रम वाले कार्य ना करें। परिवार में आज पैतृक कारणों से खींचतान लगी रहेगी संध्या तक इसको अनदेखा करने का प्रयास करें इसके बाद स्थिति स्वतः ही सुधरने लगेगी कार्य व्यवसाय से आज भी आशा तो काफी लगा कर रखेंगे। लेकिन सोचे कार्य अंत समय में या तो बिगड़ेंगे अथवा आगे के लिए टलेंगे। आज व्यवसाय से संबंधित कोई वादा समय पर पूरा ना करने पर मन में अपमान का भय सताएगा। दैनिक खर्चों की पूर्ति जोड़ तोड़ कर हो ही जाएगी। आज आवश्यकता पड़ने पर जीवनसाथी अथवा किसी अन्य पारिवारिक सदस्य से आर्थिक मदद लेनी पड़ेगी इस कारण ताने भी सुनने को मिलेंगे। पेट, मूत्र संबंधित व्याधि अथवा जुखाम से परेशानी हो सकती है। यात्रा टालने का प्रयास करें हानि हो सकती है
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज के दिन आप बीते समय से मिल रही निराशा एवं असफलता के कारण धर्म से विमुख हो सकते हैं। दिन के आरंभिक भाग में थोड़ी शांति रहेगी। लेकिन दिन चढ़ते-चढ़ते विविध उलझनों में फंस जाएंगे फिर भी बीते कल की तुलना में आज थोड़ी राहत का अनुभव भी होगा। कार्यक्षेत्र पर किसी पुराने संपर्क द्वारा मिली सहानुभूति जीवन को नई राह दिखाएगी। व्यवसाई वर्ग को अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए अतिरिक्त परिश्रम करना पड़ेगा। लेकिन धन लाभ इकट्ठा ना होकर थोड़ा-थोड़ा होगा इसलिए कार्यक्षेत्र पर अधिक सतर्कता बरतनी पड़ेगी। अन्यथा आपके हिस्से का लाभ एवं कोई नया सौदा किसी प्रतिस्पर्धी को मिल सकता है। पुरानी उधारी एवं अन्य खर्चों के कारण बचत नहीं कर पाएंगे। घरेलू मामलों में अति आवश्यकता होने पर ही अपने विचार रखें छोटी-छोटी बातों पर अनबन हो सकती है। नेत्र संबंधित समस्या अथवा रक्त पित्त विकार उत्पन्न होंगे। अनदेखा ना करें अन्यथा आगे परेशानी बढ़ भी सकती है।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज के दिन भी किसी ना किसी प्रसंग को लेकर आपका मन राग-द्वेष से भरा रहेगा। आपकी दिनचर्या भी अन्य दिनों से धीमी रहेगी एक बार किसी कार्य में विलंब होने पर अन्य कार्य भी अव्यवस्थित हो जाएंगे। कार्य क्षेत्र पर स्वयं तो लापरवाही करेंगे अन्य लोगों भी आपकी देखा देख कार्य में विलंब करेंगे। कार्यक्षेत्र पर परिस्थितियां पल-पल में बदलेंगी एक पल जहां से लाभ की संभावना रहेगी अगले ही पल वहां से निराश होना पड़ेगा। आज आप स्वयं के बलबूते निर्णय लें तो कुछ ना कुछ लाभ अवश्य होगा अन्यथा गलत मार्गदर्शन मिलने से हानि ही निश्चित है। कई दिनों से अटके सरकारी कार्य अथवा सरकारी उलझनों में कुटुंब का सहयोग मिलने से मुक्ति मिल सकती है। दांपत्य जीवन में भी अन्य दिनों की अपेक्षा शांति का अनुभव होगा। संध्या के समय उत्तम भोजन मिष्ठान आदि का सुख मिलेगा। सेहत मौसमी बीमारियों के चलते थोड़ी नरम रहेगी।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन आपके लिए धन-धान्य में वृद्धि कार्य करेगा। आज आपके स्वभाव में सुखोपभोग की इच्छा भी प्रबल रहेगी। इसके लिए कुछ भी करने के लिए तैयार भी रहेंगे। लेकिन आज विपरीतलिंगी आकर्षण एवं अभद्र भाषा के प्रयोग से बचना होगा अन्यथा सार्वजनिक क्षेत्र पर अपमान के साथ शत्रुओं में वृद्धि भी हो सकती है। कार्य क्षेत्र से आज आश्चर्यजनक रूप से लाभ मिलेगा। जिस कार्य से उम्मीद नहीं रहेगी वह भी धन लाभ करा देगा। सहकर्मियों के प्रति नरम व्यवहार रखें छोटी-छोटी बातों पर शक करना आपको ही परेशानी में डाल सकता है। घरेलू वातावरण कामना पूर्ति करने पर कुछ समय के लिए शांत रहेगा फिर भी परिजन किसी ना किसी बात को लेकर नाराज हो सकते हैं। आज भी शरीर में त्रिदोष के असंतुलन से पीड़ा हो सकती है। यात्रा लाभदायक रहेगी।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन भी बीते कल की भांति ही मिला-जुला फल देगा। आज दिन के आरंभिक भाग में काम करने का मन नहीं करेगा प्रत्येक कार्य में आलस से करेंगे। कार्यक्षेत्र पर भी विलंब होगा लेकिन थोड़ी देर में ही स्थिति को संभाल लेंगे। आज किसी परिचित को आपसे आर्थिक मदद की आवश्यकता पड़ेगी लेकिन स्वयं की ही स्थिति ठीक ना होने के कारण इसे टालने का प्रयास करेंगे फिर भी परोपकारी स्वभाव रहने के कारण मदद करेंगे। आज तेल संबंधित अथवा दूध से संबंधित उत्पाद भूमि भवन संबंधित कार्य में निवेश निकट भविष्य के लिए लाभदायक रहेगा। पारिवारिक वातावरण छोटी मोटी बातों को छोड़ सामान्य ही रहेगा। माता से कोई मनोकामना पूर्ण होने पर जिद बहस हो सकती है। लेकिन भाई बंधुओं से बहस का सामर्थ नहीं बना पाएंगे। घर में यात्रा की योजना बनेगी शीघ्र ही इस पर खर्च भी करना पड़ेगा। सर्दी जुखाम की परेशानी हो सकती।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज दिन के पूर्वार्ध से लेकर संध्या तक आपको विविध प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। किसी भी कार्य को करने का प्रयास करेंगे उसमें आर्थिक कारणों से व्यवधान आएंगे धन का प्रबंध कहीं से कर भी लेंगे तो कोई ना कोई अन्य बाधा कार्य को पूर्ण होने से रोकेगी। कार्यक्षेत्र पर भी प्रतिस्पर्धी हावी रहेगे जिसके चलते आज धन लाभ होते होते अंतिम चरण में या तो टलेगा या आशा से बहुत कम होगा। किसी भी प्रकार के नए कार्य में निवेश से बचे ना ही आज कोई नई वस्तु खरीदें अन्यथा बाद में पछताना पड़ेगा। नौकरीपेशा जातक अधिकारी वर्ग से सतर्क रहें आपकी प्रत्येक गतिविधियों पर नजर लगाए हुए हैं। दांपत्य जीवन में आपके किसी अनैतिक कृत्य को लेकर झगड़ा हो सकता है। पेट में गर्मी होने से अन्य विकार उत्पन्न होंगे। यात्रा में सतर्कता बरतें चोट आदि का भय भी है।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन आपके लिए बेहतर रहने वाला है। लेकिन आज आपके स्वभाव में स्वार्थ सिद्धि की भावना आवश्यकता से कुछ अधिक ही रहेगी। अपने काम निकालने के लिए परिजनों का सहारा लेंगे जाने-अनजाने किसी पारिवारिक सदस्य का अहित भी कर सकते हैं। स्वभाव में दिखावे की भावुकता रहने से जल्दी से कोई आपके कार्य के लिए मना नहीं करेगा। कार्यक्षेत्र पर भी भाग्य का सहारा मिलने से निश्चित ही धन की आमद होगी। लेकिन किसी सरकारी उलझन अथवा अन्य सरकार संबंधित खर्चे बढ़ने से बचत नहीं कर पाएंगे। कार्यक्षेत्र अथवा कुटुंब में किसी के विपरीत व्यवहार का भी सामना करना पड़ेगा इस को अनदेखा करें अन्यथा अपने मूल उद्देश्य से भटक सकते हैं। आज मौसम जनित बीमारी अथवा छाती के निचले हिस्सों में कुछ ना कुछ समस्या उत्पन्न होगी।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन आप व्यर्थ के प्रपंचों में पड़कर खराब करेंगे या तो जल्दी से किसी कार्य को हाथ में नहीं लेंगे लेंगे तो उसमें अपनी मनमानी ही करेंगे। दोपहर तक का समय व्यर्थ की भागदौड़ में खराब होगा इसके बाद का समय आपके लिए लाभदायक रहेगा। लेकिन स्वभाव की लापरवाही एवं व्यवहारिकता की कमी के कारण इसका उचित पूर्ण लाभ नहीं उठा पाएंगे। कार्य क्षेत्र पर लोग आपकी उदारता का अनुचित फायदा उठा सकते हैं। सहकर्मी एवं अधिकारी वर्ग भी आपके ऊपर सामर्थ्य से अधिक बोझ डालेंगे जिससे सुविधा अनुभव होगी। संध्या के आसपास किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता मिलने पर दिनभर की उलझनों को भूल जाएंगे। पारिवारिक वातावरण में थोड़ी बहुत छींटा कशी लगी रहेगी फिर भी कोई आपके सामने सर उठाने की हिम्मत नहीं करेगा। सर्दी जुखाम से परेशानी होगी।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन आपके अनुकूल है। बीते हुए कल की तुलना में आज उसके विपरीत फल मिलेंगे। सार्वजनिक क्षेत्र पर अपने शुभ आचरण एवं परोपकारी स्वभाव के चलते सम्मान के पात्र बनेंगे। कार्यक्षेत्र पर भी अपने बुद्धि विवेक से बिगड़े कार्य को बनाने की क्षमता रखेंगे। जिससे अधिकारी वर्ग आपसे प्रसन्न रहेंगे लेकिन सहकर्मी क्यों में ईर्ष्या का भाव उत्पन्न होगा। पठन पाठन अथवा इससे संबंधित किसी अन्य व्यवसाय से जुड़े जातकों को मध्यान्ह के समय अपमानित होना पड़ेगा। लेकिन संध्या के समय कुछ विशेष लाभ होने से इस को भूल जाएंगे। आप अपने पराक्रम से जितना भी धन कमाएंगे वह किसी न किसी कार्य में खर्च हो जाएगा। भविष्य के लिए बचत ना कर पाने का दुख होगा। घर परिवार में आनंद का वातावरण रहेगा। परिजन किसी पर्यटन क्षेत्र की यात्रा के लिए जिद कर सकते हैं। गिरने कटने सके चोट का भय है सतर्कता से कार्य करें।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन भी आपके लिए प्रतिकूल फलदायक है। बीते दिनों जिन लोगों से आप को किसी न किसी रूप में मानसिक कष्ट मिल रहा था आज उनको अपने हिसाब से उत्तर देंगे। जिस वजह से आज भी किसी न किसी का विरोध देखना पड़ेगा। कार्यक्षेत्र पर मध्यान तक व्यर्थ की गतिविधियों में लिप्त रहेंगे जिनका दैनिक कार्यों से कोई लेना-देना नहीं रहेगा। दोपहर के बाद किसी वरिष्ठ सामाजिक व्यक्ति का सहयोग मिलने से अपनी योजनाओं को दिशा दे पाएंगे लेकिन धन की आमद आज आवश्यकता से भी कम ही होगी। कोई अक्समात कार्य आने से किसी से उधार भी लेने की नौबत आ सकती है। पारिवारिक वातावरण कुछ समय को छोड़ ठीक ही रहेगा। मन में प्रतिशोध की भावना ना रखें अन्यथा फल विपरीत भी हो सकते। आज मांसपेशियों अथवा शरीर के जोड़ों संबंधित समस्या हो सकती है।

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