Vaidik Panchang 03092025 Shradh Paksh Starts From September 7

🙏🏻 हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 03 सितम्बर 2025*
🌤️ *दिन – बुधवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शरद ऋतु*
🌤️ *मास – भाद्रपद*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – एकादशी 04 सितम्बर प्रातः 04:21 तक तत्पश्चात द्वादशी*
🌤️ *नक्षत्र – पूर्वाषाढा रात्रि 11:08 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा*
🌤️ *योग – आयुष्मान शाम 04:17 तक तत्पश्चात सौभाग्य*
🌤️ *राहुकाल – दोपहर 12:38 से दोपहर 02:12 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:23*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:51*
👉 *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – पद्मा-परिवर्तिनी एकादशी*
💥 *विशेष – हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l  राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।*
💥 *आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
💥 *एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।*
💥 *एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।*
💥 *जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।*
          🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️

🌷 *पद्मा एकादशी* 🌷
➡️ *03 सितम्बर 2025 बुधवार को प्रात: 03:53 से 04 सितम्बर, को प्रात: 04:21 तक (यानि की 03 सितम्बर, बुधवार को पूरा दिन) एकादशी है।*
💥 *विशेष – 03 सितम्बर, बुधवार को एकादशी का व्रत उपवास रखें।*
🙏🏻 *पद्मा एकादशी के  व्रत करने व माहात्म्य पढ़ने – सुनने से सर्व पापों का नाश |*
🙏🏻

             🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

“बुरा वक्त, कभी पूछकर नहीं आता”

किसी ऋषि ने अपने शिष्य को यह सीख दी कि मुसीबत चाहे कितनी भी बड़ी क्यों ना हो, लेकिन भगवान पर भरोसा रखोगे तो कोई विपत्ति तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। एक दिन वह शिष्य जंगल से कहीं जा रहा था कि अचानक एक आदमी पागल हाथियों के इधर आने की बात कहते हुए भागता हुआ सा वहां से गुजरा। उसने ऋषि की बात याद की और सोचा कि मुझे भगवान पर पूरा विश्वास है, इसलिए कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
थोड़ी देर के बाद उसका यह विश्वास गुस्से का रूप लेकर अपने गुरु ऋषि के सामने खड़ा था क्योंकि जब पागल हाथी आया तो उसे धक्का देते हुए आगे बढ़ गया और गिरने से उसे थोड़ी चोट आ गई। उसने गुस्से में यह बात ऋषि को बताई और कहा कि भगवान पर विश्वास करने की उनकी बात गलत थी।
इसपर ऋषि ने मुस्कुराते हुए उससे कहा , “भगवान पर तुम्हें भरोसा था इसीलिए उसने तुम्हें आने वाले खतरे से आगाह किया, ताकि तुम उससे बचने के प्रयास करो। परंतु तुमने वो नहीं किया और अकर्मण्य हो गए। बावजूद इसके तुम्हारी जान बच गई और सिर्फ कुछ खरोंचे ही आईं, अगर प्रयास करते तो यह भी नहीं होता। यही भगवान पर भरोसे का अर्थ है।“
शिष्य को अपनी गलती का ज्ञान हुआ और समझ आया कि भगवान पर विश्वास का अर्थ कभी आलसी बनना नहीं होता। इसका अर्थ केवल यह है कि जिस किसी को भगवान पर भरोसा होता है उसे आने वाले खतरे का संकेत अवश्य मिलता है ताकि वह उससे बचने की तैयारी कर सके। अपने भक्तों को बचाने का यह भगवान का तरीका होता है। किंतु जो विश्वास के नाम पर कुछ करते नहीं, वो वास्तव में आलसी हैं और भगवान आलसियों की मदद नहीं करता।
इसलिए बुरे वक्त का संकेत मिलते ही भगवान से सही मार्ग दिखाने की प्रार्थना करते हुए उससे बचने के प्रयास करें। याद रखें कर्मठ इंसान के सामने प्रलय भी झुक जाता है।
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             🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

नारायण को जो पहचानता है और उस नारायण के साथ मन को जो तदाकार करता है उसी का मन नारायण के साथ एक होता है।
केवल वह जीवात्मा ही श्रीनारायण -रूप बनता है और वही परिपूर्ण होता है; तभी जीव का जीवन सफल होता है,जीव तब तक अपूर्ण है तब तक उसे शांति नहीं मिलती है। जीव जब ईश्वर से मिलता है और उसका अपरोक्ष साक्षात्कार करता है तभी जीव परिपूर्ण होता है, परमात्मा श्रीकृष्ण के दर्शन पाने के लिए ही यह मनुष्य का अवतार है।
मानव ही श्रीभगवान का दर्शन कर सकता है, पशु को तो अपने स्वरुप का भान नहीं है,तो वह बेचारा परमात्मा का दर्शन तो करे ही कैसे, परमात्मा के दर्शन के बिना जीवन सफल नहीं होता है। जो परमात्मा के दर्शन करता है उसी का जीवन सफल है।
यह जीव अनेक वर्षो से (अनंत जन्मो से) भोग भोगता चला आ रहा है,फिर भी इसे शांति तो मिली नहीं, यह शांति तो तब मिले कि जब जीव को परमात्मा का दर्शन मिले, ्रीकृष्ण परमात्मा के दर्शन के बिना जीव को परिपूर्ण शांति नहीं मिलती है, दर्शन के तीन प्रकार शास्त्रो में बताय गए है —
१. स्वप्न में प्रभु की झांकी होती है, यह हुआ साधारण दर्शन।
२. मंदिर और मूर्ति में परमात्मा के दर्शन होे तो यह मध्यम दर्शन है।
३. ईश्वर का अपरोक्ष दर्शन,यह उत्तम दर्शन है।
परमात्मा का अपरोक्ष साक्षात्कार जब होता है तब जीवन सफल होता है, ेदांत में साक्षात्कार के दो प्रकार कहे गए है —
(१) परोक्ष ज्ञान‌।
(२) अपरोक्ष ज्ञान।
ईश्वर किसी एक स्थान पर ऐसा जो माने वह परोक्ष साक्षात्कार है. ईश्वर के बिना कुछ नहीं है, ईश्वर ही सब कुछ है, मैं भी ईश्वर से भिन्न नहीं हूँ,यह है ईश्वर का अपोरक्ष साक्षात्कार,जिसे “मै स्वयं ब्रह्म हूँ (अहम ब्रह्मास्मि ) ऐसा ज्ञान (अनुभव) होता है, उसे (अपरोक्ष) साक्षात्कार हुआ है ऐसा कहा जाता है (माना जाता है).
देखने वाला ईश्वर को देखते ईश्वरमय बनता है तभी उसे ईश्वर का अपरोक्ष साक्षात्कार होता है, ईश्वर का ही सब में अनुभव करते करते जो (उसी में) एकरूप हो जाता है (केवल) वही ईश्वर के परिपूर्ण स्वरुप को जान सकता है। (पहचान सकता है) और वेदांत में इसी को अपरोक्ष साक्षात्कार कहते हैं, श्वर जगत में किसी एक स्थान में है यह ज्ञान भी अपूर्ण है, ईश्वर सर्व व्यापक है, यह एक मूर्ति में या मंदिर में रह नहीं सकते है (समा नहीं सकते है )।
मंदिर में प्रभु के दर्शन कर लेने पर ज्ञानी पुरुष जहाँ जाते है वहीं भगवान स्वरूप का अनुभव करते है, मंदिर में प्रभु के दर्शन करके बाहर आने पर प्रत्येक में परमात्मा का दर्शन करें मन जहाँ जाय वहां ईश्वर का दर्शन करें ,यही है, ईश्वर का असाधारण दर्शन।
जो परमात्मा मुझमें हैं वही सबमें है इसी प्रकार अखिल जगत जिसे ब्रह्मस्वरुप दीखता है वही ज्ञानी है, सबमें परमात्मा का अनुभव करते करते उसे अपने स्वरुप में भी परमात्मा का अनुभव होता है।
परमात्मा के परोक्ष दर्शन से कोई विशेष लाभ नहीं होता है,परन्तु जीव जब परमात्मा का अपरोक्ष दर्शन करता है तभी कृतार्थ होता है, ज्ञानी पुरुषो को अपने स्वरुप में भी श्री भगवान दीखते है, यही अद्वैत है।
श्री कृष्ण की लीलाओं का चिंतन करती गोपियाँ , अपने स्वरुप में भी परमात्मा का अनुभव करती है—-
“लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल। “
गोपियों को अपने स्वरुप का विस्मरण हुआ है और कहती है— “मै ही श्रीकृष्ण हूँ” अपने प्यारे श्रीकृष्ण का सबमे अनुभव करतीं गोपियाँ श्रीकृष्णमय बानी हैं।
जिसे अपने अंदर परमात्मा का दर्शन होता है, वही जीव परमात्मा में मिल जाता है, अंदर परमात्मा का दर्शन होता है, अपने अंदर जिसे परमात्मा दिख जाते हैं उसके बाद वह जीव ईश्वर से जुदा नहीं रह सकता है, वह ईश्वर में मिल जाता है, यही भागवत का फल है।
ज्ञानी ज्ञान से परमात्मा का (ब्रह्म का अपरोक्ष साक्षात्कार करते है, जब कि वैष्णव (भक्त)परमात्मा का अपरोक्ष साक्षात्कार करते हैं।


             🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

🌷 *प्रदोष व्रत* 🌷
🙏🏻 *हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महिने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस बार 05 सितम्बर, शुक्रवार को प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। प्रदोष पर व्रत व पूजा कैसे करें और इस दिन क्या उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है, जानिए…*
👉🏻 *ऐसे करें व्रत व पूजा*
🙏🏻 *- प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं।*
🙏🏻 *- इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं।*
🙏🏻 *- पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार) कर सकते हैं) रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें।*
🙏🏻 *- भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं।*
🙏🏻 *- भगवान शिवजी  की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसीसे अपना व्रत भी तोड़ें। उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।*
👉🏻 *ये उपाय करें*
*सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य देें। पानी में आकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी  को विशेष प्रिय हैं । ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी  की कृपा भी बनी रहती है और भाग्योदय भी हो सकता है।*

            🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

श्राद्ध पक्ष विशेष 2025 .
तारीख – दिन – तिथि .
( 1 ) 7 सितंबर 2025  – रविवार – पूर्णिमा श्रद्धा / श्री सत्यनारायण व्रत एवं चंद्र ग्रहण .
( 2 ) 8 सितंबर 2025 – सोमवार – प्रतिपदा श्रद्धा .
( 3 ) 9 सितंबर 2025 – मंगलवार – द्वितीय श्रद्धा .
( 4 ) 10 सितंबर 2025 –  बुधवार – तृतीय श्राद्ध एवं गणेश चतुर्थी व्रत .
( 5 ) 11 सितंबर 2025 – गुरुवार – चतुर्थी श्रद्धा .
( 6 ) 12 सितंबर 2025  – शुक्रवार – पंचमी श्राद्ध ( 10 : 00 Am ) तक और 10 : 00 Am के बाद षष्ठी श्राद्ध .
( 7 ) 13 सितंबर 2025 –  शनिवार – सप्तमी श्राद्ध .
( 8 ) 14 सितंबर 2025 –  रविवार – श्री महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ एवं अष्टमी श्रद्धा .
( 9 ) 15 सितंबर 2025 – सोमवार – सौभाग्यवती माता का श्राद्ध एवं नवमी का श्राद्ध .
( 10 ) 16 सितंबर 2025 – मंगलवार – दसमीं का श्राद्ध .
( 11 ) 17 सितंबर 2025  – बुधवार – एकादशी व्रत एवं श्राद्ध .
( 12 ) 18 सितंबर 2 0 25 – गुरुवार – द्वादशी श्राद्ध .
( 13 ) 19 सितंबर 2025 – शुक्रवार – प्रदोष व्रत एवं मासिक शिवरात्रि व्रत एवं त्रयोदशी श्राद्ध .
( 14 ) 20 सितंबर 2025 – शनिवार – अकाल मृत्यु श्राद्ध एवं चतुर्दशी श्राद्ध .
( 15 ) 21 सितंबर 2025 – रविवार – अमावस्या का श्राद्ध एवं सुर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और इस का कोई सूतक पातक नहीं होगा अतः देश के सभी मंदिर खुले रहेंगे ।
🙏🍀🌷🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🙏

जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
अंक ज्योतिष के अनुसार आपका मूलांक 3 आता है। यह बृहस्पति का प्रतिनिधि अंक है। ऐसे व्यक्ति निष्कपट, दयालु एवं उच्च तार्किक क्षमता वाले होते हैं। आप दार्शनिक स्वभाव के होने के बावजूद एक विशेष प्रकार की स्फूर्ति रखते हैं। आपकी शिक्षा के क्षेत्र में पकड़ मजबूत होगी। आप एक सामाजिक प्राणी हैं। आप सदैव परिपूर्णता या कहें कि परफेक्शन की तलाश में रहते हैं यही वजह है कि अकसर अव्यवस्थाओं के कारण तनाव में रहते हैं। अनुशासनप्रिय होने के कारण कभी-कभी आप तानाशाह भी बन जाते हैं।

आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 3, 12, 21, 30

शुभ अंक : 1, 3, 6,7, 9,

शुभ वर्ष : 2028, 2030, 2031, 2034, 2043, 2049, 2052

ईष्टदेव : देवी सरस्वती, देवगुरु बृहस्पति, भगवान विष्णु

शुभ रंग : पीला, सुनहरा और गुलाबी

आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल


शुभ कार्य : घर या परिवार में शुभ कार्य होंगे। मित्र वर्ग का सहयोग सुखद रहेगा। महत्वपूर्ण कार्य से यात्रा के योग भी है।

व्यापार : यह माह आपके लिए अत्यंत सुखद है। नवीन व्यापार की योजना भी बन सकती है। शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे।


करियर : किसी विशेष परीक्षा में सफलता मिल सकती है। नौकरीपेशा के लिए प्रतिभा के बल पर उत्तम सफलता का है। दांपत्य जीवन में सुखद स्थिति रहेगी।

मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज आप दिन के आरंभिक भाग में अनुकूल परिस्थितियों का जमकर लाभ उठायेंगे। आज आपके स्वाभाव में नरमी रहने से परिजनों के साथ चल रहे मतभेद सामान्य होंगे। कला एवं संगीत में आज विशेष रूचि रहेगी। कार्य क्षेत्र पर आज किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति का सहयोग मिलने से रुके कार्य पूर्ण होंगे। संतानों के ऊपर खर्च बढेगा महिलाये अस्त-व्यस्त गृहस्थी को संभालने में अधिक व्यस्त रहेंगी। नजदीकी रिश्तेदारो से शुभ समाचार मिलेगा। धन लाभ कम परिश्रम से हो जाएगा। मध्यान पश्चात स्थिति प्रतिकूल होने लगेगी।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज दिन के मध्यान तक आप सेहत को लेकर परेशान रहेंगे। शारीरिक स्फूर्ति गायब रहेगी। अधिकांश कार्यो में देरी होगी। दोपहर बाद आकस्मिक लाभ के समाचार मिलने से उत्साह वृद्धि होगी। विरोधी आपकी प्रगति से ईर्ष्या करेंगे शेयर सट्टे में आज किया निवेश निकट भविष्य में लाभ कराएगा। अन्य व्यवसाय में भी आज मेहनत का फल थोड़े देर से परन्तु भरपूर मिलेगा। सार्वजनिक क्षेत्र पर आपका योगदान प्रतिष्ठा बढ़ाएगा। महिलाये अपने कार्यो के प्रति निष्ठावान रहेंगी। परिवार के बुजुर्गो का सहयोग घरेलू कार्य के साथ व्यवसायिक कार्यो को सहज बनाएगा।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन मिश्रित फलदायी रहेगा मध्यान बाद तक प्रत्येक कार्यो में उदासीनता दिखाएंगे परन्तु धार्मिक कार्यो के प्रति आकर्षित रहेंगे। मध्यान पश्चात गाड़ी पटरी पर आने लगेगी। नौकरी व्यवसाय में आपके कार्य की प्रशंसा होगी। धन लाभ के कोई भी अवसर चूकेंगे नही। दाम्पत्य जीवन में सरसता बनी रहेगी। पत्नी संतान के साथ आज अच्छी पटेगी। स्वास्थ्य आज सर्दी जुखाम के कारण नरम रह सकता है फिर भी आपकी दिनचर्या पर इसका विशेष असर नहीं पड़ेगा। संध्या के बाद यात्रा की योजना बनेगी।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज आप मध्यान तक जितना परिश्रम करेंगे इसके बाद के समय उससे पूर्ण संतुष्ट रहेंगे धन लाभ भी होने के साथ भविष्य में आय के मार्ग भी बनेंगे। आज का दिन प्रेम-प्रसंगों में भी यादगार अनुभूति कराएगा। पर्यटक स्थल पर घूमने-फिरने की योजना बनाएंगे। आज फिजूल खर्च भी अधिक रहने वाला है जिस पर नियंत्रण की आवश्यकता है। कार्य व्यवसाय का दायित्व आज नौकरों अथवा सहकर्मियों के ऊपर छोड़ना पड़ेगा। परिजनों के साथ किसी सामाजिक कार्यक्रम में उपस्थित हो सकते है। महिलाये एवं बच्चे मनोकामना पूर्ति से उत्साहित होंगे।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन आपके लिए मिला जुला रहेगा। दोपहर तक लगभग सभी कार्यो में विलंब होगा जो कार्य करेंगे उनके पूर्ण होने में भी संशय बना रहेगा लेकिन मध्यान बाद स्थिति में थोड़ा सुधार आने लगेगा। सामाजिक अथवा मांगलिक कार्यक्रमो के कारण व्यस्तता अधिक रहेगी। कार्य क्षेत्र से भी धन का आगमन होगा। फिजूल खर्च भी लगे रहेंगे जिन पर अंकुश रखे। विपरीत लिंगीय से आज आकस्मिक लाभ हो सकता है नजदीकियां भी बढ़ेंगी। उपहार सम्मान मिलेगा।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज दोपहर तक अपने सभी कार्य पूर्ण करने का प्रयास करें इसके बाद परिस्थिति कलहकारी बनेगी जिसका भला करने का सोचेंगे उसी का व्यवहार आपको आहत करेगा। महिलाये भी आज मानसिक रूप से अशांत रहेंगी। सेहत भी असामान्य रहने से कार्य क्षेत्र पर बेहतर अनुभव नहीं करेंगे। फिर भी चाटुकारिता का सहारा लेकर खर्च योग्य आय बना ही लेंगे। धार्मिक स्थानों पर दान पुण्य के अवसर मिलेंगे। स्त्री मित्रो से संबंदो में कड़वाहट आ सकती है। दिनचर्या असंयमित रहेगी। संतानो के ऊपर नजर रखें।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन पूर्वार्ध आपके लिए धन वृद्धि कारक रहेगा। कार्य क्षेत्र पर आज अधिकारियो का प्रोत्साहन मिलने से उन्नति के मार्ग खुलेंगे। व्यवसाय में लाभ पाने के लिए थोड़ा परिश्रम करना पड़ सकता है लेकिन इसका फल आश्चर्य में डालने वाला रहेगा। अनैतिक कार्यो में पड़ने से मान हानि के योग बनेंगे इससे दूर रहें। परिजनों से मधुर भावनात्मक सम्बन्ध रहेंगे घरेलू समस्याओ को महिलाये अपने बल पर सुलझा लेंगी।  संध्या के समय शुभ समाचार मिलेंगे। उत्तम भोजन वाहन मनोरंजन पर्यटन से आनंद मिलेगा।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज दिन की शुरुआत आलस्य प्रमाद से होगी ध्यान रहें कार्यो को लेकर टालमटोल की प्रवृति हानि करा सकती है। दोपहर के समय से स्थिति बेहतर होने लगेगी। उत्तरार्ध का समय आकस्मिक फायदे कराने वाला रहेगा। आज आप किसी से अधिक व्यवहार करना पसंद नहीं करेंगे इससे कई समस्याओं से भी बचे रहेंगे। सामाजिक क्षेत्र पर भी आज आपके योगदान की प्रशंसा होगी। वरिष्ठ जनो के साथ नविन संपर्क बनेंगे। स्त्री-पुत्र से लाभदायक समाचार मिल सकते है। विपरीत लिंगीय आकर्षण आज कम रहेगा।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन आपके लिए आनंद दायक रहेगा। आप आज प्रत्येक कार्य को देखभाल कर ही करेंगे जिससे सफलता का प्रतिशत अधिक रहेगा। नौकरी व्यवसाय में आज मध्यान तक किया परिश्रम का फल संध्या के समय सम्मान एव धन लाभ के रूप में मिल जाएगा। कार्य क्षेत्र पर आज प्रतिस्पर्धा भी अधिक रहेगी लेकिन आपके काम निकालने की कला लाभ दिलाएगी। आप किसी की भी मनोकामना पूर्ति करने में हिचकिचाएंगे नही। परिजनों से स्नेह की वर्षा होगी। संतानो का व्यवहार भी अनुकूल रहेगा। महिलाये घर की साज सज्जा पर खर्च करेंगी। सेहत सामान्य रहेगी।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज दिन के मध्यान तक का समय सामान्य बना रहेगा लेकिन इसके बाद कही से अशुभ समाचार मिलने से परेशान रहेंगे। इसके बाद का समय श्रम साध्य रहेगा। कार्य क्षेत्र पर आज महत्त्वपूर्ण कार्य मध्यान के बाद करना लाभदायक रहेगा। घरेलु उत्पादों के क्रय-विक्रय सम्बंधित व्यापार से अच्छा मुनाफा कमाएंगे। परिजन का ख़राब स्वास्थ्य भी चिंता का विषय बनेगा। धीरे-धीरे स्थिति नियंत्रण में आ जायेगी। पूजा पाठ में भाग लेंगे धार्मिक यात्रा के प्रसंग भी बन सकते है। महिलाये पारिवारिक स्थिति के कारण बेचैन रहेंगी।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन भी आपके लिए लाभदायी रहेगा बीते कल के अधूरे कार्य आज पूर्ण होने से धन की आमद होगी। नौकरी पेशा लोग भी अच्छे कार्य के लिए प्रोत्साहित होंगे। दूर के व्यवसायों अथवा शेयर आधी के कार्यो में उछाल आने से अन्य आय के साधन बनेंगे। सरकारी कार्यो में आज ढील ना दे अन्यथा लंबे समय के लिये लटक सकते है। धार्मिक कार्यो में रुचि होने पर भी उपयुक्त समय नही निकाल पाएंगे। संध्या के बाद समय प्रतिकूल हो जाएगा आसपास का वातावरण क्रोध दिलाने वाला बनेगा ना चाहते हुए भी किसी से झगड़ा होने की संभावना है। महिलाओ की सेहत खराब होने की संभावना है।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन भी शुभ फलों की प्राप्ति कराएगा लेकिन आज चोटादि का भी भय है जोखिम ना लें वाहन से सतर्क रहें। सेहत में थोड़ा उतार चढ़ाव बना रहेगा। पुराने लटके कार्यो में गति आएगी। नई योजनाएं अधिक फलीभूत होंगी। सामाजिक कारणों से भी आज अधिक व्यस्त रह सकते है। सरकारी कार्य आज मध्यान से पहले पूर्ण होंगे। संध्या के समय धन की आमद होने से आर्थिक स्थिति सुधरेगी। विरोधी आज शांत रहेंगे। महिलाये आज घरेलू कार्य मे ज्यादा व्यस्त रहेंगी। रिश्तेदारों के आने से चहल पहल बढ़ेगी।

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Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton