
🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 30 अगस्त 2025*
🌤️ *दिन – शनिवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शरद ऋतु*
🌤️ *मास – भाद्रपद*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – सप्तमी रात्रि 10:56 तक तत्पश्चात अष्टमी*
🌤️ *नक्षत्र – विशाखा दोपहर 02:37 तक तत्पश्चात अनुराधा*
🌤️ *योग – इन्द्र शाम 03:10 तक तत्पश्चात वैधृति*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 09:30 से सुबह 11:05 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:22*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:55*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण -*
💥 *विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
💥 *ब्रह्म पुराण’ के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- ‘मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।’ (ब्रह्म पुराण’)*
💥 *शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय।’ का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण’)*
💥 *हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है ।(पद्म पुराण)*
🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️
🌷 *राधा अष्टमी* 🌷
🙏🏻 *31 अगस्त, रविवार को श्रीराधा अष्टमी है। जन्माष्टमी के पूरे 15 दिन बाद ब्रज के रावल गांव में राधा जी का जन्म हुआ । भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधाष्टमी व्रत रखा जाता है। पुराणों में राधा और रुक्मिणी को एक ही माना जाता है। जो लोग राधा अष्टमी के दिन राधा जी की उपासना करते हैं, उनका घर धन संपदा से सदा भरा रहता है।*
➡ *पुराणों के अनुसार राधा अष्टमी*
🙏🏻 *स्कंद पुराण के अनुसार राधा श्रीकृष्ण की आत्मा हैं। इसी कारण भक्तजन सीधी-साधी भाषा में उन्हें ‘राधारमण’ कहकर पुकारते हैं।*
🙏🏻 *पद्म पुराण में ‘परमानंद’ रस को ही राधा-कृष्ण का युगल-स्वरूप माना गया है। इनकी आराधना के बिना जीव परमानंद का अनुभव नहीं कर सकता।*
🙏🏻 *भविष्य पुराण और गर्ग संहिता के अनुसार, द्वापर युग में जब भगवान श्रीकृष्ण पृथ्वी पर अवतरित हुए, तब भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन महाराज वृषभानु की पत्नी कीर्ति के यहां भगवती राधा अवतरित हुई। तब से भाद्रपद शुक्ल अष्टमी ‘राधाष्टमी’ के नाम से विख्यात हो गई।*
🙏🏻 *नारद पुराण के अनुसार ‘राधाष्टमी’ का व्रत करनेवाला भक्त ब्रज के दुर्लभ रहस्य को जान लेता है।*
🙏🏻 *पद्म पुराण में सत्यतपा मुनि सुभद्रा गोपी प्रसंग में राधा नाम का स्पष्ट उल्लेख है। राधा और कृष्ण को ‘युगल सरकार’ की संज्ञा तो कई जगह दी गई है।*
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *घर में सदैव आर्थिक परेशानी रहती है तो* 🌷
🙏🏻 *स्कंदपुराण और दूसरे ग्रंथों में बात आयी है कि जिन लोगों के घर में सदैव आर्थिक परेशानी रहती है उनके लिए भाद्र शुक्ल अष्टमी (31 अगस्त, रविवार) के दिन से लेकर आश्विन कृष्ण अष्टमी (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) माने 14 सितम्बर, रविवार तक महालक्ष्मी माता का पूजन विधान स्कंदपुराण, आदि ग्रंथो में बताया गया है और इस सरल विधान के अनुसार 31 अगस्त से 14 सितम्बर तक नित्य प्रात: लक्ष्मी माता का सुमिरन करते हुए – ॐ लक्ष्मयै नम: ॐ लक्ष्मयै नम: ॐ लक्ष्मयै नम: मंत्र का 16 बार प्रति दिन जप करें और फिर लक्ष्मीमाता का पूजन करते हुए एक श्लोक पाठ करें । इससे समय, शक्ति खर्च नहीं होगी उल्टा पुण्य भी बढ़ेगा | श्लोक इस प्रकार है-*
🌷 *धनं धान्यं धराम हरम्यम, कीर्तिम आयुर्यश: श्रीयं,*
*दुर्गां दंतीन: पुत्रां, महालक्ष्मी प्रयच्छ मे ‘*
*”ॐ श्री महालक्ष्मये नमः” “ॐ श्री महालक्ष्मये नमः”*
🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
*🌷 श्रीलक्ष्मीपुत्र पूर्णानन्द गणपति महिमा आख्यानम् 🌷*
*🌼 हिन्दी अर्थ सहित 🌼*
🙏भगवान गणेश के अनेक अवतार हुए हैं जिनमें एक अवतार लक्ष्मी पुत्र पूर्णानंद गणपति का भी है। इस स्वरूप का प्राकट्य कार्तिक कृष्ण अमावस्या दीपावली महापर्व पर मां लक्ष्मी की गोद में हुआ था। तब से दीपावली पर माता लक्ष्मी के साथ गणेश पूजन की भी परंपरा शुरू हुई। पूर्णानंद गणपति ने अपने अवतार काल में अनेक लीला की
उन्होंने दमनासुर राक्षस का वध कर धर्म की स्थापना की।🙏
🌹🙏🏻🌹
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ॐ श्रीं ह्रीं गलौं गं पूर्णानन्द गणपतये नमः ॥
ॐ श्रीं ह्रीं पूर्णानन्द गणपतये सत्य स्वरूपाय नमः ॥
ॐ गं श्रीं पूर्णानन्दाय लक्ष्मीक्रोडस्थिताय नमः ॥
ॐ लक्ष्मीक्रोडस्थिताय विद्महे पूर्णानंदाय
धीमहि तन्नो विघ्नेशः प्रचोदयात् ॥
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*🌷 श्रीलक्ष्मीपुत्र-पूर्णानन्द गणपति-महिमा आख्यानम् 🌷*
*( हिन्दी अर्थ सहित )*
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जय लक्ष्मीपुत्र गणेश जय पूर्णानन्द नमो नमः ।
विघ्नहर मंगलदाता सर्वकार्यप्रसिद्धिदः ॥
अर्थ:
हे लक्ष्मीपुत्र गणेश! हे पूर्णानंद प्रभु!आपको बार-बार नमस्कार है।आप विघ्नों का नाश करने वाले, मंगल और सिद्धियाँ देने वाले हैं।🍁
श्रीगणेशाय नम
इति प्रथमं प्रार्थये हरिम् ।
लक्ष्मीपुत्रं पूर्णानन्दं, वन्दे विघ्नविनाशकम् ॥१
अर्थ:
सबसे पहले मैं श्रीगणेश को नमस्कार करता हूँ, जो लक्ष्मीपुत्र पूर्णानंद रूप में विघ्नों का नाश करने वाले हैं।
🍁नारायणप्रिया लक्ष्मीर्जगतां जननी शुभा ।
तस्याः पुत्रः समापन्नः पूर्णानन्दो गणाधिपः ॥२
हिंदी अर्थ:
भगवान नारायण की प्रियतमा जगतजननी महालक्ष्मी का पुत्र ही पूर्णानंद गणपति हैं।🍁
महागणपतिं ध्यायन्,
लक्ष्मीर्दीर्घं तपस्तथा ।
नारायणाज्ञया प्राप पुंसकल्याणदायकम् ॥३
हिंदी अर्थ:
लक्ष्मीजी ने भगवान नारायण की आज्ञा से महागणपति का ध्यान करते हुए कठोर तप किया और अंततः पूर्णानंद पुत्र को प्राप्त किया।🍁
प्राप्तेऽमावास्यकाले तु
कार्तिकस्य महीतले ।
जज्ञे बालो गजमुखः लक्ष्मीगोदागतो मुदा ॥४
अर्थ:
कार्तिक अमावस्या के दिन धरती पर गजमुख बालक पूर्णानंद माता लक्ष्मी की गोद में प्रकट हुए।🍁
पूर्णस्नेहवशालक्ष्मीः
सुतं दृष्ट्वा सुदुर्लभम् ।
हर्षान्नाम ददौ तस्मै
‘पूर्णानन्द’ इति श्रुतम् ॥५
अर्थ:
स्नेह और हर्ष से पूर्ण होकर माता लक्ष्मी ने अपने पुत्र का नाम “पूर्णानंद” रखा।🍁
पूर्वमेव महीपाल दीपमालालङ्कृता शुभा ।
लक्ष्मीपूजा प्रवृत्ता आसीत्सम्पद्विवर्धिनी ॥६
अर्थ:
पूर्वकाल से ही दीपमालाओं से सुसज्जित होकर लक्ष्मीपूजन की परंपरा दीपावली पर सम्पन्न होती थी, जो धन–संपत्ति वृद्धि देने वाली मानी जाती थी।🍁
यदा जातः स पूर्णानन्दो लक्ष्म्याः प्रियः सुतः ।
तदा तस्मिन्युगान्तेऽह्नि दीपावल्याख्य उत्सवः ॥७
अर्थ:
परंतु जब अमावस्या को लक्ष्मी का प्रिय पुत्र पूर्णानंद जन्मे, तब उसी दिन का दीपोत्सव और भी विशेष महत्व प्राप्त कर गया।🍁
देवैः सह तदा लक्ष्मीः
पूजिता पुत्रसंगता ।
उवाच सर्वदेवानां
पूजायाः नियमं पुनः ॥८
अर्थ:
देवताओं ने माता लक्ष्मी और उनके पुत्र पूर्णानंद का पूजन किया। उस समय लक्ष्मीजी ने देवताओं को नया पूजन-विधान सुनाया।🍁
‘यः करोति मम पूजां, दीपोत्सवेऽथ मानवः ।
स पुत्रेण सहैव मे, पूजां कुर्यान्न संशयः ॥’९
अर्थ:
लक्ष्मीजी बोलीं — “जो दीपावली पर मेरी पूजा करेगा, वह मेरे पुत्र गणेश सहित ही करे; तभी पूजा पूर्ण मानी जाएगी।”🍁
ततः प्रभृति लोकेषु दीपावल्यां समीहिते ।
लक्ष्मीगणेशपूजैषा निर्वर्त्यतेऽखिलैः सदा ॥१०
अर्थ:
तब से सभी लोकों में दीपावली पर लक्ष्मी–गणेश की संयुक्त पूजा परंपरा बन गई और आज तक ऐसे ही सम्पन्न होती है।🍁
पूर्णानन्दः स शास्त्रेषु श्रुतिस्मृत्यादिषु स्थिरः ।
अष्टादशविद्याधारो नित्यमर्थप्रवर्तकः ॥११
अर्थ:
पूर्णानंद सभी शास्त्रों, वेद-स्मृतियों में पारंगत हुए। वे 18 विद्याओं के धारणकर्ता और कल्याण मार्ग दिखाने वाले बने।🍁
ऋग्यजुःसामथर्वैश्च सहितो वेदपारगः ।
व्याकरणं गणितं च सर्वविद्याविशारदः ॥१२
अर्थ:
उन्होंने चारों वेदों का गहन अध्ययन किया और व्याकरण, गणित आदि सभी विद्याओं में निपुण हुए।🍁
नृत्यगीतकलादक्षो ललितं वाद्यवेत्तृकः ।
सर्वशास्त्रप्रवीणश्च लोकानां लाभदायकः ॥१३
अर्थ:
वे नृत्य, संगीत और वाद्यकला में भी दक्ष हुए। सभी शास्त्रों के ज्ञानी बनकर लोकों को कल्याण देने लगे।🍁
वाग्देवी सरस्वती सा तस्य वाक्शक्तिबोधिका ।
अभिषेकं ददौ तस्मै ज्ञानरत्नप्रवर्धिनी ॥१४
अर्थ:
वाग्देवी सरस्वती ने उन्हें वाणी का वर और ज्ञानरत्नों की वृद्धि का आशीर्वाद दिया।🍁
लक्ष्मीर्मातृस्नेहयुता धनसम्पत्तिदायिनी ।
अशीषं ददते पुत्रे राज्यलक्ष्मीप्रसिद्धये ॥१५
अर्थ:
माता लक्ष्मी ने स्नेहपूर्वक उन्हें धन, समृद्धि और राज्यलक्ष्मी प्रदान करने का आशीर्वाद
दिया।🍁
तस्मिन्नेव समे काले दमनाख्यो महासुरः ।
शुक्राचार्यशिष्योऽसौ वेदमार्गं विनाशयत् ॥१६
अर्थ:
उसी समय दमनासुर नाम का असुर उत्पात मचाने लगा, जो शुक्राचार्य का शिष्य था और वैदिक धर्म का नाश कर रहा
था।🍁
स्वर्गाद्देवगणान् सरवान्निर्वास्य दुष्टकर्मभृत् ।
अधर्मं स्थापयामास पृथिव्यामसुरेष्वपि ॥१७
अर्थ:
उस दैत्य ने देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया और पृथ्वी पर असुरों के बीच अधर्म को स्थापित कर दिया।🍁
देवाः श्रमभृताः सर्वे गताः शरणमीश्वरम् ।
जगुः स्तुतिं गणपतिं लक्ष्मीपुत्रं दयाप्लुतम् ॥१८
अर्थ:
सभी देवता परेशान होकर शरण में गए और दयामय लक्ष्मीपुत्र गणपति की स्तुति करने लगे।🍁
‘हे विघ्नहर्ता देवेश, पूर्णानन्द नमोऽस्तु ते ।
पाहि नः सुरराज्यं च, पुनः स्थापय धर्मतः ॥१९
अर्थ:
देवताओं ने कहा — “हे विघ्नहर गणेश, पूर्णानंद! आपको नमस्कार है, हमारे स्वर्ग का राज्य बचाइए और धर्म को पुनः स्थापित कीजिए।”🍁
इत्युक्त्वा प्रार्थितो देवैः कृपासिन्धुः गणाधिपः ।
ससंजहास तान्सर्वान् युद्धाय दानवं प्रति ॥२०
अर्थ:
इस प्रकार देवताओं ने प्रार्थना की तो कृपामय गणपति प्रसन्न होकर मुस्कुराए और दमनासुर से युद्ध करने के लिए तैयार हुए।🍁
गणेशो लक्ष्म्याः तनयः, सैन्यं सर्वं समाह्वयत् ।
स्वयं गजमुखो देवः रथमारुरुहे बलिन् ॥२१
अर्थ:
लक्ष्मीपुत्र गणेश ने देवसेना को संगठित किया और बलशाली गजमुख गणेश स्वयं रथ पर आरूढ़ हुए।🍁
घण्टाशब्दमथो घोṣं निनदन्ति सुरद्विषः ।
पूर्णानन्दोऽपि गर्जन्निव सिंह इव कानने ॥२२
अर्थ:
दैत्य नगाड़े बजाने लगे। उसी समय पूर्णानंद गणेश भी सिंह के समान गर्जना करने लगे।🍁
स दैत्यो दमनाख्यस्तु सिंहनादं प्रचुक्रुशे ।
अवमान्य सुरान् सर्वान् युद्धाय समुपस्थितः ॥२३
अर्थ:
दैत्य दमन भी गर्जना करते हुए देवताओं का अपमान करता हुआ युद्धभूमि में आ पहुँचा।🍁
मुष्टिप्रहारैः शूलैश्च खड्गधाराकुलैरपि ।
गणेशोऽथ दमनश्च कुरुतः संगतं रणे ॥२४
अर्थ:
मुष्टिप्रहार, शूल और तलवारों के वार से गणेश और दमनासुर का युद्ध आरम्भ हुआ।🍁
गणेशोऽङ्कुशमादाय दैत्यशक्तिं व्यलुनयत् ।
पाशेन बद्धवानस्मिन्पादयोर्न्यपतद्भुवि ॥२५
अर्थ:
गणेश ने अपने अंकुश से दैत्य की मायाशक्ति को नष्ट कर दिया और पाश से उसे बाँधकर भूमि पर गिरा दिया।🍁
सुदर्शनं ततः प्राहिणोद्धस्तात्सुरानुगः ।
चिच्छेदास्य शिरः शूरं दमनस्य दुरात्मनः ॥२६
अर्थ:
तब गणपति ने अपने हस्त से सुदर्शन चक्र छोड़ा, जिसने दुष्ट दमनासुर का मस्तक काट
डाला।🍁
हते दैत्ये दमनके देववीर्यं पृथग्व्यभात् ।
प्रत्यापेद्सुरराज्यं ते धर्ममार्गं प्रतिष्ठितम् ॥२७
अर्थ:
दमनासुर के मारे जाने पर देवताओं का पराक्रम पुनः प्रकट हुआ और स्वर्ग-राज्य उन्हें वापस मिला। धर्म की पुनः प्रतिष्ठा
हुई।🍁
आनन्दोत्सवमुद्धृत्य ऋषयो देवराटसमा: ।
जजपुः स्तुतिमग्रे तं पूर्णानन्दं गणाधिपम् ॥२८
अर्थ:
देव और ऋषिगण आनन्दोत्सव मनाने लगे और वे सब मिलकर पूर्णानंद गणपति की स्तुति करने लगे।🍁
जय जय जगद्धाता लक्ष्म्याः प्रियसुत प्रभो ।
विघ्नहर्ता जय त्वं नः धर्मसंरक्षणैकृतः ॥२९
अर्थ:
देवताओं ने कहा — “जय हो लक्ष्मीपुत्र प्रभु! आप जगतधारक हैं, विघ्नहर्ता हैं और धर्म की रक्षा करने वाले हैं।”🍁
त्वं ज्ञानप्रदकर्ता च, त्वं सिद्धिप्रद एव च ।
सर्वविघ्नविनाशाय, नः पायाभक्तवत्सल ॥३०
अर्थ:
“आप ज्ञान देने वाले, सिद्धि देने वाले और सभी विघ्नों का नाश करने वाले भक्तवत्सल हैं।”🍁
नमस्ते लक्ष्म्याः तनय दिव्य रूप महामते ।
जय पूर्णानन्द गण नायक विश्ववन्दित ॥३१
अर्थ:
“हे दिव्यरूपी, महामति, लक्ष्मीपुत्र पूर्णानंद गणपति! आपको हमारा नमस्कार हो।”🍁
जय सर्वगुणोपेत जय भक्तप्रपालक ।
जय दुष्टविनाशाय मोदकप्रिय दायक ॥३२
अर्थ:
“जो सभी गुणों से संपन्न, भक्तों की रक्षा करने वाले, दुष्टों का नाश करने वाले और मोदक प्रिय हैं — उस गणपति को जय।”🍁
तव कीर्तिः सदा लोके दीपवत्प्रभमण्डिता ।
दीपावल्यां विशेषेण पूजिता सर्वसिद्धिदा ॥३३
अर्थ:
“तुम्हारी कीर्ति संसार में दीप की तरह प्रकाशित है और विशेषकर दीपावली पर तुम्हारी पूजा सभी सिद्धियाँ देने वाली है।”🍁
यत्र पूज्यसि लक्ष्म्या च सह देव्या सरस्वत्या ।
तत्रैवैश्वर्यसंपत्ति: शाश्वती विगलद्भयः ॥३४
अर्थ:
“जहाँ लक्ष्मी और सरस्वती सहित आपकी पूजा होती है, वहाँ ऐश्वर्य और संपत्ति सदा बनी रहती है और भय मिटता है।”🍁
इत्याराधितवान्देवान्सर्वलोकहितं प्रभुः ।
पूर्णानन्दो गणेशोऽभूत्साक्षान्मङ्गलकारकः ॥३५
अर्थ:
इस प्रकार पूर्णानंद गणपति ने देवताओं का उद्धार कर विश्व का कल्याण किया और स्वयं मंगलस्वरूप बनकर प्रसन्न
हुए।🍁
देवा ऋषयश्च सिद्धाश्च चारणा नागकिन्नराः ।
सर्वे समाययुः प्रीत्या पूजनाय गणेश्वरम् ॥३६
अर्थ:
देवता, ऋषि, सिद्ध, चारण, नाग और किन्नर सब मिलकर प्रसन्नता से गणेशजी के पूजन हेतु एकत्र हुए।🍁
मण्डपः काञ्चनमयः स्फटिकस्तम्भशोभितः ।
दीपमालाविराजश्च पुष्पगन्धसमन्वितः ॥३७
अर्थ:
एक सुवर्णमय मंडप बनाया गया, जिसमें स्फटिक स्तंभ दीप्त थे। दीपमालाओं, पुष्पों और सुगंध से वह जगमगा उठा।🍁
रत्नसिंहासने रम्ये स्थाप्य तुल्यं गजाननम् ।
अर्चयामासुर्भक्त्या देवाः सुरगणाग्रयः ॥३८
अर्थ:
रत्नमय सिंहासन पर गजानन पूर्णानंद को विराजित कर देवताओं ने बड़े भक्तिभाव से पूजा की।🍁
धूपदीपैः सुवासोभिर्मोदकैः पायसैः फलैः ।
अर्चितो लक्ष्म्यसुत्तेन सर्वदेवैः सहर्षिणा ॥३९
अर्थ:
धूप, दीप, सुगंधित वस्त्र, मोदक, पायस और फलों से लक्ष्मीपुत्र गणेश का आदरभाव से पूजन हुआ।🍁
लक्ष्मीसरस्वतीसार्धं देव्या गौऱ्या च पूजितः ।
संपत्तिं वितनोत्येष भक्तानां विघ्ननाशनः ॥४०
अर्थ:
लक्ष्मी, सरस्वती और गौरी के साथ पूजित होकर विघ्ननाशक गणपति ने भक्तों को संपत्ति और सुख प्रदान किया।🍁
ततः प्रोवाच लक्ष्मीपुत्रो पूर्णानन्दो गजाननः ।
मम जन्मदिने लोके दीपोत्सवः प्रवर्तताम् ॥४१
अर्थ:
तब पूर्णानंद गजानन बोले — “मेरे जन्मदिवस पर लोक में दीपोत्सव अवश्य मनाया जाए।”🍁
लक्ष्मीनारायणो यत्र पूज्यते सह पार्षदैः ।
तत्राहमपि संयुक्तो वासो मे विघ्ननाशनः ॥४२
अर्थ:
“जहाँ लक्ष्मी–नारायण की पूजा होती है, वहाँ मैं भी विघ्ननाशक रूप में सदा निवास करूँगा।”🍁
दीपावल्यां विशेषेण यो मां मातृसमन्वितम् ।
पूजयेद्दाक्षिण्यभक्त्या तस्य विघ्नाः प्रणश्यति ॥४३
अर्थ:
“जो दीपावली पर भक्तिभाव से मुझे माता लक्ष्मी सहित पूजता है, उसके जीवन से विघ्न दूर हो जाते हैं।”🍁
सर्वलाभसमृद्धिश्च निधिसिद्धिसमन्विता ।
तस्य गेहे निवसति सदैव मम सङ्ग्रहम् ॥४४
अर्थ:
“ऐसे भक्त के घर में ऋद्धि-सिद्धि, सुख-लाभ और संपन्नता सदा निवास करती है।”🍁
दीपज्योतिर्यदा ध्यायन्नारायणपदाम्बुजे ।
मम नामस्मृतिं युङ्क्ते तदा सर्वार्थसिद्धिदः ॥४५
अर्थ:
“जब कोई दीपावली पर नारायण के चरणकमलों पर ध्यान करता और मेरा स्मरण करता है, तब वह हर उद्देश्य की सिद्धि पाता है।”🍁
एतत्कथनमाख्यानं यः पठेत्सश्रद्धया नरः ।
पापानां नाशनं तस्य पुण्यानां वृद्धिकारकम् ॥४६
अर्थ:
जो व्यक्ति इस आख्यान का श्रद्धापूर्वक पाठ करता है, उसके पाप नष्ट होते हैं और पुण्य बढ़ते हैं।🍁
विद्यावित्तं यशः पुत्रान्सौभाग्यं दीर्घजीवितम् ।
आख्यानश्रवणाद्भक्तः प्राप्नुयादत्र निश्चितम् ॥४७
अर्थ:
जो इस कथा को सुनता है, उसे विद्या, धन, यश, पुत्र, सौभाग्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती
है।🍁
राज्यं पदं प्रतिष्ठां च स्त्रीलाभं धान्यमेव च ।
पाठकः सम्प्रलभते लक्ष्मीपुत्रानुकम्पया ॥४८
अर्थ:
पाठ करने वाले को राज्य, प्रतिष्ठा, उत्तम स्थान, संतान और धान्य-संपत्ति की वृद्धि लक्ष्मीपुत्र गणेश की कृपा से होती है।🍁
दीपावल्यां विशेषेण यः पठेत्पूज्य चान्वहम् ।
तस्यांगेषु वसत्येव महागणपति: स्वयम् ॥४९
अर्थ:
जो दीपावली पर विशेष रूप से इसका पाठ और पूजन करता है, उसके घर में स्वयं महागणपति वास करते हैं।🍁
अज्ञानमोहमायाश्च रोगदुःख भयादिकम् ।
नश्येत्सुतेन लक्ष्म्याः स्मरणान्मम नित्यशः ॥५०
अर्थ:
“लक्ष्मीपुत्र के नाम-स्मरण से अज्ञान, मोह, रोग, दुःख और भय आदि का नाश हो जाता है।”🍁
कन्या-सौभाग्यमायुष्यं धनधान्यसमृद्धयः ।
लभते संश्रुतं सर्वं पाठेनास्य कथामृतेः ॥५१
अर्थ:
इस कथा के पाठ से कन्या-सौभाग्य, आयु, धन-धान्य और समृद्धि की प्राप्ति होती
है।🍁
यत्रायं कथितो भावः पूर्णानन्दस्य सुन्दरः ।
तत्र सिद्धिर्निरन्तरं जायते विघ्ननाशिनी ॥५२
अर्थ:
जहाँ यह पूर्णानंद महिमा कथा सुनाई और याद की जाती है, वहाँ निरंतर सिद्धि मिलती है और विघ्न मिटते हैं।🍁
लक्ष्मीपुत्रं गणेशं च नमामि शरणं मम ।
सर्वकामप्रदं नित्यं भक्तानां विघ्ननाशनम् ॥५३
अर्थ:
मैं लक्ष्मीपुत्र गणेश को नमस्कार करता हूँ, जो भक्तों के लिए सर्वकाम प्रदाता और विघ्ननाशक शरण हैं।🍁
सच्चिदानन्दरूपं तं नारायणस्य ली्लया ।
अवतारं गणेशं च पूर्णानन्दं भजाम्यहम् ॥५४
अर्थ:
जो सच्चिदानंदरूप और नारायण की लीला स्वरूप अवतार हैं, उस पूर्णानंद गणेश की मैं वंदना करता हूँ।🍁
इदमाख्यानसम्पूर्णं पूर्णानन्दप्रसादतः ।
पठन् शृण्वन् स्मरच्चैव विघ्नमुक्तो धनाढ्यभवेत् ॥५५
अर्थ:
इस प्रकार यह पूर्णानंद गणपति आख्यान पूर्ण हुआ। जो इसका पाठ, श्रवण और स्मरण करता है, वह विघ्नों से मुक्त होकर सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।
*🍀 आध्यात्मिक ज्ञान 🍀*
*🙏श्रीलक्ष्मीपुत्र पूर्णानन्द महागणपतये नमः🙏*
*🙏जय श्री लक्ष्मीपुत्र पूर्णानंद गणपति महाराज की जय🙏*
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🙏🍀🌹🌷🌻🌺🌸🌹🍁🌷🙏
जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
अंक ज्योतिष के अनुसार आपका मूलांक तीन आता है। यह बृहस्पति का प्रतिनिधि अंक है। आप दार्शनिक स्वभाव के होने के बावजूद एक विशेष प्रकार की स्फूर्ति रखते हैं। आपकी शिक्षा के क्षेत्र में पकड़ मजबूत होगी। आप एक सामाजिक प्राणी हैं। ऐसे व्यक्ति निष्कपट, दयालु एवं उच्च तार्किक क्षमता वाले होते हैं। आप सदैव परिपूर्णता या कहें कि परफेक्शन की तलाश में रहते हैं यही वजह है कि अकसर अव्यवस्थाओं के कारण तनाव में रहते हैं। अनुशासनप्रिय होने के कारण कभी-कभी आप तानाशाह भी बन जाते हैं।
शुभ दिनांक : 3, 12, 21, 30
शुभ अंक : 1, 3, 6, 7, 9,
शुभ वर्ष : 2028, 2030, 2031, 2034, 2043, 2049, 2052,
ईष्टदेव : देवी सरस्वती, देवगुरु बृहस्पति, भगवान विष्णु
शुभ रंग : पीला, सुनहरा और गुलाबी
जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :
नवीन व्यापार की योजना भी बन सकती है। दांपत्य जीवन में सुखद स्थिति रहेगी। घर या परिवार में शुभ कार्य होंगे। आपके लिए यह वर्ष सुखद है। किसी विशेष परीक्षा में सफलता मिल सकती है। नौकरीपेशा के लिए प्रतिभा के बल पर उत्तम सफलता का है। महत्वपूर्ण कार्य से यात्रा के योग भी है। मित्र वर्ग का सहयोग सुखद रहेगा। शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे।
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज के दिन भी आपको विविध परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। सेहत असामान्य रहने से मानसिक उद्धेग रहेगा ऊपर से घरेलू परेशानियां भी पीछा नहीं छोड़ेंगी। घर में किसी ना किसी से तकरार अथवा नारजगी का सामना करना पड़ेगा। ना चाहकर भी पर्यटन करना पड़ेगा जिससे सेहत ज्यादा बिगड़ने की सम्भावना है। कार्य क्षेत्र पर भी आज अव्यवस्था रहने से ज्यादातर कार्य विलम्ब से होंगे अथवा बीच मे ही छोड़ने पड़ेंगे। आर्थिक रूप से भी दिन चिंताजनक रहेगा। लाभ की मात्रा कम परन्तु आकस्मिक खर्च अधिक रहने से बजट बिगड़ेगा। महिलाओं का स्वभाव चिड़चिड़ा रहेगा।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज आपके दिन का आरंभ शुभ समाचार से होगा। परिजनों से मनोकामना पूर्ति करवा सकेंगे लेकिन आज आपके लिए व्यावसायिक अथवा अन्य महत्त्वपूर्ण सरकारी कार्यो को आगे के लिए सरकाना ही बेहतर रहेगा। अन्यथा कुछ ना कुछ विघ्न आने से लंबे समय के लिए लटक सकते है। व्यावसायिक क्षेत्र से आशानुकूल धन लाभ हो जाएगा परन्तु खर्च भी आवश्यकता से अधिक करेंगे सामाजिक क्षेत्र पर दिखावे की प्रवृति के कारण अन्य लोग ईर्ष्या करेंगे। महिलाओ की किसी से कहासुनी होगी जिसमें आपका पक्ष सही होने पर विजय मिलेगी। आज छोटी मोटी शारीरिक समस्या लगी रहेगी लेकिन इसकी परवाह छोड़ मनोरंजन पर ध्यान केंद्रित रहेगा।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज के दिन आपके सुख सुविधाओं में वृद्धि होगी। घर के लिए नए सामन की खरीददारी करेंगे। आज आप आराम की जिंदगी बिताने पर ज्यादा जोर देंगे इसके लिए खर्च करने से पीछे नही हटेंगे। महिलाये भी आज घरेलू आवश्यकतओं के ऊपर खर्च करेंगी सौंदर्य प्रसाधन एव अन्य कीमती सामान पर खर्च होगा। व्यवसाय की स्थिति मध्यान तक धीमी रहेगी इसके बाद अचानक गति आने से आर्थिक आमाद होने लगेगी। आज अधीनस्थों के ऊपर ज्यादा निर्भर ना रहें हानि हो सकती है। बाहर यात्रा पर्यटन के भी योग है। बुजुर्गो से कीमती सलाह मिलेगी।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज के दिन आप अपने आप को अन्य लोगो की अपेक्षा उच्चतम आंकेंगे। वैचारिक स्थिति आज बेहतर रहने से घर बाहर प्रसंशा होगी जिससे अतिआत्मविश्वास की भावना से ग्रस्त रहेंगे। कार्य क्षेत्र पर आज अधिकतर काम जल्दबाजी में पूर्ण करेंगे जिससे कुछ त्रुटि हो सकती है। आर्थिक लाभ के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ेगा फिर भी कामचलाऊ से ही संतोष करना पड़ेगा। परिवार के सदस्यों के साथ व्यवहार शून्यता नए क्लेश खड़े करेगी। महिलाये अपनी अनदेखी होने पर भीतर से जली भुनी रहेंगी छोटे काम को भी बढ़ा चढ़ा कर पेश करेंगी।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन अशांति से भरा रहेगा। प्रातः काल मे ही आसपडोसी अथवा पारिवारिक सदस्य से किसी पुरानी बात को लेकर कहासुनी होगी। अहम की भावना भी अधिक रहने से गलती करने पर भी मानेंगे नही करेंगे क्रोध में आकर जो मन मे आये बोल देंगे बाद में इसकी ग्लानि भी होगी। आज आपके संपर्क में आने वाला कोई भी व्यक्ति दिल दुखा कर ही जायेगा। व्यावसायिक स्थिति भी आपके रूखे व्यवहार के चलते उतार चढ़ाव से भरी रहेगी। धन लाभ के लिए स्वभाव में नरमी रखना आवश्यक है अन्यथा भविष्य के लाभ से भी हाथ धो बैठेंगे। महिलाये परिवार के सदस्यों को एकजुट रखने की असफल कोशिश करेंगी।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन आपके लिए प्रसन्नता दायक रहेगा। घर एवं बाहर का वातावरण अनुकूल रहने से मन इच्छित कार्य कर सकेंगे। दिन के आरंभ में आलस्य रहेगा लेकिन बाद में अपनी जिम्मेदारियों को समय पर पूर्ण करेंगे। पारिवारिक उत्तकरदायित्व आज ज्यादा रहने के कारण व्यवसाय के साथ तालमेल बैठाने में थोड़ी मुश्किल रहेगी फिर भी इनपर विजय पा लेंगे। आर्थिक दृष्टिकोण से भी दिन संतोषजनक रहेगा। दैनिक उपभोग की वस्तुओं के साथ ही मनोरंजन के खर्च भी आज ज्यादा ही रहेंगे परिवारक खुशी के आगे व्यर्थ नही लगेंगे। महिलाये किसी कारण से नाराज रहेंगी।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन आपके लिए शान्तिप्रद रहेगा। आज की दिनचार्य थोड़ी विलम्ब से आरम्भ होगी सुस्ती अधिक रहने से कार्य क्षेत्र पर भी विलम्ब होगा। आर्थिक विषयो को लेकर आज ज्यादा सरदर्दी नही लेंगे आवश्यकता अनुसार सरलता से हो जाएगा। संतोषी स्वभाव रहने के कारण मानसिक रूप से भी शांत ही रहेंगे परन्तु किसी आवश्यक कार्य को करने में हड़बड़ी अवश्य करेंगे उसके बाद भी कार्य लंबित रहने पर निराशा होगी। महिलाये भी आज अपने मे ही मगन रहेंगी जिससे घरेलू कार्य थोड़े अस्त-व्यस्त होंगे। सामाजिक कार्यक्रम को लेकर दिनचार्य में बदलाव करना पड़ेगा।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज आपके अंदर चंचलता अधिक रहेगी। आज जल्दी से किसी कार्य को करने का मन नही करेगा घरेलू कार्यो को भी यथा संभव टालने की कोशिश करेंगे या जिस भी कार्य को करेगे बेमन से ही करेंगे। बाहर के खान-पान में संयम ना रहने से सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। तरल एवं अन्य शीतल पेय से परहेज रखें खांसी जुखाम की शिकायत हो सकती है। कार्य क्षेत्र एवं घरेलू कार्यो में लापरवाही करने पर नुकसान के साथ ही जिस लाभ के अधिकारी थे उससे वंचित रह जाएंगे। महिलाये आज पर्यटन मनोरंजन के मूड में रहेंगी सभी घरेलू कार्य विलम्ब से होंगे।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन आपके लिए हानिकर रहेगा। अस्त व्यस्त दिनचार्य रहने के कारण सभी कार्य धीमी गति से होंगे। स्वभाव में भी आज उदासीनता अधिक रहेगी। महिलाओ को आर्थिक कमी के कारण स्वयं के साथ ही पारिवारिक आवश्यकताओं में भी कटौती करनी पड़ेगी जिससे संतान एवं अन्य पारिवारिक सदस्यों के साथ संबंध असामान्य बनेंगे। मानसिक शांति के लिए आज आप आध्यात्म का सहारा लेंगे परन्तु यहां भी ध्यान भटकने से पूर्ण शांति नही मिल सकेगी। दान पुण्य धार्मिक यात्रा खर्च की चिन्ता से निरस्त भी करनी पड़ सकती है। व्यवसाय से लाभ तो होगा लेकिन खर्च पहले से तैयार रहेंगे।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन आपके लिए आनंददायक रहेगा परन्तु आज आपका विनोदी स्वभाव रंग में भंग भी डाल सकता है। सामने वाले का स्वभाव अचानक बदलने से हतप्रभ रहेंगे। नौकरी वाले जातक आराम के मूड में रहेंगे परन्तु आकस्मिक कार्य आने से कर नही सकेंगे। व्यवसायी वर्ग आज कम समय मे अधिक लाभ कमा कर प्रसन्न रहेंगे। धन लाभ के साथ ही सार्वजनिक व्यवहार भी बढ़ेंगे। महिलाये भी आज परिवार की खुशी के लिए अपनी इच्छाओं का भी त्याग कर देंगी फिर भी आत्मसन्तोषी रहेंगी। घर मे मित्र रिश्तेदारों के आने से चहल पहल बनेगी। मनपसन्द भोजन वाहन सुख मिलेगा।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
नौकरी पेशा जातको के लिए आज का दिन शांति वाला रहेगा अधिकारियों से अपनी बात आसानी से मनवा लेंगे इसके विपरीत व्यवसायी वर्ग के मन मे कुछ ना कुछ उथल पुथल लगी रहेगी। धन लाभ के लिए जुगाड़ू प्रवृति अपनाएंगे फिर भी सफलता संदिग्ध ही रहेगी। महिलाये आज लेदेकर अपना काम बना ही लेंगी घरेलू साज सज्जा पर खर्च भी करेंगी। मध्यान पश्चात का समय स्नेही जनों के साथ उत्तम भोजन लघु पर्यटन में आनंद से व्यतीत होगा। आज आपको घर के बुजुर्ग अथवा बाहरी वरिष्ठ व्यक्ति से खरी खोटी भी सुनने को मिलेगी फिर भी धैर्य बनाये रखें व्यक्तित्त्व विकास में लाभकारी ही रहेगी।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज के दिन आपमे आध्यात्मिक भावनाएं रहने से ईश्वरीय भजन पूजन में समय देंगे धार्मिक क्षेत्र की यात्रा भी हो सकती है। सेहत प्रातः काल से ही नरम-गरम रहने से कार्यो के प्रति उत्साह कम रहेगा। व्यापारी लोग अपने कार्य ठीक प्रकार से करेंगे मध्यान तक बिक्री कम रहेगी इसके बाद तेजी आने पर ही धन लाभ निश्चित हो सकेगा। पुरानी उधारी चुकता होने से राहत मिलेगी। परिवार में आज वातावरण मंगलमय रहेगा। सदस्य एक दूसरे से भावनात्मक संबंध रखेंगे आवश्यकता के समय सहयोग करेंगे। भाई-बंधुओ में थोड़ी खटपट होने की संभावना है। विवेक से काम लें।

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