Vaidik Panchang 28082025 Brihaspati Vrat Katha

🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 28 अगस्त 2025*
🌤️ *दिन – गुरूवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शरद ऋतु*
🌤️ *मास – भाद्रपद*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – पंचमी शाम 05:56 तक तत्पश्चात षष्ठी*
🌤️ *नक्षत्र – चित्रा सुबह 08:43 तक तत्पश्चात स्वाती*
🌤️ *योग – शुक्ल दोपहर 01:18 तक तत्पश्चात ब्रह्म*
🌤️ *राहुकाल – दोपहर 02:14 से शाम 03:49 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:22*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:57*
👉 *दिशाशूल – दक्षिण दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – ऋषि पंचमी, सामा पंचमी*
💥 *विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
         🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️

🌷 *सूर्य षष्ठी* 🌷
🙏🏻 *भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मोरयाई छठ का व्रत रखा जाता है। इसे मोर छठ या कुछ स्थानों पर सूर्य षष्ठी व्रत भी कहते हैं। इस बार यह व्रत 29 अगस्त, शुक्रवार को है। भविष्योत्तर पुराण के अनुसार, प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान सूर्य के निमित्त व्रत करना चाहिए। इनमें भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान, सूर्योपासना, जप एवं व्रत किया जाता है। इस दिन सूर्य पूजन, गंगा स्नान एवं दर्शन तथा पंचगव्य सेवन से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। इस दिन व्रत को अलोना (नमक रहित) भोजन दिन में एक बार ही ग्रहण करना चाहिए। सूर्य पूजा में लाल फूल, गुलाल, लाल कपड़ा, लाल रंग की मिठाई आदि का विशेष महत्व है।*
        🕉️ ~ *वैदिक पंचांग* ~ 🕉️

🌷 *गणेश उत्सव* 🌷
🙏🏻 *मोर पंख सिर्फ भगवान श्रीकृष्ण को नहीं, बल्कि सभी देवी–देवताओं को प्रिय है। इसमें नौ ग्रहों का निवास भी माना गया है। ज्योतिष शास्त्र से जुड़े कुछ खास उपायों को गणेश उत्सव पर किया जाए तो पैसों के साथ ही जीवन की अन्य कई तरह की समस्याओं को दूर किया जा सकता है। आइए जानते हैं मोर पंख से जुड़े कुछ खास आसान उपाय….*

👉🏻 *गणेश उत्सव में सिर्फ 1 मोर पंख बदल सकता है आपका भाग्य*
🌷 *कारगर उपाय* 🌷
*आपका भाग्य बदल सकता है गणेश जी को चढ़ाया हुआ एक मोरपंख*
🌿 *पैसों से जुड़ी प्राॅब्लम*
*जिन लोगों को पैसों की कमी रहती है वे पर्स में ये मोर पंख रखें।*
🌿 *रुके हुए काम होंगे पूरे*
*इस मोर पंख को हमेशा साथ रखने पर रुके हुए काम पूरे होने लगते हैं।*
🌿  *बच्चा जिद्दी हो तो*
*उस बच्चे के सिर से पैर तक ये मोर पंख फिरा दें। फायदा होगा।*
🌿 *डरावने सपने आते हों तो*
*रात में डरावने सपने आते हों तो मोर पंख को सिरहाने रखकर सोएं।*
🌿 *नकारात्मक शक्ति*
*मोर पंख को घर के किसी ऐसी जगह पर रखें जहां से वो दिखाई दे तो नकारात्मकता दूर होगी।*
🌿 *बरकत के लिए*
*साउथ इस्ट में इस मोर पंख को रखने से घर में हमेशा बरकत रहेगी।*
🌿 *किताब में मोर पंख*
*इस मोर पंख को स्टूडेंट अपनी किताब में रखें तो पढ़ाई में मन लगने लगेगा।*
🌿 *यदि वास्तुदोष हो तो*
*यदि मुख्य द्वार दोष में हो तो दरवाजे के ऊपर तीन मोर पंख लगाएं।*
🌿 *शत्रु परेशान कर रहा हो तो*
*मंगलवार को मोर पंख से हनुमानजी के मस्तक पर सिंदूर से शत्रु का नाम लिखे। रात भर मोर पंख को देवस्थान पर रखें व सुबह बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।*

            🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

_*🕉️बृहस्पति व्रत कथा, पूजा और उद्यापन विधि 🕉️*_
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हिन्दू धर्म में बृहस्पतिवार के दिन श्री हरी विष्णु की पूजा की जाती है। माना जाता है इस दिन श्रद्धापूर्वक श्री हरी का व्रत और पूजन करने से इच्छित फल की प्राप्ति होती है। इसके अलावा जल्द शादी करने की इच्छा रखे वालो के लिए भी ये व्रत बहतु लाभदायक होता है। अग्निपुराणानुसार अनुराधा नक्षत्र युक्त गुरुवार से प्रारंभ करके सात गुरुवार तक नियमित रूप से व्रत करने से बृहस्पति ग्रह की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।

इसके अलावा घर में सुख शांति और श्री विष्णु भगवान् का आशीर्वाद भी मिलता है। लेकिन केवल पूजन करने और व्रत रखने से सम्पूर्ण फल नहीं मिलते। पूर्ण फल के लिये बृहस्पति देव की विधि और भाव से पूजा
करना भी आवश्यक है। व्रती की सुविधा के लिये हम श्री बृहस्पति देव की पूजा और उद्यापन विधि क्रम से बता रहे है आशा है आप इससे लाभान्वित होंगे।

बृहस्पतिवार व्रत उद्यापन विधि एवं नियम
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गुरुवार के दिन भगवान विष्णु जी एवं बृहस्पति देव दोनों की पूजा होती है जिससे घर में सुख समृद्धि बनी रहती है, कुवारी लडकियां इस व्रत को इसलिए करती हैं जिससे की उनके विवाह में आने वाली रुकावटें दूर हो जाएगी। ऐसा कहा जाता है की अगर आप 1 वर्ष में गुरुवार का व्रत करते हैं तो आपके घर में कभी भी पैसे रुपयों की कमी नही होती और आपका पर्स कभी खली नही होता। आपको एक वर्ष में 16 गुरुवार व्रत करने चाहिए। 16 गुरुवार व्रत करने से आपको मनोवांछित फल मिलते हैं और व्रत पूरे करके 17वें गुरुवार को उद्द्यापन करना चाहिए।

गुरुवार व्रत को शुरू करने का शुभ समय
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पूष या पौष के महीने को छोड़कर जो कि दिसम्बर या जनवरी में आता है को छोड़कर आप इस व्रत को किसी भी माह के शुक्लपक्ष के प्रथम गुरुवार से शुरू कर सकते हैं। शुक्ल पक्ष बहुत ही शुभ समय होता है किसी भी नए कार्य को शुरू करने का। अग्नि पुराण के अनुसार गुरुवार का व्रत अनुराधा नक्षत्र युक्त गुरुवार से आरंभ करके लगातार सात या 16 गुरुवार करना चाहिए।

व्रत करने की विधि
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इस व्रत की विधि के लिए आपको बहुत ही कम सामग्री चाहिए होगी जैसे की चने की दाल, गुड़, हल्दी, थोड़े से केले, एक उपला हवन करने के लिए और भगवान विष्णु की फोटो और अगर केले का पेड़ हो तो बहोत ही अच्छा है।

व्रत वाले दिन सुबह उठकर स्नान आदि कार्यों से निवृत्त होकर सबसे पहले आप भगवान के आगे बैठ जाइये, और भगवान को साफ करने के पश्चात चावल एवं पीले फूल लेकर 16 गुरुवार व्रत करने का संकल्प करिए ।

एवं भगवान विष्णु जी को छोटा पीला वस्त्र अर्पण करिए और अगर केले के पेड़ के सामने पूजा कर रहें हैं तो भी छोटा पीला कपड़ा चढ़ाइए।

आज कल लोगों के घर छोटे होते हैं तो आम तौर पर उनके घरों में केले का पेड़ नहीं होता इसलिए आप अपने घर के मंदिर में ही व्रत की विधि कर सकते हैं।

एक लोटे में जल रख लीजिये उसमे थोड़ी हल्दी डालकर विष्णु भगवान जी या केले के पेड़ की जड़ को स्नान कराइए।

अब उसी लोटे में गुड़ एवं चने की दाल डाल के रख लीजिये और अगर आप केले के पेड़ की पूजा कर रहें हैं तो उसी पे चढ़ा दीजिये।

तिलक करिए भगवन का हल्दी या चन्दन से, पीला चावल जरुर चढ़ाएं, घी का दीपक जलाये, कथा पढ़िए।

कथा के बाद उपले पे हवन करिए, गाय के उपले को गर्म करके उसपे घी डालिए और जैसे ही अग्नि प्रज्वलित हो जाये उसमे हवन सामग्री के साथ गुड़ एवं चने की भी आहुति देनी होती है, 5, 7 या 11 ॐ गुं गुरुवे नमः मन्त्र के साथ, हवन के बाद आरती कर लीजिये।

और अंत में क्षमा प्रार्थना करिए, पूजा पूरी होने के बाद आपके लोटे में जो पानी है उसे अपने घर के आस पास के केले के पेड़ पे चढ़ा दीजिये।

इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि इस दिन आप केले के पेड़ की पूजा करते हैं इसलिए गलती से भी केला न खाएं आप इसे केवल पूजा में चढ़ा सकते हैं एवं प्रसाद में बाट सकते हैं, अगर कोई गाय मिले तो उसे चने की दाल और गुड़ जरुर खिलाएं इससे बहोत पुण्य मिलता है।

पुरुष यह व्रत लगातार 16 गुरुवार कर सकते हैं परन्तु महिलाओं या लड़कियों को यह व्रत तभी करना चाहिए जब वो पूजा कर सकती हैं, मुश्किल दिनों में यह व्रत नही करना चाहिए।

गुरुवार व्रत की उद्द्यापन विधि
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उद्द्यापन के एक दिन पहले 5 चीजें लाकर रख लीजिये- चने की दाल, गुड़, हल्दी, केले, पपीता और पीला कपड़ा और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा रख दीजिये।

फिर गुरुवार के दिन हर व्रत की तरह यथावत पूजा के बाद प्रार्थना करिए की आपने संकल्प के अनुसार अपने व्रत पूरे कर लिए हैं और भगवान आप पर कृपा बनाये रखें, और आज आप पूजन का उद्यापन करने जा रहे हैं ।इसके पश्चात पूजा में ये सारी सामग्री भगवान विष्णु को चढ़ाकर किसी ब्राह्मण को दान करके उनका आशीर्वाद लीजिये।बृहस्पतिवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है।  पूजा के बाद कथा सुननी चाहिए। इस दिन पीले वस्त्रों, पीले फलों का प्रयोग करना चाहिए। मान्यतानुसार इस दिन एक बार बिना नमक का पीला भोजन करना चाहिए। भोजन में चने की दाल का भी प्रयोग किया जा सकता है।

इस दिन प्रात: उठकर भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। अगर बृहस्पतिदेव की पूजा करनी हो तो उनका ध्यान करना चाहिए। इसके बाद फल, फूल, पीले वस्त्रों से भगवान बृहस्पतिदेव और विष्णुजी की पूजा करनी चाहिए। प्रसाद के रूप में केले चढ़ाना शुभ माना जाता है लेकिन इन केलों को दान में ही दे देना चाहिए। शाम के समय बृहस्पतिवार की कथा सुननी चाहिए और बिना नमक का भोजन करना चाहिए।

गुरुवार व्रत का फल
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गुरुवार का व्रत पूरे श्रद्धाभाव से करने पर व्यक्ति को गुरु ग्रह का दोष खत्म हो जाता है तथा गुरु कृपा प्राप्त होती है। इन दिन व्रत करने से व्यक्ति को सारे सुखों की प्राप्ति होती है। व्रत करने वाले जातक को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस दिन बाल न कटाएं और ना ही दाढ़ी बनवाएं।

बृहस्पति वार व्रत उद्यापन विधि के लिए आवश्यक सामग्री:
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धोती – 1 जोड़ा
पीला कपड़ा – 1.25 मीटर
जनेउ – एक जोड़ा
चने की दाल – 1.25 किलो
गुड़ – 250 ग्राम
पीला फूल, या फूल माला
दीपक – 1
घी – 250 ग्राम
धूप – 1 पैकेट
हल्दीपाउडर – 1 पैकेट
कपूर – 1 पैकेट
सिंदूर – 1 पैकेट
बेसन के लडू – 1.25 किलो
मुन्नका (किशमिश) – 25 ग्राम
कलश – 1
आम के पत्ते
सुपारी
श्रीफल
पीला वस्त्र
केला
विष्णु भगवान की मूर्ति
केले का पेड़

बृहस्पति व्रत उद्यापन विधि:
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1. इस व्रत का उद्यापन करने के लिए सुबह समय से उठकर तैयार हो जाएँ, और पूजा घर में गंगाजल को छिड़क कर अच्छे से साफ़ कर लें।

2. और ध्यान रखें की पीले वस्त्र ही पहने।

3. पूजा घर को साफ करने के बाद या अलग से आसान लगाकर उस पर भगवान् विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें।

4. उसके बाद मंदिर या अपने घर के आस पास स्थित केले के पेड़ की पूजा अर्चना करें, जल चढ़ाकर दीपक जलाएं।

5. फिर षोडशोपचार पूजन विधि से विष्णु जी का पूजन करे।

6. अब घर आकर या वही बैठकर कथा करें।

7. उसके बाद प्रसाद लोगो में बाटें।

8. उसके बाद श्री हरी के मंत्रो का उच्चारण करके यदि कोई गलती हुई तो उसके लिए माफ़ी मांगे।

षोडशोपचार पूजन
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षोडशोपचार पूजन में निम्न सोलह तरीके से विधिपूर्वक पूजन किया जाता है।

पवित्रीकरण
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सर्वप्रथम हाथ में जल लेकर मंत्र के द्वारा अपने ऊपर जल छिड़कें:-

ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा।
यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः॥

इसके पश्चात् पूजा कि सामग्री और आसन को भी मंत्र उच्चारण के साथ जल छिड़क कर शुद्ध कर लें:-

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

अब आचमन करें
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पुष्प से एक –एक करके तीन बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ केशवाय नमः
ॐ नारायणाय नमः
ॐ वासुदेवाय नमः
फिर ॐ हृषिकेशाय नमः कहते हुए हाथों को खोलें और अंगूठे के मूल से होंठों को पोंछकर हाथों को धो लें।

गणेश पूजन
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इसके बाद सबसे पहले गणेश जी का पूजन पंचोपचार विधि (धूप, दीप, पूष्प, गंध, एवं नैवेद्य) से करें। चौकी के पास हीं किसी पात्र में गणेश जी के विग्रह को रखकर पूजन करें। यदि गणेश जी की मूर्ति उपलब्ध न हो तो सुपारी पर मौली लपेट कर गणेश जी बनायें।

संकल्प :-
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हाथ में जल, अक्षत, पान का पत्ता, सुपारी और कुछ सिक्के लेकर निम्न मंत्र के साथ उद्यापन का संकल्प करें:‌ –

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः। श्री मद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्याद्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरेऽष्टाविंशतितमे कलियुगे प्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गतब्रह्मावर्तैकदेशे पुण्यप्रदेशे बौद्धावतारे वर्तमाने यथानामसंवत्सरे अमुकामने महामांगल्यप्रदे मासानाम्‌ उत्तमे अमुकमासे (जिस माह में उद्यापन कर रहे हों, उसका नाम) अमुकपक्षे (जिस पक्ष में उद्यापन कर रहे हों, उसका नाम) अमुकतिथौ (जिस तिथि में उद्यापन कर रहे हों, उसका नाम) गुरुवासरान्वितायाम्‌ अमुकनक्षत्रे (उद्यापन के दिन, जिस नक्षत्र में सुर्य हो उसका नाम) अमुकराशिस्थिते सूर्ये (उद्यापन के दिन, जिस राशिमें सुर्य हो उसका नाम) अमुकामुकराशिस्थितेषु (उद्यापन के दिन, जिस –जिस राशि में चंद्र, मंगल,बुध, गुरु शुक, शनि हो उसका नाम) चन्द्रभौमबुधगुरुशुक्रशनिषु सत्सु शुभे योगे शुभकरणे एवं गुणविशेषणविशिष्टायां शुभ पुण्यतिथौ सकलशास्त्र श्रुति स्मृति पुराणोक्त फलप्राप्तिकामः अमुकगोत्रोत्पन्नः (अपने गोत्र का नाम) अमुक नाम(अपना नाम) अहं गुरुवार व्रत उद्यापन करिष्ये ।

सभी वस्तुएँ बृहस्पति देव के पास छोड़ दें।ध्यान:-
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मन्त्रों और भाव द्वारा भगवान का ध्यान  किया जाता है। आवाहन का अर्थ है पास लाना। ईष्ट देवता को अपने सम्मुख या पास लाने के लिए आवाहन किया जाता है। ईष्ट देवता से निवेदन किया जाता है कि वे हमारे सामने हमारे पास आए। कि वह हमारे ईष्ट देवता की मूर्ति में वास करें, तथा हमें आत्मिक बल एवं आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करें, ताकि हम उनका आदरपूर्वक सत्कार करें।

दोनों हाथ जोड़ गुरु देव का ध्यान करें:-

देवानां च ऋषीणां च गुरुं का चनसन्निभम।
बुद्धि भूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पितम।

आवाहन :-
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अब हाथ में अक्षत तथा फूल लेकर बुध देव का आवाहन निम्न मंत्र के द्वारा करें:-

जीवश्चाङ्गिर-गोत्रतोत्तरमुखो दीर्घोत्तरा संस्थित:
पीतोश्वत्थ-समिद्ध-सिन्धुजनिश्चापो थ मीनाधिप:।
सूर्येन्दु-क्षितिज-प्रियो बुध-सितौ शत्रूसमाश्चापरे
सप्ताङ्कद्विभव: शुभ: सुरुगुरु: कुर्यात् सदा मङ्गलम्।।

सभी वस्तुएँ बृहस्पति देव के पास छोड़ दें।

आसन :-
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ईष्ट देवता को आदर के साथ प्रार्थना करे की वो आसन पे विराज मान होवे ।

हाथ में पुष्प लेकर मंत्र के द्वारा बृहस्पति देव को आसन समर्पित करें:-

3. पाद्य
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पाद्यं, अर्घ्य दोनों ही सम्मान सूचक है।  भगवान के प्रकट होने पर उनके हाथ पावं धुलाकर आचमन कराकर स्नान कराते हैं ।

4. अर्घ्य
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पाद्यं, अर्घ्य दोनों ही सम्मान सूचक है।  भगवान के प्रकट होने पर उनके हाथ पावं धुलाकर आचमन कराकर स्नान कराते हैं ।

5. आचमन
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आचमन यानी मन, कर्म और वचन से शुद्धि आचमन का अर्थ है अंजलि मे जल लेकर पीना, यह शुद्धि के लिए किया जाता है। आचमन तीन बार किया जाता है। इससे मन की शुद्धि होती है।

6. स्नान
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ईष्ट देवता, ईश्वर को शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है | एक तरह से यह ईश्वर का स्वागत सत्कार होता है | जल से स्नान के उपरांत भगवान को  पंचामृत स्नान कराया जाता है।

7. वस्त्र
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ईश्वर को स्नान के बाद वस्त्र चढ़ाये जाते हैं, ऐसा भाव रखा जाता है कि हम ईश्वर को अपने हाथों से वस्त्र अर्पण कर रहे हैं या पहना रहे है, यह ईश्वर की सेवा है।

8. यज्ञोपवीत
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यज्ञोपवीत का अर्थ जनेऊ होता है। भगवान को समर्पित किया जाता है। यह देवी को अर्पण नहीं किया जाता है। यह सिर्फ देवताओं को ही अर्पण किया जाता है।

9. गंधाक्षत
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अक्षत (अखंडित चावल ), रोली, हल्दी,चन्दन, अबीर,गुलाल,

10. पुष्प
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फूल माला (जिस ईश्वर का पूजन हो रहा है उसके पसंद के फूल और उसकी माला )

11. धूप
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धूपबत्ती

12. दीप
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दीपक  (घी का )

13. नैवेद्य 
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भगवान को मिठाई का भोग लगाया जाता है इसको ही नैवेद्य कहते हैं ।

14.ताम्बूल, दक्षिणा, जल -आरती
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तांबुल का मतलब पान है। यह महत्वपूर्ण पूजन सामग्री है। फल के बाद तांबुल समर्पित किया जाता है। ताम्बूल के साथ में पुंगी फल (सुपारी), लौंग और इलायची भी डाली जाती है । दक्षिणा अर्थात् द्रव्य समर्पित किया जाता है। भगवान भाव के भूखे हैं। अत: उन्हें द्रव्य से कोई लेना-देना नहीं है। द्रव्य के रूप में रुपए,स्वर्ण,
चांदी कुछ की अर्पित किया जा सकता है।
आरती पूजा के अंत में धूप, दीप, कपूर से की जाती है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। आरती में एक, तीन, पांच, सात यानि विषम बत्तियों वाला दीपक प्रयोग किया जाता है।

15. मंत्र पुष्पांजलि
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मंत्र पुष्पांजली मंत्रों द्वारा हाथों में फूल लेकर भगवान को पुष्प समर्पित किए जाते हैं तथा प्रार्थना की जाती है। भाव यह है कि इन पुष्पों की सुगंध की तरह हमारा यश सब दूर फैले तथा हम प्रसन्नता पूर्वक जीवन बीताएं।

16. प्रदक्षिणा
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नमस्कार, स्तुति -प्रदक्षिणा का अर्थ है परिक्रमा। आरती के उपरांत भगवन की परिक्रमा की जाती है, परिक्रमा हमेशा क्लॉक वाइज (clock-wise) करनी चाहिए। स्तुति में क्षमा प्रार्थना करते हैं, क्षमा मांगने का आशय है कि हमसे कुछ भूल, गलती हो गई हो तो आप हमारे अपराध को क्षमा करें।

इस तरह पूजन करने से भगवान अति प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करते हैं।

व्रत के साथ-साथ स्तोत्र पाठ एवं कथा का होना भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसीलिए इस व्रत में भी बृहस्पति व्रत कथा का श्रवण किया जाता है। गुरुवार व्रत कथा निम्न प्रकार से है :-

“मन्त्रमहार्णव” में उद्धृत बृहस्पति स्तोत्र
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पीताम्बर: पीतवपु: किरीटी, चतुर्भुजो देवगुरु: प्रशान्त: |दधाति दण्डं च कमण्डलुं च, तथाक्षसूत्रं वरदोsस्तु मह्यम् ||
नम: सुरेन्द्रवन्द्याय देवाचार्याय ते नम: |नमस्त्वनन्तसामर्थ्यं देवासिद्धान्तपारग: ||
सदानन्द नमस्तेSस्तु नम: पीडाहराय च |
नमो वाचस्पते तुभ्यं नमस्ते पीतवाससे ||
नमोSद्वितीयरूपाय लम्बकूर्चाय ते नम: |
नम: प्रहृष्टनेत्राय विप्राणां पतये नम: ||
नमो भार्गवशिष्याय विपन्नहितकारक: |
नमस्ते सुरसैन्याय विपन्नत्राणहेतवे ||
विषमस्थस्तथा नृणां सर्वकष्टप्रणाशनम् |
प्रत्यहं तु पठेद्यो वै तस्य कामफलप्रदम् ||
इति मन्त्रमहार्णवे बृहस्पतिस्तोत्रम्

स्कन्दपुराण में उद्धृत बृहस्पति स्तोत्र
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अथ श्री बृहस्पतिस्तोत्रम्

अस्य श्री बृहस्पतिस्तोत्रस्य गृत्समद ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, बृहस्पतिर्देवता, बृहस्पति प्रीत्यर्थं जपे विनियोग:
गुरुर्बृहस्पतिर्जीव: सुराचार्यो विदां वरः |
वागीशो धिषणो दीर्घश्मश्रुः पीताम्बरो युवा ||
सुधादृष्टिर्ग्रहाधीशो ग्रहपीडापहारकः |
दयाकरः सौम्यमूर्तिः सुरार्च्यः कुड्मलद्युतिः ||
लोकपूज्यो लोकगुरुः नीतिज्ञो नीतिकारकः |
तारापतिश्चाङ्गिरसो वेदवेद्यः पितामहः ||
भक्त्या बृहस्पतिं स्मृत्वा नामान्येतानि यः पठेत् |
अरोगी बलवान् श्रीमान् पुत्रवान् स भवेन्नरः ||
जीवेत् वर्षशतं मर्त्यः पापं नश्यति नश्यति |
यः पूजयेत् गुरुदिने पीतगन्धाक्षताम्बरैः ||
पुष्पदीपोपहारैश्च पूजयित्वा बृहस्पतिम् |
ब्रह्मणान् भोजयित्वा च पीडाशान्तिर्भवेत् गुरोः ||
इति श्री स्कन्दपुराणे बृहस्पतिस्तोत्रं सम्पूर्णम्

बृहस्पतिवार व्रत कथा
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प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक बड़ा व्यापारी रहता था। वह जहाजों में माल लदवाकर दूसरे देशों में भेजा करता था। वह जिस प्रकार अधिक धन कमाता था उसी प्रकार जी खोलकर दान भी करता था, परंतु उसकी पत्नी अत्यंत कंजूस थी। वह किसी को एक दमड़ी भी नहीं देने देती थी।

एक बार सेठ जब दूसरे देश व्यापार करने गया तो पीछे से बृहस्पतिदेव ने साधु-वेश में उसकी पत्नी से भिक्षा मांगी। व्यापारी की पत्नी बृहस्पतिदेव से बोली हे साधु महाराज, मैं इस दान और पुण्य से तंग आ गई हूं। आप कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे मेरा सारा धन नष्ट हो जाए और मैं आराम से रह सकूं। मैं यह धन लुटता हुआ नहीं देख सकती।

बृहस्पतिदेव ने कहा, हे देवी, तुम बड़ी विचित्र हो, संतान और धन से कोई दुखी होता है। अगर अधिक धन है तो इसे शुभ कार्यों में लगाओ, कुंवारी कन्याओं का विवाह कराओ, विद्यालय और बाग-बगीचों का निर्माण कराओ। ऐसे पुण्य कार्य करने से तुम्हारा लोक-परलोक सार्थक हो सकता है, परन्तु साधु की इन बातों से व्यापारी की पत्नी को ख़ुशी नहीं हुई। उसने कहा- मुझे ऐसे धन की आवश्यकता नहीं है, जिसे मैं दान दूं।

साधु वेश धारी बृहस्पति देव का धन नष्ट होने के लिए सेठानी को दिया गया उत्तर

तब बृहस्पतिदेव बोले “यदि तुम्हारी ऐसी इच्छा है तो तुम एक उपाय करना। सात बृहस्पतिवार घर को गोबर से लीपना, अपने केशों को पीली मिटटी से धोना, केशों को धोते समय स्नान करना, व्यापारी से हजामत बनाने को कहना, भोजन में मांस-मदिरा खाना, कपड़े अपने घर धोना। ऐसा करने से तुम्हारा सारा धन नष्ट हो जाएगा। इतना कहकर बृहस्पतिदेव अंतर्ध्यान हो गए।

व्यापारी की पत्नी ने बृहस्पति देव के कहे अनुसार सात बृहस्पतिवार वैसा ही करने का निश्चय किया। केवल तीन बृहस्पतिवार बीते थे कि उसी समस्त धन-संपत्ति नष्ट हो गई और वह परलोक सिधार गई। जब व्यापारी वापस आया तो उसने देखा कि उसका सब कुछ नष्ट हो चुका है। उस व्यापारी ने अपनी पुत्री को सांत्वना दी और दूसरे नगर में जाकर बस गया। वहां वह जंगल से लकड़ी काटकर लाता और शहर में बेचता। इस तरह वह अपना जीवन व्यतीत करने लगा।

एक दिन उसकी पुत्री ने दही खाने की इच्छा प्रकट की लेकिन व्यापारी के पास दही खरीदने के पैसे नहीं थे। वह अपनी पुत्री को आश्वासन देकर जंगल में लकड़ी काटने चला गया। वहां एक वृक्ष के नीचे बैठ अपनी पूर्व दशा पर विचार कर रोने लगा। उस दिन बृहस्पतिवार था। तभी वहां बृहस्पतिदेव साधु के रूप में सेठ के पास आए और बोले “हे मनुष्य, तू इस जंगल में किस चिंता में बैठा है?”

तब व्यापारी बोला “हे महाराज, आप सब कुछ जानते हैं।” इतना कहकर व्यापारी अपनी कहानी सुनाकर रो पड़ा। बृहस्पतिदेव बोले “देखो बेटा, तुम्हारी पत्नी ने बृहस्पति देव का अपमान किया था इसी कारण तुम्हारा यह हाल हुआ है लेकिन अब तुम किसी प्रकार की चिंता मत करो। तुम गुरुवार के दिन बृहस्पतिदेव का पाठ करो। दो पैसे के चने और गुड़ को लेकर जल के लोटे में शक्कर डालकर वह अमृत और प्रसाद अपने परिवार के सदस्यों और कथा सुनने वालों में बांट दो। स्वयं भी प्रसाद और चरणामृत लो। भगवान तुम्हारा अवश्य कल्याण करेंगे।”साधु की बात सुनकर व्यापारी बोला “महाराज। मुझे तो इतना भी नहीं बचता कि मैं अपनी पुत्री को दही लाकर दे सकूं।” इस पर साधु जी बोले “तुम लकड़ियां शहर में बेचने जाना, तुम्हें लकड़ियों के दाम पहले से चौगुने मिलेंगे, जिससे तुम्हारे सारे कार्य सिद्ध हो जाएंगे।”

लकड़हारे ने लकड़ियां काटीं और शहर में बेचने के लिए चल पड़ा। उसकी लकड़ियां अच्छे दाम में बिक गई जिससे उसने अपनी पुत्री के लिए दही लिया और गुरुवार की कथा हेतु चना, गुड़ लेकर कथा की और प्रसाद बांटकर स्वयं भी खाया। उसी दिन से उसकी सभी कठिनाइयां दूर होने लगीं, परंतु अगले बृहस्पतिवार को वह कथा करना भूल गया।

अगले दिन वहां के राजा ने एक बड़े यज्ञ का आयोजन कर पूरे नगर के लोगों केलिए भोज का आयोजन किया। राजा की आज्ञा अनुसार पूरा नगर राजा के महल में भोज करने गया। लेकिन व्यापारी व उसकी पुत्री तनिक विलंब से पहुंचे, अत: उन दोनों को राजा ने महल में ले जाकर भोजन कराया। जब वे दोनों लौटकर आए तब रानी ने देखा कि उसका खूंटी पर टंगा हार गायब है।

रानी को व्यापारी और उसकी पुत्री पर संदेह हुआ कि उसका हार उन दोनों ने ही चुराया है। राजा की आज्ञा से उन दोनों को कारावास की कोठरी में कैद कर दिया गया। कैद में पड़कर दोनों अत्यंत दुखी हुए। वहां उन्होंने बृहस्पति देवता का स्मरण किया। बृहस्पति देव ने प्रकट होकर व्यापारी को उसकी भूल का आभास कराया और उन्हें सलाह दी कि गुरुवार के दिन कैदखाने के दरवाजे पर तुम्हें दो पैसे मिलेंगे उनसे तुम चने और मुनक्का मंगवाकर विधिपूर्वक बृहस्पति देवता का पूजन करना। तुम्हारे सब दुख दूर हो जाएंगे।

बृहस्पतिवार को कैदखाने के द्वार पर उन्हें दो पैसे मिले। बाहर सड़क पर एक स्त्री जा रही थी। व्यापारी ने उसे बुलाकार गुड़ और चने लाने को कहा। इसपर वह स्त्री बोली “मैं अपनी बहू के लिए गहने लेने जा रही हूं, मेरे पास समय नहीं है।” इतना कहकर वह चली गई। थोड़ी देर बाद वहां से एक और स्त्री निकली, व्यापारी ने उसे बुलाकर कहा कि हे बहन मुझे बृहस्पतिवार की कथा करनी है। तुम मुझे दो पैसे का गुड़-चना ला दो।

बृहस्पतिदेव का नाम सुनकर वह स्त्री बोली “भाई, मैं तुम्हें अभी गुड़-चना लाकर देती हूं। मेरा इकलौता पुत्र मर गया है, मैं उसके लिए कफन लेने जा रही थी लेकिन मैं पहले तुम्हारा काम करूंगी, उसके बाद अपने पुत्र के लिए कफन लाऊंगी।”

वह स्त्री बाजार से व्यापारी के लिए गुड़-चना ले आई और स्वयं भी बृहस्पतिदेव की कथा सुनी। कथा के समाप्त होने पर वह स्त्री कफन लेकर अपने घर गई। घर पर लोग उसके पुत्र की लाश को “राम नाम सत्य है” कहते हुए श्मशान ले जाने की तैयारी कर रहे थे। स्त्री बोली “मुझे अपने लड़के का मुख देख लेने दो।” अपने पुत्र का मुख देखकर उस स्त्री ने उसके मुंह में प्रसाद और चरणामृत डाला। प्रसाद और चरणामृत के प्रभाव से वह पुन: जीवित हो गया।

पहली स्त्री जिसने बृहस्पतिदेव का निरादर किया था, वह जब अपने पुत्र के विवाह हेतु पुत्रवधू के लिए गहने लेकर लौटी और जैसे ही उसका पुत्र घोड़ी पर बैठकर निकला वैसे ही घोड़ी ने ऐसी उछाल मारी कि वह घोड़ी से गिरकर मर गया। यह देख स्त्री रो-रोकर बृहस्पति देव से क्षमा याचना करने लगी।

उस स्त्री की याचना से बृहस्पतिदेव साधु वेश में वहां पहुंचकर कहने लगे “देवी। तुम्हें अधिक विलाप करने की आवश्यकता नहीं है। यह बृहस्पतिदेव का अनादार करने के कारण हुआ है। तुम वापस जाकर मेरे भक्त से क्षमा मांगकर कथा सुनो, तब ही तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी।”

जेल में जाकर उस स्त्री ने व्यापारी से माफी मांगी और कथा सुनी। कथा के उपरांत वह प्रसाद और चरणामृत लेकर अपने घर वापस गई। घर आकर उसने चरणामृत अपने मृत पुत्र के मुख में डाला| चरणामृत के प्रभाव से उसका पुत्र भी जीवित हो उठा। उसी रात बृहस्पतिदेव राजा के सपने में आए और बोले “हे राजन। तूने जिस व्यापारी और उसके पुत्री को जेल में कैद कर रखा है वह बिलकुल निर्दोष हैं। तुम्हारी रानी का हार वहीं खूंटी पर टंगा है।”

दिन निकला तो राजा रानी ने हार खूंटी पर लटका हुआ देखा। राजा ने उस व्यापारी और उसकी पुत्री को रिहा कर दिया और उन्हें आधा राज्य देकर उसकी पुत्री का विवाह उच्च कुल में करवाकर दहेज़ में हीरे-जवाहरात दिए।

आरती बृहस्पति देव की
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जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा ।
छि छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता ।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े ।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी ।
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ॥

सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो ।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी ॥
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहत गावे ।
जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे _
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
दिनांक 28 को जन्मे व्यक्ति राजसी प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। 2 और 8 आपस में मिलकर 10 होते हैं। इस तरह आपका मूलांक 1 होगा। आपको अपने ऊपर किसी का शासन पसंद नहीं है। आप साहसी और जिज्ञासु हैं। आपका मूलांक सूर्य ग्रह के द्वारा संचालित होता है। आप अत्यंत महत्वाकांक्षी हैं।

आप आशावादी होने के कारण हर स्थिति का सामना करने में सक्षम होते हैं। आप सौन्दर्यप्रेमी हैं। आपमें सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला आपका आत्मविश्वास है। इसकी वजह से आप सहज ही महफिलों में छा जाते हैं। आपकी मानसिक शक्ति प्रबल है। आपको समझ पाना बेहद मुश्किल है।


शुभ दिनांक : 1, 10, 20, 28

शुभ अंक : 1, 10, 20, 28, 37, 46, 55, 64, 73, 82

शुभ वर्ष : 2026, 2044, 2053, 2062



ईष्टदेव : सूर्य उपासना तथा मां गायत्री

शुभ रंग : लाल, केसरिया, क्रीम,


जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :
नौकरीपेशा के लिए समय उत्तम हैं। पदोन्नति के योग हैं। यह वर्ष आपके लिए अत्यंत सुखद रहेगा। अधूरे कार्यों में सफलता मिलेगी। पारिवारिक मामलों में महत्वपूर्ण कार्य होंगे। अविवाहितों के लिए सुखद स्थिति बन रही है। विवाह के योग बनेंगे। बेरोजगारों के लिए भी खुशखबर है इस वर्ष आपकी मनोकामना पूरी होगी। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह वर्ष उत्तम रहेगा।


मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन प्रत्येक कार्यो में विजय दिलाने वाला रहेगा लेकिन इसके लिये समय का सदुपयोग करना पड़ेगा। परिवार में भाई बंधुओ से ईर्ष्या युक्त संबंध रहेंगे। अन्य लोगो आपकी प्रगति देख वैरभाव रखेंगे आप भी आज किसी कारण से हीन भावना से ग्रस्त रहेंगे। आज अपने काम से काम रखें अन्यथा अनुकूल दिन का उचित लाभ नहीं मिल सकेगा। अतिआवश्यक कार्य संध्या से पहले पूर्ण कर लें इसके बाद शारीरिक अथवा अन्य कारणों से बाधा आने लगेगी। कार्य क्षेत्र पर अथवा आस पडोस में नए शत्रु पनपेंगे सतर्क रहें। स्त्री संतानों से भी किसी बात पर मतभेद हो सकता है।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन शुभ फलदायक रहने पर भी आप इसका पूर्ण लाभ नही उठा पाएंगे। आपका स्वभाव अन्य लोगो के प्रति लापरवाह और रूखा रहेगा केवल स्वार्थ पूर्ति हेतु ही व्यवहार रखेंगे। जिसे अपना हितैषी समझेंगे वही दुख का कारण बनेगा। कार्य व्यवसाय में लाभ के अवसर मिलेंगे परन्तु अनुभव की कमी के कारण हाथ से निकलने की सम्भवना है लाभ पाने के लिये अहम की भावना त्याग किसी अनुभवी की सलाह अवश्य लें। धर्म कर्म में निष्ठा होने पर भी पाप कर्म के प्रति ज्यादा आकर्षण रहेगा। परिजन आपकी बातों का जल्दी से विश्वास नही करेंगे केवल मित्र लोग ही स्वार्थ वश आपकी हाँ में हाँ मिलाएंगे। सेहत संध्या बाद प्रतिकूल होगी।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज के दिन आपकी वैचारिक शक्ति प्रबल रहेगी लेकिन फिर भी अंतर्द्वन्द में ही फंसे रह जाएंगे जिस कार्य को करना आरम्भ करेंगे उसे मनमाने तरीके से ही करेंगे किसी का कार्य मे दखल देना अखरेगा बेवजह की बहस के लिये तुरंत तैयार रहेंगे। कार्य क्षेत्र पर मध्यान तक उदासीनता रहेगी इसके बाद भी मेहनत करने पर ही आय के स्तोत्र बनेंगे लाभ आज सीमित साधनों से होगा लेकिन मेहनत आगे अवश्य धन लाभ के मार्ग बनाएगी। मन कुछ समय के लिये अनैतिक कार्यो मौज शौक की ओर भटकेगा लेकिन इसमें भी कुछ ना कुछ व्यवधान आने से इच्छा पूर्ति नही कर पाएंगे। पति/स्त्री संतान सुख मिलेगा साथ ही कोई नई समस्या भी बनेगी।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज आपके अंदर तेज की कमी रहेगी मन मे कुछ ना कुछ भय बना रहेगा आस पास का वातावरण भी विपरीत रहेगा छोटी मोटी बातो अथवा हास्य परिहास में भी कलह होने की संभावना है। आज विशेषकर विपरीत लिंगीय से सीमित व्यवहार रखें अन्यथा मान भंग हो सकता है। आज आप भाई बंधुओ के लिये लाभकारी सिद्ध होंगे लेकिन आपके द्वारा दी गई आर्थिक अथवा अन्य प्रकार की सहायता का दुरुपयोग होने की संभावना अधिक है। शत्रु पक्ष को कमजोर ना आकें अंदर ही अंदर हानि पहुचायेंगे। धन लाभ आज मुश्किल से ही होगा।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज के दिन आर्थिक उन्नति के योग बन रहे है लेकिन साथ ही सामाजिक क्षेत्र पर बदनामी अथवा किसी मामूली बात का बतंगड़ बनने से सम्मान हानि की भी सम्भवना है। भाई बंधु अथवा मित्र मंडली में कम बैठे कुछ ना कुछ गड़बड़ ही होगी। कार्य व्यवसाय से पहके से तय आय निश्चित होगी इसके अतिरिक्त भी जोखिम वाले कार्य शेयर लॉटरी आदि से अकस्मात लाभ की संभावना है। व्यवसायी वर्ग आर्थिक रूप से समृद्ध रहने पर भी असंतोषी ही रहेंगे। गृहस्थी में जिस बात को छुपाने के प्रयास करेंगे वही तकरार का कारण बनेगी। संतान से संबंध में चंचलता आएगी।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज आपका मन संतोषी रहने पर भी अन्य लोगो से स्वयं की तुलना करने पर बेचैन रहेगा। कार्य व्यवसाय से भी कोई सकारात्मक परिणाम नही मिलेगा। धन की आमद कम और खर्च अधिक रहने के कारण आर्थिक संतुलन गड़बड़ायेगा। परिवार की महिलाए मानसिक विकार से ग्रस्त रहेंगी मामूली बातों को प्रतिष्ठा से जोड़ने पर घर का वातावरण खराब कर सकती है। पिता अथवा पैतृक संपत्ति से संबंधित कार्यो से लाभ की उम्मीद अंत समय मे उलझन में बदलेगी। व्यवहार में मिठास बनाये रहने से कई पारिवारिक एवं कानूनी लफड़ो से बच सकते है। सेहत में थोड़े बहुत विकार लगे रहेंगे।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन लाभदायक बना है इसका लाभ उठायें स्वभाव में थोड़ी उग्रता एवं जल्दबाजी रहेगी प्रत्येक कार्य को बिना सोचे समझे करेंगे जिससे बाद में पछताना पड़ेगा। कार्य व्यवसाय आज अन्य प्रतिस्पर्धियों को तुलना में बेहतर चलेगा धन लाभ भी थोड़ी देर अबेर आशाजनक होगा लेकिन धन व्यर्थ के कार्यो में खर्च हो सकता है। मौज शौक की प्रवृति से दूर रहें अन्यथा घर मे विशेष कर महिला वर्ग से विवाद की संभावना है। संध्या के आस पास किसी से धन संबंधित व्यवहार को लेकर विवाद हो सकता है गुस्से को काबू में रखें वरना कल पछताना पड़ेगा।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन उतार चढ़ाव वाला रहेगा आपका ध्यान आज कम समय मे ज्यादा लाभ कमाने पर रहेगा लेकिन इसमें सफलता नही मिल सकेगी। धन लाभ के लिये दिन भर संघर्ष करना पडेगा लेकिन होगा अकस्मात ही। संतान अथवा पैतृक मामलो को लेकर कई दिनों से लगी कोई उम्मीद टूटने की संभावना है। विद्यार्थी वर्ग का अध्ययन में मन नही लगेगा प्रतियोगी परीक्षा में असफलता मिलेगी। संध्या तक धैर्य से काम लें इसके बाद स्थिति अनुकूल बनने लगेगी जो लोग आपको बोझ समझ रहे थे वही आपका महत्त्व समझेंगे। आध्यात्म एवं परोपकार का सहारा लें निकट भविष्य में अवश्य काम आएगा। सेहत संध्या बाद थकान होने पर भी अनुकूल लगेगी।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन सार्वजनिक क्षेत्र से सम्मान दिलाएगा दिन के आरंभ में किसीकी बेतुकी बात को लेकर क्रोध में रहेगें थोड़ा बहुत गुस्सा दिन भर बना ही रहेगा। मध्यान के समय जिस कार्य से लाभ की उम्मीद लागये बैठे है उसके टलने से मन निराश होगा। कार्य व्यवसाय में आज दिनचार्य संभावनाओ पर केंद्रित रहेगी लाभ के कई अवसर निकट आते आते निरस्त होंगे फिर भी किसी ना किसी का सहयोग मिलने से धन लाभ हो ही जायेगा। पारिवारिक वातावरण धर्य की कमी से खराब हो सकता है घर की अपेक्षा आज बाहर समय बिताने से सहज अनुभव करेंगे। सेहत मानसिक विकार को छोड़ सामान्य रहेगी।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन भी सफलता वाला है लेकिन अपनी वाणी एवं व्यवहार को संतुलित रखना जरूरी है कम लाभ से संतोष करने से ही दिन का फायदा उठाया जा सकता है अन्यथा लाभ के अवसर गरमा गरमी में हाथ से निकल सकते है। भाई बंधुओ से आज सीमित व्यवहार रखना ही बेहतर रहेगा अन्यथा कुछ न कुछ मानसिक क्लेश ही बनेगा। कार्य क्षेत्र पर स्थिति मेहनत के बाद लाभदायक बनेगी प्रतिस्पर्धी हावी रहेंगे फिर भी अगर दृढ़ रहे तो सफलता अवश्य मिलेगी। पारिवारिक वातावरण सामान्य रहेगा पल में खुशी पल में उदासी बनेगी। सेहत में थोड़ी बहुत नरमी बनी रहेगी।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन दौड़धूप वाला रहेगा दैनिक कार्यो की भागमभाग में शरीर की अवहेलना बाद में भारी पड़ेगी। व्यावसायिक कार्य मे परिश्रम अधिक करना पड़ेगा फिर भी लाभ आशाजनक नही होगा। आपके हिस्से का लाभ किसी अन्य के हिस्से में भी जा सकता है लापरवाही से बचें। आज की गई मेहनत का सकारत्मक परिणाम संध्या बाद से देखने को मिलेगा कई दिनों से चल रही आर्थिक तंगी में कमी आएगी लेकिन धन लाभ आज आंशिक लेकिन निकट भविष्य में आशाजनक रहेगा। परिवार ने संतानों का मनमाना व्यवहार मन दुख का कारण बनेगा पारिवारिक सुख में कमी आएगी। शरीर मे कोई नया रोग होने की संभावना भी है।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन अशुभ फलदायी रहेगा आज किसी ना किसी कारण से मानसिक संताप होगा। पूर्व में की किसी गलती का आभास होगा लेकिन विपरीत परिस्थिति के कारण सुधार भी नही कर सकेंगे। सेहत मध्यान तक नरम रहेगी हाथ पैर एवं अन्य शारीरिक अंगों में शितिलता के कारण कार्य बेमन से करने पड़ेंगे। कार्य व्यवसाय की स्थिति भी दयनीय ही रहेगी अन्य लोगो के ऊपर आश्रित रहना पड़ेगा। धन लाभ होगा लेकिन व्यर्थ के खर्चो में लग जायेगा। माता अथवा घर की महिलाओं की सेहत भी नरम रहने के कारण वातावरण अस्त व्यस्त रहेगा। उधारी के लेन देन से बचे वरना आगे आर्थिक समस्या गहरा सकती है।

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Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton