
🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक – 27 अगस्त 2025*
🌤️ *दिन – बुधवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शरद ॠतु*
🌤️ *मास – भाद्रपद*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – चतुर्थी शाम 03:44 तक तत्पश्चात पंचमी*
🌤️ *नक्षत्र – चित्रा पूर्ण रात्रि तक*
🌤️ *योग – शुभ दोपहर 12:35 तक तत्पश्चात शुक्ल*
🌤️ *राहुकाल – दोपहर 12:40 से दोपहर 02:15 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:22*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:58*
👉 *दिशाशूल – उत्तर दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – विनायक चतुर्थी,श्री गणेश चतुर्थी ( चंद्र-दर्शन निषिद्ध,चद्रास्त : रात्रि 09:38),श्री गणेश महोत्सव प्रारंभ*
💥 *विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *गणेश चतुर्थी* 🌷
🙏🏻 *गणेशजी का जन्म भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को मध्याह्न में हुआ था। उस समय सोमवार का दिन, स्वाति नक्षत्र, सिंह लग्न और अभिजीत मुहूर्त था। गणेशजी के जन्म के समय सभी शुभग्रह कुंडली में पंचग्रही योग बनाए हुए थे।*
👉🏻 *इस वर्ष यह त्यौहार 27 अगस्त 2025 बुधवार को मनाया जाएगा।*
➡ *वैसे तो भविष्य पुराण में सुमन्तु मुनि का कथन है*
*“न तिथिर्न च नक्षत्रं नोपवासो विधीयते । यथेष्टं चेष्टतः सिद्धिः सदा भवति कामिका।।”*
🙏🏻 *“भगवान गणेशजी की आराधना में किसी तिथि, नक्षत्र या उपवासादि की अपेक्षा नहीं होती। जिस किसी भी दिन श्रद्धा-भक्तिपूर्वक भगवान गणेशजी की पूजा की जाय तो वह अभीष्ट फलों को देनेवाली होती है।” फिर भी गणेशजी के जन्मदिन पर की जानेवाली उनकी पूजा का विशेष महत्व है। तभी तो भविष्यपुराण में ही सुमन्तु मुनि फिर से कहते हैं की*
*“शुक्लपक्षे चतुर्थ्यां तु विधिनानेन पूजयेत्। तस्य सिध्यति निर्विघ्नं सर्वकर्म न संशयः ।।*
*एकदन्ते जगन्नाथे गणेशे तुष्टिमागते। पितृदेवमनुष्याद्याः सर्वे तुष्यन्ति भारत ।।”*
🙏🏻 *“शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को उपवास कर जो भगवान गणेशजी का पूजन करता है, उसके सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं और सभी अनिष्ट दूर हो जाते हैं। श्रीगणेशजी के अनुकूल होने से सभी जगत अनुकूल हो जाता है। जिस पर एकदन्त भगवान गणपति संतुष्ट होते हैं, उसपर देवता, पितर, मनुष्य आदि सभी प्रसन्न रहते हैं।”*
➡ *अग्निपुराण के अनुसार भाद्रपद के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को व्रत करनेवाला शिवलोक को प्राप्त करता है |*
➡ *भविष्यपुराण, ब्राह्मपर्व के अनुसार*
*मासि भाद्रपदे शुक्ला शिवा लोकेषु पूजिता । ।*
*तस्यां स्नानं तथा दानमुपवासो जपस्तथा । क्रियमाणं शतगुणं प्रसादाद्दन्तिनो नृप । ।*
*गुडलवणघृतानां तु दानं शुभकरं स्मृतम् । गुडापूपैस्तथा वीर पुण्यं ब्राह्मणभोजनम् । ।*
*यास्तस्यां नरशार्दूल पूजयन्ति सदा स्त्रियः । गुडलवणपूपैश्च श्वश्रूं श्वसुरमेव च । ।*
*ताः सर्वाः सुभगाः स्युर्वे१ विघ्रेशस्यानुमोदनात् । कन्यका तु विशेषेण विधिनानेन पूजयेत् । ।*
🙏🏻 *भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी का नाम ‘शिवा’ है, इस दिन जो स्नान, दान उपवास, जप आदि सत्कर्म किया जाता है, वह गणपति के प्रसाद से सौ गुना हो जाता है | इस चतुर्थी को गुड़, लवण और घृत का दान करना चाहिये, यह शुभ माना गया है और गुड़ के अपूपों (मालपुआ) से ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिये तथा उनकी पूजा करनी चाहिये | इस दिन जो स्त्री अपने सास और ससुर को गुड़ के पुए तथा नमकीन पुए खिलाती है वह गणपति के अनुग्रह से सौभाग्यवती होती है | पति की कामना करनेवाली कन्या विशेषरूप से इस चतुर्थी का व्रत करे और गणेशजी की पूजा करें |*
➡ *गरुड़पुराण के अनुसार “सोमवारे चतुर्थ्यां च समुपोष्यार्चयेद्गणम्। जपञ्जुह्वत्स्मरन्विद्या स्वर्गं निर्वाणतां व्रजेत् ॥” सोमवार, चतुर्थी तिथिको उपवास रखकर व्रती को विधि – विधान से गणपतिदेव की पूजा कर उनका जप, हवन और स्मरण करना चाहिये | इस व्रत को करने से उसे विद्या, स्वर्ग तथा मोक्ष प्राप्त होता है |*
➡ *शिवपुराण के अनुसार “वर्षभोगप्रदा ज्ञेया कृता वै सिंहभाद्रके” जब सूर्य सिंह राशिपर स्थित हो, उस समय भाद्रपदमास की चतुर्थी को की हुई गणेशजी की पूजा एक वर्ष तक मनोवांछित भोग प्रदान करती है*
➡ *अग्निपुराण अध्याय 301 के अनुसार*
*पूजयेत्तं चतुर्थ्याञ्च विशेषेनाथ नित्यशः ।।*
*श्वेतार्कमूलेन कृतं सर्व्वाप्तिः स्यात्तिलैर्घृतैः ।*
*तण्डुलैर्दधिमध्वाज्यैः सौभाग्यं वश्यता भवेत् ।।*
🙏🏻 *गणेशजी की नित्य पूजा करें, किंतु चतुर्थी को विशेष रूप से पूजा का आयोजन करें। सफ़ेद आक की जड़ से उनकी प्रतिमा बनाकर पूजा करें। उनके लिए तिल की आहुति देने पर सम्पूर्ण मनोरथों की प्राप्ति होती है। यदि दही, मधु और घी से मिले हुए चावल से आहुति दी जाय तो सौभाग्य की सिद्धि एवंय शिवत्व की प्राप्ति होती है।*
🙏🏻 *गणेश जी को मोदक (लड्डू), दूर्वा घास तथा लाल रंग के पुष्प अति प्रिय हैं । गणेशजी अथर्वशीर्ष में कहा गया है “यो दूर्वांकुरैंर्यजति स वैश्रवणोपमो भवति” अर्थात जो दूर्वांकुर के द्वारा भगवान गणपति का पूजन करता है वह कुबेर के समान हो जाता है। “यो मोदकसहस्रेण यजति स वाञ्छित फलमवाप्रोति” अर्थात जो सहस्र (हजार) लड्डुओं (मोदकों) द्वारा पूजन करता है, वह वांछित फल को प्राप्त करता है।*
🙏🏻 *गणेश चतुर्थी पर गणेशजी को 21 लड्डू, 21 दूर्वा तथा 21 लाल पुष्प (अगर संभव हो तो गुड़हल) अर्पित करें।*
💥इस गणेश चतुर्थी पर हम आपको श्री गणेश जी का खास स्नान बता रहे हैं। स्नान कराने से आप अपनी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।
💥यदि आपके सूर्य की महादशा हो तो साफ जल में बिलपत्र और कुमकुम डालकर श्री गणेश जी को स्नान करना है। अनार का भोग उनके आगे रखें।
💥चंद्रमा की दशा में है तो गाय के दूध से श्री गणेश जी को स्नान करा के मिश्री का भोग लगाओ।
💥 मंगल की महादशा चल रही है तो लाल चंदन से श्री गणेश जी को स्नान करें और गुड़ का भोग लगाओ।
💥बुध की महादशा चल रही है तो आप पंचगव्य को जल में डालकर स्नान कराये और हरी सौंफ का भोग लगाएं
💥गुरु की महादशा चल रही है तो जल में केसर डालकर स्नान कराएं। केले का भोग लगाएं।
💥शुक्र की महादशा चल रही है तो आप पंचामृत श्री गणेश जी को स्नान कराएं और जलेबी का भोग लगाएं।
💥शनि की महादशा चल रही है तो जल में शमीपत्र डालकर श्री गणेश जी को स्नान कराएं। बूंदी का भोग लगाएं।
💥राहु की महादशा चल रही है तो आप जल में दुर्वा डाल कर स्नान कराए। उड़द से बनी हुई मिठाई का भोग लगाओ।
💥केतु की महादशा चल रही है तो आप डाभ को जल में डाल कर स्नान कराए और तिल से बनी हुई मिठाई का भोग लगाएं।
💥यदि आपको अपनी जन्म कुंडली का ज्ञान नहीं हो तो आप गुडहल का फूल और केली का फूल जल में डालकर श्री गणेश जी को स्नान कराएं और मोदक का भोग लगाएं तो सभी समस्याओं से छुटकारा प्राप्त हो जाएगा…
🌹जय गणेश🌹
गणेश जी की पूजा करते समय कई बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है ताकि पूजा का पूर्ण फल मिल सके। यहाँ कुछ ऐसी सामान्य गलतियाँ बताई गई हैं, जिनसे बचना चाहिए
1. तुलसी का प्रयोग न करें
गणेश जी की पूजा में तुलसी के पत्ते कभी नहीं चढ़ाने चाहिए। पौराणिक कथाओं के अनुसार, गणेश जी ने तुलसी का विवाह प्रस्ताव ठुकरा दिया था, जिससे रुष्ट होकर तुलसी ने उन्हें दो विवाह का श्राप दिया था। इसी कारण, गणेश जी की पूजा में तुलसी वर्जित मानी जाती है। इसके बदले, आप दूर्वा घास का उपयोग करें, जो उन्हें अत्यंत प्रिय है।
2. टूटी हुई मूर्ति की पूजा न करें
घर में कभी भी खंडित या टूटी हुई गणेश मूर्ति की पूजा न करें। ऐसी मूर्ति को अशुभ माना जाता है। अगर मूर्ति टूट जाए, तो उसे सम्मानपूर्वक जल में प्रवाहित कर दें या किसी पवित्र स्थान पर रख दें और नई मूर्ति स्थापित करें।
3. गलत दिशा में स्थापना
गणेश जी की मूर्ति को घर या पूजा स्थान में रखते समय दिशा का ध्यान रखें। उन्हें कभी भी घर के दक्षिण दिशा में स्थापित नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह यम की दिशा मानी जाती है। उन्हें उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा में स्थापित करना सबसे शुभ माना जाता है। इसके अलावा, शौचालय या सीढ़ियों के नीचे गणेश जी की मूर्ति न रखें।
4. बासी फूल और प्रसाद का उपयोग
पूजा में हमेशा ताजे फूल और ताज़ा प्रसाद ही चढ़ाएं। बासी फूल या मुरझाए हुए फूल चढ़ाना अशुभ माना जाता है। इसी तरह, प्रसाद भी ताज़ा ही बनाएं और पूजा के बाद इसे तुरंत वितरित कर दें।
5. पूजा में स्वच्छता का ध्यान न रखना
गणेश जी की पूजा से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनना और पूजा स्थान को अच्छी तरह से साफ़ करना बहुत ज़रूरी है। मन और शरीर दोनों की शुद्धता के बिना की गई पूजा का कोई फल नहीं मिलता।
6. अधूरा मंत्रोच्चार और विधि
पूजा करते समय गणेश मंत्रों का सही उच्चारण करें। अगर आपको मंत्र नहीं आते, तो आप “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप कर सकते हैं। इसके अलावा, पूजा की विधि को जल्दबाज़ी में पूरा न करें। हर चरण, जैसे आवाहन, स्नान, वस्त्र अर्पण, भोग, और आरती, को श्रद्धा के साथ पूरा करें।
इन गलतियों से बचकर आप अपनी पूजा को शुद्ध और सार्थक बना सकते हैं, जिससे गणपति जी की कृपा आप पर सदैव बनी रहेगी।

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*गणपति – स्थापना कथा*
हम सभी हर वर्ष गणपति की स्थापना करते हैं, साधारण भाषा में गणपति को बैठाते है। लेकिन हम में से बहुत कम लोग जानते हैं कि ऐसा क्यों करते है। आइए जानते हैं इसके पीछे कई पौराणिक कथा – हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार, महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना की है। लेकिन लिखना उनके वश का नहीं था। अतः उन्होंने गणेश जी की आराधना की और गणपति जी से महाभारत लिखने की प्रार्थना की। गणपति जी ने सहमति दी और दिन-रात लेखन कार्य प्रारंभ हुआ। इस कारण गणेश जी को थकान तो होनी हो थी। गणपति जी के शरीर का तापमान बढ़े नहीं, इसलिए वेदव्यास ने उनके शरीर पर मिट्टी का लेप किया और भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी की पूजा की।
मिट्टी का लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई, इसी कारण गणेश जी का एक नाम पार्थिव गणेश भी पड़ा। महाभारत का लेखन 10 दिनों तक चला। चतुर्दशी को लेखन कार्य सम्पन्न हुआ। वेदव्यास ने देखा कि गणपति का शारिरिक तापमान फिर भी बहुत बढ़ा हुआ है, और उनके शरीर पर लेप की मिट्टी सूखकर झड़ रही है, तो वेदव्यास ने उन्हें पवित्र सरोवर में डाल कर शीतल करने का विचार किया।
इन 10 दिनों में वेदव्यास को खाने के लिए विभिन्न पदार्थ दिए। तभी से गणपति स्थापना की प्रथा पड़ी और इन दस दिनों में इसीलिए गणेश जी को पसंद विभिन्न भोजन अर्पित किए जाते हैं।।
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गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर गणेशजी की पौराणिक कथा !!!
भगवान श्रीगणेश को विघ्नहर्ता, मंगलमूर्ति, लंबोदर, व्रकतुंड आदि कई विचित्र नामों से पुकारा जाता है। जितने विचित्र इनके नाम हैं उतनी विचित्र इनसे जुड़ी कथाएं भी हैं। अनेक धर्म ग्रंथों में भगवान श्रीगणेश की कथाओं का वर्णन मिलता है। भगवान श्रीगणेश से जुड़ी कुछ जग प्रसिद्ध कथा यहाँ प्रस्तुत है।
- शिवमहापुराण के अनुसार माता पार्वती को श्रीगणेश का निर्माण करने का विचार उनकी सखियां जया और विजया ने दिया था। जया-विजया ने पार्वती से कहा था कि नंदी आदि सभी गण सिर्फ महादेव की आज्ञा का ही पालन करते हैं। अत: आपको भी एक गण की रचना करनी चाहिए जो सिर्फ आपकी आज्ञा का पालन करे। इस प्रकार विचार आने पर माता पार्वती ने श्रीगणेश की रचना अपने शरीर के मैल से की।
- शिवमहापुराण के अनुसार श्रीगणेश के शरीर का रंग लाल और हरा है। श्रीगणेश को जो दूर्वा चढ़ाई जाती है वह जडऱहित, बारह अंगुल लंबी और तीन गांठों वाली होना चाहिए। ऐसी 101 या 121 दूर्वा से श्रीगणेश की पूजा करना चाहिए।
- ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार माता पार्वती ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुण्यक नाम व्रत किया था, इसी व्रत के फलस्वरूप भगवान श्रीकृष्ण पुत्र रूप में माता पार्वती को प्राप्त हुए।
- ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार जब सभी देवता श्रीगणेश को आशीर्वाद दे रहे थे तब शनिदेव सिर नीचे किए हुए खड़े थे। पार्वती द्वारा पुछने पर शनिदेव ने कहा कि मेरे द्वारा देखने पर आपके पुत्र का अहित हो सकता है लेकिन जब माता पार्वती के कहने पर शनिदेव ने बालक को देखा तो उसका सिर धड़ से अलग हो गया।
- ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार जब शनि द्वारा देखने पर माता पार्वती के पुत्र का मस्तक कट गया तो भगवान श्रीहरि गरूड़ पर सवार होकर उत्तर दिशा की ओर गए और पुष्पभद्रा नदी के तट पर हथिनी के साथ सो रहे एक गजबालक का सिर काटकर ले आए। उस गजबालक का सिर श्रीहरि ने माता पार्वती के मस्तक विहिन पुत्र के धड़ पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया।
- ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार एक बार किसी कारणवश भगवान शिव ने क्रोध में आकर सूर्य पर त्रिशूल से प्रहार किया। इस प्रहार से सूर्यदेव चेतनाहीन हो गए। सूर्यदेव के पिता कश्यप ने जब यह देखा तो उन्होंने क्रोध में आकर शिवजी को श्राप दिया कि जिस प्रकार आज तुम्हारे त्रिशूल से मेरे पुत्र का शरीर नष्ट हुआ है, उसी प्रकार तुम्हारे पुत्र का मस्तक भी कट जाएगा। इसी श्राप के फलस्वरूप भगवान श्रीगणेश के मस्तक कटने की घटना हुई।
- ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार एक बार तुलसीदेवी गंगा तट से गुजर रही थी, उस समय वहां श्रीगणेश भी तप कर रहे थे। श्रीगणेश को देखकर तुलसी का मन उनकी ओर आकर्षित हो गया। तब तुलसी ने श्रीगणेश से कहा कि आप मेरे स्वामी हो जाइए लेकिन श्रीगणेश ने विवाह करने से इंकार कर दिया। क्रोधवश तुलसी ने श्रीगणेश को विवाह करने का श्राप दे दिया और श्रीगणेश ने तुलसी को वृक्ष बनने का।
- शिवमहापुराण के अनुसार श्रीगणेश का विवाह प्रजापति विश्वरूप की पुत्रियों सिद्धि और बुद्धि से हुआ है। श्रीगणेश के दो पुत्र हैं इनके नाम क्षेत्र तथा लाभ हैं।
- शिवमहापुराण के अनुसार जब भगवान शिव त्रिपुर का नाश करने जा रहे थे तब आकाशवाणी हुई कि जब तक आप श्रीगणेश का पूजन नहीं करेंगे तब तक तीनों पुरों का संहार नहीं कर सकेंगे। तब भगवान शिव ने भद्रकाली को बुलाकर गजानन का पूजन किया और युद्ध में विजय प्राप्त की।
- ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, एक बार परशुराम जब भगवान शिव के दर्शन करने कैलाश पहुंचे तो भगवान ध्यान में थे। तब श्रीगणेश ने परशुरामजी को भगवान शिव से मिलने नहीं दिया। इस बात से क्रोधित होकर परशुरामजी ने फरसे से श्रीगणेश पर वार कर दिया। वह फरसा स्वयं भगवान शिव ने परशुराम को दिया था। श्रीगणेश उस फरसे का वार खाली नहीं होने देना चाहते थे इसलिए उन्होंने उस फरसे का वार अपने दांत पर झेल लिया, जिसके कारण उनका एक दांत टूट गया। तभी से उन्हें एकदंत भी कहा जाता है।
- स्कंद पुराण के अनुसार, एक समय जब माता पार्वती मानसरोवर में स्नान कर रही थी तब उन्होंने स्नान स्थल पर कोई आ न सके इस हेतु अपनी माया से गणेश को जन्म देकर ‘बाल गणेश’ को पहरा देने के लिए नियुक्त कर दिया। इसी दौरान भगवान शिव उधर आ जाते हैं। गणेशजी उन्हें रोक कर कहते हैं कि आप उधर नहीं जा सकते हैं। यह सुनकर भगवान शिव क्रोधित हो जाते हैं और गणेश जी को रास्ते से हटने का कहते हैं किंतु गणेश जी अड़े रहते हैं तब दोनों में युद्ध हो जाता है। युद्ध के दौरान क्रोधित होकर शिवजी बाल गणेश का सिर धड़ से अलग कर देते हैं।शिव के इस कृत्य का जब पार्वती को पता चलता है तो वे विलाप और क्रोध से प्रलय का सृजन करते हुए कहती है कि तुमने मेरे पुत्र को मार डाला। माता का रौद्र रूप देख शिव एक हाथी का सिर गणेश के धड़ से जोड़कर गणेश जी को पुन:जीवित कर देते हैं। तभी से भगवान गणेश को गजानन गणेश कहा जाने लगा।
- महाभारत का लेखन श्रीगणेश ने किया है, ये बात तो सभी जानते हैं लेकिन महाभारत लिखने से पहले उन्होंने महर्षि वेदव्यास के सामने एक शर्त रखी थी इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। शर्त इस प्रकार थी कि श्रीगणेश ने महर्षि वेदव्यास से कहा था कि यदि लिखते समय मेरी लेखनी क्षणभर के लिए भी न रूके तो मैं इस ग्रंथ का लेखक बन सकता हूं। तब महर्षि वेदव्यास जी ये शर्त मान ली और श्रीगणेश से कहा कि मैं जो भी बोलूं आप उसे बिना समझे मत लिखना। तब वेदव्यास जी बीच-बीच में कुछ ऐसे श्लोक बोलते कि उन्हें समझने में श्रीगणेश को थोड़ा समय लगता। इस बीच महर्षि वेदव्यास अन्य काम कर लेते थे।
- पद्मपुराण के अनुसार, पूर्वकाल में पार्वती देवी को देवताओं ने अमृत से तैयार किया हुआ एक दिव्य मोदक दिया। मोदक देखकर दोनों बालक (कार्तिकेय तथा गणेश) माता से माँगने लगे। तब माता ने मोदक के महत्व का वर्णन कर कहा कि तुममें से जो धर्माचरण के द्वारा श्रेष्ठता प्राप्त करके सर्वप्रथम सभी तीर्थों का भ्रमण कर आएगा, उसी को मैं यह मोदक दूँगी। माता की ऐसी बात सुनकर कार्तिकेय ने मयूर पर आरूढ़ होकर मुहूर्तभर में ही सब तीर्थों का स्नान कर लिया। इधर गणेश जी का वाहन मूषक होने के कारण वे तीर्थ भ्रमण में असमर्थ थे। तब गणेशजी श्रद्धापूर्वक माता-पिता की परिक्रमा करके पिताजी के सम्मुख खड़े हो गए। यह देख माता पार्वतीजी ने कहा कि समस्त तीर्थों में किया हुआ स्नान, सम्पूर्ण देवताओं को किया हुआ नमस्कार, सब यज्ञों का अनुष्ठान तथा सब प्रकार के व्रत, मन्त्र, योग और संयम का पालन- ये सभी साधन माता-पिता के पूजन के सोलहवें अंश के बराबर भी नहीं हो सकते। इसलिए यह गणेश सैकड़ों पुत्रों और सैकड़ों गणों से भी बढ़कर है। अतः यह मोदक मैं गणेश को ही अर्पण करती हूँ। माता-पिता की भक्ति के कारण ही इसकी प्रत्येक यज्ञे में सबसे पहले पूजा होगी।
- गणेश पुराण के अनुसार छन्दशास्त्र में 8 गण होते हैं- मगण, नगण, भगण, यगण, जगण, रगण, सगण, तगण। इनके अधिष्ठाता देवता होने के कारण भी इन्हें गणेश की संज्ञा दी गई है। अक्षरों को गण भी कहा जाता है। इनके ईश होने के कारण इन्हें गणेश कहा जाता है, इसलिए वे विद्या-बुद्धि के दाता भी कहे गए हैं।
गणेश चतुर्थी २०२५: घर पर गणपति बैठाने के ७ जरूरी नियम, इनके पालन से ही आएगी सुख और समृद्धि
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⭕गणेश चतुर्थी पूजा नियम: गणेश चतुर्थी का पर्व देशभर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग भगवान गणेश की मूर्ति अपने घरों में स्थापित करते हैं और दस दिनों तक उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। इस बार यह पर्व २७ अगस्त से ६ सितंबर तक मनाया जाएगा। गणेश जी को सुख, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर में गणपति की मूर्ति स्थापित करने और पूजा करने के कुछ खास नियम होते हैं? यदि आप इन नियमों का पालन करते हैं, तो भगवान गणेश का आशीर्वाद आपके घर पर बना रहता है। आइए जानते हैं, गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति को विराजने के ७ जरूरी नियम:–
🪔१. मूर्ति का चयन
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गणेश चतुर्थी के लिए मूर्ति का चयन बहुत महत्वपूर्ण है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर के लिए बैठी हुई मुद्रा में गणेश जी की मूर्ति लाना शुभ माना जाता है। बैठी हुई मुद्रा शांति और स्थिरता का प्रतीक है, जो घर में सुख-समृद्धि लाती है। इसके अलावा, गणेश जी की सूंड बाईं ओर होनी चाहिए, क्योंकि इसे सौभाग्य और सफलता का प्रतीक माना जाता है।
🪔२. स्थापना की दिशा
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गणेश जी की मूर्ति को घर में सही दिशा में स्थापित करना बहुत जरूरी है। मूर्ति को हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में रखें। यह दिशा पूजा-पाठ के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। यदि यह संभव न हो, तो आप मूर्ति को पूर्व या पश्चिम दिशा में भी स्थापित कर सकते हैं। ध्यान रखें कि मूर्ति को कभी भी दक्षिण दिशा में न रखें।
🪔३. साफ-सफाई का ध्यान रखें
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गणपति की स्थापना से पहले उस जगह को अच्छी तरह से साफ करें। मूर्ति को हमेशा एक ऊंचे और साफ आसन पर स्थापित करें। पूजा स्थल के आसपास किसी भी तरह की गंदगी नहीं होनी चाहिए।
🪔४. भोग में तुलसी का प्रयोग न करें
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भगवान गणेश की पूजा में तुलसी के पत्ते का प्रयोग नहीं किया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, गणेश जी ने तुलसी का विवाह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया था, जिससे नाराज होकर तुलसी ने उन्हें दो विवाहों का श्राप दिया था। इसलिए गणेश जी को भोग लगाते समय तुलसी का उपयोग न करें। उन्हें मोदक, लड्डू और मोतीचूर के लड्डू विशेष रूप से प्रिय हैं।
🪔५. पूजा में इन चीजों को करें शामिल
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गणेश जी की पूजा में कुछ खास चीजें जरूर शामिल करनी चाहिए। उन्हें दूर्वा घास, लाल फूल (जैसे गुड़हल), और सिंदूर अति प्रिय हैं। इन चीजों को पूजा में शामिल करने से भगवान गणेश बहुत प्रसन्न होते हैं।
🪔६. सात्विक भोजन और साफ-सफाई
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गणेश चतुर्थी के दस दिनों के दौरान घर का वातावरण शुद्ध और सात्विक रखना चाहिए। घर में मांसाहारी भोजन और शराब का सेवन पूरी तरह से वर्जित होता है। घर के सभी सदस्यों को साफ-सफाई और अनुशासन का पालन करना चाहिए।
🪔७. विसर्जन का सही तरीका
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गणेश चतुर्थी के बाद विसर्जन भी सही तरीके से करना चाहिए। आजकल पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं स्थापित करने की सलाह दी जाती है, ताकि विसर्जन के बाद जल प्रदूषण न हो। विसर्जन से पहले पूजा-अर्चना करें और गणेश जी से क्षमा मांगते हुए उन्हें विदा करें।
🛑इन नियमों का पालन करके आप न केवल भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि अपने घर में सुख, शांति और समृद्धि भी ला सकते हैं। *🚩#ऊँ_श्रीगणेशाय_नम:🚩*
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………… ✦•••जय श्री गणेश •••✦ ……….
🔮 27 अगस्त 2025 को गणेश चतुर्थी, जानिए क्या है स्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त…..
▪️ भाद्रपद महीने में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है।
▪️ इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
▪️ भगवान गणेश की पूजा से सुखों में वृ्द्धि होती है।
🤷🏻♀️ वैसे तो रोजाना ही भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है, लेकिन भादों माह प्रभु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था, जिसकी खुशी में देशभर में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दौरान भक्तजन घरों, दफ्तरों, दुकानों और मंदिरों में गणपति जी की मूर्ति को स्थापित करते हैं और 10 दिनों तक उनकी विधिनुसार उपासना करते हैं। इसके अलावा प्रभु की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए मोदक, मोतीचूर लड्डू, खीर और मालपुआ जैस भोग लगाए जाते हैं, जिसे बेहद शुभ माना जाता है। इस वर्ष 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है। इस दिन गणपति जी की मूर्ति की स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, आइए आचार्य श्री गोपी राम से विस्तार से जानते हैं।
⚛️ गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त
अमृत काल- 07:33 से सुबह 09:09
शुभ चौघड़िया- सुबह 10:46 AM से दोपहर 12:22 PM तक
गणेश जी की मूर्ति को घर में स्थापित करने का सबसे शुभ मुहूर्त- 11:05 बजे से शुरू होकर दोपहर 1:40 तक
हालांकि 27 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से राहुकाल शुरू हो जाएगा, इसलिए भक्तों को इससे पहले ही घर में गणेश जी की मूर्ति को स्थापित कर देना चाहिए।
🧘🏻 गणपति प्रतिमा स्थापना मुहूर्त और प्राण प्रतिष्ठा पूजन मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार 27 अगस्त को गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त 11 बजकर 7 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। इस दौरान 12.30 से राहुकाल लग जाएगा। ऐसे में 11 बजकर 7 मिनट से 12 बजकर 30 तक का समय गणपति स्थापना और पूजन के लिए उत्तम रहेगा। ओम गं गणपतये नमः मंत्र से गणेशजी की स्थापना और पूजन करें।
🗺️ गणेश जी की मूर्ति घर में किस दिशा में स्थित करनी चाहिए
गणेश चतुर्थी के दिन कई लोग घर में गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करते हैं। वास्तु के अनुसार, गणेश जी की मूर्ति आपको ईशान कोण यानि उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करनी चाहिए। यह दिशा ईश्वर का स्थान कही जाती है। गणेश जी की प्रतिमा यहां स्थापित करने से आपको उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
🙇🏻♀️ गणेश चतुर्थी व्रत पूजन विधि
गणेश चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें।
एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर बप्पा की मूर्ति को रखें
पूजा में कलश, दीपक, फल, फूल दूर्वा, मोदक, नारियल, चावल, कपूर, अक्षत आदि सामग्री साथ लेकर बैठें।
सबसे पहले “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करते हुए भगवान को आमंत्रित करें।
फिर उन्हें फूल अर्पित करें।
गणपति बप्पा को गंगाजल या दूध से प्रतीकात्मक स्नान कराएं और फिर साफ जल से शुद्ध करें।
भगवान के माथे पर चंदन और रोली लगाएं और हल्दी-अक्षत चढ़ाएं।
कपूर और घी का दीप जलाकर उनकी आरती करें।
अंत में हाथ जोड़कर बप्पा से परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
🍱 गणेश चतुर्थी स्पेशल भोग
लड्डू – भगवान गणेश को लड्डू का भोग लगाया जाता है। आप बेसन या बूंदी से बने लड्डू का भोग लगा सकते हैं।
मोदक- इसके अलावा बप्पा को मोदक बहुत ही पसंद माने जाते हैं। पुराणों में जिक्र का गया है कि गणेश जी बचपन में अपनी मां पार्वती के बनाए गए मोदक पलभर में चट कर जाते थे।
👀 चंद्र दर्शन निषेध (क्यों माना जाता है चंद्र दर्शन अशुभ?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन निषेध माना गया है। ऐसा करने से मिथ्या दोष (यानी झूठे आरोप लगने का भय) लगता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार गणेश जी ने अधिक मिठाइयाँ खा लीं और उनका पेट बढ़ गया। चलते समय उन्हें ठोकर लगी और वे गिर पड़े। यह दृश्य देखकर चंद्रमा हँसने लगे और उपहास करने लगे।
गणेश जी क्रोधित हो गए और उन्होंने चंद्रमा को शाप दिया कि जो भी व्यक्ति भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की रात तुम्हारा दर्शन करेगा, उस पर मिथ्या दोष (झूठा आरोप) लगेगा। तभी से इस दिन चंद्र दर्शन को अशुभ माना जाता है। इसलिए श्रद्धालु इस समयावधि में चंद्रमा को देखने से बचें।
🌞 ~ *वैदिक पंचांग* ~ 🌞
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जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
अंक ज्योतिष का सबसे आखरी मूलांक है नौ। आप बेहद साहसी हैं। आपके स्वभाव में एक विशेष प्रकार की तीव्रता पाई जाती है। आप सही मायनों में उत्साह और साहस के प्रतीक हैं। मंगल ग्रहों में सेनापति माना जाता है। अत: आप में स्वाभाविक रूप से नेतृत्त्व की क्षमता पाई जाती है। लेकिन आपको बुद्धिमान नहीं माना जा सकता। आपके जन्मदिन की संख्या आपस में जुड़ कर नौ होती है। यह मूलांक भूमि पुत्र मंगल के अधिकार में रहता है। मंगल के मूलांक वाले चालाक और चंचल भी होते हैं। आपको लड़ाई-झगड़ों में भी विशेष आनन्द आता है। आपको विचित्र साहसिक व्यक्ति कहा जा सकता है।
शुभ दिनांक : 9, 18, 27
शुभ अंक : 1, 2, 5, 9, 27, 72
शुभ वर्ष : 2027, 2036, 2045
ईष्टदेव : हनुमान जी, मां दुर्गा।
शुभ रंग : लाल, केसरिया, पीला
जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :
अधिकार क्षेत्र में वृद्धि संभव है। नौकरी में आ रही बाधा दूर होगी। स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। राजनैतिक व्यक्ति सफलता का स्वाद चख सकते हैं। मित्रों स्वजनों का सहयोग मिलने से प्रसन्नता रहेगी। आप अपनी शक्ति का सदुपयोग कर प्रगति की और अग्रसर होंगे। पारिवारिक विवाद सुलझेंगे। महत्वपूर्ण कार्य योजनाओं में सफलता मिलेगी।
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन आपके लिये वृद्धिकारक रहेगा। दिन के पूर्वार्ध से ही किसी विशेष कार्य को लेकर मन में तिकड़म लगी रहेगी जो सोचेंगे उसे आज पूरा करके ही दम लेंगे। कार्य व्यवसाय में पहले बढ़ाओ का सामना करना पड़ेगा लेकिन धीरे धीरे कार्य बनने लगेंगे लेकिन धन लाभ के लिये अन्य व्यक्ति टालमटोल करेगा। क्रोध से बचें अन्यथा लाभ के अनुबंध निरस्त भी हो सकते है। कमीशन के एवं थोक के व्यवसाय से आज लाभ अधिक होगा। महिलाएं के मन में किसी महंगी वस्तु की खरीद का विचार लगा रहेगा लेकिन आज इच्छा पूर्ति में बाधा आएगी। घर की आवश्यक वस्तुओं की खरीद पर खर्च होगा। खाने पीने में संयम बरतें, गैस अथवा कब्ज की शिकायत बनेगी।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज के दिन आपको भाग दौड़ का उचित फल नही मिल सकेगा सार्वजनिक क्षेत्र पर आपकी छवि बुद्धिमान जैसी बनेगी लेकिन इसका कोई व्यक्तिगत लाभ नही उठा पाएंगे। मन मे योजनाए तो बहुत चलती रहेगी लेकिन इनको साकार करने में धन एवं सहयोग की कमी अखरेगी। कार्य व्यवसाय में किसी अन्य के ऊपर निर्भर रहने के कारण सीमित साधनों से काम चलाना पड़ेगा। कागज स्टेशनरी पठन पाठन के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए निकट भविष्य के लिए लाभ के अवसर उपलब्ध होंगे लेकिन आज धन लाभ मुश्किल से ही होगा। परिवार में सब अपने अपने दिमाग का प्रदर्शन करेंगे। आरोग्य में कुछ कमी रहेगी।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन प्रतिकूल फलदायी रहेगा दिन का पहला भाग आपकी किसी गलती से अशान्त बनेगा परिजन आपकी पुरानी गलतियों को गिन गिन कर बताएंगे आपका व्यवहार भी स्वार्थ सिद्धि वाला रहेगा अन्य के काम की अनदेखी कर अपने काम से ही बात करेंगे बोल चाल में भी शालीनता की कमी रहेगी आज आपके संपर्क में आने वाला दुखी होकर ही जायेगा। वाणी व्यवहार में संतुलन रखें अन्यथा आने वाले दिनों में किसी ना किसी से तकरार बढ़ने की संभावना हैं। कार्य क्षेत्र पर के कार्य शीघ्र ही दोबारा दोहराए जाएंगे इसलिये शुभ कर्म करने का ही प्रयास करें। धन को लेकर आज किसी ना किसी आए अवश्य ही कहासुनी होगी। मानसिक तनाव दिन भर रहेगा।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन धन लाभ वाला रहेगा लेकिन इसके लिए धैर्य का परिचय देना होगा जल्दबाजी में किये कार्य निकट भविष्य में लाभ की जगह कोई नई समस्या खड़ी कर सकते है इसका ध्यान रहे। नौकरी वाले जातक आज अतिरिक्त आय बनाने के चक्कर मे अपमानित हो सकते है संतोषी वृति रखे समय लाभ दिलाने वाला ही है चाहे किसी भी रूप में मिले। आज सौंदर्य प्रसाधन के कार्य एवं शीघ्र फलित होने वाले धन संबंधित कार्य जैसे कि ब्याज अथवा लाटरी शेयर सट्टा आदि मे निवेश जल्द ही लाभ दिलाएगा। आज कमाई का अधिकांश हिस्सा भी सुख सुविधा के ऊपर खर्च होगा। घर मे छोटी मोटी खट पट को छोड़ शांति रहेगी सेहत कुछ समय के लिए ही शिथिल रहेगी।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन सामान्य रहेगा मन से संतोषी रहेंगे लेकिन किसी के दबाव में आकर धन कमाने की तिकड़म लगायेंगे लेकिन ध्यान रखें आज ज्यादा भागदौड़ करने से भी कुछ विशेष परिणाम नही मिल सकेगा। कार्यो को सहज रूप से होने दे जबरदस्ती करने पर परिणाम भी वैसे ही मिलेंगे धन लाभ बहुत प्रयास के बाद थोड़ा बहुत ही होगा। मित्र मंडली में कुछ अनैतिक वर्जित कार्य करने का दबाव बनाया जा सकता है बेहतर रहेगा बाहर की जगह घर मे ही खाली समय बिताये इससे घर के सदस्यों से चल रही गलतफहमियां भी दूर होंगी साथ ही आपसी प्रेम भी बढ़ेगा। सेहत में छोटे मोटे विकार लगे रहेंगे। यात्रा ज्यादा जरूरी होने पर ही करें।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज दिन के आरंभ से ही मानसिक रूप से प्रसन्न नजर आएंगे किसी बहुप्रतीक्षित कार्य के बनने की आशा से उत्साहित रहेंगे लेकिन मध्यान तक कार्य टलने पर उत्साह निराशा में बदलेगा फिर भी मेहनत करने में कमी ना रखें देर अबेर ही सही सफलता अवश्य मिलेगी। धन लाभ को लेकर ज्यादा भगदौड़ करनी पड़ेगी लेकिन होगा दोपहर के बाद ही। आपका स्वभाव सनकी रहेगा घर मे स्त्री वर्ग अथवा माता से व्यर्थ की बहस होगी वाणी में नरमी रखें अन्यथा बैठे बिठाये क्लेश बढ़ेगा। संध्या के समय कोई प्रसन्नता दायक समाचार मिलेगा। व्यर्थ के खर्च कंजूसी करने पर भी होंगे। स्वास्थ्य पेट की समस्या से खराब होगा।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन आपके लिये विपरीत फलदायी रहेगा कोई भी बड़ा कार्य यथा सम्भव आज टालना ही बेहतर रहेगा अथवा ज्यादा जरूरी होने पर किसी अनुभवी के मार्गदर्शन में ही करें हानि तो आज किसी न किसी रूप में अवश्य होगी किसी का सहयोग मिलने पर इसमें कमी की जा सकती है। कार्य क्षेत्र पर सरलता से लाभ कमाने के लिये संधर्ष ज्यादा करना पड़ेगा इसके विपरीत प्रलोभन के अवसर अधिक मिलेंगे लेकिन इनका लाभ स्थाई नही रहेगा। आज आपके किसी कानूनी उलझन में भी पड़ने की सम्भावना है सतर्क रहें। सभी से व्यवहार बना कर रखें घर मे कोई अशुभ समाचार के कारण उदासी बनेगी। स्वास्थ्य भी नरम रहेगा।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज दिन के आरंभिक भाग को छोड़ शेष समय राहत वाला रहेगा प्रातः काल मे किसी गलती का पछतावा होगा प्रत्येक कार्य संकोच से करेंगे लेकिन मन मे चंचलता आएगी सही कार्य को छोड़ गलत कार्य की ओर जल्दी आकर्षित हो जाएंगे। मन दोपहर तक दुविधा में रहेगा किसी परिजन का मार्गदर्शन चाहेंगे लेकिन मिल नही सकेगा कोई बाहरी व्यक्ति ही दुविधा से बाहर निकालेगा। धन लाभ आवश्यकता से कम अकस्मात होगा अगर भविष्य में लाभ चाहते है तो मेहनत करने में कमी ना छोड़े जोखिम वाले कार्य आज तो नही पर निकट भविष्य में अवश्य लाभ दिलाएंगे। सेहत एवं घर के वातावरण में पहले से सुधार आएगा।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन भी आपके अनुकूल रहेगा व्यवहार में नरमी रहने से आज किसी से भी आसानी से कार्य निकाल लेंगे कार्य क्षेत्र पर आज लाभ के कई सौदे मिलेंगे लेकिन मनमौजी स्वभाव के कारण इनसे पूरा लाभ नही उठा सकेंगे। धन की आमद के लिए निरंतर प्रयास करेंगे लेकिन आज ज्यादा धनलाभ नही हो पायेगा परन्तु घर एवं बाहर सम्मान जरूर बढेगा आज ना चाहकर भी किसी की आर्थिक सहायता करनी पड़ेगी दो पक्षो के झगड़े सुलझाने में मध्यस्थता करनी पडेगी। कार्य व्यवसाय में आज बीते कल की तुलना में कम परिश्रम करेंगे फिर भी लाभ की आशा ज्यादा लगाएंगे। परिवार के सदस्य आप के ऊपर ज्यादा विश्वास करेंगे लेकिन काम के समय आनाकानी करने पर मन दुखी होगा। पेट की गैस को छोड़ सेहत आज अन्य दिनों की तुलना में बेहतर रहेगी।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज दिन का पहला भाग घरेलू कार्यो की व्यस्तता में व्यर्थ होगा किसी काम की आनाकानी करने पर कलह भी हो सकती है। धर्म कर्म के प्रति रुचि बढ़ेगी लेकिन पूजा पाठ में बैठने के समय कुछ ना कुछ काम आने से ठीक से नही कर पाएंगे। मध्यान का समय आलस्य में बीतेगा कार्य क्षेत्र पर भी मंदी रहेगी। इसके बाद छोटे मोटे सौदे होने पर खर्च लायक धन मिल जाएगा। संध्या के आस पास लाभ के सौदे मिलने की संभावना है इन्हें किसी भी प्रकार से हाथ से जाने ना दे भविष्य के लिए लाभदायक ही रहेंगे। पारिवारिक वातावरण लगभग शांत ही रहेगा लेकिन किसी के ऊपर ज्यादा दबाव डालने पर आपसी मतभेद हो सकते है। सेहत में आज चुस्ती रहेगी।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज दिन के आरंभ से ही सेहत संबंधित समस्या बनने लगेगी लापरवाही करने पर मध्यान तक परेशानी बढ़ने की संभावना है दोपहर के समय मानसिक रूप से चिड़चिड़े रहेंगे किसी की सांत्वना भी बुरी लगेगी। समय पर इलाज कराये अन्यथा आने वाले दो दिन सेहत के साथ धन की हानि भी कराएंगे। कार्य व्यवसाय में पुराने सौदों से आंशिक धनलाभ होगा लेकिन तुरंत खर्च भी हो जाएगा। यात्रा से आज कोई लाभ नही होगा उल्टे सेहत ज्यादा खराब होगी साथ ही धन हानि भी होगी आज टालना ही बेहतर रहेगा। पारिवारिक वातावरण आपके रूखे व्यवहार से उदासीन रहेगा। महिला वर्ग स्वयं का ज्यादा ध्यान रखें अन्यथा घर में सब अस्त व्यस्त हो जाएगा।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन अत्यंत शुभ फलदायक है पूर्व में अथवा दिन के आरंभ में सोची योजना का सकारत्मक परिणाम संध्या तक मिल जाएगा। कार्य व्यवसाय को लेकर आज भगदौड़ अधिक करनी पड़ेगी लेकिन बीच-बीच मे लाभ मिलने से उत्साह बना रहेगा। विदेशी वस्तुओ के व्यवसाय एवं शेयर आदि में लाभ की संभावना अधिक है। इसके अतिरिक्त सफेद वस्तुओ से भी ठीक ठाक लाभ होगा। पारिवारिक वातावरण भी खुशहाल बना रहेगा पिता के सुख में वृद्धि होगी लेकिन अनैतिक कार्यो से बचे अन्यथा सुख मिलने की जगह झगड़ा भी हो सकता हैं। महिला वर्ग किसी काम को लेकर आशंकित रहेगी आज मनोकामना पूर्ण होने की संभावना कम ही है सेहत में सुधार रहेगा।

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