🙏🏻 हर हर महादेव🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक – 23 अगस्त 2025*
🌤️ *दिन – शनिवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शरद ॠतु*
🌤️ *मास – भाद्रपद ( गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार श्रावण)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – अमावस्या सुबह 11:35 तक तत्पश्चात प्रतिपदा*
🌤️ *नक्षत्र – मघा रात्रि 12:54 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी*
🌤️ *योग – परिघ दोपहर 01:20 तक तत्पश्चात शिव*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 09:30 से सुबह 11:06 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:20*
🌤️ *सूर्यास्त – 07:01*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – भाद्रपद अमावस्या,कुशोत्पाटिनी अमावस्या,अमावस्यांत श्रावण मास समाप्त,शरद ऋतु प्रारंभ*
💥 *विशेष – अमावस्या एवं व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
💥 *ब्रह्म पुराण’ के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- ‘मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।’ (ब्रह्म पुराण’)*
💥 *शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय।’ का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण’)*
💥 *हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है ।(पद्म पुराण)*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *समृद्धि बढ़ाने के लिए* 🌷
🌙 *कर्जा हो गया है तो अमावस्या के दूसरे दिन से पूनम तक रोज रात को चन्द्रमा को अर्घ्य दे, समृद्धि बढेगी ।*
🙏🏻 *दीक्षा मे जो मन्त्र मिला है उसका खूब श्रध्दा से जप करना शुरू करें,जो भी समस्या है हल हो जायेगी ।*
🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *स्कन्दपुराण के प्रभास खंड के अनुसार*
*”अमावास्यां नरो यस्तु परान्नमुपभुञ्जते ।। तस्य मासकृतं पुण्क्मन्नदातुः प्रजायते”*
🍲 *जो व्यक्ति अमावस्या को दूसरे का अन्न खाता है उसका महिने भर का पुण्य उस अन्न के स्वामी/दाता को मिल जाता है।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *खेती के काम में ये सावधानी रहे* 🌷
🚜 *ज़मीन है अपनी… खेती काम करते हैं तो अमावस्या के दिन खेती का काम न करें …. न मजदूर से करवाएं | जप करें भगवत गीता का ७ वां अध्याय अमावस्या को पढ़ें …और उस पाठ का पुण्य अपने पितृ को अर्पण करें … सूर्य को अर्घ्य दें… और प्रार्थना करें ” आज जो मैंने पाठ किया …अमावस्या के दिन उसका पुण्य मेरे घर में जो गुजर गए हैं …उनको उसका पुण्य मिल जाये | ” तो उनका आर्शीवाद हमें मिलेगा और घर में सुख-सम्पति बढ़ेगी |*
🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचाग ~* 🌞
🌿🌼 लड्डू गोपालकी बहन चंदा 🌼🌿
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ब्रजमंडल क्षेत्र में एक जंगल के पास, एक गाँव बसा था। जंगल के किनारे ही एक टूटी-फूटी झोपड़ी में एक सात/आठ वर्षीया बालिका अपनी वृद्ध दादी के साथ रहती थी जिसका नाम उसकी दादी ने प्यार से ‘चंदा’ रखा था।
चंदा का उसकी दादी के अतिरिक्त और कोई सहारा नहीं था, उसके माता-पिताकी मृत्यु एक महामारी में, उस समय हो गयी थी, जब चंदा की आयु मात्र २ वर्ष ही थी, तबसे उसकी दादी ने ही उसका पालन-पोषण किया था।
चंदा की दादी के पास भी कमाई का कोई साधन नहीं था, इसलिये वह जंगल से लकड़ियाँ बीनकर उनको बेचती और उससे जो भी २-४ आने मिलते, उन दोनों का गुजारा चलता था।
क्योंकि घरमें और कोई नहीं था इसलिये दादी चंदा को भी अपने साथ जंगल ले जाती थी। दोनों दादी-पोती दिन भर जंगल में भटकते और संध्या होनेसे पहले घर वापस लौट आते । यही उनका प्रति दिनका कार्य था।
चंदा अपनी दादी के साथ बहुत प्रसन्न रहती, किंतु उसको एक बात बहुत सताती थी कि उसका कोई भाई नहीं था। गाँव के बच्चे उसको इस बात के लिये बहुत चिढ़ाते थे तथा उसको अपने साथ भी नहीं खेलने देते थे, इससे वह बहुत दुःखी रहती थी।
अनेक बार वह अपनी दादी से पूछती कि उसका कोई भाई क्यों नहीं है ? तब उसकी दादी उसको प्रेमसे समझाती – कौन कहता है कि तेरा कोई भाई नहीं है, वह है ना कान्हा, वही तेरा भाई है, यह कहकर दादी लड्डू गोपालकी ओर इशारा कर देती।
चंदा की झोपड़ी में एक पुरानी किंतु बहुत सुंदर लड्डू गोपाल की प्रतिमा थी जो उसके दादा लाये थे। चंदाकी दादी बड़े मनसे लाड़ लड़ाती, बहुत प्रेमसे उनकी सेवा करती और उनको भोग लगाती। निर्धन स्त्री पकवान मिष्ठान कहाँसे लाये जो उनके खानेके लिये रूखा सूखा होता, वही पहले भगवान को भोग लगाती फिर चंदाके साथ बैठकर खुद भी खाती। चंदाके प्रश्न सुनकर वह उस लड्डू गोपालकी ओर ही इशारा कर देती।
बालपन से चंदा लड्डू गोपाल को ही अपना भाई मानने लगी। वह जब दुःखी होती तो लड्डू गोपालके सम्मुख बैठकर उनसे बातें करती और कहती कि भईया तुम मेरे साथ खेलने क्यों नहीं आते, सब बच्चे मुझे चिढ़ाते हैं, मेरा उपहास करते हैं, मुझको अपने साथ खेलने भी नहीं देते, मैं अकेली रहती हूँ, तुम क्यों नहीं आते ? क्या तुम मुझसे रूठ गये हो, जो एक बार भी घर नहीं आए, मैंने तो तुमको कभी देखा भी नहीं है।
अपनी बाल कल्पनाओं में खोई चंदा लड्डू गोपाल से अपने मनके सारे दुःख कह देती। चंदा का प्रेम निश्छल था, वह अपने भाईको पुकारती रहती। उसके प्रेमके आगे भगवान भी विवश हो जाते, किंतु उन्होंने कभी कोई उत्तर नहीं दिया।
एक दिन चंदा ने अपनी दादी से पूछा.. दादी मेरे भाई घर क्यों नहीं आते, वह कहाँ रहते हैं ? तब दादी ने उसको टालने के उद्देश्य से कहा कि तेरा भाई जंगल में रहता है, एक दिन वह अवश्य आयेगा।
चंदा ने पूछा क्या उसको जंगल में डर नहीं लगता, वह जंगल में क्यों रहता है? तब दादी ने उत्तर दिया नहीं वह किसी से नहीं डरता, उसको गाँव अच्छा नहीं लगता इसलिये वह जंगल में रहता है।
धीरे-धीरे रक्षाबंधन का दिन निकट आने लगा, गाँव में सभी बालिकाओं ने अपने भाइयों के लिये राखियाँ खरीदीं। वे चंदा को चिढ़ाने लगीं कि तेरा कोई भाई है नहीं, तू किसको राखी बाँधेगी ?
अब चंदा की सहनशीलता चुक गयी, वह घर आकर जोर-जोर से रोने लगी, दादीके पूछने पर उसने सारी बात बतायी, तब उसकी दादी भी बहुत दुःखी हुई। उसने चंदा को प्यार से समझाया कि मेरी बच्ची तू रो मत, तेरा भाई आयेगा।
किंतु चंदा का रोना नहीं रुका और लड्डू गोपाल की प्रतिमा के पास जाकर उससे लिपट कर जोर-जोर से रोने लगी और बोली कि भाई तुम आते क्यों नहीं, सब भाई अपनी बहन से राखी बंधवाते हैं, फिर तुम क्यों नहीं आते और बँधवाते ?
उधर भगवान चंदा की समस्त चेष्टाओं के साक्षी बन रहे थे। रोते-रोते चंदाको याद आया कि दादी ने कहा था कि उसका भाई जंगल में रहता है, बस फिर क्या था वह दादी को बिना बताये नंगे पैरों से जंगल की ओर दौड़ पड़ी, उसने मनमें ठान लिया था कि वह आज अपने भाईको लेकर ही आयेगी !
जंगलकी काँटों भरी राहपर वह मासूम दौड़ी जा रही थी और भगवान उसके साक्षी बन रहे थे। तभी भगवान पीड़ासे कराह उठे, उनके पाँवसे रक्त निकला, आखिर हो भी क्यों न, भगवानका कोई भक्त पीड़ामें हो और उन्हें पीड़ा न हो यह कैसे संभव है ? जंगलमें चंदाके पैरोंमें काँटा लगा तो भगवान भी पीड़ासे कराह उठे।
उधर चंदाके पैरोंसे भी रक्त बह निकला, वह वहीं बैठकर रोने लगी, तभी भगवानने चंदाके पैरोंपर अपना हाथ फेरा जहाँ काँटा लगा था, पलक झपकते ही चंदाके पैरोंसे रक्त बहना बंद हो गया और दर्द भी गायब हो गया और वह फिरसे उठी और जंगलकी ओर दौड़ने लगी।
इस बार उसके पैर काँटोंसे छलनी हो गये किन्तु वह नन्हीं सी जान बिना चिंता किये दौड़ती रही, उसको अपने भाईके पास जाना था। अंततः एक स्थानपर थककर रुक गयी और रो-रोकर पुकारने लगी भाई तुम हाँ हो, तुम आते क्यों नहीं ?
अब भगवान के लिये एक पल भी रुकना कठिन था, वे उठे और एक ग्यारह बारह वर्ष के सुन्दर से बालक का रूप धारण किया तथा पहुँच गये चंदा के पास।
उधर चंदा थककर बैठ गयी थी और सर झुकाकर रोये जा रही थी तभी उसके सरपर किसीके हाथका स्पर्श हुआ और एक आवाज सुनायी दी, “मैं आ गया मेरी बहना, अब तू मत रो!”
चंदाने सर उठाकर उस बालकको देखा और पूछा क्या तुम मेरे भाई हो ? तब उत्तर मिला “हाँ चंदा, मैं ही तुम्हारा भाई हूँ” यह सुनते ही चंदा अपने भाईसे लिपट गयी और फूट-फूटकर रोने लगी।
तभी भक्त और भगवानके मध्य, भाव और भक्तिका एक अनूठा दृश्य उभर आया, भगवान भी वहीं पृथ्वीपर बैठ गये उन्होंने नन्हीं चंदाके कोमल पैरोंको अपने हाथोंमें लिया और उसको करुणासे देखा।
वह छोटे-छोटे कोमल पाँव पूर्ण रूपसे काँटोंसे छलनी हो चुके थे, रक्त बह रहा था, यह देखकर भगवानकी आँखोंसे आँसू बह निकले। उन्होंने उन नन्हें पैरोंको अपने माथेसे लगाया और रो पड़े।
अद्भुत दृश्य, बहन भाईको पानेकी प्रसन्नतामें रो रही थी और भगवान अपने भक्तके कष्टको देखकर रो रहे थे। भगवान श्रीहरिने अपने हाथोंसे चंदाके पैरोंमें चुभे काँटोंको निकाला, फिर उसके पैरोंपर अपने हाथोंका स्पर्श किया, पलभरमें सारा दर्द दूर हो गया।
चंदा अपने भाईका हाथ पकड़कर बोली भाई अब तुम घर चलो, कल रक्षाबंधन है, मैं भी रक्षाबंधन मानाऊँगी। भगवान बोले अब तू घर जा, तेरी दादी प्रतीक्षा कर रही होगी, मैं कल प्रातः तेरे घर अवश्य आऊँगा। ऐसा कहकर उसको विश्वास दिलाया और जंगलकी सीमातक छोड़ने आये।
अब चंदा बहुत प्रसन्न थी उसकी सारी चिंता मिट गयी थी, घर पहुँची तो देखा कि दादीका रो-रोकर बुरा हाल था, चंदाको देखते ही दादीने उसको छातीसे लगा लिया। चंदा बहुत पुलकित थी, बोली दादी अब तू रो मत कल मेरा भाई आयेगा, मैं भी रक्षाबंधनका त्योहार मनाऊँगी।
दादीने अपने आँसू पोंछे, उसने सोचा कि जंगलमें कोई बालक मिल गया होगा जिसको यह अपना भाई मान बैठी है। चंदाने दादीसे जिद्द की और एक सुंदर सी राखी अपने भाईके लिये खरीदी।
अगले दिन प्रातः ही वह नहा-धोकर अपने भाईकी प्रतीक्षामें द्वारपर बैठ गयी, उसको अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी, थोड़ी देरमें वह बालक सामनेसे आता दिखायी दिया, उसको देखते ही चंदा प्रसन्नतासे चीख उठी “दादी भाई आ गया” और वह दौड़कर अपने भाईके पास पहुँच गयी, उसका हाथ पकड़कर घर ले आयी।
अपनी टूटी-फूटी चारपाईपर बिठाया, बड़े प्रेमसे भाईका तिलक किया, आरती उतारी और रक्षा सूत्र बाँधा। सुंदर राखी देखकर भाई भी बहुत प्रसन्न हुआ, भाईके रूपमें भगवान उसके प्रेमको देखकर विभोर हो उठे थे, अब बारी उनकी थी।
भाईने अपने साथ लाये झोलेको खोला तो खुशियोंका अम्बार निकला; सुंदर कपड़े, मिठाई, खिलौने और भी बहुत कुछ। चंदाको मानो पंख लग गये, उसकी प्रसन्नताका कोई ठिकाना ही नहीं था।
कुछ समय साथ रहनेके बाद वह बालक बोला अब मुझको जंगल वापस जाना है। चंदा उदास हो गयी, तब वह बोला तू उदास न हो, आजसे प्रतिदिन मैं तुमसे मिलने आऊँगा। अब चंदा बहुत प्रसन्न थी। बालक जंगल लौट गया।
उधर दादी असमंजसमें थी कौन है यह बालक, उसकी कुछ समझमें नहीं आ रहा था। किन्तु कन्हैयाके मनकी कन्हैया ही जाने।
भाईके जानेके बाद जब चंदा घर वापस लौटी तो एकदम ठिठक गयी, उसकी दृष्टि लड्डू गोपालकी प्रतिमापर पड़ी तो उसने देखा कि उनके हाथमें वही राखी बँधी थी, जो उसने अपने भाईके हाथमें बाँधी थी।
उसने दादीको तुरंत बुलाया यह देखकर दादी भी अचम्भित रह गयी, किन्तु उसने बचपनसे कृष्णकी भक्ति की थी वह तुरंत जान गयी कि वह बालक और कोई नहीं स्वयं कन्हैया ही थे, वह उनके चरणोंमें गिर पड़ी और बोली, हे छलिया, जीवनभर तो छला जीवनका अंत आया तो अब भी छल कर चले गये।
वह चंदासे बोली अरी वह बालक और कोई नहीं तेरा यही भाई था। यह सुनकर चंदा भगवानकी प्रतिमासे लिपटकर रोने लगी। रो रोकर बोली कहो न भाई क्या वह तुम ही थे, मैं जानती हूँ वह तुम ही थे, फिर सामने क्यों नहीं आते, छुपते क्यों हो ?
दादी पोतीका निर्मल प्रेम ऐसा था कि भगवान भी विवश हो गये। लीलाधारी तुरंत ही विग्रहसे प्रकट हो गये और बोले हाँ चंदा मैं ही तुम्हारा वह भाई हूँ, तुमने मुझको पुकारा तो मुझको आना पड़ा। और मैं कैसे नहीं आता, जो भी लोग ढोंग, दिखावा, पाखंड रचते हैं उनसे मैं बहुत दूर रहता हूँ, किन्तु जब मेरा कोई सच्चा भक्त प्रेम भक्तिसे मुझको पुकारता है तो मुझको आना ही पड़ता है।
भक्त और भगवानकी प्रेममयी लीला चल रही थी; दादी पोती भगवानमें लीन हो गयी, उस दिनके बादसे गाँवमें उनको किसीने नहीं देखा, कोई नहीं जान पाया कि आखिर दादी-पोती कहाँ चले गये।
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*दिमाग में चेतना कैसे बन जाती है*❓
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दिमाग में चेतना कैसे बनती है, यह एक जटिल और बहुस्तरीय प्रश्न है जिसका उत्तर न्यूरोसाइंस और दर्शनशास्त्र दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है। चेतना को समझने के लिए, हमें दिमाग के विभिन्न भागों और उनके कार्यों को समझना होगा।
*चेतना के मुख्य तत्व:*
– *आत्म-जागरूकता*: यह चेतना का एक मूलभूत तत्व है जिसमें हम अपने आप को और अपने आसपास के वातावरण को पहचानते हैं।
– *अनुभव और धारणा*: यह चेतना का एक अन्य महत्वपूर्ण तत्व है जिसमें हम अपने आसपास के वातावरण को अनुभव करते हैं और उसकी धारणा बनाते हैं।
*दिमाग में चेतना कैसे बनती है:*
– *न्यूरॉन्स और सिनैप्स*: दिमाग में न्यूरॉन्स और सिनैप्स के बीच के संबंध चेतना के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
– *इंटीग्रेटेड इंफॉर्मेशन थ्योरी*: इस सिद्धांत के अनुसार, चेतना तब उत्पन्न होती है जब दिमाग के विभिन्न भागों में जानकारी एकीकृत होती है।
– *ग्लोबल वर्कस्पेस थ्योरी*: इस सिद्धांत के अनुसार, चेतना तब उत्पन्न होती है जब दिमाग के विभिन्न भागों में जानकारी एक केंद्रीय कार्यक्षेत्र में एकीकृत होती है।
चेतना के बारे में अभी भी बहुत कुछ अज्ञात है, और इसके बारे में विभिन्न सिद्धांत और मॉडल प्रस्तावित किए गए हैं। चेतना को समझने के लिए, हमें दिमाग के कार्यों और उसके विभिन्न भागों के बीच के संबंधों को और अधिक विस्तार से समझना होगा।
*चेतना नष्ट होने के कारण:*
– *मस्तिष्क की चोट या बीमारी*: मस्तिष्क की चोट या बीमारी, जैसे कि स्ट्रोक या अल्जाइमर रोग, चेतना को नष्ट कर सकती है।
– *नींद और अनिद्रा*: नींद की कमी या अनिद्रा चेतना को प्रभावित कर सकती है और इसे नष्ट कर सकती है।
– *तनाव और चिंता*: तनाव और चिंता चेतना को प्रभावित कर सकती है और इसे नष्ट कर सकती है।
– *नशीली दवाओं का सेवन*: नशीली दवाओं का सेवन चेतना को नष्ट कर सकता है और इसके कार्यों को प्रभावित कर सकता है।
*चेतना बढ़ाने के तरीके:*
– *ध्यान और योग*: ध्यान और योग चेतना को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं और इसके कार्यों को सुधार सकते हैं।
– *नींद और आराम*: पर्याप्त नींद और आराम चेतना को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं और इसके कार्यों को सुधार सकते हैं।
– *व्यायाम और शारीरिक गतिविधि*: व्यायाम और शारीरिक गतिविधि चेतना को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं और इसके कार्यों को सुधार सकते हैं।
– *स्वस्थ आहार और जीवनशैली*: स्वस्थ आहार और जीवनशैली चेतना को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं और इसके कार्यों को सुधार सकते हैं।
चेतना को बढ़ाने और नष्ट होने से बचाने के लिए, हमें स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए और अपने मस्तिष्क की देखभाल करनी चाहिए।
भोग वासना द्वारा चेतन को एकाग्र करना एक जटिल विषय है। भोग वासना का अर्थ है तीव्र इच्छा या आकर्षण जो किसी व्यक्ति या वस्तु के प्रति होता है।
*भोग वासना और चेतनता:*
– *अस्थायी एकाग्रता*: भोग वासना द्वारा एकाग्रता अस्थायी हो सकती है, क्योंकि यह इच्छा की पूर्ति पर निर्भर करती है।
– *विचलन*: भोग वासना के कारण विचलन हो सकता है, क्योंकि मन एक ही बिंदु पर केंद्रित नहीं रहता है।
– *नकारात्मक प्रभाव*: भोग वासना के नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं, जैसे कि आसक्ति, लोभ और असंतुष्टता।
–
जहां सोच (चेतनता)नष्ट हो जाती है, वहां अक्सर एक शून्यता या अस्त-व्यस्तता की भावना पैदा हो सकती है। यह शून्यता कई रूपों में प्रकट हो सकती है, जैसे कि:
– *अनिश्चितता*: जब सोच नष्ट हो जाती है, तो हमें अक्सर अनिश्चितता का अनुभव हो सकता है, जिसमें हमें नहीं पता होता कि आगे क्या करना है या क्या सोचना है।
– *भ्रम*: सोच की अनुपस्थिति में, हम भ्रमित हो सकते हैं और अपने विचारों और भावनाओं को समझने में असमर्थ हो सकते हैं।
– *नकारात्मकता*: जब सोच नष्ट हो जाती है, तो नकारात्मक विचार और भावनाएं उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे कि निराशा, उदासी या क्रोध।
– *आत्म-संदेह*: सोच की अनुपस्थिति में, हम अपने आप पर संदेह करने लगते हैं और अपने निर्णयों और क्षमताओं पर प्रश्नचिह्न लगा सकते हैं।
हालांकि, यह भी संभव है कि सोच की नष्टता के बाद कुछ नया और सकारात्मक पैदा हो सकता है, जैसे कि:
– *नया दृष्टिकोण*: जब पुरानी सोच नष्ट हो जाती है, तो हमें नए दृष्टिकोण और विचारों के लिए जगह मिल सकती है।
– *आत्म-खोज*: सोच की अनुपस्थिति में, हम अपने आप को और अपने मूल्यों को बेहतर ढंग से समझने का अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
– *रचनात्मकता*: जब सोच नष्ट हो जाती है, तो हमें रचनात्मकता और नवाचार के लिए जगह मिल सकती है, जिससे हम नए विचारों और समाधानों को विकसित कर सकते हैं।
ओम नमः शिवाय🔱
🙏🍀🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🙏
जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
23 का अंक देखने पर ॐ का आभास देता है। जो कि भारतीय परंपरा में शुभ प्रतीक है। आप बेहद भाग्यशाली हैं कि आपका जन्म 23 को हुआ है। 23 का अंक आपस में मिलकर 5 होता है। जबकि 5 का अंक बुध ग्रह का प्रतिनिधि करता है। ऐसे व्यक्ति अधिकांशत: मितभाषी होते हैं। कवि, कलाकार, तथा अनेक विद्याओं के जानकार होते हैं।
आपमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन करना मुश्किल है। अर्थात अगर आप अच्छे स्वभाव के व्यक्ति हैं तो आपको कोई भी बुरी संगत बिगाड़ नहीं सकती। अगर आप खराब आचरण के हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सुधार नहीं सकती। लेकिन सामान्यत: 23 तारीख को पैदा हुए व्यक्ति सौम्य स्वभाव के ही होते हैं। आपमें गजब की आकर्षण शक्ति होती है। आपमें लोगों को सहज अपना बना लेने का विशेष गुण होता है। अनजान व्यक्ति की मदद के लिए भी आप सदैव तैयार रहते हैं।
शुभ दिनांक : 1, 5, 7, 14, 23
शुभ अंक : 1, 2, 3, 5, 9, 32, 41, 50
शुभ वर्ष : 2030, 2032, 2034, 2050, 2059, 2052
ईष्टदेव : देवी महालक्ष्मी, गणेशजी, मां अम्बे।
शुभ रंग : हरा, गुलाबी जामुनी, क्रीम
जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :
वर्ष आपके लिए सफलताओं भरा रहेगा। अभी तक आ रही परेशानियां भी इस वर्ष दूर होती नजर आएंगी। परिवारिक प्रसन्नता रहेगी। संतान पक्ष से खुशखबर आ सकती है। नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए यह वर्ष निश्चय ही सफलताओं भरा रहेगा। दाम्पत्य जीवन में मधुर वातावरण रहेगा। अविवाहित भी विवाह में बंधने को तैयार रहें। व्यापार-व्यवसाय में प्रगति से प्रसन्नता रहेगी।
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज आपकी छवि घर को छोड़ अन्य सभी जगह बुद्धिमानों जैसी बनेगी। मन में कुछ समय के लिये आतिआत्मविश्वास के भाव भी आयंगे लेकिन आध्यात्म के प्रभाव से कोई हानि नहीं होगी। कार्य क्षेत्र से आज एक ही बार में लाभ कमाने के चक्कर में रहेंगे। इससे अन्य लोगों के ऊपर आपकी लोभी छवि बनेगी फिर भी स्वार्थवश कह नहीं पाएंगे। आज आप अपने कार्य बनाने में पीछे परन्तु अन्य लोगों के लिये अवश्य ही सहयोगी रहेंगे। सार्वजनिक क्षेत्र पर आपसे महत्त्वपूर्ण विषय में सलाह ली जाएगी लेकिन घर में इसके विपरीत हास्य के पात्र बनेंगे। धन लाभ अवश्य होगा लेकिन इच्छानुसार नहीं, लोभ से बचें। आगे समय लाभ वाला ही है। शारीरिक कारणों से मन में अस्थिरता आएगी। स्त्री सुख मिलेगा।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज के दिन परिस्थितियां आशा के विपरीत रहेंगी दिन का प्रथम भाग
परिजन अथवा किसी आस-पड़ोसी से व्यर्थ की कलह से खराब होगा इसका प्रभाव मध्यान तक मानसिक रूप से बेचैन रखेगा। आज पूर्व में किये आलस्य का दुख मन को व्यथित करेगा। कार्य क्षेत्र पर मेहनत ज्यादा करनी पड़ेगी मन इधर उधर भटकेगा। धनलाभ के अवसर भी मिलेंगे लेकिन आशा जनक नही होगा। सहकर्मी अथवा संपर्क में रहने वालों की छोटी मोटी बातो को अनदेखा करें अन्यथा आपसी मतभेद के कारण कार्य हानि हो सकती है। महिलाए भी आज बेतुके बयानों से बचें परिस्थिति अनुसार स्वयं को ढालने से शांति बनी रहेगी। मानसिक तनाव आज ज्यादा रहेगा।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज आपसी तालमेल की कमी हर जगह अव्यवस्था फैलाएगी। दिन के आरंभ में मानसिक रूप से शांत रहेंगे धर्म-कर्म में भी निष्ठा रहने से पूजा पाठ के लिये समय निकालेंगे लेकिन स्वभाव में अकड़ एवं जिद बनते कार्यो में बाधा डालेगी। आज आपके पक्ष में बोलने वालों से भी विपरीत व्यवहार करेंगे बाद में समय निकलने पर पछतायेंगे। धन को लेकर आज कोई नई समस्या खड़ी होगी। कार्य क्षेत्र पर भी आर्थिक अभाव रहने के कारण अपने विचारों को साकार रूप नही दे पाएंगे। घर में मामूली तकरार के बाद स्थित सामान्य हो जाएगी। सेहत की अनदेखी बाद में भारी पड़ने वाली है सतर्क रहें। बुजुर्ग वर्ग को छोड़ अन्य सभी से पटेगी।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन कामना पूर्ति में बाधक बनेगा। स्वभाव से आलसी रहेंगे परिजनों के ताने सुनने के बाद ही गंभीरता आएगी। कार्य व्यवसाय में योजना बड़ी बड़ी बनाएंगे लेकिन उसके अनुसार कर्म नही करने पर मन मारकर रहना पड़ेगा। सहयोगी भी पहले हाँ में हाँ मिलाएंगे लेकिन काम के वक्त सहयोग करने में आनाकानी करेंगे। परिजन एवं सहयोगियों को आज किसी भी हाल में नाराज ना होने दें अन्यथा आने वाले समय मे काम निकालने में परेशानी आ सकती है। शेयर अथवा अन्य जोखिम वाले कार्यो ने निवेश निकट भविष्य के लिये शुभ रहेगा। धन लाभ आज भी होगा लेकिन आवश्यकता से कम। स्वास्थ्य के विषय मे शंका खड़ी होगी।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन शुभ फलदायी है लेकिन आज मन पर चंचलता कुछ ज्यादा ही हावी रहेगी। विपरीत लिंगीय आकर्षण अधिक रहने के कारण अपने आवश्यक कार्यो को छोड़ वासना के पीछे ध्यान भटकाएँगे। कार्य व्यवसाय में किसी मार्गदर्शक की सलाह से लाभ के प्रसंग उपस्थित होंगे यहां जल्दबाजी ही काम आएगी अन्यथा आपके सौदों पर अन्य प्रतिस्पर्धी भी नजर लगाए बैठे है थोड़ा सा विलम्ब बड़े लाभ से वंचित कर सकता है। धन लाभ के मार्ग एक से अधिक रहेंगे पर होगा किसी एक साधन द्वारा ही। परिवार में अपनी बेतुकी हरकतों से डांट पड़ेगी लेकिन स्वभाव आज मनमौजी ही रहेगा। व्यस्तता के बाद भी मौज शौक के लिए समय निकाल लेंगे। सेहत लगभग ठीक ही रहेगी।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन हानिकारक रहेगा। पूर्व में लिए निर्णयों पर एकबार फिर से विचार करें जिद्दी स्वभाव आज कुछ ना कुछ गड़बड़ ही कराएगा। व्यवसायी वर्ग जिस कार्य से लाभ की उम्मीद रखेंगे उसके अंत समय मे निरस्त हिने पर निराशा होगी अपनी गलतियों का गुस्सा अन्य के ऊपर उतारना आज भारी पड़ सकता है। विवेकी व्यवहार अपनाए अन्यथा कोई आपसे बात करने के लिये भी तैयार नही होगा। धन को लेकर आज कुछ ना कुछ उलझन रहेगी भाग दौड़ के बाद भी अल्प लाभ से संतोष करना पड़ेगा इसके विपरीत आकस्मिक खर्च अथवा हानि से परेशान रहेंगे। घर मे किसी बाहरी व्यक्ति के कारण अशांति हो सकती है भ्रामक खबरो पर यकीन ना करें। सेहत में नरमी आएगी।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज के दिन आपको बीते दिन की अपेक्षा सुधार अनुभव होगा। दिन का आरंभिक भाग साधारण रहेगा मन मे किसी इच्छा पूर्ति को लेकर तिकड़म भिड़ाएंगे लेकिन आज आपका मन कार्यो की के साथ ही मौज शौक में भी रहने के कारण मनोकामना पूर्ति संदिग्ध ही रहेगी। कार्य व्यवसाय में कम ध्यान देने पर भी किसी अन्य माध्यम से धन की आमद होगी। खर्च निकालने में परेशानी नही आएगी लेकिन व्यर्थ के खर्च बाद में आर्थिक उलझन का कारण बनेंगे। घर का वातावरण कुछ समय के लिये खराब होगा परिजन आपकी किसी गलत आदत को लेकर कलह करेंगे। सेहत असंयम से खराब होगी।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज के दिन आप जिस भी कार्य को करेंगे उसमे अन्य लोग टांग अड़ायेंगे जिससे कुछ समय के लिये भ्रामक स्थिति बनेगी लेकिन ध्यान रहे आज परिस्थिति सफ़लतादायक बनी है अन्य लोगो के ऊपर ध्यान ना दें अपनी बुद्धि से कार्य करे विजय अवश्य मिलेगी भले ही थोड़ा विलम्ब से ही। कार्य व्यवसाय से पुरानी योजनाए धन लाभ कराएंगी नए अनुबंध हथियाने के लिये कुटिल बुद्धि का इस्तेमाल करना पड़ेगा सरल स्वभाव का प्रयोग आज काम नही आएगा। विरोधी प्रबल रहेंगे पीछे से आपकी हानि पहुचाने का हर संभव प्रयास करेंगे मन को लक्ष्य पर केंद्रित रख ही इनपर विजय पाई जा सकती है। घर एवं शारीरिक सुख उत्तम रहेगा।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन पूर्व में किये किसी परोपकार अथवा अन्य शुभ कर्मो का फल सम्मान के रूप में वापस मिलेगा। दिन का आरंभ थोड़ा सुस्त रहेगा लेकिन जल्द ही गति आयेगी लेकिन आज आप घर संबंधित कार्यो में लापरवाही करेंगे जबकि बाहरी लोगों की सहायता के लिये तत्पर रहेंगे। घर मे महिला पुरुष के बीच यह व्यवहार कलह का कारण बनेगा फिर भी अपनी वाक्चातुर्य से सर्वत्र विजय पा लेंगे। काम-धंधे के प्रति गंभीर तो रहेंगे लेकिन एक साथ दो काम करने पर होने वाले लाभ में कमी आएगी। आज आपके मन में आर्थिक विषयो को लेकर कुछ ना कुछ तिकड़म लगी रहेगी फिर भी धन लाभ कामचलाऊ ही होगा। घर मे अंतर्द्वन्द की स्थिति रहेगी। सेहत सामान्य से कम रहेगी।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज के दिन आपको शारीरिक समस्या का सामना करना पड़ेगा दिन के आरंभ से ही शरीर में विकार उत्पन्न होंगे मध्यान तक इनकी अनदेखी करेंगे बढ़ने पर ही इलाज करेंगे वह भी मनमर्जी से जिसके परिणाम आगे गंभीर भी हो सकते है। कार्य क्षेत्र पर लाभ की संभावनाए बनते बनते बिगड़ेंगी आपकी मनोदशा का विरोधी लाभ उठाएंगे। धन लाभ फिर भी अवश्य होगा लेकिन खर्च की तुलना में बहुत कम। भाग दौड़ में असमर्थ रहने के कारण महत्त्वपूर्ण सौदा अथवा पैतृक कार्य में विलंब अथवा हानि होने की संभावना है। परिवार के सदस्य आपसे काफी आशाएं लगाए रहेंगे परन्तु परिस्थितिवश बोल नही पाएंगे स्वयं ही इनका निराकरण करने का प्रयास करें आगे परिणाम सकारत्मक मिलेंगे।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज आप जिस भी कार्य को करने का मन बनायेगे परिस्थिति स्वतः ही उसके अनुकूल बन जाएगी। लेकिन आशाजनक धन लाभ के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ेगा फिर भी आज की जगह कल ही होगा। मध्यान का समय थोड़ा उतार चढ़ाव वाला रहेगा आपके रूखे व्यवहार से किसी के मन को दुख पहुचेगा लेकिन स्थित को भांप इसमें तुरंत सुधार कर स्थिति नियंत्रण में कर लेंगे। आज आप मीठा बोलकर कठिन से कठिन कार्य भी सहज बना लेंगे। धन की कामना है तो उसी क्षेत्र में प्रयास जारी रखें थोड़े विलम्ब से लेकिन सफल अवश्य होंगे। घर का वातावरण आनंद प्रदान करेगा आवश्यकता पूर्ति पर निसंकोच खर्च करेंगे। आरोग्य बना रहेगा पुरानी बीमारी में सुधार आएगा।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज आपका लक्ष्य अधिक से अधिक सुख सुविधा जुटाने पर रहेगा आपकी मानसिकता भी कम समय मे ज्यादा मुनाफा पाने की रहेगी। इसके लिये अनैतिक मार्ग अपनाने से भी नही हिचकेंगे। आज आप जिस कार्य को लग्न से करेंगे उसकी अपेक्षा बेमन से किया कार्य अधिक शीघ्र एवं ज्यादा लाभदायक रहेगा। नौकरी करने वाले सतर्क रहें इल्जाम लग लगने अथवा मान भंग की संभावना है। व्यवसाय में मध्यान तक उदासीनता के बाद गति आएगी। घर मे सुख के साधन बढ़ाने का विचार मन मे चलता रहेगा लेकिन आज कुछ विघ्न के कारण कामना पूर्ति संधिग्ध रहेगी। दौड़ भाग के कारण अत्यधिक थकान अनुभव होगी फिर भी मनोरंज से नही चूकेंगे।

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